Exclusive Podcast: Noida's Top Realtors & Influencers Discuss the Future of Delhi NCR
By Real Estate with Manuj Gakhar
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Topics Covered
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Full Transcript
शुरुआत होती है 1947 से जब देश आजाद दिल्ली कैपिटल है हिंदुस्तान की कैपिटल होने के वजह से ना इसके आसपास जो शहर है वो भी बच रहे थे तो ये शुरुआत हुई है 1976
में नोएडा की कौन से बिल्डर पे विश्वास करना चाहिए और कौन से नहीं आज की डेट में इन्फ्लुएंसरर बेस रियलस्टेट मार्केटिंग हो गई है
देखो मार्केट इज ओपन फॉर ऑल चाहे वो मैं हूं मेरे से बड़ा हो मेरे से छोटा हो मार्केट में समझदार लोग और नासमझ लोग हर
तरह के लोग हैं। समझदारी आपको दिखानी है। पैसा आप डाल दो। हमारा काम है आपको अच्छे प्रोडक्ट सजेस्ट करना। उसकी क्रेडिट वनेस कैसी है?
राइट?
क्या वो फेक बिल्डर तो नहीं है। कहीं उस ट्रैप में मेरा क्लाइंट तो ना फंस जाए। सर आज मार्केट का ट्रेंड किधर है? इन
मार्केट्स में क्या चल रहा है? थोड़ा सा
उसे ब्रीफ करिए जो हमारे व्यूअर्स ढंग से समझ पाए। मार्केट अप फिर से आज से 5 साल पहले जो कॉर्पोरेट्स आते थे उनकी जब की थिंकिंग और आज जो कॉर्पोरेट आ
रहा है उसकी थिंकिंग में क्या फर्क आ रहा है दुबई में शेख जाग और आजकल सबकी नजर है हमारे एक्सप्रेसवे पे तो मैं हर किसी क्लाइंट को ये बोलता हूं तीन चीज देख ली खत्म कर दो अब अगर सर
कॉर्पोरेट टीचिंग में तीन बिल्डिंग देख ली खत कर दो खत्म एक बार को मैं जेन्युइन इसलिए बोल रहा हूं उस चीज को उस लेवल की अमुनिटीज फैसिलिटीज उस चीज को जस्टिफाई भी करेंगे जो डेवलपर्स आज तक लैंड लेके आए 22
में है 22 में चाहे वो एस है वो गौर है चाहे वो पूर्वांचल है वो एलडीगो है प्रॉब्लम क्या है आज अच्छे डेवलपर्स आ चुके हैं ये प्रॉब्लम नहीं है ये नोएडा मार्केट के लिए अच्छी बात है 2700 करोड़
की इन्वेंटरी उनकी बिकी है जो एस पर मैक्स वो बता रहे हैं वर्ल्ड का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नोएडा के अंदर है।
तो हमें एक चीज बहुत बड़ी फील हुई कि यहां एक बहुत बड़ा गैप है। थोड़ा प्रोफेशनलिज्म भी कम है और पुल भी कम है क्लाइंट्स का क्योंकि जो लोकल्स हैं उनके लिए वो रेट
बहुत ज्यादा है। बियों्ड्स हेडलाइन विद मनोज गक्खर। नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम मनोज गक्खर है और आज हम जो कंटेंट लेकर आए हैं, यह है
रियल स्टेट, गुड़गांव, नोएडा और गाजियाबाद का लाइव ट्रेंड। क्या चल रहा है मार्केट में? रियल स्टेट इंडस्ट्री में आपको क्या
में? रियल स्टेट इंडस्ट्री में आपको क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं। और आज हमारे पास इंडस्ट्री के बड़े-बड़े एक्सपर्ट हैं जिनको 30 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस
है। लेट्स वेलकम मिस्टर सुनील वर्मा जी फ्रॉम रेड रियलिटी। वेलकम सर टू आवर पडकास्ट। हमारे दूसरे गेस्ट हैं फॉर्च्यून
न स्टेट मिस्टर तरुण इन्वेस्टर मोनोपोली जो एक बहुत बड़ा नाम है नोएडा इनफ्लुएंसरर है मिस्टर मनीष तोमर
जी रियलिटी [संगीत] चिराग से मिस्टर चिराग कपूर जी एंड फॉर्च्यून 9 से तुषार जी
वेलकम गेस्ट टू आवर पडकास्ट आज का यह ट्रेंडिंग पडकास्ट मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हम सब रियलस्टेट इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं और हमारे क्लाइंट्स की एक
[संगीत] नीड होती है कि मार्केट में क्या स्थिति है। एक्चुअल पोजीशन उन्हें नहीं पता चलती। एक इन्फ्लुएंसरर कहता है कि
मार्केट ऐसी है। दूसरा कहता है दूसरी बात। आज हम अपने दर्शकों के लिए ले आए हैं। यह पडकास्ट जिसमें हम रियल स्टेट से जुड़ी
हुई सारी बातें रखेंगे। हमारे रियलिटी एक्सपर्ट क्या ट्रेंड है रियलस्टेट मार्केट का और कौन से बिल्डर पर विश्वास करना चाहिए और कौन से नहीं। इन सारे
मुद्दों पर हम बात करेंगे। लेट्स स्टार्ट आवर पडकास्ट। सबसे पहला क्वेश्चन तरुण जी आपसे है। आज की डेट में इनफ्लुएंसरर बेस
रियलस्टेट मार्केटिंग हो गई है और ज्यादातर लोग उसी को बेस बनाकर इन्वेस्टमेंट करते हैं। एक रियलस्टेट
कंसलटेंट और इन्फ्लुएंसरर की क्या दायित्व है एक क्लाइंट के प्रति?
देखो मार्केट इज ओपन फॉर ऑल। चाहे वो मैं हूं। मेरे से बड़ा हो, मेरे से छोटा हो। मेरा एक मानना है सिंपल सा। कि सुनो सबकी
लाइक मेरी रील चलेगी तो उसके बाद दूसरी भी आएगी वो एल्गोरिदम है चलता रहता है मेरी देखेगा उसको दूसरी की भी दिखेगी नाउ द बेस्ट पार्ट इज कि जैसे चिराग भाई हैं
हम लोग हैं वी हैव अ टीम हम कोई ये नहीं कि कुछ चीज समझ आई उसकी रील बना दी वी गो इन डेप्थ अंडरस्टैंड द मार्केट
देन सेकंडली अब जो कनेक्ट करते हैं लोग हमसे उनका का यह मानना है कि वी आर एक्सपर्ट्स। हम नहीं कहते वी आर एक्सपर्ट्स। एक्सपर्ट्स कौन होते हैं? आपने मेरे को
कॉल किया। आपने मेरे से मेरी कंसल्टेशन ली। मेरा पीओवी लिया कि आप ये प्रोडक्ट देख रहे हो। आपको ये प्रोडक्ट देखना चाहिए या नहीं देखना चाहिए या मेरे पास जो ऑप्शंस हैं, मैं अपने
ऑप्शंस बताऊंगा। नाउ इट्स योर डिसीजन कि व्हाट यू शुड बाय, व्हाट यू शुड गो फॉर?
आपको मेरी बात अच्छी लगी तो आप सुनो। नहीं लगी तो यू हैव मल्टीपल ऑप्शंस विद यू। तो इन सिंपल वर्ड्स मैं यही कहूंगा कि
मार्केट में समझदार लोग और नासमझ लोग हर तरह के लोग हैं। समझदारी आपको दिखानी है। पैसा आप डाल रहे हो। हमारा काम है आपको
अच्छे प्रोडक्ट सजेस्ट करना। बिल्कुल। यही पॉइंट मैं बताना चाह रहा हूं कि देखिए आजकल ट्रेंड हो गया है कि हर आदमी एक रियलस्टेट की वीडियो बनाता है और हर आदमी
जो रियल स्टेट में है वो चाहता है कि मैं सोशल उसे एक्टिव हूं और इस काम को करूं मगर अच्छे इन्फ्लुएंसरर वही हैं जो आपने बताया एक पॉइंट कि डेप्ट में आप उसकी डेप्थ में जाते हो
चीज को समझते हो रिसर्च करते हो एक तरीके से पहले आप ये देखते हो ये प्रोडक्ट लेने लायक है कोई मेरी तरफ से गलत ना जाए पिच करने लायक है या नहीं पिच करने लायक है कि उसकी क्रेडिट वनेस कैसी है?
राइट?
क्या वो फेक बिल्डर तो नहीं है। कहीं उस ट्रैप में मेरा क्लाइंट तो ना फंस जाए?
पर अगेन मैं वही कह रहा हूं कि सुनो आप सबकी मेरी भी सुनो। चिराग भाई है। मल्टीपल रियल्टर्स हैं। इंटरनेट का जमाना है। जी। चैट जीपीटी का जमाना है। जी।
आप गाड़ी लेते हो, सोना लेते हो, मल्टीपल चीजें बाय करते हो, अपने हार्ड एंड मनी लगाते हो तो इट्स योर ड्यूटी
टू डू दी ड्यू डेलिजेंस। आप अपना पैसा डाल रहे हो, हार्डन मनी डाल रहे हो। आपको एक इंसान पर भरोसा करके आंख बंद करके नहीं काम करना चाहिए। आज की डेट में तो मल्टीपल
ऑप्शंस हैं आपके पास। तो यू शुड ट्राई मोर। लर्न मोर। नॉट जस्ट ट्राई मोर। यू शुड लर्न मोर। मेरे पास सुबह [गला साफ़ करने की आवाज़] शाम क्वेरीज आती हैं। जी।
मैं आपका कंटेंट फॉलो भी करता हूं। आप बहुत अच्छा एक एक्सप्लेन करते हो। कंटेंट को और कंटेंट राइटिंग होती है ना बेसिकली। पहले आप उसे समझते हो। ऐसे नहीं हम मैं भी बनाता हूं। मैं
नहीं देखता कुछ भी और बना देता हूं। रील मेरा ही है। मगर आपका बड़ा सोचा समझा और एक बहुत अच्छी तरीके से आप गाइड कर रहे हो। उसका सिंपल सा रीज़न [गला साफ़ करने की आवाज़] है। हमने जब
स्टार्ट किया था हमारा एक मोटिव था। वी बोथ वर लाइक हम बिनेस फैमिली से बिलोंग करते हैं। तो शुरू सेठ से बिलोंग मेरठ से। शुरू से एक माइंडसेट मेरठ से।
हां शुरू से माइंडसेट था कि भाई क्लीन काम करना है, अच्छा काम करना है, स्ट्रेस ना लेना है ना देना है। तो स्टार्ट विद व्हाई एक हमारी लाइन है। हम कहते हैं स्टार्ट विद व्हाई। व्हाटएवर वी स्टार्ट पहले हम सोचते हैं इसका व्हाई
क्या है? व्हाई आई वांट टू मेक दिस रील
क्या है? व्हाई आई वांट टू मेक दिस रील व्हाई आई वांट टू पिच दिस प्रोडक्ट व्हाई आई वांट टू कैटर दिस लाइन। तो मल्टीपल लोग आते हैं और पूछते हैं वो हमसे पूछ के चले जाते हैं ले किसी और से लेते अच्छी बात ये
है तरुण तुषार आप ना हम सब में सबसे यंग हो और हमें ना बड़ी खुशी होती है कि आप इतना अच्छा काम कर रहे हो मार्केट में हम भी देखते हैं क्योंकि हम एक दूसरे से कनेक्टेड हैं
आज हम बैठे हैं एक हमारी वाइफ सेम है और हम एक दूसरे से कनेक्टेड है और हम ये भी चाहते हैं कि व्यूअर्स को जो पॉइंट जाए ना वो वेरीिफाइड जाए मगर सोशल मीडिया की
दिक्कत क्या है वो वेरीिफाइड नहीं जाती कुछ भी जा रहा है कंटेंट तो भैया आप देखो ना सुबह शाम बहुत बन रहा है। आप आप हो इंडिविजुअल एज अ इंडिविजुअल आप क्या देख रहे हो? आप किसको
सुन रहे हो और आपकी प्लानिंग क्या है?
आपका फोकस खुद का इंडिविजुअल का बहुत जरूरी है। खाली सुनने से करने से नहीं होगा। मतलब मेरा कहना ये है। बहुत बढ़िया। सर अब आपसे लेते हैं। सबसे ज्यादा
एक्सपीरियंस आपका है। 32 इयर्स का आपका एक्सपीरियंस है दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा। और आप हम सब में कॉर्पोरेट लीजिंग में एक्सपर्ट हैं। आपने कॉर्पोरेट्स के साथ
इतनी लीजिंग करी है। मेरे को मैंने आपके साथ काम करा है। रेड रियलिटी अल्फाम में आपका ऑफिस है। सर आज मार्केट का ट्रेंड किधर तरफ किधर है? इन मार्केट्स में क्या
चल रहा है? थोड़ा सा उसे ब्रीफ करिए जो हमारे व्यूअर्स ढंग से समझ पाए। मार्केट का ट्रेंड मार्केट अप उस पे है और काफी ज्यादा कॉर्पोरेट्स पहले मेन हब गुड़गांव था। हम
हम अब ज्यादातर जो ट्रेंड है वो वहां से कॉर्पोरेट उठ उठ के एयरपोर्ट से हमारा स्टार्ट हो गया एयरपोर्ट से तो नोएडा के अंदर इस समय ये ऊंचाई की तरफ जा रहा है
हम हम और काफी अच्छी कंपनीज़ आ रही है लॉजिस्टिक्स आ रहे हैं आईटी आ रहा है और बढ़िया एयरपोर्ट अब आया है नोएडा में आज से 5 साल
पहले जो कॉर्पोरेट्स आते थे उनकी जब की थिंकिंग और आज जो कॉर्पोरेट आ रहा है उसकी थिंकिंग में क्या फर्क आ रहा है नोएडा का इंफ्रा थोड़ा बड़ा अच्छा है। मतलब मेरे को अब मैं ज्यादातर नोएडा कर
रहा हूं। नोएडा का इंफ्रा अच्छा है। तो पहले उतना नहीं था। अब जो जैसे-जैसे फैसिलिटीज बढ़ती जा रही है तो उस हिसाब से ये आ रहा है। जो कंपनीज़ आ रही हैं सर डाटा सेंटर्स आ
रहे हैं। ठीक है? और जो सेक्टर 140 है जहां पर सारे कॉर्पोरेट्स हैं, सेक्टर 90 हैं। जहां पर बड़े-बड़े बिल्कुल बिल्डिंग्स ऐसी हैं जैसे हमारी फॉरेन्स में होती हैं। फॉरेन में जो होती है उनकी
उस जस्ट लाइक दैट हो रहा है। तो हर कॉर्पोरेट बिल्डिंग ऐसी है कि एंटीिक पीस होता है। जैसे शेख जायद रोड से हम कंपेयर करते हैं। दुबई में शेख जायद रोड और आजकल
सबकी नजर है हमारे एक्सप्रेसवे पे। यही है। चिराग भाई आपका क्या व्यू है? आप
एक्सप्रेसवे को बहुत ज्यादा प्रमोट करते हो। तरुण भैया ने जो बात बोली कि सुनो सबकी करो अपने दिल की मैं कहता हूं कि जो मेरे पास आ रहा है ना वो मेरे पास टाइम स्पेंड करे मैं कहता हूं कि वो तीन जगह चूज़ कर ले कि तीन जगह मैं
तरुण भाई से बात कर रहा हूं रियलिटी चिराग से बात कर रहा हूं या एक तीसरे बंदे से बात कर रहा हूं तो मैं हर किसी क्लाइंट को ये बोलता हूं तीन चीज देख ली खत्म कर दो अब अगर सर कॉर्पोरेट टीसिंग में तीन बिल्डिंग देख ली खत कर दो खत्म क्योंकि आप
10 ऑप्शन देखते हो 15 ऑप्शन देखते हो आप कंफ्यूज की तरफ जा रहे हो कंफ्यूजन बढ़ जाएगा फर्स्ट ऑफ ऑल तो सर आपकी एक्सपर्टीज यही है ये भी मैं देखता हूं तीन क्वेश्चन हम पहले ही प्रोफाइलिंग कर लेते हैं कि 30 ना दिखा के तीन उसके लिए सेलेक्ट कर लेते
हैं। कस्टमर का पेट नहीं भरता ना। कस्टमर का मन कहीं ना कहीं तो उसको रोकना है ना। वो कहता है कि मुझे यह भी देख लिया। अब इसके दो उसको लगता है मैं ₹12 करोड़ खर्च कर रहा हूं। ये बहुत बड़ा अमाउंट है।
तो मुझे बहुत कुछ चीजें देखनी है। मैं कहता हूं इसको पहले छोटा समझो। ये इसमें ना इस चीज में ना आप लाइफ में और बहुत बड़ी चीजें करोगे। आप भी 11 साल 12 साल हो गए काम कर रहे हो मार्केट में। हमें भी 20 साल हो गए। तो यह
इस पॉइंट में मैं कहूंगा आज ना हम सबके साथ जो सबसे बड़ा मुद्दा आ रहा है जो यंगस्टर होते थे पहले क्या होता था नोएडा में ₹ लाख का प्रोडक्ट आ जाता था हम तो उसके लिए क्या होता था वो ₹ लाख लाता
था सर और ₹ लाख का लोन हो जाता था दो मिनट में और उनकी सैलरी पैकेज उस टाइम 70800 लाख की सैलरी होती थी आज सैलरी तो इतनी बड़ी नहीं लाख की ₹15 लाख ज्यादा से ज्यादा ₹ लाख मगर प्रोडक्ट जो हमारा
रेजिडेंशियल है वो ₹ करोड़ का हो गया तो उसमें क्या दिक्कत आती है कि जो ₹ लाख का डालना है या ₹1 करोड़ फंडिंग डालनी है ना
उसे क्योंकि एक करोड़ लोन होगा ₹ करोड़ की सैलरी ₹ लाख महीने की सैलरी पे तो लाख की किस्त होगी तो वो जो हमारा बेसिक क्लाइंट है एवरेज क्लाइंट है वो वहां सफर कर रहा है
कि प्रॉपर्टी वैल्यू ज्यादा बढ़ गई आप ये कहना चाह रहे हो ना ये कहना चाह रहा हूं देखो प्रॉपर्टी वैल्यू ना एक लेवल पे लेके आनी भी चाहिए आज बिल्डरों ने रेट कर दिया ₹10 स्क्वायर फुट का यम एक्सप्रेसवे का ठीक है जेन्युइन है एक बार को मैं जेन्युइन इसलिए बोल रहा हूं उस चीज को वो
उस लेवल की अमुनिटीज फैसिलिटीज उस चीज़ को जस्ट जस्टिफाई भी करेंगे जो डेवलपर्स आज तक लैंड लेके आए हैं सेक्टर 22 ए में 22 में चाहे वो एस है वो गौर है चाहे वो पूर्वांचल है वो एलडी को है मतलब वो जो
डिलीवर करेंगे ना वो ठीक है वो कमाएंगे भी चीजें वगैरह अच्छी डिलीवर भी करेंगे मगर मगर चिराग भाई हम एक चीज को ऐसे करते हैं आज 10,000 का रेट है ठीक है वो हमें
माय वन दे रहा है कॉनंक्रीट दे रहा है और अगर हम 12 साल पीछे जाते हैं या 15 साल पीछे जाते हैं वो वो कंस्ट्रक्शन थी मनीष भाई कौन सी कंस्ट्रक्शन थी ब्रिक्स की कंस्ट्रक्शन थी और वो उन बिल्डिंगों की
क्या हालत है आप भी देख सकते हो और हम भी देख सकते हैं। क्या है आज ₹10,000 में जो दे रहा है जो वो 3000 में प्रोडक्ट दे रहा था तो फर्क 10 12 साल में मैं वही
कंटिन्यू कर रहा हूं कि 10 12 साल में जो चीजें हैं रेट का इनफ्लेशन का करके वही है सारी चीजें। सर प्रॉब्लम क्या है ना आज लाल भट्टे वाली ईंट से आप कोई कंस्ट्रक्शन कर रहे हो। आपको 30 मंजिल की बिल्डिंग बनानी है। वो
तीन चार साल में डिलीवर हो ही नहीं सकती। नहीं हो सकती। उसको पूरा एक दीवार खड़ी होगी। फिर आप तराई करोगे। ठीक है? फिर सीमेंट उस पे सारा वो फिर ऊपर लिंटेड डलेगा। सर वो काम होगा तो फिर 10 साल लग जाएंगे। क्वालिटी भी तो नहीं है ना?
क्वालिटी नहीं आएगी। आज जितना मेट्रो का काम है या जितने भी बड़ी-बड़ी चीजें बनी हैं आज की डेट में जो दिन रात काम होते हैं हमें पता नहीं लगता अगले दिन वो फ्लाईओवर निकल जाता है वहां से। जी नोएडा के अंदर तो आप जाओ ना जंगल में रोड है
नोएडा में तो यमन एक्सप्रेस पे ऐसी रोड है जो गोलफोर एक्सटेंशन रोड पे रोड नहीं है मतलब उबड़ खाबड़ रोड है मैं नाम नहीं लूंगा अल्टीमेटली 10-10 करोड़ के फ्लैट है बट उबड़ खाबड़ रोड है तो वो वहां इसलिए बाय कर रहे हैं क्योंकि उनकी कम्यूटिविटी
वहां पास पड़ती है मैं इस चीज के भी हित में हूं अगर आज कोई यमन एक्सप्रेस पे काम कर रहा है वो अपने ऑफिस से 5 सात मिनट की दूरी पे अपना घर ले लें क्योंकि ये जो ट्रैवलिंग टाइम होता है ना ये लाइफ का सबसे मेरे को हेट टाइम लगता है कि आप 2
घंटे ट्रेवल कर रहे हो 2 घंटा ट्रेवल करके फिर आप सुबह आ रहे हो रात जा रहे हो तो उसमें उसमें चांसेस बढ़ जाते हैं। आप कहीं गाड़ी की लगा दोगे कि मार दोगे या आप टाइम
आपकी बैक पेन हो जाएगी। आज नहीं 4 साल 5 साल बाद डाउन द लाइन। और दूसरी बात जो आपने मेन बात बोली रेट बढ़ने की प्रॉब्लम क्या है? आज अच्छे डेवलपर्स आ चुके हैं।
क्या है? आज अच्छे डेवलपर्स आ चुके हैं। ये प्रॉब्लम नहीं है। ये नोएडा मार्केट के लिए अच्छी बात है। अच्छे डेवलपर्स आ गए तो उन्होंने जो बिट लगानी शुरू करी ना अब जो बिट लग रही है। अब आप जितने छोटे-छोटे
डेवलपर्स जो पहले चलते थे आई विल नॉट टेक नेम। तो वो बिट लगा ही नहीं पाएंगे। उनको ₹300 400 करोड़ की लैंड वो लेंगे ही नहीं। 90 डेज का सारा है सारा काम पूरा करना पड़ेगा तो वो तो बहुत अच्छा हुआ हमारी
मार्केट जो है वो रिफाइन होती जा रही है तो जैसे बड़े-बड़े ब्रांड्स आ गए हैं आज फिल्म सी की एक्सper आ गया मैक्स आ गया ठीक है m3m बैक टू बैक लैंड ले रहा है तो है कुबत तो वो लैंड ले रहा है ना
स्मार्ट वर्ल्ड आ गया ठीक है मैक्स एक दो और लैंड लेगा अभी आपको दिखेंगे और डीएलएफ भी सुनने में जल्दी आएगा नोएडा में से मारेगा हाल फिलहाल में जो देखा है मैक्स स्टेट का
जो प्रोजेक्ट था 105 सेक्टर था कौन सा सेक्टर 128 एंड 105 जो में आया तो 10 करोड़ से लेके 30 करोड़ तक की इन्वेंटरी थी और कितनी जल्दी सोल्ड हुआ है
नोएडा की मार्केट में। 2700 करोड़ की इन्वेंटरी उनकी बिकी है जो एस पर मैक्स वो बता रहे हैं। बिल्कुल। अब सबसे हमारे पास पॉजिटिव साइन साइन इतने होते हैं नोएडा मार्केट के लिए।
अब देखो पहला हमारा सेक्टर 150 है जो स्पोर्ट सिटी कहलाता है। मनीष भाई आपसे एक क्वेश्चन है कि आज जहां ओसी नहीं आ रहे थे वहां सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस आई और अब
वहां ओसीसी और अब वहां पर नए प्रोजेक्ट्स भी ल्चेस पे लगातार आ रहे हैं और क्लाइंट कहता है कि रुक जाओ। जैसे आपके पास भी आता होगा कि भाई आप विजिट भी कराते होंगे।
क्लाइंट के कॉल भी आते हैं कि अभी रुक जाइए। मार्केट को थोड़ा क्लाइंट सोचता है स्टेबल हो रहा है। अभी गोदरेज का क्राउन आया और अभी एस का भी प्रोजेक्ट आ रहा है
150 में और प्रतीक ने भी जमीन ले ली है वहां पर तो इतना एक्सपेंशन और बिल्डर तो ल्च करे जा रहे हैं। तो क्या आप ट्रेंड को समझते हैं कि क्या कह रहा है आज का ट्रेंड?
शुरुआत होती है 1947 से जब देश आजाद हुआ है। ठीक है? दिल्ली कैपिटल है। इस हिंदुस्तान की। हां जी। हिंदुस्तान की कैपिटल होने के वजह से ना इसके आसपास आसपास के जो शहर है
वो भी बसने थे। तो ये शुरुआत हुई है 1976 में नोएडा की। ठीक है?
बिल्कुल। उसमें तो कुछ नहीं पता था कि ये नोएडा ऐसा भी बसेगा। ठीक है?
इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन बेसिकली इंडस्ट्रियल जो फुल फॉर्म है इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन आया। इंडस्ट्रियल एरिया था। बेसिकली पहले टेक्सटाइल आया। है ना? तो स्लोली गराज जैसे नोएडा में अगर
है ना? तो स्लोली गराज जैसे नोएडा में अगर देखोगे तो सेक्टर एक से लेके सेक्टर 11 तक ये पूरा मैन्युफैक्चरिंग हब्स हैं। जी और मैं वो स्टोरी बता रहा हूं जो मैं बचपन
से रहा हूं। पला पड़ा हूं मैं। मैं सेक्टर बीच में रहता था वहीं पला पड़ा हूं। तो मैंने वो वो जर्नी देखी अपनी तो वो इंडस्ट्रियल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर था। आसपास रहने की जगह थी। आपको जो शहर नए
रिक्से जो शहर हैं वो ऐसे रखने रखने पड़ेंगे। टाउन प्लानिंग ऐसी होनी चाहिए जो नए शहर है वही टाउन प्लानिंग हो सकती है। पहली चीज तो यह है। तो 76 में जब टाउन
प्लानिंग की गई इसकी तो कमर्शियल इंडस्ट्रियल स्कूल सब कुछ नियर बाय था। ठीक है? अब शहर ग्रो भी होना है, बढ़ना भी है। तो सबसे पहले
शुरुआत की गई 1996 में ग्रेटर नोएडा की। ₹800 मीटर की अलॉटमेंट थी। ₹800 मीटर की अलॉटमेंट है। उसके बाद नोएडा एक्सटेंशन
आया। 2010 के अंदर फिर 12 में वह रुक गया। कंपनसेशन के के लिए लिटिगेशन डाल दिया। सुप्रीम कोर्ट को इंटरवीन करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने फाइनली 65% मुआवजा
बढ़ाया। 10% लैंड दी किसानों को और फिर ये एरिया डेवलप हुआ। फिर आया आपका यमुना एक्सप्रेसवे 101 के आसपास। जी।
यमुना। अभी वो जो पूरी कंसोलिडेशन हो रही है पूरी मार्केट की वो अभी भी पूरी नहीं हुई है। अभी भी मार्केट में और रिक्वायरमेंट है। अगर आप देखोगे न्यू नोएडा बस रहा है।
डीएमआईसी बन रहा है। अगर आप पूरे शहर को अगर देखोगे तो इट इज़ जैसे अगर आप बोलो आईटी जब टेक जॉइंट्स आए जब आईटी रेवोल्यूशन आया तो बोर में सबसे पहले आया। जी
यहां पे भी आया था। बट यहां पे इंफ्रा अवेलेबल नहीं था तो उतना ज्यादा स्केल अप नहीं हो पाया। अभी वो स्केल अप हो गया है। अभी आप देखो ना आप ENY आपके यहां पर है।
Google यहां पर है। Microsoft यहां पर है। टू नेम अ कंपनी इट इज़ देयर। आप कोई भी कोई भी कंपनी का छोटा रीजनल ऑफिस कॉर्पोरेट ऑफिस। Fortun 500 कंपनीज़ जो हैं उसमें से अभी
250 कंपनी गुड़गांव में है आज। ठीक है। इवेंचुअली होता क्या है? आप अगर इस पूरे नोएडा रीजन को अगर ढंग से देखोगे तो उसके जो नेबरिंग एरियाज हैं वो गुड़गांव है, फरीदाबाद है, दिल्ली है, गाजियाबाद है। ये
सारा फ्री ओल्ड है। मतलब फ्री ओल्ड मतलब जितनी टाउन प्लानिंग की कैपेसिटी थी सब हो चुकी है। अब इससे ऊपर इसको स्केल स्केल नहीं किया
जा सकता। ये नए शहर है। अब जैसे 1950 में चंडीगढ़ आया था। इट टूक 76 ईयर टू बिकम दिस। है ना? नोएडा आइडियल 50 साल पुराना है। तो
है ना? नोएडा आइडियल 50 साल पुराना है। तो अगर प्राइस ट्रेंड और वह सारी चीज़ अगर देखी जाए तो हम पुराना ट्रैक रिकॉर्ड देखना पड़ेगा हमको कि पहले 10 साल पहले 20
साल पहले 50 साल पहले क्या हुआ है। देखो तो आप एंटीिसिपेशन लगा पाओगे। आज हम जो काम कर रहे हैं वीर वर्किंग ऑन का मास्टर प्लान। जी। याद है 2006-7 में जब दिल्ली में
कॉमनवेल्थ विलेज का गेम्स हुए थे। याद है?
तब मैसिव डेवलप डेवलपमेंट हुई थी स्टार्ट दिल्ली के अंदर। एक बारी शहर तैयार है। स्पोर्ट सिटी तैयार है। सेटअप 150 तैयार है। यमुना एक्सप्रेसवे तैयार है। दुनिया भर [गला साफ़ करने की आवाज़] के डेवलपर्स आ रहे हैं। मार्केट स्केल अप हो रही है।
नौकरी आ रही है। और कहीं ना कहीं ये जो स्पोर्ट सेंटर है ये नेक्स्ट कॉमनव्थ या फ्यूचर में कभी अगर ओलंपिक गेम हो तो जब ये वो जब वो इवेंट यहां पे होंगे तब ये
स्केल दिखेगा पूरे देश को। जैसे ऑटो एक्सपो की बात करते हैं। पहले दिल्ली में प्रगति मैदान में लगा करता था। अब हमारा ग्रेटर नोएडा में लगता है। तो वो बेसिकली
क्या है कि जो वर्क लोड दिल्ली के अंदर आ गया था वो सारा आपका नोएडा की तरफ शिफ्ट करा जा रहा है। और आपने जैसे बताया कि न्यू नोएडा बन रहा है। तो अभी तीन अथॉरिटी
हैं। ठीक है? तीन अथॉरिटी है नोएडा के अंदर जो चौथी अथॉरिटी सुनने में आया है कि आने वाले टाइम में बनेगी जिसमें कि आपका
गाजियाबाद से लेके और गाजियाबाद का थोड़ा सा ये वेव सिटी के पास और इस साइड का एक ट्रायंगल बन रहा है हापुड़ से लेके उसे एक्सटेंड करेंगे
तो मैं मैं क्या सोचता हूं इस बारे में जब भी टाउन प्लानिंग होती है तो उसमें चार मेजर इंपॉर्टेंट पार्ट्स होते हैं जिसमें एक इंडस्ट्रियल है नौकरी कहां होगी जी लोग रहेंगे कहां रेल इंस्टीट्यूशन बच्चे
बच्चे पढ़ेंगे कहां और कमर्शियल ये बेसिक और उसके बाद पांच ही कॉमन अमेरिटीज रेन वाटर हार्वेस्टिंग कैसे होगी सबसे अच्छी बात ये ड्रेनेज कैसे बनेगी लाइट्स कैसे लगेगी वो
एरिया कैसे सेल्फ सस्टेनेबल बनेगा अभी नोएडा सेल्फ सस्टेनेबल है सस्टेनेबल है और सबसे अच्छी बात है कि सबकी ना ज़ोनिंग हो रखी है जो बेस्ट पार्ट है कि पूरा वेल प्लंड है
नोएडा इस इसलिए इंटरनेशनल बायरर्स जो हैं जो कोलैबोरेशन कर रहे हैं ब्रांडेड रेजिडेंसी के नाम पे उनका भी इसलिए इसलिए फेथ है क्योंकि जैसे हमने बात करी 1947 से
दो फिर हम वहां से भी बात कर लेते हैं जब से हमारा रेरा आया 2016 से जब 2016 से लेके 2019 तक ना इस मार्केट में मनीष भाई
वो नहीं था बयर का ना ट्रस्ट चला गया था अब 2019 के बाद जो मार्केट कोविड के बाद रिकवरी करी तो ये जो तीन साल थे ना इसमें जब गवर्नमेंट के भी कई रोल होते हैं जैसे
योगी जी आए है ना बहुत ज्यादा अलाइनमेंट था हम उसको मानेंगे चाहे जो भी सरकारें रही हैं सरकार का इंटरवन जरूर है तो जो चीज अच्छी हुई है
जैसे कि कुछ फंड्स आए हमने जो फंड्स की बात करी फंड्स आए और जो इंस्टॉल प्रोजेक्ट थे रुके हुए प्रोजेक्ट थे उन्हें फंडिंग
करी क्योंकि लैंड कॉस्ट बढ़ गया वो रुके हुए थे लैंड जो जो जैसे फंड्स आए और जो रुके हुए प्रोजेक्ट से फंडिंग मिली उन्हें और वो निकले और को डेवलपर्स आए कई
प्रोजेक्ट्स में काफी काफी सारे प्रोजेक्ट एनसी एनसीएलटी हुए जो बिल्डर काम नहीं कर रहे थे कुछ जेल भी गए तो ये सारा नोएडा का बैकग्राउंड रहा है
है ना आज की डेट में 6500 करोड़ दोनों अथॉरिटी पे नोएडा अथॉरिटी और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पे डेप्ट था जो आज प्रॉफिट में है हम
है ना तो आज ट्रस्ट आ गया है बायर को जो गुड़गांव में इन्वेस्टमेंट करता था वो नोएडा में नहीं करता था मगर गुड़गांव का इन्वेस्टर भी आज इन्वेस्ट कर रहा है और जो यहां से गया हुआ है फॉरेन में वो भी फोन
करके अपनी फैमिली के लिए यहां प्लान कर रहा है नोएडा जैसी मार्केट में। एक दुबई के बाद दुबई में भी अभी वॉर जैसी सिचुएशन थी। वहां से भी लोगों ने इन्वेस्टमेंट रोक के नोएडा की तरफ ही रुख कर दिया है। तो आज
का जो ट्रेंड है और जो गवर्नमेंट भी जैसे बहुत जल्दी से आपने देखा होगा सुपरटेक की दो बिल्डिंग बम से उड़ाई थी। है ना?
है ना? वो इसलिए करी थी कि बेसिकली क्या है कि जो ट्रस्ट है वो मार्केट में दोबारा आ जाए। तो वो आज की डेट में ट्रस्ट है जो मार्केट हम देखते हैं कि एक-ए दिन में जो प्रोजेक्ट सोल्ड आउट जैसी एक्सपीरियंस में
कितना अच्छा जोर था और यह सारी चीजें आई है वो इसीलिए हैं कि जो ट्रस्ट आया है इस मार्केट में
तो 150 एक सेक्टर है। आप अपने वर्ड्स में ब्रीफ करिए थोड़ा सा एक्सप्लेन करके हमारे व्यूअर्स को कि 150 के बारे में थोड़ा सा मैं जानना चाहूंगा आपका ब्रीफ। बिल्कुल मैं बताता हूं। सो इवेंचुअली है
क्या? जैसेजैसे ना जब शहर ग्रो होता है तो
क्या? जैसेजैसे ना जब शहर ग्रो होता है तो अगर आप पूरे नोएडा ग्रेटर नोएडा यमुना को अगर आप डिकोड करोगे तो जो पूरी दुनिया में जो बेस्ट टाउनशिप अवेलेबल है जैसे कुछ
कोरिया के अंदर हैं कुछ सिंगापुर के अंदर है कुछ चाइना के अंदर है तो अभी क्या है वो ग्लोबल हो गया है नोएडा इट इज़ नॉट कि अब वो रीजनल नहीं रहा वो ग्लोबल हो चुका है
दूसरा यहां पे मल्टीपल इंडस्ट्रीज है इट इज़ नॉट ओनली ओनली दैट वी हैव ओनली आईटी वी हैव आईटी वी हैव टेक्सटाइल वी हैव मीडिया
वी हैव फार्मासटिकल वी हैव जब काम मेकिंग वर्ल्ड का सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नोएडा के अंदर है। सेक्टर 81 के अंदर Samsung का प्लांट है
वो। सो इवेंचुअली क्या है? आप अगर देखेंगे इस पूरे डायनामिक्स को देखेंगे तो जितनी इंडस्ट्रीज हैं, जितने स्कूल्स हैं, जितनी बड़े-बड़े कॉर्पोरेट हब्स हैं, उनकी टॉप
लाइन को भी घर चाहिए, उनकी मिड लाइन को भी घर चाहिए। उनके लोअर लाइन को भी घर चाहिए। घर बन गया तो हम इन्वेस्टमेंट भी करनी है। सो इवेंचुअली अगर आप देखोगे पूरे नोएडा अगर आप इसको पूरा डसेक्ट करोगे इस पूरे
मार्केट को माइक्रो मार्केट से जब डाइससेक्शन करोगे उसके माइक्रो में तो इवेंचुअली आप देखोगे कि कहीं ना कहीं जो सेंटर नॉइ है वो स्क्वीज़्ड है। पुराने लोग अभी वहीं रह रहे हैं। बट जो नया डेवलपमेंट
चाहते हैं वो एक्सपेंसिव की तरफ जाना चाहते हैं। एक्सटेंशन एक अफोर्डेबल सेगमेंट की सबसे बड़ी मार्केट है। मेरे ख्याल से पूरे इंडिया में इससे बड़ा प्रोडक्ट इससे बड़ा मार्केट का साइज कहीं नहीं होगा। मनीष भाई आज
मैं 150 पर हूं। ग्रेटर नोएडा इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से अमेजिंग है। बहुत बढ़िया। अमेजिंग है। बट एक्सप्रेसवे पे क्या है?
आज अगर देखोगे तो आप सेक्टर एक्सप्रेसवे पे सेक्टर 142 से पहले पहले डेवलपमेंट जो है वो उसका रेट ही अलग है। ₹25,000 स्क्वायर फीट ₹00 स्क्वायर फीट घर बिक रहा
है। और आइडियली उसके बाद भी जो सेक्टर्स हैं जैसे आप देखोगे सेक्टर 146 से लेके सेक्टर 150 तक वहां पे भी डेवलपमेंट होनी है। अब टीसीएफ का सबसे बड़ा प्लांट आ रहा है वहां पे। मतलब ऑफिस आ रहा है।
कॉर्पोरेट स्पेस बना रहे हैं। 75 एकड़ का टोटल स्पेस है। सो अब इवेंचुअली क्या है?
अब वो समय आ गया है। अब एयरपोर्ट से दूरी गिनी जाएगी जगह की। तो आज वापस आप नोएडा की तरफ एंटर करोगे। सेक्टर 150 पहला सेक्टर है। सेक्टर के अंदर प्रीमियम
डेवलपर्स हैं। मार्केट में एस्टैब्लिशमेंट है। पुराने प्रोजेक्ट जो बने हुए थे वो हैंड ओवर हो चुके हैं। अथॉरिटी ने रजिस्ट्री अथॉरिटी के और डेवलपर के कुछ बूफ अपप और कुछ मिलीभगत के
वजह से रजिस्ट्रीज रोकी थी सुप्रीम कोर्ट ने। फाइनली 3 जनवरी को अभी सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। कंडीशन ओसी अब अप्लाई कर सकते हो आप। मतलब एक अलग
अमेंडमेंट है। पहला ओसी मिला है गोदरेज डेवलपर को नेस्ट और नर्चर के लिए अभी बाकी डेवलपर जैसे एटीएस लीग ग्रैंड है या बाकी प्रोजेक्ट्स को भी मिल हरी झंडी मिल गई है। तो क्या जो डेवलपर जो नए
डेवलपर आ रहे हैं उनके पास आज पैसा है विज़न है और थॉट प्रोसेस है उनके पास कोई लीगल लिटिगेशंस नहीं है। तो क्या बायर भी एंथूजियास्टिक है परचेस करने के लिए और डेवलपर भी लेके आना चाहता है कि मैं बेस्ट
टू बेस्ट काम करके दूं। अभी देखो सेट 150 के अंदर एस लेके आ रहा है। प्रतीक लेके आ रहा है अपना नया प्रोजेक्ट और सीआरसी ग्रुप अपना नया प्रोजेक्ट लेके आ रहा है। प्रतीक अपना नया ग्रुप ले प्रोजेक्ट लेके
आ रहा है। बीच का जो पूरा गोलफ कोर्स है वो पूरा गौर बना रहा है और गौर तो सेक्टर 150 के अंदर छाने वाला है। मतलब अगर देखो टाउन टाउनशिप स्केलिंग अगर बड़े वॉल्यूम में जो काम करते हैं ना टाउनशिप प्लानिंग
कैसे होती है तो गौर से ऊपर कोई नहीं जानता। गौर सिटी आज के डेट में अपने आप में एक लाइव एग्जांपल है एक्सटेंशन के अंदर। वो डेवलपमेंट अभी वहां पे आने वाली है और उसके थोड़ा सा और आगे निकलें तो
जेपी स्पोर्ट सिटी गोज गोल फ्लिंग्स फिर यमुना एक्सप्रेसवे तो मुझे लगता है जो ये जो पूरा पैच है डीएनडी फ्लाईवर से लेके सेट 141 से होते हुए जो परी चौक का जो ये
पूरा बेल्ट है बिल्कुल प्रीमियम बेल्ट हो जाएगा जहां पे टाउन प्लानिंग होगी आसान आसान शब्दों में हम ये कहना चाहेंगे जो आप बात कर रहे हो ग्रेटर नोएडा की जो हमारा गोल्फ है
जो जेपी के अंदर वो बेसिकली हम उसे कह सकते हैं कि नोएडा का वो साउथ साउथ दिल्ली जैसे साउथ दिल्ली की प्रॉपर्टी साउथ दिल्ली बेंचमार्क नहीं है। साउथ दिल्ली से बहुत आगे है वो। बहुत साउथ दिल्ली बहुत पीछे है। वो वो इंडिया के अंदर सबसे लो डेंसिटी
प्रॉपर्टी है। मतलब वन ऑफ द लो डेंसिटी प्रॉपर्टी है। और 450 एकड़ के अंदर आपने एक कम्युनिटी के अंदर 250 एकड़ का ऑफ कोर्स दे रखा है। मतलब 34000 फैमिलीज रह रही हैं। मतलब मेरी पर्सनली वन ऑफ दी
फेवरेट कम्युनिटी है। अगर मैं रहना चाहूंगा तो वहां रहूंगा। लॉन्च में आप ये देखो लॉन्च में 290 फ्लैट है आई थिंक ज्यादा फ्लैट है और और इतनी ऐसी जो
मार्केट कहते हैं कि इतनी गर्मी के अंदर टेंपरेचर हमारा 45 के आसपास जा रहा है और वहां पर साइड विजिट हो रही है 250 विजिट हो रही है डिमांड इज फॉर रियल कोई मजाक नहीं है सर रीज़न सर रीज़न क्या है ना जैसे मैम
गोलफोर्स की बात बताई ना आप बीच में पूरी बात कंप्लीट हुई जो 15000 गोलफर्स जो यूएस में है वहां जितने भी गोलफोर्स वाली प्रॉपर्टी है वो नॉर्मल प्रॉपर्टी से 200% ज्यादा एप्रिशिएट करती है वहां पर 200% ज्यादा एप्रिशिएट करता है।
वर्ल्ड वाइड हर जगह। ठीक है? तो गोलफ कोर्स अगर मैंने जो आपको
ठीक है? तो गोलफ कोर्स अगर मैंने जो आपको मेन अपॉर्चुनिटी बताई एज अ क्लाइंट के हिसाब से जो व्यूअर्स देख रहे हैं हमारे तो जो गोल्फ कोर्स वाली प्रॉपर्टी बंदा ले रहा है ना तो वो तो आप ये समझ लो वो एक एक सिग्नेचर लग गया उस चीज पे।
कि आप एक सिग्नेचर प्रॉपर्टी में रह रहे हो कि गोल्फ कोर्स में गोल्फ कोर्स वाली प्रॉपर्टी कम्युनिटी में मैं रह रहा हूं। जेपी ग्रीन की वाई भी फील ये लगा है। जब भी मैं जाता हूं मैं पर्सनली मेरा फेवरेट रेस्टोरेंट है वहां पे। चिराग भाई एक हमारे को जैसे दिक्कत हुई थी
एयर क्वालिटी। ठीक है। एयर क्वालिटी भी ऐसी जगह पर अच्छी होती है। जब एयूआई ज्यादा था यहां पे। जी आपने आप अच्छा बनाने में उस चीज को यूज़ कर सकता हूं। मैं बिल्डर हूं। मैं मेरे को आज
एफएसआई मिल जाएगी। मैं वहां पे टावर खड़े कर सकता हूं। बट ये मेरी इंटेंशन है कि मैं उस चीज को कैसे बनाना चाह रहा हूं। सेम एक ऐसा बिल्डर कुड़गांव मुझे समझ आता है सेंट्रल पार्क। आप सेंट्रल पार्क का रिसोर्ट्स देखना। सेंट्रल पार्क का फ्लावर
वैली देखना। मतलब यू विल गोना लव वि दैट प्रॉपर कि अंदर रेस्टोरेंट ऐसे हैं कि मल्टी कुजीन रेस्टोरेंट्स हैं। अंदर गुरुद्वारा बना हुआ है। तो जो ओनर है वो
सरदार जी हैं। उन्होंने अपने फार्म में छतरपुर में उन्होंने अपने घर के अंदर 24 घंटे अखंड पाठ चलता है। उन्होंने अपने घर के अंदर फार्म में गुरुद्वारा बना रखा है। तो ये विज़न है। मतलब उसमें विज़न उनके पता
नहीं कैसे-कैसे सुन के भी हैरानी होती। गाड़ी एंटर करेगी तो गाड़ी के टायर धुल जाएंगे। तो अंदर जो पूरी कम्युनिटी है वो गंदी नहीं होगी कि बाहर से अगर गंदा कहीं से आ रहा है कीचड़ में टायर तो ऐसी
कम्युनिटी है और अंदर इतनी साफ सफाई है एक-एक चीज स्कूल मेडिकल फैसिलिटीज और जो डिलीवरीज दी है ना चाहे वो थ्री बैडरूम फोर बैडरूम जितने भी अपार्टमेंट्स हैं लो राइज है या प्लॉटेड डेवलपमेंट है बेस्ट ऑफ
ऑल है मतलब क्या कम्युनिटी है चिराग भाई आपने एक बात कही कि उन्होंने अंदर गुरुद्वारा बना रखा है तो यही चीज होती है एक अच्छे रियल्टर की ना कि बिल्डर
की विज़न को वो कैसे कैच कर रहा है बेसिकली मैंने यह देखा है कि कुछ डेवलपर्स हैं जिन्होंने ना अपने बच्चों के नाम से प्रोजेक्ट्स बना रखे हैं और मैंने यह भी
स्टडी करा है कि जो जैसे अपने दिल के पास होते हैं बच्चे तो उन्हीं के नाम से करते हैं तो उनका एक इंटेंशन भी होती है कि भाई इसे मैं बच्चे की तरह अच्छा प्रोजेक्ट बनाऊं। तो ये पॉइंट्स होते हैं कुछ जो
हमें कैच करने चाहिए और यह आप लोगों से ही यह वही तो कहते हैं कि हम लोगों की वाइब्स भी मिलती है। मैं उसी को कि प्रोडक्ट की जो हमें इंटेंशन बेच रहे हैं हम हम
प्रोडक्ट नहीं बेच रहे। अगर किसी डेवलपर ने ₹3000 में मैंने कोई प्रोडक्ट खरीदा। आज मैं ₹12,000 पे वो लेके बैठा हूं। उस डेवलपर की इंटेंशन थी बनाने की। मैं भैया की बात पे कंप्लीट करूंगा तरुण
जी की बात पे। भैया ने कहा सुनो सबकी करो दिल की। तो मैंने उस चीज को मेरे दिमाग में चिपक चुकी बात क्योंकि मैंने 10 साल कर ली। 11 साल कर ली है। मैंने तो पीएचडी कर ली रियल स्टेट में। अब मैंने पीएचडी 10 साल लगा के रियलस्टेट
कर लिया। अगर मेरे पास आ रहे हो तो मैं तो कल को हो सकता है सर्विस चार्ज भी लूंगा। मेरी कंसलटेंसी का। मैं आपको अगर ऐसा प्रोडक्ट बता दूं जिसमें आप पैसा मल्टीपल टाइम्स कमा लो
और मैंने वो कराया भी है किया भी है। मैं डंगे की छोड़ो बोलता हूं। जितनी रील्स अगर आप मेरे चैनल पे देखोगे तो मैं तो उस चीज में अब आपने पहले स्टार्टिंग में ही जब हमने पॉडकास्ट स्टार्ट किया था आपने एक बात पूछी थी कि आज स्क्रिप्टेड चीजें होती
हैं। मतलब आई नेवर डू स्क्रिप्टेड। तो जो मुझे वाइब आ रही है, जो फील आ रही है, जो मैं अपने लेना चाहता हूं, जो मुझे पसंद है, मैं वही भेजता हूं। अच्छा कल एक किसी का कमेंट आया तो मैंने बड़े अच्छे से उसको
रिप्लाई मारा। कह रहा आप सब चीज बेचते हो। मैंने कहा हां वो सारी चीजें बेचता हूं जो मेरे कस्टमर के लिए अच्छी है। इसमें एक पॉइंट और ले रहा हूं। हमारा भी कहना यह होता है सर कि जिस प्रोडक्ट में
हम जा रहे हैं उसे अगर हमने हम अपने लिए खरीद सकते हैं तो हम अपने क्लाइंट को भी दे सकते हैं क्योंकि हमारा ट्रस्ट उसमें यही होगा कि हमारे यहां मल्टीफोल्ड हो जाएंगे पैसे। सर एक्सटेंशन में प्रोडक्ट था।
एक चेरी काउंट। ये बात है 2015-16 की। तो मुझे पर्सनली बहुत पसंद आया। काउंटी का आई थिंक दूसरा तीसरा था पहले वो ऑरेंज काउंटी इंदिरापुरम में वसुंधरा में और आई थिंक ऑलिव काउंटी ऑरेंज काउंटी जो भी शुरू हुआ
सेकंड थर्ड चेरी काउंटी बहुत अच्छी चीज निकल के आई अंधों में गाना राजा काउंटी ग्रुप बहुत अच्छा कर रहा है आज की डेट में सब जानते हैं काउंट को जितनी भी चीजें लेके आ रहा है क्योंकि यहां ना कॉम्पटीशन नहीं था कॉम्पटीशन ही कटा पड़ा था
बेसिकली सर हमने ये भी देखा है जो उसके इन्वेस्टर हैं ब्रोकर है ना वो कभी कहीं इधर-उधर नहीं जाते सर मैं 2014-15 में जब साइड विजिट कराता था 17 में 18 में पोज़ेशन व्हाटएवर जब भी आया उसका उसका क्लब क्लब हाउस देख के मुझे
ऐसी फील आती थी यार ये घर होते हैं। मतलब अगर मैं मैं हूं पानीपत से अगर मेरे को कॉम्प्रोमाइज करना है फ्लैट में रहना है तो मुझे अगर क्लब हाउस ऐसा मिल रहा है जिम ऐसी मिल रही है पूल ऐसा मिल रहा है तो मैं तो उस सोसाइटी में रहना मुझे
ग्रुप में रेस्टोरेंट का जो थीम है वो उन्होंने स्टार्ट करी है उनके हर प्रोजेक्ट में रेस्टोरेंट मिलता है आपको प्लस इनका कास्ट ट्रेडिंग जो क्लियो काउंटिंग में किया है इन्होंने जब स्टार्टिंग में क्लियो के क्लब का
पोज़ेशन आया था तो वहां सेलोन एंटर कर रहे हो आप सेलोन एंड लेफ्ट में राइट में रेस्टोरेंट है इस वजह से वहां पैसे भी लोगों ने बहुत अच्छे कमाए हैं जो प्रॉपर्टी के और इतना इतना मतलब बढ़िया रेस्टोरेंट,
इतनी अच्छी सर्विज यह मैटर करती हैं कि आपने रेस्टोरेंट खोला तो आपने सर्विज ऐसे दे दी या आप जेपी ग्रीन जाओ। आपको सर्विज बहुत बड़ी अच्छी लगेंगी। बड़ी इकोनॉमिकली आपको सस्ती भी लेंगे कि यार नहीं ये
प्राइस ऐसे हैं कि ये तो अफोर्डेबल प्राइस है। ऐसा नहीं कि हमने वहां पे फाइव स्टेट कर दिए। उन्होंने प्राइसिंग ऐसी कर दी कि घर खाने का मन नहीं है आज खाना। तो वो वहां बैठ के आराम से खाना खा सकता है। उसको लगे यार ये तो बहुत बढ़िया।
सर नोएडा के साथ-साथ एक बेबी और बड़ा हुआ है हमारा जिसका नाम है वेव सिटी। गाजियाबाद गाजियाबाद और उसने भी एक ऐसा एक्सपेंशन
करा है एनएच 24 के बाद जो एनएच 24 बनी थी हमारी उसके बाद जो वहां ग्रोथ आई है जो प्लॉटों में डेवलपमेंट आई है और जो इंफ्रा वहां का जो डेवलपमेंट हुआ है तो आप भी
करते हो चिराग भाई वहां पर थोड़ा सा आप ब्रीफ करें मनीष भाई आप भी थोड़ा सा इसमें थोड़ा सा वेव सिटी की सिचुएशन एक टाइम पे ऐसी थी 2018-19 के आसपास की कि 20 25 ₹00 गज के
प्लॉट ऐसे ही व्हाटएवर काइंड ऑफ़ वैसी चीजें आती थी तो लोगों को लगता यहां कुछ नहीं बढ़ने वाला। 9000 एकड़ की जमीन है वेव वालों पे और अगेन कोई इस समय कुछ ज्यादा एक एक्टिव फेस नहीं था उनका उनकी
तरफ से क्योंकि जब से पोंटी चड्डा साहब जब से गए हैं तो उसके बाद में चीजें लोगों को लगी कि यार वेव ना खत्म हो गया या ऐसा हो गया। हालांकि अगर वेव की क्रेडेंशियल देखा जाए या चीजें बैकग्राउंड देखा जाए तो इतने
ज्यादा स्टंग है कि हम अगर यूपी में चीनी खा रहे हैं तो उनकी बनती है। पेपर बन रहा है तो उनका बन रहा है। बाकी बहुत सारी इंडस्ट्री वेव सिनेमा वेव मॉल्स मतलब वेव की दुनिया तरह की चीजें जो काफी लोगों को
नहीं पता उतनी उतनी इंडस्ट्री में वो हैं। तो इतना बड़ा लैंड उन्होंने धीरे-धीरे करते-करते जब ऐसा लगा तो उन्हें बाकी डेवलपर्स को डेवलपर्स को भी दिया। जैसे जेपी आप एक्सप्रेस पे यमुना देखते
हो। को डेवलपर्स बाकी आए। पर्पस इज टू एक्टिव दैट कम्युनिटी। यह नहीं है कि मैं सारा खाना खुद ही खा लूं। कभी कबभार क्या होता है कि हम जैसे आज पांच लोग पडकास्ट कर रहे हैं तो पांच लोगों का इसमें ज्ञान पड़ेगा तो कुछ ज्यादा अच्छी बात निकल के आएगी व्यूअर्स के
आएगा क्लाइंट के पास। तो वही वाली बात है। अगर ये वन ऑन वन ये वन ऑन वन डिस्कशन होती तो हो सकता है मेरे को आपने इतनी अच्छी रिसर्च कर रखी है गोलफ के ऊपर। और मेरे को नहीं पता था मनीष
भाई 15 आप दोनों क्या इतनी एक्सपर्टीज है गोलफ के ऊपर कि 15 सर इस एक्सपर्टीज पे अगर कोई 12,000 खर्च कर रहा है ना मैं 4000 फुट फालतू खर्च करवा सकता हूं इस इस एक्सपर्टीज पे
4000 फालतू भी खर्च करेगा और गॉडरेज के अलावा कुछ लेगा भी नहीं और जो आज गॉडरेज ने देखो पता क्या है प्रॉब्लम क्या आई गॉडरेज के साथ में कुछ चैलेंजेस आए यहां पे नॉर्थ इंडिया मार्केट
में उनको लगा नहीं अच्छे लोग हैं साउथ के लोग हैं उनको लगा नॉर्थ इंडिया वाले अच्छे होते हैं चलो जीवी कर लेते हैं तो यहां के कुछ लोकल थे लोग वगैरह दिक्कत आई चीज़ आई तो जिनकी लैंड थी डेवलपर्स की थी किसके
किसी की भी थी तो उनके तो खुल गए दिमाग के घोड़े कि भैया ये क्या हो गया हमारे साथ ये तो हमारे साथ उल्टा ही पड़ गया जो हम चीज हमारे हाथ में नहीं अब हम क्या करें हम बट कई सिचुएशन में उनके साथ अच्छी भी हुई
जैसे God गोल्फिन है ठीक है कहीं उनको चैलेंजिस भी फेस करने पड़े सो कमिंग बैक टू दी पॉइंट कि अगर आज आप खुद एज अ इन्फ्लुएंसरर या एज अ मार्केट
गाइडर आप वर्किंग खुद कर लोगे ना तीन चार पांच चीज़ होगी एक टाइम पे तो वही प्रोडक्ट एक यहां पर एक क्वेश्चन और बन रहा है। आपने बिल्कुल बहुत अच्छी बात कही। जैसे God एक ब्रांड है। ठीक है? हम सबको पता है
100 साल पुराना ब्रांड है God और वो प्रॉपर्टी में आया। ऐसा नहीं हो सकता कि God के सारे प्रोजेक्ट ही अच्छे हो। यह भी हमारे क्लाइंट को हमें समझाना है कि सारे
सारे पॉइंट अच्छे हो God के। जैसे कुछ इन्वेंटरीज आज हमारे पास आ रही हैं कुछ प्रोजेक्ट्स में जो रेट टू रेट ही हैं बनने के बाद आज डिलीवरी पे। तो यह भी हमें
देखना होता है उसमें मैं गोदरेज ट्रॉपिकल आयल और जाड की बात सर अगर आप नाम ले बात कर रहे हो तो सर मेरे पास साउथ स्टेट का भी ज्यादा गोदरेज साउथ स्टेट का भी बहुत
अच्छा है वो नहीं है क्या होता है ट्रॉपिकल और जडेनिया का क्या सीन है आप एक चीज को समझो अभी लोग ना उस पे जजमेंटल लोग जजमेंटल बहुत है अरे क्या पता चीज अच्छी निकल के आएगी रुक
तो जाओ यार अच्छी निकलेगी निकलेगी डेमोक्रेटिक कंट्री है तो कोई भी बोलने का हक सबको अब बोलने के क्या पैसे लगते हैं?
बोल दो उठा के पटक दिया बोल दिया। एक चीज़ और है बहुत लिमिटेड जेंट्री है वो जिन्हों जो एक्चुअली डिस्ट्रेस बायर हैं। वो पूरी मार्केट को कर रहे हैं। बट आई हैव क्लाइंट्स दे आर वै सॉर्टेड दे आर वै हैप्पी।
यार मेरे पास कुछ नहीं है। उसको होल्ड कर ले। एक्सक्ट्ली 20,000 का प्रोडक्ट है वो मिनिमम और रहने के लिए इट विल बी अ पैराडाटाइज। सर आप बॉम्बे गए हो कभी?
हाइप हो गया है वो। आप बॉम्बे गए हो ना? तो बॉम्बे और नोएडा में आपको क्या फर्क लगता है? मतलब मैं अभी आई हैव बीन टू बॉम्बे रिसेंटली। तो मुझे एक चीज़ मुझे पता लगी। तो ये जो हम फाइट जिस किसी और चीज की कर रहे हैं ना जिसका
कोई मुद्दा ही नहीं है तो मैं आपको बताऊंगा। क्या लगता है आपको बॉम्बे और नॉर्थ इंडिया में फर्क या एनसीआर में फर्क?
चलो सर मैं बताता हूं काट पीट के आपको बात। सर इतनी भसड़ है वहां कुछ मिल जाए वो अच्छा है। तो वहां पे लोग ऐसे रह रहे हैं। आपको ऐसे दिखेगी ऊपर के जो घर बने हैं मेट्रो नीचे चल रही है। दो तीन करोड़ घर है वो लग
ही नहीं रहा कि दो तीन करोड़ का है। वहां यहां वाला बंदा उसको चोल बोलेगा। नहीं यहां वाला बंदा जितने नखरे लेके बैठा हुआ है ना उसे चोल बोलेगा। एक प्रोडक्ट है गोदरेज का जिस पे हमने आपकी रील भी देखी
थी और वो हम सब बेच भी रहे हैं ₹50 लाख के जो वहां पर टाउनशिप है उनकी और वो वहां पर है ना तो वो गोदरेज बहुत अच्छे बना रहे हैं वहां पर आने से पहले भी एक प्रोजेक्ट
था जो एयरपोर्ट के पास था तो वो भी ल्च करा था पिछले साल इन्होंने सर रीज़न क्या है ना आज कोई पर्टिकुलर चीज मेरे बजट में आ रही है मैं कभी अपने से बात करता हूं कोई पर्टिकुलर चीज मेरे बजट में आ रही है या
मुझे वह समझ आ रही है तो मुझे समझ आ रही है मुझे लेना है अब मेरे लिए वो घर है, मेरे लिए वो शेल्टर है। तो मैं क्या करूं किसी की बात सुन के?
तो बिकती हर चीज़ है। फ़ हर कोई बिकता है। पर्पसली कि मेरा बजट क्या है? मेरे को
क्या चीज़ खरीदनी है, मैं वही खरीदूंगा भाई। तो आप एक चीज़ को समझो। अगर आप पैसे थोड़े से फ्लेक्सिबल हो सकते हो तो 12 से 16,000 का मैं खर्च करवा रहा हूं। मैं उसे ये बोल रहा हूं कि भैया ये प्रॉपर्टी 100%
ज्यादा एप्रिशिएट करेगी तो ये ले लो। मगर एक दिक्कत है आज की डेट में जो मैं फील कर रहा हूं कि हम कहते हैं कि जो एक्सटेंशन का मार्केट है नोएडा एक्सटेंशन का मार्केट
और मैं बात करता हूं तीन चार ल्च एक साथ आए जैसे गोदरेज गार्डन आया था आपका एक्सपीरियन आया था देन शोभा रिवान आया था ये तीन प्रोजेक्ट आए और तीनों की लोकेशन
अलग है। एक आपका ग्रेटर नोएडा हो गया, एक नोएडा एक्सटेंशन हो गया और तीसरा प्रोजेक्ट हमारा 151 हो गया। सेक्टर लगभग रेट बराबर थे। लगभग ज्यादा अंतर नहीं था।
अगर उनकी कॉस्टिंग अगर आप उठाओ तो000 ₹2000 की कॉस्टिंग फर्क होगा। तो आज की डेट में डेवलपर भी एक ही पैरामीटर में सारी चीज़ की स्टोरी
कि 94 में अह मीटिंग हुई हमारी पंकज बंसल साहब से। तो उन्होंने एक बात बोली वी आर नॉट दी अह अह वी आर दी मार्केट ट्रेंडर्स। यस वी आर द मार्केट सेट अस कि हम हम ट्रेंड सेट करेंगे
वी आर नॉट द फॉलोवर्स 18000 का रेट आया सबका मुंह उतर गया कलिनन का ₹1000 का रेट आ गया 18000 18000 ऐसे हो गए जैसे पता नहीं क्या आ गए लोगों के
रुक गई सबका था 1415000 उस समय एक रेट होता था तो ₹1000 में बहुत बड़ा रेट हो गया तब भी बिका आज उसके बाद तो चिराग भाई मार्केट भी चेंज हो गई
हां तो 18 वाली 27 भी होगी 27 भी होगी आज 27 के लोग पैरों में पड़ जाते हैं दे दो 25 26000 में कल दे दो कलन दे दो क्या चीज निकल के आई है वो मतलब वो क्या चीज है मतलब वो एक ऐसा
फ्लैकशिप प्रोजेक्ट है मजा आ जाएगा जब वो चीज बनेगी लोग वहां पार्टी कर रहे होंगे बैठ के मतलब हवाबाजी करेंगे जिसका घर होगा तो उसके लिए तो ब्लेस्ड है वहां ट्रंप टास् आ रहा है सो अगर वो कोई चीज लेके आ रहे हैं किसी विज़न से ना तो बात में दम
अगर बिल्डर की बात में दम है ना आपने बोला एक्सटेंशन में वो रेट है वहां वो रेट है ये ना सारे डेवलपर हैं 100 20000 भी लेके आएगा बिकेगा उन्होंने वर्किंग जरूर करी होगी क्या होता है ऐसे डेवलपर्स क्या करते हैं पहले
मार्केट का 6 महीने महीने तीन महीने सर्वे करते हैं। बहुत अच्छे तरीके से इनकी टीम होती है जो छुपी हुई टीम होती है जो किसी को दिखती नहीं है। वो पीछे बैठ के पूरी वर्किंग कर रही होती है। वो हर किसी रियल्टर को फोन मिलाती है कि भाई ऐसा आ
जाए तो कैसा रहेगा?
यार ये रेट आ जाए तो कैसा रहेगा?
और वो नेचुरली उनको नहीं पता बताना नहीं होता। तो ऐसे हीरो ग्रुप भी आ रहा है। बात करते-करते एक ध्यान है। हीरो ग्रुप आ रहा है। एमयू सेक्टर में ग्रेटर नोएडा में आ चुका है।
तो अब चीज़ क्या है कि उनको क्या लिया?
[हंसी] तो बात खत्म करते हैं। तो दोद आपने भी आए भाई से पूछो पहले यार उसको नहीं आई एम गुड इस लर्निंग के लिए ही आए हैं। इस बात को खत्म करते हैं। मैं बताता हूं
कि इट्स ऑल अबाउट दी ब्रांड कि अगर ब्रांड कोई रेट लेके आ रहा है तो वो जस्टिफाई वहां कर देगा। तो ये वाली कहानी चाहे वो एक्सटेंशन है चाहे वो यमना एक्सप्रेसवे है। रेट हो सकता है आज शोभा लेके आएगा
यमना एक्सप्रेसवे आएगा। 11,000 का रेट चल रहा है। वो ₹16,000 वहां पे टिपका सकता है रेट। ये है उसकी पावर है। उसकी वो आप दोनों पहाड़ों पे भी काम कर रहे हो
आजकल और हमें हम रील में देखते हैं कि भाई यहां गर्मी हो रही है और ये दोनों पहाड़ पे मजे कर रहे हैं। तुम दोनों काम कर रहे हो वहां पर। अब हमें बताओ हम कैसे करें उसे? क्या चीज है? क्या
नया कर रहे हो?
को कनेक्ट करो बस। नहीं वो तो हम कनेक्टेड है। थोड़ा सा हम व्यूवर्स के लिए पहाड़ पहाड़ पे क्या बेच रहे हो आप लोग?
देहरादून और हिमाचल। एलdigo टेराग्रand अच्छा। कसौली और ऋषिकेश और देहरादून में ₹9 करोड़ का है आईडी को टी जी हां ₹8 करोड़ का है थोड़ा सा बताओ ब्रीफ करो इसमें हमने ना हम एक दिन ट्रिप पे गए थे
मसूरी और वहां पे हमारा एक कजिन रहता है मेरे को थोड़ा सा एक वो है जी मैं इन्हें ज्यादा देखता हूं जी जी ऑन स्क्रीन आई एम द बैक एंड गाय ही इज़ अ बैक एंड गाय मार्केटिंग YouTube
स्ट्रेटजी सब कुछ ही इज द गाय कौन सा मार्केट नया ओपन करना है वो सब स्टडी मेरी है वी आर वी आर ब्रदर्स वाओ वाओ तो कौन बड़ा है कौन छोटा है मैं बड़ा हूं सो आई ओनली टेक सेल्स बारूद ये भर रहे हैं पीछे मार्केटिंग में
ये छुप है ना ये बम ये बना रहे हैं बारूद ही भर रहे हैं पीछे एक्सक्ट्ली दोनों एक ट्रिप पे गए थे तो वी वेंट टू मसूरी फॉर फोर डेज तो हमारा एक कजन है अमोग अग्रवाल तो वो हेडिंग हेड कर
रहा है वो फॉर्च्यूनना एंड हिल्स तो हमने दोनों ने नोटिस किया कि यहां इतना डेवलपमेंट आ रहा है और फिर हमने ट्रिप पे जब एंड हुई तो हमने दो तीन डेवलपर्स लॉबी में ऐसी बस हम चले गए
तो हमें एक चीज बहुत बड़ी फील हुई कि यहां एक बहुत बड़ा गैप है और थोड़ा प्रोफेशनलिज्म भी कम है और पुल भी कम है क्लाइंट्स का क्योंकि जो लोकल्स हैं उनके
लिए वो रेट बहुत ज्यादा है। बेसिकली तुषार मैंने जो देखा है ना जी 2012 में भी मैंने हिल्स पे काम करा था। जी तो ये जो प्रॉपर्टी होती है ना इसके
सिलेक्टेड वायरर्स होते हैं। वो गैप हमने फाइंड किया। वहां पे प्रोफेशनलिज्म नहीं था बिल्कुल भी और वहां के डेवलपर्स वर लाइक कि हम ब्रोकर
से डील नहीं करते। दे वर स्ट्रेट ऑन द फेस डेवलपर्स [नाक से की जाने वाली आवाज़] की हम ब्रोकर से डील नहीं करते दे वर ऑन द फेस डायरेक्ट सेल्स करते हैं डायरेक्ट सेल्स करते हैं लिमिटेड मनी है ना पर हम भी कंपनी है पहाड़ है एक पहाड़ है
लिमिटेड नहीं तो जब वो बहुत प्रोजेक्ट है वहां पे जब वो कोई टाउनशिप ल्च करेंगे ना हम डेवलपर से डील नहीं करते बोल देना डेवलपर के पास नहीं द चैलेंज वाज़ भैया कि जो वहां का
लोकल ब्रोकर है ना वो उस लेवल के क्लाइंट को नहीं ला पाता लाइक हम जो वहां प्रोडक्ट बेचे वी आर सेलिंग ततवा? नाउ, तत्ववा इज़ अबाउट ₹20,000 अ
ततवा? नाउ, तत्ववा इज़ अबाउट ₹20,000 अ स्क्वायर फीट टुडे। यस। अंडर कंस्ट्रक्शन 5 साल बाद डिलीवरी है उसकी। अब वहां का लोकल ब्रोकर कहता है 20,000 भैया दिल्ली गुड़गांव का भी रेट नहीं है।
दिमाग खराब है डेवलपर। अब वही हमारी पिक्चर आती है कि विल टेल यू व्हाई तत्वा इज़ तत्वा टुडे? तो वी आर डूइंग गुड एट तत्वा। और तत्वा क्यों तत्व है? क्योंकि वहां
किसी भी डेवलपर को क्लब हाउस नहीं दे सकते क्योंकि पहाड़ी पे क्लब हाउस बनाना ये सब नहीं है पॉसिबल। सतवा इज द ओनली प्रोडक्ट जिसे कॉन्फ्लुएंस डिजाइन किया है जो काउंट और गुलशन के साथ काम करता है और इसलिए वो
महंगा भी है और उनकी एसओपीस भी उसी तरीके से हैं जो वहां क्लाइंट्स ले रहे हैं जैसे पीयूष बंसल है लेंस कार्ड वाले अच्छे टॉप बिनेसमैन वहां पे ले रहे हैं हमारे जो क्लाइंट्स हैं वो मोस्टली एनआरआई हैं वहां पे
तो इसलिए देहरादून और कसौली इज द नेक्स्ट बिग थिंग क्योंकि एलdगो ने भी वहां पे तीन चार अच्छे लैंड्स लिए हैं। हम ये ना उनकी रिसर्च टीम है और वो पूरे ऑल इंडिया जैसे गोवा मार्केट में उन्होंने
बहुत अच्छा कैच करा टीजी के जो ब्रांड है ना इनकी टेराग्रand है ये अब आउटस्कर्ट्स को कैटर कर रहे हैं टेरागंड है ये लैंड एक्विजिशन में बहुत मास्टर है इनफैक्ट इनका जितना भी सिटीज में भी है ना
पानीपत में भी पानीपत में भी है इनका कम्युनिटी है बहुत अच्छी है वन ऑफ़ द बेस्ट है जोधपुर वाली एलडी पानीपत टोल पे मेरे घर के बराबर में तो पानीपत टोल के करनाल
टोल पानीपत टोल कहते हैं एलडीगो की टाउनशिप बहुत सुंदर है। बहुत सुंदर मतलब अमेजिंग चीज़ बनाई है। बहुत अच्छा बट टीजी के अंडर दे आर ब्रिंगिंग ओनली
लग्जरी। उसके सीईओ है मिस्टर अमर कपूर वो भी मतलब अलग हैं। वो अलग डिवीजन है एलडीिको का टीजी। उसकी टीम उसका मैनेजमेंट उसका सीक सब कुछ अलग है।
अगेन देखा जाए तो ये एलडीिको यूथोपिया के टाइम से 93 सेक्टर से जब एटीएस विलेज की कहानी आई थी यहां पे नोएडा में जब घड़ी गई थी जब एक्सप्रेस पे हाईवे नहीं बना था। 2003 आपको तो बड़े अच्छे से पता है ना कि ये जो
एटीएस 93 वाला जो सेक्टर है सर वहीं रहते हैं। चार पांच के आसपास तो 2004 के आसपास में रहता है और यूथोपिया में आज की डेट में आई थिंक वन ऑफ द मतलब सबसे रहती है। आज भी बहुत सुंदर है वो।
आज भी बहुत सुंदर है बहुत मेंटेन है। बट मैं आप सबको बोलूंगा आई वुड रिकमेंड प्लीज गो एंड शोकेस दो प्रोडक्ट्सो के सिरमोर वाले और ऋषिकेश वाला। यू विल लव
इट। आप लोगों के पास वो जेंट्री है। वो क्लाइंट्स है जिनको वो घर चाहिए। एंड इट इज नॉट अबाउट मनी। इट इज अबाउट द एक्सपीरियंस एलdको इज गिविंग। ट्रस्ट मी ऑन दैट आपके मतलब का प्रोडक्ट है। यू आर द
रियल्टर्स राइट रियल्टर्स हु शुड सेल दैट प्रोडक्ट। एक एक प्रोडक्ट मैं भी इसमें ऐड करूंगा। इसमें कैंची धाम के पास में एक मेरे फ्रेंड है सूरी डेवलपर्स के नाम से। उनका
प्रोडक्ट आ रहा है तो उसमें मेरे ख्याल से 80 90 स्टूडियो अपार्टमेंट सर्विस अपार्टमेंट है उन्होंने नहीं आया नहीं वो सब चीज़ डन है रेरा एवरीथिंग इज टोटली डन
तो उसमें उन्होंने एक फोर स्टार चेन भी फाइनल कर दी है जो कैंची से पहला एक रिसोर्ट पड़ेगा और उसमें एक्सक्लूसिव 25 30 विलास हैं आई थिंक ढाई तीन तीन करोड़ का
विला है और बहुत अमेजिंग चीज है हर चीजें पूरी ग्रीन झंडी के हिसाब से वो काम कर रहे हैं टोटली क्लियर चैट मतलब होता है ना कि ये चीज नहीं नहीं है। जैसे आपने बोला रेरा नहीं है। मतलब जिस तरीके से मैंने जब उनका विज़न देखा जब मैं भाई के साथ बैठा
क्योंकि वी लिव इन दी सेम सोसाइटी। सो मेरे पांच फ्लोर ऊपर वो रहते हैं। तो जब बैठे हम तो देखा मैंने कहा तुमने कह रहे हैं इसके अलावा काम बताओ। आपसे पता करना था इसके अलावा काम इसमें क्या और ऐड
ऑन हो सकता है। मैंने कहा भाई आपने पूरा ए टू जेड डाल दिया। बहुत अच्छे तरीके से। कह रहे हमें नीट एंड क्लीन काम करना है। सुपर डुपर नीट एंड क्लीन। कोई किसी को कोई एश्योरिट कोई कुछ कमिटमेंट पहले पोज़ेशन से
पहले स्टूडियो ले रहे हो ये कर रहे हो। कह रहे हैं कुछ नहीं। बट पोज़ेशन के बाद ऐसी चीज़ बना रहा हूं। मजा आ जाएगा। कुछ चीज़ वो अपने पास होल्ड भी कर रहे हैं। तो यह विज़ होता है तो वैसे भी हॉटस्पॉट मनीष भाई मनीष भाई अभी आपको हम फॉलो कर
रहे थे काफी दिन से आपके चैनल में तो बड़ी हलचल हो रही थी। डीएलएफ आप ट्रेनिंग के लिए भी गए थे तो कुछ आने वाला है। नोएडा मार्केट में हलचल है। डीएलएफ से डायरेक्ट फोन आया इनके पास।
एक्चुअली मैं मैं एक्स डीएलएफ रह चुका हूं। मैं पहले डीएलएफ का एंप्लॉय था और सो मैं क्या देखता हूं डीएलएफ के आने से ना मार्केट में क्या है कि एक्चुअली क्या है कि अगर आप देखोगे ना जैसे पूरा इंडिया
ग्रो हो रहा है तो वैसे सारे स्टेट्स ग्रो हो रहे हैं नोएडा भी वैसे ही ग्रो हो रहा है एक नए एक नई लीप ले रहा है एक नया एवोल्यूट एवोल्यूशन आ रहा है मार्केट के अंदर मुझे याद है जब एम3m करेनियन ल्च हुआ
था तो मेरे क्लाइंट ने मुझे फोन किया और बोला मनीष भाई वो एमथm की दुकान आई है तो मैंने कहा भैया क्या कौन सी दुकान तो बोले कि वो 20 18000 स्क्वायर फट का रेट
है। तो मैंने बोला मैंने मैंने बोला सर वो दुकान नहीं है। वो घर है। घर है। तो वो बोले मनीष ₹18,000 की का घर बिके कहां पे अब? मुझे याद है उस समय गुलशन
डायनेस्टी कलपत्रू पार्कक्स लॉरियट ये सब 8 ₹800 में ट्रेड करते थे। हम सडन जंप आया। जंप आया। आज एक भी प्रोडक्ट इनमें से ₹25,000 से नीचे नहीं बिकता। ₹25,000 स्क्वायर फीट।
वैसे जंप क्यों आया? लेट अस टू अंडरस्टैंड दी ऑडियंस कि ये जंप कैसे आया? दिस व्हाट
मैटर्स। हां तो बेसिकली क्या होता है ना जैसे इन्होंने बताया था शुरू में कि ट्रेंड सेटर एक्चुअली है क्या यह हुआ क्या दिल्ली एनसीआर में कॉर्पोरेट है नौकरियां
हैं बड़े बिनेस हैं बड़े स्कूल्स हैं अब हर कंपनी का जैसे आप आईटी इंडस्ट्री है या फिर कोई मीडिया कंपनी है कोई स्कूल है उसमें टीओ लेवल के लोग काम करते हैं ना
बट उनको उस जगह चाहिए वहां वहां रहना है जहां डेंसिटी लो हो एक ही थंब रूल है जो महंगा है ना वही महंगा होगा। सस्ता कभी महंगा नहीं होगा।
बहुत बढ़िया टैगलाइन बताई है आपने और यह फैक्ट है। हम भी यही ऑब्जर्व करते हैं कि आदमी कहता है कि मैं एक जगह पर जैसे मैं नोएडा एक्सटेंशन की बात करता हूं। एक डेवलपर 16,000 बेच रहा है शोभा जैसा। एक
दूसरा वो 12,000 13,000 में ट्रेड कर रहा है। मगर शोभा बेच रहा है। एक तो उसकी एक्सपर्टीज है। प्लस बैकवर्ड इंटीग्रेशन है। प्लस क्या है कि जो ग्रोथ शोभा दे देगा वो दूसरा प्रोडक्ट
शोभा दे आर नॉट दे आर नॉट कॉन्ट्रैक्टर्स। दे नॉट बिल्डिंग होम्स। हां। क्राफ्टिंग होम्स वो घर क्राफ्ट करते हैं। अब छोटी-छोटी चीज़ अगर बताऊं ना जैसे वो अपने ब्रिक्स भी खुद बनाते हैं।
ग्लज़ खुद बनाते हैं। अभी उनकी पूरी टीम आई थी एक्सटेंशन में। उन्होंने वाटर टेस्ट किया। उसके हिसाब से उनकी पूरी सेंट्री फिटिंग सारी तैयार हुई है। अब इमेजिन करो डेवलपर
एयरपोर्ट की वजह से उसको बहुत माइलेज मिला। हम और कॉर्पोरेट्स आ गए और बाहर से जब वो कन्वीनियंस हो गए लोगों की फॉरेन कंसलटेंट्स विदेशों से कंसलटेंट आ रहे हैं
यहां पे काम कर रहे हैं मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को संभाल रहे हैं नई टेक्नोलॉजी इंटीग्रेट कर रहे हैं तो उनके बिज़नेसेस फ्लरिश हो गए। राइट? अब वही क्या है?
स्लोली ग्रेजुअली नोएडा में भी वही वही जो हमारी हमारे पे इंडस्ट्रीज हैं यहां पे जो उनका स्केल अप अच्छा हो गया है। मेट्रो की कनेक्टिविटी आ गई है। है ना? एक्सप्रेसवेज़
और कनेक्टेड हो गए हैं। यमुना एक्सप्रेसवे कनेक्टेड हो गया। मल्टीपल एनएच 24 देखो कितना कितना फ्लोरिश हो गया। तो क्या जाना ना कन्वीनिएंट हो गया है। अब क्या है कि मान लीजिए कोई बड़ा बिज़नेसमैन है अगर उसको
रहना है। सो इवेंचुअली एक मेरा बहुत इंपॉर्टेंट पार्ट है। जो वेल्थी लोग हैं ना जो रिच लोग हैं वो कम से कम लोगों के बीच रहना चाहते हैं। क्योंकि दो दे डोंट
हैव टाइम। है ना? एक्सप्रेसवे एक्चुअल में वो उसी उसी कैटेगरी के लिए वो वो जगह है जहां पे नौकरी, घर, एंटरटेनमेंट, ऑफिस सब
क्लोज बाय है। ईज ऑफ लाइफ ई ऑफ लाइफ है। होम टू ऑफिस, ऑफिस टू होम अगर कन्वीनिएंट नहीं है ना तो फिर देयर इज़ नो पॉइंट। अगर आप ज्यादा समय पे वेस्ट कर रहे हो, पैसे खर्च कर रहे हो, मस्ती नहीं
है। तो इवेंचुअली एक्सप्रेसवे जो है वो बिल्कुल यूनिक डेस्टिनेशन है। नौकरियां है। आप देखो ना सेटअप 125 से लेके 135 तक सिर्फ नौकरियां ही नौकरियां हैं। टू नेम
वि कंपनी यहां पे Google है। यहां पे Microsoft कितनी बड़ी-बड़ी कंपनीज़ यहां पे ओरेकल्स है, ENY है, Samsung का ऑफिस है, KPMG है। इतनी बड़ी-बड़ी कंपनीज़ है। तो उनके टॉप एग्जीक्यूटिव्स कहां रहेंगे?
सो इवेंचुअली क्या है कि अगर आप देख डीएलएफ क्यों आ रहा है? डीएलएफ अब उसको दिख रहा है कि सर रिपन मार्केट ये मार्केट पक चुकी है। अब वो डीएलएफ क्या करता है?
डीएलए ऑलवेज वर्क ऑन द जस्ट 1% ऑफ़ द टॉप लाइन कैटेगरी हम वो 2% कैटेगरी पे काम करता ही नहीं है। वो सिर्फ टॉप लाइन 1% पे काम करेगा और उसको पता है कि अब क्या स्टार्ट करना है। सो उन्होंने दो लैंड पार्सल परचेस कर रहे
हैं। कहां किए हैं?
एक लैंड पार्सल परचेस किया है नोएडा एक्सप्रेस के लेफ्ट पे और एक परचेस किया राइट हैंड पे। 108 तो नहीं लिया सर। 108 पांच प्लॉट के ठीक सामने वाला प्लॉट लिया है 12 कैरेट कमर्शियल प्लॉट एमएम ने लिया है डीएलएफ ली है
डीएलएफ ले डीएलएफ ले चुका है वो आई थिंक मुझे मोटिव न्यूज़ आ रही है आई एम नॉट कंफर्म बट नहीं न्यूज़ भी थी आर्टिकल आया है डीएलएफ और एक बेबी स्टोन के आसपास लिया है इट्स अ बिग लैंड पार्सल
बट सर डबल मार्केट डबल की बात हो रही थी मतलब डबल पे आपको कंपनीज़ का लगता है ये वो चीज़ लगती है ना कि भ इसकी वजह से मार्केट डबल हो गई सो एक्चुअली क्या कंज्यूमर आता है ना कंज्यूमर देयर देयर समथिंग अबाउट कंज्यूमर डिमांड डिमांड एंड डिमांड बट क्या होता है
घर में कॉफी बनती है ₹1 की सेंचुरी की बनती है ना बट जाके स्टारb में कॉफी पीनी है। वो लोग यहां पे ऑलरेडी शॉपिंग करने जाते हैं। वो ग्लोबल बाहर घूमते फिरते देख
रहे हैं। जब एक इंसान दुबई जाता है, सिंगापुर जाता है, कोरिया जाता है, यूके जाता है, यूएस जाता है तो वो देखते हैं कि ग्लोबल स्टैंड्स की प्रॉपर्टीज बनी हुई है। अब जब उनको वो दिख रहा है कैलेन जैसी
प्रॉपर्टी, डीएलएफ जैसी प्रॉपर्टी, 107 काउंट जैसी प्रॉपर्टी, गुशन डायनेस जैसी प्रॉपर्टी दे कैन कोरिलेट टू इट। और वो चाहते हैं कि घर एक कंसोलिडेशन है। लाइफ
के लिए 20, 25, 30 साल का एक मैटर है। घर इंडिया में घर खरीदना ना इट इज अ इमोशनल सब्जेक्ट। इट इज़ अ फाइनेंसियल मैटर बट एक इमोशनल सब्जेक्ट है। और हर इंसान अपने आप
को टॉप लाइन पे रखना चाहता है। सो वेंट नोएडा एक्सप्रेसवे वो जगह है जहां पे मोस्ट वेल्थी या वेल्थिएस्ट पीपल जो दिल्ली एनसीआर के हैं वो सब य इकट्ठे हो
जाएंगे। जैसा जैसा दुबई में है ना शेख रोड है। एग्जैक्ट कुछ वैसा ही नया क्रिएट हो रहा है। वही उसमें एक पॉइंट और भी है। उसमें टियर थ्री के भी बहुत लोग हैं। मैं बात करूंगा। इसमें पूछूंगा मैं कि मार्केट डबल क्यों हुई? मेरे को ये
जस्टिफाई थोड़ा सा आंसर इसमें और मैं बताऊंगा। हां बताओ ना जो मुझे लगता है मेरे को जो लगता है ना जो इसका मार्केट डबल का रीज़न क्या रहा?
मतलब एक्चुअली आप कोरिलेट करोगे आप लोग सब ये कोविड है। कोविड के बाद जो पहले मार्केट एकदम से रुक गई थी ना और जब कोविड के बाद जब मार्केट खुली तो जो यमना एक्सप्रेसवे की मार्केट थी ₹00 मीटर वाली
वो 70000 पहुंच गई। ठीक है? मेरे सामने
सामने मैंने अपनी सोसाइटीज में या आसपास के प्लॉटे डेवलपमेंट में 105 में 108 में जो प्लॉट ₹99,000 ₹0000 मीटर मिलता था वो ₹ लाख ढाई लाख कैसे हो गया? कंपनीज़ तो
एकदम से तो नहीं आ गई। रातोंरात कंपनीज़ कौन सी आ गई? साल डेढ़ साल में ऐसा क्या हुआ? और ये सिर्फ मैं सिर्फ नोएडा की बात
हुआ? और ये सिर्फ मैं सिर्फ नोएडा की बात नहीं कर रहा। मैं ओवरऑल मैं आपको एनसीआर की बात कर रहा हूं। और रीज़न क्या होता है ना? कहते हैं ना वो गिरगिट को देख के पता
ना? कहते हैं ना वो गिरगिट को देख के पता गिरगिट रंग बदलती है। तो क्या हुआ? आसपास
के शहरों ने भी रेट बढ़ा लिए। सोनीपत पानीपत तक भी आप पूछोगे ना तो जो रेट था किसी हुडा के एरिया में तो वह 60 वाला 120 हो गया तो यह ओवरऑल जो डबल हुआ ना सर ये होता
क्या है जो मैं फील करता हूं मैं 11 साल से हूं तो ये हर 10 साल का एक झटका आता है रियलस्टेट इंडस्ट्री में अब लोग कहेंगे मैंने यमना एक्सप्रेस में प्लॉट ले लिया चलो मैं कहता हूं किसी ने मेरे पास आया पूछा यमना एक्सप्रेस में प्रॉपर्टी दिलवा
दो कहेगा 10 11000 की चीज है चलो जी ली ये डबल कब होगी मैं उसे कहता हूं भाई ये डबल नहीं होगी अभी 2 साल 3 साल 4 साल भी यह 13 14000 15000 पे पोजीशन पे 16,000 हो जाएगी। खुश हो जाना। अभी आप मकान लो,
किराया खाओ या खुद यूज़ करो। चीजें बहुत अच्छी बन के आएगी। ये 10 के 20 नहीं होंगे। अभी यमुना एक्सप्रेसवे मथुरा तक की डेवलपमेंट है। तो आप लैंड इतना सारा है। ये झटका था हर बंदा उससे कोरिलेट कर पाता
है कि नहीं यार ये प्रॉपर्टी बता दे जो प्रॉपर्टी लूं 3 साल 4 साल में डबल हो जाए। यह टी20 मैच नहीं है। यह टेस्ट मैच है। सो, यह मेरे को पर्सनली फील होता है। मेरा एक पॉइंट है। इसमें मेरा एक पॉइंट है
सिंपल सा जो मुझे फील होता है कि प्रॉपर्टी रेट्स डबल क्यों हुए?
सो आई बिलोंग टू मेरठ। मेरठ एक टिपिकल शहर है। आज मेरठ में भी न्यू ल्च आ रहे हैं। ₹8,000 ₹1,000 स्क्वायर फीट जिनको कॉन्फ्रेंस डिज़ करना है। खैर वो सेकेंडरी हो गई। बट द पॉइंट इज़ कि मैं मेरठ से
बिलोंग करता हूं। मेरठ वाज़ टिएर थ्री। अभी डेवलप हो के मेट्रो आ गई है। एक्सप्रेसवे आ गया है। मैं मेरठ देख चुका हूं। गाजियाबाद हमारा काम था पहले 2016-17 में गाजियाबाद मैंने
देखा और देहरादून हम कर रहे हैं और एक दो सिटीज और स्टेट्स हम देख चुके हैं सिटीज सॉरी अब आप मुझे बताओ एक न्यू एज यंग एज
बंदा जिसकी अच्छी खासी नौकरी है। अच्छी खासी सैलरी है। अब उसके पास नॉर्थ इंडिया में क्या ऑप्शन है कि उसको अपने शहर से
बाहर निकल के कहीं जाना है। एक एस्पिरेशनल सिटी में जाना है। गुड़गांव इट्स हाइली हाइली लाइक आउट ऑफ बजट फॉर जेरिक पीपल।
देखो जो रिच क्लास है वो तो खरीद लेगा गुड़गांव के दुबई भी खरीद रहा। आप यह कहना चाह रहे हो कहां वो लेगा?
कहां ले वो? गुड़गांव नहीं ले सकता लेकिन गुड़गांव रहना चाहता है। किराया 50,000 है गुड़गांव में आज की तारीख में मिनिमम। और मिनिमम। मिनिमम। टू बेडरूम का मैं कहूंगा। उसके बाद गाजियाबाद आई डोंट सी इट अ वेरी गुड
लिवेबल विथ गुड अम्युनिटी इंफ्रा तो गाजियाबाद भी नहीं। दिल्ली हाईली सैचुरेटेड हाईली सैचुरेटेड गलियों में गाड़ी लगाने की जगह नहीं है। कुल मिला के हमारे पास क्या बचता है नॉर्थ
इंडिया वालों के लिए क्या है? सिर्फ नोएडा
और जो लोग बोलते हैं पीक आ गया नोएडा का ₹00 अभी नोएडा है जस्ट स्टार्टेड नोएडा है जस्ट स्टार्टेड जब 6000 था तरुण भाई तब लोगों ने पीक बोला था जब 10,000 हुआ
लोग बोलेंगे बट 1520 ये पीक किसी को नहीं पता पॉइंट क्या है ये प्राइसिंग एक्चुअल डबल इसलिए हुई है क्योंकि देयर इज़ अ डिमांड देयर इज़ अ एक्चुअल डिमांड
कोई मजाक नहीं है वी सोल्ड गोदरेजन अभी 2 महीने पहले तो मैंने वहां एक मेरे अलॉटमेंट हो गए थे मेरे दो ज्यादा अलॉटमेंट थे नहीं तो मेरा अलॉटमेंट हो गया। मैं फ्री हो गया। अब वहां लोग थैला ले लेके निकल रहे थे बाहर। मैंने कहा
तुषार भाई माइक पकड़ाओ शूट करना है तुम्हें। शर्माना बिल्कुल नहीं है। कुछ नहीं तो कुछ नहीं। मैंने 15 15 लोगों से पूछा आते-जाते। कुछ लोगों ने मुझे उल्टा सीधा ही बोला। हाउ एवर आई डोंट
माइंड। मेरा बस एक ही मोटिव था लोगों को ये दिखाना कि ये जो बोल रहे हैं इन्वेस्टर मार्केट है। इन्वेस्टर मार्केट है। हाउस ऑफ कार्ड्स है। हाउस ऑफ कार्ड्स है। यह भी बोलते हैं लोग। डराते हैं क्योंकि जो हमारे जैसे एक्चुअल
बायर हैं जिनको घर लेना है वो एक आधी नेगेटिव न्यूज़ सुनेंगे ना वो पीछे हट जाते हैं। उनका सपना अधूरा रह जाता है। कोविड में क्या हुआ ना 11 में से इट वाज़ फाइव 11 में से इट वाज़
फाइव पीपल ओनली एज अ इन्वेस्टर छह वर एंड यूज़र्स मनीष भाई मैं आपको एक चीज़ बताता हूं। आप इससे करोगे इसमें तो जितनी भी आज एजुकेशन सिटी बोला जाता है ग्रेटर नोएडा को। इतना
ज्यादा माइग्रेशन रेशियो हाई है ना जो लाखों बच्चे आ रहे हैं ना उसमें से 20% ही 30% ही घर जा रहे हैं जो यहां नौकरी में स्क्वीज़ हो रहे हैं ना बच्चे अपने पेरेंट्स को बुला रहे हैं कि हम नोएडा ही रहेंगे हम आ रहे हैं बिजनौर से
मेरे साथ भी वही हुआ आप भी मेरठ से आए हो ना आप कहां से हो मैं ही हूं नोएडा से चलो आप यूनिक हो तो आप [हंसी] यहां से हो नहीं तो आधे से ज्यादा अच्छा हमारी कंपनी में जब भी जितने
बहुत कम है आपसे हम बात करते हैं 150 लोगों में से हाथ उठाओ नोएडा से कौन है या सर कितने उठते हैं लोग बैठे हैं हम से पांच बार से पांच बार क्लब में
तो यह सर माइग्रेशन रेशियो ही है जो इसकी हाउस ऑफ कार्ड्स की बात ही नहीं है ये तो सब टाई कोट शूट डाल के जो बैठ जाते हैं ना वो चैनल पे वो सब चीजें बताते हैं कि इतनी अनसोल्ड इन्वेंटरी है ये जो हम मार्केट में जो उतर के जो हम काम कर रहे हैं ना
हमें पता है क्या बिक रहा है क्या नहीं बिक रहा बोलने से कुछ नहीं होता एंड यूजर खरीदता रहेगा ये भी बेच रहे हैं वो भी बेच रहे हैं मैं भी बेच रहा हूं सबका दुकान चल रही है सबका काम धंधा बढ़ गया कोविड में क्या हो रहा है चरक भाई कोविड
में क्या हुआ लोगों को कोविड ने थोड़ा रिसेट कर दिया अपने को रिबूटू हो रिबूूट हुआ इंसान उसको अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग समझ आ गई कि भाई मुझे क्या करना है और ये जीना सबसे पहले तो
सबसे अच्छा काम ये हुआ कोविड में लोगों को फैमिली वैल्यू समझ आ गई फैमिली क्या है ट्रू अब क्या हुआ उस फैमिली को अपनी फैमिली को कैसे बेहतर इंफ्रा दे पाए तो एक घर अब घर
का एक स्ट्रक्चर होता है बैकयार्ड होगा फ्रंटयारार्ड होगा साइड यार्ड होगा टेरेस होगा है ना एक रूम का स्ट्रक्चर होता है एक बेडरूम होगा लिविंग रूम होगा डाइनिंग रूम होगा स्टडी रूम होगा है ना एक
स्ट्रक्चर लोगों को स्ट्रक्चर समझ आने लग गया। अब क्या हुआ? उससे लोगों को ना लगा कि यार वी हैव टू हैव अ कंप्लीट स्ट्रक्चर स्ट्रक्चर होम। एक चीज ये भी थी तो घर बढ़े डिमांड बढ़ी।
प्राइसिंग बढ़ते प्राइसिंग का इवेंचुअली डबल द प्राइस वाज़ नॉट एक्सपेक्टेड कि इट वाज़ वो हैपेंड वो हो गया। 10 साल का जंप एक ना एक फार्मूला है। ऐसा नहीं है कि माइग्रेशन जैसे अगर देखोगे ना आप
माइग्रेशन तो सबसे पहले सबसे ज्यादा माइग्रेशन जो होती थी वो होती थी बॉम्बे में। पर आज की डेट में जो माइग्रेशन होती है व दिल्ली एंड में माइग्रेशन से होती है। अब इवेंचुअल हुआ क्या जो यहां पे ना
नोएडा में नौकरी भी है, एजुकेशन भी है, मेडिकल भी है, स्कूल भी है। एजुकेशन की अगर बात करूं 150 कॉलेजेस हैं। लगभग 12 यूनिवर्सिटीज हैं। सो इवेंचुअली क्या जो बच्चे यहां पे आते हैं पढ़ने लिखने हैं।
फॉर एग्जांपल 5 लाख बच्चे पढ़ के निकल रहे हैं। मैं कह रहा हूं 50% लोग बच्चे वापस अपने शहर चले गए या विदेश चले गए। 50% जो लोग यहां पे बच गए वो यही घर किराए। बहुत बड़ा नंबर है वो।
वही घर यहां पे वो घर खरीदेंगे एंट्री भी नहीं है। तो क्या वो एक एक ना एक रिसाइक वो जो सिनर्जी कर रहा है सब कुछ हर बिज़नेस को मैन पावर चाहिए। काम करने के लिए एम्प्लई चाहिए। स्किल्ड मैन पावर चाहिए। तो वो
क्या पूरा मार्केट का साइज अप हो रहा है। मनीष भाई आप ही की बात आज पूर्वांचल जाओ आप या एलडी को जाओ। इन्वेंटरी लो। छठा फ्लोर पार्क फेसिंग पूल फेसिंग दे दे। बिका हुआ है?
बिका हुआ है। वो टावर ही बिके हुए हैं। जो इन्वेंटरी मिल रही है वो बीच फ्लोर मिल रहा है। या आगे पीछे मिल रही है। प्राइस डी की बात कर लेते हैं। वीवीआईपी है। अब कितना टाइम हुआ आया? और सोल्ड आउट है प्रोडक्ट इन्वेंटरी की आ रहा हूं मैंने आपको
कोई भी आ रहा है जो अभी अंडर कंस्ट्रक्शन में इन्वेंटरी की फाइट है प्लस एक बात मैं और करना चाहूंगा आपने तरुण जी बात करी है डबल की 2019 से हमने ट्रिपल भी देखे हैं नोएडा में
अब हम डबल की बात कर रहे हैं लेकिन एक चीज और है ये जो हो गया वो कोविड वेव थी वो नल खुला था बहुत लोग मूव हुए हैं आज डबल एक्सपेक्ट करेगा तो पांच साल
आज नहीं वही जो हम साइकिल की बात कर रहे थे उसका भी मैं एक रीज़ जो मैं सोचता हूं वो आपको बताता हूं। मे बी मेरा कुछ ओपिनियन चेंज हो सकता है। पहले जो हमारी इन्वेंटरी होती थी ना बुक्स
में क्योंकि कैश फ्लो ज्यादा था। पहले जो मार्केट थी आपने भी ये देखा होगा कि प्रॉपर्टी के अंदर कैश चलता था। ठीक है? रेरा के बाद आने से स्टिकनेस से
ठीक है? रेरा के बाद आने से स्टिकनेस से अब जितने भी लिमिटेड कंपनीज़ हैं जैसे शोभा हो गया, godderज हो गया, जितने बड़े-बड़े ब्रांड्स हैं यहां पर कैश नहीं चलता। हम और आज की डेट में वह भी बहुत अच्छा रीज़न
है कि मार्केट का ना जो बुक्स है वह स्टंग हो गई है। ठीक है? और एक एंड यूजर ही उस प्रोडक्ट को
ठीक है? और एक एंड यूजर ही उस प्रोडक्ट को ले रहा है। अब जो हमने बात करी कि मार्केट जो जैसे अभी चिराग जी ने भी बात करी थी कि यह वेव था और यह 10 साल पहले जो था वो हम
एक्सपेक्ट एक्सपेक्ट नहीं कर सकते कि जो हम ट्रेंड की बात कर रहे हैं अपने व्यूअर्स को बता रहे हैं कि आज आप प्रोडक्ट ले रहे हो तो यही ट्रेंड मत फॉलो करो कि ऐसा होगा। है ना? तो वो वही चीज है
कि आगे अब दोती साल जो झटका है वो अभी नहीं लगने का। वी ऑफ आज क्या है? लोग पढ़ लिख के एजुकेटेड लोग काम करने आ रहे हैं। आजकल प्रोडक्ट पे काम करते हैं। वो लोगों के लिए पूरी रिसर्च करते हैं
और वो पूरा एक डायनामिक्स बना के पूरा फंड फ्लो कैश फ्लो पूरा मेंटेन करके उनको एंटीिसिपेशन पता होता है कि हां आई विल बी एबल टू डिलीवर द हाउस इन नेक्स्ट 33 मंथ्स
से 40 मंथ्स। और मैं यह बनाऊंगा मेरे अंदर ये यूनिकनेस होगी। आज आप कैसे यूनिक हो वही आपकी यूएसपी है। ऐसा नहीं है मार्केट में तीन साल में भी ऐसे प्रोडक्ट है मार्केट में जो बहुत
अच्छे परफॉर्म करेंगे आउटस्टैंड करेंगे बट इवेंचुअली वहां तक पहुंचने के लिए किसकी जरूरत होगी हम लोगों की। सो इन अभी हम हमने जो कन्वर्शन इनिशिएट किया था वो इनिशिएट किया था कि इन्फ्लुएंसरर इन्फ्लुएंसरर इवेंचुअली क्या है कि जो
आपको फंस जाता है आप आप उसकी वीडियो बनाओगे ना यार हम आज हाथ में फ़ है पहले फ़ नहीं होते थे तो लोग वीडियोस नहीं बनाते थे। अभी ₹2 लाख के फ़ हाथ में लोग ले घूम रहे हैं सर उससे करेंगे क्या? तो कंटेंट बनाते हैं।
करेंगे क्या? तो कंटेंट बनाते हैं। इवेंचुअली है क्या? एक ट्रांसपोर्टेशन है। पहले लोग अखबार पढ़ते थे। अब अखबार नहीं पढ़ते हैं। मैं तो आई डोंट रीड मी। मैं सब कुछ Google ऑनलाइन ही पढ़ता हूं। सो
इवेंचुअली क्या है? मार्केट का टूल है जिसको हर इंसान को अपने को अपग्रेड करना पड़ेगा। वी एज अ रियल्टर वी हैव द रिस्पोंसिबिलिटी टू ब्रिंग इन द बेस्ट बेस्ट प्रोडक्ट। देखो इवेंचुअली हर
प्रोडक्ट की ना एक साइकिल है। उसका आपने उसके लीगल लीगल टेक्निकल पढ़ना है। उसका लैंड के क्लीयरेंसेस पढ़ने हैं। प्रोडक्ट में क्या यूनिकनेस है? क्या स्पेसिफिकेशंस
हैं? क्या डिलीवरी लाइंस हैं? क्या पेमेंट
टर्म्स हैं? बहुत कुछ है। अब इवेंचुअली कोई एक कस्टमर जब आता है ना उसके अंदर एक वेग आईडिया होता है कि मुझे 2 करोड़ की प्रॉपर्टी लेनी है और नोएडा में लेनी है। बट इवेंचुअली नोएडा में कहां पर क्या
आएगा? ये उसको कौन बताएगा? नोएडा पूरी बटी
आएगा? ये उसको कौन बताएगा? नोएडा पूरी बटी हुई है। नोएडा है, नोएडा एक्सटेंशन है, एक्सप्रेसवे है, सेंटर नोएडा है, न्यू नोएडा है, ग्रेटर नोएडा है, यमुना एक्सप्रेसवे है। तो इवेंचुअली क्या है?
उसके लिए क्या सही है? या तो आप कस्टमर जाए गाड़ी स्टार्ट करें और एक साल सारी प्रॉपर्टी जाके जाके ढूंढे। भाई, तुम ना करते हुए, 500, 700, 800 प्रोजेक्ट तो होंगे ना। जाओ हर दिन जाके घूमो।
बट अगर वो नहीं करना है, फ़ोन करो अपने फेवरेट रिलेटर को जो अच्छा कंटेंट बना रहा है, जो जेन्युइन बात करता है ये जो मेरी लैंग्वेज चुरा [हंसी] ली है। चलो
भाई यू आर सो स्वीटर। बट एक बात बताओ इसमें इतनी सारी बातें जो करी आपने, इसमें इवेंचुअली की क्या गलती थी जो आपने इतनी बार इवेंचुअली लगा दिया?
[हंसी] सो है क्या कि है क्या?
कंटेंट क्रिएशन आज की डेट में एक मीडियम है सेल का। रियलस्टेट में कंटेंट क्रिएटर तो अभी स्टार्ट हुए हैं आने। अभी इसको यह और ग्रो होना है। जो इंसान अपने को अपग्रेड करेगा जैसे कि ये मेरा पहला
पॉडकास्ट है। मैं आज तक पडकास्ट नहीं किया है। दिस इज़ माय फर्स्ट पडकास्ट। मैंने कंटेंट बनाया है। मैंने अब आप रुकोगे नहीं। सबसे ज्यादा तो आप ही बोल रहे हो। लग मेरा फर्स्ट टाइम है।
फर्स्ट टाइम है। अपने घर पे स्टूडियो बना रहा हूं। मैं ये इसको ये इसको फर्स्ट एंड लास्ट समझ रहे हैं ना। ये कह रहा है [हंसी] चिराग चिराग भाई सर एक क्वेश्चन है आपसे कि कमर्शियल की आप
कॉर्पोरेट लीजिंग बहुत आपने करी है और चिराग भाई 140 के बारे में आपसे जानना चाहेंगे फ्रेश सेल और क्या है आज की कमर्शियल मार्केट क्या कह रही है नोएडा की सर मैं आपको 140 का थोड़ा सा आईडिया बताता
हूं जो सर भी एग्री करेंगे आई थिंक जैसे सीआरसी है फ्लैकशिप मेरे को तो पर्सनली सबसे बढ़िया चीज लगती है वो जो कांसेप्ट है जो चीज है हयात हाउस है मॉल है दे आर कमिंग अप विद सीके अरमानी
व्हाट मॉडल होटल हयात हाउस आई एम वही मैं बता रहा हूं। तो जो कांसेप्ट है ना मतलब आई एम वेटिंग फॉर दैट कि वहां कुछ चीज आए तो बंदा वहां ले। अभी मैं किसी कस्टमर को लेके भी गया कि दे आर गिविंग ₹200 की एमg
मतलब एक एमजी दे रहे हैं तो अच्छी बात है। मुझे कन्विंसिंग वहां लगी यार मैं किसी को दिलवा रहा हूं। प्रोडक्ट बहुत अच्छा है। रेवेन्यू शेयरिंग होगी कि मतलब भाई साहब की दुकान चलेगी तो मुझे पैसा आएगा। भाई साहब की दुकान पिट गई तो मुझे पैसा
रेवेन्यू शेयरिंग का हो सकता है कहीं 3000 4000 6000 भी किराए आते हैं ऐसे बड़े सारे प्रोडक्ट हैं तो एमजी वर्ड साथ लग गया ना ₹200 बहुत होता है रेंट ठीक है आपको ग्राउंड फ्लोर मिल रहा है व्हिच इज फाइन
अगर मैं सोसाइटी की दुकान लूंगा सेक्टर 137 में ₹150 आता है आई थिंक और एक एक्सेप्शन केस में आई थिंक दो एक मार्केट जहां मैं खुद बहुत फ़ूड खाने जाता
हूं तो 76 की मार्केट है प्रिंसली स्टेट की मुझे वो पर्सनली पसंद है। वहां रात हां रात दिन वो मार्केट चलती है। 46 वाली एक 46 वाली गार्डिनिया ग्लोरी की मार्केट
होगी। मतलब बिल्डर के फ्लैट रद्दी हैं और वो गनिया ग्लोरी की मार्केट ऐसी है कि शानदार वही अमरपाली प्रिंसेस स्टेट कबाड़ा फ्लैट सॉरी टू यूज़ दिस वर्ड बट फ्लैट इज़ लाइक
खत्म टाइप से और नीचे मार्केट ऐसा वंडर्स कर रही है कि उससे बड़ा रेंट नहीं है। तो बड़ी सिंपल सी बात है कि आज अगर आप लीजिंग की जो हम बात कर रहे हैं 140 की सारे
डेवलपर्स अच्छे हैं। नेम इट फेफ शन ठीक है। सीआरसी भटानी इज़ देयर वि साइबतम मतलब जो वो नीचे कासेप्ट बना रहे हैं। सुनील सर आपसे एक क्वेश्चन है कॉर्पोरेट लीजिंग
कैसे आती है और आगे जब बिल्डर कॉर्पोरेट लीज़ कर देता है तो वो आगे डिस्ट्रीब्यूट कैसे होती है आगे क्लाइंट्स में?
कॉर्पोरेट लीजिंग के दो पैटर्न है। एक पैटर्न ये है कि हम कॉर्पोरेट में जाके बीडी करते हैं। बिज़नेस डेवलपमेंट टीम होती है हमारी। वो जाके वहां पे उनके एचआर को एडमिन को
कांटेक्ट करती है। पूछती है कि डू यू हैव एनी फदर रिक्वायरमेंट? कुछ आपको एक्सपेंड एक्सपेंशन देख रहे हो और यू नो डिक्रीज दी साइज? हम
साइज? हम और या आपका सपोज़ करो रेंट चल रहा है उनका ₹0 ₹80 पर स्क्वायर फीट और उनका लॉक इन पीरियड खत्म होने वाला है
या लीव स्पैन खत्म होने वाला है तो फिर हम उनको नई बिल्डिंग पिच करते हैं और दूसरा पैटर्न ये है कि हम लोग लिस्टिंग करते हैं पोर्टल्स के ऊपर 99 एकड़ मैजिक बिग्स के
ऊपर वहां से व्हनेवर दे नीड एनीथिंग दे जस्ट क्लिक ऑन इट देन वी स्टार्ट फॉलोइंग देम हम एक अच्छी बात बताओ ना कि जैसे लीज़ का काम आप सारा लीज़ का ही करते हो तो इसमें जो क्लाइंट मेंटल आपके पास आता है वो मैजिक
ब्रेक और 99 एकड़ से ही आता है या कहीं और से भी आपका कुछ कॉल्स लोग करते हैं या कुछ और भी कोई रीज़न इसमें बेसिकली क्या करते हैं हम लोग हर छ महीने बाद अथॉरिटी से डाटा परचेस करते हैं
कि कितनी लीजें हुई हैं उनको हम लोग फॉलो अप पे भी रखते हैं कि जैसे आज मान लीजिए Microsoft ने ले लिया एक एरिया 10,000 स्क्वायर फीट ले लिया या 50000 ले लिया और
Microsoft की लीड कितने साल से चलती हुई आ रही है हम उसके ऊपर आई रखते हैं और हमारा एक डिपार्टमेंट हमने ने टेलीकॉलिंग टीम रखी हुई है जो उनको अपना रेगुलर हर 3
महीने बाद 6 महीने बाद टिक टिक टिक कॉल कीप ऑन नॉकिंग सर आज की डेट में अभी ऑफिस स्पसेस और रिटेल स्पसेस में क्या प्राइस ट्रेंड चल रहे होंगे लीजिंग पे
प्राइस ट्रेंड चल रहा है रिटेल के अंदर अप्रोक्समेटली 150 ₹ 200 ₹250 पर स्क्वायर फीट रेंटल
और इसमें जो ऑफिस में चल रहा है यह ₹50 से लेकर ₹100 तक के आसपा आसपास चल रहा है। जैसे मैक्स की बिल्डिंग है ₹90, गुलशन
₹129 है ₹90 और आपका जो अगर हम अल्फाम की तरफ आ जाते हैं ₹55 ₹60 पर स्क्वायर फीट के आसपास और अगर सेक्टर 136 की बात करें
तो सेक्टर 136 इट स्टार्ट फ्रॉम लाइक 55 टू ₹5 अब इसमें एक चीज और भी होती है। इसमें एक होता है कैपेक्स। कैपेक्स हां अगर
कैपिटल एक्सपेंडिचर हां कैपिटल एक्सपेंडिचर अगर कैपेक्स लैंड लॉर्ड ने किया है तो रेंटल जो आएगा ऊपर जाएगा अगर कैपेक्स उसने लिया है कॉर्पोरेट
ने लगाया है तो रेंटल थोड़ा सा नीचे रहेगा सर मेरा क्वेश्चन है मतलब बहुत बेसिक सा है सपोज आई हैव इन्वेस्टर उसके पास एक अच्छी
खासी रिटेल स्टोर है अब मुझे वहां पे एक ब्रांड लेके आना है तो आपको क्या लगता है कि किसी भी अच्छे ब्रांड को आने के लिए बेसिक बेसिक रिक्वायरमेंट उनकी क्या होनी
चाहिए? सो दैट हम उनको प्लस एक तो यह
चाहिए? सो दैट हम उनको प्लस एक तो यह सेकंड कि हाउ कैन आई अप्रोच देम?
ब्रांड ब्रांड को और उनको क्या रिक्वायरमेंट्स होती हैं?
ब्रांड का हम लोग क्या करते हैं? हम ना
ज़ोनिंग करते हैं। ज़ोनिंग इन द सेंस कि इस एरिया के अंदर क्या फुटफॉल है? एक सर्वे
करना क्या-क्या ब्रांड बैठे हैं? क्या नहीं
बैठे हैं? क्या ला सकते हैं वहां पे? किस
कितना फुटफॉल है? कि कितना डेली लोग वहां से क्रॉस कर रहे हैं? हम
यह सब चीज़ तो ब्रांड में क्या करते हैं कि जैसे आप मुझे 32 इयर्स हो गए काम करते हुए सारे ब्रांड के एक्सेस है हमारे पास में जैसे हम देखते हैं कोई नया प्रमाइसेस बन रहा है फ्यूचरिस्टिक प्रमाइसेस बन रहा है
कुछ ऐसी अमिनिटीज हैं जैसे भूटानी के साइबर थम के अंदर है या और दो तीन प्रोजेक्ट्स के अंदर हैं तो फिर हम उनको क्या बोलते हैं पिच करते हैं
सो यू मेक अ पीपीटी कि भ ये ये रिक्वायर ये ये चीजें यहां पे है हां हां हां ये ये पैराटर्स खरे उतर रहे तो आप इस प्रॉपर्टी को कंसीडर करिए। कभी ऐसा कुछ हुआ है? ब्रांड ने बहुत ही
अनोखी रिक्वायरमेंट मांग ली वो नहीं होती। ऐसा भी कुछ होता है। कोई हायर ब्रांड्स ब्रांड होता है फूड के कुछ ब्रांड है। मैं नाम नहीं लेना चाहूंगा। वो अपना कैपेक्स जो 4000 लग रहा है उसको
6500 मांग लेते हैं क्योंकि वो उनको लगता है कि उनकी एक वैल्यू है और उसके हिसाब से अनोखी डिमांड्स होती है। सर पिछले 5 साल पहले क्या लीजिंग का रेंटल
रेंटल क्या था ऑफिस फेस का और दुकानों का?
पिछले 5 साल पहले पिछले 5 साल पहले 100 ₹5 के आसपास था डिपेंड डिपेंड पर स्क्वायर फीट डिपेंड प्रॉपर्टी टू प्रॉपर्टी आप कहते हैं जैसे-जैसे समय के साथ खर्चे बढ़ते जा रहे हैं रेंट भी बढ़ते जा रहे
हैं। अगले 5 साल में क्या सोचते हैं ऑफिस का क्या रेट होगा? दुकान का क्या रेट होगा एक्सप्रेसवे एक्सप्रेसवे पे?
नॉर्ड एक्सप्रेसवे पे जैसे बहुत सारे कॉर्पोरेट कीप ऑन कमिंग है तो रेंट ऊपर जाएगा। क्या 20 से ₹25 का जंप जाएगा पर स्केट। ₹15 के
आसपास वापस आ जाएगा। नहीं ये आ जाएगा बट इट आल्सो डिपेंड ऑन द डेवलपर। अब जैसे किसी डेवलपर है मैक्स ग्रुप है। मैक्स ग्रुप की जो प्रॉपर्टी है
वो ₹60 में जिंदगी क्यों नहीं देंगे?
और हां और जैसे हां और उसमें क्या है कि उनके पास बड़ी फ्लोर प्लेट्स हैं। बड़ी फ्लोर प्लेट में बड़े कॉर्पोरेट आते हैं। जैसे अपना भूटानी का प्रोजेक्ट है। सीआरसी का प्रोजेक्ट है। इन का प्रोजेक्ट है।
इसमें 500 स्क्वायर फीट छ 800 बेचे हुए हैं। तो एक बड़ा कॉर्पोरेट तो वहां आएगा नहीं। और बड़ा कॉर्पोरेट आएगा। बड़ी वैल्यू दे देगा। छोटा कॉर्पोरेट या छोटे दुकानदार होंगे जो 500 स्क्वायर फीट बैठे हैं। उसके
आठ लोगों की टीम है। छह लोगों की टीमें है। वो कई बार टिकेगा। कई बार टिकेगा भी नहीं। आजकल बड़ा वो चल रहा है। ग्रेड ए ऑफिसिसेस। ग्रेड ए ऑफिसिसेस क्या होता है ग्रेड ए ऑफिसेस?
ग्रेड ए ऑफिसिसेस कुछ पैराटर्स होते हैं। जैसे ग्रीन बिल्डिंग कासेप्ट के ऊपर बिल्डिंग को बनाना और गोल्ड प्लस कैटेगरी को वो करना। तो जो जो लोग उन चीजों को
फॉलो करते रहते हैं। जैसे बिल्डर आप ही बता रहे हो जैसे कि कोई प्रॉपर्टी ₹6,000 पर स्क्वायर फीट बिकती है। कोई ₹18,000 पर स्क्वायर फीट बिकती है। कहां फर्क है?
फर्क है क्वालिटी का। मेंटेनेंस का फर्क है थोड़ा क्योंकि मैक्स जो मेंटेन डीएलएफ जो मेंटेन करता है वो डीएलएफ का ₹750 मैंने सुना है कि ऐसा है कि ₹750
चीज है 2019 के बाद जो रेजिडेंशियल में तेजी दिखी है कमर्शियल में वो स्पीड नहीं दिखी मैंने ऐसे देखा है कि क्या कहेंगे उसके बारे में 2019 से लेके जो रैली रही है वो
रेजिडेंशियल की जो स्पीड रही है एप्रिसिएशन की वो ज्यादा रही है कमर्शियल में जो ऐसा नहीं है तो उन्होंने ये कहा कि मेरे को इसमें इतने फ्लोर चाहिए और मुझे उस फ्लोर के बीच में
ना एमबी थिएटर बनवाना है अपने स्टाफ के लिए एमपी थिएटर यहां पे हम कुछ कर पाए इवेंट्स या कुछ चीजें वगैरह तो वो उसके लिए उन्होंने वैसे डिजाइन किया और वो इतना बड़ा कॉर्पोरेट है
आप समझ जाओ वो फॉर्च्यूस कंपनी में से एक आता है तो उसके लिए उन्होंने डिजाइन किया वैसे वाला टाइप्स कि मुझे ऐसे फ्लोर चाहिए जिसमें से बीच में से कट आउट निकल के आप ऐसे बनाओ वो पंचर मारा जाता है स्ट्रक्चर के अंदर
सर क्या है ना आप ये समझो कि अगर वो लीजिंग कर भी रहे हैं तो ऐसे कॉर्पोरेट के वो लीजिंग भी कर रहे हैं 24 साल की। अब 24 साल तो बन जाएगा। प्लस वो केपेक्स अपने लगाएगा। वो कहेगा
मुझे बेशल दे दो। मुझे ऐसा बना के दे दो। मैं पूरा इंटीरियर अपने तरीके से करवाऊंगा। आपका इंटीरियर तो मुझे समझ ही नहीं आएगा ना। अगर कोई Google है या Microsoft है या कोई और बड़ा कोई कॉर्पोरेट है तो वह अपने तरीके से पूरा
उसका इंटरनल चीज़ वगैरह पूरा क्योंकि उनके वहां तो ऐसा भी होता है कि भ आपका पूरा स्पेस है लैग स्पेस है आपका गेमिंग ज़ोन है पूरा इतना पपरिंग करने के लिए उनके ऑफिसिसेस में रहता है।
बेसिकली जो रियल रियलिटी रिट्स फंड होते हैं इंडिया में चार पांच रिट्स फंड है जो म्यूच्यूल फंड के थ्रू कैडोर की तरह हां तो वो सारे ये जो फंड्स हैं ये बोर और
अब नोएडा में भी आ रहे हैं। तो यह क्या है? यह कॉर्पोरेट लीज़िंग पे ही ध्यान होता
है? यह कॉर्पोरेट लीज़िंग पे ही ध्यान होता है। यह प्रोडक्ट ही इसलिए डेवलप किया जाता है कि जो कॉर्पोरेट लीज़ को ही ध्यान करके बनाया जाता है जिससे कि सब डिवीज़न ऑफ़ वो रेंटल वैल्यू हो।
जैसे स्टेलर है। स्टेलर 135 वाली का क्या चल रहा है? बहुत ज्यादा
फ्रैक्शन की फ्रैक्शियल की। 135 वाली बिल्डिंग का क्या चल रहा है?
मतलब 135 स्टेलर वाली लीज़ पूरी लीज़ है। मतलब वो मुझे ऐसा लगता है कि दो फ्लोर बचे हैं। मतलब वो बड़े ऑफिस पे साहब आप कह रहे हो। उन्होंने बिल्डिंग ऐसी बनाई कि ऑफिसिसेस बड़े बनाए। दो
प्रॉब्लम है ये एक्चुअल में है जो मुझे लगती है बड़ी खतरनाक है थोड़ी सी खतरनाक भी थोड़ी सी भी है तो ये जो 500 600 स्क्वायर फुट वाले जो ऑफिस कट रहे हैं एक-एक फ्लोर पे या पूरी पूरी बिल्डिंग
आपने लॉकेबल काट दी जैसे आई विल नॉट टेक नेम इन नोएडा एक्सटेंशन देयर आर सम कमर्शियल्स जहां पे आपको एक-एक फ्लोर पे डेढ़-150 दुकानें मिल जाती हैं और वो
कमर्शियल काट दिए 200 300 स्क्वायर फुट 400 स्क्वायर फुट के और सर प्रॉब्लम क्या है ना सर मेरे को लगता है कि अगर कोई भी ब्रांड आ ब्रांड पे इतने पैसे हैं या मैं कभी गॉडरेज के साथ कोई चीज़ ऊपर नीचे होती
है ना तो मैं यह उनको बोलता हूं यार आप पे इतने पैसे हैं आप यह काम ऐसे हो सकता था और आप तो इसमें चौका मार सकते थे तो इसमें ऐसे क्यों नहीं किया तो वो जो मार्केट की स्टडी है ना जैसे बड़ा जो है
जैसे सीआरसी में क्या है अच्छी बात क्या है दो टावर टोटली लीज्ड है बड़ी एमएसी आएंगी एक उन्होंने कॉर्पोरेट को देने के लिए 112000 स्क्वायर फुट कम से कम वाला साइज यही है आई थिंक
8 900 वाला आई थिंक एक साइज होगा बाकी उससे बड़े हैं बट वो इतनी इतनी सुंदर बनाई है बिल्डिंग जस्ट टू गिव दी एक्सपीरियंस टू देयर बायरर्स कि जो ले रहा है 11100 स्क्वायर फुट का ऐसी ही छाप छोड़ देंगे कि
उसके अलावा उसको कुछ समझ नहीं आने वाला उस सेक्टर में तो ये मुझे लगता है कि थोड़ा बना लो बट सारा ही पूरा 4 500 स्क्वायर फुट 600 स्क्वायर फुट की अगर बिल्डिंग बनाओगे तो आपकी वाली बात मैं बोल रहा हूं
कि 7 आठ 10 लोग बैठेंगे 500 स्क्वायर फुट के अंदर लोडिंग होती है 250 स्क्वायर फुट निकल के आएगा तो सर वो कितनी लंबा चलेगा कितनी जल्दी छोड़ेगा तो वो प्रॉब्लम रहेगी
डेवलपर ने डेवलपर ने मैंने जो चीज नोट करी है तो उसमें ना जो 500 फुट और 600 फुट की हम बात कर रहे हैं। उन डेवलपर ने क्या करा है कि अंदर ना जिप्सम की दीवार रखी है। इन
केस उसको हमें एरिया इनक्रीस करना है या कॉर्पोरेट लीजिंग करनी है ना तो हम उस पे जा सकते हैं। वो ऑप्शन है। सर वो ब्लॉक है। ऐश ब्लॉक है। उसमें क्या है ना एक दीवार पक्की है। एक ऐश ब्लॉक है।
तो वो टूट जाती है। सर अभी मुझे किसी का लेआउट दिखा रहे थे तो उसमें 900 900 स्क्वायर फुट वाले मल्टीपल करके 5000 स्क्वायर फुट वो ऑफिस बन रहा है। ठीक है? तो होता ऐसे ही है। अब क्या कर
ठीक है? तो होता ऐसे ही है। अब क्या कर सकते हैं एट द एंड?
इसमें एक चैलेंज नहीं है कि इंडिविजुअल्स को वो सेल आउट हुआ है। सर आप एक बात मैं रिलीज़ कर रखा है एक अपनी इंडिविजुअल को। अब बराबर वाला ऑफिस नहीं देना चाहता। वही बात बताता हूं। सारे लोग एग्री करेंगे
कि आज अगर आज कोई कमर्शियल बिक रहा है ना। सो कमर्शियल जो बिक रहा है कहीं पे अगर आपको रेस्टोरेंट की शॉप मिल रही है मतलब जो भी बिग चिल हो गया, चिलीज़ हो गया ऐसा
कुछ कहीं लीज़्ड आउट है। वहां 300 350 400 स्क्वायर फुट की दुकान मिल रही है या गीतांजलि है। वहां 300-400 स्क्वायर फोर की दुकान मिल रही है। एंड यूज़र तो सर ₹1.50 करोड़ का ही है ना सर। अब एंड सर
ब्रांड लीजिंग हो गई सर ऑफिस ही उसी उसी की बात कर रहा हूं सर दोनों कॉम्बिनेशन वही निकल के आते हैं ऑफिस छोटे-छोटे या कमर्शियल छोटे-छोटे अब मेरे पास 18 20 करोड़ 25 करोड़ का तो चलता फिरता बाहर
नहीं है जो सारी दुनिया काम कर रही है उसी पे आ रहा हूं ऑफिस के अंदर भी अगर चलो छोटे बिक रहे हैं ना कहीं सिचुएशन में कम बिकने चाहिए और अगर बिक रहे हैं तो वो इकट्ठे लीज फिर वैसे ही होते हैं कि भाई 10 बायरर्स हैं बिल्डर की
एक लीजिंग टीम होती है वो फ़ोन करती है सीआरसी में इंडिविजुअल्स ऑफिस सेल हो रहे हैं हालांकि गुड स्पेस और मुझे लगता है कि बीइंग अल्टर मेरे जैसे बहुत यूथ आ रहा है जिनको ऑफिस
की रिक्वायरमेंट है स्टार्टअप एंड्रा तो ऑफिस की डिमांड तो मुझे लगता है कि गुड है सप्लाई भी गुड है मैं मीट हो जाएगी कहीं ना कहीं बट ये वाला क्वेश्चन था कि रिटेल तो चलो एक पूरी कंपनी पे लीजिंग
राइट है कंपनी ही उसे लीज़ करेगी बिग चल लाए या कोई भी बड़े से बड़ा ब्रांड लाए उसमें से इंडिविजुअल्स को उनका शेयर मिल जाएगा रेंटल मिल जाएगा बट ऑफिस ऑफिस फ्लोर प्लेट है अब उस पे 500 स्क्वायर फीट के
लाइन से ऑफिससेस हैं। अब मैंने मेरा एक ऑफिस स्पेस है। मैंने उसको लीज़ कर दिया एक इंडिविजुअल को। बराबर वाला चाह रहा है कि भाई तू मुझे अपना ऑफिस स्पेस दे दे क्योंकि मैं एक बड़ा फ्लोर प्लेट बना के उसको वो तो पॉसिबल नहीं है ना। वो जो बोला
वो जुआ है। वो चल गया तो ठीक है। अगर वो लीज़ हो गया तो ठीक है। अगर वो नहीं तो खड़ा हो गया। बेचना हो तो कैसे बेचूं?
प्रॉब्लम होगी ना। सर प्रॉब्लम क्रिएट तो होगी। मैं वही बात बोल रहा हूं कि इसमें प्रॉब्लम तो है। ये ज्यादा वाला लॉकेबल छोटा नहीं बनाना चाहिए। अगर लॉकेबल बनाना भी चाहिए। हां।
1200 में सर एक सीए की फर्म होती है सर उसप ज्यादा बंदे नहीं होते हैं। ठीक है छोटी फर्म्स होती है हर बंदा कॉर्पोरेट बड़ा नहीं चला रहा ना सर
सर एक क्वेश्चन है आपसे जो जैसे पहले एश्यर्ड रिटर्न आते थे कमर्शियल में ठीक है और ये मैंने भी फील करी है कुछ इन्वेंटरीज हैं ऑफिस की जो खाली हैं। अब
जो मार्केट की स्टडी हमने भी करी है तो काफी सारे ऑफिस पे आज की डेट में भी अच्छी बिल्डिंग्स में कॉर्पोरेट बिल्डिंग्स में खाली हैं। लोगों ने एश्यर्ड रिटर्न पे लिया था और आज की डेट में वह रेट भी
एप्रिसिएशन नहीं आया। यह मैंने नेचुरल देखा है सर। तो, इसके बारे में थोड़ा सा बताएं। एश्यर्ड रिटर्न माल बेचने का एक तरीका है जो मैथमेटिक अगर प्रैक्टिकली होके चलो तो पॉसिबल ही नहीं है। आपका वो मीटर बंद होना
ही चाहिए। नहीं तो आप कितना पैसा दोगे?
हम्म। ये कोई प्रैक्टिकल सोलशन है नहीं। श्योर रिटर्न। ये तो माल हां। आदमी को लालच देना है कि भैया तेरे को लेवल मुझे ये समझ आता। सर तेल तिलों से निकलता है। तेल तिलों से निकलता है।
तो जो आप ले रहे हो सकता है उसके अंदर चीज़ इसमें किया गया। आपको ₹000 का माल ₹600 में बेच के ₹100 आप ही को आपके पैसे इकट्ठे लेके किस्तों में दे दिए। अब ये चीज़ कम भी होती जा रही है डे बाय
डे। स्टिकनेस भी है। स्टिकनेस के साथ-साथ लोग कंज्यूमर अवेयर हो गया। उसको पता है उसे क्या चाहिए। डेवलपर
एक्चुअली क्या है इस प्रॉब्लम में क्या मैंने मैंने जो देखा है कमर्शियल में जो डेवलपर होता है उसका खुद का क्या विज़न है क्या उसका अपना स्पेस उस कमर्शियल बिल्डिंग के अंदर उसका अपना स्टेक है कि नहीं अगर उसका स्टेक होगा तभी वो
प्रॉपर्टी मैनेज होगी कमर्शियल में एक ही थंबरू काम करता है इट हैज़ टू गेट मैनेज अगर वो मैनेज नहीं हो रहा है तो वो लीज़ नहीं होगा प्रॉब्लम क्या
है छोटे-छोटे स्पेस सेल करने से ना आप अपने प्रोजेक्ट को एक अपस्केल नहीं कर सकते उससे क्या होता है कि कई बार क्या होता है कि एक स्पेस स्पेस खाली है। बराबर
खाली नहीं है। भरा हुआ है और वो अनइवन है। तो उससे ना उससे ना वो वाइप नहीं क्रिएट हो सकती। अब इवेंचुअली क्या है मान लीजिए 100 दुकानें हैं। 100 में से 30 चलती हैं तो कैसे मेंटेन होगी? 100 की 100 चलेंगी
तब मेंटेन होगी ना प्रॉपर्टी। तो इवेंचुअली क्या है कि जो बड़े स्केल के लोग लोग काम बड़े कॉर्पोरेट्स हैं या फिर डेवलपर जो है उसको अपनी प्रॉपर्टी को मैनेज करना सही से मैनेज करेगा तो अच्छी
लीजिंग 100% होती है। ऐसे हमारे पास बहुत सारे स्पसेस हैं पूरे एक्सप्रेस पे जो पूरा-पूरा फ्लोर प्लेट ही देते हैं। 5000 स्क्वायर फीट से नीचे स्पेस देते ही नहीं है। बट वही आगे हम लोग देखते हैं कि वो
अच्छी प्रॉपर्टी है। तो एक कमर्शियल कमर्शियल प्रॉपर्टी में कोई जुआ तो नहीं है। इट इज जस्ट प्योर साइंस। आपका डेवलपर क्या है? क्या प्रोसेस है? क्या प्रोडक्ट
क्या है? क्या प्रोसेस है? क्या प्रोडक्ट
बना रहा है? और आप खुद एज अ कंज्यूमर आप उसमें क्या लेना लेना जाना चाहते हो? हां,
मुझे एक प्रॉब्लम लगती है मुझे आज की डेट में जो मैं आज यहां डिस्कस करना चाहता हूं। वो बहुत इंपॉर्टेंट प्रॉब्लम है एड्रेस करना। आदमी आज लॉकेबल स्पेस लेता
है। तो उसको पता है कि ये स्पेस मेरी है। लॉक इन की मेरे पास है। मैं सेल्फ यूज़ कर लूंगा। कम रेंटल पे दे दे दूंगा किसी को किराए पे। कम रेट पे बेच दूंगा। बट प्रॉब्लम क्या आती है? जब डेवलपर लीज़ कर
रहा होता है और आपको अशोर्ड रेंटल देता है और आपको लीज़ गारंटी देता है। अगर वो लीज़ ना हो 3 साल के बाद फिर वो पेन है। वो ना बिकती है ना वो उसका आगे का पूरा रेोल्यूशन क्लियर होता है। तो इवेंचुअली
वो कहीं ना कहीं कमर्शियल बैंक जो है वो लोगों को बहुत फंसा रही है। अशोडेंट 24% का होम लोन 9% का डेवलपर तो ऑलरेडी मेकिंग दे आर मेकिंग मनी बट उसमें पिस कौन रहा
है? कंज्यूमर कस्टमर छोटा बायर वो वो फस
है? कंज्यूमर कस्टमर छोटा बायर वो वो फस रहा है। अब मनीष भाई एक सबसे बड़ा चीज है कि बिल्डर भी खेल रहे हैं जो ब्रांड है मैं नाम नहीं लूंगा आप भी समझ जाओगे। नोएडा
एक्सटेंशन के अंदर एक बिल्डर का एक कमर्शियल हिट हो जाता है। उसके बाद वो चार कमर्शियल बना देता है। ब्रांडेड बिल्डर है। मैं नाम नहीं लूंगा। आप भी नहीं इसमें लेंगे। तो उसके बाद
उन्होंने जो इन्वेंटरी बना दी ना आज तीन-ती साल से मेंटेनेंस भर रहे हैं। कुछ नहीं हुआ है उन एक्सटेंशन की प्रॉपर्टी की और हम इसीलिए कहते हैं 70% जो रेशियो निकल के आता है ना दिल्ली एनसीआर का 70% मॉल
फेल फेल होते हैं। उसमें कहां गलती इन्वेस्टर की थोड़ी गलती होती है?
गलती नहीं है। गलती डेवलप की है। डीएलएफ ने ऐसा क्यों बनाई? बेंचमार्क अपनी
क्यों इज्जत इतनी बना दी? क्योंकि उनके
वहां पे कोई ब्रांड अगर अच्छा परफॉर्म नहीं कर रहा। वो हर ब्रांड का ना जैसे आप कोई ब्रांड एक्स ब्रांड Y ब्रांड Z ब्रांड खोल के बैठे हैं। हमारे फुटफॉल अगर आपका मंथ का फुटफॉल 20,000 लोग आप लेके आ रहे
हो मॉल के अंदर ये 4000 लेके आ रहे हैं। मैं 1000 लेके आ रहा हूं। मेरे को सर वो डेडलाइन दे देंगे कि आप अपना छोटा कर लो। अगर आप पे 10 स्क्वायर फुट है तो आप 5,000 कर लो। आपको मैं 10,000 नहीं दे पाऊंगा क्योंकि आप मेरे लिए कुछ ऐड ऑन फुटफॉल
क्रिएट नहीं कर रहे मेरे मॉल में। तो दिस इज समथिंग व्हिच इज गुड। जा रही है सर। 700 प्लस अभी तो सर जा रही है ना। एक टाइम पे लोग रो रहे थे जो बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स लेके बैठे एम्बियंस मॉल में। आज वो हैप्पी हैं
चलाने दो डीएलएफ को या एंबियंस मॉल चल रहा है एम्बियंस को चलाने दो कि भैया इतना मोटा रेंटल आ रहा है एम्बियंस का रेंट पता हो ₹800 स्क्वायर फुट है ग्राउंड फ्लोर पे ₹1000 स्क्वायर फीट है ग्राउंड फ्लोर पे
डीएलएफ मॉल के रेंटल्स चेक करो मतलब एक्सप्पोनेंशियल रेंटल्स है जो मार्केट में लोगों को पता भी नहीं होंगे कि इतने रेंटल्स भी आते हैं वो अलग ही लीग है इन्होंने बोली थी ना एक बार डीएलएफ 1 पर्सन को टारगेट करता है अब मैंने अब
अच्छी बात क्या है ना जब एक्सप्रेसवे की बात हो रही थी कि हम सब ने बोला यार ये लॉकेबल छोटे ऑफिस पेस क्यों कट जाते अब क्या है ना वो बिल्डर को बस वो उसकी अंदर की ना वो रोक नहीं पाता अपने आपको बेचना
है बेचने का ना कीड़ा होता है अब प्रॉब्लम क्या है ना है नहीं बेचना है कोई लाला बिल्डर है उसको पता है कि मेरे को डेली का ग्ला चाहिए पैसे चाहिए वो रोक ही नहीं पा रहा अब डीएलएफ को पता है मैंने मार्केट सेट कर दिया अब डीएलएफ का किसी
दिन आप सुनोगे नहीं कि 2 करोड़ का प्लॉट आ रहा है डीएलएफ का यमन एक्सप्रेसवे वो लाएगा ही नहीं सर उसका पता है लोगों को कि वो 10 करोड़ 15 करोड़ की चीज़ लेके आएगा बिलो 10 करोड़ उसकी चीज अच्छी वाली एनसीआर
में नहीं आएगी तो 1% को टारगेट करना है तो उसका उसका माल भी वो खराब हो जाएगा ना वहां पे अगर वो ले आया ₹ करोड़ का 3 करोड़ का तो उसे माल भी खराब नहीं करना उसे अपनी इमेज भी नीचे ही नहीं करनी उसे अपना वही
एक लेवल स्टैंडर्ड मेंटेन रखना है जैसे अगर आप फाइव स्टार होटल्स में ताज है सर 2015 में मुझे अपनी पहली गाड़ी जब मैंने ली थी रियल स्टेट के जॉइन करने के
एक साल के अंदर-अंदर तो मुझे आधा घंटा लगा था -3 में -3 से ऊपर ग्राउंड तक निकालने में गाड़ी जीआईपी की बात कर रहा हूं मैं ग्रेट इंडिया प्लेस वो मॉल था जब लोगों के जो ही था वो स्कूल्स होते हैं ना जो टू डे
थ्री सिटी से आते हैं लोग उनको यहां पे व्स ऑफ़ वांडा में पूरा उनका एक्टिविटी ज़ोन था। इतना बढ़िया कांसेप्ट था। बट उसके पीछे कुछ ना कुछ रीज़न रहे जिसने वो मॉल बनाया
रजिस्ट्री नहीं हुई है। 10 तरह की चीजें और प्लस जब डीएलएफ आ गया तो सर हथोड़ा तो पड़ना था। अब वो हथौड़ा ऐसा पड़ा कि ब्रांड ऐसे आ गए लोगों को ना सर फ्री का
एक्सपीरियंस है। सर जितने छोटे शहर के मॉल है ना सर कई लोग ऐसे भी हैं सर कि वो लाइट कटती है तो मॉल चले जाते हैं ना सर कि वहां पे एसी की हवा खा लेंगे तो वहां ठंडी हवा मिलेगी। तो सर अब डीएलएफ आ गया नोएडा
के अंदर और वहां पे उनको एक्सपीरियंस इतना बढ़िया मिल रहा है। वाओ फील फैक्टर मिल रहा है। पहली बात है मुझे पैसे नहीं खर्च करने मॉल में। मॉल में 80% विंडो शॉपिंग होती है। आप और मैं कब कपड़े टीशर्ट पेंट
खरीदते हैं जब हमारा कोई फंक्शन शादी या कोई घर में ओकेजन होता है या जनरली कोई डिस्काउंट लगा। मेजरली तब होती है शॉपिंग। और डिस्काउंट लगते रहते हैं आज की डेट में फ्रीक्वेंटली। बट फ़ूड कोर्ट बहुत ज्यादा
चलता है। तो सर हम खाने पीने तो जाते हैं बट विंडो शॉपिंग करके नीचे देख आते हैं। डिस्काउंट कब लग रहा है? बता दियो मुझे फोन करियो या कब आ रहा है? क्योंकि मुझे
सर 1 लाख की शॉपिंग करनी है। तो मैं उसमें सर 2 लाख के कपड़े खरीद लूंगा ना। 50% डिस्काउंट आएगा तो। अगर मजबूरी है तो मैं ले लूंगा। तो डीएलएफ अगर मेरे को एक्सपीरियंस इतना अच्छा दे रहा है। सारे
ब्रांड्स दे रहे हैं एक ही छत के नीचे तो व्हाई नॉट डीएलएफ। मतलब अगेन जो अच्छा देगा वही बंदा जाएगा। हर मॉल की ना हर मॉल की एक शेलफ लाइफ होती है। और कुछ मॉल्स लेगसी के लिए क्रिएट किए जाते हैं। और
लेगसी वो क्रिएट कर सकता है जिसके पास कैपिटल है, विज़न है, थॉट प्रोसेस है, विज़न है, एथिक्स है। कुछ डेवलपर ऐसे हैं जो मॉल्स में है या कमर्शियल्स में दे दे आर डूइंग एब्सोल्यूट ग्रेट। बेसिकली
बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। कमर्शियल में किसी को इन्वेस्टमेंट करनी है तो वो एक्सपर्ट के बिना ना आए। बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। सर आई एम एक छोटा सा और स्टैट्स दूंगा मैं। नोएडा
ग्रेटर नोएडा में वी नीड 36 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस वी ओनली हैव 3 मिलियन स्क्वायर फीट लुक एट द गैप कितना बड़ा गैप है और ये इतनी बड़ी
डिमांड एंटीिसिपेशन क्यों है एक्चुअल में हो क्या रहा है अगर आप देखेंगे पूरी ज्योग्राफी को देखेंगे नोएडा ग्रेट नोएडा यमन एक्सप्रेस जितनी इंडस्ट्रीज हैं ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट
कॉरिडोर से मतलब गुजरात से या ईस्ट की तरफ से बेल्ट से रोड बनाई गई है ट्रेन ट्रेन बनी हुई है। वहां से कच्चा माल आता है। फिनिश प्रोडक्ट बनता है यहां पे। है ना?
और वो सामान जो है वो डीएमआईसी की रेल जो रेलवे ट्रैक बन रहा है वो रेलवे ट्रैक से सीधे बॉम्बे पो जाएगा और वहां से पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट होगा। आप इमेजिन करो यहां पे माल यहां पे
प्रोडक्ट बन रहा है। सामान बन रहा है। वो बाहर एक्सपोर्ट हो रहा है। तो वो कहीं ना कहीं वो कंट्रीब्यूट कर रहा है ग्रोथ को। अब जो अब क्या है? एचआर अकाउंटिंग हर काम
फैक्ट्री से नहीं हो सकता। आपको यू नीड ऑफिस स्पेस। सो इवेंचुअली क्या है? वी नीड
इट बट क्या है? अच्छे ऑप्शंस कम है। प्रॉब्लम वहां है। और प्रॉब्लम ये है कि कोई भी बिल्डर कमर्शियल बना दे रहा है। बनाने चल दे रहा है। क्यों? उसमें पैसे कम से कम लगते हैं। ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट
होता है। 132 के आसपास जो भी है अनस्टैब्लिश्ड है। डिलीवर ही नहीं हुआ। हैंड ओवर ही नहीं हुआ। लोग ही नहीं है। अब इसके ऑपोजिट दूसरी रोड पे क्या होता है? नहीं वहां पे है ग्रैंड स्ट्रीट है
है? नहीं वहां पे है ग्रैंड स्ट्रीट है वहां पे सारे टॉप ब्रांड लाए हैं हल्दीराम है चाय हैगंज स्टारb दरियागंज है उनकी उनका मेंटेनेंस वहां जैस चलता है म्यूजिक मैडी
आपका वाशरूम मैनेज है पार्किंग मैनेज है एंट्रेंस एक्सपीरियंस अच्छा है एसी चलता है पता चलेगा बंद कराया [हंसी] एक क्वेश्चन सबसे है मेरा ये लास्ट
क्वेश्चन है पडकास्ट का क्या बेस्ट आप लोगों के हिसाब से हम पांच कमर्शियल निकालते हैं जो आज की डेट में इन्वेस्टमेंट की टिकट साइंस 75 लाख से 1.5
करोड़ के बीच में कौन से बेस्ट पांच ऑफिस स्पेसेस नोएडा के पांच तो बहुत ज्यादा पूछ लिया आपने मैं तो एक बता सकता हूं बहुत अच्छे तरीके से देखो जब तक जहां किसी की स्किन इनवॉल्व
नहीं होती ना जैसे अगर मैं डेवलपर हूं अगर मैं 4000 करोड़ की प्रॉपर्टी बना रहा हूं या 100 एंड सो जो भी अमाउंट है तो अगर मेरा उसमें माल बिक गया और 500 करोड़ का
मेरा इन्वॉल्वमेंट उसमें है कि मेरी उसमें पैसे लगे हुए हैं और मुझे इन्वेंटरी नहीं बेची और मुझे वह चलाना है तो वहां वो पूरा एड़ी चोटी का जोर लगा
देगा जिसके मायने में मुझे जो चीज समझ आती है दैट इज़ सीआरसी फ्लैकशिप जो मुझे बहुत शॉर्टेड तरीके से समझ आती है जितना फाइन रिफाइन वो बिल्डर काम करता जा रहा है मतलब
आई थिंक नोएडा में नाम लोगे तो टॉप तीन पांच पे लोग बार-बार नाम ले लेंगे बड़ा रिसर्च करके प्रोजेक्ट बनाया है वो सर रिसर्च करने के साथ-साथ आप देखो ना कि जो डेवलप की है उन्होंने सारी स्टडी ऐसे
करी है कि उसके मॉल के बराबर में हयात हाउस है फायसा होटल बीच में मॉल रख दिया। मॉल के अंदर ब्रांड्स कौन से लाने हैं?
फुटफॉल क्रिएटर कौन से ब्रांड है? और
नॉर्थ ईस्ट डायरेक्शन में उन्होंने गार्डन बना दिया दो-दो एकड़ का जहां पे कि धूप नहीं आती। जहां पे लोग एंजॉय कर पाए आफ्टरनून के टाइम में और उन्होंने जितने भी सीईओस हैं या सीएफओस हैं उनके लिए ऊपर
से कार वॉक एरिया पूरा बना दिया कि डायरेक्टली वो ऊपर से जाएंगे। नीचे से पूरा कैब सर्विज का बना दिया। इधर से लॉकेबल कर दिया। पीछे से उन्होंने वैसे वाला कर दिया। एमएसी को दे दिया। उन्होंने
लीज़ भी सारा अंदर खाते तो लीज़ हुआ पड़ा है सारा का सारा है ना तो अब इस हिसाब से देखा जाए हयात यहां की डिमांड थी 137 अगर एक्सप्रेस पे देखोगे है ही नहीं कुछ नहीं है नोएडा में होटल ही नहीं है ढंग होटल नहीं
है तो यहां पे हयात हाउस बहुत ज्यादा चलेगा इतने फंक्शन है इतनी दुनिया तरह की चीजें हैं पार्टी गेट टुगेदर से आप चेक करो ना एक जिंजर बाय टाटा होटल एक्सप्रेसवे के
ऊपर 18 वाला बुक रहता है वही है लेमनरी बुक रहता है 18 का रेडिसजन का जो टेरेफ है ना वो 18000 19000 16000 आता है।
आप यही दिल्ली का रेड चेक करो। उसका 6000 है। 4000 है क्योंकि यहां पे ऑप्शंस नहीं है। ऑप्शन नहीं है। रेड एसेंस मोनोपोली क्रिएट करके बैठा हुआ है। सीआरसी जो आपने सजेस्ट करा मनीष भाई आप
क्या बताएं? देखो मेरी मेरी अगर मेरी अगर
क्या बताएं? देखो मेरी मेरी अगर मेरी अगर मैं रेड करूं तो मुझे लगता है कि सीआरसी
फ्लैकशिप वो बहुत बहुत थॉटफुल डिज़ है। वो पूरा एक इकोस सिस्टम है। ऑफिस स्पेसेस हैं, रिटेल स्पेसेस हैं। फ़ूड स्टोर्स बने हुए हैं। सायोग्राफी उसकी बहुत अच्छी है।
एंट्रेंस एक्सपीरियंस बहुत अच्छा बना रहे हैं। फ्रंट पे ज्वेलरी स्ट्रीट बना रहे हैं। इवेंचुअली कह सकते हैं 140 इमर्जिंग मार्केट है। क्योंकि ये एफएमजी पे लगी हुई मार्केट है। बट इसके अलावा इसके अलावा
एक और तो बताओ हमारी नॉलेज मुझे अच्छा लगता है लो टिकट साइज के लिए यूटिलिटी के हिसाब से अच्छा अगर प्रीमियम ऑफिस चाहिए आपको तो गुलशन 129 मुझे समझ
आता है कि एक अच्छी बिल्डिंग है इट इज बुकिंग भी मुझे अच्छा लगता है 153 एस का जो नया प्रोजेक्ट है वो उस उस बेल्ट में एक अच्छा काम करेगा वन एफएफजी मुझे आई लव द प्रोडक्ट इट इज वै
ब्यूटीफुल वन आई यस अगेन बहुत अच्छा लगा सर आज आपने टाइम दिया सबने और बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं आपके सबके चैनल हैं और बहुत अच्छा आप लोगों को देख
के मैं फॉलो भी करता हूं और कुछ सीखने हर आदमी से कुछ सीखने को मिलता है। ठीक है?
और सब अपने क्षेत्र में कुछ ना कुछ एक्सपर्टीज है और आप लोग जो एक्चुअल होता है ना आप लोग वो हो कि आप एक इनपुट दे रहे
हो व्यूअर्स को। ऐसा नहीं है कि प्रोडक्ट बेचना है। आप डे डेप्थ में जाके प्रोडक्ट के समझ रहे हो। और इतना इनसाइट मेरे को खुद सीखने को मिला है। आज मेरे को भी 20
साल हो गए इस इंडस्ट्री में। और आज मैं भी कुछ इनपुट लेके जा रहा हूं। थैंक्स यू। थैंक यू वेरी मच। होप हमारी जो ये कोशिश है बियों्ड द
हेडलाइंस विद मनोज गखर की जिसमें कि हम सोशल मुद्दे और जमीन से जुड़े हुए सच क्या रियलिटी सेक्टर में हो रहा है या सोशल
अवेयरनेस के जो मुद्दे हैं हम इसमें ले आते हैं और जो लोग जो इंस्पायरिंग स्टोरीज होती हैं, वह हम इसमें कवर करते हैं। आप
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