Complete History of Persia to Modern Iran | How Persia Became Iran Explained | StudyIQ IAS
By StudyIQ IAS
Summary
Topics Covered
- साइरस ने मीडियन पर कब्जा कर अकीमेनिड साम्राज्य स्थापित किया
- ईरान दुनिया का एकमात्र आधिकारिक शिया राष्ट्र
- सुप्रीम लीडर पूर्ण राजनीतिक नियंत्रण रखता है
- ईरान ऊर्जा महाशक्ति तेल-गैस भंडारों वाला
Full Transcript
स्टडी आईक्यू आईएएस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन देश को जाने ईरान। दोस्तों आज हम जिस देश के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं वो
वेस्टर्न एशिया में स्थित एक देश है जिसे परर्शिया और आधिकारिक तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान भी कहते हैं। एक एथनिकली डवर्स कंट्री के रूप में जाना जाने वाला
ईरान 550 बीसीई के एककीमनेट पीरियड से एक समृद्ध और विशिष्ट संस्कृति वाला देश रहा है। हाल के दशकों में यह इस्लामिक रिपब्लिक के अनूठे ब्रांड के लिए जाना
जाता है। इसकी सीमा वेस्ट में इराक और टर्की से, नॉर्थ वेस्ट में अज़रबजान और आर्मीनिया से, नॉर्थ में कैस्पियन सी और तुर्कमेनिस्तान से, ईस्ट में अफगानिस्तान
और पाकिस्तान से और साउथ में ओमान गल्फ और परर्शियन गल्फ से लगती है। इसमें 1.64 मिलियन वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है
जो इसे 17th सबसे बड़ा देश बनाता है। इसके अलावा 86 मिलियन आबादी के साथ ईरान दुनिया का 17th सबसे अधिक आबादी वाला देश भी है।
और इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में दूसरा सबसे बड़ा देश है। तेहरान यहां की राजधानी के साथ-साथ सबसे बड़ा शहर भी है। शिया इस्लाम
यहां का ऑफिशियल स्टेट रिलजन है। इसके साथ ही अधिकांश आबादी पर यानी कि फारसी भाषा बोलती है जो देश की ऑफिशियल लैंग्वेज भी
है। लैंग्वेज और एथनिसिटी के नजरिए से ईरान एक बहुत ही विविध देश है। तो आइए आज जानते हैं ईरान के बारे में विस्तार से।
जग्राफी ऑफ ईरान। दोस्तों, ईरान पश्चिम एशिया का एक पहाड़ी और सूखा क्षेत्र है। यह 24 डिग्री और 40 डिग्री नॉर्थ
लैटीट्यूड और 44 डिग्री और 64 डिग्री ईस्ट लोंगिट्यूड के बीच स्थित है। यह एशिया का फोर्थ सबसे बड़ा देश है और सऊदी अरेबिया के बाद वेस्टर्न एशिया का सेकंड सबसे बड़ा
देश है। ईरान की टोपोग्राफी में उच्च आंतरिक घाटियों के आसपास के रगेड माउंटेंस हैं। मुख्य पर्वत श्रृंखला जाग्रोस पर्वत है। यह पर्वत प्लेन से फैली पैरेलल रिजेस
की एक श्रृंखला है जो देश को नॉर्थ वेस्ट से साउथ ईस्ट में विभाजित करती है और टर्की और इराक की सीमाओं से लेकर स्ट्रेट ऑफ होमोस तक फैला हुआ है। जाइग्रोस में कई
पीक्स समुद्र तल से लगभग 3000 मीटर ऊपर हैं और देश के साउथ सेंट्रल रीजन में कम से कम पांच पीक्स हैं जो समुद्री तल से
4000 मीटर तक ऊपर हैं। इस रेंज की भूमि काफी कठोर है और बड़े पैमाने पर पेस्टरल नोमैड्स यहां बसे हुए हैं। कैस्पियन सी के
किनारे पहाड़ों की एक और श्रृंखला है जिसे अल्बोर्स माउंटेंस के रूप में जाना जाता है। इस माउंटेन चेन की सबसे ऊंची चोटी
बर्फ से ढकी माउंट डेमावेंड है जो 560 मीटर्स की ऊंचाई के साथ ईरान के हाईएस्ट पॉइंट के रूप में भी जाना जाता है। ईरान के केंद्र में कई क्लोज्ड बेसिंस हैं
जिन्हें सामूहिक रूप से सेंट्रल प्लेटो कहा जाता है। इस प्लेटो की औसत ऊंचाई लगभग 900 मीटर है। लेकिन कई पहाड़ जो प्लेटो के
ऊपर स्थित हैं 3000 मीटर से भी अधिक ऊंचे हैं। प्लेटो का ईस्टर्न भाग दो साल्ट डेजर्ट्स, दश्ते कबीर और दश्ते लुक से ढका
हुआ है। दश्त कावीर को ग्रेट साल्ट डेजर्ट भी कहते हैं। कुछ बिखरे हुए ओएसिस यानी कि मरुस्थलों को छोड़कर यह रेगिस्तान अनइहबिटेड है। नॉर्थ वेस्टर्न ईरान का
हिस्सा आर्मेनियन हाईलैंड से घिरा हुआ है जो इसे टोपोग्राफिकली पड़ोसी टर्की, आर्मीनिया, अज़रबजान और जॉर्जिया के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। ईरान में लो लैंड्स
यानी कि तराई के केवल दो विस्तार मिलते हैं। साउथ वेस्ट में खुजे प्लेन और नॉर्थ में कैस्पियन सी का कोस्टल प्लेन।
खुजस्तान का अधिकांश मैदान मार्शस यानी कि दलदल से ढका हुआ है। कैस्पियन प्लेन लगर और नैरोअर दोनों ही हैं और कैस्पियन शोर
के साथ लगभग 640 कि.मी. तक फैला हुआ है। इसके साथ ही देश में कोई बड़ी नदियां नहीं है। छोटी नदियों में 830 कि.मी. की लंबाई
के साथ करुण एकमात्र नेविगेबल रिवर है। अन्य प्रमुख नदियों में 700 कि.मी. तक
फैली कारखे और 300 मीटर लंबी जायनदेह रिवर शामिल हैं। सेंट्रल प्लेटो पर कई नदियां बर्फ के पिघलने से बनती हैं और परमानेंट चैनल से बहते हुए साल्ट लेकक्स में मिल
जाती हैं। और साल के अधिकांश समय यह सूखी ही रहती हैं। नॉर्थ वेस्ट रीजन में एक परमानेंट साल्ट लेक उर्मिया लेक के नाम से जाना जाता है। जिसका साल्ट कंटेंट मछली या
दूसरे जलीय जीवन को सपोर्ट करता है। इसके साथ ही ईरान एक साइज्मिक एक्टिव एरिया में स्थित है। औसतन रिक्टा स्केल पर मैग्नीट्यूड सेवन का भूकंप हर 10 साल में
एक बार आता है। ज्यादातर भूकंप शैलो फोकस के होते हैं और बहुत विनाशकारी हो सकते हैं। 2003 में आया बाम भूकंप ईरान में
सबसे घातक भूकंपों में से एक था। अगर हम यहां के क्लाइमेट की बात करें तो ईरान का क्लाइमेट काफी परिवर्तनशील है। नॉर्थ वेस्ट में भारी स्नोफॉल के साथ तेज ठंड
होती है। वसंत और पथझड़ के मौसम माइल्ड और गर्मियां हॉट और ड्राई रहती हैं। वहीं साउथ में सर्दियां हल्की होती हैं और गर्मियों में औसत तापमान 38 डिग्री के साथ
मौसम बहुत गर्म रहता है। खुजे प्लेन पर गर्मी के साथ हाई ह्यूमिडिटी भी पाई जाती है। सामान्य तौर पर देश में कॉन्टिनेंटल क्लाइमेट रहता है जिसमें वर्षा दर काफी कम
होती है। देश का लगभग 7% हिस्सा फॉरेस्टेड है। ओक, ऐश, एल्म, साइपरस और अन्य मूल्यवान पेड़ कैस्पियन सी से उठने वाली माउंटेन स्लोप्स पर व्यापक रूप में पाए
जाते हैं। ईरान के प्रमुख वनों में नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट्स के कैस्पियन फॉरेस्ट, नॉर्थ ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के लाइमस्टोन फॉरेस्ट्स, साउथ और साउथ ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट्स के पिस्टशियो फॉरेस्ट्स,
सेंट्रल और वेस्टर्न रीजन के ओक फॉरेस्ट्स, कवीर डेजर्ट रीजन के श्रब्स और सदर्न कोस्ट के सबट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स शामिल हैं। इसके साथ ही ईरान के प्रसिद्ध
वन्य जीवों में से एक एंडेंजर्ड एशियाटिक चीता शामिल है। जो अब केवल ईरान में ही जीवित है। देश की अन्य वाइल्ड लाइफ्स में बेयर, यूरेशियन लिंक्स, फॉक्स, गज़ल्स,
जैकल्स, पैंथर्स इत्यादि शामिल हैं। पर्न लेपर्ड जो दुनिया की सबसे बड़ी लेपर्ड सबस्पशीज है, मुख्य रूप से ईरान में ही देखने को मिलते हैं। दोस्तों, यह था ईरान
की जियोग्राफी का एक विवरण। अब नजर डालते हैं यहां के इतिहास पर। हम जब भी ईरान के इतिहास की बात करते हैं तो पहला नाम आता है महान पर्शियन एंपायर का जिसकी सीमा
यूरोप में ग्रीस से लेकर भारत तक फैली हुई थी और पर्शियन किंग साइरस के शासन में यह एंपायर अपने चरमोत्कर्ष पर था। आइए जानते
हैं ईरान के इतिहास को थोड़े विस्तार से। हिस्ट्री ऑफ ईरान। दोस्तों नॉर्दर्न ईरान के कशाफूद और गंज पर मिले आर्कियोलॉजिकल
आर्टिफेक्ट्स लोअर पेलिथिक एज के बाद से ईरान में मानव उपस्थिति की पुष्टि करते हैं। इरेनियन प्लेटो में दर्जनों प्री हिस्टोरिक साइट्स मौजूद हैं जो 4000 बीसी
के आसपास प्राचीन संस्कृतियों और शहरी बस्तियों के अस्तित्व की ओर इशारा करते हैं। 2000 बीसी के दौरान आधुनिक ईरान की सीमा क्षेत्रों पर मीडियन, परर्शियन और
पार्थियन ट्राइब्स का प्रभुत्व होने लगा था। लेट 10th सेंचुरी से लेकर सेवंथ सेंचुरी बीसी के अंत तक इरेनियन पीपल नॉर्थ मेसोपोटेमिया में स्थित असीरियन
एंपायर के अंतर्गत थे। 730 बीसी के आसपास इस क्षेत्र में मीडियन ट्राइब्स की यूनिफिकेशन ने मीडियन एंपायर की नींव रखी और 615 बीसी तक मीडियन एंपायर ने वर्तमान
के ईरान के लगभग पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण बना लिया था। इसके बाद 550 बीसी के आसपास साइरस द ग्रेट ने पर्शियन रिवोल्ट के दौरान मीडियन एंपायर पर कब्जा कर लिया और
इस तरह यहां एकमिनेट एंपायर की शुरुआत हुई। एककीमिनेट एंपायर को फर्स्ट पर्शियन एंपायर के रूप में भी जाना जाता है। इसके उपरांत फोर्थ सेंचुरी बीसी के दौरान
एलेक्जेंडर द ग्रेट ने एकीमिनेट एंपायर पर आक्रमण किया और अंतिम एकीमिनेट सम्राट डेरियस द थर्ड को हराकर इस क्षेत्र पर अपना कब्जा जमाया। इन सभी साम्राज्यों के
बाद सेकंड सेंचुरी बीसी में पार्थियन एंपायर ईरान में मुख्य शक्ति बन गया। और लगभग पांच शताब्दियों तक एक फ्यूडल मोनकी
के रूप में इनका साम्राज्य जारी रहा। 224 सीई में पार्थियन एंपायर को हटाकर ससेनियन एंपायर का राज शुरू हुआ। ससेनियन एंपायर
की अधिकांश अवधि रोमन पर्शियन वॉर्स में गुजर गई। रोमन पर वॉर, ग्रेको रोमन और ईरानी साम्राज्य के बीच संघर्ष की एक श्रृंखला थी। इस क्षेत्र में इन युद्धों
ने सातवीं शताब्दी में ईरान पर अरब आक्रमण का रास्ता खोल दिया। ससेनियन एंपायर को शुरू में रशीदुउन कैलिफेट यानी खलीफा द्वारा पराजित किया गया था। इसके बाद उमयद
कैलिफेट और अबसिद कैलिफट ने यहां शासन किया। दो सेंचुरीज के अरब शासन के बाद तहीर, सफारिद्स, समानिद्स और बुइए जैसे
सेमी इंडिपेंडेंट किंगडम्स उभरने लगे। इस दौरान ईरान का फलता फूलता साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा और कला ईरान सभ्यता के लिए एक नए युग के निर्माण में प्रमुख तत्व
बन गए। इस युग को इस्लामिक गोल्डन एज के रूप में भी जाना जाता है जो 10वीं और 11वीं शताब्दी तक अपने चरम पर पहुंच गया
था। दोस्तों, 1219 से 1221 के दौरान जंगीज़ खान की मंगोल सेना द्वारा ईरान को विनाशकारी आक्रमण का सामना करना पड़ा। कुछ
इतिहासकारों के अनुसार मोंगोल हिंसा और लूटपाट ने इरेनियन प्लेटो की 34 आबादी को मार डाला था। कुछ दूसरे इतिहासकारों ने यह
भी अनुमान लगाया है कि ईरान की आबादी 20वीं शताब्दी के मध्य तक प्रीमोल लेवल तक नहीं पहुंच पाई थी। इसके बाद 1370 में फिर
से एक बार ईरान पर हमला हुआ और इस बार यह हमला किया था तिमोर ने। तमोर ने तिमोरद एंपायर की स्थापना की जो अगले 156 वर्षों
तक चला। तैमूर की मृत्यु के बाद इनका कोई वंशज शासन करने के काबिल नहीं था। इसके बाद करीब 1501 में सफाविद डिनेस्टी की
शुरुआत हुई। ससेनियन एंपायर के बाद ईरान की खोई हुई पहचान को सफाविद डिनेस्टी ने पुन स्थापित किया। सफाविद शाहू ने इस्लाम
के शिया ब्रांच को बढ़ावा दिया। नतीजदन आधुनिक समय में ईरान दुनिया का एकमात्र आधिकारिक शिया राष्ट्र है। एक समय में सफा विद डायनेस्टी दो तरफ से सुन्नी इस्लाम
एंपायर से घिरा हुआ था। एक तरफ था टर्किश ऑटोमन एंपायर और दूसरी तरफ भारत के मुगल एंपायर। हालांकि शिया सुन्नी विवादों के
कारण यह सभी साम्राज्य आपस में कभी भी साथ नहीं हो पाए। सफाविद एंपायर और ऑटोमन एंपायर के बीच सदियों से चल रही
प्रतिद्वंदिता ने कई ऑटोमन इरेनियन वॉर्स को जन्म दिया। 1600 के दशक के अंत और 1700 की शुरुआत में धीरे-धीरे सफाविद एंपायर
समाप्त होने लगा और इसी बीच इस क्षेत्र में अफगानों की पकड़ मजबूत होने लगी। 1729 में अफशद एंपायर के शासक नादिर शाह ने
सत्ता हथिया ली और खुद को ईरान का शासक घोषित कर दिया। जिसका साम्राज्य उत्तर भारत तक था। लेकिन 1747 में नादिर शाह की
हत्या के बाद यहां अराजकता यानी एनाकी की स्थिति बन गई। नादिर शाह के सेनापतियों में से एक करीम खान ने 1750 में यहां जा
डायनेस्टी की स्थापना की। 1779 में करीम खान की मृत्यु के बाद इस क्षेत्र में सत्ता के लिए युद्ध और सिविल वॉर की शुरुआत हो गई। इस दौरान आगा मोहम्मद खान
का उदय हुआ। जिसने 1794 में कजर वंश की स्थापना की। इस एंपायर ने 1925 तक ईरान पर राज किया और इसी दौरान उलेमा यानी इस्लाम
के विद्वानों को पॉलिटिकल पावर मिला। हालांकि आगा मोहम्मद खान के शासन के अलावा कजर एंपायर कुशासन की एक सदी के रूप में
जाना जाता है। इसी वंश के दौरान ईरान में तेल की खोज हुई। 198 में पहली बार व्यावसायिक रूप से एक्सप्लइटेबल पेट्रोलियम डिपॉजिट्स पाए गए और इसके साथ
ही इस क्षेत्र में सोवियत यूनियन और ब्रिटेन के बीच एक पावर प्ले की शुरुआत हुई। हालांकि ब्रिटेन ईरान में सभी तेल को नियंत्रित करने में सफल रहा और वर्ल्ड वॉर
वन के बाद यहां का पूरा तेल ब्रिटेन द्वारा एक्सप्लोर किया जा रहा था। दोस्तों कजर वंश का शासन 1921 में हुए एक तख्ता
पलट के साथ खत्म हुआ और इसी क्रम में 1925 में इरेनियन मिलिट्री ऑफिसर रिजा शाह द्वारा पहलवी डायनेस्टी की शुरुआत हुई।
पहलवी डायनेस्टी ईरान का अंतिम शाही राजवंश था। जिसने 1925 से 1979 के बीच 54 वर्षों तक शासन किया। इस शासन के तहत
इरेनियन स्टेट का आधिकारिक नाम इंपीरियल स्टेट ऑफ परर्शिया था। इसके अलावा 1935 में रिजा शाह ने इस क्षेत्र को परर्शिया के बदले ईरान नाम से संबोधित करने को कहा।
सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान रिजा शाह और ब्रिटेन के बीच संबंध बिगड़ने लगे और 1941 में ईरान के एंग्लो सोवियत आक्रमण के बाद एलाइड राष्ट्रों द्वारा रिजा शाह को गद्दी
छोड़ने पर मजबूर किया जाने लगा। उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके 21 वर्षीय बेटे मोहम्मद रिजा पहलवी इस डायनेस्टी के अंतिम शाह बने। मोहम्मद रिजा के शासन के
दौरान देश में डेमोक्रेसी को बढ़ावा मिला और इसी क्रम में 1951 के इलेक्शंस के तहत मोहम्मद मोसादेग को देश का प्राइम मिनिस्टर चुना गया। मोसादेग ने ईरान में
मौजूद सभी ऑयल रिसोर्सेज को नेशनलाइज कर दिया और इस वजह से यहां पर ब्रिटेन की मोनोपोली खतरे में पड़ गई। इसी कारण 1953 में ईरानी तख्ता पलट के तहत उन्हें पीएम
के पद से हटा दिया गया जो कि एक एंग्लो अमेरिकन सीक्रेट ऑपरेशन था। इस घटना के बाद शाह मोहम्मद रिजा पहलवी ने पावर को अपने हाथों में कंसंट्रेट करना शुरू कर
दिया और लगभग एक दशक तक अमेरिका और कुछ अन्य विदेशी सरकारों के साथ घनिष्ठ संबंधों में रहा। 1963 में मोहम्मद रेजा ने ईरान में रिफॉर्म लाना शुरू किया जिसे
वाइट रेवोल्यूशन के नाम से जाना जाता है। इन रिफॉर्म से देश मॉडर्नाइज होने लगा जिसके परिणाम स्वरूप आने वाले दशक में हाई एजुकेशन ग्रोथ, हाई इकोनमिक ग्रोथ और
रैपिड अर्बनाइजेशन देखने को मिला। इन सब रिफॉर्म्स के कारण मोहम्मद रिजा की छवि वेस्टर्न कल्चर के प्रमोटर के रूप में विकसित होने लगी। अयतुल्लाह रोह्ला खुमैनी
एक कट्टरपंथी मुस्लिम मौलवी शाह के रिफॉर्म से खुश नहीं थे और इसके विरोध में सार्वजनिक रूप से उनकी निंदा कर रहे थे। इस कार्य के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया
और 1964 में जब उन्होंने माफी मांगने से इंकार किया तो अंततः उन्हें देश निकाला दे दिया गया। इसके उपरांत 1973 में तेल की
बढ़ती कीमतों के कारण देश में इकोनॉमिक रिसेशन की स्थिति बन गई। जिसके कारण महंगाई दर बढ़ने लगी और बेरोजगारी दर में
भी वृद्धि हुई। 1970 के दशक के अंत तक कई लोगों ने शाह के शासन का विरोध करना शुरू कर दिया। इन प्रदर्शनों के बाद मोहम्मद
रिजा अमेरिका भाग गए और इसी दौरान फरवरी 1979 को फ्रांस में निर्वासित जीवन बिता रहे धार्मिक नेता आया खुैनी वापस लौटे और
इरेनियन रेवोल्यूशन का नेतृत्व किया। जिसने तत्कालीन शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया और ईरान के साथ-साथ मिडिल ईस्ट की दशा और दिशा बदल दी। इसके साथ ही क्रांति
के बाद से आया खुमेनी ईरान के सबसे बड़े नेता बन गए। आइए एक नजर डालते हैं ईरान की राजनैतिक व्यवस्था पर। पिटी ऑफ ईरान।
ईरान इस्लामिक रिपब्लिक की राजनीतिक व्यवस्था 1979 के संविधान पर आधारित है। 1979 में शाह मोहम्मद रजा पहलवी और उसके
वेस्टर्न सेुलर पॉलिसी को ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशन द्वारा उखाड़ फेंका गया और इसके साथ ही यहां की हजारों वर्ष पुरानी मोनकी की जगह पर एक थियोक्रेटिक
रिपब्लिक की स्थापना हुई। जनमत संग्रह यानी कि रेफरेंडम द्वारा अपनाया गया। इसका संविधान एग्जीक्यूटिव, लेजिसलेटिव और जुडिशरी के बीच सेपरेशन ऑफ पावर्स का
उपयोग करता है। ईरान का संविधान दो बुनियादों पर आधारित है। एक रिपब्लिकन यानी कि गणतांत्रिक और दूसरा रिलीजियस
यानी कि धार्मिक। देश का प्रमुख एक शिया मौलवी होता है जिसे इस्लामिक रेवोल्यूशन के सुप्रीम लीडर के रूप में जाना जाता है और असेंबली एक्सपर्ट्स द्वारा नियुक्त
किया जाता है। देश की पार्लियामेंट और प्रेसिडेंट दोनों ही लोगों द्वारा चुने जाते हैं। इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना के बाद से केवल दो सुप्रीम लीडर्स रहे
हैं। जिनमें पहले लीडर आयातुल्ला रुल्लाह खुमैनी 1979 से 1989 तक सत्ता में थे। वर्तमान सुप्रीम लीडर अली खमेनी 1989 से
सत्ता में हैं और ना केवल सभी राजनीतिक मुद्दों पर फैसला करते हैं बल्कि मिलिट्री, जुडिशरी, गार्डियन काउंसिल और स्टेट मीडिया को भी नियंत्रित करते हैं।
इसके अलावा उन्हें सीधे सरकार और न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप करने का अधिकार भी है। अगर हम चुनाव की बात करें तो ईरान में राष्ट्रीय स्तर पर हेड ऑफ
गवर्नमेंट यानी कि प्रेसिडेंट, लेजिस्लेचर यानी कि मजलिस और एक्सपर्ट असेंबली के चुनाव होते हैं। जनवरी 2007 तक वोटिंग एज
महज 15 वर्ष की थी जो विश्व स्तर पर सबसे कम थी। 2007 में वोटिंग एज को 15 से बढ़ाकर 18 वर्ष किया गया। असेंबली ऑफ
एक्सपर्ट्स कुल 88 मुश्तहीदों का एक निकाय है। इसके सदस्यों को 8 साल के लिए डायरेक्ट पब्लिक वोटिंग द्वारा चुना जाता है। इस सभा के कर्तव्य ईरान के सुप्रीम
लीडर का चुनाव करना या उसे हटाना होता है। सुप्रीम लीडर के बाद प्रेसिडेंट ईरान के दूसरे सर्वोच्च पद का अधिकारी है। राष्ट्रपति को नागरिकों द्वारा 4 साल के
कार्यकाल के लिए चुना जाता है। संसद द्वारा शपथ लेने से पहले राष्ट्रपति को सुप्रीम लीडर की आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। इसके
साथ ही यदि प्रेसिडेंट को संसद द्वारा इंपीच किया जाए या फिर वह दोषी पाया जाए तो सुप्रीम लीडर के पास निर्वाचित प्रेसिडेंट को खारिज करने की शक्ति भी
होती है। इस प्रकार सरकार का पूर्ण नियंत्रण सुप्रीम लीडर के पास होता है। वर्तमान में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राईसी हैं। जिन्होंने 2021 के राष्ट्रपति
चुनाव के बाद पदभार ग्रहण किया था। दोस्तों ईरान के प्रधानमंत्री का कार्यालय 196 में स्थापित किया गया था और 1989 तक अस्तित्व में रहा। कॉन्स्टिट्यूशनल
रेफरेंडम के बाद पीएम के कार्यालय को समाप्त कर दिया गया। मोशीर अलदौले ईरान के पहले और मीर हुसैन मौसवी अंतिम
प्रधानमंत्री थे। अगर हम जुडिशरी की बात करें तो यहां की जुडिशरी में एक सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल और लोअर कोर्ट्स शामिल हैं। सुप्रीम लीडर देश की
जुडिशरी के प्रमुख की नियुक्ति करता है। चीफ जस्टिस और प्रोसकटर जनरल को शिया कानून का स्पेशलिस्ट होना अनिवार्य है। जिन्होंने मुजतहिद का दर्जा प्राप्त किया
हो। 1979 के संविधान के तहत सभी जजेस को शरिया कानून पर आधारित फैसले करने होते हैं। ईरान आईएईए, G15, आईएमओ, इंटरपोल,
ओपेक, WHO सहित दर्जनों इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस का सदस्य है। वर्तमान में ईरान को वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में ऑब्जर्वर कंट्री का दर्जा प्राप्त है।
इसके साथ ही 2022 में ईरान शघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन का पूर्ण सदस्य बन चुका है। आइए अब देखते हैं यहां की अर्थव्यवस्था को।
इकॉनमी ऑफ ईरान। एक बड़े स्टेट ओड सेक्टर के साथ ईरान की अर्थव्यवस्था एक मिश्रित यानी कि मिक्स्ड इकॉनमी के रूप में जानी जाती है। परचेसिंग पावर पैरिटी के आधार पर
ईरान दुनिया का 21 सबसे बड़ा देश है। दुनिया के 10% और थर्ड लार्जेस्ट तेल भंडार और 15% और सेकंड लार्जेस्ट नेचुरल
गैस भंडार के साथ यह देश एनर्जी सुपर पावर माना जाता है। यहां की करेंसी को इरेनियन रियाल के रूप में जाना जाता है। 1979 से
पहले ईरान का आर्थिक विकास तेजी से हुआ था। परंपरागत रूप से एक कृषि प्रधान समाज में 1970 के दशक तक महत्वपूर्ण औद्योगीकरण
और आर्थिक आधुनिकीकरण हुए। हालांकि 1978 के दौरान ईरान रेवोल्यूशन के कारण विकास की यह गति काफी धीमी हो गई। 1979 में रेवोल्यूशन के खत्म होते ही ईरान की सरकार
ने चार सुधार यानी कि रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस किया। सबसे पहले सभी ईरानी बैंक्स सहित सभी इंडस्ट्रीज का नेशनलाइजेशन किया गया जिसमें एनआईओसी यानी
कि नेशनल इरेनियन ऑयल कंपनी भी शामिल थी। इसके साथ ही नए संविधान ने इकॉनमी को स्टेट, कोऑपरेटिव और प्राइवेट के रूप में तीन अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया।
जिसमें अधिकांश स्टेट ओनड बिजनेसेस शामिल हैं। इसके अलावा सरकार ने इकॉनमी को कंट्रोल करने के लिए सेंट्रल प्लानिंग का उपयोग करना शुरू किया और साथ ही कीमतों और
सब्सिडी को निर्धारित करने का नियंत्रण ले लिया। और इस प्रकार 1979 के बाद से ईरान का लॉन्ग टर्म ऑब्जेक्टिव इकोनॉमिक फ्रीडम, फुल एंप्लॉयमेंट और अपने सिटीजंस
के लिए एक कंफर्टेबल स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग प्रदान करना था। लेकिन 20th सेंचुरी के अंत में देश की आर्थिक स्थिति को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। 20 सालों की
अवधि में ईरान की जनसंख्या दोगुनी से अधिक हो गई। जिसमें यंग पॉपुलेशन तेजी से बढ़ रही है। हालांकि आबादी का एक बड़ा हिस्सा खेती से जुड़ा रहा। लेकिन 1960 के दशक के
बाद एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन में लगातार गिरावट आई। 1990 के दशक के अंत तक ईरान एक प्रमुख फूड इंपोर्टर बन चुका था और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक कठिनाइयों ने
बड़ी संख्या में लोगों को शहरों की ओर पलायन करने के लिए प्रेरित किया। 1979 में हुए रिफॉर्म्स और नेशनलाइजेशन और इसके साथ
ईरान इराक युद्ध की वजह से ईरान की 80% से अधिक अर्थव्यवस्था सरकार के नियंत्रण में आ गई। सरकार ने देश की टेलीकम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्ट मैन्युफैक्चरिंग हेल्थ
केयर, एजुकेशन और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की कोशिश की और इसके साथ ही पड़ोसी देशों के साथ अपने ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन को इंटीग्रेट करने की प्रक्रिया भी शुरू की।
यहां के मुख्य इंडस्ट्रीज में पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल्स फर्टिलाइज़र्स इलेक्ट्रॉनिक्स पावर टेलीकॉम कंस्ट्रक्शन मटेरियल, वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्शन इत्यादि शामिल हैं। दोस्तों,
ईरान की अर्थव्यवस्था की एक अनूठी विशेषता बोनया्स नामक एक बड़ी धार्मिक नीव की उपस्थिति भी है। बोनियाद्स ईरान में एक चैरिटेबल ट्रस्ट है जो देश के नॉन
पेट्रोलियम इकॉनमी में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं और ईरान के जीडीपी का लगभग 20% नियंत्रित करते हैं। तो दोस्तों आज हमने ईरान के बारे में कई तथ्यों को जाना। अगर
आप भी इस देश से जुड़े ऐसे कोई तथ्य जानते हैं तो नीचे कमेंट सेक्शन में हमारे साथ साझा जरूर करें। स्टडी आईक्यू आईएएस आपका सिलेक्शन [संगीत]
हमारा मिशन।
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