LongCut logo

AS 19 & 22 | Leases & Income Tax Revision | CA Inter Advanced Accounts HP Sir AIR1CA

By Atul Agarwal

Summary

Topics Covered

  • Highlights from 00:00-30:28
  • Highlights from 30:19-59:46
  • Highlights from 59:34-89:16
  • Highlights from 89:05-119:17
  • Highlights from 119:07-149:19

Full Transcript

नमस्कार दोस्तों राधे-राधे। आज के रिवीजन लेक्चर में दो बड़े-बड़े बड़े इंपॉर्टेंट एकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स के बारे में बात करने जा रहे हैं। जिनका आपको भी बहुत-बहुत ज्यादा बेसब्री से इंतजार रहता है। आपने

भी मेरे को बहुत सारे रिक्वेस्ट डाल रखी थी कि सर एएस 19 और एएस 22 का रिवीजन लेकर आइए। तो आपके इंतजार की घड़ियां अब समाप्त

हो चुकी है और मैं आपके लिए एएस 19 और 22 का रिवीजन लेकर आया हूं। एएस 19 और 22 दोस्तों दोनों ही एयएस ऐसे हैं जो एग्जाम पॉइंट ऑफ व्यू से हमेशा ही बड़े

इंपॉर्टेंट एयएस रहते हैं। पूरे प्रैक्टिकल एप्रोच के ऊपर बेसिस होते हैं। तो इनको आप जब भी एग्जाम में जाते हो उससे पहले हमेशा अच्छे से तैयार करके जाना होता

है। मेरा जो रिवीजन का पैटर्न है वो आपको सबको पता ही है। मैं हमेशा आपको सारे के सारे कांसेप्ट्स कवर करके देता हूं और क्वेश्चंस भी कवर करके देता हूं। तो उसी पैटर्न को फॉलो करते हुए इन दोनों इयर्स

का अपन रिवीजन करेंगे। डिस्क्रिप्शन के अंदर दोस्तों आपको Google ड्राइव का लिंक दे रखा है या फिर एआईआर वन सी.com की वेबसाइट पर जाकर आप लोग फ्री रिसोर्स के

अंदर जो क्यूबी और सीबी है उसको अरेंज कर सकते हो। और जो मेरे स्टूडेंट है उनके पास में ऑलरेडी है तो कोई दिक्कत ही नहीं है। और साथ-साथ में जो मेरे स्टूडेंट है उन्होंने अपनी एक नोटबुक बनाई थी जिसमें

अपन ने सारे क्वेश्चन आंसर्स को सॉल्व किया था खुद से तो वो साथ में आप लोग रेफर कर लेंगे हमेशा की तरह। तो अपन यहां पर एएस9 का रिवीजन पहले करेंगे लीजिंग का और

उसके बाद में अपन चलेंगे दोस्तों एएस 22 की तरफ। तो पहले मैं आप लोगों को एएस 19 के रिवीजन की तरफ ले चलता हूं और एएस 19 के रिवीजन में अपन आगे बढ़े उससे पहले एक

मेरी तरफ से रिक्वेस्ट थम्स अप यानी कि वीडियो को लाइक जरूर कर दो और साथ-साथ में जब वीडियो पूरा हो जाए तो आप मुझे फीडबैक भी जरूर जरूर कमेंट बॉक्स में डालिएगा किस तरह का आपको लेक्चर लगा है और साथ ही साथ

में आपने अगर अभी तक मेरा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन नहीं किया है तो वो टेलीग्राम चैनल भी आप एडवांसिंग के लिए ज्वाइन कर लेंगे जिसका कि लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में दे रखा है अगर आपने YouTube चैनल को अभी तक

सब्सक्राइब नहीं किया है तो इसको भी सब्सक्राइब कर दें क्योंकि सारे के सारे अपडेट वीडियो वगैरह सारी चीजें स्ट्रेटजी वगैरह सब कुछ इसी के अंदर आते हैं तो आप इसको सब्सक्राइब करके रख लेंगे। चलिए अपन

एएस9 की तरफ चलते हैं। एएस 19 के बारे में बात करते हैं दोस्तों। लीजेस के नाम से ये एएस बना हुआ है जो आपको सिखाता है कि अगर अपने को लीजिंग की अकाउंटिंग करनी हो तो

किस तरीके से की जाती है। अगर अपना लीज का एग्रीमेंट हो तो उसको अपन कैसे डील करेंगे एकाउंटिंग पॉइंट ऑफ से इसी चीज को अपने को यहां पर सीखना है। तो सबसे पहला क्वेश्चन यहां पर यही बना कि सर लीजिंग का मतलब

क्या होता है? तो दोस्तों लीजिंग के बारे में अगर मैं आपको बताऊं तो लीजिंग का मतलब होता है एक एग्रीमेंट एक कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें दो पार्टीज इनवॉल्वड होती है।

एक तो लेसर होता है और एक लेसी होता है। ये जो लेसर है इसके पास कोई एसेट है जिसका ये मालिक है और ये एसेट लेसी को ट्रांसफर करता है। लेकिन ट्रांसफर के अंदर उसकी

ओनरशिप ट्रांसफर नहीं करता। विदाउट ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप। केवल केवल इसका राइट टू यूज़ मतलब इसको यूज करने का राइट जो है वो लेसी को ट्रांसफर करता है ताकि लेसी

उसको सर्टेन पीरियड तक यूज कर सके और यूज करके और वो अपनी तरफ से लेसर को क्या करे पीरियडिकली जो लीज रेंटल डिसाइड हो रखा होगा वो लीज रेंटल ये जो लेसी की तरफ से

लेसर को पे किया जाएगा यानी लेसर अपनी एसेट को लेसी को दे रहा है ताकि लेसी उसको यूज़ करेगा ओनरशिप ट्रांसफर नहीं कर सकते अगर ओनरशिप भी आपने एग्रीमेंट के टाइम ट्रांसफर कर दिया फिर तो ये सिंपल सेल का

एग्रीमेंट हो गया। तो लीजिंग से तुरंत बाहर चला जाएगा। तो अपने को ओनरशिप ट्रांसफर नहीं करना। लेकिन अपन उसका पजेशन दे देंगे लेसी को ताकि लेसी उसको यूज़ कर

ले और बदले में यहां पर लीज रेंटल लिया जाएगा। जो भी एग्रीड पैटर्न होगा पीरियडिकली उसके हिसाब से इसी को अपन लीज़ बोलते हैं। तो दोस्तों यहां पर अब लीजिंग के अंदर दो तरह की लीज़ होती है। अपने

दिमाग में बात आती है कि सर लीज़ का मतलब एक तरह से रेंट ही तो हो गया। आप एक तरीके से हां बोल सकते हो हां हो गया सर। बिल्कुल रेंट के जैसे ही तो है। आप कोई चीज रेंट पे लाते हो तो यानी आपको उस आइटम

का एक यूज करने का राइट सर्टेन टाइम तक का मिलता है और आप किराए के साथ अगले को वापस लौटा देते हो। ओनरशिप आपको नहीं मिलती। तो सर रेंट और ये एक ही है। आप कह सकते हो एक ही है। लेकिन कहीं ना कहीं थोड़ा बहुत

डिफरेंशिएट भी कर सकते हैं। और वो डिफरेंशिएट क्या है? वो अभी अपन लीजिंग के अंदर पढ़ेंगे तो आपको यहां पर बात समझ में आएगी। दोस्तों यहां पर दो तरह की लीज होती है। एक तो ऑपरेटिंग लीज होता है और एक

फाइनेंसिंग लीज होता है। ऑपरेटिंग लीज और फाइनेंसिंग लीज। अब ये ऑपरेटिंग लीज और फाइनेंसिंग लीज क्या होता है? इसको अपन

ध्यान से समझेंगे। एएस 19 ने पूरी तरह से फाइनेंस लीज का पोस्टमार्टम करके दे दिया। मतलब इसका डेफिनेशन इसके अंदर के एग्जांपल सब चीजें फाइनेंस लीज के बारे में बता दी।

अब जो फाइनेंस लीज नहीं है उसके लिए ऑटोमेटिकली पॉइंट बन गया कि वो ऑपरेटिंग लीज है। अब ये फाइनेंस लीज क्या है? ये

बड़ा क्रूशियल है, बड़ा इंपॉर्टेंट है। समझना इसको आप लोग ध्यान से समझो। मैं आपको कोई एसेट है वो लीज़ पे दे रहा हूं। मैं आपको उसकी ओनरशिप ट्रांसफर नहीं कर

रहा। क्यों? क्योंकि ओनरशिप देने से तो

रहा। क्यों? क्योंकि ओनरशिप देने से तो एएस 19 से बाहर चला गया। लेकिन मैं आपको क्या कर रहा हूं? मैं उस एसेट के ओनरशिप के साथ जो जुड़े हुए रिस्क एंड रिवॉर्ड

होते हैं ध्यान देना। रिस्क एंड रिवॉर्ड वो सारे के सारे मैंने लेसी को ट्रांसफर कर दिया। जब कॉन्ट्रैक्ट में एंट्री की थी। एग्रीमेंट हुआ था। उसी टाइम उस एसेट के जो रिस्क एंड रिवार्ड है वो लेसर से

लेसी के पास चले गए। रिस्क का मतलब क्या हो गया? आगे जाकर वो एसेट मान लो लीज

हो गया? आगे जाकर वो एसेट मान लो लीज पीरियड के दौरान खराब हो जाती है। तो मैं लेसर एज अ लेसर मैं उसको लेसी को कहूंगा तू जाने तेरा काम जाने। मुझे तो तू लीज

पीरियड जितना है उतने टाइम तक का किराया देता रहे। मुझे अब इससे कोई मतलब नहीं है कि वो एसेट खराब हो रही है। क्या हो रही है। तो उसके रिस्क एंड रिवॉर्ड लेसर ने

लेसी को ट्रांसफर कर दिए। मतलब लेसर ने अपने पास नाम के लिए ओनरशिप रखी। बाकी सारा का सारा उसने लेसी को ही ट्रांसफर कर दिया। लेसर ने अपने पास केवल नाम के लिए

ओनरशिप रखी है। उसने सारा का सारा लेसी को ही ट्रांसफर कर दिया। रिस्क रिवॉर्ड इसका मतलब उसको फाइनेंस लीज कहते हैं। ओनरशिप अपने पास रखेगा। लेकिन रिस्क एंड रिवॉर्ड

लेसी के पास चले गए। तो आगे जाकर एसेट खराब हो जाए कुछ और हो जाए उसके साथ में तो इसका मतलब उसकी रिस्क सारी लेसी को ही बियर करे करनी है। तो इसका मतलब ये फाइनेंस लीज है। अब दोस्तों ये जो फाइनेंस

लीज है ना ये इनडायरेक्टली लीज नाम है बट हकीकत में एक तरह से लेसी को अपन ने फाइनेंस किया है। मतलब लेसी को एसेट की जरूरत है और अपन ने उसको एसेट खरीद के दे

दी। पैसे इन्वेस्ट करके दे दी। अब अपन उससे जो पैसे ले रहे हैं ना वो हकीकत में पैसे जो है एलआर लीज रेंटल जिसको बोलते हैं वो हकीकत में लीज रेंटल नहीं होता। वो

हकीकत में क्या होता है? वो हकीकत के अंदर अपन उससे एक्चुअली के अंदर अपनी ईएमआई वसूल कर रहे हैं। जैसे अपन कोई फाइनेंस पे बैंक फाइनेंस पे कोई एसेट खरीदते हैं तो बैंक आपसे ईएमआई लेती है। ऐसे ही लेसर

आपसे ईएमआई वसूल कर रहा है। मतलब फाइनेंस रीज़ का मतलब इनडायरेक्टली वो एसेट पूरी तरह से लेसी की हो गई। आज से वह एसेट पूरी

तरह से लेसी की हो गई। इनडायरेक्टली केवल डॉक्यूमेंट के अंदर कानून की नजर में लॉ की नजर में लेसर उसका मालिक है। लेकिन इनडायरेक्टली पूरी की पूरी एसेट लेसी के

पास चली गई। इसका मतलब उसको फाइनेंस लीज बोलते हैं। तो क्या बताया मैंने आपको? उस

एसेट का मेन क्राइटेरिया क्या है? रिस्क

एंड रिवॉर्ड। अगर आपने रिस्क एंड रिवॉर्ड ट्रांसफर कर दिया तो वो फाइनेंस लीज़ है। अगर आपने ओनरशिप के साथ रिस्क एंड रिवॉर्ड भी अपने पास रखा मतलब उसको ट्रांसफर नहीं किया तो इसका मतलब एक तरीके से वो

ऑपरेटिंग लीज़ है। ऑपरेटिंग लीज़ को दोस्तों आप कह सकते हो कि ये नॉर्मल रेंट के जैसा हो गया। नॉर्मल जैसे किराए पर कोई चीज होती है तो आप उसको एक तरीके से ऑपरेटिंग लीज़ बोल सकते हो। बट फाइनेंस लीज है ना ये

नाम ही किराया है। हकीकत में तो ये फाइनेंस का अरेंजमेंट है। जिसके अंदर क्या हो रहा है? लेसी को एसेट की जरूरत है। उसने ईएमआई के बेसिस पे एक तरीके से उस एसेट को खरीद लिया। जिसके बदले अब लेसी

क्या कर रहा है? ईएमआई पे कर रहा है लेसर को। तो इसी तरह का ये अरेंजमेंट जो है वो फाइनेंस लीज है। अब ये जो फाइनेंस लीज है इसको समझाने का जो पैटर्न है एएस9 का उसके

अंदर एएस9 कहता है ये तो लो इसकी डेफिनेशन। कहीं भी डिफाइन ये रिस्क एंड रिवॉर्ड का लाइन लिखना ही लिखना है। चाहे कुछ भी हो जाए। अब उसने इसकी पांच कंडीशन बताई। कहा कि इन पांचों में से कोई भी

पूरी हो जाए वो फाइनेंस लीज बन जाएगा। एनीवन पांच कंडीशन बता दी। पांचों में से कोई भी पूरी हो इसका मतलब उसको फाइनेंस लीज बोलेंगे। सर कौन सी कंडीशन? सबसे पहली

कंडीशन है कि जितने टाइम के लिए अपन ने उसको लीज़ पे दिया है। लीज़ पीरियड। जितने टाइम के लिए अपन ने उसको लीज़ पे दिया है, इसको बोलेंगे लीज़ पीरियड। तो, वो लीज़

पीरियड जो है, वो एसेट की जो यूज़फुल लाइफ है, टोटल जो लाइफ है उसकी, उसका मेजर पार्ट कवर कर रहा है। सर मेजर पार्ट का मतलब क्या? मेजर पार्ट

के लिए अब एएस ने यहां पर कोई एग्जजेक्टली डिफाइन नहीं किया। लेकिन अपन कह सकते हैं 50% से ज्यादा। सर क्या मतलब हुआ? मान लो

एक एसेट है उसकी लाइफ है 10 ईयर। मतलब उसकी टोटल इकोनमिक यूज़फुल लाइफ 10 ईयर है। उसको 10 साल तक चलाया जा सकता है। अब मैं आपको वो एसेट लीज़ पे 10 साल के लिए दे रहा हूं। सोच के देखो। यानी 10 साल की एसेट है

और 10 साल के लिए मैंने किराए पर दे दिया। तो ये किराया थोड़ी होता है। इतनी लंबी पीरियड किराए का थोड़ी होता है। यानी कि मैंने उस एसेट को इनडायरेक्टली आपको पूरा दे दिया। सर 10 की जगह 9 साल तो भी फाइनेंस लीस्ट, 8 साल तो भी फाइनेंस

लीस्ट, सात साल तो भी फाइनेंस लीस्ट। अगर 50% से ज्यादा अगर मैंने उसको लीज पीरियड में कवर कर दिया उसकी यूज़फुल लाइफ को तो इसका मतलब उसको फाइनेंस लीज बोल देंगे।

दूसरे पॉइंट में आते हैं दोस्तों एसेट स्पेसिफाइड नेचर की है। जो मेड फॉर ईच अदर सॉरी सॉरी सॉरी मेड फॉर ईच अदर नहीं मेड फॉर लेसी मतलब वो बनी ही लेसी के लिए।

मतलब इस तरह की कोई एसेट का स्पेशल नेचर है जो बनी ही लेसी के लिए है। लेसी के अलावा कोई उसको और यूज नहीं कर सकता जब तक कि उसके अंदर कोई मेजर मॉडिफिकेशन या

चेंजेस ना कर दे। जैसे अपन ने कोई एक पर्टिकुलर कार्ट बनवाई जिसको लीज पे ले लिया। अब वो कार्ट अपन ने जो बनवाई है वो फूट ट्रक जो बनवाया है वो कस्टमाइज है।

अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से जिसको और कोई यूज़ नहीं करता। अपन ने मैन्युफैक्चरर से उसको अपने हिसाब से कस्टमाइज करवाया और उसके बाद अब लीज पे ले लिया। अब कोई दूसरा

उसको लीज पे नहीं ले सकता। दूसरा उसको यूज़ नहीं कर सकता। क्यों? क्योंकि वो बना ही उसके लिए तो मेड फॉर लेसी है। तो इसका मतलब फिर आप उसको 10 20 साल की लाइफ में

से चाहे पांच साल के लिए लीज पे दो, चाहे आठ साल के लिए दो, चाहे 10 साल के लिए दो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। क्यों? क्योंकि वो

बना ही लेसी के लिए है। तो फिर वो हमेशा फाइनेंस लीज के अंदर चला जाएगा। दोस्तों लेसी ने कहा लेसर ने कहा है लेसी को लेसर ने लेसी को कहा है कि एक काम करो मैं अभी

एग्रीमेंट जब कर रहा हूं कॉन्ट्रैक्ट जब कर रहा हूं तब तो मैं आपको ओनरशिप नहीं दूंगा अदरवाइज फिर वही लाइन वो लीज नहीं होकर सेल हो जाएगा लेकिन एक काम करो देखो

इसकी 10 साल की लाइफ है मैं आपको फोर ईयर के लिए लीज पे दे रहा हूं अब फोर ईयर का मतलब पहली कंडीशन पूरी नहीं हुई कौन सी 50% से ज्यादा वाली ठीक है मैं स्पेसिफाइड

नेचर की भी नहीं है कि जो मेड फॉर लेस लेसी है। लेकिन लेसर ने लेसी को एक कमिटमेंट कर दिया कि एक काम करो 4 साल तो आप लीज के ऊपर रख लो और 4 साल बाद जब लीज़ पीरियड एंड हो जाएगा, एक्सपायरी ऑफ़ लीज़

पीरियड हो जाएगा, टर्मिनेशन ऑफ लीज़ हो जाएगा तो उस टाइम पे मैं आपको इसकी ओनरशिप भी दे दूंगा। अब सोचो 4 साल तो लेसी वैसे रखेगा और जब लीज़ पीरियड खत्म हो जाएगा तो

उसको ओनरशिप भी मिल जाएगी। मतलब वो मालिक बन गया। तो यानी कि ये भी एक तरह से फाइनेंस लीज़ की कैटेगरी के अंदर चला जाएगा। दोस्तों लेसी को एक ऑप्शन मिला हुआ

है जब एग्रीमेंट हुआ था तभी से कि जब लीज पीरियड खत्म हो जाएगा 4 साल के बाद 4 साल के बाद तो लेसर ने ये तो नहीं कहा कि मैं ओनरशिप दे दूंगा लेकिन लेसर ने यह कहा है

लेसी को कि भ चाहे तो तू इस एसेट को खरीद सकता है लेसर ने लेसी को बोला है कि चाहे तो आप इस एसेट को खरीद सकते हो या फिर वापस लौटा देना कब जब लीज पीरियड एक्सपायर

हो जाए पूरा हो जाए तो आप चाहे तो एसेट को वापस लौटा देना चाहे खरीद लेना अब खरीद लेना उसमें जो प्राइस एग्रीड हो रखा है पहले कि हां कितने रुपए का तो वो स्पेशल

है दोस्तों यहां पर कह रखा है कि भ वो चीज जो ₹1 लाख की होगी उस टाइम पे फेयर वैल्यू ₹ लाख होगी उसको लेसर ने कह रखा है मैं तेरे को ₹1 लाख में दे दूंगा सोचो जो चीज

₹ लाख की होगी उसको ₹1 लाख में ही दे दिया जाएगा किसको लेसी को लेसी को ऑप्शन दे रखा है तो अब दोस्तों अगर लेसी को एसेट की जरूरत है 4 साल बाद भी

तो लेसी ऐसे क्या करेगा? जो चीज 3 लाख की है वो 1 लाख में मिल रही है और उस एसेट की जरूरत है तो वो उसको पक्का खरीद ही लेगा। पक्का खरीद ही लेगा। अगर मान लो उसको

जरूरत नहीं है लेसी को जरूरत नहीं है तो भी लेसी क्या करेगा? उसको खरीद के मार्केट में बेच आएगा। 3 लाख में ले 1 लाख में खरीद के और 3 लाख के अंदर मार्केट में बेच आएगा। क्या बुराई है? तो इसका मतलब कहने

को अपन उसको ऑप्शन दे रहे हैं। लेकिन अल्टीमेटली वो जो दो ऑप्शन है या तो वो वापस लौटाएगा या फिर खरीद लेगा। उसमें से लेसी के लिए हमेशा अट्रैक्टिव ऑप्शन खरीदने वाला है। और अपन मान के चलेंगे ऐसे

कंडीशन में अगर वो इंटेलिजेंट स्मार्ट लेसी है तो इसका मतलब पक्का उसको खरीद ही लेगा। तो यानी फिर से एसेट पूरी लेसी के पास चली गई जब कॉन्ट्रैक्ट हुआ तभी से 4 साल वैसे रहेगी और बाद में वो उसको खरीद

ही लेगा। कहने को ऑप्शन है लेकिन वो खरीदने वाले ऑप्शन को एक्सरसाइज करेगा। तो इसका मतलब एसेट पूरी लेसी की होगी। लास्ट पॉइंट दोस्तों एक मैथमेटिकल पॉइंट है जिसमें यहां पर एक टर्म आ रहा है पीवी ऑफ़

एमएलपी। अभी के लिए एक बार एमएलपी का पूरा नाम होता है मिनिमम लीज पेमेंट। मिनिमम लीज पेमेंट का मतलब जो लीज पीरियड है उसके दौरान लेसी की तरफ से जो भी पेमेंट किया

जाएगा क्या पेमेंट किया जाएगा? किराया पे

किया जाएगा 4 साल, 5 साल, 10 साल जितने साल का है। तो ऐसे केस में उसकी प्रेजेंट वैल्यू निकाल लो। अगर वो फेयर वैल्यू ऑफ़ एसेट को कवर कर रही है। लगभग उसके बराबर

है। ऑलमोस्ट उसके इक्वल है। अब ऑलमोस्ट का मतलब यहां पर फिर एएस ने डिफाइन नहीं किया। बट अपन कह सकते हैं 90% से ज्यादा। सर समझ में नहीं आया। बिल्कुल अभी समझाते

हैं। देखो एक एसेट है जो ₹1 लाख की आज अपन उसको लीज पे दे रहे हैं 3 साल के लिए। अब 3 साल में अपन उससे 44 लाख का किराया ले रहे हैं। मतलब 3 साल में टोटल मिलाकर 12 लाख ले रहे हैं। ये तो मैंने अभी पीवी

नहीं निकाली। बिना पीवी के एक बार देख रहे हैं। अल्टीमेटली अपने को इनकी पीवी निकाल के कंपेयर करना है। तो देखो 10 लाख की चीज है टोटली आज। और 3 साल में अपन उससे किराया ले रहे हैं

44 लाख टोटल मिलाकर 12 लाख 12 लाख का किराया 10 लाख के एसेट के ऊपर इतना किराया होता है क्या सोचो आप कहीं केब टैक्सी बुक करा के जा रहे हो और जब आपका ट्यूर खत्म

हो गया तो अब जो वो केव वाला है वो कह रहा है लाओ जी ₹5 लाख का किराया दे दो जिसमें भी फ्यूल आपने अलग से पे कराया उसने कहा बस टैक्सी को यूज़ करने का 5 लाख किराया

दे दो अपन ने पूछा भाई टैक्सी टोटल कितने की है कहा टैक्सी तो ₹45 लाख की है अरे भाई इतना किराया होता है क्या तो फिर इसका इसका मतलब ये फाइनेंस लीज है। इसका मतलब आप उसका टोटल पेमेंट कर रहे हो जिसमें

अगले को उसका प्रिंसिपल भी दे रहे हो और फाइनेंस के ऊपर क्या देना पड़ता है?

इंटरेस्ट भी। वो दोनों चीजें मिलाकर आप उसको 12 लाख दे रहे हो। अपन क्या करते हैं? इसकी पहले पीवी निकाल लेते हैं। तो

हैं? इसकी पहले पीवी निकाल लेते हैं। तो जो भी आपको इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न डिस्काउंटिंग रेट दे रखा होगा उससे अपन इसकी पीवी निकाल लेंगे। तो देखो यहां पर

ये पीवी निकल कर आया 99400 यानी जो एसेट की कॉस्ट है 10 लाख उसका 99% पैसा लेसी से ले लिया जाता है। किराया

इतना नहीं हो सकता। इसका मतलब ये फाइनेंस है। इसका मतलब आप उसको ईएमआई आप उसको जो लीज पे दे रहे हो उसके बदले ईएमआई उससे ले रहे हो। तो इसका मतलब फिर से ये क्या हो गया? फाइनेंस लीज़। तो जल्दी-जल्दी अपन

गया? फाइनेंस लीज़। तो जल्दी-जल्दी अपन फाइनेंस लीज़ के बारे में बात करते हैं। तो मैंने आपको बताया फाइनेंस लीज़ का दोस्तों मतलब क्या होता है? फाइनेंस लीज़ का मतलब जब उसके रिस्क एंड रिवॉर्ड लेसर से किसको

ट्रांसफर कर दिए जाते हैं? लेसी को विदाउट ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप। ओनरशिप को ट्रांसफर किए बिना। अब ये कैसे बनता है? पहला जो

लीज़ टर्म है, लीज़ पीरियड है वो मेजर लाइफ की जो एसेट की लाइफ है उसको कवर कर रहा हो। यानी 50% से ज्यादा। दूसरा जो लेसी पेमेंट कर रहा है वो लगभग उस एसेट की पूरी

फेयर वैल्यू को कवर कर रहा है। मतलब 90% से ज्यादा। तीसरा जो ओनरशिप है वो लेसी को दे दी जाएगी जब लीज पीरियड खत्म हो जाएगा। ओनरशिप के लिए ऑप्शन दे रखा है कि लेसी

उसको खरीद सकता है फेयर वैल्यू से कम पर या फिर एसेट बनी ही लेसी के लिए मेड फॉर लेसी। यानी ये सारे के सारे एग्जांपल हो गए फाइनेंस लीज के। अब अगर वो फाइनेंस लीज

नहीं है तो इसका मतलब वो ऑपरेटिंग लीज हो जाएगा। वो सिंपल किराए के जैसे है। इसका मतलब इसके अंदर रिस्क एंड रिवॉर्ड जो है वो सारे के सारे किसको बिलोंग करेंगे दोस्तों? वो अभी भी लेसर को बिलोंग

दोस्तों? वो अभी भी लेसर को बिलोंग करेंगे। यानी लेसर ने लेसी को वो ट्रांसफर नहीं किए। ना तो ओनरशिप दी ना रिस्क एंड रिवॉर्ड दिए। अब आते हैं दोस्तों यहां पर अकाउंटिंग कैसे करते हैं? अगर फाइनेंस लीज

है तो उसकी अकाउंटिंग कैसे करेंगे?

ऑपरेटिंग लीज़ है तो कैसे करेंगे? लेसर की

बुक में कैसे होगा? लेसी की बुक में कैसे होगा? तो पहले मैं आपको यहां पर ऑपरेटिंग

होगा? तो पहले मैं आपको यहां पर ऑपरेटिंग लीज के बारे में ले चलता हूं कि अगर अपने को ऑपरेटिंग लीज का अकाउंटिंग करना हो तो कैसे करेंगे? तो ऑपरेटिंग लीज का मतलब है

कैसे करेंगे? तो ऑपरेटिंग लीज का मतलब है दोस्तों सिंपल किराए की तरह सोचो। मैं आपको मेरे पास कोई एसेट है, मशीन है और मैं आपको वो किराए पर दे रहा हूं

ऑपरेटिंग लीज़ पे। नॉर्मल किराए के जैसे उसकी लाइफ है 10 साल। लेकिन मैंने आपको उसको 3 साल के लिए रेंज पे दे दिया। लीज़ पे दे दिया। और वो ऑपरेटिंग लीज़ है। रिस्क रिवॉर्ड मैंने उसके मेरे पास में रखे हुए

हैं। तो ऐसे केस में एएस कहता है कि सबसे पहली बात एसेट जो है वो लेसर की बुक में रिकॉर्ड रहेगी। एसेट किसकी बुक में रहेगी?

लेसर। तो एसेट को लेसर की बुक में रखना है। दूसरी चीज उसके ऊपर डेप्रिसिएशन भी लेसर ही लगाएगा। जो मालिक है, मालिक कौन है? माई बाप कौन है? उस एसेट का? लेसर है।

है? माई बाप कौन है? उस एसेट का? लेसर है।

लेसर ने तो लेसी को बस उसको किराए पर दे रखा है। आप जब कोई केब बुक करा के कहीं पे जा रहे हो टूर पे तो उस गाड़ी का जो ओनरशिप है अकाउंटिंग पॉइंट ऑफ उसे वो कौन

दिखाएगा? जो केब का ओनर है वही तो दिखाएगा

दिखाएगा? जो केब का ओनर है वही तो दिखाएगा जो मालिक है उसका वही उसके ऊपर डेप्रिसिएशन क्लेम करेगा। अब उसके अंदर जो एलआर है लीज रेंटल वो क्या हो जाएगा? वो

लेसर का इनकम हो जाएगा और लेसी का खर्चा दोनों अपनेप पीएल में उसको ले जाएंगे। लेसर उसको इनकम के तौर पर पीएल में क्रेडिट कर देगा और लेस उसको खर्चे के तौर

पर एक्सपेंसेस के तौर पर पीएल के अंदर डेबिट कर देगा। बस यही तो कांसेप्ट है। बट यहां पर एएस कहता है ऐसे मजा नहीं आ रहा। थोड़ा सा इसमें ट्विस्ट लाते हैं। वो क्या

अपना मान लीजिए एनुअल रेंट है ₹1 एक लाख का। मतलब मैं आपसे हर साल ₹1 एक लाख का रेंट लूंगा। यानी टोटल मिलाकर मैं 3 लाख लूंगा। अब आम जिंदगी क्या हो गई कि 1 लाख

का किराया मैंने आपको पे किया और फिर मैं इसको इसी साल पीएल में ले जाऊंगा। फिर किराया पे करा फिर पीएल में ले जाऊंगा। फिर रेंट पे करा और फिर मैं पीएल में लेके जाऊंगा। ये हो गया इसका आम जिंदगी। लेकिन

अब इसी को थोड़ा सा मेंटोस जिंदगी में बदलो। यस कह रहा है मजा नहीं आ रहा। एक काम करो मैचिंग कांसेप्ट को लगाओ। मैचिंग कांसेप्ट क्या? बेनिफिट को खर्चे के साथ

कांसेप्ट क्या? बेनिफिट को खर्चे के साथ मैच करो। ये जो टोटल आपका रेंट है ₹3 लाख का इसको पीएल में है ना प्रपोशननेटली लेकर जाओ पीएल में। मतलब ये मत देखो कि किराया

एक एक लाख है और वो रेस्पेक्टिव ईयर में पीएल में चला जाएगा। किराया 1 लाख है लेकिन आप उसको है ना पीएल के अंदर एलोकेट करके लेके जाओ टोटल रेंज जो है उसको

एलोकेट करके कैसे जो एसेट है उसके आउटपुट के रेश्यो में एसेट के आउटपुट के रेश्यो में मतलब उस एसेट का जो टोटल आउटपुट है लीज पीरियड में मान लो उस एसेट से अपने को

टोटल मिलाकर 50000 यूनिट बननी है और उसमें से मैं पहले साल 10,000 यूनिट बनाऊंगा फिर 20000 यूनिट बनाऊंगा और फिर 20000 यूनिट बनाऊंगा तो ईएस कह रहा है कि

भ आप ये जो किराया पे कर रहे हो ₹1 एक लाख का हर साल टोटल मिलाकर 3 लाख उससे आपको क्या फायदा मिला? आप उससे पहले साल 10,000 यूनिट बना रहे हो फिर 20,000 फिर 20,000

तो इसी रेश्यो में आप इस किराए को एलोकेट कर दो और उसके बाद पीएल में लेके जाओ। यानी ये 3 लाख का जो किराया है इसमें से पहले साल क्या बन गया? 10,000 यूनिट बनाई।

कितने में से? 500 में से तो 10/50 इसी तरह से दूसरे साल 3 लाख * 20/50 थर्ड ईयर फिर से 3 लाख * 20/50 तो इस तरीके से

अपन इसका पीएल का अमाउंट निकालेंगे तो पीएल का अमाउंट जो है वो ईयर वाइज जो एलआर है उसके बेसिस पे नहीं जाएगा। अगर आपको क्वेश्चन में उसके ईयर वाइज आउटपुट वगैरह

दे रखे हैं कि मशीन के इतने इतने आउटपुट है तो आप क्या करो उसको आउटपुट के रेश्यो में पीएल के अंदर लेके जाओ। कैसे जो आपका टोटल रीज रेंट है उसको मल्टीप्लाई कर दो

रेस्पेक्टिव ईयर का आउटपुट जिसका निकाल रहे हो और डिवाइड बाय टोटल आउटपुट जैसे यहां पर पहले साल 10/50 फिर दूसरे साल 20/50 फिर तीसरे साल 20/50 तो इसके बेसिस

पे थोड़ा-थोड़ा करके पीएल में जाएगा। अब पीएल में जाएगा वो अमाउंट अलग है। और आपका किराए का अमाउंट अलग है। आपने 1 लाख पे करा लेकिन पीएल में पहले साल कितना जा रहा

है? जब मैंने उसका कैलकुलेशन किया 3 लाख *

है? जब मैंने उसका कैलकुलेशन किया 3 लाख * 10000 / 50000 तो पहले साल पीएल में 60 गया लेकिन किराया कितने का था 1 लाख का तो

यानी 40000 का डिफरेंस आ गया तो ये 40000 का जो डिफरेंस आ गया इसका एक नया अकाउंट खोल लेंगे लीज इक्वलाइजेशन इसको अपन लीज इक्वलाइजेशन अकाउंट में एडजस्ट कर देंगे

केवल एक टाइमिंग डिफरेंस है जो एक बार ओपन हो रहा है लेकिन उसी लीज पीरियड में अपने आप ये खत्म भी हो जाएगा क्यों क्योंकि अपने को अल्टीमेटली पीएल में भी 3 लाख लेके जाना है और खर्च और आपका किराया भी

टोटल 3 लाख है तो होना तो 3 लाख है बस वो ईयर वाइज अपन ने चेंज कर दिया तो आपको उसको एलोकेट करके लेके जाना पड़ेगा अब अपन इसकी एंट्री कैसे बनाएंगे लेसी की बुक में

तो सबसे पहले अपन लेसी की बुक में एंट्री सीखते हैं कैसे करेंगे तो दोस्तों लेसी उस एसेट को अपने पास तो रिकॉर्ड करेगा नहीं डेप्रिसिएशन लगाएगा नहीं ध्यान रखना लेसी

ने तो उसको किराए पे लिया है तो लेसी तो अपनी तरफ से केवल क्या करेगा जो किराया पे करा बस उसी की एंट्री बनाएगा। तो उसी की एंट्री क्या बनाएगा? तो यहां पर लीज रेंट

अकाउंट डेबिट ध्यान रखना लीज रेंट का खर्चा बुक करेगा। अब ये खर्चा वो एलोकेटेड वाला बुक करेगा। यानी पहले साल अभी अपन ने कैलकुलेशन किया था कि 60000 तो 60 के वो

बुक करेगा। लेकिन अपन पेमेंट तो करेंगे पूरे 1 लाख का। तो बाकी 40,000 अभी-अभी मैंने क्या कहा था? लीज इक्वलाइजेशन

अकाउंट में चला जाएगा। तो वो 40,000 का लीज इक्वलाइजेशन में इस तरीके से चला जाएगा। तो आप एंट्री क्या बनाओगे? लीज

रेंज डेबिट जो एलोकेटेड अमाउंट है जो एलोकेशन से आया होगा। टू बैंक आपको पता है कि भ पूरा जाएगा। अब जो डिफरेंस है चाहे इधर बचे चाहे इधर चाहे डेबिट में बचे चाहे

क्रेडिट में आपको उसको लीज इक्वलाइजेशन अकाउंट के अंदर एडजस्ट कर देना है। इधर वो जो किराए का खर्चा था जो आपने डेबिट किया था इसी को आप पीएल में लेके चले जाओ। एंट्री बना दो पीएल अकाउंट डेबिट टू लीज

रेंट। इस तरीके से सिंपल सी लेसी अपनी बुक में एंट्रियां बनाएगा। सिंपल सा काम। अब लेसी के बाद अपन दोस्तों आ गए लेसर की बुक में। लेसर अपनी बुक में क्या करेगा? तो अब

सुनो ध्यान से। लेसर मालिक है एसेट का। तो ऐसे केस में लेसर सबसे पहले अपनी बुक में एसेट को रिकॉग्नाइज करेगा। अब एसेट को रिकॉग्नाइज करने के दौरान यहां पर एक छोटी

सी बात आपको ध्यान रखनी है। कई बार क्वेश्चन आपको यह कहेगा कि लेसर जो है वो क्या था? उसके पास ये एसेट पहले इन्वेंटरी

क्या था? उसके पास ये एसेट पहले इन्वेंटरी थी। अब उसने उसको लीज़ पे देना शुरू कर दिया। तो लीज़ पे देना शुरू कर दिया। तो उस

इन्वेंटरी को अब आपको पीपीई के अंदर बदलना पड़ेगा। सर क्या मतलब हुआ समझे नहीं। अपने एक कार के शोरूम में गए जहां पर कार का डीलिंग का डीलर है जो कार बेचने का काम

करता है। लेकिन कई बार उन्हीं कार में से कुछ कार को वो किराए पर देना शुरू कर देता है। आजकल तो हर जगह ऐसा होता है। इवन गारमेंट्स के अंदर जो आजकल पार्टी वियर्स होते हैं उसके अंदर चाहे आप खरीद के ले आओ

चाहे आप उनको रेंट पे लेकर आ जाओ। आजकल हर जगह होता है ऐसा। तो उसके पास में लेसर के पास में वो जो कार का डीलर है उसके पास में इन्वेंटरी पड़ी है कार की। लेकिन अपन

ने उससे रिक्वेस्ट किया कि भ आप इसे हमें है ना लीज पे दे दो ऑपरेटिंग लीज पे। तो जैसे ही उसने डिसीजन लिया कि ठीक है मैं आपको इसको कार को लीज पे दे देता हूं। तो वो इन्वेंटरी इन्वेंटरी नहीं रही। वो अब

पीपीई हो गई। याद करो एएस 10 में पीपीई का डेफिनेशन अपन ने कहा था कि भ टेंजिबल होना चाहिए। लाइफ 12 मंथ से ज्यादा होना चाहिए। और जिसको रखा हुआ है आपने अपने बिजनेस के अंदर यूज करने के लिए चाहे वो

एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क हो चाहे प्रोडक्शन का हो चाहे सर्विस रेंडर का उसके अंदर एक तीसरा यूज़ और था कि आप उसको रेंटल पे देने का काम करते हो तो आपने जब इसको लीज पे

देना शुरू किया तो ये पीपीई बन गया तो आपको इसको इन्वेंटरी से पीपीई बनाना पड़ेगा इन्वेंटरी से पीपीई बनाना पड़ेगा तो जब आप इसको इन्वेंटरी से पीपीई बनाओगे तो क्या

करोगे पीपीई को डेबिट कर दोगे अब ये पीपीई कौन सी है जो आप ऑपरेटिंग लीस्ट पे देते हो तो पीपीई ऑन ऑपरेटिंग लिस्ट डेबिट ताकि उस पीपी को आइडेंटिफाई कर सके और टू

इन्वेंटरी। अब इन्वेंटरी अकाउंट होता नहीं बुक में। आपने सबने पढ़ा हुआ है कि अपन जब कोई इन्वेंटरी खरीद के लाते हैं तो परचेस को डेबिट करते हैं और सेल करते हैं तो सेल्स अकाउंट को क्रेडिट करते हैं। लेकिन

वो सेल के अलावा और कहीं यूज हो जाती है तो परचेस को क्या कर दो? क्रेडिट। तो जो उस एसेट की अपनी कॉस्ट है उससे क्या करेंगे? पीपी डेबिट टू परचेस। इससे वो

करेंगे? पीपी डेबिट टू परचेस। इससे वो आपकी इन्वेंटरी पीपीई के अंदर कन्वर्ट हो जाएगी। ठीक है सर। अब उसके बाद क्या करेंगे? उसके बाद में यहां पर आ गए ईयर के

करेंगे? उसके बाद में यहां पर आ गए ईयर के एंड पे। सबसे पहले अपने को रेंट मिला। उस रेंट में से जितना पीएल में जाएगा जो कि एलोकेशन के बेसिस पे जाएगा। तो यहां पर

एंट्री क्या बना देंगे? बैंक डेबिट जो अपना इस साल का रेंट है उस रेंट में से जितना पीएल में जाना है एलोकेशन के बेसिस पे वो पीएल में। बाकी डिफरेंस यहां पर भी

लीज इक्वलाइजेशन में चला जाएगा। इधर ये जो पीएल में जाना है ये इनकम है तो लीज रेंट अकाउंट डेबिट टू पीएल एसेट के ऊपर एंड ऑफ द ईयर क्या चार्ज कर देंगे डेप्रिसिएशन लगा देंगे जो भी क्वेश्चंस के डेटा है

उसके अकॉर्डिंगली मेथड वगैरह जो भी क्वेश्चन बताएगा तो डेप्रिसिएशन अकाउंट डेबिट टू पीपी और इस डेप्रिसिएशन को भी एंड ऑफ द ईयर पीएल में चाहे तो यहीं पीएल लिख दो मैंने अलग से एंट्री बना कर दे दी

तो इस तरीके से ये आपका ऑपरेटिंग लीज़ का अकाउंटिंग हो गया किसकी बुक में लेसर की बुक में और लेसी की बुक में लेसर एसेट दिखाएगा लेसर डेप्रिसिएशन लगाएगा जो लीज

रेंटल है वो लेसर की इनकम और लेसी का खर्चा लेसर की इनकम और लेसी का खर्चा लेकिन वो पीएल में ईयर वाइज कितना जाएगा तो आपको उसको टोटल को एलोकेट करना है इन द

प्रपोर्शन ऑफ आउटपुट तो प्रपोर्शन के जो आउटपुट का प्रपोर्शन है लीस्ट पीरियड तक का उसी के हिसाब से आपको उसको एलोकेट करके दिखाना है ये छोटी सी बात आपको इसके अंदर ध्यान रखने की जरूरत है हां सर रख लेंगे

तो देखो जरा अपन यहां पर क्वेश्चन आंसर्स में चलते हैं पहले एक बार अपन लीजिंग ये जो ऑपरेटिंग लिस्ट के क्वेश्चंस हैं देखते हैं क्या है। एक आधा ही क्वेश्चन होता है। इसके बारे में कोई ज्यादा नहीं होता।

देखिए ये क्वेश्चन दे रखा है अपने को। ये रहा अ मशीन वाज़ गिवन ऑन थ्री ईयर ऑपरेटिंग लीज़ बाय डीलर ऑफ मशीन फॉर इक्वल लीज़ रेंटल ईल्ड 30%।

कह रहा है कि एक मशीन ऑपरेटिंग लीज़ पे दी गई 3 साल के लिए। डीलर ऑफ मशीन। मशीन का जो डीलर है उसने ये लीज पे दी है। मतलब उसका मशीन का बिजनेस है उसी को अब लीज पे

देना उसने शुरू कर दिया। और जिस पे वो जो रेंट चार्ज करेगा वो रेंट कितना चार्ज करेगा? वो 30% की रेट से चार्ज करेगा।

करेगा? वो 30% की रेट से चार्ज करेगा। कैसे? टोटल जो रेंट होगा वो इस तरीके से

कैसे? टोटल जो रेंट होगा वो इस तरीके से बनाएगा कि जो एसेट की कॉस्ट है उसमें उसको 30% का मार्जिन मिल जाए। यानी एसेट की

कॉस्ट है 150 तो उसी के ऊपर 30% यानी 45,000 इसका मतलब वो टोटल मिलाकर 195 का रेंट चार्ज करेगा। अब ध्यान देना ये जो

टोटल रेंट है वो आपका लीज पीरियड का नहीं है। ये उसकी पूरी एसेट की जिंदगी का है। क्यों? क्योंकि ये कॉस्ट जो है वो पूरी

क्यों? क्योंकि ये कॉस्ट जो है वो पूरी जिंदगी की है। तो ऐसे केस में अपन ने जब प्रॉफिट मार्जिन ऐड करके अपन ने रेंट निकाला तो कह रहा है उसकी 5 साल की लाइफ है। अपन उसमें से 3 साल के लिए ऑपरेटिंग

पे दे रहे हैं। देखो साफ लिखा हुआ है। वैसे गलत है। पांच में से 3 साल मतलब 60% लाइफ कवर हो गई। तो फिर तो ये फाइनेंस लीज हो जाता है। लेकिन क्वेश्चन कह रहा है नहीं नहीं आप तो इसको ऑपरेटिंग लीज के

बेसिस पे ही करो। तो ठीक है ऑपरेटिंग लीज़ के बेसिस पे कर लेंगे। तो आपको कह रहा है फाइव ईयर में से थ्री ईयर के लिए लीस्ट पे दे रहे हैं। अब जो उस एसेट का आउटपुट है

वो ईयर वाइज कितना है? 40 50 60 80 और 70। तो अब आपको यहां पर कह रहा है डेप्रिसिएशन लगाना है एसएलएम बेसिस पे लेकिन इन प्रपोर्शन ऑफ़ आउटपुट। बहुत इंपॉर्टेंट है।

एसएलएम तो लिख दिया लेकिन इन प्रपोर्शन ऑफ़ आउटपुट। तो आपको तीन चीजें कैलकुलेट करने के लिए बोला। पहला एनुअल लीज रेंटल कैलकुलेट कर दो। कर देंगे। क्या ही दिक्कत

है। दूसरा रेंट इनकम टू बी रिकॉग्नाइज। आप रेंट की इनकम को पीएल में कितना लेके जाओगे वो बता दो और डेप्रिसिएशन बता दो। ईयर वाइज कितना होगा? सबसे पहले एनुअल

रेंट कैलकुलेट करेंगे। कैसे निकालेंगे? तो

देखो जरा 150 का कॉस्ट 45 का उस पे मार्जिन तो 195 का टोटल किराया। कितने ईयर का? फाइव का। अब फाइव ईयर में भी एक

का? फाइव का। अब फाइव ईयर में भी एक ट्विस्ट है। यहां पर यूनिट वाइज डेटा दे रखा है। तो आपको ये ध्यान रखना है 5 साल का ये रेंट तो है लेकिन उस मशीन की लाइफ

अब आप उसको ईयर के हिसाब से मत सोचो। आप उसको यूनिट के हिसाब से सोचो। तो यूनिट के हिसाब से देखो जरा 40 50 60 80 और 70 तो

अगर मैं इन सबका टोटल लगाऊं तो ये 3 लाख यूनिट है। यानी ये 195 का किराया मैं 3 लाख यूनिट का चार्ज करूंगा। जिसमें से मैं पहले 3 साल तक उसको लीज पे दे रहा हूं

जिसमें 40 50 और 60 40 50 और 60 यानी मैं 3 साल में 150000 यूनिट के लिए दे रहा हूं। तो ऐसे केस में अपन अब इसकी कैलकुलेशन कैसे करेंगे? तो

वही चीज मैं अब आपको यहां पर एक्सप्लेन करता हूं। तो देखो कैसे कैलकुलेशन हुई?

सबसे पहले अपन ने यहां पर देखा कि टोटल मिलाकर 195 का किराया आ गया। कितनी यूनिट का? पूरी

लाइफ की 3 लाख यूनिट का। अपन लीज पीरियड है 3 ईयर तो उसमें अपन 150000 यूनिट प्रोड्यूस कर रहे हैं। तो 150 में प्रपोशननेटली एलोकेट कर दिया तो 150000

यूनिट 3 लाख में से तो किराए का जस्ट हाफ हो गया यानी 97500 3 साल का किराया कह रहा है इक्वल लीज रेंट निकाल लो तो डिवाइड थ्री से कर दिया यानी 32500 पर एनम का

रेंट आ गया 32500 पर एनम का रेंट आ गया ठीक है सर अब आगे बढ़े आपको कह रहा है कितना पीएल में जाएगा वो कैलकुलेट करो तो मैंने आपको बताया था टोटल रेंट है 97500

का इसको यूनिट के रेश्यो में एलोकेट कर दो। कौन सी यूनिट जो लीज पीरियड की है। लीज पीरियड की अगर आपको यूनिट पता हो तो पहले तीन साल की 40 50 60 तो इसी रेश्यो

में इसको बांट दो जो 97500 का है तो ये पीएल में आ जाएगा। तो देखो अपना आउटपुट है पहले साल का 40 50 60 टोटल 150 रेंट टोटल

है 97500 का तो उसी को प्रपोशननेटली ईयर वाइज एलोकेट कर दिया 40/ 150 50/ 150 और 60/ 150 और इसी के बेसिस पे ये कैलकुलेशन

बनकर आ गई ईयर वाइज की कह रहा है डेप्रिसिएशन निकालो एसएलएम से तो एसएलएम से डेप्रिसिएशन कैसे निकालेंगे पहली बात डेप्रिसिएशन एसेट की कॉस्ट पे निकलेगा 3 लाख की सैलरीज कुछ इसके अंदर है नहीं अब

इसके अंदर आपको कह रहा है एसएलएम से तो निकाल निकालो लेकिन आउटपुट के प्रपोर्शन में इसका मतलब आउटपुट के प्रपोर्शन में इसका मतलब टोटल आउटपुट कितना है एसेट का 3

लाख कितना है 3 लाख उस 3 लाख में से पहले साल की यूनिट है 400 और कॉस्ट एसेट की 150 तो उसी 150 को आउटपुट के प्रपोर्शन में

एलोकेट करके ईयर वाइज का अपन ने ये डेप्रिसिएशन कैलकुलेट करके निकाल लिया। आई होप आपको बात दोस्तों समझ में आ गई। ये हो गया सारा का सारा डिस्कशन किसके बारे में?

ऑपरेटिंग लीज़ के बारे में। एक एग्जांपल भी मैंने आपको कांसेप्ट नोट्स में दे रखा है। तो आप इजीली बिल्कुल उसको आराम से कवर कर सकते हैं। बिल्कुल आसान है। अब अपन आते हैं फाइनेंस लीज़ के अंदर। फाइनेंस लीज़ की

अकाउंटिंग कैसे होती है? ये सबसे

इंपॉर्टेंट हिस्सा होता है लीजिंग का। हालांकि सारा ही इंपॉर्टेंट है। लीज़ के अंदर कुछ भी पढ़ते हो बट ये वाला हिस्सा स्पेशली इंपॉर्टेंट होता है। फाइनेंस लीज़ का मतलब मैंने आपको बताया था। आज से वो

एसेट पूरी लेसी की होगी इनडायरेक्टली। लेसर केवल नाम का मालिक है। लेसर केवल नाम का मालिक है। ऐसे केस में वो एसेट पूरी की पूरी इनडायरेक्टली लेसी की हो जाती है। तो

ऐसी सिचुएशन में जब आप फाइनेंस लीज की अकाउंटिंग करते हो तो उसके अंदर क्या करना है दोस्तों? फाइनेंस लीज के अंदर एसेट

है दोस्तों? फाइनेंस लीज के अंदर एसेट लेसी की बुक में रिकॉर्ड होती है। सब्सटेंस ओवरफॉर्म रियलिटी ओवर लीगलिटी। रियलिटी के अंदर मालिक लेसी बन चुका। लेसर

केवल लीगली मालिक है। नाम का मालिक है डॉक्यूमेंट के अंदर। तो अपन यहां पर एसेट इस बार लेसी की बुक में रिकॉर्ड करेंगे। डेप्रिसिएशन भी फिर लेसी ही लगाएगा। तो

ध्यान देना एसेट भी लेसी की बुक में रहेगी। डेप्रिसिएशन भी उसका लेसी ही लगाएगा। जो एलआर है लीज रेंटल वो लीज रेंटल नहीं वो हकीकत में ईएमआई है।

इंस्टॉलमेंट है। यानी कि उस लीज रेंटल के अंदर दो कॉम्पोनेंट है प्रिंसिपल का और इंटरेस्ट का। तो ये सारी चीजें अपने को अब यहां पर सीखनी है। कैसे होगा? ऑपरेटिंग

लीज बड़ा ही सिंपल फाइनेंस लीज अगर ढंग से समझ लेते हो जैसे मैं एक्सप्लेन कर रहा हूं आपके लिए बिल्कुल नॉर्मल बन जाएगा मतलब एडवांस से नॉर्मल टॉपिक बन जाएगा एडवांस एकाउंटिंग से नॉर्मल एकाउंटिंग हो

जाएगी ठीक है सर बताइए देखिए फाइनेंस लीज में क्या करते हैं तो फाइनेंस लीज में मैंने आपको बताया कि एसेट और उसके ऊपर का जो डेप्रिसिएशन है वो सारा का सारा काम इस

बार लेसी करेगा। ठीक है? तो अब सबसे पहला क्वेश्चन ये बना कि लेसी सर उसको कितने रुपए पे रिकॉर्ड करेगा? ध्यान देना। सबसे पहला अपना क्वेश्चन बना कि लेसी उसको

कितने रुपए पे रिकॉर्ड करेगा? सबसे पहले

इसी चीज को देखेंगे। तो यहां पर लेसी उसको कितने रुपए पे रिकॉर्ड करेगा? तो आपको दो कैलकुलेशन करनी है। एक कैलकुलेशन का नाम है एमएलपी जिसको अपन पूरा बोलेंगे पीवी ऑफ़

एमएलपी और दूसरा कैलकुलेशन फेयर वैल्यू ऑफ़ एसेट। फेयर वैल्यू ऑफ़ एसेट आपको क्वेश्चन में गिवन होगी। इसका आपको कुछ भी नहीं करना। लेकिन आपको यहां पर पीवी ऑफ एमएलपी

निकालना है। सर ये एमएलपी क्या होता है?

मिनिमम लीज पेमेंट्स। मिनिमम लीज पेमेंट का मतलब लेसी जो भी पेमेंट्स करेगा लेसी जो भी पेमेंट करेगा उनका अमाउंट ही मिनिमम लीज पेमेंट होता है। अब लेसी क्या पेमेंट

करेगा उसको सुनो ध्यान से। लेसी आपको पेमेंट करेगा। एक तो ईयर वाइज एलआर लीज रेंटल जो इक्वल अनक्वल जो भी क्वेश्चन ने बताया ईयर वाइज सेम भी हो सकता है। जरूरी

नहीं हर बार ईयर वाइज सेम रेंट हो। तो एक तो एलआर पेमेंट करेगा। इसके अलावा एक कांसेप्ट आती है यहां पर जीआरवी गारंटीड रेसिडुअल वैल्यू सर ये जीआरवी क्या होता

है इसको सुनो गारंटीड रेसिडुअल वैल्यू का मतलब क्या होता है जब लीज़ पीरियड खत्म हो जाएगा 4 साल के लिए मैं आपको एसेट लीज़ पे दे रहा हूं तो लीज़ पीरियड खत्म हो जाएगा

तो लीज़ पीरियड खत्म होने के बाद जब वो फाइनेंस लीज़ होती है तो कहने को बच्चे भले ही उसकी लाइफ अभी भी थोड़ी बहुत और बची हुई हो लेकिन अल्टीमेटली वो एसेट है ना कबाड़ के जैसी होती है बड़ी हालत उसकी खराब होती

है तो कहने को वो फाइनेंस भले ही उसकी लाइफ बची हुई है। तो जब लीज पीरियड खत्म हो जाता है तो उस टाइम पे यहां पर देखा जाएगा कि भ उसको कितने रुपए में बेचा जा

सकता है। तो मालिक कौन है? लेसर। तो लेसर देखेगा कि भ मैं उस एसेट को कितने रुपए में बेच सकता हूं। तो इसी चीज को अपन यहां पर बोलेंगे ईआरवी। ध्यान रखना जीआरवी नहीं

ईआरवी। एक्सपेक्टेड रेसिडुअल वैल्यू। एक्सपेक्टेड रेसिडुअल वैल्यू। मतलब लेसर के पॉइंट ऑफ व्यू से लेसर उसको कितने रुपए में सेल कर सकता है? उसी चीज को अपन यहां

पर ईआर भी बोलते हैं। अब लेसर ने सोच रखा है कि भ जब लीज पीरियड 4 साल का खत्म हो जाएगा तो मैं एसेट उससे वापस ले लूंगा और वापस लेके इसको ₹1 लाख में बाजार में बेच

के आऊंगा। मैं इस एसेट को ₹1 लाख में मार्केट के अंदर बेच सकता हूं। तो इसी चीज को अपन यहां पर ₹1 लाख को क्या बोलेंगे?

ईआरवी। अब इसी ईआरवी के दो हिस्से होते हैं। एक जीआरवी और एक होता है यूआरवी। अब ये जीआरवी और यूआरवी क्या होता है? इसको

समझो। जीआरवी का मतलब लेसी ने अपनी तरफ से एक ऑफर अपने को दिया हुआ है। लेसी ने कह रखा है कि भ देखो लीज पीरियड 4 साल का खत्म हो जाएगा तो मैं आपसे ये एसेट

है ना ₹0000 में खरीद लूंगा। आप चाहे तो मुझे इसको ₹70,000 में बेच देना। मतलब लेसर उम्मीद करके बैठा है कि मैं बाजार में ₹1 लाख में बेच के आऊंगा। लेकिन एक

ऑफर अपने पास पहले से आया हुआ रहता है और वो लेसी की तरफ से आया हुआ रहता है। लेसी ने आपको कह रखा है कि भ मैं ₹0000 में खरीद लूंगा। यानी भले ही ₹1 लाख अपने को

मिले ना मिले। ₹1 लाख अपने को मिले ना मिले लेकिन यह पक्का है कि ₹000 तो अब मिलने ही मिलने क्योंकि ये ऑफर तो अपने पास है ही किसकी तरफ से आया भाई? लेसी की

तरफ से। तो ये रेसिडुअल वैल्यू की अपने को गारंटी हो गई कि भ इतना पैसा तो अपने को मिल ही जाएगा। तो इसी चीज को बोलते हैं जीआरबी। गारंटेड रेसिडुअल वैल्यू। मैं

आपको दोस्तों नोट्स से भी दिखा देता हूं कैसे मैंने आपको एक्सप्लेन किया हुआ है। तो यह देखो यह है रेसिडुअल वैल्यू के बारे में बातचीत चल रही है कि रेसिडुअल वैल्यू

एक तरीके से क्या होती है? तो सबसे पहला होता है एक्सपेक्टेड रेसिडुअल वैल्यू मतलब उसका जब लीज पीरियड खत्म हो जाएगा तो लीज पीरियड खत्म होने पे उसका जो सेलवेज है वो

कितना होगा? अब उसमें से एक्सपेक्टेड

कितना होगा? अब उसमें से एक्सपेक्टेड रेसिडुअल वैल्यू है 1400 सपोज 1400 है। ठीक है? समझ में आ गई? मतलब लेसर यह सोच

ठीक है? समझ में आ गई? मतलब लेसर यह सोच के बैठा है कि मुझे ₹1400 मिल जाएंगे। तो यह ईआरवी एक्सपेक्टेड लेसर की तरफ से लेसी ने कह रखा है भ मैं तो ₹1 लाख में इसको

खरीदूंगा। तो लेसी ने ₹1 लाख आपको ऑफर कर रखा है। तो ये 1 लाख क्या हो गया? जीआरवी

हो गया। लेकिन अपन तो सोच के बैठे हैं कि ₹00 एक्स्ट्रा और मिलेगा। लेकिन क्या उसकी कोई गारंटी है क्या कि जब लीज पीरियड खत्म हो जाएगा बाजार में बेच के आओगे तो एक 40 में बिक जाएगी। एक्सपेक्टेशंस है ना। तो

40 जो आप एक्स्ट्रा सोच के बैठे हो। इसी को बोलते हैं अपन यूआरवी अनगारंटेड रेसिडुअल वैल्यू। तो यह जो रेसिडुअल वैल्यू है उसके तीन कॉमोनेंट हो गए ईआरवी मतलब टोटल कितने में बिक सकती है मार्केट

के अंदर जीआरवी लेसी कितने में खरीदने को तैयार है और जो एक्स्ट्रा अपन उम्मीद लगा कर बैठे हैं ओवर द जीआरवी जो ईआरवी का पार्ट है उसको अपन बोलेंगे यहां पर यूआरवी

कोई भी कैलकुलेशन दोस्तों अपन लेसी के पॉइंट ऑफ व्यू से कर रहे हैं लेसी की बुक में तो उसको केवल जीआरवी से मतलब है कोई भी कैलकुलेशन अपन लेसर के पॉइंट ऑफ व्यू

से कर रहे हैं तो ऐसे केस में उसको जीआरवी और यूआरवी दोनों से कंसर्न है। ऑब्वियस सी बात है। दिमाग में रखो। एक आगे जाकर बड़ा सा कंफ्यूजन ऐसे स्टूडेंट के डाउट कई ऐसे स्टूडेंट के डाउट आते हैं कि सर है ना

इसके अंदर आंसर में कभी तो ये दोनों कैलकुलेशन में लेता है। कभी केवल यहां पर सर ये जीआर भी लेता है। हमें क्या करना होता है? अरे भाई बिल्कुल सिंपल सी बात

होता है? अरे भाई बिल्कुल सिंपल सी बात है। कोई भी कैलकुलेशन अगर लेसी के लिए कर रहे हो तो जीआरवी ध्यान रखना है। अगर लेसर के लिए कर रहे हो तो उसको जीआरवी यूआरवी

सबसे मतलब होता है। इसी तरह की कुछ टर्मिनोलॉजी और होती है जिसके बारे में अपन बात करें। तो यहां पर अब सुनो ध्यान से। सबसे पहला पॉइंट बनकर आया कि लेसी उस

एसेट को अपनी बुक में कितने पे रिकॉर्ड करेगा? तो लेसी कितने में रिकॉर्ड करेगा?

करेगा? तो लेसी कितने में रिकॉर्ड करेगा?

तो मैंने आपको बताया आप कैलकुलेट कर लो एमएलपी। एमएलपी क्या होता है? एलआर हर साल जो वो एलआर पे करेगा और एक उसने जो कमिटमेंट कर रखा है जीआरवी का इनकी पीवी

निकाल लो। इसको बोलते हैं अपन पीवी ऑफ एमएलपी। यानी क्या करोगे आप यहां पर जो भी वो एलआर पे करेगा और जो भी वो आपको जीआरवी पे करेगा इन सबकी प्रेजेंट वैल्यू निकाल

लो। प्रेजेंट वैल्यू अपने को सबको निकालनी आती है। तो ये अपने पास में पीवी ऑफ़ एमएलपी आ गया। अब इस पीवी ऑफ़ एमएलपी को कंपेयर कर लो एसेट की फेयर वैल्यू से।

एसेट की फेयर वैल्यू जो आपको गिवन होगी जो दोनों में से कम होगा ध्यान देना जो दोनों में से कम होगा उतने से आप अपनी बुक में उसको एसेट रिकॉग्नाइज कर लो उतने से आपको

उसको एसेट डिस्क्लोज़ करके दिखा देना है और आपको अपनी बुक में एंट्री बना देनी है एसेट अकाउंट डेबिट टू लेसर अकाउंट ध्यान देना एक तरफ आपने ये एसेट रिकॉर्ड कर दी

और टू लेसर अब ये टू लेसर क्या होता है लीज लायबिलिटी यानी आप उसको एसेट को है ना एक तरीके से खरीद रहे हो जैसे आप किसी से खरीदते तो एसेट टू वेंड ेंडर करते और फिर

आप पेमेंट उसको इंस्टॉलमेंट में दे रहे हो। तो यहां पर आपने टू लेसर मतलब एक तरफ ये लीज लायबिलिटी बुक कर दी। तो आपको दोनों में से कोई भी क्वेश्चन पूछे आपको कहे एसेट कितने पे रिकॉर्ड होगी लेसी की

बुक में? आपको कहे कि लेसी की बुक में लीज

बुक में? आपको कहे कि लेसी की बुक में लीज लायबिलिटी निकालो। दोनों सेम चीज है। यानी कि आप एंट्री बना दोगे एसेट टू लेसर। कितने अमाउंट से बनाओगे? एक तो पीवी ऑफ़ एमएलपी निकाल लो और एक दूसरा क्या

कैलकुलेट कर लो? फेयर वैल्यू। और व्हिच एवर इज लोअर। पीवी ऑफ़ एमएलपी क्या होता है? फिर याद करो। और लेसी जो भी पेमेंट

है? फिर याद करो। और लेसी जो भी पेमेंट करेगा उसकी प्रेजेंट वैल्यू का टोटल लेसी क्या-क्या पेमेंट करेगा? एलआर पे करेगा और जीआर भी कितना आसान है सोचो और उसी की एंट्री बना देगा एसेट अकाउंट डेबिट टू

लेसर। ठीक है? समझ में आ गया? अब दूसरा

कॉनंसेप्चुअल क्वेश्चन बनता है और वो बनता है कैलकुलेशन ऑफ फाइनेंस चार्ज। मैंने आपको अभी-अभी बताया कि वह जो एलआर होता है, लीज रेंटल होता है, वह हकीकत में

नाम का एलआर है। हकीकत में वो इंस्टॉलमेंट है, ईएमआई है। आपने एसेट खरीद ली। आपने एंट्री बनाई थी अभी-अभी एसेट टू लेसर। अब आप उसका ईएमआई के अंदर पेमेंट कर रहे हो। जिसमें दो कॉम्पोनेंट है प्रिंसिपल का और

इंटरेस्ट का। प्रिंसिपल का और इंटरेस्ट का। ये दो कॉम्पोनेंट है जिनका आप पेमेंट कर रहे हो। आई होप आपको बात समझ में आ रही है। हां सर आ रही है। तो अपने को अभी ये पता लगाना पड़ेगा कि जो आपका ये लीज रेंटल

होता है जो लेसी की तरफ से पेमेंट किया जाएगा उसमें कितना इंटरेस्ट कॉम्पोनेंट है। कितना फाइनेंस चार्ज है। लेसर जब आपको एसेट आज बेच रहा है और पैसे आपसे बाद में लेगा किस्तों में लेगा तो ब्याज लेगा ना

तो उसी चीज को फाइनेंस चार्ज बोलेंगे। जो लेसी के लिए क्या हो गया? खर्चा और वही चीज लेसर के लिए क्या बन गई? इनकम। लेसी

के लिए खर्चा बन गया और लेसर के लिए इनकम। तो सेकंड क्वेश्चन आपका बनता है फाइनेंस चार्ज कैलकुलेट करके बताओ। तो फाइनेंस चार्ज कैसे कैलकुलेट करते हैं? तो दोस्तों

एक टेबुलर प्रेजेंटेशन करना है। जैसे अपन ने अभी-अभी एएस 15 का रिवीजन देखा था। तो वहां पर भी अपन ने इंटरेस्ट निकाला था करंट सर्विस कॉस्ट के बेसिस पे डीबीओ के

बैलेंस पे डिफाइन बेनिफिट ऑब्लिगेशन पे। इसी तरीके से आपको एक टेबुलर प्रेजेंटेशन बननी है। जैसे यहां पर लिखा मैंने ईयर वन टू थ्री। अब क्या करोगे? सबसे पहले ईयर वन

के बिगिनिंग का बैलेंस यहां पर लिख दो। कौन सा बैलेंस? जो एंट्री बनी थी एसेट टू लेसर जिसको लीज लायबिलिटी बोलते हैं। यानी मान लो आपने एसेट है ना 20 लाख की खरीदी तो एक तरह से 20 लाख आज आपकी लायबिलिटी हो

गई तो उसी को ओपनिंग बैलेंस ऑफ लीज़ लायबिलिटी। तो ये ओपनिंग बैलेंस जो भी अमाउंट है वो आ जाएगा। ठीक है? आ गया। अब इसी के ऊपर पहले साल का इंटरेस्ट निकाल लेंगे। एंड ऑफ द ईयर का जिसको पूछा है फाइनेंस चार्ज। रेट जिससे आप डिस्काउंटिंग

कर रहे हो क्वेश्चन में बताया होगा वो रेट यूज़ करते हुए आप इसका फाइनेंस चार्ज कैलकुलेट कर लो। अब आप यहां पर एमएलपी यानी वो जो लीज रेंट है वो दिखा दो कितना किराया है। अब आप इस किराए में से ये

इंटरेस्ट हटा दो। तो आपका प्रिंसिपल आ गया। मैथमेटिकल टेबल है। बिल्कुल जो इंटरेस्ट लोन के इंटरेस्ट की बनती है वही तो बन रही है। कुछ भी नहीं है। अब आप क्या करो? ये जो आपकी ओपनिंग लीज़ लायबिलिटी है

करो? ये जो आपकी ओपनिंग लीज़ लायबिलिटी है इसमें से जितना आपने प्रिंसिपल कॉम्पोनेंट पे कर दिया वो हटा दो। तो आपकी क्लोजिंग लीज़ लायबिलिटी आ जाएगी। वापस ध्यान दो।

सबसे पहले आपको ओपनिंग बैलेंस लिखना है लीज लायबिलिटी का। कौन सा? जो आपने एसेट की एंट्री बनाई थी। एसेट टू लेटर लीज लायबिलिटी जो आपका शुरू का बैलेंस था। इसी पे इंटरेस्ट निकाल लो। एलआर जो लीज़ रेंटल

था उसी में से इंटरेस्ट हटा दो तो प्रिंसिपल आ जाएगा। ये प्रिंसिपल ओपनिंग में से हटा दो। मतलब आपने इतना पे कर दिया। तो ये आपकी क्लोजिंग लीज़ लायबिलिटी आ गई। ये क्लोजिंग लीज़ लायबिलिटी अगली बार

की ओपनिंग बन जाएगी। और यही सेम प्रोसेस रिपीट कर दो। तो इस तरीके से यह फाइनेंस चार्ज कैलकुलेशन का पॉइंट बन जाता है। अब यह फाइनेंस चार्ज जो है इसकी अपन एंट्री

कैसे बनाते हैं? इसको भी सीखो। एक तो एंट्री क्या सीखी? एसेट को रिकॉर्ड करने की। एसेट अकाउंट डेबिट टू लेसर जिसमें टू लेसर लीज लायबिलिटी हो गया। और एसेट को अपन ने अपनी जो कॉस्ट है जिसको अपन ने

कैलकुलेट किया उससे दिखा दिया। क्या था?

पीवी ऑफ़ एमएलपी और फेयर वैल्यू व्हिच एवर इज़ लोअर। अब अपन इसकी जो फाइनेंस चार्ज है उसकी एंट्री कैसे बनाएंगे? तो यहां पर ये एसेट टू लेसर बिगिनिंग वाली एंट्री आ गई।

अब ईयर के एंड पे जो फाइनेंस चार्ज है उसकी एंट्री बनाएंगे। अब फाइनेंस चार्ज के अंदर जो इंटरेस्ट का खर्चा आया था उसको डेबिट कर दो। तो फाइनेंस चार्ज अकाउंट डेबिट टू लेसर वो भी आपसे लेसर लेगा। तो

लेसर को एक बार के लिए क्रेडिट कर दो। कितने अमाउंट से? इंटरेस्ट के अमाउंट से जो अपन ने कैलकुलेट किया था। अब आप ईएमआई पे कर दो यानी एलआर पे कर दो। तो एंट्री बना दो लेसर अकाउंट डेबिट टू बैंक। ध्यान

रखना यहां केवल इंटरेस्ट से एंट्री बन रही है और उसके बाद आप उसको पूरा एलआर पे कर रहे हो तो एलआर की एंट्री बना दो लेसर अकाउंट डेबिट टू बैंक ईयर के एंड पे जो भी क्वेश्चन का तरीका उसके हिसाब से

डेप्रिसिएशन लगा लो और ये पीएल में ले जाओ ये किसकी बुक में काम हो गया ये हो गया दोस्तों यहां पर लेसी की बुक में कि लेसी अपनी बुक में कैसे एकाउंटिंग करता होगा तो

देखो जरा यहां पर अपन आते हैं कांसेप्ट में तो देखिए लेसी की बुक में क्या करते हैं सबसे पहले अपन यहां पर कैलकुलेट करते हैं लीज लायबिलिटी या दूसरा एसेट की कॉस्ट

दोनों एक ही बात है। कैसे निकालते हैं? जो

भी आपका एमएलपी एमएलपी क्या होता है? एक

तो एलआर और एक जीआरवी उनका देखो रिवीजन पे रिवीजन रिवीजन पे रिवीजन करवा रहा हूं। मतलब महा रिवीजन की तरह चल रहा है ताकि कांसेप्ट बिल्कुल दिमाग में आपके घुस जाए। तो ये आपने कैलकुलेट कर लिया। इनकी पीवी

निकाल ली। ये फेयर वैल्यू दोनों में से जो आपका लोअर अमाउंट है उसी से आप एसेट को रिकॉर्ड कर लोगे। ठीक है? अब उसके बाद दूसरा काम मैंने आपको बताया कि आप क्या कैलकुलेट करोगे? फाइनेंस चार्ज कैलकुलेट

कैलकुलेट करोगे? फाइनेंस चार्ज कैलकुलेट करोगे। फाइनेंस चार्ज निकालना है आपको। फाइनेंस चार्ज दोस्तों कैसे आएगा? तो

टेबुलर एक प्रेजेंटेशन करो। टेबुलर प्रेजेंटेशन मैंने आपको अभी सिखाई उसी तरीके से कर दो। अब लेसी की बुक में एंट्रियां बना लो। एसेट को रिकॉर्ड करने की पीपी अकाउंट डेबिट टू लेसर। फाइनेंस

चार्ज का एंड ऑफ द ईयर एंट्री। फाइनेंस चार्ज अकाउंट डेबिट टू लेसर। यह फाइनेंस चार्ज कहां चला जाएगा? पीएल में। एलआर पे कर दो। लेसर अकाउंट डेबिट टू बैंक। डेप्रिसिएशन निकाल लो और उसको पीएल के

अंदर लेके चले जाओ। जैसे भी क्वेश्चन ने बताया उस तरीके से अपन ये काम कर देंगे। अब आ जाते हैं लेसर की बुक में। अब लेसर की बुक में क्या करते हैं? सुनो ध्यान से।

लेसर की बुक में आपको सबसे पहले एक ग्रॉस इन्वेस्टमेंट निकालना पड़ता है। ग्रॉस इन्वेस्टमेंट का मतलब बिना पीवी निकाले।

ग्रॉस इन्वेस्टमेंट का मतलब बिना पीवी निकाले। आप जो भी अमाउंट है उसका टोटल लगा लो। अब ध्यान देना लेसर की बुक में लगा रहे हो तो लेसर की बुक में मैंने आपको कहा

था कि जो भी उसको मिलेगा क्या-क्या मिलेगा एलआर मिलेगा जीआर भी मिलेगा और यूआर भी मिलेगा एलआर मिलेगा जीआर भी मिलेगा और यूआर भी

जीआर भी यूआरबी समझ में आया था ना 1400 में उसको लग रहा है बेच दूंगा एक्सपेक्टेड उसमें से 1 लाख की गारंटी है किसकी तरफ से लेसी की तरफ से तो बाकी 400 एक्स्ट्रा यूआरवी अब आप लेसर के लिए कैलकुलेशन कर

रहे हो तो ग्रॉस इन्वेस्टमेंट का मतलब इन सबका टोटल लगा लो यानी एक तो एमएलपी ले लो बिना पीवी के एमएलपी में ऑलरेडी मैंने आपको बता रखा है एलआरबी और जी एलआर और जीआर भी होता है और इसी में यूआरबी को और

ऐड कर दो तो ये आपका ग्रॉस इन्वेस्टमेंट आ जाएगा। अब इसी का एक कैलकुलेशन करो पीवी ऑफ़ जीआई पीवी ऑफ़ ग्रॉस इन्वेस्टमेंट। पीवी ऑफ़ ग्रॉस इन्वेस्टमेंट क्या होता है दोस्तों? पीवी ऑफ़ ग्रॉस इन्वेस्टमेंट का

दोस्तों? पीवी ऑफ़ ग्रॉस इन्वेस्टमेंट का मतलब अभी-अभी आपने जो ये लिया है इनकी पीवी निकाल लो। जिसमें एक तो एमएलपी की पीवी और दूसरा जो जी यूजीआर भी है यूआरवी है अनगारंटेड वैल्यू उसकी पीवी निकाल लो।

तो ये आपके पास में पीवी ऑफ़ जीआई कैलकुलेट होकर आ गया जो इनडायरेक्टली एक तरह से उस एसेट की फेयर वैल्यू भी होती है। ध्यान देना इनडायरेक्टली एक तरह से उस एसेट की फेयर वैल्यू भी होती है। अब क्या करो? एक

क्वेश्चन पूछता है सबसे ज्यादा रिक्वायर्ड क्वेश्चन अनअर्ड फाइनेंस इनकम निकालो। क्या निकालो? अनअर्न फाइनेंस इनकम। अपन ने

क्या निकालो? अनअर्न फाइनेंस इनकम। अपन ने ये प्रोसेस जो सीखी है वो सारी इसी के लिए सीखी है कि अपन अनअर्न फाइनेंस इनकम निकालें। अनऑर्न फाइनेंस इनकम का मतलब क्या होता है दोस्तों? तो मैं आपको कोई

एसेट मेरे पास है वो आज लीज़ पे आपको दे रहा हूं। तो वो फाइनेंस कर रहा हूं मैं आपको। फाइनेंस लीज़ का सारा खेल चल रहा है। तो मैं आपको एक तरीके से फाइनेंस लीज़ पे दे रहा हूं। तो आज मेरे पास जो एसेट है वो

मैंने आपको फाइनेंस लीज़ के ऊपर दे दी। अब फाइनेंस लीज़ के ऊपर जब मैंने आपको एसेट दे दी तो मैं उस एसेट के ऊपर कितना रुपए की कमाई टोटल कर लूंगा। जो मैं आज कैलकुलेट

कर रहा हूं जब एग्रीमेंट हो रहा है। इसका मतलब वो अनर्न इनकम है। क्यों? क्योंकि

इनकम जो इंटरेस्ट की कमाऊंगा वो तो ओवर द पीरियड जब जब किस्त इंस्टॉलमेंट ईएमआई एलआर ड्यू होगा तब-तब बुक करूंगा तो अभी के लिए वो मेरी अनअर्ड हो गई तो मैं पहले से कैलकुलेट करना चाहता हूं कि मैं लीज पे

देके कितनी कमाई करूंगा उस एसेट से तो क्या करूंगा जो भी पैसा मिलेगा उनका टोटल लगा लूंगा जिसको अभी-अभी अपन ने सीखा जीआई ग्रॉस इन्वेस्टमेंट तो ये ले लिया अपन ने

ग्रॉस इन्वेस्टमेंट अब उसी में से क्या कर दो उस एसेट की वैल्यू जो आज है वो हटा दो इसी को बोलते हैं पीवी ऑफ़ जीआई या फेयर वैल्यू जो एसेट है उसकी डिस्काउंटिंग करके

उसकी पीवी निकाल लो। तो वो पीवी ऑफ़ जीआई होता है। यानी उस एसेट की आज की कीमत है फेयर वैल्यू है। तो आज की कीमत जो उस एसेट की है वो इसमें से हटा दो। तो मान लो मैं

आपको एसेट जो लीज पे दे रहा हूं उससे मेरे को 33 लाख का किराया मिलेगा 5 साल तक यानी ₹1 लाख। इसके अलावा दो लाख की जीआर भी मिलेगी। 1

लाख की यूआरवी यानी टोटल मिलाकर ₹18 लाख मिलेंगे। बिना पीवी निकाले। पीवी नहीं निकाला। अब इन्हीं के मैंने पीवी निकाले तो ये ₹14 लाख यानी मैं लीज पे देके टोटल

मिलाकर 4 लाख कमाई कर लूंगा। इसी को बोलते हैं अनऑर्न फाइनेंस इनकम। क्या बोलते हैं?

अनऑर्न फाइनेंस इनकम के नाम से जानते हैं। ठीक है सर। अब इसके अंदर एंट्रीज लेसी अपनी बुक में कैसे करता है? लेसर अपनी बुक में कर कैसे करता है? तो यहां पर अब अपन

जनरल एंट्रीज की बात करते हैं। लेसर की बुक में। याद करो मैंने आपको लेसी की बुक की तो बता ही दी थी। एसेट टू लेसर और उसके बाद वो फाइनेंस चार्ज और डेप्रिसिएशन की एंट्रियां। अब अपन लेसर की बुक में

एंट्रियां कैसे करें? तो जैसे ही लीज का बिगिनिंग हुआ तो आपने अपनी एसेट को लीज पे दे दिया। ध्यान देना आपने अपनी एसेट को लीज पे दे दिया। तो एसेट को अपनी बुक से हटा दो। क्योंकि एसेट तो अब लेस ही

रिकॉर्ड करेगा और जितना पैसा आपको उससे लेना है। आप उसके लिए एक डेटर बुक कर दो। जैसे उसने लायबिलिटी बुक करी थी। आप उसको डेटर बुक कर लो। तो एंट्री बना लो। लीज़

रिसीवबल एक तरीके से ये डेटर जो अपने को पैसा लेने का है किससे लेसी से तो एंट्री बना लो लीज़ रिसीवबल अकाउंट डेबिट टू पीपी पीपीई को क्रेडिट क्यों किया? क्योंकि

पीपी पहले वो अपनी थी लेकिन जैसे ही फाइनेंस लीज पे दे दी तो अपने को अकाउंटिंग अप्रोच में उसको अब अपने पास से हटा देना है क्योंकि लेसी अपनी बुक में अब उसको रिकॉर्ड कर रहा है। तो अपन एंट्री बना देंगे लीज़ रिसीवबल अकाउंट डेबिट टू

पीपी। अब ईयर का एंड आ गया तो अपनी जो फाइनेंस इनकम है जैसे उसका फाइनेंस चार्ज था अपने लिए फाइनेंस इनकम तो उसकी एंट्री बना देंगे लीज रिसीवबल अकाउंट डेबिट टू इनकम ये इनकम पीएल में चली जाएगी और इधर

लीज रेंट को रिसीव कर देंगे तो बैंक अकाउंट डेबिट टू लीज रिसीवबल लीजि रिसीवबल का मतलब एक तरह से डेटर ये वाली एंट्री एलआर से पूरे से बन जाएगी और ये वाली एंट्री केवल उसमें जो इंटरेस्ट का अमाउंट

की इनकम थी उससे बन जाएगी जो लीज़ रिसीवबल यानी डेटर का एंड ऑफ द ईयर बैलेंस बचेगा वो अपन बैलेंस शीट के अंदर एसेट में दिखा देंगे। उधर वो अपनी लीज़ लायबिलिटी का जो बैलेंस यानी लेसर का बैलेंस जो था वो अपनी

लायबिलिटी में दिखा देगा। कौन? लेसी। इस

तरीके से अपन अकाउंटिंग करते हैं। आई होप दोस्तों बात समझ में आ रही है। बिल्कुल। अब आते हैं इसके अपन लास्ट कांसेप्ट में। इसको बोलते हैं दोस्तों सेल्स एंड लीज बैक। क्या बोलते हैं? सेल्स इन लीज बैक।

सर ये सेल्स एंड लीज बैक क्या होता है?

मेरे पास में एक एसेट है। मैं उसका मालिक हूं। मैंने वो एसेट आपको सेल कर दी। मतलब मैं सेलर बन गया और आप बन गए बायर। मैं सेलर बन गया और आप बन गए बायर। लेकिन वही

एसेट मैंने वापस आपको ली आपसे लीज़ पे ले ली और कोइंसिडेंटली नहीं कि मैंने एसेट बेची हुई है और अचानक से वही चीज अब मुझे किराए पर मिल गई क्योंकि उसी तरह के एसेट की अब मुझे जरूरत थी। यहां पर पहले से

एग्रीमेंट दोनों एक साथ साइन हुए हैं कि मैं एसेट आपको बेच भी रहा हूं और उसी एसेट को अब आपसे वापस लीज पे ले रहा हूं। तो दो एग्रीमेंट एक तो बेचने का और एक उसको वापस

लीज पे लेने का। ध्यान देना बेचने का और वापस उसको लीज पे लेने का। ये दो एग्रीमेंट एक साथ साइन हुए हैं। तो इसी चीज को बोलते हैं अपन यहां पर किस नाम से?

सेल्स एंड लीज बैक के नाम से। सर ऐसा करते क्यों है? जो मेरी रेगुलर क्लास होती है

क्यों है? जो मेरी रेगुलर क्लास होती है दोस्तों उसके अंदर बहुत इंटरेस्टिंग तरीके से मैं इसके बारे में समझाता हूं कि ऐसा प्रैक्टिकली कैसे पॉसिबल हो सकता है। कई बार अपने पास में पैसे की जरूरत होती है।

लिक्विडिटी क्राइसिस हो रखे हैं और अपने घाटा लग गया तो अपनी कोई एसेट है उसको बेचना पड़ गया। लेकिन वही एसेट अपने को चाहिए तो अपन उसी को किराए पर दे लेते हैं और पहले ही अगले से एग्रीमेंट कर देते हैं। तो सेल्स एंड लीज बैक हो गया। अब इस

सेल्स एंड लीज बैक के अंदर जब मैंने उसको बेचा तो बेचने पे कोई प्रॉफिट या लॉस हुआ होगा। सेलर यानी सेलर कौन जो अब लेसी भी है जिसने अब उसको लीज पे लिया है। ध्यान

देना सेलर कौन है लेसी? तो उसको बेचने से प्रॉफिट या लॉस हुआ होगा। अब वो जो प्रॉफिट या लॉस उसको बेचने से हुआ है उसका यहां पर एक ट्रीटमेंट सीखना है कि क्या वो

इमीडिएटली मैं पीएल में लेके जाऊंगा या फिर उसको ओवर दी पीरियड पीएल में लेके जाऊंगा। इमीडिएटली का मतलब क्या मैं उसको तुरंत जब एग्रीमेंट हुआ उसी साल उसका लॉस

या गेन पूरा पीएल में डाल दूं। जैसे मान लो मुझे उसको बेचने से 5 लाख का गेन हुआ तो क्या मैं 5 लाख का गेन आज ही उसको पीएल में डाल दूं या मैं उसको लीज पीरियड जो टोटल है उसके प्रपोर्शन में मान लो मैं

आपसे वो एसेट वापस 5 साल में ले रहा हूं। 5 साल के लिए ले रहा हूं लीज पीरियड में तो 5 लाख अप 5 ईयर यानी एक लाख करके पीएल में लेके जाऊं या पूरा ही आज पीएल में

लेके जाऊं। तो उसके बारे में यहां पर ये स्पेशल ट्रीटमेंट बताता है। इस चीज को आपको यहां पर सीखना है। सेल्स एंड लीज बैक आपने एसेट को बेचा और उसी एसेट को वापस

लीज पे ले लिया। एसेट को बेचा और उसी को लीज पे ले लिया। तो बेचने पे लॉस या गेन हुआ होगा। उस लॉस या गेन को कैलकुलेट कर लो। अब वो कैलकुलेट करने के बाद जो प्रॉफिट या लॉस आया क्या वो इमीडिएटली

पीएल में जाएगा? मतलब आज ही पीएल में लेके जाऊं या फिर उसको थोड़ा-थोड़ा करके लीज पीरियड के हिसाब से पीएल में लेके जाऊं। तो ईएस कहता है अगर वो फाइनेंस लीज है जब

आपने उसको वापस लीज पे लिया होगा तो लीज एग्रीमेंट अपन ने पढ़ा है या तो ऑपरेटिंग होता है या फाइनेंस लीज होता है भाई इसमें दो एग्रीमेंट है बेचने का और लीज पे लेने का तो लीज पे लेना या तो ऑपरेटिंग है या

फाइनेंस लीज है तो अगर वो फाइनेंस लीज है तो आप उसका प्रॉफिट या लॉस निकाल लो कैसे निकाल लो सेल कितने में करा माइनस उसकी डब्ल्यूडीबी हटा दो तो प्रॉफिट या लॉस आ

जाएगा अब उस प्रॉफिट या लॉस को आपको ओवर द पीरियड पीएल में लेके जाना है क्या करोगे ओवर द टोटल लीज़ पीरियड आपको उसको पीएल में लेके जाना है। मतलब तुरंत पूरा का पूरा एक

साथ तुरंत नहीं लेके जाना। थोड़ा-थोड़ा करके आपको उसको पीएल के अंदर लेके जाना है। ठीक है सर समझ में आ गया। अब आते हैं ऑपरेटिंग लीस्ट। ऑपरेटिंग लीज़ में क्या करोगे? उसके अंदर कुछ सिचुएशन

है। ऑपरेटिंग लीज़ का बेसिक थीम दोस्तों दिमाग में रखो कि ऑपरेटिंग लीज़ का मतलब आपको उसका लॉस या गेन इमीडिएटली पीएल में लेके जाना है। फाइनेंस लीज़ ओवर द पीरियड

और ऑपरेटिंग लीज़ इमीडिएट। बट उसके अंदर थोड़ी सी एक्सेप्शनंस है, सिचुएशंस है। उनको भी साथ में आपको कवर करना है। वापस ध्यान दो। अगर फाइनेंस लीज़ है तो प्रॉफिट या लॉस निकाल के ओवर द पीरियड पीएल में

लेके जाओगे। अगर ऑपरेटिंग लीज़ है तो आपका कांसेप्ट है इमीडिएट का। ऑपरेटिंग लीज़ मतलब नॉर्मल किराए के जैसे तो फिर आप इसको भी इमीडिएटली पीएल में लेके जाओ। अब कैसे क्या करना है उसके लिए तीन सिचुएशन बनती

है। पहला सिचुएशन है सेल प्राइस और फेयर वैल्यू बराबर है। मतलब जितने में आपने एसेट को बेचा उतनी उस एसेट की फेयर वैल्यू है। दोनों इक्वल है। यानी वो ट्रांजैक्शन

जो सेल का हुआ था वो फेयरली एग्जीक्यूटेड है। मतलब उस एसेट की 1 लाख की आज फेयर वैल्यू है। और मैंने आपको बेचा भी ₹1 लाख के अंदर। यानी वो फेयरली एग्जीक्यूटेड है। तो ऐसे केस में यस कह रहा है आम जिंदगी ले

आओ। आम जिंदगी क्या? सेल कितने में करा?

डब्ल्यूडी भी क्या थी? डिफरेंस, प्रॉफिट

या लॉस और क्योंकि ऑपरेटिंगली चल रहा है तो आपको उसको इमीडिएटली पीएल में लेके जाना है। ठीक है? दूसरा सिनेरियो क्या बनेगा दोस्तों? दूसरा सिनेरियो बनेगा सेल

बनेगा दोस्तों? दूसरा सिनेरियो बनेगा सेल प्राइस जो है वो कम है फेयर वैल्यू से। ध्यान देना सेल प्राइस जो है वो कम है

फेयर वैल्यू से। तो अगेन आप सेल और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस निकाल लो। प्रॉफिट या लॉस होगा और उस प्रॉफिट या लॉस को इमीडिएटली पीएल में लेके चले जाओ। बस यहां

पर छोटा सा ध्यान रखना है कि अगर लॉस होता है तो आपको उसके साथ लिख देना है अनलेस इट इज कंपनसेटेड बाय फ्यूचर लीज़ रेंटल। मतलब

क्या हुआ? अब इसका लॉजिक वगैरह बहुत डिटेल

क्या हुआ? अब इसका लॉजिक वगैरह बहुत डिटेल में जाना होता है। वो तो क्लास के अंदर ही बच्चे को रेगुलर क्लास में ही समझाया जा सकता है। बट ऑपरेटिंग लीज़ का मतलब आप ये समझो। ऑपरेटिंग लीज़ मतलब सारा कुछ

इमीडिएटली जाता है। तो यहां पर पहला सिनेरियो दोनों इक्वल है। सेल और फेयर वैल्यू मतलब जो ट्रांजैक्शन बेचने का हुआ है वो फेयरली हुआ है। तो आप क्या करो सेल और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस प्रॉफिट लॉस

जभी निकालते हो तो हमेशा कितने में बेचा और अपनी बुक में वो एसेट कितने की थी उसी का तो आता है तो इमीडिएटली ले जाओ। अब दूसरा अगर सेल वैल्यू कम है और फेयर

वैल्यू ज्यादा है। मतलब एसेट आपने 1 लाख में बेची लेकिन उसकी कीमत 1.2 लाख थी। फेयर वैल्यू आज की डेट में बुक वैल्यू अलग चीज है। फेयर वैल्यू आज की डेट में उसकी

1.2 थी। लेकिन यहां पर अपनी मजबूरी है बेचने का। ट्रांजैक्शन फेयरली नहीं हुआ। क्यों? क्योंकि यहां पर किसी की मजबूरी का

क्यों? क्योंकि यहां पर किसी की मजबूरी का कोई फायदा उठा रहा है। 1 लाख की चीज को 120 में खरीद रहा है या 120 की चीज को 1 लाख में खरीद रहा है। तो कोई ना कोई मजबूरी का फायदा उठा रहा है। लेकिन जिसकी

मजबूरी है उसका फायदा कौन उठाते हैं?

सामने वाले ये दुनियादारी होती है। तो यानी यहां पर देखो 1200 की एसेट है और उसको कितने में बेचा जा रहा है? 1 लाख में। कौन बेच रहा है? सेलर।

है? 1 लाख में। कौन बेच रहा है? सेलर।

क्यों? क्योंकि उसकी मजबूरी है। वो लिक्विडिटी क्राइसिस में फंसा हुआ है। उसको अपनी लिक्विडिटी क्राइसिस से बच के बाहर निकलना है। तो वो चाहता है कि मैं जल्दी से जल्दी इस एसेट को बेचूं। कैसे भी

करके तो सामने वाले आपकी मजबूरी का फायदा उठाएंगे। यानी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। लेकिन दुनियादारी के हिसाब से हमेशा जिसकी मजबूरी है उसका दूसरे लोग फायदा उठाते हैं। यहां पर भी वही हो रहा

है। 1 लाख की चीज को सेलर को अब मजबूरी में 1 लाख में बेचना पड़ रहा है। तो मजबूरी का फायदा कौन उठा रहे? दुनियादारी

के हिसाब से। तो अगेन आप प्रॉफिट या लॉस निकाल लो। इमीडिएटली ले जाओ। बस लॉस है तो उसके साथ लिख देना अनलेस कंपनसेटेड बाय फ्यूचर लीज पेमेंट्स। अब ये क्या होता है?

रेगुलर क्लास के अंदर डिटेल में होता है। फ्यूचर लीज पेमेंट से अगर अपने को कंपनसेट कर दिया जाएगा। मतलब जो किराया अपने को पे करना है उसको अपने को कम करके देना है तो फिर अपन अपने लॉस को ओवर द पीरियड ले जाते

हैं। लेकिन यहां पर आपको ध्यान रखना है वैसे आंसर इमीडिएट का ही बोलना है। बट आपको बता देना है कि अनलेस कंपनसेटेड बाय लेजेंडर। अब आ जाते हैं तीसरा। ये स्पेशल केस है। इसको ध्यान दो। सेल वैल्यू ज्यादा

है और फेयर वैल्यू कम है। बेच रहे हैं ₹1.5 लाख में और एसेट है 1.2 लाख की फेयर वैल्यू की। मतलब आज एसेट अपनी बुक जो एसेट

है उसका मार्केट वर्थ 1.2 है। लेकिन अपन इसको 1.5 लाख में बेच रहे हैं। आप सोचो अपनी मजबूरी है। अपने को बेचना है। अपन सामने वाले को जाकर कह रहे हैं प्लीज

प्लीज मेरे से ये एसेट है ना ये एसेट खरीद लो। सामने वाला अपने को भगा रहा है। निकल जा यहां से निकल जा यहां से निकल जा। नहीं जोड़ता मेरे को तू चला जा यहां से लेकिन

अपने को तो उस एसेट की सर आपने यह सयारा का कुछ कर दिया क्या नहीं कुछ नहीं मैं ऐसे ही बोल रहा हूं ठीक है तो यहां पर सुनो ध्यान से एसेट की अपने को जरूरत है

अब एसेट अपन बेचना चाह रहे हैं कैसे भी करके तो सामने वाले को कह रहे हैं कि भ प्लीज तू एसेट खरीद ले सामने वाला कह रहा है मेरे को नहीं झूठ मैंने कहा यार प्लीज मेरे ना हालत खराब है मुझे एसेट बेचनी है

प्लीज खरीद ले वो कह रहा है चल कितने में बेचेगा मैंने कहा ₹15 लाख में बेचूंगा वैसे 1.2 की मार्केट में आज वो कह रहा है तू पागल हो गया क्या? मतलब अपनी मजबूरी का

तू खुद ही फायदा उठा रहा है। किसी की मजबूरी का दूसरा फायदा उठाए वो समझ में आता है। लेकिन तू खुद की मजबूरी का खुद ही फायदा उठा रहा है। 1.2 ले की जो चीज है आज

मार्केट में तू उसको मेरे को 1.5 में काहे को बेच रहा है? वैसे भी मुझे जरूरत नहीं है। अपन कह रहे हैं प्लीज यार मजबूरी है समझ। तो सामने वाले को दया आ गई। उसने कहा ठीक है चलो मैं बेच देता हूं। तो ऐसे केस

में आपको क्या करना है? दो कैलकुलेशन

बनानी है। एक फेयर और उसका डब्ल्यूडीवी का डिफरेंस। ध्यान रखना अब तक प्रॉफिट लॉस निकालने में कहीं भी अपन ने फेयर वैल्यू को यूज़ नहीं किया था। बस वो तो सिचुएशन थी। लेकिन अब आपको फेयर वैल्यू और

डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस निकालना है। और ये जो डिफरेंस है इसको तो आपको बोलना है इमीडिएटली पीएल में। किसका डिफरेंस? फेयर

वैल्यू और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस। ये तो आपको इमीडिएटली पीएल में ले जाना है और एक डिफरेंस सेल और फेयर वैल्यू का निकालना है। मतलब जो आपने उसको ₹1.5 लाख में बेचा

जबकि वो आज मार्केट में 1.2 की थी तो वो ₹00 आपको एक्स्ट्रा दे रहा है। तो अपन मान के चल रहे हैं कि वो जो ₹00 आपको एक्स्ट्रा दे रहा है उसकी वो रिकवरी आपसे करेगा। क्या करके आपसे किराया ज्यादा लेके

क्योंकि वही एसेट आपको किराए पे देगा सेल एंड लीज में तो वो आपसे किराया ज्यादा चार्ज करेगा। आज मैं आपको कोई एसेट बेच रहा हूं और ₹00 मार्केट रेट से भी ज्यादा आपसे ले रहा हूं तो आप मुझे वो एसेट वापस

किराए पे दे रहे हो तो उसके अंदर उसकी रिकवरी कर रहे हो यानी कि ओवर द पीरियड वो पैसा आप वापस रिकवर करोगे तो इसका मतलब ये 30ज़ का जो प्रॉफिट है इस प्रॉफिट को मैं क्या करूंगा ओवर द पीरियड पीएल में लेके

जाऊंगा वापस सम अप करते हैं देखो ध्यान से सुनो सेल वैल्यू फेयर वैल्यू बराबर तो प्रॉफिट या लॉस निकाल लो कौन सा प्रॉफिट सेल और डब्ल्यूडी का डिफरेंस इमीडिएटली पीएल में सेल वैल्यू कम है और फेयर वैल्यू

ज्यादा यानी मजबूरी का फायदा बायर उठा रहा है सेलर की और क्योंकि सेलर की मजबूरी है तो बयर उठाएगा दुनियादारी के हिसाब से तो अगेन प्रॉफिट या लॉस निकाल लो इमीडिएटली टू पीएल बट उसमें लॉस है तो उसके साथ लिख

दोगे अनलेस कंपनसेटेड बाय लीड रेंट ठीक है तीसरा केस क्या बताया मैंने आपको कि सेल वैल्यू ज्यादा और फेयर वैल्यू कम है तो आपको इसमें दो कैलकुलेशन करनी है एक तो सेल और फेयर का डिफरेंस जितना पैसा वो

आपको ज्यादा दे रहा है तो वो ओवर द पीरियड आपको पीएल में लेके जाने हैं प्रॉफिट के तौर पर और एक फेयर और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस इसको आपको प्रॉफिट या लॉस लॉस निकालना है। इसको इमीडिएटली लेके जाना है। वहीं अगर फाइनेंस ली जाए तो आपको सिंपली

कुछ नहीं करना। डब्ल्यूडीबी और सेल का डिफरेंस निकालना है और उसी को प्रॉफिट या लॉस हमेशा ओवर द पीरियड लेके जाना है। ये दोस्तों ईएस 19 का कॉनसेप्चुअल पार्ट खत्म हो गया। ऑपरेटिंग लीस्ट का क्वेश्चन

मीनवाइल मैं आपको ऑलरेडी करवा चुका था। मैं अब आपको फाइनेंस लीस्ट के क्वेश्चंस में लेके चलता हूं। जैसे ये क्वेश्चन नंबर टू है। यहीं से अपन देखते हैं। क्या दे रखा है अपने को? देखिए क्या दे रखा है। कह

रहा है एस स्क्वायर प्राइवेट लिमिटेड है टेकन अ मशीनरी ऑन फाइनेंस लिस्ट। कह रहा है फाइनेंस लिस्ट के ऊपर एक मशीनरी है। ठीक है? ₹20 लाख उसकी फेयर वैल्यू है। कोई

ठीक है? ₹20 लाख उसकी फेयर वैल्यू है। कोई दिक्कत नहीं है। ₹25,000 के पर एनम पे अपन ने उसको लीज पे दिया है। कितने ईयर तक लीज पे दिया है? आपको कह रहा

है कि 4 साल तक के लिए अपन ने उसको लीज पे दी है। यानी हर साल 6:25 625 6:25 125 की उसकी जीआरवी है और 375 का एक्सपेक्टेड है।

मतलब 250 जो एक्स्ट्रा उम्मीद कर रहे हैं उसको बोलेंगे यूआरवी। ठीक है? 15% की रेट दे रखी है। आपको ये फैक्टर दे रखे हैं। फैक्टर जब भी दे रखे हो तो वही यूज़ करने

हैं। नहीं दे रखे हो तो फिर आपको कैलकुलेट करके कम से कम तीन डेसीमल तक राउंड ऑफ ध्यान रखते हुए लेना होता है। ठीक है? तो

आपको यहां पर पूछा है लीज लायबिलिटी निकालो। तो बड़ा सिंपल सा काम है। 6:25 हर साल तो 6:25 4 साल तक और फोर्थ ईयर के

अंदर एक वो आपको जीआर भी पे करेगा 125 की। तो इन्हीं की पीवी का टोटल निकाल लेंगे जिसको अपन बोलते हैं पीवी ऑफ एमएलपी।

यह देखो यह 6:25 6:25 हर साल 4 साल तक और इसके अलावा लास्ट ईयर में 125 का जीआर भी वो कब पे करता है जब आपका लीज पीरियड एंड होता है। तो इन्हीं के अपन यहां पर पीवी

निकाल लेंगे। फैक्टर दे रखे थे। पीवी निकाल लिया तो 185850 आ गया। फेयर वैल्यू आपको 20 लाख दे रखी है। तो ये आपका लीज लायबिलिटी आ गया। इसी का मैंने अब एंट्री एक्स्ट्रा बता दिया कि

देखो ये एक्स्ट्रा बस ऐसे ही सिखा रहा हूं। एंट्री बन जाएगी एसेट अकाउंट डेबिट टू लेसर। यानी ये एंट्री इसकी बन गई। ठीक है सर। क्वेश्चन नंबर फोर में चलते हैं। क्वेश्चन नंबर फोर कह रहा है आपको कि आप

जनरल एंट्री दो। जब लीज़ पीरियड शुरू हुआ उसी टाइम पे लेसी की बुक में कह रहा है लीज़ पीरियड 5 साल का है। ₹50000 हर साल का आपका लीज़ रेंटल है।

₹25,000 की जीआर भी है और फेयर वैल्यू ₹ लाख की है। तो कैलकुलेशन करके बताओ। तो बड़ा सिंपली ये फैक्टर आपको दे रखे हैं। तो फिर से वही आपको ₹500ज़ का 5 साल तक का लीज़

रेंटल दे रखा है और उसी के बेसिस पे इजीली आप इसकी कैलकुलेशंस को कर पाओगे। तो इसमें कुछ भी स्पेशल नहीं है। तो ये 50-500 का 5 साल तक लीज रेंटल और इसके अलावा 25,000 की

ये जीआरवी इन्हीं के फैक्टर के हिसाब से पीवी निकाल लो जो पीवी ऑफ़ एमएलपी बन जाएगा और उसको कंपेयर कर लो किससे? जो एसेट का फेयर वैल्यू है 2 लाख से। तो देखो ये पीवी

ऑफ एमएलपी आ गया और एसेट की फेयर वैल्यू 2 लाख तो दोनों में से लोअर तो अपन इतने से 1915100 से एंट्री बना देंगे एसेट अकाउंट

डेबिट टू लेसर क्वेश्चन नंबर फोर कह रहा है कि एक एसेट है जिसकी फेयर वैल्यू 7 लाख इकोनॉमिक लाइफ और लीज़ पीरियड दोनों थ्री ईयर है दोस्तों अगर आपको क्वेश्चन

जल्दी-जल्दी लगे रिवीजन चल रहा है मैं तो रिवीजन इतना डिटेल में फिर भी करवा रहा हूं एक तरह से फास्ट ट्रैक जो मैं आपको मिनीफास्ट ट्रैक कोर्स करवा रहा हूं एक तरीके से रिवीजन वीडियो से ताकि आपको

वास्तव में जो आप टाइम मुझे दे रहे हो रिवीजन वीडियो में उसका आपको यूज़ मिले। एक है मैं आपको फॉर्मेलिटी के अंदर ये लो 20 मिनट में लीज का ये पूरा पता चला कुछ भी खत्म नहीं आया और 20 मिनट जो भी देखा वो

सारे बर्बाद हो गए। लेकिन मैं आपको इसको पूरा डिटेल में समझा रहा हूं। फिर भी क्वेश्चन का एक काम आपको करना होता है कि पॉज करके एक बार उसको देख लो और जो क्वेश्चन मैंने समझाया अगर आपको लगे मैं तुरंत इसको खुद से भी कर लेता हूं।

अल्टीमेट तैयारी कब होगी? जब आप खुद से भी इनको सॉल्व करोगे। तो आप पॉज करके या बाद में एक बार पूरा का पूरा इयर्स के सारे क्वेश्चन खुद से भी सॉल्व कर लेना। ठीक है? तो समझ में आ जाएंगे। देखिए 7 लाख का

है? तो समझ में आ जाएंगे। देखिए 7 लाख का आपका एसेट का फेयर वैल्यू कह रहा है अपन ने उसको 3 साल के लिए लीज़ पे दिया और लाइफ भी उसकी 3 साल है। एट द एंड ऑफ़ ईच ईयर

लेसी पे 3 लाख। कह रहा है लीज़ पीरियड के एंड पे हर साल ₹3 लाख लेसी पे करेगा। ₹22,000 की। इसके अलावा उसने गारंटेड रेसिडुअल वैल्यू भी बता रखी है। लेकिन लेसी को लगता है यार बाजार में मैं

₹15,000 में बेचूंगा। तो लेसी ऐसा काम लेसर ऐसा काम बिल्कुल भी नहीं करेगा। लेसर को ये लग रहा है कि मैं एसेट को मार्केट में 15,000 में बेच के आऊंगा। जबकि एक ऑफर अपने पास 22,000 का आया हुआ है। तो ये

अपने लिए बिल्कुल बेकार है। आपको कह रहा है कि पहले तो एसेट कितने पे रिकॉर्ड करेंगे वो बता दो। और अब इसका फाइनेंस चार्ज निकाल दो। तो पहले तो एसेट कितने पे रिकॉर्ड करेंगे?

अभी दोनों क्वेश्चन के उसी पैटर्न से। ₹3 लाख हर साल और ₹22,000 की थर्ड ईयर में जीआरवी। तो उसी के बेसिस पे अपन ने इसकी पीवी निकाली। तो ये पीवी कैलकुलेट होकर आ गया 69054

ये इनकी पीवी ऑफ़ एमएलपी आ गया। फेयर वैल्यू एसेट की 7 लाख है। तो दोनों में से कम इतने पे अपन इसको एसेट को रिकॉर्ड करेंगे। अब एसेट को रिकॉर्ड करने के बाद अपन इसका निकालेंगे फाइनेंस चार्ज। अब

फाइनेंस चार्ज कैसे निकालेंगे? तो देखो

सबसे पहले फर्स्ट ईयर के अंदर आगे मैं आपको क्लास सॉल्यूशन में लेके चलता हूं। तो ये देखो अपन ने फाइनेंस चार्ज निकाला। तो सबसे पहले अपन ने यहां पर लिख लिया

ओपनिंग लीज लायबिलिटी 69054 फर्स्ट ईयर के बिगनिंग में इसी के ऊपर 15% क्वेश्चन में रेट है उससे इंटरेस्ट निकाल लिया। अब आपका ₹3 लाख का एमएलपी है तो इस

₹3 लाख में से ये इंटरेस्ट हटा दो तो ये प्रिंसिपल आ गया। ये प्रिंसिपल इसमें से हटा दोगे प्रिंसिपल तो ये क्लोजिंग बच गया। ये क्लोजिंग वाला अपना ओपनिंग आ गया।

तो इसी पैटर्न से बस आपको कैलकुलेट करते हुए चलना है और कुछ ही नहीं है। लास्ट लास्ट ईयर में ये अमाउंट बच गया। ये जो बच गया वो एक तरह से राउंड ऑफ में जीआर भी है

जिसका पेमेंट और हो जाएगा तो आपको पूरा का पूरा पेमेंट जीरो होकर खत्म हो जाएगा। तो ये फाइनेंस चार्ज हो गया कि हर साल इंटरेस्ट कितना कैलकुलेट होकर आएगा। वो टेबुलर जो कांसेप्ट पढ़ाई थी उसके बाद कुछ

भी नहीं बचता। आसानी से आपके लिए मैनेजेबल है। चलिए मैं अब आपको इसके अंदर लेसर की बुक में लेके चलता हूं। लेसर के बारे में बात करते हैं कि लेसर का क्या होगा? देखिए

यहां पर क्वेश्चन नंबर फाइव में आते हैं। क्वेश्चन नंबर फाइव आपको क्या कह रहा है?

आपको कह रहा है प्रकाश लिमिटेड के नाम से एक कंपनी है और उसने क्या किया? एक मशीन

लीज पे दी बादल लिमिटेड को। ठीक है? आपको

कह रहा है फेयर वैल्यू ऑफ़ एसेट 28.3 का है। उसकी लीज़ पीरियड 5 साल का है और लीज़ रेंटल 8 लाख पर एनम है। आपको कह रहा है गारंटेड रेसिडुअल वैल्यू 1.6 का है। और

एक्सपेक्टेड थ्री है। तो इस थ्री में से मैं इसको हटा दूं तो 1.4 का यूआर भी आ गया। या अनगारंटेड रेसिडुअल वैल्यू 15% की रेट है आपको उसके फैक्टर दे रखे हैं। आपको

पूछा अनअर्न फाइनेंस इनकम निकालो। अब अनर्न फाइनेंस इनकम कैसे आती है? मतलब

लेसर के लिए लेसर कैसे निकालता है? जो

उसको लीज पे आज दे रहा है उससे वो कितनी कमाई करेगा? कैसे निकालेंगे? मैंने आपको

कमाई करेगा? कैसे निकालेंगे? मैंने आपको

बताया था दो चीजें निकाल लो। एक तो आप निकाल लो ग्रॉस इन्वेस्टमेंट बिना पीवी निकाले। ग्रॉस इन्वेस्टमेंट क्या होता है?

एक तो एलआर, एक जीआरवी और एक यूआरवी। इन तीनों का टोटल ले लो। तो ये आपका ग्रॉस इन्वेस्टमेंट आ जाता है और दूसरा एक पीवी ऑफ जीआई निकाल लो जिसमें इन्हीं का पीवी

निकाल लो और उनका टोटल लगा दो। तो ये पीवी ऑफ़ जीआई हो जाता है जो एक तरह से उस एसेट की फेयर वैल्यू भी होती है। बस अब इन्हीं का डिफरेंस ले लो। ये टोटल पैसा मिलेगा और

ये उसकी एसेट की आज कीमत। तो यानी कि ये डिफरेंस आपका अनन फाइनेंस इनकम हो जाएगा। तो सबसे पहले मैं आपसे खुद पूछूं। देखो कितना आसान क्वेश्चन है। इन अनफाइनेंस इनकम वगैरह के अंदर ऐसे डरा दिया जाता है।

पता नहीं क्या हो गया। कुछ भी नहीं है। मैं आपसे पूछूं बताओ इसमें टोटल पैसा कितना मिलेगा? लेसर को बिना पी भी निकाले।

कितना मिलेगा? लेसर को बिना पी भी निकाले। तो सर एक तो 88 लाख का एलआर मिलेगा 5 साल

तक यानी ₹40 लाख। एक 1.6 का क्या मिलेगा?

जीआरवी और एक 1.4 का यूआरवी। ध्यान रखना लेसर के लिए कैलकुलेशन हो रही है। अब तो इसका मतलब सब कुछ इंक्लूड कर लो। यानी ₹43 लाख मिलेगा। यह ₹43 लाख तो क्या आ गया

दोस्तों? यह तो आ गया आपका ग्रॉस

दोस्तों? यह तो आ गया आपका ग्रॉस इन्वेस्टमेंट। अब इन्हीं की प्रेजेंट वैल्यू और निकाल लो। इन्हीं की प्रेजेंट वैल्यू निकाल लो। प्रेजेंट वैल्यू निकालना अपने को आता ही है 88 लाख 5 साल तक और

इसके अलावा पांचव साल के एंड में जीआरवी और यूआरवी इनकी प्रेजेंट वैल्यू निकाल ली। तो ये प्रेजेंट वैल्यू आ गई। मतलब जो चीज आज 283920

की है उसी को मैं लीज पे देकर जो किराया और उसके अलावा जो सेल्वेज वगैरह मिलेगा उससे टोटल मिलाकर ₹43 लाख कमा लूंगा तो मेरी इनकम कितनी हो जाएगी तो मेरी इनकम

इतनी हो गई ये लो कितना आसान है सोचो ये अनन फाइनेंस इनकम कैलकुलेट होकर आ गया है ये आपका अनन फाइनेंस इनकम हो गया ठीक है सर समझ में आ गया अब आगे बढ़ते हैं ध्यान

देना अगले क्वेश्चन क्वेश्चन नंबर सिक्स की तरफ चलते हैं। ये बड़ा इंपॉर्टेंट क्वेश्चन एग्जाम के अंदर सबसे ज्यादा एएस 19 में रिपीट हुआ क्वेश्चन होता है।

जिसमें आपको कह रहा है लीज स्टार्ट फ्रॉम फर्स्ट ऑफ अप्रैल 11 फॉर फोर ईयर आउट ऑफ सिक्स ईयर। छ साल में से फोर ईयर के लिए

अपन उसको लीज पे दे रहे हैं। बोथ कॉस्ट एंड फेयर वैल्यू इज़ 1250। कह रहा है द एसेट रिवर्ड बैक टू लेसर ऑन टर्मिनेशन ऑफ

लीज़। जब लीज पीरियड खत्म हो जाएगा तो वो एसेट वापस लौटा दी जाएगी। वापस लौटा दी जाएगी। मतलब ये कहना चाह रहा है जीआर भी इस क्वेश्चन में नहीं है। लेसी कह रहा है

मैं तो एसेट ही लौटा दूंगा। मैं मेरी तरफ से कोई ऑफर नहीं दूंगा। ठीक है? उधर लेसर

को लगता है कि वो मार्केट में ₹1,20,000 में बेच पाएगा। ये पूरा का पूरा इस बार यूआर भी बन गया क्योंकि लेसी की तरफ से तो कोई जीआर भी है नहीं तो पूरा का पूरा ये

यूआरवी बन गया। कह रहा है कि चार इक्वल इंस्टॉलमेंट में किराया है। पहला क्वेश्चन है जिसमें आपको रेंट का अमाउंट नहीं दे रखा। आपको खुद कैलकुलेट करना है। कह रहा है चार साल का वो जो लीज पीरियड है उसमें

इक्वल इंस्टॉलमेंट है। 8% की रेट है। आपको फैक्टर दे रखे है 8% की रेट से फोर्थ ईयर के इनका और इन चार सालों के फैक्टर का टोटल जिसको बोलते हैं एन्यूटी फैक्टर।

सबसे पहले ये बताओ ये फाइनेंस एज है कि नहीं? जो डिटरमिनिस्टिक जो कंडीशंस थी अपन

नहीं? जो डिटरमिनिस्टिक जो कंडीशंस थी अपन ने पांच पढ़ी याद है एग्जांपल उनमें से दो को अप्लाई करते हुए और फाइनेंस ली जाए तो अनऑन फाइनेंस इनकम बता दो। अब ये

कैलकुलेशन कैसे होगा? ये स्पेशल है। थोड़ा सा ध्यान से समझना। सबसे पहली चीज ये इकलौता क्वेश्चन जहां आपको एनुअल रेंटल अमाउंट भी खुद निकालना है। इक्वल रेंटल

अमाउंट है फोर ईयर का। तो ऐसे केस में अब क्या करें? सुनो ध्यान से। मैंने अभी-अभी

क्या करें? सुनो ध्यान से। मैंने अभी-अभी पिछले क्वेश्चन में ही समझाया था कि देखो जो आपका ये जीआई होता है जिसमें आपको जो भी मिलता है एलआर जीआर वी यू आर वी ये

सारा का सारा मिलाकर अगर मैं इसी की प्रेजेंट वैल्यू निकाल लूं तो ये पीवी ऑफ़ जीआई होता है और ये एक तरह से उस एसेट की फेयर वैल्यू होती है। अगर आप क्वेश्चन के अंदर ध्यान दो पिछले में तो अपना जो ये

पीवी ऑफ़ जीआई आया था ये भी 28300 कुछ आया था राउंड ऑफ होकर। तो यह 28,300 फेयर वैल्यू आपको दे रखी है। तो इसी तरीके से

आपको इस एसेट क्वेश्चन में आपको पहले से फेयर वैल्यू दे रखी है 1250। अब ये जो 1250 का फेयर वैल्यू है, ये फेयर वैल्यू किन चीजों से मिलकर बना हुआ है? यानी ये

एक तरह से पीवी ऑफ़ जीआई है। अब ये जो पीवी ऑफ़ जीआई है, इस पीवी ऑफ़ जीआई के अंदर तीन चीजें हैं। एक एलआर का पीवी, लीज रेंटल

का, एक जीआरवी का पीवी और एक यूआरवी का। जिसमें से इस क्वेश्चन के अंदर जीआर भी तो है नहीं। तो देखो मैंने क्या किया? यह

₹1,50,000 का टोटल अमाउंट है जो कि एसेट की फेयर वैल्यू है जो कि एक तरीके से पीवी ऑफ़ जीआई है। जो कि इन तीन चीजों का टोटल होता है। एक तो पीवी ऑफ़ एलआर, एक पीवी ऑफ़

जीआरवी और एक पीवी ऑफ़ यूआरवी। तो मैंने इसमें से क्या किया? सबसे पहले मैं आपको अगर कहूं कि इसमें से ये दो चीजें हटा दूं। जीआरवी और यूआरवी का पीवी। तो मेरे

पास एलआर बचेगा। भाई ये तीन चीजों का टोटल है। तो मैं इसमें से जीआर भी हटा दूं और यूआर भी हटा दूं तो एलआर बच जाएगा। तो मैंने क्या किया? इस 1250 के टोटल में से

सबसे पहले तो जीआर भी हटाया जो है ही नहीं। फिर यूआर भी हटाया। ध्यान रखना पी वी क्योंकि ये 1250 पीवी है। तो सारी चीजें आपको प्रेजेंट वैल्यू फॉर्म में हटानी है। तो ये प्रेजेंट वैल्यू निकाल कर

कैसे? 1,20,000 का फोर्थ ईयर के एंड में

कैसे? 1,20,000 का फोर्थ ईयर के एंड में अमाउंट है। तो ये लो फोर्थ के फैक्टर से मल्टीप्लाई कर दिया। तो ये आपके पास में जो एलआर है उसकी पीवी आ गई। ध्यान रखना

एलआर की पीवी जो लीज़ रेंटल है उसका पीवी आ गया। मतलब जो लीज़ रेंटल एनुअली आपको मिलेगा 4 साल तक उसका टोटल इतना है। पी प्रेजेंट वैल्यू में एब्सोल्यूट अमाउंट में नहीं प्रेजेंट वैल्यू में। तो

प्रेजेंट वैल्यू में वो टोटल इतना है। तो अब मुझे इसको एनुअल इक्वल में बदलना है। अपने को यहां ये पता लगाना है कि इसमें से अब वो एनुअल इक्वल कितना होगा? तो एनुअल

इक्वल निकालने के लिए नॉर्मली अपने दिमाग में आता है हां सर अपन इसको है ना चार साल से डिवाइड कर देते हैं। ये लो चार साल से डिवाइड कर दिया। लेकिन लेकिन लेकिन रुको जरा सबर करो। ये क्या एब्सोल्यूट अमाउंट

है क्या? नहीं है। ये प्रेजेंट वैल्यू है।

है क्या? नहीं है। ये प्रेजेंट वैल्यू है। तो आपको भी क्या करना पड़ेगा? सीधा 4 साल से डिवाइड नहीं करना। आपको 4 साल का जो एन्यूटी फैक्टर है जो क्वेश्चन में दे रखा है यानी पी फैक्टर का टोटल उसी से करना

है। जिसके लिए मैंने आपको क्लास में कॉनंसेप्चुअली भी सिखाया कि देखो ऐसे ये फार्मूला बना कैसे? इसका भी आपको पूरा लॉजिक समझाया कि देखो इस तरीके से ये फार्मूला बन गया। ठीक है? तो आपको क्या

करना है? एन्यूटी फैक्टर से डिवाइड कर

करना है? एन्यूटी फैक्टर से डिवाइड कर देना है। क्यों? क्योंकि ये अमाउंट एब्सोल्यूट अमाउंट नहीं है। ये आपका प्रेजेंट वैल्यू है। तो आप फैक्टर का भी प्रेजेंट वैल्यू का टोटल ले लो। तो चार साल का टोटल आपको दे रखा है। तो ये आपका

एनुअल एलआर आ गया। तो ये तो हो गया इस क्वेश्चन का एक मेन कैलकुलेशन एनुअल एलआर। अब आपको ये डिसीजन लेना है कि ये फाइनेंस लीज है या ऑपरेटिंग लीज। तो अपन यहां पर

दो पैरामीटर यूज़ करते हुए निकालेंगे। पांच है वैसे लेकिन अपन यहां पर दो पैरामीटर कौन से? देखो एसेट की लाइफ है 6 साल।

कौन से? देखो एसेट की लाइफ है 6 साल। उसमें से फोर ईयर के लिए लीज पर दिया जा रहा है। लाइफ है 6 साल उसमें से फोर ईयर के लिए तो यानी 67% लाइफ वाले में मैंने

बताया था 50% से अगर ज्यादा है तो फिर वो फाइनेंस लीज है। दूसरा मैंने एक कैलकुलेशन मैथमेटिकल बताया था कि लेसी से जो भी पेमेंट आएगा उसकी पीवी ले लो। पीवी ऑफ़

एमएलपी जो अपने पास ऑलरेडी ये रहा लेसी से जो पेमेंट आएगा उसकी ये प्रेजेंट वैल्यू है। अब इसको फेयर वैल्यू से कंपेयर कर लो। फेयर वैल्यू है 1250। तो 1250 में से अपन

बेचारे इकलौते लेसी से जो ये लेसी है इसी से अपन ने क्या किया इसी से अपन ने इतना अमाउंट ले लिया वो भी प्रेजेंट वैल्यू में बिना पी भी निकाले तो और ज्यादा है

प्रेजेंट वैल्यू में इतना अमाउंट ले लिया इसका मतलब लगभग 93% ले लिया इतना किराया थोड़ी होता है इसका मतलब ये फाइनेंस लीज है तो यानी दोनों कंडीशन से पता चल गया कि

ये फाइनेंस लीज है। अब फाइनेंस लीज है तो अर्न ऑन फाइनेंस इनकम निकाल दो। अर्न एंड फाइनेंस इनकम कैसे निकालते हैं? तो GI - PV ऑफ़ GI GI - PV ऑफ़ GI तो GI अपने पास है

क्या? किराया हर साल का 4 साल का अपन ने

क्या? किराया हर साल का 4 साल का अपन ने निकाला था। ये देखो अपन ने रेंट कैलकुलेट किया था ईयर वाइज ये रहा। तो ये मल्टीप्लाई फोर कर दिया। इसके अलावा 1 लाख

का जो भी जीआर 1,20,000 का अपने पास में यूआर भी है। जीआर भी इस क्वेश्चन में कुछ है नहीं। तो ये सारा टोटल लगाकर अपने पास में आ जाएगा जी जीआई। ये आपका जीआई आ गया।

इसी में से पीवी ऑफ़ जीआई जो एसेट की फेयर वैल्यू है वो हटा दो। तो ये लो अर्न अर्न फाइनेंस इनकम कैलकुलेट होकर आ जाएगा। चलिए बढ़ते हैं आगे। एक बार आपको खुद से दोबारा प्रैक्टिस कर लेनी है कॉन्फिडेंस लाने के

लिए। मैं आपको एक्सप्लेन कर रहा हूं ताकि आप जब रिवाइज खुद से भी करो तो आपको अब कम से कम टाइम लगे। ऐसे चैप्टर है जिनका खुद से तो रिवीजन करना ही है। अगर आप खुद से

इनको सॉल्व नहीं करोगे तो फिर आपको एग्जाम के अंदर कॉन्फिडेंस नहीं आएगा। अभी के लिए आ जाएगा तो उसके लिए आपको खुद से भी प्रैक्टिस करनी पड़ेगी। आगे बढ़ते हैं दोस्तों। अगले क्वेश्चन की तरफ चलते हैं।

सेल्स एंड लीज बैक का क्वेश्चन है। आईसीआई ने लेटेस्ट ऐड किया था अपनी आरटीपी सेप्टेंबर 25 के अंदर। पहला क्वेश्चन डाला जिसके अंदर सेल एंड लीज बैक का क्वेश्चन

और फाइनेंस लीज है। अब तक ICI ने फाइनेंस लीज का प्रैक्टिकली कोई क्वेश्चन नहीं डाला हुआ था। सेल एंड लीज बैक में। क्या कह रहा है? कह रहा है 1 अप्रैल 11 को

मानसी लिमिटेड ने एक प्लांट सेल किया 85 टू 800 में। ठीक है? इतने में इसको सेल कर दिया। कह रहा है उस प्लांट की कैरिंग वैल्यू यानी डब्ल्यूडीबी 180 थी। मतलब

भयंकर प्रॉफिट पर बेचा। यह उसकी डब्ल्यूडीबी है। सेल वाज़ पार्ट ऑफ पैकेज अंडर व्हिच आकाश लिमिटेड लीज़ द एसेट बैक टू मानसी। और अब वापस से जिसने खरीदा था

आकाश ने उसने वापस अब मानसी को उसको बेच दिया। वापस लीज़ पे दे दिया। जो कि इसी कॉन्ट्रैक्ट का पार्ट था। दोनों मिलाकर एक ही कॉन्ट्रैक्ट के पार्ट थे। ठीक है? एट

ईयर के लिए। द इकोनमिक लाइफ ऑफ़ एसेट इज़ 8 ईयर। 8 साल 8 साल यानी फाइनेंस लीज हो गया। 8 साल की टोटल आई पर अपन ने वापस उसको 8 साल के लिए लीज़ पे ले लिया। द

मिनिमम लीज़ पेमेंट पेएबल बाय लेसी हैज़ फिक्स्ड 160। हर साल लेसी अपना 160 का किराया पे करेगा। ठीक है? द इंक्रीमेंटल

बोरोइंग रेट इज़ 10%। 10% का आपको रेट दे रखा है। कैलकुलेट द नेट इफ़ेक्ट इन पीएल ऑफ़ मानसी। ये जो मानसी लिमिटेड है, इसके पीएल में नेट इफ़ेक्ट बताओ। तो, पीएल के अंदर

नेट इफ़ेक्ट क्या आएगा? देखो मानसी लिमिटेड जो है वो एक तो एसेट को बेच रहा है तो बेचने पे उसका प्रॉफिट आएगा तो प्रॉफिट को तो यहां पीएल के क्रेडिट में दिखाएगा और

वो उसी एसेट को वापस लीज पे ले रहा है ध्यान देना फाइनेंस लीज पे 8 साल में से 8 साल के लिए यानी फाइनेंस लीज पे ले रहा है अब फाइनेंस पे लीज पे ले रहा है तो इसका मतलब मैंने आपको बताया था डेप्रिसिएशन कौन

लगाएगा लेसी जो सेलर है मानसी तो यहां पर वो डेप्रिसिएशन लगाएगा तो इन्हीं का पीएल में नेट इफेक्ट पूछ रहा है कितना है हालांकि एक जो ये एल एलआर पे कर रहा है खर्चा किराया इसके अंदर से जो इंटरेस्ट

एलिमेंट है वो भी पीएल के आएगा लेकिन उसके लिए इसने आंसर में कुछ भी डिस्कशनंस नहीं किया तो अपन भी नहीं करेंगे जब आंसर भी नहीं कर रहा तो अपने को दो चीजें डिस्कस करनी है एक तो प्रॉफिट और एक डेप्रिसिएशन

तो अब ये कैसे निकालेंगे बड़ा सिंपल सा काम है सुनो ध्यान से प्रॉफिट कैसे निकाला फाइनेंस लीज है तो मैंने कहा था हमेशा कांसेप्ट ओवर द पीरियड का रहता है आप सेल और डब्ल्यूडीबी सेल एंड लीज बैक में अभी सिखाया था ना सेल और डब्ल्यूडीबी का

डिफरेंस निकाल लो और उसको ओवर द पीरियड ट्रांसफर कर दो तो देखो देखो जरा ये सेल वैल्यू है और ये इसके डब्ल्यूडी भी है। मैं आपसे कहूं इसका प्रॉफिट कैलकुलेट करके दो। आप इधर कैलकुलेट करो इतने में मैं भी

आपको दिखा देता हूं। तो देखिए ये अपना इसका प्रॉफिट कैलकुलेट होकर आ गया। कितना आ गया? 672800। अब 67 टू 800 लीस्ट पीरियड

आ गया? 672800। अब 67 टू 800 लीस्ट पीरियड आठ साल का। तो इसी के बेसिस पे इतनाइतना करके अपन इसको पीएल के क्रेडिट में दिखाएंगे। तो ये तो आपका हर साल पीएल के क्रेडिट में प्रॉफिट आएगा। दूसरी तरफ आपको

उस एसेट के ऊपर डेप्रिसिएशन लगाना है। तो वो डेप्रिसिएशन आपको पीएल के डेबिट में डालना है। तो अब वो डेप्रिसिएशन पीएल के अंदर कितना जाएगा? तो एसेट कितने की है

दोस्तों? एसेट अप जो यहां पर कैलकुलेट

दोस्तों? एसेट अप जो यहां पर कैलकुलेट करके दे रखी है। तो उसी का अपन ने यहां पर एट ईयर के बेसिस पे उसका डेप्रिसिएशन निकाल लिया। तो ये उसका डेप्रिसिएशन आ

गया। तो ये पीएल के अंदर प्रॉफिट क्रेडिट हो गया। ये डेप्रिसिएशन आ गया। तो ये आपका पीएल के अंदर डेबिट में नेट इफेक्ट आ गया। बस ये पूछा है कि नेट इफेक्ट बता दो। इतना

आ जाएगा। दैट्स इट। कुछ भी नहीं है। चलिए आगे बढ़ते हैं। क्वेश्चन नंबर एट। कह रहा है डब्ल्यूडीबी है 300 सेल किया

400 में। तो अब आप अलग-अलग सिचुएशन में बताओ क्या ट्रीटमेंट होगा? अगर ये सेल एंड लीज़ बैक में ऑपरेटिंग लीज़ है। ऑपरेटिंग लीज़ है तो क्या होगा? पहला केस सेल प्राइस

जो 400 है वो फेयर वैल्यू के इक्वल है। याद करो सेल फेयर वैल्यू इक्वल तो आप बिल्कुल नॉर्मल आंसर निकाल दो। सेल और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस सेल किया 400 में फेयर वैल्यू 300 यानी कि 100 का आपको

प्रॉफिट हो गया और आप कहोगे इमीडिएटली ऑपरेटिंग का मतलब इमीडिएटली टू पीएल तो इमीडिएटली टू पीएल में अपन पहले केस सिनेरियो में लेके चले जाएंगे तो ये 100 का जो प्रॉफिट है ये इमीडिएटली पीएल में

चला जाएगा। कौन सा कांसेप्ट है? सेल इक्वल

टू फेयर वैल्यू। ठीक है? दूसरे में चलते हैं। कह रहा है फेयर वैल्यू 450 है। और बेचा कितने में? 400 में। तो यानी कि सेल कम है और फेयर वैल्यू ज्यादा है। यानी

सेलर की मजबूरी का फायदा बायर उठा रहा है जो कि उठाएगा दुनियादारी के हिसाब से क्योंकि मजबूरी सेलर की है। तो अगेन अपन नॉर्मल आंसर बनाएंगे जितने में बेचा और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस ले लेंगे। ये आ

गया आपका प्रॉफिट और इमीडिएटली टू पीएल तो इमीडिएटली टू पीएल में चला जाएगा। ठीक है?

आगे बढ़ते हैं। कह रहा है कि फेयर वैल्यू अगर अपना कितना है? फेयर वैल्यू अगर अपना 350 है और अगर अपना सेल प्राइस 250 है। अगेन सेल प्राइस कम है और फेयर वैल्यू

ज्यादा है तो फिर से प्रॉफिट या लॉस निकाल लो इमीडिएटली टू पीएल। बट अगर लॉस आता है तो मैंने कहा था अनलेस कंपनसेटेड बाय लीज रेंटल। तो देखो यहां पर सेल करा है 250

में एसेट थी 300 की तो 50 का अपने को लॉस हो गया। ये लॉस पीएल में इमीडिएट चला जाएगा। अनलेस कंपनसेटेड बाय फ्यूचर लीज़ रेंटल्स। ठीक है? आगे बढ़ते हैं कैश

सिनेरियो फोर में। फोर वाला अब ध्यान से सुनना। फेयर वैल्यू 300 और बेचा 400 में। ये स्पेशल है। अब यहां पर आपको दो

कैलकुलेशन करनी है। एक तो सेल और फेयर का डिफरेंस और फिर फेयर और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस। ये डिफरेंस ये डिफरेंस। ये डिफरेंस आपका हमेशा प्रॉफिट बताना है और

इस प्रॉफिट को बताना है ओवर द पीरियड। और ये डिफरेंस जो भी प्रॉफिट या लॉस आ रहा है, जो भी सिचुएशन है और उसके हिसाब से आपको बताना है इमीडिएटली। बस ये बताया था

तो उसके हिसाब से देख लो। कह रहा है अपन ने सेल करा 400 में और फेयर वैल्यू उसकी कितनी है? 300 तो सबसे पहले सेल और फेयर

कितनी है? 300 तो सबसे पहले सेल और फेयर का डिफरेंस ले लिया। ये सेल और फेयर का डिफरेंस 100 आ गया। प्रॉफिट ओवर द पीरियड। अब अपन ने फेयर और डब्ल्यूडीवी का फेयर और डब्ल्यूडीवी बराबर है। तो यानी ज़ीरो है जो

इमीडिएटली चला जाएगा। लास्ट वाला केस और देखो। लास्ट वाले केस में कह रहा है फेयर वैल्यू 250 है और सेल करा 290 में। तो पहले 290 और 250 का डिफरेंस ले लिया 40 का

प्रॉफिट ओवर द पीरियड और फिर अपन ने फेयर और डब्ल्यूडीबी का डिफरेंस लिया। फेयर 250 और डब्ल्यूडीबी 300 है तो 50 का लॉस इमीडिएटली। ये लो दोस्तों ईएस 19 का काम हो गया है खत्म। आगे एक क्वेश्चन वापस से

सेल एंड लीज बेक का रिपीट है। खुद से प्रैक्टिस कर लें। थ्योरिटिकल क्वेश्चन तीन है जिसमें आपको सिनेरियोस दे रखे हैं पांच उसमें डिसाइड करना है फाइनेंस लीज है या ऑपरेटिंग लीज है सिंपल आंसर है और अगले

क्वेश्चन में भी आपको डिसाइड करना है कि ये फाइनेंस लीज है या ऑपरेटिंग लीज है अगेन सिंपल क्वेश्चन है तो आसानी से इनको आप बना सकते हो एएस 19 जो लीजिंग का था दोस्तों ये मैंने आपको करवा दिया पूरा

कांसेप्ट भी पूरी कवर करवा दी साथ में सारे के सारे क्वेश्चन आंसर अगर आपको मजा आ गया है अगर वास्तव में आपको लगा है कि हां सर ने मेहनत की और कॉन्फिडेंट है तो

एक लाइक लग दबा दीजिए, थम्स अप कर दीजिए और साथ-साथ में आप लोग अपना फीडबैक भी जरूर शेयर करें कि किस तरह का आपको यह रिवीजन लेक्चर लगा है। ठीक है? और आपको

क्या-क्या जरूरत है? उसके बारे में आप अपना कमेंट में बता सकते हैं। अपन चलते हैं दोस्तों अगले एएस की तरफ जो कि अपना है एएस 22। एएस 22 क्या है दोस्तों? अकाउंटिंग फॉर

टैक्सेस ऑन इनकम। अकाउंटिंग फॉर टैक्सेस ऑन इनकम। अपन जो अपने प्रॉफिट के ऊपर इनकम टैक्स पे करते हैं तो उसकी अकाउंटिंग कैसे होती है? 11 से करते आ रहे हैं। लेकिन एएस

होती है? 11 से करते आ रहे हैं। लेकिन एएस 22 अब इसमें थोड़ा सा स्पेशल करने जा रहा है और वो आपको बताने जा रहा है कि अगर आप अपने टैक्सेस की अकाउंटिंग करोगे तो वो

टैक्सेस की अकाउंटिंग कैसे की जाती है उसको हम आपको बता देते हैं। तो उसके बारे में दोस्तों अपन बात करने जा रहे हैं अकाउंटिंग फॉर टैक्सेस ऑन इनकम के बारे में। अब ये अकाउंटिंग फॉर टैक्सेस ऑन इनकम

कैसे क्या होता है? इसको समझो।

यहां पर एक बड़ा स्पेशल डेफ टैक्स का कासेप्ट है। उसके बारे में बात करेंगे जो अब तक अपन कई बार सुने लेकिन हर बार उसके साथ बोल देते हैं तेरे को मैं एएस 22 में देख लूंगा। कई बार करंट टैक्स लिखा हुआ

आता है। उसके बारे में भी अपन बात करते थे कि इसको एएस 22 में देख लेंगे। तो अब अपने पास समय आ गया है कि एएस 22 के अंदर अपन इनके बारे में बात करें। तो दोस्तों आप

सबको पता है कि एक तो होता है अपना अकाउंटिंग रिकॉर्ड जिसमें अकाउंट के हिसाब से आप अपना प्रॉफिट निकालते हो। यहां पर सारी बातें बिफोर टैक्स की है क्योंकि आगे

जाकर सारा टैक्स का खेला करना है तो आपको अभी सोचना है बिफोर टैक्स तो एक तो होता है अपना क्या अकाउंटिंग के अंदर प्रॉफिट वो जो अकाउंटिंग के अंदर प्रॉफिट होता है

उसी का यहां पर नाम है एकाउंटिंग इनकम एक अपन अपना इनकम टैक्स के हिसाब से प्रॉफिट निकालते हैं इनकम निकालते हैं जो पीजीबीपी वाला होता है जिससे अपन बिजनेस की इनकम निकालते हैं और वहां पर आपको सबको

पता है कि वो जो पीजीबीपी है उससे जब आप इनकम निकालते हो तो उसके अंदर पूरा अलग ही हिसाब किताब है अलग ही खेल है। वहां पर अलग ही सिस्टम चलता है। वो कौन-कौन से खर्चे लेंगे, कौन से अलऊ करेंगे, डिसअाउ

करेंगे, सारा अलग ही सिस्टम है। तो वहां से जो कैलकुलेट होकर आता है उसको बोलते हैं टैक्सेबल इनकम। एक होती है अकाउंटिंग इनकम और दूसरा होता है टैक्सेबल इनकम।

अकाउंटिंग इनकम अकाउंट के हिसाब से, टैक्सेबल इनकम, टैक्स के हिसाब से। क्या ये दोनों इक्वल होती है क्या नहीं होती?

क्यों? क्योंकि बहुत सारे ऐसे एडजस्टमेंट है जो अकाउंट में अलग तरीके से होते हैं। टैक्सेशन में अलग होते हैं। डेप्रिसिएशन अपन यहां पर एसेट की यूज़फुल लाइफ के हिसाब से एसएलएम डब्ल्यूडीबी जो भी है उसको ध्यान रखते हुए कैलकुलेट करते हैं। टैक्स

वाले कहते हैं नहीं हमारे यहां तो एक सेक्शन 32 बना हुआ है और उसके हिसाब से जो कैलकुलेशन होकर आएगा वही आपको अलऊ करना है। प्रीिलिमिनरी एक्सपेंस अकाउंट कहता है पूरा आज ही एडजस्ट कर दो। टैक्स वाले कहते

हैं नहीं नहीं हम तो इसकी पांच इक्वल डिडशंस देते हैं। साइंटिफिक रिसर्च के लिए एसेट खरीदा। टैक्स वाले कह रहे हैं नहीं इसमें हम पूरी डिडक्शन आज ही दे देंगे 100% अकाउंट वाले कह रहे हैं अभी पीपी है

डेप्रिसिएशन के हिसाब से करो तो इस तरह से बहुत सारे ऐसे चीजें हैं जो अकाउंट में अलग ट्रीटमेंट होती है और टैक्स में अलग तो इसी कारण से दोनों इनकम एक नहीं होती

बहुत सारे ऐसे एडजस्टमेंट है जो दोनों जगह अलग-अलग होते हैं। अब दोनों इनकम एक नहीं होती तो इन दोनों के ऊपर जो टैक्स निकाला जाएगा वो भी एक नहीं होगा। जब मैं

अकाउंटिंग इनकम के ऊपर टैक्स निकालूंगा। ध्यान देना एकाउंटिंग इनकम के ऊपर टैक्स निकालूंगा तो इसको बोलूंगा टैक्स एक्सपेंस। ये टैक्स एक्सपेंस हो गया। तो ये जो टैक्स एक्सपेंस है और इधर जो

पीजीबीपी वाला इनकम है जो मेरा टैक्सेबल इनकम है उस पे जो टैक्स निकालूंगा इसको बोलते हैं करंट टैक्स। यानी अकाउंट्स के हिसाब से टैक्स एक्सपेंस और टैक्सेशन के हिसाब से करंट टैक्स। करंट टैक्स जो सरकार

आपसे कहती है कि लाओ पे करो आप अपनी इनकम पे। तो वो आपको पे करना पड़ा। लेकिन ये अकाउंटिंग रिकॉर्ड से हमने सोचा था। तो क्या ये दोनों इक्वल होंगे क्या? सर कैसी

बात कर रहे हो? जब दोनों इनकम ही अलग-अलग है तो दोनों के टैक्स अमाउंट भी अलग-अलग हो गए। ये जो टैक्स एक्सपेंस है और ये जो करंट टैक्स है ये भी तो दोनों अलग-अलग हो

गए। बिल्कुल। तो इसी कारण से एक कांसेप्ट क्रिएट हुआ डेफर्ट टैक्स का। मतलब ये जो इक्वेशन जो इनकलिटीज में चल रही है। अब हमें इसको इक्वलिटीज में बदलना है। तो

मुझे क्या करना पड़ेगा? ये टैक्स एक्सपेंस और करंट टैक्स को इक्वल करना है तो इस करंट टैक्स के अंदर कुछ ना कुछ प्लस माइनस और करना पड़ेगा ताकि ये टैक्स एक्सपेंस के बराबर हो जाए। तो उसी चीज को दोस्तों यहां

पर अपन बोलते हैं डेफ टैक्स के नाम से। यानी तीन टर्मिनोलॉजी है टैक्स एक्सपेंस अकाउंट के अंदर करंट टैक्स टैक्सेशन के हिसाब से जो टैक्स रिकॉर्ड के हिसाब से

अपने को पे करना पड़ता है। और इन्हीं दोनों के बीच का जो डिफरेंस है इसी को बोलते हैं क्या? डेपर टैक्स। तो अपने को इन्हीं सब चीजों की अब बात करनी है। तो

सुनो ध्यान से अपन 11 से मैंने जैसे आपको कहा अपन कोई टैक्सेशन की नई अकाउंटिंग नहीं कर रहे पहले से करते आ रहे हैं। क्या किया ये अपन ने पीबीटी निकाला प्रॉफिट बिफोर टैक्स अकाउंट के अंदर पीएल के हिसाब

से मतलब अकाउंट के अंदर और इसी में से अब अपन टैक्स का एडजस्टमेंट कर देते हैं। जो भी रेट दे रखी है। तो जनरली अपन अपन उसको प्रोविजन फॉर टैक्स के नाम से लिख देते थे। अपन अब तक उसको प्रोविजन फॉर टैक्स।

अब से ध्यान रखना उसी का नाम अपन यहां पर बदल देते हैं। उसका नाम आपको टैक्स एक्सपेंस रखना है। जो अपन अब तक प्रोविजन फॉर टैक्स बोला करते थे पीबीटी में से टैक्स लेस करके उसी का नाम यहां पर टैक्स

एक्सपेंस हो गया। ठीक है? अब उसी टैक्स एक्सपेंस को तोड़कर दो टुकड़े बना दिए गए जिनको अपने को अब पूरे इस चैप्टर में सीखना है और वो है एक तो करंट टैक्स और एक डेफर्ट टैक्स। करंट टैक्स मैंने आपको

बताया जो टैक्सेशन रिकॉर्ड के हिसाब से इनकम पे निकलेगा जो कि मोदी जी आपसे कहेंगे लाओ टैक्स पे करो। और इधर इन्हीं दोनों के बीच का जो डिफरेंस होगा उसको क्या बोलेंगे अपन डेफ टैक्स। तो अब ये

सारी चीजें कैसे होती है? क्या होती है?

इनको अपने को समझना है। तो सबसे पहली बात इन दोनों के बीच में डिफरेंस आया क्यों?

तो मैंने अभी-अभी बताया पीएल दोस्तों अपना पूरा एक्रल कांसेप्ट पे बेस होता है। जो भी अपना करंट ईयर का खर्चा है। चाहे भले अपन ने उसको पे करा नहीं करा वो सारा का सारा इसी में आता है। जो भी अपनी इनकम है

जो अपनी अराइज़ हुई है करंट ईयर में सारी आती है एक्रूअल बेसिस पे। टैक्सेशन वाले कहते हैं नहीं हम तो हमारे अलग नियम रखते हैं। कई खर्चे ऐसे हैं जो हम अलऊ तभी करते हैं जब आपने उनको पे किया हो। 43 बी

सेक्शन आपने सुना होगा जिसमें आपने अगर उनको पे किया तभी अलऊ किया जाता है। कई ऐसे खर्चे हैं जिनको अलऊ ही नहीं करते। फाइन पेनल्टी अगर आपने कोई फाइन या पेनल्टी पे करा है तो हम उसको डिस अलऊ कर

देंगे। अगर अपन ने कोई डोनेशन प्राइवेट ट्रस्ट को दिया है तो उसको डिसअ कर देंगे। तो इनकम टैक्स वाले अलग ही कांसेप्ट पे चल रहे हो। टैक्स अपना पीएल जो है वो पूरा प्योर एक्रूअल से बनता है। तो दोनों इनकम

मैंने कहा अलग-अलग होता है। एआई और टीआई एआई एकाउंटिंग इनकम टीआई टैक्सेबल इनकम। तो फिर दोनों के ऊपर जो टैक्स का अमाउंट है वो भी अलग-अलग हो गया। तो इन्हीं के बीच का जो डिफरेंस है वो डेफ टैक्स हो

गया। जैसे एक एग्जांपल से अपन बात करें। मान लो मेरा ₹00 का इनकम है। यहां पर भी यहां पर भी दोनों जगह सेम है। किस केवल डेप्रिसिएशन का चेंज है। अकाउंट में मैं

डेप्रिसिएशन निकाल रहा हूं। 300 कैसे आया वो दिमाग मत लगाओ। आज तक अपन डेप्रिसिएशन खूब निकाले और यहां सेक्शन 32 जो पीजीबीपी का है उसके हिसाब से इनकम टैक्स का है

उसके हिसाब से 45000 आ रहा है। तो यहां आ रहा है 30000 यहां 45000 तो इसका मतलब मेरा ये प्रॉफिट आ गया यहां पर 20000 का और यहां पर 5000 का। अब आपको कह रहा है

30% की टैक्स रेट है। तो यानी 20,000 का 30% 6000 का टैक्स। यहां पर 5000 का 30% 1500 का। यानी मेरे हिसाब से 6000 का

टैक्स है। लेकिन सरकार कह रही है लाओ ₹1500 पे करो। तो जो 4500 का ये जो डिफरेंस है जो ये इक्वेशन इक्वल नहीं है इसको इक्वल करना पड़ेगा। तो ये 4500 का जो

है ये डेपर टैक्स है। अब ये डेपर टैक्स एसेट भी होता है। लायबिलिटी जो डिस्कस करेंगे कैसे होता है? यही तो सारे अपने को यहां डिसीजन मेकिंग करनी है तो वो बाद में डिस्कस करेंगे। एक बार के लिए समझते चलो।

ठीक है सर समझ में आ गया। अब एक एग्जांपल और लो। 50-50 की दोनों जगह इनकम है। प्रीिलिमिनरी एक्सपेंस है कंपनी को बनाने का खर्चा जो टोटल मिलाकर 10,000 है।

अकाउंट वाले ने कहा पूरा यही लेस कर दो। टैक्स वाले ने कहा नहीं यहां पर 2000 लेस करो। हम 1 डिडक्शन देते हैं हर साल। मतलब पांच इंस्टॉलमेंट में इसको डिडक्ट करेंगे।

तो आप ₹2000 लेस करो। तो मेरी यहां इनकम हो गई 40। यहां हो गई 48। अब इस ₹400 पे 30% से मेरा 12,000 का टैक्स बना। यहां पर बना 14,400 का। तो ऐसी सिचुएशन में क्या

हुआ? अगेन दोनों इक्वल नहीं हुए। अब इक्वल

हुआ? अगेन दोनों इक्वल नहीं हुए। अब इक्वल करना है मुझे। तो इस 14400 में से इस बार 2400 को माइनस करना पड़ा। पिछली बार वाले में ध्यान हो तो ऐड करना पड़ा था।

यहां पर मुझे वो जो क्वेश्चन था उसमें ऐड करना पड़ा था। और यहां पर अब मुझे क्या करना पड़ा? लेस करना पड़ा। तो मुझे अगर

करना पड़ा? लेस करना पड़ा। तो मुझे अगर दोनों को इक्वल करना है तो ये 14,400 में से 2400 लेस करना पड़ा। तो ये क्या है मित्रों? ये है डेफर्ट टैक्स। अब ये

मित्रों? ये है डेफर्ट टैक्स। अब ये डेफर्ट टैक्स एसेट भी हो सकती है, लायबिलिटी भी होती है। अब इनका कैसे सिलेक्शन होगा? यही सारा खेल है। इतना

सिलेक्शन होगा? यही सारा खेल है। इतना सिंपल ईजी तरीके से समझाऊंगा। किसी ने सोची ना होगी। आपके लिए ऐसे चुटकियों में ईएस 22 का डेफ टैक्स एसेट या लायबिलिटी जो आपके लिए मोस्ट कंफ्यूजिंग है कि पता नहीं

सर ये एसेट लायबिलिटी कब क्या हो रही है आपको मजा आ जाएगा। देखिए क्या करते हैं। ये जो दोनों के बीच में डिफरेंस आते हैं अकाउंट में अलग, टैक्सेशन में अलग। उसके

पीछे दो रीजन होते हैं। एक तो टाइमिंग डिफरेंस होता है और एक परमानेंट डिफरेंस होता है। टाइमिंग डिफरेंस का मतलब जो डिफरेंस अराइज भी हुआ है और आगे जाकर

फ्यूचर में रिवर्स होने की कैपेसिटी भी रखता है। जो अराइज़ भी हुआ और रिवर्स होने की कैपेसिटी भी रखता है। तो इसका मतलब इसको बोलते हैं टाइमिंग डिफरेंस। केवल एक टाइम बीइंग का बात है कि हां दोनों जगह

अलग-अलग ट्रीटमेंट हो रहा है। लेकिन ओवर द पीरियड अगर आप चेक करोगे तो दोनों जगह सेम ही आ रहा है। जो प्रीिलिमिनरी एक्सपेंस है ₹100 का वो यहां पर भी 10 ही लेस हो रहा है और यहां पर भी 10। बस फर्क क्या है कि

आप पहले साल यहां 10 लेस कर रहे हो यहां दो। लेकिन ये आगे जाकर दो2000 हर साल और लेस करेगा। तो पांच सालों में देखोगे तो यहां पर भी 10 ही लेस होगा और यहां पर भी

होगा। इसको बोलते हैं टाइमिंग डिफरेंस। यह आपका टाइमिंग डिफरेंस होता है जो ओरिजनेट भी होता है और ओरिजनेट होने के साथ रिवर्स होने की कैपेसिटी भी रखता है और इसी के

कारण डेफर्ट टैक्स एसेट या लायबिलिटी अराइज़ होती है। इसी के कारण डेफर्ट टैक्स का कांसेप्ट आता है। अगर दोनों के बीच में डिफरेंस परमानेंट डिफरेंस है। परमानेंट

डिफरेंस का मतलब जो ओरिजनेट हुआ लेकिन कभी रिवर्स नहीं होगा। ओरिजनेट हो गया लेकिन कभी रिवर्स नहीं होगा। मतलब दोनों जगह वो ट्रीटमेंट का जो डिफरेंस आया वो हमेशा के

लिए रहेगा। ये नहीं कि आगे जाकर ठीक हो जाएगा। इसको बोलते हैं परमानेंट डिफरेंस। जैसे मैं आपको एक एग्जांपल के तौर पर यहां

पर बताऊं। देखिए यहां पर ये अपना 50000 का यहां पर अकाउंट्स के अंदर है। ये रहा परमानेंट डिफरेंस। देखिए ये रहा

50,000 का अकाउंट के अंदर है और ये टैक्सेशन के अंदर 50,000 है। अब अपने को करंट ईयर में कोई वलेशंस वगैरह हुए उसके कारण कोई फाइन पेनल्टी पे करना पड़ा

₹10,000 का। अपन ने कोई गलती कर दी। उसका अपने को पनिशमेंट मिला। ₹10,000 का पेनल्टी देनी पड़ी। अकाउंट्स वालों ने कहा अच्छा आपने पेनल्टी पे करी है। खर्चा है पीएल में से उड़ा दो। तो अपन इसको पीएल

में से उड़ा देंगे। टैक्स वाले टैक्स वालों ने कहा ना ना अभी भी नहीं और कभी भी नहीं। ना आज लेस करने देंगे ना फ्यूचर में। यानी दोनों जगह ये जो 10,000 का

डिफरेंस आया है ये परमानेंट डिफरेंस है। और परमानेंट डिफरेंस के कारण आपको कोई भी डेफिट टैक्स एसेट या लायबिलिटी अराइज़ नहीं करना। डेफ टैक्स का कांसेप्ट तभी अराइज

होता है जब वह टाइमिंग डिफरेंस होता हो। जैसे अपने कासेप्ट में देखो एक एग्जांपल है वन उसके थ्रू मैं आपको बताता हूं। ये देखिए कह रहा है प्रीलिमिनरी एक्सपेंस है

₹5000 का। कितने का? 5000 का। जो अपन अकाउंट के अंदर ईयर वन में पूरा एडजस्ट कर रहे हैं और वहीं टैक्सेशन के अंदर इसको 5

साल में एडजस्ट कर रहे हैं। कह रहा है अपना दोनों जगह इनकम ₹1 ₹100 का है अकाउंट में भी और टैक्सेशन में बिफोर प्रीिलिमिनरी एक्सपेंस एंड टैक्स। तो अब

क्या हुआ सुनो ध्यान से ये ईयर 1 2 3 4 5 यह मेरा प्रॉफिट है ₹1 ₹100 का। कौन से रिकॉर्ड में? एज पर बुक्स मतलब अकाउंट के

रिकॉर्ड में? एज पर बुक्स मतलब अकाउंट के हिसाब से। यह मैंने प्रीिलिमिनरी का 5000 पूरा का पूरा पहले साल ही लेस कर दिया। यह प्रीलिमिनरी 5000 का पूरा का पूरा पहले

साल ही लेस कर दिया यहां पर। तो अब मेरा पहले साल का इनकम 5000 हो गया। बाकी सब में 10,000 क्योंकि प्रीलिमिनरी का डिडक्शन फर्स्ट ईयर में ले चुका। 30% की

रेट है। उसी से मेरा यह टैक्स बनकर आ गया। ठीक है? तो पहले साल मेरा टैक्स बना कितने

ठीक है? तो पहले साल मेरा टैक्स बना कितने का? 1500 का। और बाद में आगे के ₹3000 का

का? 1500 का। और बाद में आगे के ₹3000 का जिसको मैंने आपको कहा था टैक्स एक्सपेंस। क्या बोला था? टैक्स एक्सपेंस। ठीक है सर। अब देखो टैक्सेशन रिकॉर्ड में क्या हुआ?

टैक्सेशन रिकॉर्ड में भी मेरी 10-100 की इनकम थी। उन्होंने कहा एक हजार का डिडक्शन देंगे पांच सालों में 5000 का। यानी कि एक-ए हजार तो ये हर साल 99000 की इनकम इसी

पे ये मेरा टैक्स। अब अगर आप थोड़ा सा ध्यान से देखो तो दोनों जगह जो मैंने प्रीिलिमिनरी का डिडक्शन लिया है वो ओवर द ईयर तो सेम ही दिया है। यहां देखो 5000

टोटल मिलाकर और यहां पर भी अगर आप ध्यान दो तो टोटल मिलाकर 5000 ही तो लिया है। लेकिन ईयर वाइज अगर आप चेक करोगे तो अलग-अलग है। पहले साल मैंने यहां 5000 का

डिडक्शन लिया। यहां 1000 का मतलब 4000 से मुझे इनकम टैक्स में डिडक्शन कम मिला। 4000 में डिड 4000 का डिडक्शन कम मिला। लेकिन आगे जाकर वक्त बदल गया, हालात बदल

गया। अगले साल से देखो यहां कुछ नहीं और यहां एक 1000 मतलब वो जो 4000 यहां पर डिफरेंस आया था वो अगले चार सालों में रिवर्स हो रहा है। यहां ओरिजनेट हुआ और

यहां पर रिवर्स हो रहा है। इसी तरह से अगर आप टैक्स का अमाउंट देखो तो पहले साल मेरा 1500 का खर्चा आया और फिर 33000 का। तो ओवर द अगर टोटल ईयर में देखो तो 13,500 का

और यहां पर भी अगर देखो तो 13,500 का। जो पहले साल डिफरेंस आया था 1500 और 2700 का मतलब कितने का 1200 का यह देखो 1500 और 2700 का 1200 का वो अगर आप देखो तो अगले

चार सालों में रिवर्स हो रहा है 3000 और 2700 3000 और 2700 मतलब हर साल 300 300 से वो टैक्स रिवर्स हो गया इसको बोलते हैं टाइमिंग डिफरेंस मतलब ओरिजनेट भी हो रहा

है रिवर्स भी हो रहा है लेकिन जब मैंने फाइन एंड पेनल्टी पे करी तो इनकम टैक्स वालों ने कहा नहीं अभी भी नहीं और कभी भी नहीं लेकिन इन अ एकाउंट्स वालों ने कहा भ खर्चा है लेस कर लो कोई दिक्कत नहीं है।

तो अकाउंट में तो अपन ने उसको एडजस्ट कर दिया लेकिन टैक्सेशन में उसको एडजस्ट कभी भी नहीं करेंगे। तो वो परमानेंट डिफरेंस है। तो आपको डेफर्ट टैक्स का जो कंसर्न है

दोस्तों वो हमेशा हमेशा हमेशा केवल किससे करना है? टाइमिंग डिफरेंस की वजह से करना

करना है? टाइमिंग डिफरेंस की वजह से करना है। अब अपने को यहां पर एक सबसे बड़ा डिसीजन लेना है और वो डिसीजन ये लेना है कि ये डेफर्ट टैक्स एसेट है या लायबिलिटी

है? कैसे पता करेंगे? इस चीज को अब ध्यान

है? कैसे पता करेंगे? इस चीज को अब ध्यान से सुनना। डेबिट टैक्स एसेट है या लायबिलिटी है कैसे पता करेंगे? तो कोई भी आइटम जिसकी वजह से

पता करेंगे? तो कोई भी आइटम जिसकी वजह से डिफरेंस आ रहा है वो या तो इनकम है या एक्सपेंस है। मतलब कोई खर्चा है जिसका दोनों जगह ट्रीटमेंट अलग-अलग हुआ या कोई इनकम है जिसका ट्रीटमेंट दोनों जगह

अलग-अलग हुआ। तो या तो वो खर्चा है या वो इनकम है। तो अब कैसे जजमेंट करेंगे कि उसकी वजह से डीटीए या डीटीएल ध्यान रखना केवल टाइमिंग डिफरेंस की बात चल रही है। अब अगर परमानेंट डिफरेंस है तो वो तो वैसे

ही डेबिट टैक्स नहीं होता। तो अब उसको कैसे डिसाइड करेंगे? तो उसको ध्यान से सुनना। डीटीएल का मतलब क्या होता है?

डीटीएल का मतलब होता है कि आज आपने कम पे करा है। लेकिन जो कम आज आपने पे करा उसका पेमेंट आपको फ्यूचर में देना होगा।

आज आपने कम पे करा लेकिन आप उसकी पार्टी मत करो। जश्न की तैयारी मत करो कि हां पैसा कम पड़ करना पड़ गया तो मैं जश्न की तैयारी करूंगा। रेगुलर क्लास में मैंने आपको एक एग्जांपल से बड़ा इंटरेस्टिंग वे

में इसको एक्सप्लेन किया था। लेकिन आपको उसका पेमेंट फ्यूचर में देना पड़ेगा। तो आज की डेट में वो आपके लिए डीटीएल बन गया, लायबिलिटी बन गई। लेकिन अगर इसका अपोजिट

है आज आपने ज्यादा पे कर दिया और फ्यूचर में आपको कम देना है। आज आपने ज्यादा पे कर दिया और फ्यूचर में आपको कम देना है तो

इसका मतलब वो एक तरीके से एसेट है। अब ये कैसे जजमेंट होगा? सुनो ध्यान से। मान लो कोई खर्चा है जिसकी वजह से डिफरेंस आ रहा

है तो वो खर्चा आप देखो टैक्स में कितना और अकाउंट्स में कितना है और सिचुएशन बन रही है कि टैक्स में ज्यादा है और अकाउंट में कम है कोई खर्चा है जिसका जो

ओरिजिनेशन है उसके हिसाब से वो टैक्स में ज्यादा है और अकाउंट में कम है तो ऐसे केस में अब क्या करेंगे क्या उसको डीटीए बनाए या उसको डीटीएल बनाए तो यहां पर एएस कह

रहा है आप उसको डीटीएल बना दो सर कैसे लॉजिकली भी समझाऊंगा ूंगा ताकि कॉनसेप्चुअली बात समझ में आए। क्या बताया मैंने आपको? खर्चे का कोई पॉइंट है। देखो

मैंने आपको? खर्चे का कोई पॉइंट है। देखो टैक्स में कितना और अकाउंट में कितना? अगर

सिचुएशन क्या बन रही है कि वो टैक्स में ज्यादा और अकाउंट में कम है तो आपको उसका डिटेल बनाना है। विद लॉजिक समझते हैं ऐसा क्यों? देखो मैं आपको एग्जांपल से समझाता

क्यों? देखो मैं आपको एग्जांपल से समझाता हूं। आपको कभी भी डीटीएल डीटीएल पता करना है। तो एक पैटर्न बता रहा हूं। बस उसी से कर लेना। हमेशा आपका आंसर बिल्कुल परफेक्टली सही हो जाएगा। कहीं 1% भी आपको

कोई दिक्कत नहीं आएगी। क्या बता रहा हूं सुनो ध्यान से। ये अकाउंट है और ये टैक्स है। जो भी क्वेश्चन खर्चे का इनकम का है खर्चा है तो यह खर्चा अब खर्चे का अमाउंट

का देखो 1 लाख और 150 आपको कह रहा है कि भ ये खर्चा है डेप्रिसिएशन का है सपोज कुछ भी है और वो डेप्रिसिएशन हमने अकाउंट में 1 लाख अलऊ किया टैक्स वाले कह रहे हैं 150

अलऊ कर देंगे अब आपको इसमें थोड़ा सा लगा लेना है दिमाग अपना कॉमन सेंस का कोई ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं बिल्कुल कॉमन सेंस का वो क्या

कि जब मैं टैक्सेशन में खर्चा एक 50 लेस कर रहा हूं अकाउंट में 1 लाख ही तो आपको अब सारी चीजें टैक्स के हिसाब से सोचनी है। तो टैक्स के हिसाब से क्या हुआ? टैक्स

के हिसाब से मेरा प्रॉफिट कम हो गया। ध्यान देना खर्चा ज्यादा दिखाया तो प्रॉफिट कम हो गया। हां सर बिल्कुल ठीक कह रहे हो। कितना आसान काम है। खर्चा ज्यादा दिखाया तो प्रॉफिट कम हो गया। तो मेरा करंट टैक्स भी कम हो गया। मतलब गवर्नमेंट

ने मेरे से कम टैक्स लिया। करंट टैक्स का मतलब क्या होता है? जो गवर्नमेंट आपसे टैक्स ले रही है। यानी टैक्स कम देना पड़ा। लेकिन उसका क्या पार्टी कर ले? जश्न

की तैयारी कर नहीं आपको पता है कि फ्यूचर में देना पड़ेगा। यानी आज कम पे करा है तो फ्यूचर में ज्यादा देना पड़ेगा। क्योंकि बात ही किसकी चल रही है? टाइमिंग डिफरेंस

की। तो फ्यूचर में देना पड़ेगा। यानी आपकी लायबिलिटी है। तो कोई भी खर्चे का पॉइंट है अगर उसमें खर्चा टैक्सेशन में ज्यादा

हो रहा है और अकाउंट में कम हो रहा है। ओरिजिनेशन के टाइम टैक्सेशन में ज्यादा और अकाउंट में कम। तो यानी आपका प्रॉफिट कम हो गया। तो करंट टैक्स कम देना पड़ा। तो यानी फ्यूचर में देना पड़ेगा। का तो डिटेल

बुक कर लो। आते हैं आगे बढ़ते हैं। अगर मान लीजिए कोई इनकम है। जैसे देखिए 1 लाख की इनकम यहां और 70000 की है। कोई भी इनकम का पॉइंट ले लिया जो इनकम टैक्स वालों ने

70 दिखाया अपन ने 1 लाख दिखाया। तो ऐसे केस में इनकम देखो इनकम टैक्स में कम दिखाई। इनकम कम दिखाई तो प्रॉफिट भी कम तो टैक्स भी कम देना पड़ा। लेकिन फ्यूचर में

देना पड़ेगा। डिटेल बना दो। कितना आसान काम है। आगे बढ़ते हैं। कोई खर्चा है मान लो अकाउंट के अंदर 1 लाख और टैक्स में 60। अकाउंट में 1 लाख और टैक्स में 60। ठीक है

सर। अब इसकी वजह से कैसे निकालेंगे? बड़ा

सिंपल काम है। तो देखो अपन ने खर्चे की बात कर रहे हैं। अकाउंट के अंदर 1 लाख और टैक्स में 60 तो टैक्स में खर्चा कम दिखाया। ध्यान रखना खर्चा कम दिखाया तो प्रॉफिट बढ़ गया। तो टैक्स भी बढ़ गया। तो

आज आपको टैक्स ज्यादा देना पड़ा। तो फ्यूचर में कम देना पड़ेगा। तो फ्यूचर में कम देना पड़ेगा। मतलब बेनिफिट होगा तो डीटीए बुक कर लो तो डीटीए बुक कर लेंगे।

आगे बढ़ते हैं। फिर से इनकम के बारे में आ गए। तो क्या बताया मैंने आपको? 1 लाख की इनकम अकाउंट्स में और टैक्स में एक 70 है। तो यानी कि आपको 70000 का इनकम ज्यादा दे दिखाना पड़ा। तो प्रॉफिट बढ़ गया, टैक्स

भी बढ़ गया। आगे कम देना पड़ेगा। डीटीएल बन जाएगा। देखो कितना आसान सा काम है। तो यहां पर देखो एक मैंने पूरा सिनेरियो बनाकर आपको दिया कि डीटीएल कब बनता है?

अगर वो खर्चे का केस है और उसमें खर्चे के केस में अगर इनकम टैक्स का खर्चा ज्यादा है और बुक्स वाला कम है। यानी इनकम टैक्स में आपने डिडक्शन ज्यादा

ले ली तो अभी टैक्स आपका इनकम कम हो गया तो टैक्स कम देना पड़ा तो फ्यूचर में देना पड़ेगा। डिटेल है। अगर वही खर्चे का केस अगर इनकम टैक्स में कम और अकाउंट में ज्यादा है तो यानी अभी आपको डिडक्शन कम

मिली तो आपका प्रॉफिट बढ़ गया तो टैक्स ज्यादा देना पड़ा। फ्यूचर में कम देना पड़ेगा। डीटीए बन गया। बस इसी पैटर्न से चलना है। ऐसे ही इनकम में आ जाओ। अगर आपकी इनकम अकाउंटिंग रिकॉर्ड और टैक्स में

कंपेयर किया तो टैक्सेशन के अंदर कम और अकाउंट में ज्यादा है। तो टैक्सेशन में इनकम कम दिखाई तो प्रॉफिट कम आया। टैक्स कम देना पड़ा। फ्यूचर में देना पड़ेगा। डिटेल बना दो। इनकम आपके टैक्स में ज्यादा

है। तो इसका मतलब अभी आपका प्रॉफिट ज्यादा है तो टैक्स ज्यादा देना पड़ा। तो फ्यूचर में कम हो जाएगा। तो इसका मतलब आप डीटीए बुक कर लो। देखो कितना आसान सा काम है। कितना बढ़िया काम है। बिल्कुल सर समझ में

आ गया। तो देखिए समझ में आ गया। तो अब यहां पर अपन एक पॉइंट के बारे में बात करते हैं। जब भी आप डीटीए या डीटीएल को बुक करते हो तो एक छोटी सी बात ध्यान रखनी

है। डीटीएल बुक करना है तब तो तुरंत कर लो। लेकिन डीटीए जब भी बुक करते हो तो उसमें एक छोटी सी प्यारी सी बात ध्यान रखनी है कि डीटीए तभी बुक करोगे जब आपको

लगे कि फ्यूचर के अंदर मेरे को उसका वापस टैक्स कम पे करने का बेनिफिट हो जाएगा। जब भी एसेट बुक में दिखाते हो प्रूडेंस में आ जाओ चाहे वो एएस 15 में अपन ने जब प्लान एसेट का नेट बैलेंस दिखाया तो उसको फ्यूचर

बेनिफिट से कंपेयर किया तो ऐसे ही यहां पर जब भी आप डीटीए बुक करोगे तो आपको यह भी ध्यान रख लेना है कि आपको इसको तभी बुक करना है जब आपको फ्यूचर में टैक्स कम देने

का फायदा मिलेगा और वो कब मिलेगा जब आप प्रॉफिट कमाओगे और उसमें से जो खर्चा है उसकी डिडक्शन मिलेगी। तो आपको फ्यूचर में अगर प्रॉफिटेबिलिटी होती है तभी आपको

डीटीए को बुक करना है। अगर आपको फ्यूचर में प्रॉफिटेबिलिटी होने का कोई चांसेस नहीं है तो ऐसे केस में आपको डीटीए को बुक नहीं करना है। डीटीए कब रिकॉग्नाइज करते हैं? जब आपको फ्यूचर के अंदर एक्सपेक्टेड

हैं? जब आपको फ्यूचर के अंदर एक्सपेक्टेड प्रॉफिटेबिलिटी हो। लेकिन अगर आपने फ्यूचर में प्रॉफिट ही नहीं कमाना तो टैक्स कहां से बचा लोगे? मैं आज मान लो मेरा धंधा बंद कर रहा हूं। तो आज सरकार ने मेरे से टैक्स

ज्यादा ले लिया। लेकिन फ्यूचर में मैं अब उसको बचा ही नहीं पाऊंगा। क्यों? क्योंकि

मैं तो धंधा बंद करके जा रहा हूं। यानी फ्यूचर में मेरे कोई इनकम ही नहीं होगी। तो मैं टैक्स कहां से बचा लूंगा? तो डीटीए

कैसे बुक कर लोगे? तो डीटीए बुक तभी किया जाता है जब आपको फ्यूचर में प्रॉफिटेबिलिटी हो। ये छोटी सी बात आपको ध्यान रखनी है। अब दोस्तों यहां पर एक और बात आती है। जब आप डीटीए या डीटीएल

निकालते हो तो उसके अंदर जो रेट यूज़ होता है वो कौन सा होता है? तो सुनो ध्यान से। जब आप दो चीजें हैं। टैक्स एक्सपेंस इज़ इक्वल टू करंट टैक्स प्लस माइनस डेफिट टैक्स। अब इसमें से ये जो करंट टैक्स है

वो तो करंट रेट से कैलकुलेट होता है। मतलब करंट टैक्स तो आज का है ना जो सरकार आपसे ले रही है। तो जो आज की रेट है उससे निकाल लो। अब डेफर टैक्स तो फ्यूचर की बात है। डेफर का मतलब ही क्या होता है? फ्यूचर पे

टाल दो। फ्यूचर की बात है। अच्छा ज्यादा टैक्स पे कर दिया तो चलो फ्यूचर में बच जाएगा। डीटीए बुक कर लो फ्यूचर के लिए। अच्छा अभी अपन ने कम पे कर दिया तो फ्यूचर में और देना पड़ेगा। तो चलो डीटीएल बुक कर

लो फ्यूचर के लिए। तो आपका डेफर टैक्स फ्यूचर का टैक्स है। तो आपको इसके लिए फ्यूचर की रेट लेनी है। फ्यूचर की रेट मतलब जो सरकार ने पहले से आपको बता दी हो

बजट वगैरह के अंदर कि देखो अगले साल ये रेट रहेगी। तो इसी चीज का टेक्निकल नाम होता है यहां पर एनेक्टेड टैक्स रेट। तो आपको डेफ टैक्स कैलकुलेट करने में हमेशा

एन्टेड टैक्स रेट यूज़ करनी है। लेकिन 99% क्वेश्चंस में ये अपने को दे ही नहीं रखी। 99% क्वेश्चन में अपने को नहीं दे रखी। तो

अब नहीं दे रखी तो आपको ऐसे केस में उसको करंट टैक्स रेट से ही करना है। ध्यान देना वैसे आप उसको फ्यूचर की रेट से करोगे लेकिन नहीं दे रखा तो फिर आपको करंट टैक्स रेट से यूज़ करना है। ये मैंने आपको बताया

डीटीए बुक करना है तो फ्यूचर के लिए प्रॉफिटेबिलिटी हो तभी बुक करना है। अब देखो यहां पर कुछ एग्जांपल दिए मैंने जिनसे आपके लिए कॉनंसेप्चुअली बिल्कुल क्लियर हो बातें। देखो पहला टैक्स रेट है

30%। आपको अलग-अलग सिचुएशन में डीटीए डीटीएल निकालना है। टैक्स रेट है 30% उसी से अब आपको डीटीए डीटीएल निकालना है। देखो क्या कह रहा है?

डेप्रिसिएशन अकाउंट्स में 2000 और टैक्स में 5000। तो अब आपको इस डेप्रिसिएशन की वजह से डीटीए या डीटीएल सोचना है। तो बड़ा सिंपल सा काम है। मैंने आपको कहा था ये

अकाउंट और ये टैक्स लिख लो। खर्चा और उसका अमाउंट लिख लो। अकाउंट में कह रहा है 2000 और टैक्स में कह रहा है 5000। ठीक है? तो

टैक्स के अंदर अब आ जाओ। खर्चा ज्यादा दिखाया। खर्चा ज्यादा दिखाया टैक्स में तो आपका प्रॉफिट कम हो गया। तो आपका करंट टैक्स कम हो गया। तो फ्यूचर में ज्यादा

देना पड़ेगा। तो डीटीएल बन जाएगा। यानी ये जो डिफरेंस है 2000 और 5000 यानी 3000 का इसके ऊपर टैक्स की रेट है 30% तो इसी से

₹900 का आप क्या क्रिएट कर लोगे? डिटेल

यानी डिटेल क्रिएट हो जाएगा। कितना आसान है? यही आगे जाकर क्वेश्चंस है। अगर आप

है? यही आगे जाकर क्वेश्चंस है। अगर आप यहां समझ लेते हो तो बड़ा आसान काम हो जाएगा। देखो रिपेयर एक्सपेंस मेड इन ईयर वन 10,000 कह रहा है एक रिपेयर का खर्चा

है जो ईयर वन में ₹10,000 का हुआ। एंड वाज़ स्प्रेड ओवर ईयर वन एंड टू इक्वली इन बुक्स। ध्यान देना बुक में अपन ने इसको इक्वली स्प्रेड कर दिया। यानी ₹-5,000

दिखाएंगे पहले साल और दूसरे साल। टैक्स वाले कह रहे हैं पूरा अभी अलऊ कर देंगे। यानी 10,000 का आपका कोई खर्चा है। रिपेयर भूल जाओ कोई खर्चा है। अकाउंट वाले कह रहे हैं दो टुकड़े कर दो और टैक्स वाले कह रहे

हैं नहीं पूरा आज। तो अब क्या हुआ करंट ईयर में? सुनो जरा। ये अकाउंट और ये टैक्स

ईयर में? सुनो जरा। ये अकाउंट और ये टैक्स अकाउंट में 5,000 दिखाया। टैक्स में 10,000 दिखाया। अकाउंट में 5,000 दिखाया, टैक्स में 10,000 तो अब क्या हुआ आपके सामने सीन?

यहां पर आपका टैक्स के अंदर खर्चा ज्यादा है। खर्चे का पॉइंट है। खर्चा ज्यादा है तो आपका प्रॉफिट अभी कम हो गया तो करंट टैक्स कम हो गया। फ्यूचर में ज्यादा देना पड़ेगा। यानी डिटेल बना दो। कितना आसान

काम है सोचो। तो इसका मतलब अपन डिटेल क्रिएट कर देंगे। आगे बढ़ते हैं। अनमोटाइज्ड प्रीलिमिनरी एक्सपेंस एज पर टैक्स रिकॉर्ड 5000।

कह रहा है 5000 का अनमोटाइज्ड प्रीलिमिनरी एक्सपेंस है। टैक्स रिकॉर्ड में। ध्यान देना टैक्स रिकॉर्ड में अनमोटाइज है। मतलब इनकम टैक्स वाले कह रहे हैं इस खर्चे को फ्यूचर में अलऊ करेंगे। अनमोटाइज है। मतलब

उन्होंने अभी लेस नहीं करने दिया। यानी अकाउंट में तो अपन ने उसको 5000 दिखा दिया लेकिन टैक्स वालों ने नहीं दिखाया अनमोटाइज मतलब वो कह रहे हैं फ्यूचर में अलऊ करेंगे तो अकाउंट में तो वो आ गया

टैक्स में नहीं आया तो अब क्या हुआ सुनो ध्यान से अकाउंट में खर्चा ज्यादा आ गया टैक्स में कम आपको टैक्स के पॉइंट ऑफ व्यू से सोचना है टैक्स में खर्चा कम दिखाया टैक्स में खर्चा कम दिखाया तो इसका मतलब

प्रॉफिट बढ़ गया तो टैक्स भी बढ़ गया फ्यूचर में बच जाएगा तो डीटीए बुक कर लो कितना कितना आसान काम है सोचो कितना इजी बन गया सर बहुत ही बढ़िया मजा आ गया हमें

तो इनमें बहुत कंफ्यूजन रहता है। बस ये एक पैटर्न फॉलो कर लो। ऐसे जिंदगी आसान हो जाएगी। सोची ना होगी। देखिए आगे क्या लिखा है। ₹2000 टुवर्ड्स जीएसटी लायबिलिटी

डेबिटेड इन पीएल। कह रहे हैं ₹2000 का अपन ने पीएल के अंदर जीएसटी का खर्चा बुक कर दिया। पीएल में दिखा दिया। मतलब अकाउंट में दिखा दिया। इनकम टैक्स विल बी अलाउड इन सबक्वेंट ईयर ऑन पेमेंट। इनकम टैक्स

वाले कह रहे हैं अगले साल अलाउ करेंगे जब पेमेंट कर दोगे। तो इसका मतलब अकाउंट में तो अपन ने उसको दिखा दिया। टैक्स में नहीं दिखाया। अगेन खर्चे का पॉइंट है। अकाउंट में दिखा दिया और टैक्स में नहीं दिखाया।

तो टैक्स में खर्चा नहीं दिखाया तो प्रॉफिट बढ़ गया। तो टैक्स ज्यादा गया। फ्यूचर में बच जाएगा। यानी डीटीए बुक कर लो। कितना बढ़िया काम है। चलो आगे बढ़ो। शेयर इशू एक्सपेंस इनका 10,000 एज पर इनकम

टैक्स वन टेथ एक्सपेंस विल बी अलाउड टिल 10थ ईयर। कह रहा है कि अपना एक शेयर इशू का खर्चा है ₹10,000 का। जो इनकम टैक्स वाले कह रहे हैं हर साल वन 10थ अलाउ

करेंगे इनकम टैक्स वाले। अब अकाउंट के बारे में कुछ बोला नहीं तो खर्चा है तो अकाउंट में तो पूरा ही दिखा देंगे। टैक्स वाले कह रहे हैं नहीं एक 1000 करके डिडक्शन लो। तो अब क्या हुआ? अपन ने

अकाउंट में तो पूरा 10,000 दिखा दिया। टैक्स वाले कह रहे हैं 1000 दिखाओ। तो खर्चा 9,000 से अपन ने कम दिखाया टैक्स में तो प्रॉफिट अपना बढ़ गया। तो टैक्स भी

बढ़ गया। फ्यूचर में बच जाएगा। डीटीए बुक कर लो। कितना बढ़िया काम। आगे बढ़ो। इंटरेस्ट ऑफ़ 5000 पेड टू एनबीएफसी व्हिच इज़ अकाउंटेड इन बुक्स ऑन एक्रूअल बेसिस।

कह रहा है अपन ने ₹5,000 एक एनबीएफसी को पे किए जिनको अपन ने एक्रल बेसिस पे रिकॉर्ड कर दिया। बट एक्चुअल पेमेंट वाज मेड बिफोर ड्यू डेट। एक्चुअल पेमेंट अपन ने ड्यू डेट ऑफ फाइलिंग रिटर्न आईटीआर

फाइल की डेट से पहले कर दिया था। तो आल्सो अलाउड फॉर टैक्स पर्पस। कह रहा है टैक्स में भी अलाउ हो गया। तो दोनों जगह जब अलाउ हो गया तो कोई डिफरेंस ही नहीं है। अकाउंट

में भी अपन ने बुक कर दिया और आईटीआर में भी अपन ने आईटीआर फाइल करने से पहले उसको पे कर दिया था। तो इनकम टैक्स वाले कह रहे हैं आपको अलऊ करते हैं। सेक्शन 43 बी होता है। आई थिंक उसके अकॉर्डिंगली इनकम टैक्स

में ही हो रहा है। तो यानी डिफरेंस है ही नहीं तो डिटेल डिटेल कुछ बनेगा ही नहीं। डोनेशन ऑफ 3000 मेड टू अ प्राइवेट ट्रस्ट इज नॉट अलाउड अंडर इनकम टैक्स लॉज एज इट

इज परमानेंट डिफरेंस। सो नो डेफ टैक्स इज़ क्रिएटेड। कह रहा है कि डोनेशन दिया अपने प्राइवेट ट्रस्ट को ₹3000 का। इनकम टैक्स वालों ने डिसअ कर दिया और ये परमानेंटली

डिसअ होता है परमानेंटली। तो इसका मतलब इसमें डेफिट टैक्स का कांसेप्ट ही नहीं लगेगा। बिल्कुल ठीक है सर। अ कंपनी सोल्ड इट्स इन्वेस्टमेंट फॉर 10,000। कंपनी ने

₹10,000 में इन्वेस्टमेंट को बेचा। इन्वेस्टमेंट वाज़ मेड एट अ कॉस्ट ऑफ़ 4,000। कॉस्ट ₹4,000 थी। ठीक है? प्रॉफिट

ऑन सेल इज़ 6,000। 6,000 का प्रॉफिट हो गया। विल बी रिकॉर्डेड इन बुक्स नेक्स्ट ईयर। बुक्स में अगले साल दिखाएंगे। हालांकि अकाउंट के हिसाब से इसी साल दिखाना है। लेकिन कह रहा है नहीं अगले साल

दिखाएंगे। मतलब अकाउंट में नहीं दिखाया। बट कंसीडर्ड कैपिटल गेन इन करंट ईयर। लेकिन इनकम टैक्स वाले कह रहे हैं लाओ ₹6000 के कैपिटल गेन पे टैक्स दो।

तो अपना ₹6000 का इन्वेस्टमेंट बेचने से प्रॉफिट हुआ। इनकम टैक्स में अपन ने उसको दिखा दिया। अकाउंट में नहीं दिखाया। तो इनकम का पॉइंट है। इनकम टैक्स में ज्यादा दिखा दी। इनकम टैक्स में ज्यादा दिखा दी।

तो इनकम ज्यादा हो गई तो टैक्स भी ज्यादा गया। तो यानी कि अपना टैक्स ज्यादा चला गया। फ्यूचर में बच जाएगा डीटीए बन गया। चलिए आगे बढ़ते हैं। एग्जांपल नंबर थ्री ए

लिमिटेड इज वर्किंग ऑन कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट रेवेन्यू 1100 1600 2100 इज रिकॉग्नाइज्ड इन इन ईयर 123 कह रहा है अपन एक कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में काम कर रहे

हैं जिसमें अकाउंट्स में अपन ने ईएस सेवन पढ़ा था। कंप्लीशन जो परसेंटेज ऑफ कंप्लीशन मेथड होता है तो उसी के बेसिस पे अपन उसका इतनाइतना इनकम बुक कर रहे हैं। टैक्स वाले कह रहे हैं नहीं हमारे हिसाब

से कंप्लीशन लगेगा। इतनाइतना बुक करो। तो अब आपको तीनों सालों का डीटीए डीटेल बनाना है। अब तीनों सालों का अब सुनो ध्यान से कैसे तीनों सालों का निकलेगा? तो फर्स्ट

ईयर में देखो अकाउंट में 1100 और टैक्स के अंदर 700 तो अकाउंट में 1100 और टैक्स में 700 यानी कि अपनी टैक्स के अंदर जो इनकम

है वो कम दिखाई। इनकम कम दिखाई तो प्रॉफिट भी कम आया तो करंट टैक्स भी कम आया। लेकिन फ्यूचर में देना पड़ेगा। तो डीटीएल बन

गया। तो यानी अपन इस 400 के डिफरेंस पे 30% जो दोनों का टाइमिंग डिफरेंस है 400 का उसका 30% 120 का अपन यहां पर क्या कर

देंगे डीटीएल बुक कर लिया अब अगले साल क्या हुआ सुनो ध्यान से अगले साल अपन अकाउंट में 1600 दिखाएंगे और यहां 1800 तो यानी वक्त हालात बदल गया अब देखो अगले साल

यहां पर क्या था अकाउंट में ज्यादा था और टैक्स में कम था लेकिन अगले साल से अब आपका अकाउंट के अंदर क्या हो गया अकाउंट के अंदर रिवर्स हो गया यहां पर अकाउंट के

अंदर सर अब वो 1800 से 1600 हो गया। यानी अब आपका ₹200 से डिफरेंस रिवर्स होना शुरू हो गया। तो अब ऐसे केस में अब वो कांसेप्ट नहीं लगाना है जो अपन ने ये किया था कि

चलो ऐसे ही चेक करते हैं। नहीं अब तो रिवर्सल शुरू हो गया। जब डायरेक्शन ही चेंज हो गया। पहले साल में अकाउंट में ज्यादा था। अब आगे से टैक्स में ज्यादा है। तो यानी जो ओरिजनेट हुआ था 400 वो

अगले दो सालों में 200 रिवर्स हो रहा है। यानी आपने 400 का 30% जो 120 का आपने डीटीएल बनाया था उसी डीटीएल में से अब आप रिवर्सल कर लो। तो सेकंड ईयर में 200 का

डिफरेंस आ रहा है। तो 200 के डिफरेंस पे 60 का रिवर्सल ऑफ डीटीएल हो गया और ऐसे ही थर्ड ईयर के अंदर ये रिवर्सल हो जाएगा। आई होप बात समझ में आ रही है। अब आते चलते हो

दोस्तों कि अपन इसकी अकाउंटिंग कैसे करते हैं। हालांकि क्वेश्चंस में कोई एंट्रियां वगैरह ज्यादातर नहीं पूछता एक आधे क्वेश्चंस को छोड़कर बट अपने को अगर सीखनी हो कि अकाउंटिंग कैसे करते हैं? तो

अकाउंटिंग की बात करते हैं। तो बड़ा सिंपल सा काम है। सबसे पहले अपना करंट टैक्स वो है जो सरकार को अपन पे करते हैं। मोदी जी जो अपने से लेंगे। तो करंट टैक्स अकाउंट डेबिट टू बैंक और इसको पीएल में डाल दो।

पीएल अकाउंट डेबिट टू करंट टैक्स। ध्यान देना। करंट टैक्स अकाउंट डेबिट टू बैंक और पीएल टू करंट टैक्स। तो इसके बेसिस पे ये करंट टैक्स का हिसाब हो गया। या ए की एंट्री बनाई तो करंट टैक्स टू अपना पीएल

अकाउंट डेबिट टू बैंक हो गया एक तरह से करंट टैक्स के लिए। ये तो हो गया करंट टैक्स जो अपना खर्चा है पे हो गया और पीएल में चला गया। अब जो डेफर टैक्स है उसके अंदर चार सिचुएशन है। या तो आप डीटीएल

क्रिएट कर रहे हो तो एंट्री बना दो। डीटीएल बनाना है। लायबिलिटी बुक करनी है। तो लायबिलिटी को क्रेडिट करो। ध्यान देना लायबिलिटी बुक करनी है। तो लायबिलिटी को और बढ़ाओ मतलब क्रेडिट और साथ में पीएल को डेबिट कर दो। यानी एंट्री बन जाएगी पीएल

टू डीटीएल। अगर इसी डीटीएल का रिवर्स हो रहा है जैसे अभी हो रहा था 120 से बुक किया पीएल टू डीएल। अब 60-60 से रिवर्स किया 2 साल में तो रिवर्स करने की एंट्री डीटीएल अकाउंट डेबिट टू पीएल। ऐसे ही

डीटीए बुक करना है तो एसेट को बुक करना है तो डीटीए अकाउंट डेबिट। एसेट को डेबिट टू पीएल और रिवर्स करेंगे तो पीएल टू डीटीए। इसी बेसिस पे जब अपन अपना पीएल बनाते हैं तो उसमें प्रेजेंटेशन कैसे होता है वो

सीखते हैं। तो पीएल में प्रेजेंटेशन कैसे करेंगे? तो पीएल में क्या करेंगे? सबसे

करेंगे? तो पीएल में क्या करेंगे? सबसे

पहले ये प्रॉफिट बिफोर टैक्स लिया। ठीक है? अब इस प्रॉफिट बिफोर टैक्स में क्या

है? अब इस प्रॉफिट बिफोर टैक्स में क्या किया? सबसे पहले करंट टैक्स का जो खर्चा

किया? सबसे पहले करंट टैक्स का जो खर्चा है वो लेस कर दिया। ये तो लेस होगा ही होगा। करंट टैक्स का खर्चा है लेस कर दिया। ठीक है? इसके अलावा बाकी चीजों को अब एडलेस करना है इस पीबीटी में कैसे

डिसाइड होगा? तो आप एंट्रियां जो अभी सीखी

डिसाइड होगा? तो आप एंट्रियां जो अभी सीखी थी डीटीएल की बनानी या रिवर्स करने की उसमें देखो पीएल आपका डेबिट हो रहा है क्या? तो खर्चा माइनस कर दो। पीएल आपका

क्या? तो खर्चा माइनस कर दो। पीएल आपका क्रेडिट हो रहा है क्या? तो इनकम में ऐड कर दो। तो इस तरीके से आपको डीटीओ और डीटीएल का एडजस्टमेंट करना है। तो जब आप डीटीएल बना रहे थे तो एंट्री बन रही थी

पीएल टू डीटीएल। तो यानी आपका पीएल डेबिट हो रहा था। पीएल डेबिट मतलब खर्चे के जैसे सोच लो। लेकिन जब आप उसी डीटीएल को रिवर्स कर रहे थे तो रिवर्स करने पे एंट्री बन रही थी डीटीएल टू पीएल यानी पीएल क्रेडिट

हो रहा था। तो जब रिवर्स करोगे डीटीएल को तो इनकम के जैसे सोच लो। जब आप डीटीए को बना रहे थे तो एंट्री बना रहे थे क्या?

एंट्री बना रहे थे डीटीए टू पीएल। यानी पीएल क्या हो रहा था? क्रेडिट हो रहा था। तो इनकम के जैसे सोच लो। लेकिन जब आप रिवर्स कर रहे थे तो एंट्री बन रही थी पीएल टू डीटीए तो यानी कि आप उसको खर्चे

के जैसे सोच लो। तो इस तरीके से अपना ये प्रॉफिट आफ्टर टैक्स आ जाएगा। अब देखो इसमें स्पेशल पॉइंट्स है दो तीन उसके बारे में बात करते हैं। मान लीजिए आपके पास में

कोई कैरी फॉरवर्ड लॉस या अनऑर्ड डेप्रिसिएशन है। मतलब कोई पिछले सालों का लॉस है जो इनकम टैक्स के पर्पस से कैरी फॉरवर्ड हो रहा

है। या कोई अनअब्जॉर्ड डेप्रिसिएशन है जो इनकम टैक्स के पर्पस से कैरी फॉरवर्ड हो रहा है। तो आप लोगों ने अगर सेट ऑफ एंड कैरी फॉरवर्डिंग ऑफ लॉसेस का पूरा कांसेप्ट पढ़ा हुआ है तो आपको पता है कि

वो जो लॉस है इनकम टैक्स में आगे जा आने वाले इयर्स में सेट ऑफ होकर आपका टैक्स बचाता है। तो अगर आपका कोई कैरी फॉरवर्ड लॉस है या अनऑफ जो डेप्रिसिएशन है तो यानी

कि वो सेट ऑफ होकर आपका टैक्स बचाएगा फ्यूचर में। तो इसका मतलब आपका वो जो लॉस है उस पे आप डीटीए बना लो। फ्यूचर में टैक्स बचाएगा। जो लॉस है वो आपका फ्यूचर में टैक्स बचाएगा। जब वो सेट ऑफ का

बेनिफिट देगा। आपका मान लो आज 5 लाख का लॉस हुआ लेकिन अगले साल आप 15 लाख कमा रहे हो तो आपका 15 लाख में से आपको टैक्स 10 लाख पे देना पड़ेगा क्योंकि आप गवर्नमेंट को कहोगे 5 लाख का सेट ऑफ करो तो यानी ये

5 लाख का जो आज लॉस है इस पे आपका फ्यूचर में टैक्स बचेगा तो आज की डेट में आप उसको डीटीए बना लो और जब वो सेट ऑफ हो जाए तो उसी डीटीए का रिवर्सल कर लो तो आज की डेट

में आप डीटीए क्रिएट कर लोगे और फ्यूचर में उसका रिवर्सल कर दोगे। अगला पॉइंट आता है दोस्तों एक मेट का मिनिमम अल्टरनेट टैक्स का कंपनीज है उन कंपनीज के ऊपर एक

सेक्शन लगता है 115 जेबी और वो आपको कहता है कि भ आपको मिनिमम इतना टैक्स तो पे करना ही पड़ेगा तो अपन यहां पर एक तो निकाल रहे थे करंट टैक्स जो अभी सीखा था

अपनी मान लो इनकम टैक्स के रिकॉर्ड में 5 लाख की इनकम और 30% की रेट है तो यानी आपका करंट टैक्स आ गया 150000 अब जब क्वेश्चन में ये मेट का कांसेप्ट दे

रखा है तो इसी के बेसिस पे आपको मेट लायबिलिटी भी निकालनी है। मेट के हिसाब से कितना बनता है? तो इसका अलग ही रेट होता है और इसका इनकम निकालने का अलग ही सिस्टम होता है। सेक्शन 115 जेबी के हिसाब से। तो

जो भी आपको क्वेश्चन में डाटा दे रखा है उसमें आपको बताएगा कि भ मेट के हिसाब से बुक प्रॉफिट इतना और इतनी रेट है। तो आपको बताया कि भ मेट के हिसाब से अपना प्रॉफिट

12 लाख का है और मेट की रेट है 20%। तो 12 लाख का 20% 2400। इसका मतलब सरकार कह रही है कि भाई आपको वैसे तो करंट टैक्स देना होता है 150 का

लेकिन देखो इसके साथ मिनिमम लगा हुआ है। मतलब आपको इस सिचुएशन में 240 तो देना ही पड़ेगा। वैसे आप करंट टैक्स पे करते हो 150 का

लेकिन क्योंकि मेट के कारण आपको 240 देना पड़ेगा। इसका मतलब 90 हजार आप एक्स्ट्रा और पे करो। तो जबजब आपका मेट लायबिलिटी करंट टैक्स से ज्यादा है तो ऐसे सिचुएशन

में आपको एक छोटा सा पॉइंट ध्यान रखना है कि आपको एक्स्ट्रा लायबिलिटी निकालनी है मेट की और ये जो एक्स्ट्रा आता है ये भी आपका पीएल के अंदर डेबिट हो जाता है अपार्ट फ्रॉम करंट टैक्स एंड डेपर टैक्स

इसको भी आपको पीएल में एडजस्ट करना पड़ेगा कब जब मेट का लायबिलिटी ज्यादा है करंट टैक्स से अगर मान लो मेट का लायबिलिटी कम है तब तो कोई दिक्कत नहीं आप करंट टैक्स सरकार को दे दो लेकिन अगर मेट का

लायबिलिटी ज्यादा है तो सरकार कह रही है देखो मिनिमम तो इतना देना ही पड़ेगा ना तो 150 की जगह 240 यानी आप 90000 एक्स्ट्रा और दो तो इसको भी अपन पीएल के अंदर अलग से

डेबिट लेकर चले जाएंगे। ठीक है? लास्ट

पॉइंट दोस्तों टैक्स हॉलिडे पीरियड। टैक्स हॉलिडे पीरियड ये क्या होता है?

टैक्स हॉलिडे पीरियड का मतलब होता है कि सरकार ने कुछ टाइम के लिए आपको फ्री कर दिया कि देखो इतने साल तक खूब इनकम कमाओ। कोई दिक्कत नहीं है। आपको टैक्स देने की

जरूरत नहीं है। सच में आप इनकम कमाओ लेकिन आपको टैक्स देने की जरूरत नहीं है। जो बैकवर्ड एरिया होते हैं, रिमोट एरियाज होते हैं, सरकार चाहती है वहां पर ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्रीज डेवलप हो। तो सरकार

उनको इस तरह के बेनिफिट देती है। तो इनको बोलते हैं हॉलिडे पीरियड। तो ऐसी सिचुएशन में आपको क्या करना है दोस्तों? जो टैक्स

हॉलिडे पीरियड में ओरिजनेट और रिवर्स हुआ उसका तो कुछ नहीं करना। सर क्या मतलब हुआ?

देखो आपको यहां पर एग्जांपल से समझाता हूं। यह देखो यह अपने पास में एक क्वेश्चन है जिसमें आपको डेप्रिसिएशन का टाइमिंग

डिफरेंस दे रखा है। आपको कह रखा है ईयर वन में 100 का ईयर टू में 100 का। जबकि यहां पर ये जो डेप्रिसिएशन का टाइमिंग डिफरेंस

है। मतलब ये अकाउंट के अंदर डेप्रिसिएशन कम था और टैक्सेशन में ज्यादा था। तो दोनों साल में 100-100 का ये डिफरेंस आ रहा है। सीधा डिफरेंस ले लिया और फिर ये 20 20 20 का इससे रिवर्स हो रहा है। जो ये

दोनों साल में ये तो ओरिजिनेशन है जिनमें टैक्स का ज्यादा था और अकाउंट का डेप कम था 100-100 से हर बार और फिर 2020 से वक्त हालात बदल गया। अब आपको क्वेश्चन में कह

रहा है यहां से यहां तक का हॉलिडे पीरियड है। कितने ईयर तक का? 5 साल का। तो अब देखो जरा ये पहले 2 साल में ओरिजनेट हुआ। इसमें से ये 2020 रिवर्स हुआ। फिर ये

हॉलिडे के बाद रिवर्स हुआ। तो सबसे पहले क्या करो? फीफो मेथड फर्स्ट इन फर्स्ट आओ।

क्या करो? फीफो मेथड फर्स्ट इन फर्स्ट आओ। जो पहले ओरिजनेट हुआ वो पहले रिवर्स हुआ। यहां पर ध्यान रखना फीफो अप्लाई होता है। पहले ओरिजनेट हुआ वो पहले रिवर्स हुआ। तो

एक सिंपल सा काम करना है। ये देखो 20 20 ये हॉलिडे पीरियड में है। तो इनको फर्स्ट ईयर फर्स्ट ओरिजनेट फर्स्ट रिवर्स ये पहले

रिवर्स हुए तो ओरिजनेट भी पहले हुए होंगे। तो यहां से इनको हटा दो। तो यहां से अपन ने इनको हटा दिया क्योंकि ये हॉलिडे पीरियड में ओरिजिनेट हुए। हॉलिडे में ही

रिवर्स तो इनका कुछ ही नहीं करना बस हटा के खत्म कर दो। तो पहले साल का बचा हुआ डिफरेंस है 40 का और दूसरे में पूरा का पूरा 100 का। ये वो डिफरेंस है जो रिवर्स

होंगे हॉलिडे के बाद। रिवर्स होंगे हॉलिडे के बाद। तो इनका जो भी डीटीए डीटीएल बन सकता है उनको यहां क्रिएट कर दो। यानी इस 40 पे जो भी टैक्स रेट है उससे डीटीएल या

डीटीए जो भी है बना लेंगे इस 100 के ऊपर और यहां से बना लेंगे और फिर यहां पर इनको रिवर्स करते जाएंगे। तो जो हॉलिडे में ओरिजनेट हुआ, हॉलिडे में रिवर्स हुआ, उसको

तो उड़ा दो। तो यह रिवर्स देखो यहां 60 हो रहा है हॉलिडे तक। तो इसको फर्स्ट ईयर से उड़ा दिया। सर मान लो यहां पर ये 110 होता तो क्या करते? तो 100 पूरा उड़ा देते। 10 इसमें से उड़ा देते। कोई दिक्कत नहीं है।

तो ये हटा दिया। अब बचा हुआ निकाल लो। ये वो है जो हॉलिडे के बाद रिवर्स होगा। ओरिजिनेट अब हुआ है। लेकिन हॉलिडे के बाद होगा। तो आपको अभी इसको बुक कर लेना है जो भी इसका नेचर है और यहां पर उसका रिवर्स

कर देना है। बस सिंपल सा कांसेप्ट है। तो दोस्तों ये एएस 22 का कॉनसेप्चुअल पार्ट अचानक से हो गया है खत्म जिसको मैंने समझाया उसमें ही बहुत सारे एक तरह से ये

मान लो इनडायरेक्टली क्वेश्चन भी हो रखे हैं। अभी अपन क्वेश्चन देखेंगे। तो उसके अंदर इनडायरेक्टली मैंने आपको क्वेश्चंस करवा दिए। तो चलो अब अपन चलते हैं क्वेश्चन आंसर्स की तरफ और क्वेश्चन

आंसर्स के बारे में बात कर लेते हैं। तो ये एएस 22 का अपन ने क्यूब भी निकाला पहला क्वेश्चन रामा लिमिटेड का दो डाटा दे

रहा है डेप्रिसिएशन का और इसके अलावा प्रीिलिमिनरी का सबसे पहले डेप्रिसिएशन। डेप्रिसिएशन कह रहा है अकाउंट में 2 लाख है और टैक्स में 5 लाख है। तो अब सोचो जरा

ऐसे ही मैंने तो बना रखा है पूरा आंसर। अभी सिखाया था अकाउंट के अंदर और टैक्स में। आपको टैक्स के पॉइंट ऑफ को सोचना है। किसका पॉइंट है? खर्चे का। टैक्स में खर्चा ज्यादा दिखा दिया। खर्चा ज्यादा

दिखा दिया तो प्रॉफिट कम हो गया तो अभी टैक्स कम देना पड़ा। तो फ्यूचर में ज्यादा देना पड़ेगा। तो यानी इस डिफरेंस पे ₹3 लाख पे कह रहा है 50% की रेट है। यानी

₹1.5 लाख का डीटीएल बुक हो जाएगा। फ्यूचर में ज्यादा देना पड़ेगा। देखो मैंने आंसर कैसे बना कर दिए स्टूडेंट को वो आपको विजिबल कर देता हूं।

तो यह देखिए यह डेप्रिसिएशन वाला पॉइंट यह अकाउंट और यह टैक्सेशन तो अकाउंट और टैक्सेशन यहां पर यह रहा डेप्रिसिएशन 2 लाख और 5 लाख टैक्स में ज्यादा खर्चा

ज्यादा है तो प्रॉफिट आपका कम हो गया तो करंट टैक्स कम देना पड़ा फ्यूचर में ज्यादा देना पड़ेगा डिटेल क्रिएट कर दो किया था ना अभी वही तो पॉइंट है ठीक है अनमोटाइज प्रीिलिमिनरी एक्सपेंस टैक्स

रिकॉर्ड में प्रीिलिमिनरी एक्सपेंस अनमोटाइज है मतलब उन्होंने इस 30000 के खर्चे का डिडक्शन नहीं दिया कह रहे हैं बाद में देंगे तो अकाउंट में खर्चा बुक हो गया। टैक्स में नहीं हुआ। टैक्स में खर्चा नहीं दिखाया तो प्रॉफिट बढ़ गया। करंट

टैक्स बढ़ गया। फ्यूचर में कम देना पड़ेगा। डीटीए बुक हो जाएगा। तो दोनों का नेट डिफरेंस 135 का डीटीएल बनकर आ गया। ये लो। चलिए आगे बढ़ते हैं। क्वेश्चन नंबर टू

रिपीट है। क्वेश्चन नंबर थ्री। कह रहा है सरस लिमिटेड क्लोज ह बुक्स ऑन मार्च 12 अक्रूड 5 लाख टुवर्ड्स जीएसटी लायबिलिटी। कह रहा है 5 ₹5 लाख का जीएसटी का खर्चा

डेबिटेड इन पीएल। पीएल में मतलब बुक्स में दिखा दिया। व्हिच इज एक्सपेक्टेड टू पेड ऑफ बाय 21 ऑफ अप्रैल 12 जिसको अपन अगले साल 21 अप्रैल को पे करेंगे। एस पर

प्रोविजन ऑफ सेक्शन 43 बी एनी एक्सपेंडिचर इन नेचर ऑफ टैक्सेस ड्यूटी सेस डिस्क्लोज्ड इन स्टेटमेंट ऑफ पीएल ऑन एक्रड वुड बी अलाउड इन इनकम टैक्स इन

सब्सक्वेंट ऑन पेमेंट बेसिस। इनकम टैक्स वाले कह रहे हैं पेमेंट अच्छा अगले साल करा है ना तो हम तो अगले साल ही इसको अलऊ करेंगे। तो खर्चा था जीएसटी का 5 लाख अकाउंट में

दिखा दिया टैक्स में नहीं दिखाया तो अकाउंट में दिखा दिया और टैक्स में नहीं दिखाया तो कैसे अपन अब डीटीए डीटीएल का डिसाइड करें तो अकाउंट के अंदर दिखा दिया और टैक्स में नहीं दिखाया खर्चा नहीं

दिखाया तो प्रॉफिट बढ़ गया टैक्स बढ़ गया फ्यूचर में कम देना पड़ेगा डीटीए बुक कर लो यानी इस 5 लाख के ऊपर 30% की रेट से डीटीए बुक हो जाएगा क्वेश्चन नंबर फोर ये

अपन ने सिमिलर क्वेश्चन अभी एग्जांपल में किया था 3 साल वाली वो इनकम तो वही सेम क्वेश्चन है तो इसमें कुछ बताने वाली बात है नहीं ऑलरेडी मैंने आपको करवा दिया उसी का रिपीट वापस से क्वेश्चन नंबर फाइव भी

है ये भी वो जो एग्जांपल अपन ने 3 साल वाला किया था उसी से हो जाएगा कोई दिक्कत नहीं है क्वेश्चन नंबर सिक्स देखिए क्या दे रखा है कह रहा है एबीसी लिमिटेड हैज़ इन्वेस्टमेंट इन वेंचर कैपिटल फॉर 10 करोड़

कह रहा है एबीसी ने एक वेंचर कैपिटल में इन्वेस्टमेंट किया हुआ है कितने का? 10

करोड़ का। वेंचर कैपिटल इन हैड इन्वेस्टेड। वेंचर कैपिटल ने इसको आगे चार स्क्रिप्ट में यहां पर इन्वेस्टमेंट किया। अलग-अलग कंपनी के ये शेयर खरीद लिए। ठीक है? अब

इसमें से ये जो स्टार वाले शेयर है इनको अपन ने इस साल चार की जगह आठ में बेच दिया। तो चार की जगह आठ में बेच दिया तो चार का अपने को गेन हो गया। अब आपको यहां अकाउंट में तो कह रहा है अपन ने इसको

रिकॉर्ड नहीं करा। क्वेश्चन में सब लिखा हुआ है देख लेना। अकाउंट में इसको अपन ने एसेट की वैल्यू में से एडजस्ट करके बता दिया सेल को और इसका प्रॉफिट जो है बुक नहीं करा। टैक्स में अपन ने बुक कर लिया।

सिमिलर पॉइंट अपन ने डिस्कस किया था। तो ₹4 लाख का अपने को गेन हुआ है। यह जो ₹4 लाख का अपने को गेन हुआ है इसको अपन ने टैक्सेशन में तो दिखा दिया लेकिन अकाउंट

में नहीं दिखाया। तो टैक्सेशन में प्रॉफिट दिखा दिया तो प्रॉफिट बढ़ गया। टैक्स बढ़ गया। फ्यूचर में कम देना पड़ेगा। डीटीए क्रिएट कर दो। लेकिन क्वेश्चन में लिखा हुआ है कि आगे

जाकर प्रॉफिट होने के चांसेस नहीं है। याद करो डीटीए बुक करते हो तो प्रूडेंस को ध्यान रखना है। फ्यूचर में प्रॉफिटेबिलिटी हो तभी डीटीए बुक करो। तो यहां पर लिखा है कि आगे जाकर फ्यूचर प्रॉफिट की रीज़नेबल

सर्टेनिटी नहीं है। तो ऐसे केस में ये डीटीए बुक होना चाहिए था। लेकिन अपन नहीं कर पाएंगे। आगे बढ़ते हैं। क्वेश्चन नंबर सेवन में चलते हैं। क्वेश्चन नंबर सेवन

में देखिए। कह रहा है डेप्रिसिएशन अकाउंटिंग रिकॉर्ड में 56 का और टैक्स रिकॉर्ड में 38,000 का। ध्यान देना। द अबव डेप्रिसिएशन डज़ नॉट इंक्लूड डेप्रिसिएशन

ऑन न्यू एडिशन। कह रहा है इसमें नई एडिशन का डेप्रिसिएशन नहीं है। अच्छा मतलब ये कोई ना कोई पुराना एसेट है उसका डेप है। अब पुराना एसेट है उसका डेप्रिसिएशन है।

जिसमें अकाउंट के अंदर 56 और टैक्स में ये है। इसका मतलब वक्त हालात बदल चुका। रिवर्सल शुरू हो चुका। नॉर्मली डेप्रिसिएशन के अंदर एक नॉर्मल पॉइंट आपको ध्यान रखना होता है और वो क्या ध्यान रखना

होता है? सुनो ध्यान से। डेप्रिसिएशन के

होता है? सुनो ध्यान से। डेप्रिसिएशन के बारे में आपका एक नॉर्मल सिचुएशन जो होता है वो ये होता है कि डेप्रिसिएशन जनरली क्या होता है? शुरुआती पीरियड में टैक्सेशन में ज्यादा होता है और अकाउंट

में कम होता है। डेप्रिसिएशन शुरुआती पीरियड में टैक्सेशन में ज्यादा। क्यों?

क्योंकि टैक्सेशन डब्ल्यूडीबी से चलता है हमेशा। वहां एसएलएम होता ही नहीं। आपने सेक्शन 32 में पढ़ा होगा और वहां डब्ल्यूडीबी से धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होता जाता है। तो ऐसे केस में टैक्सेशन में ज्यादा होता है और अकाउंट में कम होता

है। तो ऐसा सिनेरियो हमेशा ध्यान रखना क्रिएट डिटेल का बनेगा। और जब इसका उल्टा बोल दे कि देखो टैक्स में अब डेप्रिसिएशन कम हो चुका और अकाउंट में ज्यादा हो चुका

तो कहीं ना कहीं इसका मतलब रिवर्सल शुरू हो चुका है। ये डेप्रिसिएशन के बारे में इन जनरल आपको ध्यान रखना है। क्या बताया मैंने? डेप्रिसिएशन नॉर्मली जो शुरुआती

मैंने? डेप्रिसिएशन नॉर्मली जो शुरुआती पीरियड जब ओरिजनेट होता है दोनों जगह डिफरेंस तो वहां टैक्स का डेप ज्यादा होता है और अकाउंट का कम और टैक्स में ज्यादा डेप्थ दिखा रहे हैं तो डिडक्शन अभी ज्यादा

ले ली तो प्रॉफिट कम हो गया तो इसका मतलब फ्यूचर में देना पड़ेगा यानी डीटीएल बना दो और जब इसका उल्टा होना शुरू हो जाए तो डीटीएल का रिवर्स कर दो तो देखो इसके अंदर कह रहा है अपनी पुरानी एसेट है और उस पे

अब अकाउंट पे ज्यादा है यानी अकाउंट में ज्यादा हो गया अब अकाउंट में ज्यादा हो गया तो दोस्तों इसका मतलब जो डीटीएल आपने ऑलरेडी बनाया होगा तो उस डीटीएल का

रिवर्सल शुरू हो चुका है। तो आपको इसके ऊपर रिवर्सल ऑफ डीटीएल निकाल लेना है। तो जो भी डिफरेंस है इस डिफरेंस के ऊपर आपका रिवर्सल ऑफ डीटीएल कैलकुलेट होकर आ जाएगा।

ठीक है? आगे बढ़ते हैं। कह रहा है एक नई

ठीक है? आगे बढ़ते हैं। कह रहा है एक नई मशीन और खरीदी है 24,000 की जो 100% अलाउड है इनकम टैक्स में। मतलब पूरी डिडक्शन अपन

ने 1 अप्रैल 11 को ले ली। ठीक है? कह रहा

है इसी साल पूरी डिडक्शन। जबकि टैक्स जो अकाउंट्स है वो कह रहे हैं 4 साल में लेस करेंगे। यानी 24,000 की एसेट है। अपन ने जो इनकम टैक्स है उसमें पूरा 24,000 का

डिडक्शन ले लिया। पूरा का पूरा कितने का डिडक्शन ले लिया? 24,000 का। लेकिन टैक्स अकाउंट्स वाले कह रहे हैं 4 साल में डेप्रिसिएशन लगाएंगे यानी 6,000 का

लगाएंगे। तो ऐसे केस में आपका खर्चा है डेप्रिसिएशन का जो टैक्स में ज्यादा दिखा दिया, प्रॉफिट कम हो गया, करंट टैक्स कम हो गया, फ्यूचर में आपको ज्यादा देना पड़ेगा तो डिटेल क्रिएट हो जाएगी। अब इस

क्वेश्चन में आपको यह भी कहा कि आप इसका है ना पीएल बना दो। यह तो हो गया डीटीएल डीटीएल दोनों पॉइंट का। अब आपको इस क्वेश्चन में यह भी कहा कि आपका दोनों जगह

जो प्रॉफिट है वो 128 है बिफोर डेप एंड टैक्स। तो आप और एक डोनेशन का पॉइंट डाल दिया जो डिसअाउड है इसका कुछ नहीं करना। यानी इसका कोई डीटीए डिटेल नहीं बनेगा। तो

आपको इसमें एक नई चीज और पूछी कि पीएल भी बना कर दे दो। अब पीएल जो बनाएंगे ना उस पीएल में अब आपको दो टैक्स दिखाने पड़ते हैं। एक तो करंट टैक्स और एक डेफ टैक्स। एक तो करंट

टैक्स और एक डेफ टैक्स। जिसमें से अगर आप देखो तो डेफर्ट टैक्स तो इस क्वेश्चन में जीरो हो गया। सर कैसे हो गया? देखो अपन ने जो रिवर्सल किया था डेफर्ट टैक्स

लायबिलिटी का वो 7200 से किया था और क्रिएट भी अपन ने उसको 7200 से किया था। तो दोनों चीजें रिवर्स और क्रिएट दोनों 7200 से हो गई। पहले वाले पॉइंट में अपना

रिवर्सल आ रहा था। ये देखो रिवर्सल आया और दूसरे वाले पॉइंट में अपना क्रिएट आया था और दोनों की वजह से वो जीरो हो गया। यानी डेफर्ट टैक्स तो इसमें जीरो हो गया। तो आपको केवल दिखाना है करंट टैक्स पीएल में।

अब करंट टैक्स जो है वो आपका अकाउंटिंग इनकम पे नहीं आता टैक्सेबल पे। तो अपन इस क्वेश्चन में पहले अपनी क्या निकालते हैं?

टैक्सेबल इनकम निकालते हैं। टैक्सेबल इनकम कैसे निकालेंगे? तो देखो अपने को प्रॉफिट

कैसे निकालेंगे? तो देखो अपने को प्रॉफिट दे रखा है 128 का। अब इस 128 में से डेप्रिसिएशन हटा दिया जो टैक्स के रिकॉर्ड से है। तो जो पुरानी एसेट थी उस पर तो

देखो 38 का था और जो नई एसेट थी उसका पूरा तो ये डेप्रिसिएशन हटा दिया। अब एक डोनेशन है जो अपन ने इस प्रॉफिट में से लेस कर रखा होगा लेकिन इनकम टैक्स वाले कह रहे

हैं डिसअाउ है तो वो वापस ऐड कर दिया। तो यानी 81000 की अपनी इनकम आ गई। तो इसी 81 का टैक्स आ गया। ये आपका करंट टैक्स हो गया टैक्स रिकॉर्ड के हिसाब से। जैसे आप

पीजीबीपी में निकालते थे वही पैटर्न। तो ये आपका करंट टैक्स आ गया। तो अब आप क्या करो? पीएल में आ गए। पीएल में भी आपकी

करो? पीएल में आ गए। पीएल में भी आपकी इनकम 128 है। अब उसमें से आप अपना डेप्रिसिएशन पीएल वाला हटा दो जो कि देखो पुरानी वाली एसेट पे 56 है और नई वाले पे

आपको याद है 6000 है तो ये हटा दिया तो ये बच गया। अब इसके ऊपर आप करंट टैक्स का एडजस्टमेंट कर दो। ये जो आया था ये कर दिया और डेफर्ट टैक्स जीरो है। क्योंकि 7200 से ही डेफ टैक्स लायबिलिटी बना रहे

हैं और 7200 से ही कम कर रहे हैं। तो नेट इफेक्ट जीरो हो गया। तो यानी कि ये आपका प्रॉफिट आफ्टर टैक्स कैलकुलेट होकर आ जाएगा। चलिए आगे बढ़ते हैं। क्वेश्चन नंबर

एट इसी तरह का क्वेश्चन जिसमें सबसे पहले आपको मार्च 12 के लिए ये बैलेंस दे रखे हैं। ध्यान देना और अब 12 13 यहां ईयर वगैरह का ध्यान रखना है। 12 13 के लिए

पूछा है। 12 13 अब इसमें आपको कह रहा है डेप्रिसिएशन अकाउंटिंग रिकॉर्ड में 15 है और टैक्स रिकॉर्ड में 20 है। तो देखो ये आम जिंदगी है या मिंटो। डेप्रिसिएशन

रिवर्सल है या ओरिजिनेशन है? तो देखो

अकाउंट के अंदर कम और टैक्स में ज्यादा है। ये नॉर्मल बात है। याद करो टैक्स में डब्ल्यूडीबी से शुरुआत में ज्यादा फिर धीरे-धीरे कम होता है। तो अकाउंट में कम और टैक्स में ज्यादा है। तो नॉर्मल है। तो

इसके ऊपर आप कैलकुलेट करके हमेशा की तरह देखोगे तो इसके अंदर डीटीएल का क्रिएट हो जाएगा। तो ये क्रिएट डीटीएल बन जाएगा। पांच का डिडक्शन ज्यादा ले लिया तो इनकम कम हो गई। फ्यूचर में ज्यादा देना पड़ेगा।

तो आप इसके ऊपर डीटीएल बना लोगे जो भी रेट है। सेकंड पॉइंट देखिए। एनबीएफसी ने अक्रूअल बेसिस पे इंटरेस्ट पे किया जो कि उसने अकाउंट में रिकॉर्ड कर दिया। कह रहा

है 30 जून को अपन ने पे कर दिया आईटीआर फाइल करने से पहले इनकम टैक्स वालों ने भी अलऊ कर दिया। तो दोनों जगह फिर कोई डिफरेंस ही नहीं है। दोनों जगह जब अलाउ हो

गया तो बात ही खत्म। आगे बढ़ते हैं। आइटम डिसअलाउड फॉर टैक्स पर्पस 11 12 बट अलाउड इन 12 13 ये स्पेशल है। ध्यान देना। छोटी

सी लाइन है बट स्पेशल है क्या? कह रहा है 11 12 में एक खर्चा डिसअाउ हुआ था जो अब अलऊ हो गया इस साल। तो आपको है ना ऐसे केस में शुरू से सोचना है। इस साल तो वो अलऊ

हो गया। पिछले साल डिसअाउ तो आपको इसको है ना पिछले साल से सोचना है जब से इसकी बात हो रही है। तो पिछले साल से अब कैसे सोचेंगे? इस चीज को ध्यान से सुनो। तो अपन

सोचेंगे? इस चीज को ध्यान से सुनो। तो अपन यहां पर इसका जो ट्रीटमेंट है वो पिछले साल से सोचेंगे। तो पिछले साल देखो अपना ये जो पॉइंट था इसमें आपको कह रहा है कि

ये खर्चा था कितना 1.05 का था जो इनकम टैक्स वालों ने डिसअाउ कर दिया पिछले साल सोचो पिछले साल खर्चा नहीं दिखाने दिया इनकम टैक्स वालों ने तो पिछले साल क्या

हुआ होगा खर्चा कम दिखाया तो प्रॉफिट क्या हो गया बढ़ गया तो टैक्स ज्यादा देना पड़ा फ्यूचर में कम हो जाएगा क्योंकि अगले साल वो अलऊ कर रहे हैं तो फ्यूचर में कम हो जाएगा तो उस टाइम पे आपने डीटीए बुक कर

लिया होगा पिछले साल आपने डीटीए बुक कर लिया होगा क्यों क्योंकि क्योंकि पिछले साल इनकम टैक्स में खर्चा नहीं दिखाया गया तो इसका मतलब आपका टैक्स ज्यादा चला गया लेकिन अब बच जाएगा तो फ्यू आपने पिछले साल

डीटीए बुक कर दिया अब जब उसकी डिडक्शन अपने को मिल गई तो यानी वो रिवर्सल ऑफ डीटीए हो गया तो यहां पर ये रिवर्सल ऑफ डीटीए बन जाएगा डोनेशन टू प्राइवेट ट्रस्ट परमानेंट डिफरेंस है कुछ होगा ही नहीं ये

हो गया क्वेश्चन का काम क्वेश्चन नंबर नाइन में चलते हैं कोई भी नया पॉइंट नहीं है ऑलरेडी अपन ने या तो क्वेश्चंस में या एग्जांपल्स में इन पॉइंट्स को कवर कर दिया

था। तो उसी के बेसिस पे आप इनको देख सकते हो। कोई भी इसमें न्यू पॉइंट नहीं है। अब आगे ये कैरी फॉरवर्ड ऑफ लॉसेस का अपना ₹ लाख का इस साल लॉस हुआ है। सुनना ध्यान

से। ₹ लाख का इस साल लॉस हुआ है। अगले दो सालों में इनकम हो रही है। ₹1 लाख और ₹1,20,0 की। 40% की टैक्स रेट है। तो आपको

अब इसका पीएल बनाकर देना है। ये स्पेशल क्वेश्चन याद करो। कैरी फॉरवर्ड लॉसेस का पॉइंट अपन ने सीखा था। था फॉरवर्डिंग का तो मैंने आपको बताया था लॉस अगर आपका कोई

है तो उस लॉस के अंदर भी प्रॉफिट होने का चांस है। सर समझे नहीं आपदा में अवसर यह लॉस आपके लिए आपदा है लेकिन जब इनकम टैक्स में आप इसको सेट ऑफ करवाओगे तो आपका टैक्स

बचेगा 40% की रेट से तो 80 का टैक्स बचेगा यानी आप इसका डीटीए बुक कर लो तो इसका मतलब आज की डेट में अपन इसका क्या करेंगे डीटीए बुक कर लेंगे तो ये 2 लाख का अपना

लॉस है इस 2 लाख में अपन ₹80 का डीटीए बुक करेंगे अब डीटीए बुक करने की एंट्री क्या होती है डीटीए टू पीएल तो पीएल क्रेडिट होता है तो इनकम की तरह दिखाओ इसको तो

अपना फर्स्ट ईयर का फाइनल प्रॉफिट बच गया नेगेटिव 120 अगले साल 1 लाख का अपन ने इनकम कमाया। अब अकाउंट के अंदर ये इनकम 1 लाख है। ध्यान रखना अकाउंट में सेट ऑफ नहीं होता।

ये 1 लाख ही रहेगा। लेकिन टैक्स रिकॉर्ड में सेट ऑफ होगा। तो टैक्स रिकॉर्ड में अपन इसका करंट टैक्स निकालेंगे। तो 1 लाख की इनकम पे अपन 1 लाख का सेट ऑफ ले लेंगे। क्योंकि ये 2 लाख कैरी फॉरवर्डेड है। तो

ये सेट ऑफ हो जाएगा। तो अपना करंट टैक्स अगले साल का जीरो हो जाएगा। और यह जो सेट ऑफ हुआ इसके कारण अपन ने अब ₹1 लाख के ऊपर टैक्स बचा लिया 40% से 400 का। यानी वह जो

डीटीए बुक करा था उसका आधा हिस्सा अब रिवर्स हो गया। क्यों? क्योंकि इस 2 लाख में से 1 लाख का सेट ऑफ मिल जाएगा। तो जो डीटीए बुक करा था 80,000 उसमें से 400 का रिवर्सल हो गया। अब रिवर्सल की एंट्री

क्या बनाते हैं? डीटीए की। एंट्री बनाते हैं पीएल टू डीटीए। पीएल डेबिट हो रहा है। तो खर्चे की तरह दिखाकर यह प्रॉफिट निकाल लिया। अगले साल ₹1,20,000 की इनकम हो गई। अब इस 120 की इनकम में से सेट ऑफ मिलेगा 1

लाख का तो बाकी 20,000 की तो टैक्स रिकॉर्ड में भी इनकम रहेगी। टैक्स रिकॉर्ड में भी रहेगी। तो टैक्स के ऊपर आपको 40% से 8000 का टैक्स देना पड़ेगा। तो 8000 का

तो टैक्स जाएगा और 400 का वो रिवर्सल हो जाएगा। तो ये टैक्स चला गया और रिवर्सल तो ये 72,000 बच गया। आई होप आपको बात समझ में आ रही है। बिल्कुल सर आ रही है। क्वेश्चन नंबर 11 में चलते हैं। क्वेश्चन

नंबर 11 क्या कह रहा है? ये मेट का क्वेश्चन है दोस्तों। तो सबसे पहले जब भी आप मेट का क्वेश्चंस करते हो तो हमेशा ध्यान रखना ये मेट हटा दो। ये मेट और ये इसका डेटा। बस ये तीन लाइन का ही मान लो

क्वेश्चन है। क्या तीन लाइन का क्वेश्चन है? ये तीन लाइन का क्वेश्चन है कि ये

है? ये तीन लाइन का क्वेश्चन है कि ये एकाउंटिंग प्रॉफिट है। ये आपका टैक्सेबल प्रॉफिट है और ये आपकी रेट है। तो आपको इस क्वेश्चन में पूछा कि डेफिट टैक्स एसेट या लायबिलिटी निकालो। डेफिट टैक्स एसेट या

लायबिलिटी निकालो। तो देखो अकाउंट में इनकम है 6 लाख। ध्यान देना अकाउंट में इनकम है 6 लाख और

टैक्स में इनकम है 60000। तो 5400 से इनकम कम है टैक्स रिकॉर्ड में तो अभी टैक्स कम देना पड़ेगा लेकिन फ्यूचर में ज्यादा देना

पड़ेगा तो यानी इस 5400 का अपन क्या करेंगे इस ₹40000 का ये लीजिए 20% की रेट है इसी से अपन ने ये डीटीएल निकाल लिया तो

ये अपना डीटीएल निकल कर आ जाएगा ₹18000 का तो ये ₹18000 का अपना डीटीएल आ गया अब सुनो ध्यान से अपन अपने पीएल में कितना लेके जाएंगे तो अपन अपना पीएल बनाएंगे तो

उसमें एक तो करंट टैक्स दिखाएंगे करंट टैक्स कितना दिखाएंगे जो अपनी 60000 की मोदी जी की नजर में इनकम है तो 60000 का 20% 12000 एक अपन डीटीएल बनाए कितना

108000 का यानी ये दोनों मिलाकर टैक्स एक्सपेंस इतना तो आपको पीएल में लेके जाना ही है अब इतना लेके जाना है उसके अलावा एक काम और करना है ये तो लेके जाना है लेकिन

इसके अलावा एक छोटा सा काम और करना है सर एक छोटा सा काम और क्या करेंगे वो काम ये करना है कि अब आप अपने करंट टैक्स को मेट से कंपेयर करो। देखो करंट टैक्स है 12,000

का। 60,000 का कितना परसेंट? 20% मेट का देखो डाटा क्या है? मेट का आपका इनकम है 350 का और रेट है 7.5% तो इस 350 पे 7.5% से मैंने कैलकुलेशन किया तो ये मेरे पास

में कैलकुलेशन होकर आ जाएगा दोस्तों। तो यहां पर मैंने कैलकुलेशन किया 350 पे 7.5% तो ये 26,250 आया। तो देखो मेट की वजह से

मोदी जी आपको कह रहे हैं कि लाओ 14250 और दो तो यह भी आपके पीएल में डेबिट हो जाएगा। तो ये तीनों मिलाकर आपका पीएल का डेबिट अमाउंट आ जाएगा। इतना आप पीएल के

अंदर डेबिट डाल दोगे। तो आप पीएल के अंदर डेबिट एक तो ₹12,000 का करंट टैक्स, एक डीटीएल और एक ये एक्स्ट्रा लायबिलिटी। तो टोटल मिलाकर इतना पीएल के अंदर चला जाएगा।

आई होप आपको बात समझ में आ गई। ठीक है सर। चलिए आगे बढ़ते हैं। क्वेश्चन नंबर 12 सेम ऐसा मैंने अभी एग्जांपल से एक्सप्लेन किया था। आपको कह रहा है पहले दो साल में

डेप्रिसिएशन का डिफरेंस आ रहा है 200 400 पहले साल 200 फिर 400 ध्यान देना अलग-अलग ईयर में और उसके बाद से 10 का इसका रिवर्सल होगा। 10 10 से इसका रिवर्सल होगा

और 10 साल का इस क्वेश्चन में हॉलिडे पीरियड है। तो अब आपको डिटेल का कैलकुलेशन करके बताना है। तो कैसे करेंगे? तो हॉलिडे

पीरियड का क्वेश्चन है। तो मैंने आपको क्या समझाया था? देखो ये पहले साल 200 का डिफरेंस फिर 400 का फिर ये 10 10 ऐसे रिवर्स होना शुरू होगा। हॉलिडे पीरियड तक

कितना रिवर्स हो जाएगा सर? हॉलिडे पीरियड

तक 80 रिवर्स हो जाएगा। कितना रिवर्स हो जाएगा? 80। अब फो मेथड पे इसको पहले वाले

जाएगा? 80। अब फो मेथड पे इसको पहले वाले में से हटा दो। यानी पहले वाले के अंदर रिवर्सल हटाकर 120 बचा। और ये वाला 400 एज इट इज़ बच गया। ये वो रिवर्सल है जो हॉलिडे

के बाद होंगे। अब हॉलिडे के बाद होंगे तो इनका अभी अपन डीटीएल बना लेंगे। डेप्रिसिएशन डीटीएल का क्वेश्चन होता है। दे भी रखा है डीटीएल का नाम। तो यहां पर 40% के रेट से ये पहले साल बनाने के दूसरे

साल। तो पहले साल आपका डीटीएल बैलेंस 48 हो गया। दूसरे साल दोनों मिलाकर 208 हो गया। आपको दो चीजें पूछी कि सेकंड ईयर में एक तो डीटीएल पीएल में कितना जाएगा? जितना

सेकंड ईयर में बनाओगे ये तो पीएल में जाएगा और दूसरा सेकंड ईयर के इनका डीटीएल का बैलेंस ये रहा 208 का। तो यह इसका आंसर बनकर आ जाएगा। दोस्तों, चलते हैं अगले

क्वेश्चन में। लास्ट क्वेश्चन जो कि बहुत ही खतरनाक सा दिख रहा है। है कुछ भी नहीं। क्वेश्चन नंबर 13 है मिक्स टॉपिक का जिसमें एक एनेक्टेड रेट भी आपको

दे रखी है। क्या दे रखा है? एबीसी

प्रिपेयर अकाउंट एनुअली ऑन 31 मार्च ऑन फर्स्ट ऑफ़ अप्रैल 12 इज़ परचेस मशीन एट अ कॉस्ट ऑफ़ 150। 150 पे मशीन खरीदी। द मशीन हैज़ अ लाइफ ऑफ़ थ्री ईयर विद सैलरी ज़ीरो।

ऑलदो एलिजिबल फॉर 100% इन इनकम टैक्स। इनकम टैक्स वाले कह रहे हैं पूरा डिडक्शन दे देंगे। सेक्शन 35 के अंदर वो जो साइंटिफिक रिसर्च वाला होता है। अकाउंट वाले कह रहे हैं नहीं हम तो 3 साल के

बेसिस पे चलेंगे। एसएलएम बेसिस पे चलेंगे। ठीक है? तो यानी अपन अकाउंट में उसका

ठीक है? तो यानी अपन अकाउंट में उसका डेप्रिसिएशन 50-500 लगाएंगे हर बार। टैक्स वाले कह रहे हैं नहीं 150 पहले साल ही उड़ा दो। ठीक है? कोई दिक्कत नहीं। एबीसी हैज़

प्रॉफिट बिफोर डेप्रिसिएशन इन टैक्स 2 लाख। कह रहा है 2 लाख का इनकम है और 40% की रेट है। अ परचेस ऑफ़ मशीन एट अ कॉस्ट ऑफ़ 150 गिव राइज़ टू टैक्स सेविंग ऑफ 60000।

कह रहा है ये जो मशीन खरीदी इससे 60000 की टैक्स सेविंग हो जाएगी। द कॉर्पोरेट टैक्स रेट हैज़ बीन अस्यूम्ड टू बी सेम इन ईच ऑफ थ्री ईयर कैलकुलेटेड डेफ टैक्स एंड पास्ट

एंट्री। कह रहा है आपकी टैक्स रेट जो है वो 40% से रहेगी। इसी से कैलकुलेशन लास्ट की दो एंट्रियां बाद में दोबारा लानी है। ये लास्ट का पॉइंट पहले यहीं तक एक बार रीड करना है। बस अब आपको इसकी एंट्रियां

बनानी है। तो एंट्रियां बनानी है। तो मैं आपसे एक सिंपल सा काम पूछूं कि चलो बताओ इस क्वेश्चन में अपना जो करंट टैक्स और वो डेफ टैक्स है वो कितना आएगा? तो देखो यहां

पर अपन ने कैलकुलेशन किया। ये मैं आपको आंसर मेरा क्लास का डाल दे दिखा देता हूं। तो देखिए अपन ने एक एसेट खरीदी है 150 की। टैक्सेशन के अंदर अपने को उसका पूरा

डिडक्शन अभी मिल जाएगा। अकाउंट्स वाले आपको 50-50 की डिडक्शन देंगे। तो पहले साल 1 लाख का डिफरेंस आ गया जो फिर 50-500 से रिवर्स होता जाएगा। यानी पहले साल 1 लाख

के ऊपर आप क्या करोगे? डीटीएल क्रिएट कर लोगे 40% से और फिर वो क्या होता जाएगा?

रिवर्स होता जाएगा। ठीक है? समझ में आ गया? तो ये देखो मैंने आपको बता दिया। इस

गया? तो ये देखो मैंने आपको बता दिया। इस 1 लाख के ऊपर आप 400 का डीटीएल बना लोगे। फिर 2000 से ये रिवर्स हो जाएगा। तो अब अपन ने यहां पर क्या बनाया? स्टेटमेंट ऑफ

पीएल बनाया। स्टेटमेंट ऑफ पीएल में क्या करा? हर साल 222 लाख की इनकम अकाउंट के

करा? हर साल 222 लाख की इनकम अकाउंट के हिसाब से बनता है पीएल। 50-500 का ये लो डेप्रिसिएशन। तो ये अपना पीबीटी आ गया। ठीक है? आ गया। अब इसी पीबीटी के ऊपर

ठीक है? आ गया। अब इसी पीबीटी के ऊपर टैक्स दिखाया। अब टैक्स दो होता है। एक तो करंट टैक्स होता है और एक डेफ टैक्स होता है। डेफर्ट टैक्स तो पहले साल अपन बना रहे हैं 400 का। बना रहे हैं तो एंट्री बनी

लायबिलिटी बनाने की पीएल टू डीटीएल तो माइनस में आ गया। और अगले 10 सालों में उसका रिवर्सल आएगा तो प्लस में आ गया। ये तो हो गया डेपर टैक्स का हिसाब। अब करंट टैक्स के लिए आपको टैक्सेबल इनकम चाहिए।

तो करंट टैक्स निकालने के लिए देखो मैंने यहां पर ये टैक्सेबल वाली कैलकुलेशन बनाई। तो करंट टैक्स निकालने के लिए अपने को

टैक्सेबल चाहिएगा। तो वो टैक्सेबल कैसे आएगा? तो वो टैक्सेबल बड़ा सिंपल सा है।

आएगा? तो वो टैक्सेबल बड़ा सिंपल सा है। देखो अपनी इनकम है पहले साल की 2 लाख। इस 2 लाख में से पहले साल अपना डेप्रिसिएशन पूरा 1.5 लेस हो गया। तो पहले साल 500 तो

इस 500 के ऊपर अपना 40% से यानी अपना 20,000 का करंट टैक्स हो गया पहले साल का तो पहले साल का ये 20,000 चला गया टैक्सेशन के हिसाब से 2 लाख की इनकम 1 का

डे फट गया तो 500 बच गया 50000 का 40% 20000 अब आगे वाले सालों में 2 लाख ही रहेगा वो डेप्रिसिएशन तो पूरा हो गया तो दो लाख ही रहेगा इनकम टैक्स में तो ₹22 लाख का 40-40% 80000 ये आपका करंट टैक्स

डेप टैक्स बता दिया तो ये प्रॉफिट आफ्टर टैक्स आ गया अब इन्हीं केस ने 3 साल की एंट्रियां बना दी करंट टैक्स की मैंने आपको बताया था एंट्री याद करो करंट टैक्स टू बैंक और फिर इसको पीएल में ले जाओ पहले

साल तो 20000 का देखो पहले साल का करंट टैक्स था 20000 समझ में आ गया एक टैक्सेशन के हिसाब से 2 लाख का इनकम लेकिन उसमें से डेप्ट डेढ़ चला गया तो 500 बच गया उसका

40% 20000 तो 20000 के करंट टैक्स की बना ली और 400 का ये डिटेल बनाने की अगले साल करंट टैक्स 80 से बना दिया और रिवर्सल ऑफ डिटेल कर दिया 20000 से फिर 80 से करंट

टैक्स पे कर दिया और 20000 का ये रिवर्सल कर दिया। अब इस क्वेश्चन में एक छोटा सा चेंज करा। कहा मजा नहीं आ रहा। कहा कि जो अपनी टैक्स रेट है इनकम टैक्स के पर्पस से

वो अलग-अलग कर दो। अभी तक अपन मान रहे थे अकाउंट और टैक्स में सेम है। अब कह रहे हैं एक काम करो अपना जो है ना जो 2012 13 14 का जो एनेक्टेड टैक्स रेट है वो 40 35

और 38% का है। 40 35 और 38 है तो मैंने आपको कहा था डेफर्ट टैक्स का कैलकुलेशन आपको एनेक्टेड रेट से करना है। तो पहले साल तो दोनों जगह

ही 40 है। तो यहां पर भी 40 है और यहां भी 40 है। तो इसका मतलब जो क्रिएट करेंगे पहले साल वो तो आप उसी पैटर्न से करोगे। तो ₹1 लाख के ऊपर 40% के रेट से आपने ₹00

का डीटीएल बना लिया क्योंकि 40% ही दोनों जगह है। लेकिन अब अगले साल क्या हुआ? अगले

साल आपका एन्टेड रेट जो है वो 35% हो गया। तो आपको जो बचा हुआ डीटीएल ध्यान रखना बचा हुआ डीटीएल जो आगे के लिए कैरी फॉरवर्ड

करना है वो आपको 35% से करना है। तो अपना टाइमिंग डिफरेंस था 2 लाख का। उस 2 लाख सॉरी टाइमिंग डिफरेंस था अपना 1 लाख का।

उस 1 लाख में से सेकंड ईयर के एंड तक 500 तो रिवर्स हो गया। तो तीसरे साल में जाएगा 500। ध्यान देना सेकंड ईयर के एंड ऑफ ईयर

टू बात कर रहे हैं। अपना 1 लाख का जो टोटल डिफरेंस था उस टोटल डिफरेंस में से 500 का तो रिवर्स हो गया। टाइमिंग डिफरेंस ऑफ़ डेप्रिसिएशन। तो बाकी 500 थर्ड ईयर में

जाएगा। तो आप सेकंड ईयर के एंड में इसका जो डेफ टैक्स फ्यूचर के लिए रखोगे वो डेफ टैक्स इस 50% पे 35 500 पे 35% रखोगे तो

500 पे 35% रखोगे यानी 17,500 रखोगे तो 400 में से 17,500 अगले साल रखना है। 400 में से 17,500 अगले साल रखना है। क्यों?

क्योंकि ये तीसरे साल के काम आएगा। तो ऐसे केस में बाकी बचा हुआ सेकंड ईयर में रिवर्स हो जाएगा 22,500। फर्स्ट ईयर में 400 का बना लिया। 40% से जो अपन ने पूरे

क्वेश्चन में किया। अब सेकंड ईयर में आ गए। सेकंड ईयर में अपना 1 लाख में से 500 तो रिवर्स हो गया। क्या अमाउंट में डेप्रिसिएशन अभी टैक्स की बात मत करो। तो

थर्ड ईयर में जाएगा 500। तो इस 500 पे डेफ टैक्स जो चाहिएगा सेकंड ईयर के में जो चाहिएगा वो 35% की इनेक्टेड रेट से यानी 17,500 चाहिएगा। तो यानी 40 में से 17,500

तो अगले साल चाहिएगा। तो आप एक काम करो 22,500 को रिवर्स कर दो। तो सेकंड ईयर में रिवर्स 22500 आ जाएगा। थर्ड ईयर में अब अपने को कुछ चाहिए ही नहीं। क्यों?

क्योंकि थर्ड ईयर के बाद तो खत्म सारा टाइमिंग डिफरेंस। तो थर्ड ईयर में कुछ चाहिए ही नहीं। तो जो बचा था 17,500 अब ये पूरा का पूरा थर्ड ईयर में रिवर्स हो जाएगा। यानी इस केस में 400 ईयर वन में

बनेगा। फिर ये ईयर टू में 22,500 और ईयर थ्री में 17,500 रिवर्स हो जाएगा। तो ये दोस्तों इसका ईएस 22 का काम खत्म। आपके

मोस्ट जो डिजायर्ड रिवीजन लेक्चर थे कि सर एएस 15 का ला दो वो मैंने पिछले रिवीजन लेक्चर में ला दिया। आप लोग जाकर चेक कर सकते हो। मैंने आपको सारे रिवीजन लेक्चर का प्लेलिस्ट दिया हुआ है। वहां पर जाकर

कोई भी रिवीजन लेक्चर आप यूज़ कर सकते हो। दूसरा सर एएस 19 का ला दो। वो इसमें आ गया। एएस 22 का आ गया। तो आपके लगभग जो भी इंपॉर्टेंट है वो सारे के सारे ऑलरेडी

प्लेलिस्ट में आ चुके हैं। तो आप लोग उनका यूज़ करो। आपको बढ़िया लगा है। अपने मित्रों मित्रणियों को भी ज्यादा से ज्यादा इनको शेयर करो। फैला दो ज्यादा से ज्यादा। लाइक अभी तक भी नहीं किया तो अब

तो लाइक करके जाना ही है। नहीं तो ध्यान रखना क्या-क्या हो सकता है। ठीक है? और

इसके अलावा फीडबैक भी अपना जरूर शेयर करें और साथ-साथ में क्यूबीसीबी को रेफर करके पूरे एक बार खुद से अब दोबारा निकालिएगा। पक्का आपको शानदार तरीके से कॉन्फिडेंस आ

जाएगा। सो मिलते हैं आगे एक नए लेक्चर में। थैंक यू सो मच। राधे-राधे।

Loading...

Loading video analysis...