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जिस लड़की से शादी की कसम खाई थी उसने धोखा दे दिया तो अब कसम का क्या करूँ? Bhajan Marg

By Bhajan Marg

Summary

Topics Covered

  • कसम लेना बंद करो, भगवान पर भरोसा रखो
  • लालसाएं कभी पूरी नहीं होतीं, यह भ्रम है
  • आसक्ति ही अगले जन्म का कारण है
  • नाम जपो, आसक्ति-मोह-चाह सब मिटेगा
  • भगवान माया का पर्दा इसीलिए डालते हैं कि आप विकल हों

Full Transcript

राधे-राधे महाराज जी महाराज जी इनके परिवार में एक थोड़ा सा कसम को लेके एक वो है कि इनके बेटे ने एक लड़की पसंद किया तो दोनों तरफ से सहमति भी हो गई तो इनके बेटे

ने कसम खा ली कि शादी करूंगा तो इसी से करूंगा नहीं तो नहीं करूंगा कुंवारा रहूंगा फिर महाराज जी फिर बाद में पता चला कि लड़की कहीं और भी आसक्त है तो फिर महाराज जी दोनों का रिश्ता टूट गया अभी

महाराज जी वो कसम बीच में आ रही है कहीं और जाने में अरे भीष्म प्रतिज्ञा थोड़ी यार छोड़ो यार छोड़ जाओ यही वृंदावन में कसम छोड़ जाओ

कसम को वृंदावन में छोड़ दो ऐसे बच्चों वाली बातें हैं ये ये कोई धैर्य पूर्वक बात नहीं है ये धर्म पूर्वक नहीं ऐसे कैसे जहां भगवान ने विधान बनाया वही हमारा

ब्याह होगा ना हम कसम कैसे खा सकते हैं हम तो ये कह सकते हैं कि यदि हमारी आपकी मित्रता है भगवान ने रचा होगा तो हमारा आपका ब्याह हो जाएगा अगर भगवान ने नहीं

रचा तो टूट जाएगा तो हमको भगवान की बात रखनी अपनी बात थोड़ी रखनी की कसम खाते हैं जैसे जैसे भीष्म जी ने कसम खाया। भीष्म प्रतिज्ञा थोड़ी है कि कुंवारी रह के

आजीवन पितामह भीष्म की तरह हमारा जीवन पवित्र हो। अगर ऐसा हो तो बताओ खड़े होकर के कि भीष्म की तरह तुम बाल ब्रह्मचारी रह सको तो फिर धन्य तुम्हारा साथ हम देंगे।

वहां तुम्हें पहुंचा देंगे। रहो ब्रह्मचारी आओ। घर में रह के तुम्हें पहुंचा देंगे। लेकिन कसम जैसे निर्वाह करना चाहते हो तो फिर वैसे ही चलो तो घर

में रहकर ब्रह्मचारी रहकर तुम्हें महात्मा बना देंगे। घर में रहकर तुम भगवान की प्राप्ति कर सकते हो। लेकिन नहीं बच्चा यार ये सब बातें इनमें दम नहीं है। जिस

समय मन अपने वेग में आएगा उस समय तुम क्योंकि बिना साधना के मन को संयम में रखना बड़ा कठिन होता है। कई ऐसे साधन है जिनके द्वारा हम अपने आप को नष्ट कर लेते

हैं। तो इसलिए इन कसमों पर ध्यान मत दीजिए। कोई सुयोग्य लड़की मिले तो आप माता-पिता को प्रणाम करके और उनके आशीर्वाद से उसके साथ ब्याह कीजिए और

गृहस्थ धर्म का निर्वाह कीजिए। मीरा देवी जी रतनगढ़ से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी जीवन में लालसा खत्म क्यों नहीं हो रही? पहले अच्छे जीवन साथी की फिर

अच्छे सासससुर फिर बेटे की फिर बेटे के अच्छे संस्कार फिर बहू फिर पोता फिर महाराज जी पोते की शादी हो जाए फिर तो शांति से मर सकूं तो महाराज जी ये कब पोते

की शादी हो जाने से शांति से मरा जा सकता है नहीं यार ऐसा नहीं शांति से तो तब मरा जा सकता है जब पोते की आसक्ति मिट जाए और

भगवान में प्रेम हो जाए तब शांति से मरा जा सकता है। यह लालसाएं कभी पूर्ण नहीं होगी। कभी पूर्ण नहीं होगी। देखो भरत जी

ने राज्य त्यागा, पुत्र परिवार त्यागा, गंडकी नदी के किनारे भजन कर रहे हैं। लेकिन हिरण के बच्चे में आसक्ति हो गई। तो

अगला जन्म हिरण का हुआ। अगले जन्म का हेतु ये आसक्ति है। आसक्ति को जितनी जल्दी मिटा सको तो लालसाएं मिट जाएंगी। इसी के लिए हम

कहते हैं खूब नाम जप करो। जितना नाम जप करोगे उतना ही आपके अंदर ज्ञान होगा जितना ज्ञान होगा उतने आसक्ति मोह चाह ये सब

मिटेगी और हृदय आनंदित हो जाएगा विराज भट्ट जी अहमदाबाद से राधा वल्लभ श्री हरिवंश गुरुदेव महाराज जी क्या भगवान कभी

भक्त को जानबूझकर प्रतीक्षा करवाते हैं ताकि उसका प्रेम और गहरा हो सके ऐसा ऐसा होता है भगवान ने

माया का घूंघट डाल रखा है। है तो सबके सामने सब रूपों में वही है। माया का पर्दा डाल रखा है। ये जो माया का पर्दा डालकर

मेरा प्रभु छुपा हुआ है। उसका एक ही कारण है विरह। इतना हम में तड़पन हो जाए कि मैं सब कुछ भूल जाऊं और रोऊं उसके लिए तो

पर्दा हटाया तो जित देखूं तित श्याम मै जिधर देखो उधर श्याम सुंदर खड़े हैं जिधर देखो उधर भगवान विराजमान है सिया राम में

सब जग जानी करो प्रणाम जो जुग पानी सब भगवान विराजमान है पर वो माया का पर्दा है वो इसलिए है कि मैं विकल हो जाऊं विकल

क्यों हो जाऊं क्योंकि और कुछ याद ना रहे केवल भगवान की अनन्य स्मृति हमारे अंदर रह जाए। इसलिए भगवान माया का पर्दा लगाकर

बैठे हैं। अनन्य स्मृति जागृत हुई सब जिधर देखो सर्वम खद ब्रह्म नेस्त किंच किंचिन मात्र ब्रह्म के सिवा और कुछ है नहीं वही

परमात्मा विराजमान है।

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