LongCut logo

印度学者认知封神!首次来华10天参访,让他理解绝望恐怖差距!拿中印对比是侮辱中国!

By 队长来了

Summary

## Key takeaways - **डनिंग-क्रूगर प्रभाव समझाए चीन गैप**: डनिंग-क्रूगर प्रभाव कहता है कि जितनी कम जानकारी होती है, उतनी कम समझ आती है कि जानकारी कम है। भारत में चीन के विकास को समझने में यही समस्या है, इसलिए भारत-चीन का हाइफन लगाकर तुलना करना गलत है क्योंकि गैप इतना बड़ा है कि तुलना ही नहीं हो सकती। [01:13], [02:46] - **चीन में अनुशासन की सख्ती**: चीनियों में समय की कद्र और अनुशासन हर जगह दिखता है - खाने का समय तो खाना टेबल पर होता है, मीटिंग 7 बजे तो अधिकारी 6:55 पर खड़े मिलते हैं। हमारे यहाँ न खाते में न समाज में यह अनुशासन दिखता है। [04:24], [04:56] - **उच्च अधिकारियों की विनम्रता**: प्रांतों के चीफ मिनिस्टर और प्लानिंग कमीशन हेड जैसे बड़े अधिकारी तीखे सवालों पर भी शांत रहकर डेटा के साथ जवाब देते हैं, भले ही आरएसएस विचारधारा वाले सवाल पूछें। भारत में ऐसे मुलाकात के लिए दो महीने लग जाते। [05:17], [06:00] - **नीचे से ऊपर योजना प्रक्रिया**: चीन में पंचवर्षीय योजनाएँ बॉटम-अप हैं - गाँव की गरीबी नीचे से ऊपर पहुँचती है, ऊपर निर्णय लेते हैं। सबसे गरीब गुझू प्रांत में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम देखकर होश उड़ गए। [07:04], [07:41] - **मुस्लिम समुदाय का एकीकरण**: हर जगह चीनी शैली की मस्जिदें दिखीं, होटलों में हलाल चिह्न थे भले मुस्लिम आबादी कम हो, बीजिंग स्ट्रीट फूड 90% मुस्लिम वेंडर्स का, फैक्टरियों में हलाल सर्टिफिकेशन लिया। प्रोपेगैंडा के उलट मुसलमान पूरी तरह एकीकृत हैं। [10:33], [12:28] - **अमेरिका का कॉन्फिडेंस संकट**: G20 में अमेरिका अनुपस्थित रहा, UNESCO से विड्रॉ किया जो चीन के लिए पॉकेट चेंज है। डिक्लाइनिंग पावर स्पेस सीड करती है, राइजिंग पावर भरती है - ब्रिटेन ने अमेरिका को ऐसा ही किया था। [15:08], [19:01]

Topics Covered

  • डनिंग-क्रूगर प्रभाव से चीन समझना कठिन
  • भारत-चीन तुलना बंद करो, गैप स्वीकारो
  • चीन की सफलता का राज: अनुशासन व विनम्रता
  • चीनी मुसलमान पूरी तरह एकीकृत
  • यूरोप का कठोर शक्ति पतन, सॉफ्ट भ्रम

Full Transcript

शाही साहब का वीवॉग भी चाइना से जो आया वो भी हमारे ऑडियंस ने बहुत पसंद किया। बहुत ज्यादा बहुत अच्छे कमेंट्स उसके ऊपर आए। तो शाही साहब हम गुफ्तगू वहीं से शुरू

करते हैं। आपका जो डेस्टिनेशन था और आपका जो ये सफर रहा चाइना का कि आपने चाइना को किस तरह पाया। आज हम देख रहे हैं

सारी दुनिया में चाइना की बात हो रही है और दुनिया में बात हो रही थी इस तरह से कि एक ग्लोबल प्लेयर के तौर पर और फिर उससे भी बढ़कर लोग जो आगे की बात देख रहे हैं

कि वो ऐसी पावर कि जो नए वर्ल्ड ऑर्डर को एक सेट करने में उसका काफी बुनियादी रोल रहेगा। बेशक उसके साथ दूसरे पावर्स भी

हैं। तो हम शुरू करते हैं कि आपने चाइना में क्या देखा? किस तरह के हालात देखे और आपको अ मौजूदा तस्वीर उसकी कैसी लगी और

आगे आपको क्या लगा कि चाइना किस तरफ बढ़ रहा है। जी अब साहब देखें प्रोग्राम से पहले मैं

एक एक फेनोमना जो है वो डिस्कस करना चाहता हूं ताकि दर्शक समझ सके कि हम अभी जो आगे बात करेंगे वो किस पेडस्टल पे बात है। दो

बहुत फेमस साइकोलॉजिस्ट गुजरे हैं। एक का नाम है मिस्टर डनिंग और एक का नाम है मिस्टर क्रूगर। इन दोनों ने मिलकर एक थ्योरी प्रोपाउंड की थी जिसको डनिंग क्रूगर इफेक्ट कहते हैं। हम चाहेंगे कि

हमारे दर्शक जो है इसको गूगल करें और इसके बारे में और पढ़े इसके बारे में। यह डनिंग क्रूगर इफेक्ट यह कहता है कि जिस

आदमी को जिस चीज के बारे में जितनी कम मालूमात होती है उसको यह समझने उसको यह समझने में और

दिक्कत होती है कि उसकी मालूमात कम है। कहने का मतलब है कि जब आप यानी आपकी परसेप्शन जितनी कम होती जाएगी उतनी ज्यादा

इस बात की परसेप्शन कम होती जाएगी कि आपको आपका परसेप्शन कम है। तो चाइना को लेके जो अह भारत में या

शाही साहब मुझे एक शेर याद आ गया वो इसी ये आपने जो बात कही इस नजरिए के बारे में ये जोश वलीबादी का शेर है के जब इल्म के

सारे खंगाल डाले कुलजुम कुलजुम यानी घड़ा तब जाके कहीं मारफत जिहालत पाई यानी हमने इल्म को खंगाल डाला तो पता चला कि हमको बहुत कुछ मालूम ही नहीं है। जी

सही बात है। सही बात है। तो ये चाइना के केस में भारत में तो दिखता ही है लेकिन दुनिया के और देशों में भी दिखता है क्योंकि वो डेवलपमेंट के उस मयार पर पहुंच

गया है कि हमारा दिमाग ये प्रोसेस करने के काबिल ही नहीं है कि हम प्रोसेस कर पाए कि वो डेवलपमेंट के किसार पे और शायद इसीलिए

हम भारत से में उसका कंपैरिजन करते हैं। अंग्रेजी में हम उसको बोलते हैं हफनेट करना। यानी दो चीजों के बीच में हफन लगा के उसको एक बराबरी का दर्जा देना। ये जो हम हफनेट करते हैं ना कि इंडिया चाइना

अराइवल अव्वल तो हमें इससे गुरेज करना क्योंकि जब तक हम ये समझ नहीं पाएंगे कि ये गैप इतना ज्यादा है कि इसके बीच में हफन नहीं लग

सकती है तब तक शायद हम अपनी बेहतरी के लिए काम सही तरीके से ना कर पाए कि भाई मुझे समझ तो आए मुझे पता तो हो कि एग्जाम का कट

ऑफ 90 है और मेरी औकात 70 की है तो मैं वो 20 के लिए काम कर अगर वो मुझे पता ही ना हो मुझे लगे लगे कि मैं कट ऑफ के बराबर हूं तो फिर तो मैं मेहनत नहीं करूंगा। तो

एक तो अवल तो ये चीज है। दूसरी जो मुझे चाइना में देखिए मेरी पहली यात्रा है। मैं जिंदगी भर मिडिल ईस्ट मैंने कवर किया है तो जाहिर है कि ये पूरब से मेरा कोई लेना देना नहीं था। भारत के पूरब के जो भी देश

है सारा उम्र जो है वो तो भारत के जो पश्चिम में देश है उसमें गुजर गया। लेकिन ये बड़ा अच्छा मौका था। 10 दिन का ट्रिप था और मैंने तमाम थिंक फैंस ऑफिशियल

मतलब बिल्कुल चोको ब्लॉक एक प्रोग्राम था तो बहुत एक एक्सपोजर मिला चाइना के शोंग प्रोविंस में हम गए जो कि उनके कल्चरल बेस

का समझ लीजिए फिर हम गुजू प्रोविंस गए जो चाइना का सबसे गरीब गुरबत वाला प्रदेश है प्रोविंस है और वहां जाके जो हमने देखा कि उनके हिसाब से क्या गुरबत है और हमारे

हिसाब से क्या गुरबत है मतलब उसमें इतना जमीन आसमान का फर्क है कि मतलब आदमी उसके बारे में क्या ही बयान करे सही तो ये एक्सपीरियंस जो मुझे दो चार चीजें

मैं ब्रॉडली यहां पर डिस्कस कर एक तो अटर डिसिप्लिन आई थिंक उनके सक्सेस की सबसे बड़ी रीजन उनकी डिसिप्लिन

टाइम का कदर करना अपने वक्त का कदर करना दूसरों के वक्त का कदर करना सीमलेस चीजों को करना डिसिप्लिन यानी हर चीज में डिसिप्लिन दिखेगी को इस टाइम पे खाने का

इंतजाम है तो इस टाइम पे खाना लगा होगा टेबल पे ये नहीं होगी कि भात अभी बनी नहीं है गरम हो रही है इस तरह का कोई मामला नहीं ऑफिशियल को अगर 7:00 बजे से कोई

प्रोग्राम है तो 6:55 पे ऑफिशियल वहां पर बाहर खड़े होंगे डिसिप्लिन बहुत बड़ी चीज है जो दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हम कह सकते हैं

कि हमारे ना तो ख्ते में दिखता है ना मुआशरे में मतलब दोनों में ही गायब है तो शायद इसको हम इसीलिए जो है वो नहीं दूसरा ह्यूमिलिटी

बड़ा से बड़ा ऑफिसर मतलब कुछ लोगों से हम जो मिले आप समझिए कि उन प्रोविंसेस के चीफ मिनिस्टर के दर्जे हालांकि चीफ मिनिस्टर जैसी कोई पोस्ट वहां नहीं होती लेकिन वो

दर्जा जो है वो आप उसको मानिए कि सेम था कुछ लोगों से हम मिले जो समझिए कि उनके चाइना के जो प्लानिंग कमीशन वगैरह है उसके जो हेड है अगर आप भारत में कोई बाहर से जर्नलिस्ट आए

और सोचे कि भारत के प्लानिंग कमीशन के हेड से मैं मुलाकात कर लूं तो दो महीने तक तो उसका का नंबर भी नहीं आएगा। सही है। तो वो जो ह्यूमिलिटी उनकी है कि वो चीजों

को सुनना, कोई चीज हम कह रहे हैं या कोई तीखे सवाल क्योंकि एक ग्रुप था ना इसमें तमाम आईडियोलॉजी के लोग थे। इसमें कुछ आरएसएस के आइडियोलॉजी के भी लोग हमारे साथ गए हुए थे और वो तीखे सवाल पूछ रहे थे। वो

उस तरह के सवाल पूछ रहे थे जो सवालों से आपको लगेगा कि वो वेस्टर्न मीडिया से मुतासिर होके ये सवाल पूछ रहे हैं या अपनी जो उनकी जो कमकली है उससे मुतासिर होके वो

सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन मैंने कहीं नहीं देखा कि कोई ऑफिसर कोई झुझुलाहट किसी तरह का कोई गुस्सा किसी तरह की वो वो जिस तरह से उसका जवाब दे रहे थे और जो डेटा सेट के

साथ कि मतलब अल्टीमेटली वो अपने यानी उनकी आइडियोलॉजिकल मूविंग से जो अगेंस्ट के भी लोग हैं वो उनको जो मैंने उससे फिर यानी

एक तरीके से अग्री करते हुए देखा तो मुझे लगा कि ये डिसिप्लिन ये ह्यूमिलिटी ये सारी जो एक जो इंसानी उसमें जो चीजें होनी

चाहिए ना वो उनमें है अवल दूसरा ये कि जो ये सेंट्रलाइज प्लानिंग हमारे यहां भी है कहने का मतलब फाइव ईयर प्लान का सिस्टम तो हमारे यहां भी है हिंदुस्तान

में लेकिन जिस तरीके से जिस मैटिकुलस तरीके से वो प्लान करते हैं क्योंकि उनके यहां हर चीज बॉटम अप है। वहां ये नहीं है कि ऊपर सरकार ने डिसीजन ले लिया और नीचे गुर्गों को बोल दिया कि अब तुम इसको

इम्लीमेंट करो। ठीक है?

मतलब कम्युनिस्ट पार्टी है तो जाहिर है कि उसमें कारकून का सिस्टम है तो कारकून उसको ले जाते हैं। लेकिन वहां क्या होता है कि वहां कंसल्टेशन नीचे से होते कि कारकून पहले बताते हैं कि देखिए इस

गांव में गुरबत है तो इसको हटाने के लिए ये चीज करना है। वो नीचे से फिल्टर होके ऊपर पहुंचता है और ऊपर फिर डिसीजन मेकिंग है। तो ये टॉप डाउन डिसीजन मेकिंग ना होके

जो ये बॉटम अप डिसीजन मेकिंग है आई थिंक वो जिस तरीके से यहां फंक्शन करती है मतलब मेरे होश पाख्ता हो गए वो देख के कि खासकर

जो जिसको अपना सबसे गरीब प्रोविंस बता रहे थे वहां पे जो मैंने उनका पॉवर्टी एलिवेशन प्रोग्राम देखा और उसके मैंने देखे कि कैसे उन्होंने उसको अचीव किया है तो मुझे

लगता है कि दो एक दो दिन तो मैं बिल्कुल डेज में था मुझे तो मतलब समझ ही नहीं आ रहा था इस को मैं प्रोसेस किस तरह से कर पहले प्रोसेस तो कर लू फिर आपसे बात कर कि

भाई वो क्या चीजें समझ में आई तो ये कुछ चीजें थी जो मुझे लगा कि उनकी सफलता का पर्याय है उसका कारण ये अपने आप में इनके कॉन्फिडेंस को दिखाता

है कि उन्होंने अपना जो गरीब से गरीब इलाका था वो आपको दिखाया यानी जो आप बाहर से गए थे खासतौर पे हिंदुस्तान से गए थे ये बहुत बड़ी बात है वरना बहुत से लोग ये

होता है कि बाहर से आए हुए लोगों को अपनी वो जो कमजोर पॉइंट्स है उसको छुपा देते हैं कि वो ना देखने पाए। तो ये कॉन्फिडेंस इससे जाहिर होता है। शाही साहब खुद चीन के

बारे में बात करने के लिए भी हमें बहुत वक्त की जरूरत है और एक लंबा प्रोग्राम करने की जरूरत है। शायद हम कभी करें भी इस पे। लेकिन हम आते हैं इस अगले फेज में कि

चाइना अपने अंदर जो कुछ कर रहा है और अपने चारों खाने उसने दुरुस्त करने के बाद ग्लोबली जिस तरह से परफॉर्म किया है और कर

रहा है उसका रिजल्ट हम ये आज देख रहे हैं कि खासतौर पर अमेरिका की तरफ से हमें यह नजर आ रहा है जैसे कि डिप्रेशन है यानी

डिप्रेस है और बेबस नजर आ रहा है और चाइना को कंटेन करने की लाख कोशिश कोशिश हो रही है अमेरिका की तरफ से और सिर्फ चाइना नहीं

बल्कि हमको एक चीज़ अभी G20 की जो समिट हुई है साउथ अफ्रीका में उसमें हमें ये नजर आया जैसे अमेरिका सारी दुनिया से चिढ़ा हुआ है। अब G20 की समिट में वो नहीं गया।

बहाना जो बताया तो बिल्कुल बकवास है। वो वहां वाइट कम्युनिटी के साथ ये हो रहा है। तो वो तो बकवास है। आप कैसे इसको

एनालाइज करेंगे कि हम ये देख रहे हैं कि जो सिस्टम है उसमें चाइना तो बहुत अच्छा कर रहा है जो दुनिया का सिस्टम है। डब्ल्यूटीओ में अमेरिका ने उसको शामिल किया। यूरोप ने शामिल किया और उसके बाद से

चाइना ने बहुत अच्छा परफॉर्म किया और अब आगे भी कर रहा है। मगर हम ये देख रहे हैं कि अब उसी सिस्टम से ये डरे हुए नजर आ रहे हैं खुद वेस्टर्न कंट्रीज और खासतौर पर

अमेरिका। आपका एनालिसिस क्या है? G20 को

हम अगर सामने रखते हैं तो क्या तस्वीर उभर के सामने आती है आलमी सतह की?

जी मैं एक छोटी सी चीज और ऐड करना चाहूंगा चाइना वाले में। फिर हम आपके सवाल पे आते हैं जो बहुत इंपॉर्टेंट है क्योंकि मुसलमान वहां कैसे रहते हैं इसको लेके

बड़ा बहुत किस्म का प्रोपेगेंडा जो है दुनिया भर में जी वो अमेरिका अलाइन मीडिया ने उसको फैलाया है

तो अवल तो कुछ चीजें मैं यहां पे बताऊ आपको कि जिधर जाइए आपको मस्जिद नजर अवल तो ठीक है

वो मस्जिद की शक्ल जो है वो चाइनीस यानी वो चाइनीज आर्किटेक्चर से मुतासिर है। लेकिन वो मस्जिद है। ठीक है ना? वो मसाजिद

आपको नजर आएंगे। कुछ लोगों के जेहन में ये है कि जब तक डोम और जब तक वो एस्पायर नहीं होता तब तक मस्जिद नहीं होती। अवल तो डोम और एस्पायर कोई मुसलमानों की चीज है नहीं। वो रोमन एंपायर से इस्लाम के अंदर आई है।

वो रोमन एंपायर से ईस्टर्न रोमन एंपायर में आई। ईस्टर्न रोमन एंपायर से टर्की के आर्किटेक्चर में आई और ईरान के आर्किटेक्चर में आई। तो वो लोगों के जेहन में ये हो गया कि जब तक एक गुंबद और

एक्सपायर ना हो तो मस्जिद नहीं। ऐसा कुछ भी नहीं है। दुनिया मस्जिद में कहीं नहीं लिखा गया है कि उसमें गुंबद और उसमें स्पायर की तो जरूरत है। हर जगह के आर्किटेक्चर से वो मुतासिर होकर बनती है।

तो वो आपको नजर आएगा। दूसरा कि आप फर्ज करें इस 10 दिन के अंदर हम कम से कम सात या आठ होटल जो थे जिसमें रुके हैं ऐसा कोई

होटल नहीं था और वो गजू प्रोग जिसमें मुझे नहीं लगता है कि सुनसारिया पांच फीसद भी मुसलमान खाने के का जो स्प्रेड होता था उसमें कौन सी चीज

हलाल है उस पर हलाल लिखी हुई है ये बड़ा आश्चर्य हुआ हमें कि ये उन प्रदेशों में भी है जहां मुसलमान आबादी नहीं है जहां हुई आबादी है या जहां हुई है बात है सजा ताजिक वो बीजिंग बीजिंग में

नजर दूसरे जगह पे भी था तो हमें बड़ा आश्चर्य हुआ इसको देख के कि भाई इतना आउट ऑफ वे जाके मैं इसको कुछ लोगों को लगेगा कि नॉर्मल है मैं मैं चैलेंज करता हूं कि

आज भारत में आप गैर मुस्लिम कोई भी फाइव स्टार होटल में आप हलाल सर्टिफिकेशन खाने के सामने रख के दिखा सही है

ये मेरा मेरा ओपन चैलेंज है लोगों में तो मुझे पहले तो वो दूसरा बीजिंग के का सबसे फेमस जो स्ट्रीट फूड का इलाका था वो

ऑलमोस्ट उसमें 90% वेंडरर्स जो है कम से कम वहां 500 वेंडर होंगे वो मुसलमान यानी सबसे बड़ा जो स्ट्रीट फूड का इलाका उनका

था वो मुसलमानों के हाथ में उसके बाद कई जगह पर हमने ये देखा कई फैक्ट्रीज हम गए खाने के फूड प्रोसेसिंग के खासकर ये जो प्रोव की बात कर गरीब है तो जाहिर है कि

एग्रीकल्चर के ऊपर बेस्ड है उसके जो इंडस्ट्री है वो एग्रो प्रोसेसिंग इंडस्ट्री है वहां हम गए तो सारे सारे फैक्ट्रीज में हलाल सर्टिफिकेशन उन्होंने

सीख की। वो उन्होंने वहां के हलाल यानी मुस्लिम एसोसिएशन से मांगा है कि देखिए आप आइए हमारे फैक्ट्री को विजिट कीजिए और हम जो ये चीज बना रहे हैं इसको देखिए कि ये आपके हलाल स्टैंडर्ड से है कि नहीं और अगर

है तो इसको प्लीज सर्टिफाई कीजिए और अगर नहीं है तो बताइए कि इसमें कौन सा प्रोसेस हम हटाए जिससे ये हलाल हो जाए। मतलब तो ये जो पूरा

प्रोपेगेंडा है उसके बिल्कुल उलट हमने ये चीजें देखी। अब देखिए तो आप वो बात कर रहे हैं ग्लोबल मैं इसी में एक पॉइंट जोड़ना चाहूंगा शाही

साहब हमारे साथ यहां चाइनीस प्रोग्राम के लोग हैं जो काम करते रहे पूरी तो कई चाइनीस और वो मुस्लिम हैं सारे तो वो आप जो बता रहे हैं एग्जैक्टली यही

चीज है वो पहले से ये कहते आ रहे हैं कि वहां जो मुस्लिम कम्युनिटी है पूरी तरह से इंटीग्रेटेड है सिस्टम में और उस तरह की कोई चीज नहीं ये इवन यहां से ईरानियंस जो

गए अभी हमारे कुछ कलीग्स जो है कोई जर्नलिस्ट जो गए चाइना और सफर करके आए तो उन्होंने जो वहां की तस्वीर बताई उसमें कहीं से यह नजर नहीं आया कि मुस्लिम को

हाशिए पे डाल दिया गया है या उनसे कोई इस तरह का बिहेवियर है। ये चीज आपने बताई उससे एक बार फिर से तस्दीक हो गई। मेरे ज़हन वो सारी बातें फिर से ताजा हो गई। जी

लेकिन जो ग्लोबल सिस्टम है उसमें बहुत सिंपल सा उसका एक अगर आप एक हिस्टोरिकल पर्सेक्टिव में देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि हर हमेशा ये बात हुई है। आज ये पहली

बार नहीं हो रही है। इससे पहले 100 साल पहले आप अगर ब्रिटेन के केस में भी देखेंगे तो होता यू है कि डिक्लाइनिंग पावर स्पेस को वेकेंट करता है। जिसमें

राइजिंग पावर फिल करती है। वो सीड करता है स्पेस को। तो ये कोई पहली बार नहीं हो रहा है। अगर आप 1945 के बाद वर्ल्ड वॉर टू के खत्म होने के बाद

अगर आप देखेंगे कि ब्रिटेन ने कैसे स्पेस सीड किया अमेरिका को सही। तो वो चीज आपको फिर वो चाइना में आपको आश्चर्य नजर नहीं आएगा कि ठीक ठीक है आपने यूनेस्को से विड्र कर लिया। यूनेस्को की

फंडिंग व्हाट एवर मान के चलिए कि 200 मिलियन डॉलर आप साला दे रहे हो। सही भाई चाइना के लिए पॉकेट चेंज है वो। चाइना के लिए 200 मिलियन डॉलर जो है वो

पॉकेट चेंज है। पॉकेट चेंज से भी कम तो होगा यू कि आपको लगेगा कि आप उस इंस्टट्यूशन को अंडरमाइन कर रहे हैं। उससे आप विड्र कर रहे हैं। लेकिन जो अपकमिंग

पावर है उस जगह को भर देगा और जब भर देगा तो वापस आप उस सिस्टम में आएंगे भी तो आपकी वो इज्जत नहीं रहेगी

क्योंकि सडनली अब आप पे डिपेंडेंसी उसकी जी20 में भी वही चीज हो रहा है। देखिए ट्रंप का वहां ना जाना यहूदी लॉबी को खुश

करने के लिए और साथ में जो वाइट लॉबी है उसको खुश करने के लिए। अवल तो ये कहना कि साउथ अफ्रीका में कोई कोई नस्ल कुशी हो

रही है ये वाइट्स की तो ये बेवकूफाना इससे बेवकूफाना कोई बात नहीं क्या हो रहा है मैं आपको अपने दर्शकों को बताता हूं इसमें कोई दो राय नहीं है कि

साउथ अफ्रीका में क्राइम रेट बहुत हाई आप प्रिटोरिया वगरा में होंगे या जोहनसबर्ग में होंगे तो शाम को 5:00 बजे आप घर में आते हैं दरवाजा बंद करके सेट हो जाते हैं बाहर कोई नहीं जाता बहुत कम लोग जाते हैं

क्योंकि क्राइम क्राइम क्यों है? क्योंकि

बहुत ज्यादा गैप है। इसमें कोई दो राय नहीं। हम सब नेल्सन मंडेला को बहुत इज्जत देते हैं और दुनिया इज्जत देनी भी चाहिए। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि दुनिया

की आंखों में ऊपर उठने के लिए नेल्सन मंडेला ने कुछ ऐसे काम किए जो उनके देश के लिए अच्छा नहीं था। रिस्ट्रीब्यूशन ऑफ लैंड उन्होंने नहीं होने दिया क्योंकि वो

वाइट वर्ल्ड के नजर में उठे रहना चाहते थे कि देखो इसने रिकसाइल लिखा। रिक्सिलिएशन बिना जस्टिस के नहीं हो सकता। सही है। ठीक है। भारत ने भी वही किया क्योंकि

वेस्ट के गुड बुक में रहना चाहते थे तो जो वेस्टर्न जो एलट्स है उनका लैंड रिस्ट्रीब्यूट नहीं किया। वाइट्स वहां के लैंड 70% लैंड को ओन करते हैं। बिना उसको

रिस्ट्रीब्यूट किए रिकॉन्सिलिएशन नहीं हो सकती। जस्टिस के बिना कैसे रिकॉन्सिलशन?

लेकिन उन्होंने ये चॉइस लिया। उस चॉइस से हुआ यू कि अमीर और गरीब में खाई बढ़ गई। पॉलिटिकल कंट्रोल तो ब्लैक्स के पास है लेकिन जो फाइनशियल सिस्टम है उस पर वाइट

का है। वाइट अमीर है। जिस भी सोसाइटी में इतना फासला बढ़ेगा वहां पर क्राइम होगा ही होगा। ये दुनिया का निजाम है। इसमें साउथ अफ्रीका हो, भारत हो, पाकिस्तान हो कोई

उससे उसको फर्क नहीं पड़ता। अब दूसरी चीज ये है कि अगर आप अब फर्ज करें कि मैं गरीब हूं और मैं लूटने की कोशिश करूंगा। मैं लूटूंगा। यही तो है ना। यही तो होता है

दुनिया भर में। गरीब आदमी आपको डाका तो किसके यहां डाका डालेगा आप?

सही है। अमीरों के पास मैं अगर डाका डाल तो उसके पास डालेगा ना जिसके पास पैसे हैं। पैसे किसके पास है?

वाइट्स के पास। तो आपको ये देखना होगा कि क्राइम जो हो रहे हैं वो किस बिना पे?

क्या वो नस्ली बिना पे हो रहे?

नस्ली बिना पे तो नहीं हो रहे ना। वो इसलिए हो रहे हैं कि वो अमीरों को लूट रहा है क्योंकि अमीरों में परसेंटेज वाइट्स का है तो उनको लूटने में रॉबरी में उनकी मौत हो रही है। लेकिन इसका मतलब नहीं है कि

ब्लैक अमीर पे अटैक नहीं हो रहा है। ब्लैक अमीर भी उसी तरह से मारे जा रहे हैं। ठीक है? तो ये एक एक सिचुएशन है जिसको जब तक

है? तो ये एक एक सिचुएशन है जिसको जब तक आप लैंड को रिस्ट्रीब्यूट ना करेंगे। अब लैंड डिस्ट्रीब्यूशन के डर से पहले से इन्होंने ये खेल शुरू कर दिया है कि श्वत

नस्ल कुशी जो है वो हो रही है। कुछ भी नहीं हो रहा। अमेरिका में पूरा का पूरा एक मतलब चाहे वो एलन मस्क हो या रिपब्लिकन पार्टी में इस

तरह के बहुत सारे वाइड्स हैं जो अफ्रीकन मूल के हैं और वो रेसिस्ट है वो अपरथाइड एरा में अपर ग के हक में काम उन्होंने ये पूरा लॉबी बनाया है जिससे ये

वाइट जेनोसाइड और फलाना ढिमकाना की बात हुई है इसमें कोई दूर दूर तक कोई सच्चाई नहीं है ये प्र करने की कोशिश होगी ठीक है

आपने जगह सीड की जी20 में का सिरमोर तो अमेरिका होता था उस जगह को चाइना चाइना धीरेधीरे पुल कर दे रशिया पुल कर देगा

चाइना पुल कर देगा आप उसको विड्र करते रहिए आपकी मर्जी है चाइना इज वेरी हैप्पी टू डिप्लिक तो वो चीज वहां पे देखने को

मिली कॉन्फिडेंस की कमी जो अमेरिका में है दूसरा ये कि ऐसे ऐसे प्रोजेक्ट्स को करना ऐसे ऐसे चीजों को इंप्लीमेंट करना आइडियाज

जो उनके खुद के पैर पे कुल्हाड़ी मार रहा है। पर जैसा मैंने कहा ये पहली बार नहीं हो रहा है। ये रिपीट हर 100 साल 150 साल पे एक जो जो ग्लोबल में पावर में किसी

किसी का उूज और जवाल होता है तो वहां पर वो आपको चीज जो है वो देखने को मिलेगी और यहां हमें वो जी शाह साहब जी20 में जो नजर आया वो हमें

ये नजर आया कि रशिया उसमें मौजूद रहा यूरोपियंस उसमें मौजूद रहे और अमेरिका गायब हो गया।

क्या एक ऐसा भी हम सिनेरियो सोच सकते हैं क्योंकि अमेरिका यूरोप से भी पीछा छुड़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि

बहुत नेटो के उसमें अगर देखा जाए पसमंजर में के सारा बर्डन जो है वो अमेरिका अमेरिका पे है। यूरोप जो है वो कुछ कर नहीं रहा है। क्या ऐसा सिनेरियो हम सोच

सकते हैं कि अमेरिका बिल्कुल ही साइड लाइन होता चला जा रहा है। यहां तक कि यूरोप भी उसको नजरअंदाज कर रहा है। इसलिए कि अमेरिका उसको नजरअंदाज कर रहा है। सर यूरोप की जो स्थिति है ना बहुत दयनीय

है। अ अगेन मैं हिस्ट्री में जाना चाहता हूं क्योंकि कोई इन सब के पीछे एक पैटर्न है। किसी भी सोसाइटी का जब डिक्लाइन होता है ना तो उसका हार्ड पावर पहले डिक्लाइन

करता है। सॉफ्ट पावर बहुत दिन तक करता है। वो बाद में डिक्लाइन करता है। वैसे ही जब पावर आपकी आती है तो हार्ड पावर पहले आती है। सॉफ्ट पावर लेट आती है। जो लेट आएगी वो लेट जाएगी। जो पहले आएगी

पहले यूर के साथ मसला ये हो गया है कि उसके हार्ड पावर का कंप्लीट जवाल हो गया जवाल हो चुका है कंप्लीट

लेकिन उसका सॉफ्ट पावर एक्सिस्ट करता है नाउ द प्रॉब्लम इस कि जिस पपुलेशन का जिस सोसाइटी का जवाल हो रहा होता है हार्ड पावर का लेकिन सॉफ्ट पावर बची रहती है तो

वो कंफ्यूज सोसाइटी होती है उसको लगता है कि उसकी पावर अभी भी बची है पर है नहीं यूरोप के साथ मसला ये है कि उसके के जो लीडरान है वो सारे के सारे होस्ट सेकंड

वर्ल्ड वॉर के आईडियोलॉजी में पले हुए लीडरान। अब उन लीडर्स को यह समझ ही नहीं आ रहा है कि उनके पैरों तले जमीन जो है वो खिसक गई।

तो वो एक्ट ऐसे करते हैं कि जैसे वो कल्चरल किंग हो। दुनिया का राजा हो। उनका कल्चरल इन्फ्लुएंस सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद खत्म हो चुका है। उनका कल्चरल

इन्फ्लुएंस अमेरिका के कल्चरल इन्फ्लुएंस के पीठ पे बैठ के प्रोजेक्शन की तरह काम करना है। उनको ये बात लेकिन पता नहीं है। उनको ये लगता है कि वो इंडिपेंडेंटली उनका कोई

कल्चरल बहुत बड़ा इमैक्ट है। देखिए हो सकता है ईरान में जो दर्शक हो उनको ये चीज ना समझ में आए क्योंकि ईरान दुनिया के कुछ वाहिद मुल्कों में है। जहां परिकुलर एक

यूरोपियन पावर का जैसे ईरान के केस में जर्मनी का सॉफ्ट पावर बहुत ज्यादा स्टंग है। कहीं और किसी भी यूरोपियन का उतना सॉफ्ट पावर स्ट्रांग नहीं है। अगर आप सॉफ्ट पावर का पूरा ग्लोबल मैप देखेंगे तो उसमें आपको

हर जगह अमेरिका नजर आएगा। बीच में एक ही आपको एक्सेप्शन नजर आएगी वो एक्सेप्शन जर्मनी की है जो ईरान में दिखती है। ईरानियन पपुलेशन में जर्मनी को ले बहुत

ज्यादा एक नजर आता है। कि उसको ले तो यूरोप अभी भी वो समझता है

कि वो कहीं ना कहीं एक अलग से अ यानी एक एक धुरी लेकिन वो धुरी है नहीं

तो यूरोप फिलहाल बिकॉज़ उनके लीडर आउट ऑफ बॉक्स नहीं सोच सकते तो शॉर्ट टर्म में आप उनको अलाइव होते हुए चाइना या रशिया के

साथ नहीं देखेंगे लेकिन इसके बाद की जो जनरेशन लीडरशिप की आएगी उसको समझ में आ जाएगा कि अगर उनको रेलेवेंट रहना है तो

जिस तरह प्रीवियस सेंचुरी में अमेरिका के पीठ पर खड़े होकर रेलेवेंट से इस सेंचुरी में चाइना के पीठ पर खड़े होकर उनको रेलेवेंट होना पड़ेगा। वरना उनका कोई

रेलेवेंस नहीं रह जाएगा। इसके पीछे जो मैंने कहा ना ये सब सारी चीजें पिटिकल थरी में जब आप देखेंगे तो नया नहीं ये अपने आप को बस रिपीट करता है। शाही साहब यूरोप की

दयनीय स्थिति के बारे में आपने बताया हमें एक याद आ गया जेफरी साक्स का एक

इंटरव्यू है या स्पीच है। वो उसमें कह रहे थे कि मैं इस वक्त दुनिया पर नजर दौड़ाता हूं तो मुझे अफ्रीका में एशिया में

इंडिया, चाइना और दूसरे मुल्कों में एक उत्साह नजर आता है। लेकिन यूरोप में देखता हूं जी। यूरोप में बिल्कुल मायूसी नजर आती है।

यूरोप में कहा जिधर आप देखिए तो एक मायूसी का माहौल नजर आता है और वो इसी से प्रिडिक्ट कर रहे थे कि फ्यूचर इसी लाइन पे जाने वाला है कि यूरोप और यूरोप के लिए

खास तौर पे ये भी बात कर रहे थे कि अमेरिका अगर वहां से हट रहा है और वो अमेरिका ने वहां पर अपनी प्रेजेंस कम की तो आप यह भी देखेंगे कि यूरोपियंस आपस में

ही एक दूसरे पे टूट पड़ेंगे। जॉन वमर भी इस तरह की बातें कर रहे थे एक इंटरव्यू में कि ये जो एक दूसरे पे टूट नहीं पा रहे हैं, हमले नहीं कर रहे हैं, वो इस वजह से कि वहां पे अमेरिका का प्रेजेंस अमेरिका

ने रोक रखा है। वरना इनकी हालत बहुत खराब होगी। और आपने जो दयनीय शब्द इस्तेमाल किया वो बड़ा मैं आखिरी सवाल शाही साहब हम

ट्रंप के मामले में ये देखते हैं कि ट्रंप एक अपनी अलग तरह की अप्रोच है और वो बहुत से लोगों को पसंद भी नहीं आती। जाहिर हैकि वो सामने वाले की तौहीन करते हैं।

लेकिन उनकी एक अपनी अलग एप्रोच है। बल्कि एक एनालिसिस यहां तक भी है कि रशिया के मामले में वो अलग अंदाज से वो कोशिश कर रहे हैं जो अमेरिका की पुरानी पॉलिसी रही है कि रशिया को चाइना से दूर किया जाए।

अपने करीब लाया जाए। उन्होंने अपने पहले टर्म में भी यह कोशिश की जिस पे अमेरिका के अंदर ही हंगामा हो गया डीप स्टेट की तरफ से और अलग इदारों की तरफ से कि नहीं इनका रशिया से कोई और पुतिन से अलग तरह का

कनेक्शन है। अब वो एक बार फिर वो एक कोशिश करते नजर आ रहे हैं। हम क्या ट्रंप का जो यह और अंदाज है अह और ट्रंपिज्म जो है

क्या इसको यह मान सकते हैं कि कोई बड़ी चेंज ला सकेगा या एक थोड़े दिन और कुछ साल ये झाग की तरह से रहेगा और निकल जाएगा डीप स्टेट अपनी तरह से कायम रहेगा जो कोर

इश्यूज है दुनिया के। देखिए अमेरिकन डीप स्टेट भी थोड़ा उसको झटके तो लगे। इसमें कोई दो राय नहीं है कि

डोनाल्ड ट्रंप का दोबारा जीत के आना तमाम मशक्कत के बाद भी वो जीत के आते हैं तो इससे उनको झटका तो लगता है लेकिन

इंस्टिट्यूशनल मेमोरी होती है वो इतना जल्दी हार मानने वाला तो है नहीं तो उसकी कोशिश ये है कि वो बार-बार कुछ ना कुछ झटके वो भी इस एडमिनिस्ट्रेशन को देता

रहता है लेकिन ओवरऑल इससे हो यू रहा है कि दोनों मिलके इंस्टट्यूशन को अंडरमाइंड कर रहे हैं जो दुनिया के लिए अच्छी बात है कि

इनकी आपस की रस्साकसी में जो इंस्टटश है वो अंडरमाइन हो रहे हैं। वो इंस्टटश जिसका उपयोग करके अमेरिका एक दुनिया पे वो काबिज

था इतने साल से लेकिन अमेरिकन राइट में भी एक बहुत बड़ा फ्रैक्चर आपको नजर आ रहा है। चाहे वो प्रो

इजराइल पॉलिसी को ले हो या और भी पॉलिसी को लेके आपको राइट विंग के भी फ्रैक्चर नजर आ रहे है। हमने पूरा का पूरा मारो टेलर ग्रीन का एपिसोड अभी देखा कि उनके

साथ क्या हुआ किस तरह उन्होंने विरोध किया और किस तरह उनको निकल जाना पड़ा। बाकी लोगों की हम बात कर ही रहे हैं। कैड जो भी हो उनकी बात कर रहे हैं। इनफ

बाज हकों में यह बात कही जा रही है कि ये जो आइंदा जो अभी जो राय शुमारी अगले साल होने वाली है 20 26 में जो मिड टर्म पोल

होने वाले उसमें कहा जा रहा है कि वो मागा वर्सेस नीगा होगा। रिपब्लिक आपको पता ही है हमारे इनके सिस्टम में क्या है कि पहले तो

इंटरनल पोल होंगे कि मेक अमेरिका ग्रेट अगेन क्राउड का मुकाबला मेक इजराइल ग्रेट अगेन रिपब्लिकन क्राउड से होगा

और जब ये बॉयल पे आएगा जब ये असली टकराव शुरू होगा तो इजराइल के इंटरेस्ट को फदर अंडर माइन होगा क्योंकि वो चीजें बाहर

निकल के आएगी वो चीजें डिस्कस होंगी जो आज तक डिस्कस नहीं उससे पैदा हुई रिपब्लिकन पार्टी

एक डिफरेंट रिपब्लिकन पार्टी जो शायद उतना बिहोल्डेन ना हो इजरली इंटरेस्ट को लेके जितनी आज की रिपब्लिकन पार्टी आपको नजर डेमोक्रेट पार्टी में तो

बिल्कुल गदर है इजराइल के खिलाफ मतलब जो बुड्ढे अभी बैठे हुए हैं सीनेट विनेट में वो तो अपनी सीट बचा ले बस क्योंकि वहां पर जो हाल है कि अगर उनके अगेंस्ट में किसी ने प्राइमरी में खड़ा कर दिया किसी को भी

आप कनस्तर को खड़ा कर दीजिए और बोलिए कि ये इसने एआईपीएसी से पैसे लिए हैं। इसने जो भी करंट सेनेटर है या कांग्रेसमैन है उसकी हार जो है वो निश्चित हो जाएगी।

सही मैं कल इंटरव्यू पढ़ रहा था जोहरान ममदानी के जो दो एडवाइजर है उसमें एक यहूदी है 26 साल का एक यहूदी लड़का है कुछ काट नाम है

उसका जो उसके दो एडवाइजर में से और जिसने ये पूरा का पूरा प्लानिंग किया है कैसे चुनाव जो हुए हैं उसमें मैं उसका अखबार के साथ इंटरव्यू पढ़ रहा था कल के दिन में और

मैंने उसकी पॉइंट्स पढ़े उसकी थिंकिंग पढ़ी तो मुझे समझ में आया कि ये 30 से नीचे के जो यहूदी अमेरिका के इनको अब प्रो इजराइल बनाना बड़ा मुश्किल काम है क्योंकि

ये अपनी पढ़ाई से वहां तक पहुंचे हैं। उस कन्फजन पर पहुंचे हैं जिसमें की वो इजराइल को एक धब्बा आज बिल्कुल पीटर बनना ने माफी मांगी है तलावी यूनिवर्सिटी में

उन्होंने एक लेक्चर दिया है जिसके लिए पीटर बनना जो आपको पता है बहुत बड़े जर्नलिस्ट अमेरिका के यहूदी जर्नलिस्ट उन्होंने माफी मांगी है। मैं ये तसवुर

नहीं कर सकता था कि आज से दो साल पहले कि अमेरिका का कोई यहूदी एकेडमशियन इजरली यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने गया हो और उस

पर इतना विरोध हुआ हो कि उसको पब्लिकली जो है माफीनामा देना पड़ा। ये चेंजेस जो हम देख रहे हैं ये मेरे ख्याल से बेहतरी के लिए है दुनिया के भी

और खुद अमेरिका के बेहतरी के लिए है कि वो अपने रिसोर्सेज जो है वो अपनी बर्तरी के लिए उसको यूज करे ना कि इजराइल को सस्टेन करने के लिए। तो मुझे लगता है कि ये जो

अंडरमाइनिंग हो रही है वहां के डीप स्टेट और जो राइट विंग है दोनों की ये आपस में लड़ के दुनिया को फायदा पहुंचा रहे हैं। व्हिच इज़ गोइंग टू बी अ वेरी गुड।

शाही साहब बहुत-बहुत शुक्रिया आपका।

Loading...

Loading video analysis...