A Dangerously Obsessed Lover No One Wants | Piyush Dhanotia Case | MP | Wronged
By Wronged
Summary
Topics Covered
- प्यार जल्दी जुनून बन जाता है
- पोजेसिवनेस कंट्रोल बन जाती है
- नो सुनना हत्यारों को अस्वीकार लगता है
- चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें
Full Transcript
अंकल गली द्वारकापुरी इंदौर 10 फरवरी 2025 की दोपहर 3:25 पर रिकॉर्ड हुई इस सीसीटीवी फुटेज में पीयूष और खुशबू साथ में जाते हुए नजर आते हैं। खुशबू के हाथ में जहां
सफेद रंग का पॉली बैग है। वहीं दोनों हाथों में मोबाइल फोन पकड़े पीयूष उसे चलाने में बिजी है। लेकिन बेहद नॉर्मल सी दिख रही यह फुटेज कहानी के उस मोड़ की तरफ
रुख कर रही थी। जहां अंजाम बेहद खौफनाक होने वाला था। उसी रात 11:00 बजे खुशबू की छोटी बहन के फोन पर खुशबू का मैसेज आता है कि पापा से कहना वो घर लौटेगी पर अभी
नहीं। यह बात जब उसके फादर को पता चलती है तो वह घबरा जाते हैं और यह डर लाजमी भी था क्योंकि दिन में तो वह उन्हीं के साथ आधार कार्ड ठीक कराने के लिए घर से निकली थी और
उन्होंने ही खुशबू को कलेक्टेट के पास छोड़ा था। अब अचानक से इस तरह का मैसेज पढ़ वो उसे कॉल करने लगे। लेकिन खुशबू का फोन स्विच्ड ऑफ आ रहा था। परिवार वालों ने
उसकी सहेलियों, रिलेटिव्स और सभी जान पहचान वालों को कॉल की। जहां वह जा सकती थी। लेकिन खुशबू की कोई खोज खबर नहीं थी। एक तरफ जहां फिक्र में डूबे घर वाले खुशबू
के बारे में पता कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ उसी रात खुशबू के कॉलेज के ऑफिशियल WhatsApp ग्रुप में 11 आपत्तिजनक वीडियोस पोस्ट होते हैं। जो एक कपल के इंटिमेट
मोमेंट्स के थे। इन सभी वीडियोस में लड़के का चेहरा तो इमोजी से कवर्ड होता है लेकिन लड़की का चेहरा साफ नजर आ रहा था और वो लड़की कोई और नहीं बल्कि खुशबू थी और यह
वीडियोस उसी के ही नंबर से फॉरवर्ड हुए थे। इसकी जानकारी मिलते ही कॉलेज अथॉरिटीज में हड़कंप मच गया और उन्होंने इन वीडियोस को ग्रुप से रिमूव भी करवा दिया। लेकिन तब
तक डैमेज हो चुका था। क्योंकि आप जानते हैं कि ऐसी वीडियोस कितनी जल्दी डाउनलोड और सर्कुलेट हो जाती हैं। अब इस बात से अनजान खुशबू के पिता के पास अगले दिन यानी 11 फरवरी की सुबह खुशबू के कॉलेज से फोन
आता है और उन्हें फौरन कॉलेज आने के लिए कहा जाता है। कॉलेज पहुंचकर जब उन्हें उन वीडियोस के बारे में पता चलता है तो उन्हें एक पल को तो विश्वास ही नहीं होता है कि यहां उनकी बेटी की बात हो रही है।
इस बारे में किसी तरह की जानकारी तो दूर। वो कॉलेज अथॉरिटीज को बताते हैं कि उन्हें इस बात का भी इल्म नहीं था कि उनकी बेटी का किसी लड़के से अफेयर तक है। वह फिर से
खुशबू को कॉल लगाते हैं। लेकिन फोन अभी भी स्विच्ड ऑफ ही बता रहा था। खुशबू के पिता ने जब घर लौटकर परिवार को सारी बात बताई तब खुशबू की बहन ने यह खुलासा किया कि
खुशबू उसी कॉलेज में पढ़ने वाले पीयूष के साथ रिलेशनशिप में है और उसने फोन कर बताया था कि वह पीयूष के साथ अपने क्लासमेट की बर्थडे पार्टी में जा रही है और रात 11:00 बजे तक लौट आएगी। अक्सर
सिबलिंग्स एक दूसरे के राज अपने पेरेंट्स से छुपा जाते हैं। और यहां पर भी वही केस था। खुशबू के फादर पीयूष को जानते थे क्योंकि वह अक्सर नोट्स वगैरह लेने घर आता था। लेकिन उनकी बेटी का उसी के साथ अफेयर
होने का अंदेशा उन्हें नहीं था। इनफैक्ट एक बार तो उन्होंने अपनी बेटी से कहा था कि नोट्स वगैरह कॉलेज में ही ले लिया करो। लेकिन घर पर इस तरह किसी लड़के का
आना-जाना ना रखो। अब एक तरफ जहां खुशबू की कोई खोज खबर नहीं थी। वहीं दूसरी तरफ 10 फरवरी को पीयूष से मिलने उसके फादर इंदौर आए थे और उनका प्लान अपने बेटे के साथ
खाना खाने का था। लेकिन पीयूष ने काम में बिजी होने की बात कहकर उनसे मिलने से मना कर दिया। जिसके बाद वह अपने बेटे से मिले बिना ही वापस मंदसौर लौट गए। उधर खुशबू के
घर वाले अब खुशबू के साथ-साथ पीयूष को भी कॉल कर रहे थे। लेकिन उसका फोन भी स्विचड ऑफ बता रहा था। खुशबू की बहन लगातार ट्राई कर रही थी कि तभी कुछ देर बाद खुशबू के
फोन पर रिंग जाने लगती है और कई बार कॉल करने पर उसकी कॉल रिसीव भी हो जाती है। लेकिन दूसरी तरफ से खुशबू नहीं बल्कि पीयूष बोलता है और कहता है कि अभी थोड़ी
देर में वह खुशबू से बात करवा रहा है। लेकिन उनकी एक बार भी खुशबू से बात नहीं हो पाई। देर शाम तक जब उन्हें अपनी बेटी की कोई खबर नहीं मिली तो बढ़ती बेचैनी के
साथ उन्होंने 11 फरवरी की रात 9:30 बजे पंडरीनाथ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। अब इधर मिसिंग रिपोर्ट लिखी जा रही थी। वहीं दूसरी तरफ उसी शाम खुशबू के वही वीडियोस उसके सभी रिलेटिव्स,
फैमिली मेंबर्स और जान पहचान वालों के WhatsApp पर पहुंच गए। एंड द शॉकिंग फैक्ट वाज़ कि यह सभी वीडियोस खुशबू के ही फोन से फॉरवर्ड हुए थे। इनफैक्ट उसके WhatsApp
स्टेटस पर भी अपलोड थे। उसी रात पुलिस स्टेशन से एक कांस्टेबल उस घर भी गया था जहां पीयूष किराए पर रहता था। लेकिन गेट पर ताला लगा देखकर वह मकान मालिक को किसी
के आने पर इंफॉर्मेशन देने की बात कहकर लौट गया। 13 फरवरी 2026 द्वारकापुरी की अंकल गली में रहने वाले रेजिडेंट्स सुबह
से ही तेज बदबू से परेशान थे। यह बदबू उसी गली के घर से आ रही थी और लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया था। किसी अनहोनी की शंका के चलते मोहल्ले वालों ने तुरंत पुलिस को इनफॉर्म किया। जिसके थोड़ी देर
बाद द्वारकापुरी पुलिस मौके पर पहुंची और जब वह उस घर की पहली मंजिल पर बने उस कमरे का दरवाजा तोड़ अंदर घुसी तो मंजर देख उनके भी होश उड़ गए। कमरे के अंदर बिस्तर
पर एक लड़की की पार्शियली डीकंपोज्ड लाश पड़ी हुई थी और उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। बॉडी के डीकंपोज स्टेट को देखकर लग रहा था कि डेथ को 48 घंटे से ज्यादा का
समय बीत चुका है। उस कमरे में खून से सना रुमाल और बेडशीट, आधी पकी मैगी और बीियर के कैंस भी मिले। पुलिस ने बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और शिनाख्त के
लिए खुशबू के पिता को बुलाया। लेकिन बॉडी की डीकंपोज स्टेट को देखते हुए पुलिस ने लाश के पैरों में मौजूद सॉक्स को आइडेंटिफिकेशन के लिए यूज किया। जब शिनाख्त के लिए यही सॉक्स खुशबू के फादर
को दिखाए गए तो एक पल में ही उनकी दुनिया ही हिल गई। यह लाश उनकी बेटी खुशबू की थी और जिस घर में वो पाई गई वो रेंटेड रूम था पीयूष धनोटिया का।
इस केस की डिटेल्स जितनी डरावनी है उससे कहीं ज्यादा खौफनाक है वो वजह वो मानसिकता जो हमें यह सवाल पूछने पर मजबूर करती है कि आखिर इंसान के अंदर का अंधेरा इतना
गहरा कब से हो गया और क्या आज भी इंसानियत वाकई जिंदा है या सिर्फ एक लफ्ज बनकर रह गई है वेलकम टू द शो माय नेम इज शाश्वत एंड यू आर वाचिंग
द चिलिंग केस ऑफ डेडली ऑब्सेशन द्वारकापुरी की अंकल गली के इस घर में एक लड़के की लाश से हड़कंप मच गया था। पुलिस के साथ-साथ मीडिया भी इकट्ठा हो चुकी थी।
जिस बेटी की तलाश एक पिता कर रहा था, उसका अंत इस हाल में होगा, यह कोई बुरे सपने में भी नहीं सोच सकता था। मौके पर पुलिस फोर्स के साथ पहुंची एसआई सोनाली सिंह के लिए क्राइम सीन पर जाना डेली वर्क रूटीन
का हिस्सा था। लेकिन इस केस में जिन चीजों से उन्हें रूबरू होना पड़ा, वैसा उन्होंने अपने 8 साल के करियर में नहीं देखा था। खुशबू की लाश गलने की कंडीशन तक पहुंच
चुकी थी। शरीर से कपड़े गायब थे और जिस्म पर गहरे चोट के निशान थे। बॉडी को देखकर लग रहा था कि हत्या बहुत ही बेरहमी से की गई है और इसे अंजाम दिए 48 घंटे से ज्यादा
का वक्त बीत चुका है। मंजर ऐसा कि खुद एसआई सोनाली सिंह की आंखें नम हो गई। क्योंकि यह एक लड़की का शव था इसलिए इनिशियल प्रोसीडिंग्स एसआई सोनाली सिंह ने ही की। खुशबू के सीने पर चाकू से इतने वार
किए गए थे कि एक चाकू पूरी तरह से मुड़ गया था। जिसके बाद कातिल ने दूसरे चाकू का इस्तेमाल किया था। यह दोनों ही चाकू, एडेसिव टेप और खून से सने कपड़े भी पुलिस
को बरामद हुए। बॉडी की कंडीशन ऐसी हो गई थी कि पोस्टमार्टम करने वाली मेडिकल टीम तक सहम गई। महिलाओं से जुड़े ऐसे जघन्य मामलों में मिनिमम तीन डॉक्टर्स का पैनल होता है और जनरली लिमिटेड सैंपल्स लिए
जाते हैं। लेकिन यहां हालत देखते हुए डॉक्टर्स ने बॉडी से लगभग 12 सैंपल्स जांच के लिए कलेक्ट किए। पुलिस को अब तलाश थी पीयूष की जो इस वक्त लापता था और उसका फोन
भी स्विच्ड ऑफ आ रहा था। क्योंकि क्राइम सीन पर खुशबू का भी फोन नहीं मिला था। इसलिए पुलिस यह मानकर चल रही थी कि हो ना हो उसका फोन भी पीयूष के पास है। जहां क्राइम सीन पर एफएसएल की टीम जांच कर रही
थी। वहीं पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरास को खंगालना शुरू किया और उसी में उन्हें 10 फरवरी की दोपहर लगभग 3:30 बजे पीयूष और खुशबू साथ जाते नजर आए। एंड उसी
शाम 7:00 बजे पीयूष कंधे पर बैक टांगे अकेले जाता हुआ दिखाई दिया। अब पुलिस की दो टीमें मंदसौर और आसपास के डिस्ट्रिक्ट्स में घेराबंदी कर पीयूष की खोज में लग गई। सीसीटीवी फुटेज में पीयूष
के हाथ में दो मोबाइल फोन साफ नजर आ रहे थे। जिसमें से एक जहां तक खुशबू का था इसलिए पुलिस ने दोनों मोबाइल नंबर्स को कंटीन्यूअस सर्वेलेंस पर लगा दिया। आखिरकार इसका फायदा भी मिला। जब पीयूष ने
खुशबू का मोबाइल फोन ऑन किया। पीयूष की लोकेशन गोवा में ट्रेस हुई जो लगातार मूव हो रही थी। पीयूष गोवा से महाराष्ट्र के पनवेल और फिर मुंबई के अंधेरी पहुंचा।
जहां फाइनली एमपी पुलिस ने मुंबई पुलिस की मदद से उसे 15 फरवरी के अर्ली मॉर्निंग में अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने बताया कि जब उन्होंने पीयूष को शादी वर्दी में चस किया तो उसे लगा कि कुछ लोग उसे लूटने आ रहे
हैं। इसलिए वह खुद को बचाने के लिए पुलिस स्टेशन की तरफ भागा। लेकिन उन्होंने उसे पकड़ कर गिरफ्तार कर लिया। इंदौर से करीब 200 कि.मी. दूर मध्य प्रदेश के मनसौल डिस्ट्रिक्ट के कालाखेत एरिया
में पीयूष ढोटिया का घर है। कमर्शियल मार्केट जोन में बना यह घर कुछ ही सालों पहले तैयार हुआ था। जहां पीयूष का परिवार लगभग 4-प साल पहले शिफ्ट हुआ था और नीचे बनी दुकान पिता ने करीब ₹7000 महीने के
किराए पर दे रखी थी। पीयूष के पिता घनश्याम मंदसौर में किराना की दुकान चलाते हैं। पीयूष घर का इकलौता बेटा है और उसकी दो बहनें हैं। जिसमें से उसकी बड़ी बहन की हाल में ही सगाई हुई थी। पीयूष का जन्म
रतलाम के पास बाजना गांव में हुआ था जो उसका ननिहाल था। लेकिन उसकी पूरी पढ़ाई मंदसौर में ही हुई थी। पिछले साल उसने आगे की पढ़ाई के लिए इंदौर जाने की जिद की और
आखिरकार अगस्त 2025 के लास्ट वीक में उसे एमबीए कोर्स में एडमिशन दिलाया गया। एक महीने बाद सितंबर 2025 के अराउंड पीयूष अपने पिता के साथ इंदौर आया और अरविंदो
एरिया के पास एक रेंटेड रूम लिया जहां एक और लड़का उसका रूममेट था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पीयूष ने घर फोन करके बताया कि वह रूम चेंज करना चाहता है क्योंकि उसका
रूममेट हुक्का पीता है और नशे करता है। पिता ने यह सुनकर उसे सलाह दी कि किसी झगड़े में पड़ने की बजाय कोई नया कमरा ढूंढ लो। अबकि एडवांस दे दिया गया था
इसलिए पिता ने उसके दोस्त से बात करके आधी रकम वापस दिलवाई। उसके बाद पीयूष ने एक और जगह एज अ पेइंग गेस्ट रूम ले लिया। लेकिन द्वारकापुरी में उसने कब और कैसे अलग से
मकान किराए पर लिया इसकी जानकारी परिवार को नहीं थी। पिता के मुताबिक मकान मालिक से भी उसने चुपचाप बिना घर वालों को बताए किसी तीसरे व्यक्ति के थ्रू बात करवाई थी।
कम बोलने वाला और ज्यादा मेलजोल ना रखने वाला 25 साल का पीयूष ज्यादातर घर में ही रहता था। उसके बहुत कम दोस्त थे और वह घर से भी कम ही निकलता था। कहने को तो एक
धार्मिक परिवार, एक एमबीए स्टूडेंट बेटा, एक सीधी साधी जिंदगी। लेकिन कहानी कभी भी सिर्फ उतनी नहीं होती जितनी ऊपर से दिखती है। इंदौर में एमबीए की पढ़ाई के दौरान ही
पीयूष की मुलाकात अपनी बैचमेट 24 साल की खुशबू से हुई। लगभग 6 महीने पहले ही 24 सितंबर 2025 को दोनों पहली बार प्रॉपर्ली मिले और शुरुआत एक नॉर्मल क्लासरूम
इंटरेक्शन से हुई। प्रैक्टिकल असाइनमेंट के दौरान पीयूष ने खुशबू की काफी हेल्प की। नोट शेयर करना, प्रोजेक्ट समझाना, प्रेजेंटेशन प्रिपेयर करना। धीरे-धीरे एकेडमिक सपोर्ट दोस्ती में बदल गया। कैंपस
के अंदर शुरू हुई बातचीत कैंटीन तक पहुंची। फिर पर्सनल कॉल्स और लेट नाइट चैट्स तक जो शुरुआत एक क्लासमेट वाली कंफर्ट से हुई थी। वो कुछ ही हफ्तों में इमोशनल और रोमांटिक अटैचमेंट में बदल गई।
बाहर से देखा जाए तो यह दो यंग एमबीए स्टूडेंट्स की एक मॉडर्न लव स्टोरी लगती थी। लेकिन यहां से कहानी सिर्फ रिलेशनशिप तक सीमित नहीं रही। पीयूष खुशबू से शादी
करना चाहता था और शादी को लेकर उसका ऑब्सेशन इस कदर था कि उसने एक सिंबॉलिक मैरिज सीन क्रिएट किया। उसने कमरे में दिए जलाए और खुशबू के साथ उस दिए के सात फेरे
लेते हुए खुशबू को मंगलसूत्र भी पहनाया। जैसे वह अपनी दुनिया में उसे अपनी पत्नी मान चुका हो। लेकिन यहां से ही कंट्राडिक्शन शुरू हुआ। खुशबू चाहती थी कि
पीयूष उसे ओपनली एक्सेप्ट करे। परिवार से बात करे या रिश्ता सबके सामने लाए। लेकिन पीयूष इसके लिए रेडी नहीं था। अब कमिटमेंट का यह गैप धीरे-धीरे टेंशन में बदलने लगा
और वक्त के साथ पीयूष का नेचर भी चेंज होने लगा। पुलिस इन्वेस्टिगेशन में सामने आई चैट से दिखाया कि वह हाईली पोज़ेसिव और जेलस हो चुका था। उसे पसंद नहीं था कि खुशबू किसी और लड़के से बात करे। चाहे वह
सिर्फ क्लासमेट हो, पुराना दोस्त हो या फॉर्मर बॉयफ्रेंड और उसका यह शक सिर्फ सोच तक सीमित नहीं था। पीयूष के पास खुशबू के फोन का एक्सेस था। जिस वजह से वो उसकी
प्राइवेट चैट्स चेक करता रहता था। कौन मैसेज कर रहा है, किससे बात हो रही है, किस ऐप पर ऑनलाइन है, हर चीज उसके लिए ट्रिगर बनने लगी। खुशबू की छोटी बहन के मुताबिक पीयूष उसका डिजिटल वॉलेट भी
कंट्रोल करता था और कई बार उससे पैसे भी लिए थे। इसी वजह से खुशबू को वॉलेट का पासवर्ड चेंज करना पड़ा। लेकिन पासवर्ड बदलने के बाद भी पीयूष ने उससे ₹1800 ले
लिए। लगभग 1 महीने पहले गुस्से में पीयूष ने खुशबू का मोबाइल तोड़ दिया था। बाद में रिपेयर करवाने के नाम पर फोन अपने साथ ले गया। रिपेयर का पैसा भी छोटी बहन ने दिया।
यह सिर्फ गुस्सा नहीं था। यह कंट्रोल था। एक पर्टिकुलर ऐप को लेकर दोनों के बीच बार-बार झगड़े होते थे। पीयूष को शक था कि खुशबू उस ऐप पर दूसरे लड़कों से बात करती है। लेकिन छोटी बहन ने पुलिस को बताया कि
वो ऐप उसने अपनी सहेलियों से बात करने के लिए खुशबू के फोन में डाउनलोड की थी और यह बात पीयूष को भी बताई थी। लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था क्योंकि उसका शक उसकी रियलिटी से बड़ा हो चुका था। पीयूष पुलिस
के सामने जिन लड़कों के नाम लेता रहा, वह सिर्फ खुशबू के नॉर्मल दोस्त थे। लेकिन उसके लिए हर नाम एक खतरा बन गया था और हर कन्वर्सेशन एक धोखा। छोटी बहन ने खुशबू को
कई बार समझाया था कि वह पीयूष से दूरी बना ले क्योंकि यह लड़का ठीक नहीं है और इसी बात पर हुए झगड़े में पीयूष ने उसका फोन तोड़ दिया था। उसके बाद खुशबू ने कुछ वक्त के लिए उससे बात करना बंद कर दिया। लेकिन
पीयूष को यह मंजूर नहीं था। वो उसे मनाने की कोशिश करता रहा क्योंकि खुशबू का उसे इग्नोर करना बर्दाश्त के बाहर हो रहा था। इसलिए वो खुशबू को धमकाने लगा कि वह उसे ऐसे भूलने नहीं देगा। पीयूष का खुशबू के
लिए प्यार बहुत कम वक्त में पज़ेसिवनेस का रूप ले चुका था और जब किसी रिलेशन में प्यार से ज्यादा ओनरशिप आ जाए तो कहानी अक्सर अच्छे मोड़ पर खत्म नहीं होती।
जनवरी 2026 में पीयूष मंदसौर अपने घर आया हुआ था। पहले तो घर का माहौल नॉर्मल था लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया। एक दिन पीयूष के फादर ने उसके मोबाइल में उसकी एक लड़की के साथ क्लोज फोटो देख ली। सिर्फ
नॉर्मल दोस्त वाली फोटो नहीं बल्कि ऐसी तस्वीरें जो बता रही थी कि यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ चुका है। पहले पीयूष ने बचने की कोशिश की। बोला सिर्फ फ्रेंड है।
लेकिन जब बात थोड़ी सख्ती से पूछी गई तो वह टूट गया और उसने एक्सेप्ट कर लिया कि वो उस लड़की को पसंद करता है। घर में सवाल सीधा पूछा गया कि इंदौर पढ़ने गए हो या यह
सब करने। यहीं से प्रेशर शुरू हुआ। इंदौर लौटकर पीयूष ने खुशबू को सब कुछ बताया। फिर एक दिन उसने अपने फादर की बात खुशबू से करवा दी। पीयूष के पिता ने दोनों को समझाया कि पहले पढ़ाई कंप्लीट करो। लाइफ
में सेटल हो जाओ। शादी का फैसला वक्त आने पर फैमिली करेगी। नहीं तो पीयूष को वापस मंदसौर बुला लेंगे। उनकी बात सुनकर खुशबू ने उनसे वादा करते हुए कहा कि अंकल आपकी कसम हम दोनों सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस
करेंगे। आप पीयूष को वापस मंदसौर मत बुलाइए। लेकिन इमोशंस तो कसम से नहीं रुकते। 26 जनवरी को जब पीयूष ने खुशबू को मिलने बुलाया तो उसकी छोटी बहन भी साथ में
थी। खजराना से वापस आते वक्त ई रिक्शा में ही दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि पीयूष चलती ई रिक्शा से ही कूद गया। पब्लिक जगह पर गुस्सा, ड्रामा और
समझाने-बुझाने का खेल यह सब बताने लगा कि दोनों के रिलेशन में एक अनस्टेबिलिटी आ गई थी और इस वक्त तक पीयूष भी बदल चुका था। उसके मन में यह बात बैठ गई थी कि कहीं सच
में खुशबू उसे छोड़ ना दे। खुशबू के फोन पर नजर रखना, उसकी चैट्स चेक करना, कौन मैसेज कर रहा है, कौन कॉल कर रहा है? यह
सभी हरकतें पीयूष की बढ़ी हुई पज़ेसिवनेस को शो कर रही थी। उसे पसंद नहीं था कि खुशबू किसी और लड़के से बात करे। चाहे वो क्लासमेट हो या पुराना दोस्त। फिर एक और
चीज ने उसे और भी ज्यादा पागल कर दिया। जब खुशबू ने पीयूष की हरकतों से तंग आकर लगभग 15 दिन तक उससे बात करना बंद कर दिया। ना वह कॉल पिक करती और ना ही मैसेजेस का
रिप्लाई करती। अब एक पोज़ेसिव इंसान के लिए तो इस तरह की घोस्टिंग सबसे बड़ा ट्रिगर होती है। पीयूष को यह रिलेशनशिप हाथ से निकलता हुआ दिखने लगा। उसे लगने लगा कि चीजें उसके कंट्रोल से बाहर जा रही हैं।
और जब किसी इंसान को लगता है कि वो किसी चीज को खोने वाला है तो कभी-कभी वो उसे कंट्रोल करने की कोशिश करता है। यहीं से यह लव स्टोरी प्रॉब्लम बनी और प्रॉब्लम
धीरे-धीरे ऑब्सेशन। 10 फरवरी 2026। इस दिन जो हुआ वह किसी गुस्से का इंस्टेंट रिएक्शन नहीं था बल्कि सब कुछ प्रीप्लंड था। वैलेंटाइन वीक चल
रहा था। पीयूष ने खुशबू को सरप्राइज गिफ्ट देने की बात कहकर फोन करके उससे मिलने के लिए बुलाया। इस मुलाकात से पहले ही वह मेडिकल स्टोर गया और वहां से सेक्स पार बढ़ाने वाली गोलियां खरीद कर खा ली। लगभग
3:30 बजे वो खुशबू को लेकर अपने रूम पर गया। उस वक्त तक दोनों के बीच पिछले 15 दिनों की दूरी और टेंशन मौजूद थी। रूम पर आते ही पीयूष को पता चला कि खुशबू ने कुछ नहीं खाया है। इसलिए उसने अपने हाथों से
मैगी बनाकर उसे खिलाई। वो उसके लिए आइसक्रीम भी लेकर आया जिसे लेकर दोनों के बीच थोड़ी बहस भी हुई। फिर बात सेक्सुअल रिलेशन पर आ गई। जहां पीयूष ने सेक्सुअली इंटिमेट होने के लिए इनिशिएट किया। लेकिन
खुशबू ने तबीयत खराब होने की बात कहकर पीयूष को मना कर दिया। अब पुलिस के मुताबिक यहीं से सिचुएशन एस्केलेट हुई। पीयूष अंदर ही अंदर भड़क उठा क्योंकि उसने खुशबू के साथ इंटिमेट होने का प्लान बना
रखा था और इसी वजह से उसने पहले ही सेक्स पार बढ़ाने वाली दवा खा रखी थी। लेकिन खुशबू का यूं मना कर देना उसे एक रिजेक्शन की तरह दिखा। पीयूष ने अपना टोन बदला और
खुशबू से कहा कि वो उसे सरप्राइज़ गिफ्ट देना चाहता है। लेकिन गिफ्ट देखने से पहले उसे आंखों पर पट्टी बांधनी होगी। बदकिस्मती से खुशबू उसके लिए मान गई क्योंकि उसे अंदाजा नहीं था कि यह
सरप्राइज़ नहीं साजिश है। पहले पीयूष ने खुशबू की आंखों पर पट्टी बांधी। फिर बातों में फंसाकर हाथ पैर भी बांध दिए। हाथ पैर बंधे होने के चलते खुशबू चाहकर भी रेिस्ट नहीं कर सकती थी। वह खुद को छुड़ाने के
लिए लाख कोशिश कर रही थी। लेकिन कोई फायदा नहीं था। इसलिए जब खुशबू ने शोर मचाना शुरू किया तो पीयूष ने उसके मुंह पर कपड़ा ठूसकर उसका बलात्कार कर दिया। पीयूष इतने
पर ही नहीं रुका क्योंकि इसके बाद वह खुशबू के सीने पर बैठकर तब तक उसका गला दबाता रहा जब तक उसकी सांसे थम नहीं गई। हैवानियत की दास्तान इतने पर ही नहीं
रुकी। थोड़ी देर तक लाश के पास बैठने के बाद वो फूटी कोठी एरिया में बियर शॉप से बियर लेकर लौटा और वहीं खुशबू की बॉडी के पास बैठकर उसे पीने लगा। अब सेक्स पार बढ़ाने वाली दवाओं में मौजूद सिलडेना
सिट्रेट जब अल्कोहल से रिएक्ट करती है तो यह इनहबिशंस यानी संकोच या हिचकिचाहट को कम और डिसीजन मेकिंग को इंपेयर करती है। जिसके चलते रिस्की सेक्सुअल बिहेवियर
ट्रिगर हो सकते हैं। और इस केस में तो पीयूष के अंदर पहले ही सनक सवार थी। अब पीयूष जो करने वाला था वह हैवानित शब्द को भी छोटा साबित कर देगा। पीयूष ने नशा करने
के बाद खुशबू की डेड बॉडी के साथ अगले ढाई घंटों तक गलत काम किया और जब इतने में भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ तो उसने खुशबू के सीने पर चाकू से इतने वार किए कि चाकू
की ब्लेड टूट कर उसके सीने में ही धंस गई। अपनी हवस मिटाने के बाद पीयूष ने कपड़े बदले। खुशबू का मोबाइल फोन अपने साथ लिया। रूम को बाहर से लॉक किया और बैग लेकर रात
में सरवटे बस स्टैंड को निकल गया। जहां से उसने अपनी मूवमेंट को प्लान किया और एक नया सिम कार्ड खरीदा। उसी रात उसने खुशबू के फोन से अपने और खुशबू के रिकॉर्ड किए गए इंटिमेट वीडियोस को एडिट करते हुए
उसमें सिर्फ अपना चेहरा छुपाकर कॉलेज के WhatsApp ग्रुप में फॉरवर्ड कर दिया। इंदौर से मुंबई पहुंचकर वो लोकल ट्रेंस और मेट्रो में भटकता रहा। और जब पुलिस ने उसे अंधेरी मुंबई से अरेस्ट किया तो सबसे पहली
बात उसने पुलिस से कही कि सर मुझसे गलती हो गई। मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को मार डाला है जिसके लिए मुझे फांसी होनी चाहिए। पुलिस को उसके बैग से एक लेटर भी मिला जो
कुछ यूं लिखा था। मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को मार दिया। क्या प्यार करना गलत है? हम
दोनों बहुत अच्छे से रहते थे। हमारे प्यार की शुरुआत कॉलेज से हुई थी। लेकिन जब हम कॉलेज में थे तब हमारी नजदीकियां लोगों को बहुत बुरी लगती थी। हमारे रिलेशनशिप को
नजर लग गई थी। क्लास के लोग भी हमसे नफरत करते थे। हम अपने करियर को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत और पढ़ाई कर रहे थे। हमने फर्स्ट ईयर के पेपर भी अच्छे से दिए थे। जब मैं घर गया था तो मैंने हमारे रिश्ते
के बारे में सबको बता दिया था। लेकिन उन्होंने इस रिश्ते से इंकार कर दिया। मैं उससे आखिरी बार मिलना चाहता हूं। मैं उससे आखिरी बार मिलना चाहता हूं। इस आखिरी लाइन
का कनेक्शन पीयूष की YouTube हिस्ट्री से था जो पुलिस को मिली। जहां उसने YouTube पर यह तक सर्च किया था कि आत्मा से कैसे कांटेक्ट करें। अब अगर आपको इसके माफीनामे
और गिल्ट को देखकर लग रहा है कि इसे पछतावा हो रहा है तो उसके मीडिया में दिए गए बयान और उसके रवैया पर गौर करिएगा। कुछ नहीं हुआ है। छोड़ो जो हो गया हो गया यार।
छोड़ दो ना। क्या करोगे जान के?
तो सबको कारण बताऊंगा अच्छे से। टाइम टाइम आएगा। इनफैक्ट वो पुलिस स्टेशन में मौजूद एक और अपराधी से पूछता है कि इस केस में मुझे कितनी सजा होगी और यह भी कहता है कि वो
जेल में रहकर पढ़ाई करेगा और आराम से छूट कर बाहर आ जाएगा। ऐसा ब्रूटल क्राइम अंजाम देने के बाद पीयूष के इस रिमोशलेस बिहेवियर ने हर किसी का खून खौला दिया। पीयूष बिना किसी शिकन के पुलिस के साथ
क्राइम सीन पर भी गया और एक-एक डिटेल देते हुए क्राइम को रिकक्रिएट किया। यह कहानी किसी मॉन्सर की नहीं बल्कि उन फ्लॉस की है जो हम सबके अंदर छोटी सी फॉर्म में मौजूद
होते हैं। जेलसी, ईगो, पज़ेसिवनेस और कंट्रोल। फर्क बस इतना था कि यहां यह काबू के बाहर हो गई। और जब रिजेक्शन आया तो चोट सीधा ईगो पर लगी। यह पीयूष की लाइफ का
पहला अफेयर था। पहली बार वो घर से बाहर निकला था। दूसरे शहर में रह रहा था। पहली गर्लफ्रेंड सिर्फ 6 महीने का रिलेशनशिप। सो एक नया शहर, नया फेज, नया प्यार।
इमोशनली वो ऐसी इमैच्योर स्टेज पर था जहां अटैचमेंट बहुत तेजी से ऑब्सेशन बन गया। अकॉर्डिंग टू रिसर्च इंटिमेट पार्टनर किलिंग्स में 40 से 60% केसेस में जेलेसी और ब्रेकअप का डर ही सबसे बड़ा ट्रिगर
होता है। कुछ लोग नो को बस एक जवाब नहीं समझते। वो उसे अपनी हार समझते हैं। अपनी अथॉरिटी को चैलेंज समझते हैं। यहां भी वही पैटर्न दिखता है। छोड़कर जाने का डर
धीरे-धीरे शक में बदला। शक पोज़ेसिवनेस में और पोज़ेसिवनेस कंट्रोल में। कंट्रोल करने से उसे पार मिलती थी। घर पर पापा के सामने उसकी कभी हिम्मत नहीं हुई। लेकिन
रिलेशनशिप में वो अथॉरिटी फील करता था। वहां वो डोमिनेट कर सकता था। वहां वो स्ट्रांग महसूस करता था। घर वालों की उसके रिलेशनशिप में दखलअंदाजी, खुशबू का उससे
बीते 15 दिनों से बात ना करना और फिर इंटिमेट होने से मना कर देना इन सब ने उसके मन में बैठे शक के कीड़े को बड़ा कर दिया। उसे लगने लगा कि वो उसे छोड़कर चली
जाएगी। उसके लिए यह सिर्फ रिलेशनशिप का एंड नहीं था बल्कि वो कंट्रोल खो देना था जिसका एहसास उसे पहली बार हुआ था। साइकोलॉजी में इसे रिजेक्शन रेज कहते हैं। जब किसी को लगता है कि वो कंट्रोल खो रहा
है तो वो एक्सट्रीम रिएक्शन देता है। स्ट्रेंगुलेशन, मल्टीपल स्टैबू्स, ओवर किल और फिर सबसे एक्सट्रीम फॉर्म, डेथ के बाद सेक्सुअल एक्ट। साइकोलॉजी में इसे
सडोनेक्रोफिलिया कहा जाता है। मतलब लाइफ लॉन्ग कॉप से अट्रैक्शन नहीं बल्कि सिचुएशन बेस्ड एक्ट। एस पर रिसर्च इसका एक ही मोटिव होता है। अनरेजिस्टिंग पार्टनर।
जिंदा इंसान नो बोल सकता है। लेकिन डेड बॉडी नहीं। लिविंग रिजेक्शन ने उसका ईगो तोड़ दिया था। इसलिए डेथ के बाद उसने कंट्रोल का इल्लुजन क्रिएट किया। बॉडी के
पास बैठना, शराब पीना, स्पिरिट को बुलाने की कोशिश, फिर मैसेज लिखना कि मैंने गलत किया। यह मिक्स्ड डिनाइयल और ग्रिड का पैटर्न है। जैसे वो एक्सेप्ट नहीं कर पा रहा था कि जो खत्म हो चुका है, वो वापस
नहीं आएगा। यह कैलकुलेटेड सीरियल पैटर्न नहीं बल्कि यह रिएक्टिव था। यह पर्सनालिटी फ्लॉस का एक्सट्रीम केस था। मोस्ट इंटिमेट पार्टनर क्लिंग्स सडन नहीं होती। उनके
पहले वार्निंग साइन होते हैं और यह पॉइंट ले जाता है हमें इस केस के मैसेज की तरफ। देखिए हर लड़का डेंजरस नहीं होता। लेकिन हर डेंजरस आदमी शुरू में बिल्कुल नॉर्मल
ही लगता है। चार्मिंग, केयरिंग, प्रोटेक्टिव कभी-कभी इतना अटेंटिव कि आपको लगेगा कि यह तो बस मुझसे ही प्यार करता है। लेकिन प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब प्यार धीरे-धीरे कंट्रोल में बदलने लगे।
जब आप बाउंड्री सेट करो और वो आपको गिट्ट फील करवाए। जब नो बोलने पर वो हर्ट नहीं बल्कि होस्टाइल हो जाए। जब सेक्स को चॉइस नहीं ऑब्लिगेशन समझा जाए। जब वो इमोशनल
ब्लैकमेल करे कि अगर तुम मुझे छोड़ दोगी तो मैं कुछ गलत कर दूंगा। तो समझ लीजिए यह अटैचमेंट नहीं बल्कि इमोशनल मैनपुलेशन है। और याद रखिए एक्सट्रीम वायलेंस कभी अचानक
नहीं होता। उसके पहले छोटे-छोटे सिग्नल्स होते हैं। ओवरपोज़ेसिवनेस को लोग क्यूट बोल देते हैं। कास्टेंट चेकिंग को केयर समझ लेते हैं और जेलेसी को इंटेंस लव का नाम
देते हैं। लेकिन रिसर्च और रियल लाइफ केसेस दोनों यही दिखाते हैं कि एस्केलेशन हमेशा वार्निंग साइन से शुरू होते हैं। एक हेल्दी पार्टनर आपकी इंडिविजुअलिटी की
रिस्पेक्ट करता है। वो नो को बिना ईगो के एक्सेप्ट करता है। वो आपकी फ्रीडम से इनसिक्योर नहीं होता। आर्गुमेंट्स में भी डिग्निटी मेंटेन करता है और सबसे इंपॉर्टेंट वो आपको कभी फियर फील नहीं
कराता। अगर आपको अपने ही रिलेशनशिप में डर महसूस होने लगे। अगर अपनी बात कहने से पहले आपको यह सोचना पड़े कि वो रिएक्ट कैसे करेगा तो रुक जाइए। यह छोटा सिग्नल
नहीं है। यह रेड फ्लैग है। अपने डिसकंफर्ट को इग्नोर मत कीजिए। गट फीलिंग अक्सर वह देख लेती है जो आंखें नहीं देख पाती। याद रखिए प्यार कभी ओनरशिप नहीं होता। मॉनिटरिंग नहीं होता और ना ही पनिशमेंट
होता है। और अगर आप कंट्रोलिंग या अब्यूसिव बिहेवियर फेस कर रहे हैं तो चुप मत रहिए। किसी ट्रस्टेड फ्रेंड, फैमिली मेंबर या अथॉरिटीज तक बात पहुंचाइए। साइलेंस सिचुएशन को ठीक नहीं करता बल्कि
कंट्रोल को स्ट्रांग बनाता है। स्ट्रांग रहना मतलब सब कुछ सह लेना नहीं होता। स्ट्रांग रहना मतलब रेड फ्लैग्स को पहचानना और वक्त पर उस दलदल से निकल जाना होता है जहां आपकी सेल्फ रिस्पेक्ट,
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