दो आलसी | Do aalsi ki kahani | Do aalsi | Hindi Kahaniya | dadi maa ki kahaniya
By Kidda TV
Summary
Topics Covered
- आम टपका, पर आलसियों ने मुंह में डालने की भी जहमत नहीं उठाई।
- दूसरा आलसी: कुत्ता मुँह चाट रहा है, उठ नहीं सकता।
- आलस्य की पराकाष्ठा: भगवान भी मदद नहीं करता।
Full Transcript
सुनो कहानी दो आलसी गर्मी के दिन थे और दोपहर का समय दो आदमी सुभा सुभा आय और आम के पेड़ के नीचे सो गए दो पत्तों से चणचण करून पर पड़ रही थी फिर भी वे नहीं उठे जहां थे वहीं पड़े रही दोनों के बीच में एक पका आम टपका सुनेल दोस्त जरा यह आम उठा कर मेरे मुँ में डाल दू देखूं तो कैसा है
दूसरे ने कहा अरे कैसे उठूं कुत्ता मेरा मुँ चाट रहा है पहले तुम इसे हटा दू उधर से एक उठ वाला जा रहा था पहले आलसी ने पुकारा ओ उठ वाले भाई जरा इधर आना उठ वाल पूछा क्या है अरे भाई यह आम उठाकर मेरे मुह में डाल दो अच्छा इसी के लिए तुमने मुझे इतनी दूर से बुलाया था बगल में पड़ा आम भी तुमसे
उठाया नहीं जाता बड़े आलसी जान पड़ते हूं आलसी की मदद तो भगवान भी नहीं करता और तुम जो इतनी दूर आकर भी इतना छोटा सा काम नहीं कर सकते। पहला आलसी भूला। उठ वाले ने कहा, जो हाथ पैर नहीं हिलाता, उसका भला भगवान भी नहीं करता। यह कहकर उठ वाला चला गया। आम दोनों के बेज बड़ा रहा। दोनों आलसी किसी का इंतजार करते रह
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