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दुनिया के 7 सबसे रहस्यमय चीज़ें | Top 7 Mysterious Things in the World

By Unsolved India

Summary

Topics Covered

  • वो कोड जिसे AI भी नहीं तोड़ पाया
  • Nazca Lines: वो कला जो ज़मीन से कभी दिखी नहीं
  • पिरामिड में मिला एयरप्लेन जितना छुपा कक्ष
  • बरमूडा: रेस्क्यू प्लेन भी गायब हो गया
  • Antikythera: 2000 साल पुराना 37 गियर्स वाला कंप्यूटर

Full Transcript

दुनिया के कुछ राज ऐसे हैं जो समय के साथ पुराने तो होते गए लेकिन उनका जवाब आज तक नहीं मिला। कभी एक ऐसी किताब जो एक अजीबोगरीब भाषा में लिखी गई जो आज तक किसी

को समझ नहीं आई और समंदर में एक ऐसा कंप्यूटर मिला जो हजारों साल पुराना हो और कभी ऐसे पत्थर जो इंसान की समझ से परे हैं? तो सवाल यह है क्या यह सब सिर्फ

हैं? तो सवाल यह है क्या यह सब सिर्फ इतिहास की गलतियां हैं या फिर एक ऐसा सच जिसे इंसान समझने के लिए तैयार ही नहीं। आज हम चलेंगे एक ऐसे सफर पर जहां हम

दुनिया के सबसे रहस्यमय राजों को एक्सप्लोर करेंगे। ऐसी चीजें जिनका जवाब आज तक किसी के पास नहीं। दोस्तों अगर आपने अभी तक हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब नहीं

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हैं पहले रहस्यमय राज से जो है वनच मैनुस्क्रिप्ट। एक ऐसी किताब जिसमें दुनिया के नियम ही उल्टे लगते हैं। सोचो तुम्हें एक किताब मिलती है जो एक अननोन

लैंग्वेज में लिखी हो जिसमें अजीबोगरीब पौधों की तस्वीरें बनाई गई हो और जिसका मतलब समझने की कोशिश में दुनिया के जानेमाने साइंटिस्ट भी फेल हो गए हो। यही

है वनेच मैनुस्क्रिप्ट। दुनिया की सबसे रहस्यमय किताब। 1912 में एक रेयर बुक्स डीलर विलफ्रेड वनेच को यह किताब इटली के एक पुराने मोनेस्ट्री से मिली थी। इस

किताब के अंदर 240 से ज्यादा पेज हैं। पर आज भी कुछ पेज मिसिंग हैं। रेडियो कार्बन डेटिंग के बाद साइंटिस्ट ने कंफर्म किया

कि यह किताब साल 1400 से 1440 के बीच लिखी गई थी। यानी लगभग 600 साल पुरानी है। पर असली रहस्य शुरू होता है इसके कंटेंट से।

आखिर किताब के अंदर क्या है? आइए जानते

हैं। हर पेज पर एक अननोन स्क्रिप्ट लिखा हुआ है। यह लैंग्वेज दुनिया के किसी भी कल्चर, किसी भी सिविलाइजेशन से मैच नहीं करती। इसमें ऐसे सिंबल्स और अल्फाबेट्स

हैं जो इंसान ने कभी पहले नहीं देखे। और तस्वीरें कुछ अजीब और अनोखे पौधों की बनाई गई हैं जो रियलिटी में कहीं मौजूद ही नहीं। कुछ पेजेस पर एस्ट्रोलॉजिकल

डायग्राम्स हैं। ऐसे स्टार्स और गैलेक्सीस जो मिडिवल यूरोप के लोग जानते ही नहीं थे। सबसे हैरान करने वाली बात कुछ इलस्ट्रेशनंस में नेकेड वुमेन स्ट्रेंज

ग्रीन लिक्विड में स्नान करती हुई दिखाई गई हैं। जिनके आसपास ट्यूब और पाइप्स जैसी चीजें बनी है। जैसे किसी अननोन टेक्नोलॉजी का स्केच हो। कुछ लोग मानते हैं कि यह

किताब एक एलियन सिविलाइजेशन का मैसेज है जो हम समझ नहीं पा रहे। और कुछ लोग मानते हैं शायद यह एक ऐसी एंशिएंट सभ्यता का रिकॉर्ड है जो खत्म हो गई। और उसकी

लैंग्वेज हमारे लिए हमेशा के लिए खो गई। कुछ हिस्टोरियंस कहते हैं कि शायद यह एक मेडिवल मेडिकल गाइड है जो वुमस हेल्थ और हर्बल मेडिसिन पर लिखी गई थी। पर अगर ऐसा

होता तो लैंग्वेज डिकोड हो जाती। कुछ एक्सपर्ट्स बोलते हैं कि शायद यह एक फेक मैनुस्क्रिप्ट है जो मिडीवल जमाने में पैसा बनाने के लिए लिखी गई। पर सवाल उठता

है एक फेक किताब में इतना कॉम्प्लेक्स लैंग्वेज और सिस्टमैटिक सिंबल्स क्यों लिखे जाते? 100 साल से ज्यादा हो गए। पर

लिखे जाते? 100 साल से ज्यादा हो गए। पर इस किताब का कोड अब तक ब्रेक नहीं हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मॉडर्न क्रिप्टोग्राफी के बावजूद वनेच

मैनुस्क्रिप्ट एक अनसॉल्वड पजल है। और सबसे बड़ी बात हर पेज देखने पर लगता है जैसे इसमें कोई हिडन नॉलेज है जो इंसान से छुपाया गया हो। जैसे यह किताब किसी और

दुनिया की साइंस हो। नंबर टू नास्का लाइंस। सोचो एक ऐसा रेगिस्तान जहां मिट्टी और पत्थर के बीच जमीन पर खींचे गए लकीरों

से इतने बड़े-बड़े डिज़ बने हैं कि उन्हें सिर्फ आसमान से ही देखा जा सकता है। यह हैं नास्का लाइंस जो पेरू के नास्का डेजर्ट में पाए गए हैं। जमीन पर चलने वाले

इंसान को यह लाइंस बस रैंडम और अजीब सी खुदाई लगती हैं। लेकिन जब 1930 के आसपास पहली बार एयरप्लेेंस ने नास्का के रेगिस्तान के ऊपर से उड़ान भरी तो

उन्होंने एक हैरतंगेज खुलासा किया। वहां पूरे डेजर्ट में 300 से ज्यादा ज्योमेट्रिकल शेप्स, एनिमल्स और मिस्टीरियस फिगर्स बने हुए थे। सोचो किसी

ने एक इंसान की शक्ल, एक मंकी, एक जॉइंट हमिंग बर्ड और एक स्पाइडर रेगिस्तान की जमीन पर खींच दिए। और वो भी इतने बड़े स्केल पर कि उन्हें सिर्फ आसमान से ही

समझा जा सकता है। यह लाइंस नास्का सिविलाइजेशन 200 बीसीई से 600 सीई के लोगों ने बनाई थी। रेगिस्तान की अपर लेयर

एक तरह की रेडिश ब्राउन मिट्टी से भरी है। अगर इस लेयर को हटा दिया जाए तो नीचे से एक हल्का ग्रे वाइट सरफेस निकलता है। नास्का के लोगों ने इसी सरफेस को एक्सपोज

करके लाइंस बनाई। लेकिन सवाल यह है इतने बड़े और परफेक्ट डिज़ उन्होंने बनाए कैसे?

उस टाइम कोई ड्रोन नहीं था। कोई एयरप्लेन नहीं था। जमीन पर खड़े होकर इंसान को कभी समझ ही नहीं आता कि पूरा डिजाइन क्या बन रहा है। कई स्कॉलर्स कहते हैं कि नास्का

लाइंस एक तरह का एस्ट्रोनॉमिकल कैलेंडर थी। यह फिगर्स, स्टार्स, कॉनस्टेलेशंस और सोलस्टेस के टाइम अलाइन होते हैं। मतलब शायद उनका रिलेशन आसमान के तारे और प्लेरी

साइकिल्स से था। एक थ्योरी के मुताबिक यह लाइंस एक तरह की सेरेमोनियल पाथवेज थी। मतलब लोग इन पर चलकर रिचुअल्स करते थे। शायद पानी के लिए प्रेयर्स क्योंकि नासका

एक बहुत सूखा एरिया है। सबसे पॉपुलर और थ्रिल वाली थ्योरी यह है कि यह लाइंस किसी एलियन सिविलाइजेशन के लिए बनाई गई थी। एक तरह के लैंडिंग मार्क्स जिससे वो आसमान से

आइडेंटिफाई कर सकें। क्योंकि उस तरह की स्केल और परफेक्शन बनाना इंसान के लिए उस टाइम ऑलमोस्ट इंपॉसिबल लगता था। कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह एक तरह का

अंडरग्राउंड वाटर मैप था। नास्का के लोग शायद दिखाना चाहते थे कि कौन से एरियाज के नीचे पानी अवेलेबल है। नास्का लाइंस आज भी वैसे ही सेफ हैं जैसे 2000 साल पहले बनाए

गए थे। रेगिस्तान का ड्राई क्लाइमेट और विंड्स की कमी की वजह से यह लकीरें कभी मिटती नहीं। यूनेस्को ने इन्हें वर्ल्ड हेरिटेज साइट डिक्लेअ किया। लेकिन

मिस्ट्री अब तक वही की वही है। क्या यह डिवाइन प्रेयर्स थी? एक कैलेंडर था या फिर एलियंस के लिए मैसेज। सोचो एक पूरा सिविलाइजेशन ऐसे डिज़ बनाता है जो खुद जमीन

से कभी देख ही नहीं सकता। मतलब उन्होंने यह किसके लिए बनाया था? नंबर थ्री

पिरामिड्स ऑफ गीजा। सोचो एक ऐसा स्थान जो हजारों सालों से दुनिया के सबसे बड़े राजा अपने अंदर छुपाए बैठा है। गीजा के

पिरामिड्स। यह पिरामिड्स सिर्फ एक मकबरा या आर्किटेक्चर का कमाल नहीं है बल्कि एक एनसॉल्वड मिस्ट्री का समुद्र है। सबसे ज्यादा डिस्कशन होती है ग्रेट पिरामिड ऑफ

खोफू के अंदर छुपे हुए सीक्रेट चेंबर्स के बारे में। जब इस पिरामिड का कंस्ट्रक्शन हुआ था लगभग 4500 साल पहले। तब उसे इतनी एक्यूरेसी के साथ बनाया गया था कि आज के

मॉडर्न इंजीनियर्स भी हैरान हो जाते हैं। 2017 में एक साइंटिफिक प्रोजेक्ट स्कैन पिरामिड्स मिशन ने एक ऐसा डिस्कवरी किया जिसमें मयन रेडियोग्राफी टेक्निक का यूज

हुआ। यह एक तरह की कॉस्मिक रे इमेजिंग है जो वॉल्स के अंदर छुपे स्पेसेस को डिटेक्ट करती है। और तब साइंटिस्ट्स ने कंफर्म किया कि खुफू के पिरामिड के अंदर एक बड़ा

हिडन वॉइड एक्सिस्ट करता है। लगभग एक कमर्शियल एयरप्लेन जितना लंबा। अब सवाल उठता है यह चेंबर किस काम का था? कुछ लोग

कहते हैं कि यह एक कंस्ट्रक्शन कॉरिडोर था जो पिरामिड बनाते वक्त इस्तेमाल हुआ और बाद में सील कर दिया गया। दूसरे रिसर्चरर्स मानते हैं कि यह एक रॉयल बरियल चेंबर हो सकता है जिसमें अभी तक किसी को

घुसने का मौका नहीं मिला। और कुछ थ्योरिस्ट्स का मानना है कि यह चेंबर एंशिएंट टेक्नोलॉजी या फराऊ के खजाने का सीक्रेट वॉल्ट हो सकता है। और मिस्ट्री और

गहरी तब हो जाती है जब यह पता चलता है कि पिरामिड के अंदर आज तक ऐसे नैरो शाफ्ट्स और कॉरिडोर्स भी हैं जिनका पर्पज किसी को समझ नहीं आया। जैसे एक शाफ्ट डायरेक्टली

स्टार्स की एलाइनमेंट में बना हुआ है। जो इस बात की तरफ इशारा करता है कि इजिप्शंस का एस्ट्रोनॉमी और आफ्टर लाइफ के साथ गहरा कनेक्शन था। पिरामिड्स के अंदर के चेंबर्स

का राजक अभी तक पूरी तरह सॉल्व नहीं हुआ। आज भी वहां एक्सपेरिमेंट्स और स्कैनिंग चल रही है। लेकिन अंदर फिजिकली एंटर करने की परमिशन नहीं दी जाती क्योंकि वो स्ट्रक्चर

डिस्टर्ब हो सकता है। सोचो अगर एक दिन ये चेंबर्स ओपन हो गए तो क्या हमें एक खजाना मिलेगा या फिर ऐसी नॉलेज जो इंसान की हिस्ट्री को हमेशा के लिए बदल दे।

पिरामिड्स के अंदर छुपा यह सीक्रेट चेंबर अभी भी दुनिया का एक ऐसा राज है जो हर जनरेशन को चैलेंज करता है। नंबर फोर ईस्टर

आइलैंड मोई स्टैच्यूस। पेसिफिक ओशन के बीच एक छोटा सा आइलैंड है ईस्टर आइलैंड। और यहीं खड़े हैं वो अजीब और बड़े-बड़े मोई

स्टैच्यूस। जिन्हें देखकर हर इंसान हैरान रह जाता है। वहां जमीन पर 13 फीट से लेकर 30 फीट तक के पत्थर के इंसान जैसे चेहरे

खड़े हैं। कुछ का वेट 80 टन तक है और यह सब स्टोन टूल्स से बनाए गए थे। मतलब ना कोई मशीन ना आयरन सिर्फ प्रिमिटिव टूल्स।

सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इतने बड़े पत्थर काटकर उन्हें माउंटेन के क्वेरी से लेकर किलोमीटरों दूर तक कैसे ले जाए गए?

वहां के लोकल्स कहते हैं कि स्टैचूस चलकर अपने आप जगह तक गए। यह बात सुनने में अजीब लगती है। लेकिन इसी वजह से मोवाई स्टैचूस

और भी ज्यादा मिस्टीरियस हो जाते हैं। कुछ आर्कियोलॉजिस्ट्स कहते हैं कि शायद वो लोग रोप्स और वुडन लॉक से खींच कर लाए होंगे। लेकिन प्रैक्टिकल एक्सपेरिमेंट्स करने के

बाद भी आज के मॉडर्न लोग इन्हें मूव करने में स्ट्रगल करते हैं। फिर एंशिएंट आइलैंडर्स ने यह कैसे किया होगा? दूसरा

बड़ा सवाल है यह स्टैचूस बने क्यों? कुछ

लोग कहते हैं कि यह एनसेेस्टर्स की स्पिरिचुअल गार्डियंस हैं जो आइलैंड की रक्षा करते हैं। दूसरे कहते हैं कि यह पावर और अथॉरिटी दिखाने का एक तरीका था।

और कुछ थ्योरीज यह भी कहती हैं कि शायद यह एक लॉस्ट सिविलाइजेशन का हिस्सा थे जो एडवांस थी और अपने साथ अपना नॉलेज लेकर गई। और भी डरावनी बात यह है कि रिसर्चरर्स

कहते हैं इन स्टैचूस के नीचे पूरे बॉडीज भी हैं। सिर्फ हेड्स नहीं। जमीन के अंदर दबे हुए बड़े टॉर्सो पार्ट्स भी मिलते हैं जो बताते हैं कि स्टैचूस असल

में इंसान के पूरे शरीर का रिप्रेजेंटेशन थे। मतलब सेंट्रीज तक लोग समझते रहे कि यह सिर्फ बड़े हेड्स हैं। लेकिन सच और भी

गहरा निकला। रात के वक्त जब हवा तेज चलती है और समुंदर की लहरों की आवाज आती है। मोई स्टैचूस एकदम जिंदा जैसे लगते हैं

जैसे वो अपनी आंखों से तुम्हें घूर रहे हो। नंबर फाइव बरमूडा ट्रायंगल। अटलांटिक ओशन के एक हिस्सों में एक ऐसा ट्रायंगुलर

एरिया है जिसे बरमूडा ट्रायंगल या डेविल्स ट्रायंगल कहा जाता है। इसके थ्री पॉइंट्स हैं। फ्लोरिडा, बरमूडा और पटोरिको। और इन

तीनों पॉइंट्स को मिला दो, तो बनता है एक विशाल समुद्री त्रिकोण, जिसमें कई जहाजों और हवाई जहाजों ने बिना किसी निशान के

गायब होकर दुनिया को हमेशा हैरान कर दिया। सबसे ज्यादा मशहूर केस 1945 में हुआ था। फ्लाइट 98 पांच अमेरिकन नेवी बॉम्बर्स

ट्रेनिंग मिशन के लिए निकले थे। कम्युनिकेशन में उन्होंने बोला कि कंपास काम नहीं कर रहा। डायरेक्शन क्लियर नहीं हो रही। फिर कुछ घंटों बाद उनका कांटेक्ट

डिस्कनेक्ट हो गया और उन सबके प्लेेंस बिना किसी ट्रेस के वैनिश हो गए और सबसे हैरानी की बात उन्हें ढूंढने जो रेस्क्यू टीम गई थी वो प्लेन भी वहीं गायब हो गए।

सिर्फ प्लेेंस ही नहीं बल्कि अनेक शिप्स भी यहां से वैनिश हो चुके हैं। यूएसएस साइक्लोप्स एक बहुत बड़ा नेवी शिप जिसमें 300 से ज्यादा लोग थे बिना किसी एएसओएस

सिग्नल के बरमूडा ट्रायंगल में खो गया। ना तो कोई शिप्रेक मिला ना कोई डेड बॉडी। बस एक पूरा का पूरा शिप हवा में गायब हो गया। कुछ साइंटिस्ट्स कहते हैं कि यहां के

मैग्नेटिक फील्ड्स, कंपास और नेविगेशन इंस्ट्रूमेंट्स को डिस्टर्ब कर देते हैं। मीथेन गैस हाइड्रेट्स। ओशन फ्लोर के नीचे से मीथेन गैस निकलती है जो पानी का

डेंसिटी चेंज कर देती है और शिप्स आसानी से डूब जाते हैं। कुछ थ्योरिस्ट्स मानते हैं कि यह एरिया एक एलियन बेस है जहां से वे इंसानों को अपने एक्सपेरिमेंट्स के लिए

ले जाते हैं। एक और थ्योरी यह कहती है कि बरमूडा ट्रायंगल एक प्राचीन लॉस्ट सिटी अटलांटिस की एडवांस टेक्नोलॉजी के ऊपर है जो अभी भी एक्टिव है। हजारों

इन्वेस्टिगेशंस के बाद भी बरमूडा ट्रायंगल का असली राज अभी तक खुला नहीं। कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह सब बस नेचुरल एक्सप्लेनेशंस हैं। लेकिन सच यह है जितने

भी केस यहां रिपोर्ट हुए हैं उनका पूरा-पूरा जवाब किसी के पास नहीं है। नंबर सिक्स, श्राउड ऑफ ट्यूरिन। दोस्तों, अब

चलते हैं एक ऐसे राज की तरफ जो धर्म, साइंस और हिस्ट्री तीनों को हमेशा से कंफ्यूज करता आया है। यह राज है श्राउड ऑफ ट्यूरिन। एक पुराना कपड़ा जो दुनिया भर

में सबसे ज्यादा डिबेट और रिसर्च का सब्जेक्ट बना हुआ है। सोचो एक ऐसा कपड़ा जो इतना पुराना है कि उस पर एक आदमी की पूरी बॉडी का फेंट सा इमेज दिखाई देता है।

यह कपड़ा इटली के ट्यूरिन शहर में रखा गया है और इसी वजह से इसे श्राउड ऑफ ट्यूरिन कहा जाता है। बहुत से लोग मानते हैं कि यह

वही कपड़ा है जिसमें जीसस क्राइस्ट को उनकी डेथ के बाद लपेटा गया था। इस राउट पर एक लंबे दाढ़ी वाले आदमी की पूरी बॉडी की

आउटलाइन नजर आती है। जैसे किसी ने फोटो खींचकर कपड़े पर छाप दी हो। उस इमेज में आदमी के चेहरे, हाथ, पैर और पीठ तक के

निशान दिखते हैं। और सबसे हैरत की बात यह है कि उस आदमी के शरीर पर वही वंड्स हैं जो बाइबल में जीसस के क्रूसिफिकेशन के वक्त बताए गए हैं। हाथों और पैरों पर

कीलों के छेद, पीठ पर मार के निशान और सिर पर कांटों का ताज। साइंस ने इसको समझने की बहुत कोशिश की है। 1988 में कुछ

साइंटिस्ट्स ने कार्बन डेटिंग टेस्ट किया और बोला कि श्राउड सिर्फ 700 साल पुराना है। मतलब जीसस के टाइम का नहीं हो सकता। लेकिन बाद में और रिसर्चरर्स ने कहा कि

श्राउड पर पोल्यूशन, एग और रिपेयर्स की वजह से कार्बन डेटिंग सही रिजल्ट नहीं दे पाई। कुछ एक्सपर्ट्स तो कहते हैं कि कपड़े की फाइबर में एक ऐसी लाइट रेडिएशन हुई थी

जो नॉर्मल दुनिया में पॉसिबल ही नहीं जैसे एक सुपर नेचुरल फ्लैश ने इमेज को कपड़े पर प्रिंट कर दिया हो। आज तक कोई कंफर्म नहीं कर पाया कि श्राउड ऑफ ट्यूरिन असली है या

एक मिडीवल जमाने का बनाया गया फेक रेलिक। लेकिन जब भी इसे देखा जाता है, लोग एक अजीब सी स्पिरिचुअलिटी और मिस्ट्री महसूस करते हैं। यह एक ऐसी चीज है जो साइंस और

फेथ के बीच की एक बड़ी पजल बनी हुई है। दोस्तों, जरा सोचिए क्या यह सच में जीसस का श्राउड है जो उनके रेक्शन का सबूत देता है या फिर सिर्फ एक केयरफुली क्राफ्टेड

इल्ल्यूजन है जो ह्यूमन हिस्ट्री का सबसे बड़ा रिलीजियस मिस्ट्री बन गया। नंबर सेवन एंटीकेथरा मैकेनिज्म। एकदम समुद्र के गहरे

पानियों में एक जहाज का कला टूटा पड़ा है। वहां से एक ऐसा पुराना जंग लगा हुआ लोहे का टुकड़ा निकला जो पहले तो एक खराब धातु

का टुकड़ा लगता था। लेकिन जब साइंटिस्ट ने उसे ध्यान से देखा तो उनकी सांसे रुक गई। यह कोई आम धातु का टुकड़ा नहीं था। यह था

एंटीकेथेरा मैकेनिज्म। एक ऐसा यंत्र जो अपने समय से हजारों साल आगे था। 1901 में ग्रीक डवर्स एक शिपरेक एक्सप्लोर कर रहे

थे जो एंटीिकथेरा आइलैंड के पास डूब चुका था। वहां उन्हें गोल्ड, स्टैचूस और ऑर्नामेंट्स मिले। लेकिन सबसे बड़ी डिस्कवरी थी एक रस्टेड गियर मशीन। पहले

आर्कियोलॉजिस्ट्स को लगा यह बस एक टूटा हुआ एस्ट्रोलॉजिकल इंस्ट्रूमेंट है। लेकिन जैसे-जैसे रिसर्च हुई पता चला कि यह तो एक इनक्रेडिबल मशीन है जो 2000 साल पुरानी

है। इसमें छोटे-छोटे गिय्स व्हील्स और डायल्स लगे हुए थे। बिल्कुल एक मॉडर्न क्लॉक की तरह। रिसर्च के बाद पता चला कि यह मैकेनिज्म सूरज, चांद और ग्रहों की गति

कैलकुलेट कर सकता था। ग्रहण प्रेडिक्ट कर सकता था। यहां तक कि ओलंपिक गेम्स की डेट्स भी बताता था। सोचो 2000 साल पहले एक

मशीन जो आज के कंप्यूटर जैसा काम करती थी कैसे बनाया होगा? यह सबसे बड़ी मिस्ट्री है। उस दौर बीसीई में ऐसी टेक्नोलॉजी होने

का कोई रिकॉर्ड नहीं है। मेटल गिय्स का इतना एडवांस डिजाइन बनाने के लिए प्रीसाइज टूल्स चाहिए होते हैं जो तब के लोगों के पास थे ही नहीं। कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं

कि शायद लॉस्ट एंशिएंट सिविलाइजेशन या किसी अननोन जीनियस ने यह बनाया होगा। एक्सरे इमेजिंग और 3D स्कैन्स के बाद साइंटिस्ट्स ने कंफर्म किया है कि

मैकेनिज्म में 37 गिय्स थे। यह एक तरह का एनालॉग कंप्यूटर था जो स्पेस और टाइम को कैलकुलेट करता था। लेकिन एक सवाल अभी भी जिंदा है। अगर 2000 साल पहले यह

टेक्नोलॉजी एकिस्ट करती थी। तो बाकी दुनिया को उसके बारे में कुछ पता क्यों नहीं चला? और फिर वो नॉलेज अचानक गायब

नहीं चला? और फिर वो नॉलेज अचानक गायब कैसे हो गई? कुछ लोग मानते हैं कि एंटीकेथरा मैकेनिज्म प्रूफ है कि एंशिएंट एलियंस ने ह्यूमंस को टेक्नोलॉजी दी थी।

दूसरे कहते हैं कि यह अटलांटिस जैसी खोई हुई सिविलाइजेशन की एक छोड़ी हुई निशानी है। जो भी सच हो। एक बात तय है एंटीकेथरा

मैकेनिज्म हमेशा एक ऐसी पहेली बनी रहेगी जो हमें बताती है कि हमारी हिस्ट्री उतनी सिंपल नहीं है जितनी हमें सिखाई गई है।

दोस्तों मिलते हैं अगली वीडियो में एक और रहस्यमय राज के साथ। आपने अभी तक हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो जरूर सब्सक्राइब कर लें।

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