जगन्नाथ जी ने हनुमान जी को क्यों बाँधा? 😱 | चौंकाने वाली लीला | Hindi Animated Story
By Ai Story Right
Summary
Topics Covered
- पलायन नहीं, भगवान की शरण चुनो
- कीर्तन के प्रति हनुमान का अदम्य आकर्षण
- बेड़ियाँ नहीं, यह धाम से जुड़ाव है
Full Transcript
बहुत भागते हो। अब यहीं बंधे रहो। हनुमान के बच्चे। आइए इस कहानी को 3D एनिमेशन की मदद से
देखें। बहुत मजा आएगा। शुरू करते हैं। यार हमारे प्रभु यहीं पास ही रहते हैं और मैं उनको एक बार देखने तक नहीं गया। मुझे
उनके पास जाना चाहिए और अपना जल उनके चरणों में अर्पित करना चाहिए। बचा
प्रभु को प्रणाम। प्रभु आज आपको देखकर मैं धन्य हुआ। अरे आज तो मैं प्रभु के दर्शन करने गया ही
नहीं। ऐसे में मेरा नियम टूट जाएगा। प्रभु को प्रणाम। प्रभु आपको देखे बिना मैं रह नहीं पाता इसलिए हर रोज मैं आता हूं।
अरे आप इतना दुखी क्यों हो रहे हो? यह तो
हर बार का काम है। यह समुद्र लगता है हमें जीने नहीं देगा। हां, तुम सही कह रही हो। यहां हम जी नहीं पाएंगे। आखिर हर बार इस विनाशकारी बाढ़ से
कैसे बचेंगे?
हां, मैं भी वही कह रही थी। हम लोग यहां से चलते हैं। कहीं और जीवन यापन कर लेंगे। अरे ये लोग कहां जा रहे हैं? हमें पूछना
चाहिए इनसे। आप सभी कहां जा रहे हो? हम भगवान जगन्नाथ के पास जा रहे हैं। क्यों? वहां क्यों?
अरे यह समुद्र हर बार हम लोगों को परेशान कर रहा है। इससे हम तो नहीं लड़ सकते। लेकिन हमारे महाप्रभु तो जरूर लड़ सकते
हैं ना। वो हमारी पुकार जरूर सुनेंगे। अरे क्या तुम परेशान नहीं हो? तुम भी चलो हमारे साथ। हम सभी भगवान की शरण में चलते
हैं। वो जरूर बचाएंगे। अरे हमने तो यह सोचा ही नहीं था। हम तो यह स्थान ही छोड़ने की बात कर रहे थे। हां, अब नहीं छोड़ेंगे। चलो, हम भी
महाप्रभु के पास चलते हैं। वो जरूर मदद करेंगे। प्रभु आप तो जग की रक्षा करने वाले हो। हमारे कष्ट दूर करो।
स्वामी आपके भक्तों पर संकट आन पड़ा है और आप कुछ नहीं कर रहे। देवी मैं वही देख रहा था।
मुझे शीघ्र कुछ करना होगा नहीं तो अनर्थ हो जाएगा। यह समुद्र को कैसे रोकेंगे? यह तो हर बार पूरी में विनाश कर देता है।
स्वामी आप हंस रहे हो। यहां भक्त परेशान हो रहे हैं। मैं तो आपकी बातों से हंस रहा हूं।
शायद आप अपने परम भक्त को भूल गई हैं। अरे वही जो खेल-खल में सूर्य को खा गए थे। अरे हां स्वामी आप हनुमान की बात कर रहे
हैं। वो हमारा सबसे प्रिय भक्त है। हां हनुमान को बोल देते हैं। पता नहीं इस समय कहां होंगे। जल्दी खोजो उन्हें। खोजना क्या है?
तो फिर देखो मैं दिखाता हूं। प्रिय हनुमान शीघ्र मेरे पास आओ। कहां हो?
अरे मेरे प्रभु ने याद किया। मुझे शीघ्र जाना चाहिए। अरे मेरा पुत्र आ गया। प्रणाम प्रभु और माते आपने मुझे स्मरण
किया। हां एक काम था तो याद किया। प्रभु आज्ञा दीजिए।
वो क्या है? पूरी में समुद्र हर बार विनाशकारी लहरों से मेरे पास आता है। इससे
लोगों को बहुत संकट का सामना करना पड़ता है। तो तुम जाओ और समुद्र के किनारे बहरा
दो। समुद्रपुरी शहर में आने ना पाए। जो आज्ञा प्रभु अरे आज तो हनुमान यहां खड़े हैं। मैं कैसे
प्रभु के पास जाऊं? यह बहुत खतरनाक है। लो देवी हो गया काम। हनुमान के रहते समुद्र आने की हिम्मत ही नहीं करेगा।
हां स्वामी है तो आपका ही भक्त। सियाराम जय राम जय जय राम
अरे कहीं प्रभु का भजन हो रहा है मुझे जल्दी से जाना होगा बहुत मजा आएगा वहां जय जय राम
मंगल मूर्ति रम दुलारे आन पड़ी अब ला के रखवारे सियाराम
जय सियाराम जय राम जय जय राम
लगता है वो वानर चला गया है मैं जाता हूं प्रभु के चरणों को छू कर आता हूं हे प्रभु रक्षा करो।
प्रभु हनुमान तो कहीं चला गया। देखो फिर से भक्तों में संकट आ गया है। हनुमान मुझसे बिना पूछे कैसे चले गए। मैं देखता
हूं। हनुमान तुम कहां हो?
अरे प्रभु ने मुझे पुकारा। प्रभु आपने मुझे बुलाया। अरे हमने तुमको यहां पहरा देने को कहा था। फिर तुम कहां चले गए थे?
प्रभु पास ही आपका कीर्तन हो रहा था। मुझसे रहा नहीं गया तो वहां चला गया था।
ऐसे में तो तुम हर बार भाग जाओगे। माना कि हनुमान तुम्हें कोई रोक नहीं सकता। लेकिन आज से मैं तुम्हें कर्तव्य की
बेड़ियों में बांध रहा हूं। तुम हमेशा यहां लोगों की रक्षा के लिए रहोगे। जो आज्ञा प्रभु प्रभु आप यहां हैं। हनुमान किधर है?
देवी, वो हर बार भाग जाएगा। इसलिए मैं उसे जंजीरों में बांध आया हूं। मैंने ठीक किया ना। कहीं प्रभु पुत्र को कष्ट तो नहीं हो
रहा। आपने उसे बांध क्यों दिया?
अरे देवी वो जंजीरे छोड़ो। वो लोहे की जंजीरें नहीं है देवी। वो तो मेरी लीला की सीमा है। हनुमान को बांधा नहीं गया। उसे इस धाम से
जोड़ा गया है। वो कैसे प्रभु? जिस दिन वो स्वतंत्र रहेगा उस दिन समुद्र भी मर्यादा भूल सकता है। पर
जिस दिन वो बंधा रहेगा उस दिन हर लहर जान लेगी पूरी सुरक्षित है। आज से मेरा बल मेरा नहीं। मेरी स्वतंत्रता
मेरी नहीं। आज से मेरा हर श्वास पूरी के लिए है। मुझे लगता है यह वानर अब नहीं जाने वाला।
मैं इसे डुबो कर जाऊं क्या? अरे नहीं नहीं इसके पानी छू गया तो मुझे बहुत मारेगा। अब मैं नहीं जा रहा हूं।
ये भी उड़ीसा के श्री हनुमान बेड़ी मंदिर की कथा। आपको देखने में कैसा लगा? लिखकर
बताओ। अब महाप्रभु की अगली कहानी का इंतजार करें। लेकिन हां याद से चैनल को सब्सक्राइब कर लेना।
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