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Idea Se Parde Tak | Chapter 1 Idea | Kunal Pandey

By Kunal Pandey

Summary

Topics Covered

  • Апсны аемзгара арибзыни зегьыт!
  • Аблымтәыра и ахцәажыным ирыбзы
  • Аижыным ирыбз ирыбз а ахцәажыным
  • Асәтәным а ахцәажыным ирыбз
  • Уижыным экшны и катарсис

Full Transcript

कि Idea से पर्दे तक कैसे सोचता है फिल्म का लेखक राम कुमार सिंह सत्यांशु सिंह

का पहला आईडिया Idea लाइक रैबिट्स यू गेट और कपल एंड लर्न हाउ टो हैंडल थम एंड प्रीटी सून यू हैव

वर्ड्स इन जौंडिस टीम बैक पोंटिंग बैक चैंबर एक अ कि पिछली अत पिछले अध्याय को पढ़ने के बाद

आप यहां आए हैं तो ऐसा लगता है कि आपने फिल्म लेखक को बनने की इच्छा है उसके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे

में आप थोड़ा बहुत जान गए हैं और इन चुनौतियों के साथ आगे बढ़ने को तैयार है सिनेमा एक ऐसा माध्यम है जिसका आकर्षण

बहुत लोगों में होता है आप आस-पास देखेंगे तो कई लोग कहते मिलेंगे कि उनके पास एक कहानी है जिस पर फिल्म बन सकती है बनेगी

तो बहुत कामयाब होगी लोग उससे हमेशा देखते रहेंगे हर लेखक की इच्छा होती है कि वह

ऐसी फिल्म लिखें जिस जिस पर उसे गर्व हो ऐसी फिल्म कोई नहीं लिखना चाहता जिसे लोग ना देखना चाहे केवल अपने दोस्तों या

परिवार के लोगों को दिखाने के लिए को तेल में नहीं लिखता है तो वह कौन सी कहानियां है जिन्हें लाखों लोग देखना पसंद करते हैं क्या कोई

भी लेखक ऐसी यूनिवर्सल कहानी कहने की प्रतीक्षा हासिल कर सकता है जो देश और काम काल की सीमाओं को लांघकर

लोकप्रिय हो जाए फिल्म से पर्सनल कनेक्शन होना और उसी फिल्म का यूनिवर्सल होना कई

बार एक बात होती है दुनिया में सांस्कृतिक परंपराएं अलग हो सकती है लेकिन मानवीय

भावनाएं तो वहीं होती है इसलिए हमेशा उस विचार को चुनिए हमेशा उस विचार को चुनिए

जिसके बारे में आपको सबसे ज्यादा आत्मविश्वास हो कहानी की पृष्ठभूमि और भावभूमि से

भावभूमि से आप अच्छे से परिचित हो आपकी कहानी पर कोई भी सवाल अच्छे तो आपके पास

तुरंत जवाब होना चाहिए यह सबूत है कि आप कहानी के साथ जी रहे हैं [प्रशंसा] कि इस अध्याय में हम यह समझने की कोशिश

करेंगे कि किस तरह की कहानी पर फिल्म बनने की संभावना ज्यादा होती है जो कहानी आपके पास

है उस पर कोई निर्माता कोई एक्टर क्यों यकीन करेगा क्यों लोग करोड़ों रुपया यह बहुत सारा समय और ऊर्जा लगाएंगे कहानियां

लेकर बहुत लोग पहुंचते हैं वह आपकी कहानी क्यों चुनेंगे आपकी कहानी को किस पैमाने पर परखा जाना चाहिए हम यह जानने की कोशिश

करेंगे की शुरुआत Idea से होती है आपके पास आईडिया है लेकिन उत्सव उसका विस्तार कैसे

करें कि एक फिल्म की कहानी बन जाए जैसे आपको एक साइंस फिक्शन लिखना है तो आगे कैसे बढ़े मां या बेटे के रिश्ते पर स्लिम

लिखनी है अगला कदम क्या होगा आपने सोचा जैसलमेर जैसलमेर फोर्ट पर कहानी होनी चाहिए या देश के

एडिशन सिस्टम पर आप एक फिल्म लिखना चाहते हैं तो इस फिल्म से आगे कैसे बढ़ेंगे क्या

यह मुमकिन है कि रोजाना आप एक विचार सोचें और तय करे कि उसको देर-सवेर फिल्म की कहानी के रूप में विस्तारित करना है आपके

दिमाग में कोई कहानी है तो कौन सा माध्यम उस कहानी के लिए सबसे अच्छा होगा में तेल में लिखी जाए उपन्यास लिखे या

आपको नाटक लिखना चाहिए आप बहुत सारी कहानियां पढ़ते हैं उपन्यास भी पड़ते हैं तो यह कैसे तय किया जाए कि उसमें फिल्म की

संभावना कैसी है कि इस अध्याय में हम उन महान और लोकप्रिय

फिल्मों के बारे में जानेंगे जानेंगे जिनको बनाने वाले फिल्ममेकर उन पर गर्व करते हैं हम उन फिल्मों के बारे में नहीं

पड़ेंगे जो मूलतः खराब फिल्म में है लेकिन लोग लेकिन लोकप्रिय हो गई है उन्होंने पैसा भी कमाया है हम उन फिल्मों के जरिए

फिल्म लेखन को समझने की कोशिश नहीं करेंगे इसी तरह कुछ फिल्में अच्छी होती है महान भी होती है लेकिन

लोकप्रिय नहीं हो पाती हम फिलहाल ऐसी फिल्में फिल्मों की बात नहीं करेंगे शुरू में उन फिल्मों का जिक्र करेंगे जो महान

है और बहुत लोकप्रिय भी है संदेश और समय की सीमाओं से परे पसंद की जाती है हम काफी उदाहरण लगान से देंगे

प्लग युक्त रेट क्रिकेट पर बनी एक लंबी फिल्म है भारतीय फिल्म है लेकिन वह स्विट्जरलैंड से लेकर अमेरिका तक में

लोगों के लोगों ने काफी पसंद की जहां लोग आमतौर पर हमारी फिल्में देखते नहीं है वहां क्रिकेट इतना लोकप्रिय नहीं है

में तेल में भी इस फिल्म फिर भी इस फिल्म को लोगों ने दिल से सराहा है इसका मतलब उस फिल्म में कुछ बात तो है जो सांस्कृतिक

सीमाओं को लांघकर में लोकप्रिय हुई है कि हम ट्रेन की बात करेंगे जो 2014 में

रिलीज हुई हम बात करेंगे टाइटेनिक और द मैट्रिक्स कि यह दोनों ऐसी फिल्म है जो

पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय है हम का सारा का सारा ब्लॉक का की बात करेंगे

सिटीजन के इनकी व कम हम 10 सैनिक रिडेंप्शन की बात करेंगे पल्स शिक्षण की

कम इसका मतलब यह नहीं कि यह फिल्म में एक दूसरे से कम या ज्यादा है बस शुरुआती तौर

पर यह अध्याय समझने के लिए हम ऐसा करेंगे कि फिल्म के किसी विक्स किसी भी विचार में

छह अवयव होने चाहिए आगे के अध्याय में इन्हीं 6 जरूरी तत्वों का विस्तार होंगे

इसलिए एक बार यहां हम संक्षेप में इनकी बात करेंगे और आगे चलते हुए हम विस्तार

में जाएंगे इस अध्याय में हम उन महान और लोकप्रिय फिल्मों के बारे में जानेंगे जिनको बनाने वाले फिल्ममेकर तुम पर गर्व

करते हैं हम उन फिल्मों के बारे में नहीं पड़ेंगे जो मूलतः खराब फिल्म में है लेकिन लोकप्रिय हो गई है

का पहला अ कि फिल्म के किसी भी विचार मुख्या होने

चाहिए आगे के आगे के अध्ययन इन्हीं 6 जरूरी तत्वों का विस्तार होंगे इसलिए एक

बार यहां हम संक्षेप में इनकी बात करेंगे और आगे आगे चलते हुए इस हम विस्तार में

जाएंगे पहले आखिर किरदार कैरेक्टर्स हर कामयाब और अच्छी फिल्म में एक दो या तीन यादगार किरदार होते हैं ऐसे चरित्र होते

हैं जो हमारे दिल को भी भव्य दिल को भा जाते हैं उनके साथ हमें हंसना रोना

पसंद है उनकी कामयाबी हम कामयाबी पर हम तालियां बजाते हैं पर्दे पर जब वे दुखी

दिखते हैं तो हम भी दुखी होकर आंसू बहाते हैं यानी अगर सफल फिल्म का यह में का एक नियम है

जिनको हमें मानना चाहिए तो वह यह कि आपकी फिल्म के किरदार का दर्शकों के साथ एक

रिश्ता बन जाए यह रिश्ता बनेगा तभी बनेगा तभी तो आप दर्शकों को अपनी कहानी के भीतर

घुसा कर उनको वह सब महसूस कराने में कामयाब कामयाब होंगे जो आप चाहते हैं या

उदास यानि मेमोरेबल चरित्र बनाने कैसे हैं यह हम आगे के अध्ययन में आप देखेंगे लेकिन यह गुण आपकी चरित्र में

होना चाहिए कि दर्शक उसके साथ अपना संबंध स्थापित कर सके दर्शक इनकी प्रशंसा करें तो काफी नहीं होगा गौर करिए कि हम प्रशंसा

के प्रशंसक इन लोगों की करते हैं पसंद किए जाने वाले लोगों लोग कैसे होते हैं उन किरदारों में कोई सकारात्मक

बात होती है कुछ मानवीय गुण होते हैं जिन्हें हम आम तौर पर पसंद करते हैं जैसे

कोई इंसान बहुत साहसी और हिम्मतवाला है तो हम कहते हैं देखो यह बड़ा कमाल का लड़का है या कोई ऐसा किरदार है जो बहुत बढ़िया

गाना गाते हैं किसी का सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है मैं किसी का सेंस ऑफ ह्यूमर ट्यूमर है

लिए बहुत अच्छा है जैसे हमारी मां बहुत अच्छा खाना पकाती है तो हम उनकी इस खूबी

की इस खूबी पर बात करते हैं उनके किसी भी गुण की वजह से हम उन्हें पसंद करते हैं

कि हम लोगों को पसंद करते हैं उनके गुणों से लेकर उनसे हम उनके साथ जुड़ाव उन चीजों

के लिए महसूस करते हैं जो उनके पास नहीं है या तो वह उनसे छीन गई है छिन गई है

पीछे छूट गई है या फिर उनके मन में उन चीजों को पाने की अभिलाषा है मान लीजिए एक

आदमी अमीर है मेहनत करता है इमानदार है उसका बहुत अच्छा परिवार है अपने बच्चों को अच्छे से फैलता है समाज में उसकी इज्जत है

पिसा आदमी कि आप भी इज्जत करते हैं लेकिन जब आपको पता चलता है कि जब मैं छोटा बच्चा

था तो उसके सगे भाई की मौत हो गई थी वह आज भी उस दुख से उबर नहीं पाया वह यही कामयाब

आदमी आपके लिए रिलेटेबल हो गया है किसी अपने को खोने का दुख पूरी दुनिया में हर समाज की संवेदना को प्रभावित करता है जो

चीजें उस आदमी के पास है उसके लिए वह आपकी पसंद और तारीफ के लिए काफी है लेकिन जो

उसके पास नहीं है उस बात को लेकर वह आपके लिए रिलेटेबल हो गया है कि आप उससे जुड़ जाते हैं ऐसा भी हो सकता

है कि इस आदमी में सब कुछ वैसा है जैसा हमने कहा था कहा है लेकिन खुद इसके घर में

बच्चे उसकी इज्जत नहीं करते वह तुरंत हमसे रिलेटेबल हो जाएगा बचपन में नहीं मरा

कि इसके बच्चे भी इसकी इज्जत करते हैं लेकिन उसके दिमाग क्या है उसके दिमाग में

सवालों चलते रहते हैं कि इस दुनिया में क्यों आया हूं जीवन का मतलब क्या है क्या

यही जीवन है मृत्यु के बाद क्या होगा जब मुझे अंकिता मरना मरना ही है तो मैं यह सब

क्यों कर रहा हूं अगर उसके दिमाग में यह सब चल रहा है कि हम उस आदमी से खुद को इसलिए रिलेट कर

पा रहे हैं कि उसके पास इन सारे सवालों के जवाब है जवाब नहीं है है लेकिन यहां पर हम थोड़ा कम रिलेट करते

हैं जबकि किसी अपने के खो जाने वाली घटना में कुछ ज्यादा रिलेट कर पाते हैं है इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप के

किरदार में कोई बहुत बड़ी ख्वाहिश हो उसके जीवन में कोई बड़ी कमी है कमी हो इसके

बारे में और ज्यादा बात हम चरित्रों के विकास वाले अध्याय में करेंगे यहां तक आपको यह समझना जरूरी है

जरूरी है कि यह समझना जरूरी है कि कि वे चरित्र जब हमारी पटकथा का हिस्सा

बनकर है सिनेमा में आएंगे तो वह यादगार चरित्र के तौर पर याद किए जाएंगे

और दूसरा हर कहानी एक यात्रा है फिल्म की कहानी एक यात्रा है यात्रा से आशय यह है

कि आप के किरदार की कहानी में एक शुरुआत होनी चाहिए वह ही से चलते हुए वह पूरी

होगी अंत तक पहुंचेगी यह यात्रा शिष्य शरीर हो सकती है जैसे आप का किरदार पृथ्वी

से अंतरिक्ष में गया और लौटकर आया वह कोई साहसिक यात्रा पर निकला और हिमालय की चोटी

पर जाकर और हिमालय की चोटी पर जाकर वापस आया या आपके किरदार

एक जहाज में बैठकर पूरा अंत अटलांटिक सागर पार करते हुए इंग्लैंड से अमेरिका जा रहे

हैं या आप की नायिका है दिल्ली की जो अकेले हनीमून पर यूरोप जा वापस लौटकर आई है दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे इस कि

राज और सिमरन है जो लंदन से निकलकर यूरोप घूमते और वापस लंदन आते हैं और फिर पंजाब

आ जाते हैं तो यह एक फिजिकल यात्रा हो गई अब आप कहेंगे कि लगान का भुवन तो पूरे समय

चंपानेर में ही रहा तो जरूरी नहीं है कि हर किरदार की एक फिजिकल यात्रा हो कुछ

यात्राएं मानसिक भावनात्मक भी होंगी जैसे कोई किरदार जो लेखक बनना चाहता है

लेकिन उसके पिता ही उस पर अंकुश लगाए हैं एक दिन वह साहस बटोरकर पिता के घर से बाहर

निकल पड़ता है यह फिल्म उड़ान की कहानी है एक यात्रा है लेकिन उनके अंदर की यात्रा

ऐसी भी मुमकिन है जिसकी सामा मैं आशा में अहमियत हो जैसे भवन एक क्रांतिकारी किरदार है

मैं अपने गांव के लिए एक जंग लड़ता है उसकी यात्रा का सामाजिक राजनीतिक महत्व है

टेक और बात यह याद रखने की है कि यात्रा सीधी सपाट और आसान नहीं होने चाहिए इसमें

बहुत सारी बाधाएं और समस्याए होने चाहिए कि यात्रा में संघर्ष नहीं तो ड्रामा नहीं सिनेमाई भाषा में इसे कनफ्लिक्ट कहते हैं

आप सुबह उठते हैं नाश्ता करते हैं काम पर जाते हैं शाम को घर आते हैं और खाना खाकर सो जाते हैं आपकी लाइफ में कोई भी

कांटेक्ट नहीं है तो आपकी जिंदगी में किसी भी किसी को भी दिलचस्पी नहीं होगी लेकिन

एक दिन आप सुबह उठते हैं तो देखते हैं कि गैस सिलेंडर खत्म हो गया है नाश्ते का

इंतजाम नहीं हो सकता आप बाहर दुकान में कुछ खाना चाहते हैं लेकिन आज दुकान भी नहीं खुली है इस भागम-भाग में आप ऑफिस में

देर से पहुंचते हैं के सामने बॉस टकरा जाते हैं बॉस आंख आपको आखरी वार्निंग देता है कि अगर एक दिन फिर

तुम लेट हुए तो तुम्हारा तब तबादला हो जाएगा आप तय करते हैं कि आज बॉस के सामने

खुद को साबित करके दिखाऊंगा जैसे-तैसे कैंटीन से सैंडविच खाकर आप आज कि काम पर

अपने काम में जुट जाते हैं आज शाम को बहुत को फाइल दिखाते हैं तो वह आपके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आती है वह

कहता है तुम्हारे बिना इस ऑफिस में कुछ नहीं हो सकता आपको अशोक अर्गल घर लौटते हैं तो याद आते हैं कि घर में गैस सिलेंडर

में गैस तो है ही नहीं अब खाना कैसे बनेगा इस कहानी में किसी की भी दिलचस्पी सीधी-सपाट कहानी की तुलना में ज्यादा होगी

जब आपको कहानी का अंत पता नहीं है ताप नहीं कह सकते कि आपके पास एक फिल्म बनाने

के लिए मुझे बिल ब्रेंबल कहानी है कि आपकी कहानी ड्रामाटिक नहीं लग रही है

तो उसका कारण है उसमें कांटेक्ट नहीं है पाइप लगा उनको लीजिए जब भवन से कप्तान

रसेल ने कहा कि हमको क्रिकेट में हराव तुम्हारा लगान माफ कर देंगे तो भवन के शर्त मंजूर करते ही गांव वाले उसको सर पर

उठा लेते हैं है उसको गांव में इज्जत कि देते और कहते हैं कि भवंतु हमारा मर्सिया है

सब खड़े हो जाते हैं हम भी खेलेंगे उनमें से भवन 11 लोगों को चुनता है कि सारे ही बेहतरीन खिलाड़ी होते हैं

कि टीम बनती टीम के दलित खिलाड़ी पर किसी को भी कोई भरोसा नहीं होता एक टीम बनाकर बनकर तैयार होती तो वे कहते

हैं हम 3 महीने क्यों इंतजार करें अगले संडे मैच कर लेते हैं खेल शुरू होता एक एक ही दिन में खत्म हो जाता तीन दिन चलता भी

नहीं एक बड़ी आसान आसानी से गांव वाले मैच जीत

जाते हैं लगान में यह हुआ होता तो हमें देखने में बिल्कुल मजा नहीं आता गांव

खुशहाल रहता भवन को भी इतना कष्ट नहीं हुआ होता लेकिन इस कहानी में ड्रामा नहीं होता

वजह एक ही है कनफ्लिक्ट नहीं है याद रखिए कहानी एक यात्रा है यात्रा जितनी बाधाओं

से भरी हुई होगी थ्रो को इस बाधा को पार करने में जितनी तकलीफ से आएगी

दर्शकों को उतना ही मजा आएगा है तीसरा कहानी का तार्किक अंत सोचिए फिल्म की कहानी का अंत सही होना चाहिए

दर्शक को लगना चाहिए कि यही सबसे अच्छा अंत है उसको इसी तरह से शामिल हासिल किया

जाना चाहिए अंत में आप अपनी फिल्म के दर्शक को संतुष्ट नहीं कर पाए तो लोग आपकी फिल्म को बहुत ज्यादा नहीं सर आएंगे समय

निकालकर दो-तीन घंटे तक दर्शक बैठा है अगर उसको कहानी के अंत में मजा नहीं आया तो खुद को ठगा हुआ सा महसूस करेगा मतलब कतई

यह नहीं है कि हर कहानी को हैप्पी एंडिग होनी चाहिए कि हर कहानी सुकांत नहीं होती दुखांत भी हो सकती है लेकिन उसका एक मजबूत

आधार आप की पटकथा में होना चाहिए जिस वक्त आप फिल्म का आइडिया सोच रहे हैं उसी दिन आपको फिल्म का अंत पता होना चाहिए अगर

आपको फिल्म का अंत क्लियर नहीं है है तो पहले उसे स्पष्ट करिए तार्किक अंत सोचिए तो उस दिन अगर आपको कम कहानी का अंत

पता नहीं है तो अगले दिन सोचिए उससे अगले दिन सोचिए एक सप्ताह के भीतर सोचिए लेकिन जब तक आपको कहानी का अंत पता नहीं है आप

नहीं कह सकते कि आपके पास एक फिल्म बनाने के लिए मुकम्मल कहानी है अंत इससे अंत से

ही पता चलेगा कि आपके विचार पर कैसी फिल्म बनेगी उसका भावनात्मक प्रभाव क्या रहेगा तभी समझ में आएगा कि आप क्या कहना चाहते

हैं कि आपका नजरिया क्या है एक अच्छा अंत यानि क्लाइमैक्स कैसा कैसे बनाए जा सकता है यह

हम आगे के अध्यायों में समझे समझने की कोशिश करेंगे चौथा सेटिंग्स क्या है

कि फिल्म Idea की चौथी फिल्म Idea की 34 जरूरी बात है सेटिंग को कि मुंबई में आप जब भी किसी कलाकार या

निर्माता को सीधे कहानी सुनाने लगेंगे तो वह पांच-सात मिनट बाद बीच में आपको रोककर

पूछेगा सेटिंग क्या है इसका मतलब है आपने कहानी कब और कहां सेट की है कहानी किस

परिवेश में हैं यह जाने बिना कभी आप अपने विचार को लॉक ना करें अ ब्लूटूथ सेटिंग के चार जरूरी भाव होते हैं

पहला है स्थान यानी भौगोलिक रूप से आपकी कहानी कहां की है है ताकि फिल्म एक लव स्टोरी कॉलेज में

लड़का-लड़की के बीच प्यार हो जाता है है तो वह कॉलेज के शहर में है कि वह बड़े शहर का कॉलेज है क्या छोटे शहर

का दिल्ली मुंबई का कॉलेज है या बरेली का वह जयपुर में है या गांव का एक छोटा सा कॉलेज है या वह भारत से बाहर है जहां यह

दोनों प्रेमी मिलते हैं कि वह लड़का लड़की इंडियन अधीन है कि नहीं

यह कहानी एक जहाज में सेट है यहा या हवाई जहाज में क्या आपकी कहानी किसी दूसरे ग्रह

ग्रह पर है अंतरिक्ष में है कि चांद पर है वह किसी गैलेक्सी पर है कि समंदर के बीच

एक आयरलैंड पर वह कहानी वह अंटाकर्टिका में है या किसी स्पेस स्टेशन में है किसी

पहाड़ पर है या गुफा में है वह एक कोर्ट रूम में है कि घर में या एक ही कमरे में पूरी कहानी सेट है वह ताबूत के अंदर है या

फोन बूथ के अंदर चैटिंग का दूसरा जरूरी हिस्सा है समय वह

आज की कहानी है या पिछले दशक की वह आजादी से पहले की कहानी है कि आजादी के तुरंत बाद कि अ कि इतिहास के किसी कालखंड में शापित है

जैसे मुगल काल या वह कहानी अंग्रेजी राज के दौरान की है वह कहानी

गौतम बुद्ध के समय की है कि हड़प्पा या वैदिक काल की वह आज से 10 साल बाद की है

50 साल बाद की है या दो सौ साल बाद की कहानी है अब अगर वह आज की कहानी है तो किस मौसम की कहानी है वह गर्मियों की कहानी है

कि सर्दी कि वह मानसून की कहानी है यह वसंत की या फिर सारे ही मौसमों की कहानी

है यानि समय की सेटिंग्स बहुत जरूरी है आम तौर पर लोग जब Idea सोचते हैं तो सेटिंग

के पास बारे में नहीं सोचते हैं कि आप यह नहीं सोचते हैं तो आपके सेल में मौलिकता

लाने का एक आसान सा तरीका आपसे छुट जाता है अगर एक अमीर लड़की और

गरीब लड़के की लव स्टोरी है तो आप कहेंगे यह तो वही पुरानी कहानी है है लेकिन जब यह बताएंगे कि यह भविष्य के

भविष्य में एक अंतरिक्ष स्टेशन में सेट है तो तुरंत है Idea उतना पुराना नहीं लगेगा इसलिए आप चैटिंग का इस्तेमाल

विचार के स्तर पर ही करेंगे तो आपके पास कहानी को मजेदार बनाने का मौका रहता है

सेटिंग के लिए दी तीसरी खास बात है समय संभव समय अवधि समय अवधि समय अवधि समय अवधि

कितने दिनों की कहानी है क्या वह किसी के जन्म से लेकर मृत्यु तक की कहानी है वह

किसी जिंदगी के चार साल की ही कहानी है कुछ ही महीनों की कहानी है कि कुछ हफ्तों

कि एक हफ्ते की है कि विकिरण की है वह बस एक रात की कहानी है या केवल कुछ घंटों की

कुछ फिल्में real-time कहानी ही है पिछले सालों में एक फिल्म आई विक्टोरिया फॉर अल्फ्रेड हिचकॉक की रूप

इनकी real-time कहानियां है यानी जितनी देर हम पर्दे पर फिल्म देख रहे हैं

है उतनी ही देर की इसलिए ध्यान रखिए कि आपकी कहानी के समय का दायरा क्या है इसे

आप जितना छोटा करेंगे युक्त कहानी उतनी ही मजेदार हो सकती है कि जैसे दो दोस्तों की कहानी को 5 साल में

फैलाएंगे तो बहुत ही घटनाओं पर निर्भर रहना पड़ेगा लेकिन आप कॉलेज लाइफ में लेकर

उसकी उनकी कहानी वहीं खत्म करते हैं तो वह कम चुनौतीपूर्ण होती है

कि स्टीव जॉब्स पर आफ लॉर्ड स्टीव जॉब्स देखिए ऐसी फिल्म में आम तौर पर उनके जन्म

यह कॉलेज से निकलने की कहां घटना से फिल्म शुरू करते हैं लेकिन इस फिल्म में उनके जीवन के तीन चार महत्वपूर्ण

दिनों के पीछे की कहानी कही गई है जब उन्होंने स्टेज पर आकर कुछ घोषणाएं की फिल्म की सेटिंग इसको अलग मौलिक नजरिए

वाली फिल्म बना देती है चैटिंग के लिए चौथी महत्वपूर्ण बात है कहानी का सामाजिक

व सांस्कृतिक परिवेश फिल्म स्क्रीन की कहां पिन की कहानी को आप 1950 के विहार में स्थापित कर सकते हैं कि

1950 के बिहार में हनीमून के अवधारणा अटपटी लगी ना ही उस दौर में लड़की अकेले यात्रा पर जा सकती थी ना ही लड़का

शादी से ठीक एक दिन पहले मना कर सकता था कि वह दिन नहीं करेगा कि वह शादी नहीं करेगा

कि यह कहानी नियोक्ता एक लड़की की कहानी भी नहीं हो सकती कि जिसमें कभी अकेले यात्रा ही नहीं की हो

लेकिन दिल्ली की एक मिडिल क्लास लड़की अपने हनीमून हनीमून पर अकेले निकलती है तो कुछ बात बनती है इसलिए

सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश किसी भी कहानी के लिए महत्वपूर्ण होता है का पांचवा विजुअल एक्शन कला से कहानी के

पांचवें जरूरी बिंदु पर आते हैं आप जान जाएंगे कि एक उपन्यास फिल्म या नाटक में अंतर क्या है फिल्म की कहानी की जो यात्रा

है कनफ्लिक्ट है जो विजुअल एक्शन पर निर्भर होना चाहिए आपको फिल्म की कहानी को दृश्यों में सोचना चाहिए

कि अगर वह दृश्यों में ज्यादा बातचीत पर निर्भर है तो नाटक है इस बातचीत पर निर्भर है तो नाटक है अगर वह

बातचीत से ज्यादा एक आदमी के दिमाग में क्या सोच रहा है इसका विस्तार है तो वह उपन्यास है

कि किसी ने कहा कि इन और नोवेल दे थिंग इन तीन आज प्ले द टॉक इन मूवी डूब आप नाटक

देखने देते हैं आप नाटक देखने जाते हैं स्टेज पर एक एक्टर आता है और आधा घंटे तक

सोचता है सोचता ही रहता है तो आप उस परेशान हो जाएंगे लेकिन वह इंसान क्या सोच रहा है इस पर आप पूरा उपन्यास लिख सकते

हैं है ऐसे ही मान लीजिए किसी पर्वतारोही की कहानी है मैं इसको नाटक में दिखाने में

आपको बहुत तो समस्या आएगी तो रंगमंच पर आप पहाड़ कैसे बनाएंगे और कैसे दिखाएंगे कि

गिरते-गिरते बचा उस पर उपन्यास भी लिखा जा सकता है लेकिन सबसे अच्छे ढंग से उस पर

फिल्म बनाई जा सकती है फिल्म में आपको कम से कम बोलना होगा जो परदे पर होगा वह सब नजर आएगा

हुआ है कि हम लेखक होने के नाते सोचते हैं कि एक लेख एक आदमी के पास कहने को बहुत कुछ है

जरा सोचिए कि क्या उस कहानी को जजों के जरिए बेहतर कहा जा सकता है यह शब्दों के

जरिए हर उपन्यास पर हमेशा एक बेहतर फिल्म नहीं बनी बनती है जैसे एक दास ने के जीवन

पर फिल्म बनाएंगे तो ज्यादा चुनौती चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जबकि एक नर्तक जानी डांसर के जीवन की कहानी कहेंगे

तो ज्यादा आसान होंगे आपकी कहानी विजुअल एक्शन वाली होनी होगी तो वह सिनेमा के लिए ज्यादा बेहतर होगी

चेंज 1 ईरानी फिल्म है सॉन्ग आफ पैरंट्स यह कहानी एक अधेड़ आदमी की है जो अपनी

नौकरी में कुछ गड़बड़ कर देता है उसको नौकरी में निकाल नौकरी से निकाल दिया जाता है वह एक गरीब आदमी हैं अपने परिवार को

कैसे पाले यह कहानी है कि वह नौकरी में क्लर्क हो सकता है कि

उसमें डॉक्यूमेंट में कोई कि उसने डॉक्यूमेंट में कोई गलती कर दी वह गलती आप कैसे दिखाते हैं आप समझा सकते हैं लेकिन

दिखाते-दिखाते कैसे हो को दिखाएं कैसे उसको चपरासी भी बना सकते

हैं कि चाय दे रहा था और चाय फैलने से बॉस की शर्ट खराब हो गई और वह और

फॉर बॉयस नाराज हो गया था तो हैं तो यह कहां कम से कम दर्शकों को नजर

तो आया लेकिन एक फिल्म में वह का आदमी एक शुतुरमुर्ग शुतुरमुर्ग अ

थे फर्म में काम करता है उन पक्षियों को खाना खिलाता है उनकी देखभाल करता है उनके

बड़े-बड़े अंडों को हाथ में रखकर चलता है वहां उसके काम की मुश्किलें आपको नजर आ

रही है किसी को बताने की जरूरत नहीं है एक दिन उनमें में से एक शुतुरमुर्ग भाग निकलता है अब वह

उसके पीछे भागता है हैं अब वहां इन उसमें जो गलती की है उस

तुअर ना तो डायलॉग में बताने की जरूरत है और ना बताने है और ना यह बताने की है कि यह

उस अ नायक के दिमाग में क्या चल रहा है सब कुछ विजुअल एक्शन के जरिए समझ में आ रहा

है आप यह भी कह सकते हैं कि बहुत सारी ऐसी फिल्में हैं जिनमें दो के जार तो सिर्फ

बातचीत ही किए जा रहे हैं यह सब यह सच है लेकिन ऐसी फिल्मों की संख्या सीमित है ऐसी

फिल्में लिख लिख पाने वाले लेखक भी कम है अगर आप ऐसी फिल्म लिख सकते हैं तो बहुत अच्छी बात है लेकिन एक साधारण नियम के तौर

पर हम मानते हैं कि विजुअल एक्शन पर ज्यादा निर्भर रहे थे से ज्यादा निर्भर रहे थे

मैं अपनी कहानी को दृश्यों में सोचें कि कैथार्सिस यानि विरेचन सिनेमा की कहानी

के लिए छठी सबसे जरूरी बात है कथा व्यास के तार राशि के चांसेस बहुत से लोग हॉरर

फिल्म देखना पसंद करते हैं रियल लाइफ में तो हम ऐसा बहुत ऐसा कुछ नहीं देखना चाहते

हम एक्शन थ्रिलर थ्रिलर फिल्में देखना क्यों पसंद करते हैं जिसमें हमेशा नायक की जान को खतरा होता है कई बार रुलाने वाली

फिल्म में भी हमें पसंद आती है कि कुछ फिल्म में कुछ फिल्मों में हमारा खून खोल उठता है जो फिल्मों जो फिल्में

हमको हंसाती है वह तो समझ में आती है लेकिन दूसरे सिनेमा भी तो दर्शकों को अच्छा लगता है कारण यह है कि आदमी की

मूलभूत जरूरतें होती है जैसे ऑक्सीजन पानी भोजन से एक और घर यह सारी चीजें उसे अपनों

का साथ चाहिए इन्हीं उसे अपनों का साथ चाहिए इन्हीं सबकी जरूरतों से एक बड़ी एक

बहुत बड़ी जरूरत है विरेचन विरेचन वह अनुभव है जिसमें आपको लगता है कि सारा

तनाव एकदम से बाहर आ गया है हल्का महसूस करने लगते हैं चिकित्सा विज्ञान में पेट

साफ व करने के लिए दी जाने वाली दवाइयों को विरेचक कहते हैं कि यह दवा खाने के बाद

पेट साफ व होने पर आप बहुत राहत महसूस करते हैं इसलिए विरेचन उस अवस्था का नाम

है कि आप किसी मर्द से पीड़ित है उससे मुक्त होते हैं यही अंग्रेजी में कैथल से इस है

संस्कृत साहित्य में इसे ब्रह्मानंद सऊ सऊ उधर कहा जा कहा गया है

यानी सुख की चरम अवस्था में है जैसे आप मित्रों के साथ बैठे हैं अचानक

किसी बात पर बहुत जोर जोर से हंसने लगे इतना से की पेट में दर्द होने लगे तो

कि जब वह हंसी खत्म होती है तो लगता है कि कि यह तो और मिलना चाहिए इस

कि यह खेता के खार से टॉप चौडे है है यानी खुशी का विरेचन है तैसे ही डर का

विवेचन हैं कि आप किसी एडवेंचर ट्रिप पर जाते हैं जंगल में आपके सामने शेर आ जाता

है कि आप उससे बचकर भाग निकलते हैं उसके बाद आपको लगता है वाह यह क्या अनुभव

था अ कि क्रोध का विरेचन भी होता है आप कई दिनों से किसी बात पर गुस्सा दबाए बैठे

हैं एक दिन वह फट पड़ता है में हाथापाई तक आप कर डालते हैं

है इसके बाद हल्का महसूस करते हैं कैथल से साफ शहरों चौरों मैं तो एकदम विलक्षण अनुभव है आप मन में

कोई दुख दबाए बैठे हैं किसी से कह नहीं पा रहे हैं बर्दाश्त करने की कोशिश कर रहे हैं एक दिन चुपके से कोई पूछता है कि क्या

प्रॉब्लम है कि आप रो पड़ते हैं आधे घंटे तक आप रोते रहते हैं

कि जब खत्म होता है तो आप अंदर से काफी बेहतर महसूस करते हैं जैसे एक बॉयज उतर

गया विरेचन यही मेहसाणा से खाने-पीने कि ऑक्सीजन या सेक्स की तरह जरूरी है है

लेकिन हम इसके बारे में जागरूक नहीं है हमारा सामाजिक ढांचा भी इन अनुभव से हमें

दूर ही रखने की कोशिश नहीं है कि हमारा सामाजिक ढांचा कि इस इन अनुभवों

से हुए दूर ही रखने की कोशिश करता है यह क्या तुम बच्चों की तरह रो रहे हो ऐसे दांत दिखाकर मत हंसो है

कि फिल्म इमोशन के स्तर पर बहुत ज्यादा कुछ नहीं दे पा रही है तो समझ लें कि हम अपनी कहानी में बहुत कुछ मिस कर रहे हैं

के लोगों को इंप्रेस करने की कोशिश मत करिए उनके दिल को छूने की कोशिश करिए

मैं तुमको क्या इन छोटी-छोटी चीजों से डर लगता है पूरा पूरे समाज मां-बाप घर परिवार

सब ने ऐसा मानसिक तंत्र विकसित कर रखा है कि हम विरेचन के अनुभव से दूर रहे दूसरी

बात यह कि धूप खुशी के दूसरे चरण के अलावा क्रोध भय और दुख जैसे विरेचन हम जीवन में

प्रत्यक्ष अनुभव नहीं करना चाहते लेकिन उनकी जरूरत तो है इसलिए कहानियां एक

सरोगेट माध्यम बन जाती है जो हमें अलग-अलग तरह के विरेचन का अनुभव कराती है रंगमंच में विरेचन सिद्धांत प्राचीन यूनानी

नाटकों में कि अरस्तु के जमाने से चलता आ रहा है कहानी में किरदार डर रहा है हम्म उसको

देखना डर देखकर डर रहे हैं वैसे एकदम सुरक्षित वैसे एकदम सुरक्षित है कहानी में किरदार के पिता की मौत हुई है हमारे पिता

घर में भले चंगे हैं लेकिन बिना अपने पिता को खो जाए हमने पिता की मृत्यु को महसूस कर लिया सिनेमा में यह ताकत है कि वह चार

पांच सौ लोगों को एक कमरे में बिठाकर सामूहिक विरेचन का अनुभव करवा सकता है यह

फिल्म की ताकत तो है ही दायित्व भी है फिल्म प्रमोशन के स्तर पर बहुत ज्यादा कुछ

नहीं दे पा रही है तो समझिए कि हम आप अपनी कहानी में बहुत कुछ मिस कर रहे हैं ये दुनिया में लोगों को प्रभावित करने

वाले सोचने को मजबूर करने वाले बहुत लोग हैं राजनेता कुछ बोल रहे हैं धार्मिक नेता

कुछ बोल रहे हैं खिलाड़ी खेल रहे हैं विद्वान और कलाकार अपनी बातें बोल रहे हैं

और उनकी बातों से सहमत सहमत हुए सिर इस खिलाफ खेलते हुए हम आगे बढ़ जाते हैं

लेकिन हंसाने रुलाने डराने वाले विरेचन के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं विरेचन महत्वपूर्ण लेकिन मुश्किल काम है जो

कलाकार के जरिए होता है और सिनेमा यह तो सब गलत कलाओं का मिश्रण बहुत ताकतवर माध्यम है

कि अगर किसी ने कोई बहुत बहुत दिलचस्प बात कही है तो सोचने के लिए मजबूर करने वाली किसी भी घटना

वक्तव्या मनसा पर आदमी कहेगा कि हां यह बहुत जरूरी है और विचारणीय है मैं इस्पात

इस पर गौर करूंगा लेकिन अगर किसी ने माहौल बना दिया है कि आप हंसे या रोए या भाव खो

जाए या डर जाएं तो यह नहीं कह सकते कि मैं इस बात पर थोड़ी देर पर थोड़ी देर बाद हंस

लूंगा जा रो लूंगा जा थोड़ी देर बाद डर जाऊंगा वह सब तुरंत होता है हम लेखों की

जिम्मेदारी है कि निर्देशक कि यहां तक मदद करें कि वह पटकथा पर इस तरह की फिल्म रच

पाए जो 11 ही थिएटर में बैठे सैकड़ों लोगों को कि एक साथ संभव महसूस करने वाले

अनुभव का हिस्सा बना सके थे कि फिल्म की कहानी के विचार का छठा बहुत

छोटा जरूरी बिंदु है कि लोगों को इंप्रेस करने की कोशिश मत करिए उनके दिल को छूने की कोशिश करिए

कि हमारे कहानी हमारी कहानी लोगों को एक मजबूत भावपूर्ण भावपूर्ण अनुभव देने वाली

होनी चाहिए अंत में इस बात को समझने की कोशिश कीजिए कि अपने इस अध्याय में जो कुछ

भी पढ़ा है एक लेखक के रूप में आप उसका उपयोग कैसे कर सकते हैं सबसे पहले अपने आप

को गंभीरता से लेना छोड़िए कि आप जो लिखेंगे वह महान ही होगा या तब तक नहीं लिखेंगे जब तक आप अपने दिमाग में महानता

के करीब नहीं पहुंच जाएंगे तो आपको वहां जाना बैठकर लिखना चाहिए उसी में किसी-किसी दिन कुछ ऐसा लिख जाएंगे जो आपको अच्छा

लगेगा यह सपना देखना भी बंद कर दीजिए कि अपनी कहानी से दुनिया बदल देंगे हां यह जरूर

हंसते रहिए कि आपकी कहानी लोगों के दिल को छूने वाली होगी तो चलिए कोशिश को शुरू करिए इस अध्याय को

पढ़ने के बाद हम यह चाहेंगे कि आपके दिमाग में जो आइडिया है वह ढाई सौ से तीन सौ

शब्दों में लिख दे अपने आपने अब तक जो पड़ा है वह सब बातें इन तीन सौ शब्दों में

नजर आनी चाहिए उसमें किरदार के बारे में यात्रा के बारे में पर कहानी के बारे में की स्वस्थता फर्स्ट पता चलना चाहिए पुष्प

कहानी की सेटिंग क्या है यह दिखना चाहिए कि कहानी विजुअल एक्शन पर ज्यादा निर्भर

है और एकदम इमोशनल अनुभव होगा यह छह बाते एक तरह से आपके लिए छह खींच खिड़कियां है

इन छह खिड़कियों को आप खोल लेंगे तो आपको अपना आइडिया थोड़ा ज्यादा साफ आने लगेगा पाप साइंस फिक्शन लिखना चाहते हैं तो

थोड़ा सेटिंग के बारे में सोचिए कि वह किस साल में फिट होगी उसका सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश क्या होगा

सोचिए किरदार कौन होंगे तय समयावधि समय औषधि के बारे में सोचिए कि वह

कितने दिन की कहानी है यह सब खिड़कियां एक-एक करके खोलिए अ कि रोज सुबह एक-दो घंटे नियम से बैठकर इन

खिड़कियों से झांक ने झा करेंगे तो आप पायेंगे कि आप आइडिया और कहानी पर बहुत तेजी से काम किए जा रहे हैं रोज मेहनत

करेंगे तो आप पायेंगे कि जिस 30 दिन में पार्क के पास 30 आइडियास हो गए हैं उनमें

से एक आइडिया चुनेंगे तो उसमें जरूर कोई बात होगी तो आपने एक विचार चुन लिया है तो

नीचे कुछ सवाल दे रहे हैं जिनको एक-एक करके पढ़िए और मिलान करिए कि क्या आपके आइडिया में इन सवालों के जवाब है

कि यह एक तरह से जांच है अगर आप यहां उत्तरायण होते हैं पुत्र ऋण पित्र ऋण होते

हैं तो कह सकते हैं उत्तीर्ण उत्तीर्ण होते हैं मैं तो कह सकते हैं कि मेरे पास फिल्म की

कहानी का एक आईडिया है जिस पर मैं अगले कुछ महीनों महीने और साल देने के लिए तैयार हूं अगर शुरुआत में आप से गलती हो

गई तो कुछ दिनों के बाद आप अपका आपका मन नहीं लगेगा उसे छोड़ देंगे या उसमें कुछ

समय बाद अटक जाएंगे लिहाजा हम उम्मीद करते हैं कि इन सवालों का जवाब ढूंढ उठते हुए आप एक अच्छी फिल्म लिखने के लिए तैयार हो

रहे हैं कि जिस Idea पर आप काम शुरू कर रहे हैं

उसके अलावा क्या नो और कहानियों के Idea आपके पास है अच्छे आईडिया को ढूंढने का सबसे सही तरीका यही है कि आप के पास बहुत

बहुत सारे Idea जय हो और दूसरा क्या आप सचमुच यही कहानी कहना चाहते हैं पटकथा तैयार करना सबसे जोखिम

वाला काम है कोई नहीं कह सकता कि उस समय उस पर कभी फिल्म बनेगी या नहीं क्या आप इसके लिए तैयार है कि अगर यह फिल्म नहीं

बनी तो भी वा की जिंदगी उस पटकथा को पढ़ते हुए अपने ही दिमाग में वह फिल्म देखकर आप

खुश रहेंगे क्या तीसरा क्या आपकी कहानी सचमुच मौलिक है क्या आपने कभी इससे

मिलती-जुलती फिल्म सीरियल नाटक या उपन्यास नहीं पड़ा है सावधान रहिए कुछ * कुछ चीजें

आपके अवचेतन में कहीं से भी आ सकती है चौंता क्या आपके दिमाग में कहानी का उचित

अंत स्पष्ट है किसी भी कहानी का कहानी पर काम शुरू करने से पहले में का उपयोग तो अंत पहले सोचना जरूरी है

का पांचवा क्या आपका Idea लोगों को इमोशनल ढंग से कहानी में शामिल करेगा इमोशन पर काम करने वाली कहानियां यूनिवर्सल होती है

और उनके बनने के हमेशा ज्यादा अवसर होते हैं छठा क्या आप उन उस दुनिया को अच्छे से

जानते हैं जहां आपने अपनी कहानी सेट की है अगर नहीं तो क्या कहानी को इस खुश दुनिया

में सेट कर सकते हैं जिस दुनिया को आप जानते हैं क्या या उस क्या-क्या उसने नई

दुनिया को अच्छे से समझने के लिए तैयार है इसे एक नई दुनिया को जानने के अवसर की तरह लेना चाहिए सतवा

सातवां क्या आपका आइडिया फिल्म की अवधि के खिताब हिसाब से उपयुक्त है जैसे चला को वह

कौवे की कहानी जिसमें वह बर्तन में कंकड़ डालकर पानी पीता है 2 मिनट की एनिमेशन

फिल्म तो हो सकती है लेकिन 2 घंटे तक इसे की फीचर फिल्म नहीं है एक पाठ वाह क्या आपकी फिल्म में नायक की हत्या यात्रा

टकराव और चुनौतियों से भरी हुई है क्या अंत तक उसमें कोई महत्वपूर्ण बदलाव दिखता है अगर ऐसा नहीं है तो ज्यादातर कहानियां

निष्प्रभावित साबित हो जाती है कॉन्ट्रैक्ट और बदलाव आपके कहानी आपके Idea के शरीर और

आत्मा की तरह है का नौवां क्या इस कहानी के साथ आपके विफल रहने का साहस है और कामयाब होने की

प्रतिबद्धता है अगर इस सवाल का जवाब हां है तो आगे बढ़िए भले ही बाकी को चीजों का जवाब नकरात्मक मिल रहा हो लेकिन इसका अब

जवाब अगर नहीं है तो भले ही बाकी सब सकारात्मक जवाब को रे आपकी मदद नहीं

करेंगे तो आपके लेख की जुनून की जय हो अब आगे बढ़िए क्या दसवां क्या इस आइडिया के

साथ आपने विफल रहने का साहस है और कामयाब होने की प्रतिबद्धता है अगर इस सवाल का

जवाब हां है तो आगे बढ़िए बार भले ही बाकी कुछ चीजों का जवाब नकारात्मक मिल रहा हो

लेकिन इसका जवाब अगर नहीं है तो भर कि बाकी व बाकी सब नकरात्मक जवाब हो वह आपकी

मदद नहीं करेंगे तो आपके लेख के जुनून की जय हो कि अब आगे बढ़ी है

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