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Indian Law Exposed: Courts, Crime, Bail, Power & Police | Utkarsh Dave | FO421 Raj Shamani

By Raj Shamani

Summary

## Key takeaways - **Justice is slow, justice delayed is justice denied.**: India's judicial system is overburdened with 4.5 crore pending cases, meaning it would take 300 years to clear the backlog at the current pace. This delay means justice is often inaccessible or irrelevant by the time it arrives. [00:31] - **Money and power trump justice in India.**: The legal system is heavily influenced by wealth and connections, allowing those with money and political power to manipulate outcomes. This is evident in cases where procedural loopholes are exploited, and even serious crimes may not lead to conviction for the powerful. [01:23], [01:40] - **Morbi Bridge Tragedy: A case of systemic failure.**: The Morbi bridge collapse, which killed 135 people, highlights a severe lack of accountability. Despite clear warnings about the bridge's precarious condition and the company's lack of experience, it reopened without proper safety certificates, leading to the preventable disaster. [07:45], [10:34] - **False FIRs exploit legal loopholes.**: The legal system can be misused, particularly with false FIRs. The Supreme Court has clarified that consensual sexual relations in a relationship context do not constitute rape, a crucial distinction to prevent misuse of the law for personal vendettas or extortion. [57:33] - **Corruption is India's operating system.**: Corruption is deeply embedded in India's system, from police to public servants, influencing outcomes at every level. This systemic issue means that even with good intentions from some officials, the overall structure facilitates or tolerates corrupt practices. [29:27], [44:48] - **Poverty is the biggest crime in India.**: Being poor is portrayed as the most significant crime in India, as the system offers little recourse for those without financial means or connections. This lack of resources and influence makes it incredibly difficult for ordinary citizens to navigate the legal system and achieve justice. [01:50], [04:42]

Topics Covered

  • Justice Delayed is Justice Denied: India's Overwhelmed Judiciary
  • Money, Power, and Influence: The Unseen Forces in India's Legal System
  • The Morvi Bridge Tragedy: A Cascade of Negligence and Corruption
  • Corruption as India's Operating System: A Deep Dive into Systemic Failures
  • The Price of a Life: Inadequate Compensation for State Negligence

Full Transcript

एक आदमी मर्डर करता है और

जेल में जाता है। अंदर से बाहर आने के लिए

वह दूसरा मर्डर करवाता है। उसी फैमिली के

व्यक्ति का कि आप मुझे बाहर क्यों नहीं

आना देना चाह रहे? आप वो आदमी फिर से बेल

रखता है। उसको ट्रायल के अंदर कोर्ट ने

बाइज्जत बली छोड़ दिया क्योंकि जो विटनेस

है उसने कॉम्प्रोमाइज कर दिया। और हमारे

आज के गेस्ट उत्कर्ष दवे जो एक एडवोकेट

हैं गुजरात हाई कोर्ट में। उन्होंने बताया

कि हमारे देश में सिर्फ 21 जजेस हैं हर 10

लाख लोगों के लिए। इंडिया के लोअर कोर्ट्स

में 4.5 करोड़ केसेस पेंडिंग है। अगर इसी

स्पीड से हम लोग बैक लॉक क्लियर करने लगे

और न्यू केसेस ऐड ना हो तो भी 300 साल

लगेंगे सब केसेस क्लोज करने में। क्यों

छूट जाते हैं? जो प्रोसीजर फॉलो करना होता

है सिंपल वही पुलिस नहीं कर पाती। जिसका

फायदा डिफेंस के लॉयर लेते हैं। कर पाती

नहीं है कि करती नहीं है।

अधिकतम करना नहीं चाहती। अगर बड़ा आदमी है

तो ऐसे ही छोड़ बिल्कुल 100% मैंने देखा

हुआ है सर ये एफआईआर में नाम भी नहीं आएगा

अगर आप पावरफुल है तो वो केस डन होता है

यह मैंने देखा हुआ है आपके केस की मोर भी

135 लोगों को मारने के बाद शायद 14 महीना

जेल में रहे उसके बाद बेल पे आ गए वो तो

ये सजा है हमारे देश में बेल रिमांड जेल

और फिर बाहर कौन है ये लोग कहां से आते

हैं

सबसे हारश लेसन क्या सीखा इस सिचुएशन से

अगर तुम्हारी जेब में पैसा है

तो तुम्हें छू नहीं सकता कोई। यू हैव द

पावर टू मैनपुलेट एनीथिंग।

सो मनी, पॉलिटिकल पावर, अथॉरिटी, पावर ये

तीनों जिसके पास है वो जेल नहीं जा सकता।

99% नहीं जा सकता। चला भी गया तो मान लो

फॉर्मेलिटी है। आप उस व्यवस्था में रह रहे

हो जहां आपका सबसे बड़ा गुनाह है अगर आप

गरीब हो। लाल चंदन का ब्लैक मार्केट कितना

बड़ा है?

इसके जितने अच्छे उपयोग हैं उतने ही खराब

उपयोग हैं। इट इज अब्सोलुटली बैन टू बी

एक्सपोर्टेड। एक कंटेनर की अप्रोक्स

प्राइस क्या होती है? अकॉर्डिंग टू

इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू 10 करोड़। डर

नहीं लगता कोई भी डेथ से। भगवान से डरता

हूं, गलत करने से डरता हूं। बाकी मैं किसी

से नहीं डरता। करने वाला बोलता नहीं है और

बोलने वाला करता नहीं है।

आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब

कर लीजिए ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और

इनसाइटफुल और बेहतर पडकास्ट बनाते रहें।

एंड इस पूरे शो का ऑडियो एक्सपीरियंस

स्पॉटिफाई पे अवेलेबल है। जहां पर आप हमें

फॉलो कर सकते हैं। एंजॉय द शो।

टेल मी अबाउट सम पॉपुलर कोई दबंग था या

है?

जैसे हमने सब यूपी बिहार ही सुना है। हम

नहीं नहीं ऐसा नहीं है। मैं आपको बहुत यह

विश्वास के साथ बता रहा हूं और यह मेरा

खुद का पर्सनल केस है जो मैं आपको बता रहा

हूं।

चारप साल पहले की बात है राज भाई। मेरी ही

ऑफिस की एक मैटर एक सिंपल बेल अंडर सेक्शन

302 जिस आदमी ने मर्डर किया था उसकी बेल

लगी थी हाई कोर्ट में। हम उसको अपोज कर

रहे थे फॉर विक्टिम्स। अब मानिए इसमें

मैंने क्या देखा? एक आदमी मर्डर करता है

जेल में जाता है। जेल में जाने के बाद वो

बाहर आने के लिए प्रेशर क्रिएट करता है

विक्टिम फैमिली के ऊपर कि आप मेरे साथ

कॉम्प्रोमाइज कर लो वरना तो बहुत कुछ मैं

आपका खराब कर दूंगा।

विक्टिम फैमिली ऐसा कहती है कि हम

कॉम्प्रोमाइज क्यों करें? हमने तो हमारा

बेटा घुमाया है।

हम

उस विक्टिम फैमिली से उसका कोई परिवार का

व्यक्ति जब जा रहा होता है तो उसके ऊपर

फिजिकल असॉल्ट करते हैं कि कॉम्प्रोमाइज

कर लो।

मारते हैं।

मारते हैं। अधमरा कर देते हैं। उनकी

एफआईआर पुलिस नहीं लेती। कोर्ट के सामने

हो रहा है।

कोर्ट के सामने नहीं हो रहा। कोर्ट

प्रोसीडिंग्स तो कोर्ट के अंदर चल रही है।

कोर्ट के बाहर जो हो रहा है उनके गांव में

या वो लोग जहां रहते हैं यह वहां की बात

है। हम

आप मान के चलिए कि एक आदमी एक मर्डर के

केस में है। उसके अंदर से बाहर आने के लिए

वो दूसरा मर्डर करवाता है। उसी फैमिली के

व्यक्ति का कि आप मुझे बाहर क्यों नहीं

आना देना चाह रहे? आप समाधान नहीं करेंगे

मेरे साथ। आप मेरे साथ कॉम्प्रोमाइज नहीं

करेंगे। मैं बाहर नहीं आ पा रहा हूं। तो

दूसरे के बाद वो आदमी फिर से बेल रखता है

तो फिर से विक्टिम फैमिलीज जो है वो अपोज

करने की कोशिश करती है। अब मान के चलिए

शायद एक दो इयरिंग बाद बेल डिसमिस हो जाती

है। लेकिन मुझे अभी रिसेंटली पता चला कि

उसके अंदर उसको ट्रायल के अंदर कोर्ट ने

बाइ्जत बली छोड़ दिया क्योंकि जो विटनेस

है उसने कॉम्प्रोमाइज कर दिया और हॉस्टल

टर्न हो गए सारे।

तो यह लेवल यह ना गुजरात की बात है यह ना

कोई उत्तर प्रदेश की बात है पर ना कोई

पर्टिकुलर स्टेट की बात है। यह वही बात है

जो हमारे जुडिशियल सिस्टम में होता है।

क्यों छूट जाते हैं ऐसे?

इसका सबसे बड़ा रोल है पुलिस के ऊपर। अब

देखिए फैक्ट आपको एक बात समझनी पड़ेगी कि

आपके पास कोई भी आपके ऊपर कोई भी घटना हुई

राज भाई तो सबसे पहले आप उसकी पुलिस

कंप्लेन करोगे। पुलिस कंप्लेन करने के बाद

पुलिस आपकी कंप्लेंट

को समझेगी। उसको लिखेगी। उसके बाद उसके

ऊपर इन्वेस्टिगेशन होगा। अगर वो 7 साल से

ज्यादा पनिशमेंट वाला ऑफेंस है तो आपको

अरेस्ट करेंगे। आप अंदर जाओगे बेल रखोगे

एक्स वाई जेड। बट सबसे इंपॉर्टेंट जो चीज

है राज भाई वो है चार्जशीट।

हम

चार्जशीट इन शॉर्ट हम समझ लें क्या है? तो

चार्जशीट है पूरे इन्वेस्टिगेशन का

चिट्ठा। आपके क्राइम की पूरी कहानी वो

चार्जशीट है जो पुलिस इन्वेस्टिगेट करती

है।

अब मान लो कि आप कोई ड्रग्स के केस में

पकड़े गए हो। तो जो कमर्शियल क्वांटिटी या

जो भी कॉन्ट्रा बैंड आपके पास से मिली हुई

है वो कॉन्ट्रा बैंड को सीज करना उसको

अनसीज करना उसको एफएसएल में भेजना एफएसएल

में अनपैक करना अनपैक करने के बाद अगर

आपने कोई टेलीफोनिक कम्युनिकेशन किया है

उस कॉन्ट्रा को लेके तो उसके ऊपर 65 बी

सर्टिफिकेट लगेगा। अब मान लो कि इसके अंदर

इतनी टेक्निकल फेलियर्स करती है पुलिस या

कोई भी इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी के इसी के

ऊपर ही डिफेंस लॉयर जीत जाते हैं कोर्ट के

अंदर। मैं मैक्सिमम बार यह देख चुका हूं

कि जो प्रोसीजर फॉलो करना होता है सिंपल

वही पुलिस नहीं कर पाती है या कोई भी

इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी नहीं कर पाती

जिसका फायदा डिफेंस के लॉयर लेते हैं।

कर पाती नहीं है कि करती नहीं है।

अधिकतम करना नहीं चाहती और अधिकतम करती भी

नहीं है। हम दोनों तरीके से कह सकते हैं

इसको।

करना क्यों नहीं चाहती? बिकॉज़ इंसेंटिवाइज

है कि कोई पैसे देगा और छूट जाएगा। नहीं

आप समझ लीजिए आज के आधुनिक आज के जो हमारा

जो जमाना है इसमें पैसा ही सबसे

इंपॉर्टेंट नहीं है। इसमें पैसे के

साथ-साथ इंपॉर्टेंट है कि किसके ऊपर

अक्यूज़्ड कौन है? किसके ऊपर कुछ करना है?

क्या उसका कोई पैटिकल बैकग्राउंड है? क्या

वो कोई हेडस्टंग आदमी से जुड़ा हुआ है?

क्या वो मुझे पैसे के साथ-साथ अगर मैं

उससे पैसा नहीं लूंगा तो मुझे कोई आगे वह

रिसोर्स दे पाएगा। ऐसी बहुत सारी चीजें

हैं जो पुलिस सोचती हैं जो एक

इन्वेस्टिगेशन के दायरे में आती हैं और

उसके बाद पुलिस इन्वेस्टिगेशन

अगर बड़ा आदमी है तो ऐसे ही छोड़ दो।

बिल्कुल 100% मैंने देखा हुआ है सर ये

बिना पैसे के ही छोड़ दो क्योंकि बड़ा

आदमी कभी ना कभी काम

100% सर आपका एफआईआर में नाम भी नहीं

आएगा। अगर आप पावरफुल है आप पोटेंशियल है

तो वो केस टर्न होता है। यह मैंने देखा

हुआ है।

तो पुलिस ना एफआईआर में नाम लिखेगी।

ऐसा नहीं है।

क्या कर सकते हो? आप अगर सीधा-सीधा ऑफेंस

करके आए हो तो तो आपके ऊपर एफआईआर होने

वाली है। पर मान लीजिए कोई फाइनेंशियल

फ्रॉड है। वो फाइनेंशियल फ्रॉड में आप एक

कड़ी के एक चैन के एक हिस्से हो। अब वह

फ्रॉड है करोड़ एंड करोड़ ऑफ रुपीस में।

आप हो एक एसएओ इन्वेस्टिगेशन करने वाले।

अब एसएओ किसके अंदर आता है? अगर सिटी है

तो डीसीपी के अंडर आएगा या कमिश्नर के

अंडर आएगा। और अगर कोई रूलर एरिया है तो

एसपी के अंडर या एसएसपी के अंदर आएगा। तो

आपको एसएओ से लेना ही देना ही नहीं है। आप

इतने हेड स्ट्रांग आदमी हो। आप इतने

पॉलिटिकल कनेक्टेड हो कि आप सीधा फोन

करोगे एसपी को। वो एफआईआर जो लिखने वाली

थी ए बी सी ई एफ जी उसके अंदर से ए बी सी

डी ई एफ जी गायब हो जाएगा और एचआई जे के

एलएम शुरू होगा। ये हमने देखा हुआ है

प्रैक्टिकली। मैं आपको इसको प्रैक्टिकली

समझाता हूं।

हम

मेरा एक केस है।

हां

मोरबी ब्रिज ट्रेजडी।

हां।

उसके अंदर 135 लोग मरे।

हम

बहुत ही दुखद घटना थी ये।

आप मान के चलिए आज तक वह मैटर पेंडिंग है

सुप्रीम कोर्ट के अंदर। एक ऐसा केस जिसके

अंदर 135 लोग मरते हैं। राज भाई सबसे पहली

जिम्मेदारी किसी भी स्टेट की क्या होती

है? रेस्क्यू ऑपरेशन करना।

हां कि 135 लोगों को भाई गिर गए हैं।

दूसरे आसपास लोग हैं उनको बता।

एक्सक्ट्ली। तो इतने लोग गिर गए हैं तो

सबसे पहले रेस्क्यू ऑपरेशन करना है। ऐसा

होता है इस केस के अंदर कि रेस्क्यू

ऑपरेशन तो एक साइड चल रहा है। पर इस केस

के एसएओ साहब को इतनी अर्जेंट होती है,

इतनी अर्जेंसी हो जाती है कि कुछ ही घंटों

में मीनवाइल लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन चल

रहा है। एक एफआईआर रजिस्टर हो जाती है। और

वो एफआईआर में से जो बड़ी मछलियां होती है

उनके नाम ही नहीं होते। केवल छोटी मछलियों

के नाम होते हैं। हम इसको चैलेंज करते

हैं। कोर्ट्स बाय कोर्ट्स, कोर्ट्स बाय

कोर्ट, कोर्ट बाय को वेट वेट वेट सॉरी

मेरे को केस शुरू से समझाओ

कि हुआ क्या, कैसे हुआ? फिर इस वाली पे हम

आगे कहानी पे आएंगे क्योंकि ये तो हमने

बहुत फास्ट फॉरवर्ड कर दिया।

जी।

ओके। तो ये बताओ रेस्क्यू ऑपरेशन से भी

पहले कौन सा डे था, हुआ क्या? एंड देन आगे

बढ़ाते हैं।

दिवाली के आसपास का समय था।

2023

यस 22

22

दिवाली के आसपास का समय था और

गुजरात के अंदर मोरबी एक छोटा सा शहर है

जहां टाइल्स बहुत

जहां टाइल्स बहुत ज्यादा बनती है। आपको

पता है देखिए

हर एक आदमी जो मोरबी के बारे में जानता है

वो उसको टाइल्स से ही रिलेट करता है।

तो इधर राज भाई ऐसा हुआ कि एक सालों

पुराना 100 साल से भी अधिक पुराना एक

हेरिटेज पूल था जो एक पाथवे को पैलेस से

कनेक्ट करता था। हम अब सालों बाद सालों

बाद राजा रजवाड़े तो रहे नहीं तो इसको

मोरबी शहर का एक

घरेणा मानकर इसको यूटिलाइज करने के लिए एक

प्राइवेट कॉन्ट्रक्टर

हम

से रिन्यू करा के एक कंपनी है बहुत ही

प्रसिद्ध आपने सुना होगा घड़ी बनाती है

हम

उसको इसका कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। आप

सोचिए कितनी बड़ी दुर्गति की बात है कि जो

कंपनी ने जीवन भर घड़ी बनाई है जिसको पुल

बनाने का कोई अनुभव नहीं है जिसको पुल

बनाने का अनुभव के साथ-साथ उसके पास कोई

ऐसे एंप्लई नहीं है कि जो उसको मेंटेन करे

और पहले कोई उसने छोटा प्रोजेक्ट किया

नहीं है उस कंपनी को आप क्या देते हो आप

उसको टेंडर पूरा दे देते हो कि भाई आप पुल

मेंटेन करोगे तो सबसे पहले तो सबसे बड़ा

सवाल तो छोड़िए उसके बाद भी यह बात ऐसे

चलती है कि जब पुल गिरा ना राज भाई तो ये

पुल गिरने से पहले यह पुल बंद था।

हम

उस पे रिनोवेशन कराया गया। अब हम इसको

थोड़ा टेक्निकली समझते हैं कि किसी भी पुल

को चालू करने के लिए सबसे पहले आपको चाहिए

एक ब्रिज फिटनेस सर्टिफिकेट जो आपको आपके

लोकल कस्बे के जो अधिकारी हैं वो आपको एक

सर्विलेंस करते हैं कि भ पुल बराबर है। इस

पे आदमी चढ़ सकते हैं।

एक ब्रिज फिटनेस सर्टिफिकेट और एक ब्रिज

मेंटेनेंस सर्टिफिकेट। ये दो चीज चाहिए।

आप मान के चलिए यह दोनों सर्टिफिकेट लिए

बिना एक आदमी ऐसे बैठता है 15 से 20 माइक

उसके सामने लगते हैं। वह प्रेस कॉन्फ्रेंस

करता है और बोलता है कि आज से पूल खुला।

कोई ब्रिज फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं। कोई

ब्रिज मेंटेनेंस सर्टिफिकेट नहीं। मैंने

पूरा खोल दिया। वो पुल किसके कहने पर

खुला? कौन सा ऐसा आदमी था इन्फ्लुएंशियल

इसके पीछे जिसने पुल को खुलवाया? कि आज तक

इन्वेस्टिगेशन होने के बाद भी जो लोग मर

गए हैं उनके घर वाले जानना चाहते हैं पर

उनको नहीं पता है। ये बात यहां भी पूरी

नहीं होती। हम आगे बढ़ते हैं। अब क्या

होता है कि पुल

खुल गया खुल गया। अब उसकी एक टिकट रखी गई।

ऑब्वियसली ब्रिज को मेंटेन कर रही है

प्राइवेट कंपनी। तो टिकट तो होगी।

लेकिन टिकट इस तरह से रखी गई कि ₹30 या

₹20 एक्सजेक्टली मुझे याद नहीं है अमाउंट

बट बहुत ही मिनिमम अमाउंट की एक टिकट रखी

गई

और पैदल चलने का

और पैदल चलने का। सो बेसिकली ये स्टेप वे

ब्रिज है।

हां

आपने देखा हो जैसे बेसिकली लक्ष्मण झूला

आपने देखा है। बस उसी तरह का पुल आप समझ

लो मोटा-मोटा।

तो आपको उस पुल पे चलना है। एक बाजू से एक

बाजू और देख के आना है।

इस कंपनी द्वारा किसी भी प्रकार का ये

आयोजन नहीं किया गया था। राज भाई कि

क्राउड को हम कंट्रोल कर सकते हैं। दिवाली

का टाइम

आपकी सबकी छुट्टियां हैं। आप सब अपने घर

वालों के साथ बाहर घूमने जाने वाले हो।

मोरबी जैसा शहर मोरबी में आइकॉनिक ब्रिज

आप यहां तो जाने ही वाले हो। लोग बाहर से

आने वाले हैं। यहां पे प्रॉपर सिक्योरिटी

गार्ड्स नहीं थे।

कितने लोग जा सकते?

कितने लोग जा सकते हैं? कितने लोग आ सकते

हैं? क्राउड को कंट्रोल करने के लिए कोई

भी सुविधा कभी भी यहां पे एस्टैब्लिश नहीं

करी गई थी और नहीं रखी गई थी। और लोड

टेस्ट, फिटनेस टेस्ट

लोड टेस्ट, फिटनेस टेस्ट कुछ भी कभी भी

करवाया नहीं था। अगर यह करवाया होता तो

ब्रिज फिटनेस सर्टिफिकेट मिल जाता। पर यह

तो लिया ही नहीं। तो मतलब लोड टेस्ट और वो

दूसरा जो टेस्ट आपने कहा फिटनेस टेस्ट वो

कभी हुआ ही नहीं। अब आप क्या करते हैं? अब

आप टिकट बेचते हैं। ₹20 ₹30। जब पूल गिरा

तब यह बात सामने आई इन्वेस्टिगेशन में।

3000 से ज्यादा टिकटें बेची गई थी। उस दिन

3000 प्लस टिकट्स वर सोल्ड ऑन दैट डे। कुछ

एक्स्ट्रा कैश भी रिकवर हुआ था ऑफिस में

से। मतलब टिकट्स ब्लैक मार्केटिंग हो रही

थी। ऐसा भी एक एलगेशन है। पर वो

एग्जैक्टली प्रूवन नहीं हो पाया है। पर

ऐसा भी एलगेशन था।

अब सोचिए कि पूल के ऊपर ज्यादा क्राउड हो

गया। पूल के ऊपर जो है क्राउड हो गया।

क्राउड को मैनेज करने के लिए इनके पास कोई

भी सुविधा नहीं है कि कौन कैसे क्राउड को

आप नेचुरली आप एक पाथवे से जाएंगे तो

दूसरे पाथवे में बाहर निकलेंगे। अगर बाहर

नहीं निकले तो वहां से घूम के आएंगे।

तो मतलब आप 50 लोगों को छोड़िए। 50 लोग

बाहर आ जाए फिर दूसरे लोगों को छोड़िए।

फिर दूसरे लोगों को छोड़िए। फिर दूसरे

लोगों को छोड़िए। तो इसी तरह से जो है ये

चीजें यहां पे ऐसा कुछ था ही नहीं।

टिकट देने के बाद कौन कहां जा रहा है? कौन

पुल के ऊपर क्या कर रहा है? कौन पुल के

ऊपर वीडियो बना रहा है? कौन पुल के ऊपर से

कितनी देर में नीचे आया? किसी को कुछ पता

ही नहीं है। अब पुल गिरा एंड द ब्रिज

कोलैप्स टेकिंग लाइफ ऑफ 135 इनोसेंट पीपल

दैट वर नॉट सपोज्ड टू डाई ऑन दैट डे।

एंड आई टेल यू दिस थिंग वेरी ग्रेवली एज अ

लॉयर लिटिगेटिंग फॉर 112 विक्टिम्स इन दिस

केस दैट दिस पीपल वर नॉट सपोज्ड टू डाई ऑन

दैट डे। दे डाइड बिकॉज़ ऑफ़ अ नेग्लिजेंस ऑफ़

अ कंपनी। दे डाइड बिकॉज़ समवन वांटेड टू

मिंट एन एक्स्ट्रा बक। दे डाइड बिकॉज़ समवन

हु वाज़ मोर इन्फ्लुएंशियल एट अ लोकल लेवल

स्टार्टेड दिस ब्रिज विदाउट ऑब्टेनिंग

ड्यू परमिशन फ्रॉम पीपल एंड रिस्पांसिबल

ऑर्गेनाइजेशंस। पूल गिरने के बाद यह इतना

बड़ा हादसा था कि स्वयं हमारे देश के

प्रधानमंत्री भी उस स्थल पर आए थे।

प्रधानमंत्री के साथ-साथ हमारे गुजरात

राज्य के गृह मंत्री, गुजरात राज्य के

मुख्यमंत्री सब उस स्थल पर गए थे। सारे

पीड़ित परिवारों से मिले और ₹ लाख और ₹

लाख का इन्होंने मुआवजा उस टाइम पर घोषित

किया। लेकिन सबसे बड़ी बात जो मैं आज आपके

माध्यम से बताना चाहता हूं। यह बहुत ही

गंभीर बात है जो मैं बताना चाह रहा हूं कि

हमारे स्टेट के होम मिनिस्टर हर्ष संघवी

भाई ने एक एसआईटी का गठन किया। स्पेशल

इन्वेस्टिगेशन टीम

जो इस पूरे हादसे को इन्वेस्टिगेट करेगी।

यह हादसा किस तरीके से हुआ? इसके पीछे कौन

था? क्या इसकी वजह रही? एक्स व जेड? वो

एसआईटी को पूरी टेक्निकल टीम हेड करती थी।

बट इट वाज़ हेडेड बाय अ वेरी सीनियर आईपीएस

ऑफिसर बिकॉज़ ऑब्वियसली इट वाज़ इन पुलिस

इन्वेस्टिगेशन। बट ही थॉट इट डीम फिट दैट

ही शुड टेक अ सपोर्ट। ही शुड टेक ही शुड

टेक सपोर्ट ऑफ़ टेक्निकल पीपल एंड ही शुड

गेट पीपल इनवॉल्व्ड इंटू दिस

इन्वेस्टिगेशन। हु हैज़ टेक्निकल नॉलेज।

सो सारे लोगों को एकत्रित करके एक एसआईटी

बनाई। उस एसआईटी ने रिपोर्ट रखा। मोर देन

करीब-करीब हजार पेज का वो रिपोर्ट है।

एक्सजेक्टली मुझे नहीं पता। उस रिपोर्ट के

अंदर बोल्ड और इटैलिक में कंक्लूजन में यह

बात लिखी गई है कि दिस कोलैप्स हैज़ हैपेंड

बिकॉज़ ऑफ द इरिस्पांसिबिलिटी ऑफ़ कंपनी एंड

इट्स टू मैनेजर्स। अभी होम मिनिस्टर की

रिपोर्ट ने

होम मिनिस्टर ने जो एसआई उसकी रिपोर्ट

उसकी रिपोर्ट के अंदर यह लिखा हुआ है कि

दिस ट्रेजडी हैज़ हैपेंड बिकॉज़ ऑफ दी

रेकलेसनेस नेग्लिजेंस ऑफ दी कंपनी एंड

इट्स टू मैनेजर्स

डायरेक्टर्स।

और सबसे बड़ी बात देखो आप इतनी बड़ी ट्रेजडी

होती है। आप ब्रिज का संचालन करते हो। आप

भाग जाते हो। आप आते नहीं वहां पे। आप

अक्यूज़्ड हो। कंपनी के जो मैनेजिंग

डायरेक्टर है वह भाग गए थे। एब्सकोंडिंग

थे।

इज दिस योर मोरल रिस्पांसिबिलिटी एज अ

वेरी बिग कंपनी एज अ एज अ वर्ल्ड्स

लार्जेस्ट क्लॉक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी।

इज़ दिस योर मोरल रिस्पांसिबिलिटी टुवर्ड्स

द सोसाइटी? व्हाट आर यू डूइंग? सर, यू आर

रनिंग अवे एंड देन व्हाट यू डू? यू थिंक

इट फिट टू सरेंडर बिफोर दी गुजरात

हाईकोर्ट। एंड देन यू सरेंडर बिफोर द

गुजरात हाई कोर्ट देन यू आर टेकन इनू

कस्टडी देन यू गो इन द जेल एंड ड्यू कोर्स

प्रोसीजर इज बीइंग फॉललोड व्हाट इज योर आप

देखिए एयर इंडिया का प्लेन क्रैश हुआ

व्हाट इज द मैं कोई कंपेयर नहीं कर रहा

हूं देखिए जो ट्रेजडीज होती हैं एक होता

है कि

नेग्लिजेंस की वजह से होती हैं

और एक होता है कि इसको अनअवॉयडेबल

ट्रेजडीज नेचुरल कैलामिटी यह अब आप कंपेयर

करिए एयर इंडिया का प्लेन क्रैश हुआ है

अहमदाबाद में। व्हिच इज द व्हाट इज द

फर्स्ट थिंग दैट टाटा डड दिस स्टूड ऑन द

ग्राउंड। दे इमीडिएटली सेड दैट वी विल गिव

अ कंपनसेशन ऑफ ₹1 करोड़25 लाख पर डेथ। वी

विल बिल्ड अप दी हॉस्पिटल वंस अगेन। वी

विल बिल्ड अप अ ट्रस्ट दैट विल टेक केयर

ऑफ दी पीपल अराउंड। और यह सारे कंपशन

कंपनेंसेशन को उन्होंने सामने से कह दिया

कि यह तो इंट्रिम कंपनसेशन है। तो आपकी

रिस्पांसिबिलिटी क्या थी? आप तो भाग गए।

आपने कुछ एक भी नहीं दिया किसी भी लोगों

को। फिर हाई कोर्ट ने सुमोटो पीआईएल ली।

उसके बाद सब चालू हुआ। फिर आप कंपेल हुए

देने के लिए तो यह आप समझे इसको।

ओके। वी वर देयर एट अब ब्रिज गिरा। ब्रिज

होने के बाद आपने बोला कि

135 लोग उधर सबसे पहली चीज करनी थी

रेस्क्यू।

हम

एंड देन आई स्टॉप्ड यू देर।

तो उसके आगे क्या हुआ था?

कि रेस्क्यू होना था तो रेस्क्यू नहीं

हुआ।

नहीं रेस्क्यू हो रहा था। हम

पर

हम ऐसा समझते हैं या वेस्टर्न कंट्रीज में

जो चीजें फॉलो की जाती है राज भाई वो ये

होती है कि एक साइड आप रेस्क्यू कर रहे

हो। रेस्क्यू करने के बाद आप पहले यह अपने

आप को समझा लो। यह आप एहसास कर लो कि

रेस्क्यू हो गया है। एज अ पर्सन हु इज

इनविजिलेटिंग दिस एंटायर इंसिडेंट के

रेस्क्यू ऑपरेशन कंप्लीट हुआ है। उसके बाद

आप एफआईआर करो। पर आप मेक श्योर ही नहीं

कर रहे रेस्क्यू है। लोग अंदर तैर रहे

हैं। पूल गिरा हुआ है। लोग ऊपर चढ़ रहे

हैं। लाशें मिल नहीं रही है। और आपको इतनी

इमरजेंसी आ गई है कि आप तुरंत एफआईआर कर

रहे हो। अरे भाई क्यों कर रहे हो? व्हाट

इज द अर्जेंसी?

कौन बोल रहा है आपको एफआईआर करने के लिए?

और हैव यू टेकन समथिंग फ्रॉम समवन टू

रजिस्टर एन एफआईआर एंड लेट द हेडस्ट्रांग

पर्सन गो अवे एंड इनकरपोरेट समवन?

सो ये चीज समझ में नहीं आई। और आज तक नहीं

समझ में और मैं आपको बहुत

और उस एफआईआर में किनके नाम थे एफआईआर में

क्या है?

यही टिकट क्लर्क वॉचमैन

और मैनेजर्स और डायरेक्टर एंड में एंड में

और डायरेक्टर तो भाग गए थे। उन्होंने तो

सरेंडर किया कोर्ट के सामने ही वाज़ ऑन अ

रन।

फिर क्या हुआ?

फिर फिर एफआईआर हुई और उसके बाद

ये एफआईआर हुई। उनके बाद पुलिस ने अरेस्ट

किया सबको।

मोटा-मोटा सब लोग अरेस्टेड थे। नो वन रन

अवे एक्सेप्ट फॉर द डायरेक्टर जो प्राइम

अक्यूज था इस पूरे केस का वो भाग गया था।

वो था ही नहीं।

फिर एक

आउट ऑफ इंडिया।

आउट ऑफ इंडिया आउट ऑफ गुजरात वी डोंट नो

वेयर ही वास समवेयर।

आउट ऑफ इंडिया आउट ऑफ गुजरात आउट ऑफ

स्टेट।

सो पुलिस ने बोला कि वी आर नॉट एबल टू

फाइंड हिम।

अरे वारंट वाज़ इशूड अगेंस्ट हिम। सर

फॉरगेट अबाउट पुलिस ने बोला कि हम हम आपको

मैं आपको गुजरात राज्य जो सबसे आधुनिक

राज्य माना जाता है पूरे भारतवर्ष में

उसके अंदर भी मैं उस डायरेक्टर की उस

कंपनी की बात कर रहा हूं जो क्लेम करती है

कि जो वर्ल्ड की सबसे बिगेस्ट एंड

लार्जेस्ट क्लॉक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है

जिसके बदौलत 135 लोग मरते हैं। वो

डायरेक्टर रन पे है और पुलिस उसके अगेंस्ट

वारंट इशू करती है कि यह भाग गए हैं कोर्ट

के अंदर से। और फिर वह साहब जो है सरेंडर

करते हैं कोर्ट में। फिर उनकी कस्टडी ली

जाती है। फिर वही प्रोसीजर बेल रिमांड जेल

और फिर बाहर।

एंड क्यों फिर उनको जेल हुई? क्या हुआ?

व्हाट व्हाट ड?

ये बहुत ही समझने वाली चीज है कि हम ना जब

इनकी यह न्यूज़ आई। हमको किसी को पता नहीं

था। हमको पता ही चला न्यूज़ से कि दैट ही

है सरेंडर्ड इन हाई कोर्ट एंड देन ही वास

टेकन इनू कस्टडी एंड वास गिवन टू द

व्हाट यू कॉल द लोकल पुलिस

एंड देन उन्होंने उनका चार्ज लिया। अब

उनको चार्ज लेने के बाद उन्होंने

शायद रिमांड मांगा था। रिमांड उनका ग्रांट

हुआ था कुछ दिनों का। उसके बाद उनको

जुडिशियल कस्टडी हो गई। उन्होंने बेल रखी

नीचे काफी टाइम बाद। मोटा-मोटा मुझे पता

है वो 135 लोगों को मारने के बाद वो शायद

14 महीना जेल में रहे। उसके बाद बेल पे आ

गए वो। तो यह सजा है हमारे देश में। 135

लोगों को मार डालो और 14 महीना जेल में

रहो और ट्रायल खत्म होगी 15 20 साल बाद तो

उम्र ही उनकी शायद मुझे जब तक पता है 55

साल के ऊपर है। 20 साल में ट्रायल खत्म

होगी तो आप और मैं दोनों जान सकते हैं कि

भगवान उनको फिर लंबा जीवन भी दे। मतलब

देखिए राज भाई एज अ पर्सन हु हैज़ बीन

लिटिगेटिंग इनू दिस मैटर ऑफ ट्रेजडीस

व्हेर इन पीपल हैव डाइड। आई हैव सीन दैट

जस्टिस दैट इज सर्व लेट इज जस्टिस डिनाइड।

और इंडिया का जो न्याय है ना वह अंधा नहीं

है। इंडिया का न्याय मुझे लगता है ट्रैफिक

जाम में फंस गया है बॉम्बे के। देर से आता

है। इतना देर से आता है ना राज भाई कि जब

वो न्याय किसी को मिलता है ना तो उसको ऐसा

लगता है कि अच्छा अच्छा चलो मिल तो गया इस

जन्म में।

आप उस जुडिशियल सिस्टम की बात कर रहे हैं

राज भाई जहां पर केवल 21 जज है 1 मिलियन

आबादी के लिए तो मतलब आपके पास पूरी आपके

पास जो पूरा क्राउड है वो आपका आईपीएल मैच

का है और आपके पास जो स्टाफ है वो गली

क्रिकेट के हैं। समझ रहे हैं आप? तो यह

व्यवस्था है। 76% से ज्यादा जेल में रहने

वाले लोग अंडर ट्रायल प्रिजनर्स हैं।

कन्विक्टेड प्रिजन

कन्विक्टेड नहीं है। अंडर ट्रायल

प्रिजनर्स हैं। मतलब उन लोगों वो लोग एक

तरह से इनोसेंट ही है कानून की आंख में।

आज भी पर वो जेल से बाहर नहीं आ पा रहे।

क्यों? या तो पैसा नहीं है, प्रॉपर सलाह

नहीं है, वकील को हायर नहीं कर सकते या

उनको कानून के बारे में अवेयरनेस नहीं है।

या सामने वाला ज्यादा पैसे वाला या सामने

वाला ज्यादा पैसे वाला होगा? बिल्कुल सही

कहा आपने।

बट

थॉट एक्सपेरिमेंट

कि डू यू थिंक कि ये जेनुइनली सब चीजें

करने के बाद भी हो सकता है कि जेनुइनली

गलती हो गई और गिर गया हो। मे बी इट्स नॉट

अबाउट वन कंपनी। आई एम जस्ट आस्किंग। जैसे

जिस तरीके से आपने प्रेजेंट किया इट

डायरेक्ट्स टुवर्ड्स वन वन थिंग जो आप बोल

रहे हो

बहुत अच्छा किया आपने ये पूछा इसका जवाब

ये है होता अगर डॉक्यूमेंट्स नहीं होते अब

इस केस में इंटरेस्टिंगली क्या हुआ

हम

एक लेटर है ये पूरा केस ही इसके ऊपर टिका

हुआ है

हम

नॉलेज पे

हम

किस पे नॉलेज पे इंटेंशन पे नहीं नॉलेज पे

हम

राज भाई को अगर नॉलेज है कि नौवें माले से

मैं कूद दूंगा तो क्या होगा? व्हाट इज द

हाईएस्ट प्रोबेबिलिटी?

डेथ

डेथ या

तो आपको पता है अब यह पूल गंभीर हालत में

है और यह कभी भी टूट सकता है। ऐसे लेटर्स

इनकी कंपनी के लेटर हेड पे साइन करके लोकल

मुनिसिपालिटी को कम्युनिकेट किए गए थे। तो

क्या आपको पता नहीं था सर?

इनकी कंपनी ने

यस। इनकी कंपनी ने गुजराती भाषा में लिखा

है राज भाई कि आ पुल जजरित हालत मा छे

गंभीर हालत मा छे कार क्यारे प जो आ पुल

पर कोई पण अकस्मात बने तो संपूर्ण

जवाबदारी फलाना फलाना व्यक्ति नी रहे

व्हिच इफ आई ट्रांसलेट इन इंग्लिश इट कम्स

टू दिस दैट सर काइंडली हैव योर अटेंशन दिस

ब्रिज इज़ एन एब्सोल्यूट प्रीकेरियस कंडीशन

एंड कैन कोलैप्स एट एनी पॉइंट ऑफ टाइम इन

दिस सरकमस्टसेस द रिस्पांसिबिलिटी विल बी

ऑफ सो एंड सो सो एंड सो सो एंड एंड इट इज

रिटन बाय हुम इट इज रिटन ऑन देयर कंपनीज़

लेटर हेड एंड साइन बाय फॉर

नाउ टेल मी सर व्हाई डिड यू ओपन दी ब्रिज

दिस वाज़ द कम्युनिकेशन मेड

प्रोबेबबली

सिक्स सेवन मंथ्स और वन ईयर बिफोर दिस

ट्रेजडी हैज़ हैपेंड। सो यू न्यू इट। नाउ

यू हैव द यू हैव रिनोवेटेड इट एंड यू नो

दैट इट इज़ नॉट बीइंग प्रॉपरली रिनो

रिनोवेटेड बिकॉज़ ऑफ़ दी एसआईटीस रिपोर्ट।

एसआईटी रिपोर्ट क्लियरली सेस दैट इट वास

नेवर बीइंग रनोवेटेड प्रॉपर्ली।

तो अब जैसे इन्होंने तो ये लेटर लिख दिया।

हम

राइट? सो जिसको लिखा जिसने उसके बाद भी

ग्रांट किया। डोंट यू थिंक दैट पर्सन

आल्सो। ये इसीलिए मैंने आपको कहा कि मैं

मेरे राज्य के गृह मंत्री का बहुत आभारी

हूं कि उन्होंने एसआईटी का गठन किया

क्योंकि ये चीज पुलिस ने अपनी

इन्वेस्टिगेशन में चार्जशीट में नहीं बताई

है। लेकिन गृह मंत्री द्वारा हर्ष संघवी

द्वारा जो ये एसआईटी बनाई गई थी उस एसआईटी

के अंदर ये बात को बहुत ही क्लियरली लिखा

गया है कि मुनिसिपालिटी नगर पालिका के जो

वाइस चेयरमैन या चेयरमैन थे शायद मुझे

एग्जैक्टली उनका डेजिग्नेशन नहीं पता पर

जनरल बॉडी रेज़ोल्यूशन पास करे बिना चीजें

करी गई हैं इसके अंदर और आप मान के चलिए

इतनी गंभीरता इस केस को मिली कि गुजरात

सरकार ने पूरी के पूरी नगरपालिका

म्युनिसिपल बॉडी को सुपरसीड कर दिया

पर कोई अक्यूज नहीं बना।

आप रिस्पांसिबल हो।

आपके वजह से यह हुआ है। लेकिन आपको पूरा

सुपरसीड कर दिया गया। आपको अक्यूज नहीं

बनाया गया। क्यों? तभी तो विक्टिम्स गए

सुप्रीम कोर्ट के सर वी वांट द एंटायर

इन्वेस्टिगेशन टू बी रीइ्वेस्ट

रीइ्वेस्टिगेटेड बाय सीबीआई। वी डोंट

ट्रस्ट द इन्वेस्टिगेशन डन बाय गुजरात

पुलिस। इट इज अ बॉस्ट अप इन्वेस्टिगेशन

एंड लुक्स लाइक दिस इन्वेस्टिगेशन इज डन

पर्पसफुली टू हेल्प समवन।

यह मेरा स्टेटमेंट रहा है सेशंस कोर्ट के

अंदर जो मैं आपके सामने बोल रहा हूं। यह

मैंने कोर्ट के अंदर बोला है कि एक डिप्टी

एसपी डिपटी एसपी कक्षा का अधिकारी जिसको

यह पता है कि इन्वेस्टिगेशन भली-भांति किस

तरह से किया जाता है। आपको पता है राज भाई

के मोरबी पुल हादसे में कितने विटनेस हैं?

आप गेस कर सकते हो 370 विटनेस 370 विटनेस

हमने कोर्ट में यह कहा था कि सर यह मेड अप

विटनेसेस लग रहे हैं। ये ऐसे विटनेसेस लग

रहे हैं कि जिसको पर्पसफुली खड़ा किया गया

है। क्या विटनेस है? एक आदमी मर गया। हां,

मेरा मेरा स्टेटमेंट है। मेरे बाद मेरे

भाई का स्टेटमेंट है। मेरी मां का

स्टेटमेंट है। मेरे चाचा का स्टेटमेंट है।

मेरी ताई का स्टेटमेंट है। मेरे फूफा का

स्टेटमेंट है। एक-एक डेथ के पीछे नौ नौ

विटनेस। सुप्रीम कोर्ट सेज इट वेरी

क्लियरली दैट वन आई विटनेस इज सफिशिएंट टू

प्रूव अ पर्सन गिल्टी और नॉट गिल्टी इन द

ट्रायल। वी बोथ नो इट।

व्हाई डू यू हैव 370 विटनेसेस?

फॉर व्हाट रीज़न? डू यू वांट टू बेनिफिट

समवन दैट द ट्रायल पर्पसफुली गेट डिलेड

एंड इट इज़ ड्रैग्ड टिल 20 और 25 इयर्स एंड

इट इज़ नेवर बीइंग कंप्लीटेड। सो एस टू

बेनिफिट द एक्यूज़्ड।

दिस इज़ द एलिगेशन इन द कोर्ट। अपार्ट

फ्रॉम दैट दी प्राइम एलगेशन इन सुप्रीम

कोर्ट वाज़ दैट सर काइंडली सी व्हाट हैज़

हैपेंड राज इन दिस केस अ चीफ ऑफिसर इज़ अ

पर्सन टोटली रिस्पांसिबल फॉर थिंग फॉर

इशूइंग एनओसीस फॉर इंस्पेक्टिंग

इनविजिलेटिंग पूल गिर गया सरकार उसको

आरोपी नहीं बना रही वो विटनेस है

जिसने अप्रूव किया है कि हां

जिसने अप्रूव नहीं जिसकी पूरी

रिस्पांसिबिलिटी है एज अ चीफ ऑफिसर के जो

सब कुछ करेगा इनविजिलेट करेगा इंस्पेक्ट

करेगा एनओसी देगा चीजें करेगा देखेगा एक्स

व जेड एक सरकारी तंत्री आप समझ लीजिए उसको

आज तक इस केस में अक्यूज नहीं बनाया उसको

विटनेस बना दिया है गवर्नमेंट ने

सुप्रीम कोर्ट वास शॉक्ड दैट हाउ कैन दिस

थिंग हैपेंड नोटिस दैट इज व्हाई एक इसमें

इशू हुई है एंड द विक्टिम्स हैव अप्रोच

सुप्रीम कोर्ट दैट यू काइंडली अलाउ सीबीआई

टू इन्वेस्टिगेट दिस मैटर बट देन व्हेन सी

होम मिनिस्टर ने अच्छा काम किया

बहुत ही अच्छा

राइट तो हर्ष भाई डिड द ग्रेट लाइक ही डिड

गुड जॉब

इन मेकिंग श्योर कि ये हो जाए

तो गवर्नमेंट में टॉप जो ऑफिशियल्स हैं वो

भी यह चाहते हैं कि इधर कुछ ना कुछ काम हो

तो फिर क्यों नहीं हो रहा है? तो देखिए

मोर पावरफुल देन देम।

तो तभी मैं बता रहा हूं। तभी इसीलिए देयर

इज़ अ प्रूव अप दैट करप्शन इज द ऑपरेटिंग

सिस्टम ऑफ इंडिया।

आपके घर में कंप्यूटर है। पहले आप और मैं

उस जनरेशन से हैं जब माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस

ऑपरेटिंग सिस्टम हुआ करता था कंप्यूटर। तो

इसको अगर लार्जर पिक्चर से देखें तो

करप्शन इज द ऑपरेटिंग सिस्टम ऑफ इंडिया।

ये क्यों कह रहा हूं राज भाई? द टॉप मोस्ट

अथॉरिटी जो है वो एनश्योर करती है कि इस

तरह से चीजें होंगी। लीगली सारी चीजें हो

जाती हैं। आपकी एसआईटी फॉर्मुलेट होती है।

प्रेस नोट हो जाती है कि एसआई एसआईटी के

अंदर इतने बड़े-बड़े जो ऑफिसर्स हैं वो

आपके रहेंगे। इतने टेक्निकल लोग रहेंगे।

उसके रिपोर्ट के आने के बाद आप एज अ

डेपुटी एसपी जो है आप इन्वेस्टिगेशन करते

हो। साइमलटेनियसली एसआईटी का रिपोर्ट अलग

आता है। आप अपनी चार्जशीट अलग फाइल करते

हो पूरी इन्वेस्टिगेशन की। आप मान के चलिए

चार्जशीट वो चीजें बोलती ही नहीं है जो

एसआईटी का रिपोर्ट बोलता है। तो आपका

इन्वेस्टिगेशन क्या है? कचरा चना चोर गरम

खाने का कागज इतना बेकार इन्वेस्टिगेशन

मैंने आज तक नहीं देखा। इट इज सच सच अ

बोगस इन्वेस्टिगेशन जो मैंने आज तक नहीं

देखा। एंड दैट इज व्हाई

जो विक्टिम्स हैं इस केस के उन्होंने क्या

किया कि उन्होंने एक एसोसिएशन बनाया। हम्।

इन्होंने एसोसिएशन इस तरह से बनाया कि आप

जैसे मध्य प्रदेश से तो आप जानते होंगे

भोपाल में गैस लीक हुआ था। तो इन्होंने

अपना एक एसोसिएशन बनाया उसी केस की तरह।

इन्होंने इनको नाम दिया ट्रेजडी विक्टिम

एसोसिएशन मोरबी। और अपना एक एसोसिएशन

बनाने के बाद इस एसोसिएशन के थ्रू

इन्होंने एक एप्लीकेशन फाइल करी सुप्रीम

कोर्ट में। आप जो है यह इन्वेस्टिगेशन से

हम संतुष्ट नहीं है। ऐसा लग रहा है कि

इसमें तो मजाक चल रहा है तो आप मेहरबानी

करके इस पूरे इन्वेस्टिगेशन को

रीइ्वेस्टिगेट करवाइए सीबीआई से क्योंकि

ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो इस

इन्वेस्टिगेशन में है ही नहीं आई नहीं।

हम

तो चल रहा है। नोटिस इशू हो गई है। शायद

अब दो-ती महीने बाद फिर से मैटर लगेगा

सुप्रीम कोर्ट में।

एंड सुप्रीम कोर्ट में कितनी जल्दी सॉल्व

होगा? सुप्रीम कोर्ट में तो सर बहुत ही

जल्दी सॉल्व होगा क्योंकि आप डेट्स नहीं

ले सकते सुप्रीम कोर्ट में एक बार मैटर

लिस्ट हुआ है तो आपको वहां पे यू हैव टू

बी प्रेजेंट ऑन वन और दी अदर ग्राउंड यू

कैन नॉट मेक अ प्रीक्स्ट दैट आई एम नॉट

अवेलेबल देयर इज समथिंग नॉट कमिंग स्टेट

हो या प्राइवेट पार्टी हो यू हैव टू बी

देयर

तब आप उधर जाओगे और सुप्रीम कोर्ट कितनी

बार में जजमेंट ले लेती है

मुझे लगता है सर के एक हियरिंग आपकी एक

सरकार की और मैक्सिमम अगर कोई एफिडेविट्स

फाइल करने हुए तो या रिजॉइंडर्स फाइल करने

में तो चार पांच इयरिंग दैट्स इट

चार पांच इयरिंग हाउ मेनी इयर्स डू यू

थिंक

नो नो नो नॉट इयर्स आई विल टेल यू इट ऑल

डिपेंड्स ऑन हाउ सून द एफिडेविट इज़ बीन

फाइल्ड बाय द गवर्नमेंट इफ दे डोंट इवन

फाइल इट देयर इज़ अ देयर इज़ ऑलवेज अ देयर

इज़ ऑलवेज अ वे दैट यू कैन मेंशन दी मैटर

एंड गेट योर मैटर अर्ली लिस्टेड बट इसमें

बहुत इंटरेस्टिंग चीजें मैं आपको बताऊं

45 करोड़ केस

हम

इंडियन जुडिशरी में पेंडिंग है 4 करोड़ केस

इंडियन जुडिशरी में लोअर कोर्ट्स में

पेंडिंग है। अब ये तो हम बात कर रहे हैं

उसकी जहां पे किसी को छुटकारा ही नहीं है।

मतलब केस अगर आप पे हुआ तो ट्रायल तो चलना

है। फिर वो बाइक का चालान हो। आपने किसी

को झापट मारी हो या किसी के घर पे आपने

चोरी करी हो।

या मर्डर हो या हाफ मर्डर हो या कुछ भी

एक्स व जेड हो। केस तो आप पे चलना ही है।

अब ऐसे 4.5 करोड़ केसेस पेंडिंग है इंडियन

जुडिशरी में। अगर यह बैकलग को जिस तरीके

से क्लियर हो रहे हैं, ये बैकलग जिस

रेश्यो से बढ़ते जा रहे हैं और क्लियर हो

रहे हैं तो इनको 300 साल लगेंगे राज भाई।

ये मैं नहीं कह रहा हूं। ये एक डाटा कह

रहा है एक बहुत ही अच्छी वेबसाइट का। 300

साल लगेंगे केस को क्लियर होने में।

आप मान के चलिए। ये तो बात हो गई लोअर

कोर्ट्स की। और वो भी आज अगर सारे केसेस

बंद हो जाए आना तो 300 तो एग्जैक्टली तो

बैकलग और अगर यह बैकलग का अगर एक शहर होता

ना तो दो बॉम्बे शहर आ जाते इतना बड़ा

बैकलग बनता है ये अब यह तो बात हो गई राज

भाई लोअर कोर्ट्स की अब आप बात करिए

सुप्रीम कोर्ट की सुप्रीम कोर्ट में 70000

केस पेंडिंग है 70000 सो आप 70000 केस की

लाइन में है जो वीआईपी क्यों है आपको पता

ही है मतलब सुप्रीम कोर्ट जाना है तो पैसा

तो चाहिए ही आपको और मोटा पैसा चाहिए उसके

के बिना कोई आपकी फाइल नहीं छुएगा। यह

वास्तविकता है। तो वीआईपी लाइन भी 70000

की है। तो यह हकीकत है।

क्यों पैसा चाहिए सुप्रीम कोर्ट जाने के

लिए?

केस कौन लड़ेगा सर? आप पार्टी इन पर्सन

अपीयर हो जाओगे?

आप उस तरह से डू यू थिंक दैट एज अ नॉर्मल

पर्सन फॉर एग्जांपल टुडे इफ आई एम डूइंग अ

बिज़नेस ऑफ क्लोथ्स। और टुडे इफ आई एम एंड

डूइंग एनी एक्स वाई जेड बिज़नेस। आई नीड अ

लॉयर हु हैज़ सम टेक्निकल नॉलेज अबाउट लॉ।

लॉ हु इज़ प्रैक्टिसिंग फ्रॉम पास्ट 15 20

इयर्स। हु इज एज़ मच शार्प। हू इज़ एस मच

गुड। एंड देन ही कैन रिप्रेजेंट माय केस

इन हिस- बेस्ट कैपेबिलिटी। दैट इज़ व्हाई

रिक्वायर अ लॉयर।

बट कैन कोई भी लॉयर सुप्रीम कोर्ट जा सकता

है?

बिल्कुल जा सकता है सर। आपको खाली केस

फाइल कराने के लिए एक एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड

की जरूरत पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट में।

एनीवन कैन आर्ग्यू इन सुप्रीम कोर्ट। इट्स

एन ओपन डोमेन फॉर एवरीवन टू आर्ग्यू।

बट देन सबको मौका नहीं मिलता। क्योंकि सर

अगर आपको मौका नहीं है

तो आप लोकल लॉयर के साथ जा तो सकते हो ना।

बिल्कुल जा सकते हो सर और ऐसा बिल्कुल

नहीं है कि आपको मौका नहीं मिलता। मैं

आपको बताऊं जैसा आपने कहा मौका नहीं

मिलता। मेरी बात अगर मैं करूं प्रैक्टिकली

मैं एक

दाहोद करके छोटा सा जो जगह है वहां पर

रहता था। माय फादर वाज़ वर्किंग इन इंडियन

रेलवेेज एज अ क्लास थ्री मैकेनिक।

साइकिल लेके मेरे पापा मुझे रखने जाते थे।

साइकिल लेके मैं घर पे आता था। सेवंथ ए तक

मोटा-मोटा मेरा यही लाइफ था कि स्कूल

जाना, घर आना, ट्यूशन जाना, घर पूरी

फैमिली में किसी को इंग्लिश बोलना आता

नहीं था। पूरी फैमिली में कोई इतना पढ़ा

लिखा नहीं था। लेकिन मेरे पिताजी ने ये

समझा कि मुझे अच्छे से पढ़ाएंगे तो मैं

पढ़ा। अब उसके बाद क्या हुआ कि मेरे फादर

की ट्रांसफर हुई अहमदाबाद। तो मैं

अहमदाबाद हम लोग रहने आए। अहमदाबाद रहने

के आने के बाद यहां पे जो लोकल स्कूल्स थी

वहां पर मैं पढ़ा। मैंने ग्रेजुएशन किया

इकोनॉमिक्स में सवियस कॉलेज से। फिर मैंने

लॉ किया। अब लॉ में जब मैंने फर्स्ट

एडमिशन लिया तो सरकारी लॉ कॉलेज थी मेरी।

वहां पे मैंने देखा कि ये तो दुनिया ही

अलग है भाई। अपना सीन नहीं है। कुछ समझ ही

नहीं आ रहा। ये क्या है?

कोई गारंटी नहीं है क्योंकि उम्र इतनी हो

चुकी थी कि वो पैसों की जरूरत रहती थी और

घर पे मांगना तो थोड़ा वो

हिचकिचाहट

हिचकिचाहट होती थी और नहीं अच्छा लगता था।

किसी के रेफरेंस से एक अच्छे लॉयर उनके

ऑफिस में मैंने जॉइ किया।

हम

उनके ऑफिस में ज्वाइन करने के बाद

पता चला कि लॉ क्या है। तब मैंने उस टाइम

पे सीखा था कि एफआईआर को कैसे पढ़ते हैं।

तब समझ में आया कि जो बॉलीवुड की पिक्चरों

में देखा था कोर्ट, कचहरी, पुलिस वो तो

बिल्कुल उससे अलग है रियल लाइफ। फिर

क्या सीखा?

एक लेसन बताओ जब आपको एक रियलिटी हिट हुई

कि ये तो अलग ही है।

अरे राज भाई पिक्चर में तो आप क्या देखते

हो? जो पिक्चरों में आप ये देखते हो कि

भाई इसकी अरेस्ट करी इसका ये किया इसका वो

किया कोर्ट खत्म हो गया जजमेंट आ गया रोना

शुरू हो गया ये तीन घंटे में पिक्चर खत्म

कोर्ट खत्म ऐसा नहीं होता सर रियल लाइफ

में रियल लाइफ में आपके ऊपर अगर एफआईआर हो

गई तो आपकी अरेस्ट होगी आप जेल जाओगे 7

साल से कम की सजा का गुनाह है तो आपको 41

ए की नोटिस आएगी वो भी आई तो आई नहीं आई

तो आपकी अरेस्ट आप जेल गए चार्जशीट फाइल

नहीं हुई उसके बाद आप बाहर आओगे चार्जशीट

फाइल होना मतलब 90 दिन 90 दिन के बाद आप

मतलब एस्टेटेड चार सा 4 महीने के बाद आप

बाहर आओगे केस चलेगा ट्रायल चलेगी अगर

आपको फेस नहीं करना तो 482 के अंदर आप

कॉशिंग फाइल करोगे कोर्ट्स के अंदर केस

अगर आपको लगता है कि आपके ऊपर गलत है तो

उसके ऊपर जजमेंट कोर्ट में जाना आना इट्स

अ वेरी टीडीियस थिंग

वेरी टीडीियस थिंग मतलब अगर वो प्रोव आपने

सुना हो कि भगवान डॉक्टर और वकील से दूर

रखे तो सच ही सुना मेरी वो एज हो गई थी कि

मेरे को एक तो घर से पैसे मांगना पसंद

नहीं थे

हम

दूसरा के मैं वो चीजें फेस कर रहा था।

इतना हैवी फाइनेंशियल क्रंच कि चीजें घर

में देख रहा हूं कि मेरे पापा 12 घंटे

रेलवे की नौकरी खत्म करते हैं। उसके बाद

शाम के 6:00 बजे से रात के 12:00 बजे तक

रोड पर ठेला लगाते हैं। सोडा बेचते हैं।

क्यों? क्योंकि मैं पढ़ सकूं। फिर भी घर

में वो चीजें पूरी नहीं हो पाती थी। तो

उनके वो उनको मतलब जो मैं देखता था एक

आदमी को 17 18 घंटे दिन में काम करते हुए

तो मैं उनसे यार कुछ मांग नहीं पाता था।

तो जीवन में एक ऐसा दोस्त था। मेरे

वो मेरी लॉ की फीस भरता था

और

मुझे आज याद है बिल्कुल

हम लोग एक जगह बैठे थे

और ऐसे ही बात चल रही थी तो उसने कहा ऐसा

मुझे के क्यों यार क्या है मतलब आज तू बोल

नहीं रहा एक्स व जेड चीजें तो मैंने उसको

कहा यार मैंने कहा भाई कल भरनी है फीस और

मान के चलिए 2500 ₹3000 थी। ऐसी कोई मेरी

कोई लाखों रुपया फीस नहीं थी। पर मेरे

जैसे बच्चे के लिए ₹500 ₹3000 बहुत मैटर

करते थे। तो और उसके लिए भी बहुत मैटर

करते थे क्योंकि वो भी बिल गेट्स नहीं था।

पर पता नहीं यार सुबह-सुबह कहां से आया?

दूसरे दिन हम घर जाके सो गए। सुबह आया।

बोले फोन आया उसका कहां है? मैंने कहा घर

पे। बोले आजा नीचे। नीचे आया। तो बोला चल

फिर हम बाहर गए ऐसे नाश्ता-वास्ता करने।

तो यार ₹3000 मेरे हाथ में दे दिए। बोले

कॉलेज की फीस भर देना। तो हमेशा मैं कहता

हूं उसके बारे में राज भाई है ना आपकी

लाइफ में आपके पास

एक अच्छा दोस्त होना चाहिए। एक ऐसा दोस्त

जो आपकी जिंदगी का सरकम्फ्रेंस बदल दे और

उसको मैं अक्सर यह कहता था मतलब कहता हूं

अभी भी

एक शायरी है। मुझे पता नहीं किसने बोली

है। पर बहुत ही फैंटास्टिक शायरी है कि

तेरे जैसा कोई मिला नहीं। कैसे मिलता कोई

था ही नहीं। तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं।

कैसे मिलता कोई था ही नहीं। तू जहां तक

दिखाई देता है तू जहां तक दिखाई देता है

उसके आगे मैं देखता ही नहीं।

तो यह हमेशा मैं उसको बोलता हूं। और

दोस्त जो है ना राज भाई वह एक या दो होते

हैं। बाकी भीड़ होती है। वो बाकी साथ में

बैठने वाले होते हैं, उठने वाले होते हैं।

बाकी दोस्त एक या दो होता है। आपके जीवन

में भी होंगे ऐसे। तो उसकी वजह से मैंने

मेरा लॉ किया। ये कहने में मुझे कोई शर्म

नहीं है, कोई हर्ज नहीं है। और मुझे सबसे

बड़ी बात मेरे दोस्तों ने जो सिखाई ना राज

भाई

पीपल आर रिवॉर्डेड इन पब्लिक फॉर व्हाट दे

प्रैक्टिस फॉर इयर्स इन प्राइवेट।

आपको लगता है किसी को देख के अरे इतना

बड़ा सक्सेसफुल आदमी हो गया। आपको यह इतना

बड़ा सक्सेसफुल आदमी हो गया। ऐसे कुछ नहीं

होता है। उसने इतनी मेहनत करी होती है ना

दिन रात सालों महीनों सोया नहीं होता। वो

कॉफी कोई अगर उसको सिगरेट पीने की आदत है

तो सिगरेट पिएगा। इतनी वह मेहनत करता है

ना और फिर एक दिन उसको मिलता है बूम जिसको

आप बोलते हो सक्सेस। ऐसा नहीं होता। दैट

इज व्हाई आई लर्न दिस थिंग फ्रॉम माय

फ्रेंड्स दैट यू इफ यू आर रिवॉर्डेड इन

पब्लिक फॉर व्हाट यू प्रैक्टिस फॉर इयर्स

इन प्राइवेट। दैट इज अबब्सोलुटली ट्रू। जब

हम बात कर रहे थे आपके केस की मोरबी पे।

जी।

आपने सब चीजें देखी।

सबसे हारश या ब्रूटल लेसन क्या सीखा इस

सिचुएशन से जो आपको सोसाइटी का एक ट्रुथ

पता चला कि भाई

ये भी होता है

सबसे खराब चीज जो इस केस से मैं सीखा हूं

वो यह सीखा हूं कि अगर तुम्हारी जेब में

पैसा है और अगर तुम थोड़े बहुत

इन्फ्लुएंशियल आदमी हो तो तुम्हें छू नहीं

सकता कोई यू आर अनटच

यू हैव द पावर टू मैनपुलेट एनीथिंग।

दूसरी चीज जो मैं इस इस इससे सीखा हूं

कि हमारे देश में हमारी सरकार को कुछ ऐसी

व्यवस्था लाने की जरूरत है जिससे यह

प्रस्तापित हो कि आदमी की जान की कीमत 4

लाख और दो लाख नहीं है। मोरबी का हादसा

हुआ। लोग मरे सरकार ने सबसे पहले मुआवजा

घोषित किया। आपको पता है मुआवजा कितना था?

4 लाख और दो लाख। सेंट्रल और स्टेट

गवर्नमेंट का मिलाकर ₹ लाख। राज भाई आपको

पता है अगर आदमी अपनी ब्लैक में किडनी

बेचता है तो कितने में जाती है? एक एक अगर

आप थोड़ा Google पे पढ़ेंगे तो एक वेबसाइट

है जो कहती है अगर आप किडनी डोनेट करो

किसी को या ऐसा कुछ करो जो ऐसा चलता है

ग्रे मार्केट में तो कहते हैं 2025 लाख

में सिर्फ एक किडनी जाती है। यहां पूरा

आदमी मर गया। किसकी वजह से? आपकी वजह से

साहब। क्योंकि आप अपना काम ही नहीं करना

चाहते थे। आपको कुछ नहीं करना था। आपको

बैठे-बैठे खाली आपकी रोटियां चाहिए थी और

आपकी वजह से कोई मर गया है और आप कह रहे

हो कि नहीं हम तो ₹ लाख देंगे और फिर

विक्टिम्स गए सुप्रीम कोर्ट इस केस में

इंटरेस्टिंगली

हम

सुप्रीम कोर्ट में

गाइडलाइंस दी गई कि जो ये पीआईएल चलेगी

हाई कोर्ट में ये इस सरकम्फ्रेंस में

चलेगी एक पूरे डोमेन में उसको हम वापस

लेके आए फिर गुजरात हाईकोर्ट ने स्टेट को

पूछा कितना कंपनसेशन दिया है तो बोले इतना

तो बोले नहीं बड़ा फिर 10 लाख दिए। फिर जो

कंपनी की वजह से पुल गिरा था वह पीएल में

पार्टी नहीं थी। फिर विक्टिम्स ने एक सीए

करी कि सर आप इनको पार्टी तो बनाओ। इनकी

वजह से पुल गिरा है। उनको पार्टी बनाया

गया। नोटिससेस इशू करी। उनके लॉयर आए

कोर्ट के अंदर।

फिर एक जजमेंट दिया गया कि एज एन इंट्रिम

कंपनसेशन कंपनी अभी 10 ₹1 लाख एक

विक्टिम्स को देगी। तो मोटा-मोटा आज की

अगर हम डेमोग्राफिक बात करें इन टर्म्स ऑफ

स्टैटिस्टिक्स तो 16 करोड़ के आसपास

विक्टिम्स को अमाउंट मिली है जो सारा

इंट्रिम कंपनसेशन है और एक ऐसी व्यवस्था

बनाई गई है कि जिसके

अनुक्षी जो सारे विक्टिम्स हैं उनको

मैक्सिमम विक्टिम्स को पेंशन मिलता है और

तकरीबन कंपनी का खर्चा इसके अंदर 1 करोड़

के आसपास होता है। तो ये रेगुलर हर हर

महीने हर महीने बिल्कुल हर महीने मिलता है

और अभी तो ये लड़ाई रुकने नहीं वाली है।

अभी तो हमने क्लेम किया है कि हमें ₹250

करोड़ कंपनसेशन चाहिए। ₹ करोड़ पर डेथ। यह

तो बात हुई मोरबी की। ऐसा ही हादसा था

बड़ौदा में। वहां पर हमने क्लेम किया है

कि हमें ₹ करोड़ पर डेथ चाहिए। और यह

बड़ौदा की जो बोट कैपसाइज की जो घटना है

ना राज भाई इट इज अ लिविंग एग्जांपल ऑफ

हाउ द गवर्नमेंट मशीनरी फेल्स। इट इज अ

लिविंग एग्जांपल ऑफ हाउ करप्टेड ऑफिसर्स

इन सिस्टम आर नॉट सपोज टू बी वर्किंग। इट

इज़ अ लिविंग एग्जांपल ऑफ हाउ करप्शन इज अ

मेनस इन द सोसाइटी। बट टेल मी मैं जितने

पडकास्ट के थ्रू ही बड़े-बड़े पुलिस

ऑफिशियल से बात करता हूं, हम

आईएएस ऑफिसर से बात करता हूं। अथॉरिटी से

बात करता हूं। एंड देन तो मैं बहुत सारे

बड़े लॉयर्स से बात करता हूं। आप लोगों को

जैसे सारे लॉयर्स बोलते हैं एक ने भी उल्ट

अलग नहीं बोला। सारे लॉयर्स ने बोला है कि

पैसे से सब बिकता है। हमने हमारी आंखों के

सामने बिकते हुए देखा है। विटनेस बिकता

है, विटनेस की फैमिली बिकती है। कोर्ट्स

में जितने आप फ्रॉम एन आईओ टू अ डॉक्टर टू

समबडी गिविंग जस्टिस सब बिकते हैं।

अलग-अलग सिनेरियोस में बहुत लोगों ने बोला

कुछ लोग हैं नहीं भी बिकते हैं बट

मेजॉरिटी सब बिक जाता है। राइट? दैट इज

व्हाट एंड कुछ लॉयर्स ने तो बोला है सभी

बिकता है। लॉयर्स ऐसे बोलते हैं। और फिर

वो एग्जांपल्स गिना देते हैं कि ये

एग्जांपल, ये एग्जांपल, ये एग्जांपल, ये

एग्जांपल। पर आप जब भी अथॉरिटी से बात

करते हो, पुलिस ऑफिसर से बात करते हो तब

वो लोग बताते हैं कि यस बहुत जगह बिकता

है। यस बहुत जगह बिकता आ रहा है लेकिन अब

सब चेंज हो रहा है। इतनी आसानी से नहीं

बिकता है। जस्टिस तो मिलता है। भले लेट

मिलता है लेकिन जस्टिस तो मिलता है। व्हाट

इज ट्रू? यही है। मैंने जो आपको कहा इसके

सिवाय मुझे इस बात को कहने में कोई शर्म

नहीं है।

इंडिया का कानून अंधा नहीं है। आपने देखा

होगा बॉलीवुड में कानून की देवी को बताते

हैं आंख पे पट्टी होती है। तो मैं यह कहता

हूं कि वो अंधा नहीं है। इंडिया का कानून

ट्रैफिक जाम में फंसा हुआ है। बट

कब मिलेगा, कितना लेट मिलेगा किसी को कुछ

पता नहीं है। बस मिल गया तो आपको मिल गया।

बट आपने बोला कि आपने यह सीखा लेसन कि अगर

पैसा है तो तुम्हें कोई हाथ नहीं लगा

सकता।

बिल्कुल।

राइट। बट पुलिस अथॉरिटीज बोलती हैं कि

बड़े वो एग्जांपल्स भी दे देती हैं दो-तीन

कि ये देखो बड़े इंसान को भी अंदर डाला,

इसको भी अंदर डाला, इसको भी अंदर डाला।

जस्टिस है। आप लोगों का साइड साइड लिया।

आपको मैं ये चीज समझाता हूं। दो बड़े केस

से हिंदुस्तान के जो सबको पता है। आपको ही

पता होंगे। 2G स्पेक्ट्रम स्कैम। हम

इंडिया का सबसे बड़ा आज तक का स्कैम शायद

होगा। 2G स्पेक्ट्रम स्कैम लाखों करोड़ों

रुपए का स्कैम। आपको पता है उसमें सुप्रीम

कोर्ट का फाइंडिंग क्या है? सारे एक्यूज़्ड

को एक्विटल हो चुका है। सब छूट गए।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया जजमेंट में क्या

लिखा है राज भाई? वी आर नॉट एक्विटिंग

एवरीवन। सो एस सेइंग दैट दिस पीपल आर नॉट

गिल्टी। वी आर एक्विटिंग एवरीवन बिकॉज़ वी

फाइंड दैट द स्टेट हैज़ नॉट फाउंड एनीथिंग

इंक्रिमिनेटिंग अगेंस्ट देम टू प्रूव देम

गिल्टी।

कहां गए इतने लाखों करोड़ों रुपए? आप समझ

रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट यह कहता है कि मैं

इन लोग को इसलिए नहीं छोड़ रहा भाई कि इन

लोगों ने कुछ गलत नहीं किया है। मैं यह

इसलिए छोड़ रहा हूं कि कुछ प्रूव ही नहीं

हुआ है कि किसने क्या किया है।

जेसिका लाल मर्डर केस क्या हुआ? एक

वर्डिक्ट आ गया। उसके बाद अपील फाइल होती

है हाई कोर्ट्स और सुप्रीम कोर्ट के अंदर।

एक्विटल नॉन एक्विटल एक्विटल नॉन एक्विटल

एक्विटल नॉन एक्विटल एक्विटल नॉन एक्विटल

फैमिलीज के ऊपर इतना ट्रोमा है कि सच क्या

है? हुआ क्या है केस के अंदर?

ये रियलिटी है। ऐसे बहुत सारे केसेस हैं।

बैक टू बैक। पैसे से

एक्जेक्टली।

बट बहुत ऐसे भी तो केसेस हैं जहां पे हुआ

होगा एक्चुअली। ऐसे केसेस जहां पे पैसे

वाले लोग हैं जो सब कुछ खरीद सकते हैं।

बड़े से बड़े लोग हैं। उनको भी तो जेल हुई

होगी। कोई सिस्टम से बड़ा थोड़ी हो सकता

है।

नहीं बिल्कुल। जेल जेल होई होनी हुई हुई

होगी या होनी होगी। इसमें क्या होता है

राज भाई

या कन्विक्ट हुआ

नहीं बिल्कुल मैं समझ गया ये व्यवस्था है

आप मान के चलिए कि कोई भी केस हुआ आप जेल

में गए आप अंडर ट्रायल है फिर आप बाहर आए

फिर ट्रायल चली और अब मैं आपको वही समझाना

चाह रहा हूं कि हमारे हमारी जो व्यवस्था

है वो कैसी है कि क्या हो रहा है कि आप

विटनेसेस के साथ खिलवाड़ करेंगे जैसे कि

आपको आशाराम बाबू का केस पता होगा उसमें

विटनेसेस के भी मर्डर हो चुके थे आप एक

बात को समझ लीजिए बहुत गंभीरता से ट्रायल

में चलने ही नहीं दूंगा। मैं डिस्चार्ज

एप्लीकेशन फाइल करूंगा। वो डिस्चार्ज

एप्लीकेशन पेंडिंग रहेगी दो-ती साल। चलो

दो-ती साल में वो डिस्चार्ज एप्लीकेशन

डिसाइड होती है मेरे अगेंस्ट में। मैं

उसको चैलेंज करूंगा एज अ रिवीजन एप्लीकेशन

हाई कोर्ट में।

हम

मतलब हाई कोर्ट में भी उसके ऊपर कुछ ना

है। तो हाई कोर्ट मुझे एक सिंपल ऑर्डर

देगा कि मैं एडजमेंट ले सकता हूं। तो

ट्रायल में मैं वो आर्डर साइड करके

एडजमेंट लूंगा कि मैंने तो हाई कोर्ट में

अपील करी है कि केस मेरे अगेंस्ट में गलत

है। मुझे डिस्चार्ज करो। अब आप मुझे यहां

पर ट्रायल में एडजमेंट दो। अब मैं जेल से

बाहर हूं। बेल पे हूं। मतलब 15-15 दिन की

तो तारीख पड़ेगी नहीं। महीने महीने की

तारीख पड़ेगी। हर महीने में ये कह के

तारीख ले रहा हूं। हाई कोर्ट में मेरी

मैटर जो है वो मैं कुदा रहा हूं। अब जान

लो मान लो कि 2 ढाई साल बाद हाई कोर्ट भी

मेरे डिसफेवर में देती है। मैं सुप्रीम

कोर्ट में जाऊंगा। फिर मैं बोलूंगा कि हाई

कोर्ट ने मेरे अगेंस्ट में रॉन्ग किया है।

पर सुप्रीम कोर्ट में मेरी मैटर पेंडिंग

है तो मुझे जजमेंट जजमेंट दो। तो सर 7 से

आठ साल ये अगर डेमोग्राफिक फ्रेम में है

तो ट्रायल तो मैं 7 आठ साल ऐसे ही नहीं

चलने दूंगा।

बट एक दिन तो आएगा जजमेंट डे।

बिल्कुल आएगा।

तो जाओगे तुम।

पर तब तक तो सर केस ही खत्म हो जाएगा।

विटनेस होंगे वही मर जाएंगे। मैं वो

समझाना चाह रहा हूं। ऐसा नहीं है कि

जजमेंट नहीं आता। ऐसा नहीं है कि चीजें

नहीं होती। होती है। हमारे पास बहुत अच्छी

व्यवस्था है। कल्पेट को सजा भी मिलती है।

लेकिन जो यह मोटी-मोटी बात हमें समझनी है

वो यह है कि मैक्सिमम केसेस में यही होता

है। अगर होता इतना जल्दी तो 4 करोड़ के इस

देश में पेंडिंग नहीं होते।

हम

अगर होता तो 228 मिलियन लोग इंडिया में

पॉवर्टी लाइन के नीचे नहीं होते। अगर होता

तो जुनाइल जस्टिस होम के अंदर इतने बच्चे

आज नहीं होते। अगर होता ना राज भाई तो मैं

समझता हूं कि हाई कोर्ट के अंदर इतनी

मर्डर

रेप की अपील्स फाइल नहीं होती अगर होता तो

फेयर एंड ये रियलिटी है हमारे इधर

ये है और इसको बोलने में और एक्सेप्ट करने

में कोई शर्म ही नहीं है जो है वो है

जो है

दैट इज ट्रू बट अब चेंज नहीं हो रहा आपको

ऐसा लगता है क्योंकि कुछ केसेस हैं मतलब

आइकॉनिक केसेस भी हैं जहां पे

देश का सबसे रईस आदमी भी जेल गया है और

उसको कोई नहीं छोड़ा हर्षद मेहता एज अ

क्लासिक केस कि उस लेवल पर जाने के बाद भी

जेल तो हुई। तब सिस्टम आपके अगेंस्ट था

इसलिए आप गए। मैं वही समझा रहा हूं। हर्षद

मेहता के स्कैम के अंदर सिस्टम वाज़

अगेंस्ट हर्षद मेहता। मैं आपके सामने जो

एग्जांपल पोट्रे कर रहा हूं वो हर एक

एग्जांपल है ऐसे लोगों के अगर आप उसको

ध्यान से सुने और समझे कि जो सिस्टम को

साथ में ले चल रहे हैं। तो आप किसी से भी

खिलवाड़ कर सकते हो। अगर तभी मैंने आपको

कहा पैसे के साथ-साथ पावर व्हाट आई मेंट

पावर बाय सेइंग पावर वाज पॉलिटिकल पावर

इफ यू आर क्लोज टू फ्यू पीपल हु

अब्सोलुटली सर इफ यू आर क्लोज टू समवन यू

आर द बॉस नॉट ही हु इज इन द पावर

सो मनी प्लस पॉलिटिकल पावर प्लस अथॉरिटी

पावर ये तीनों जिसके पास है वो जेल नहीं

जा सकता

99% नहीं जा सकता 99% नहीं जा सकता और चला

भी गया तो मान लो फॉर्मेलिटी है। 99% तो

जा ही नहीं सकता। चला भी गया तो मान लो

फॉर्मेलिटी है। अभी हिंदुस्तान के अंदर एक

बहुत ही बड़े व्यक्ति को जिनका बहुत ही

बड़ा स्ट्रांग पॉलिटिकल बैकग्राउंड रहा है

उनको एक रेप के केस के अंदर शायद आपको पता

होगा सजा हुई है फॉर्मर प्राइम मिनिस्टर

ऑफ इंडिया के बेटे के बेटे को और यह बहुत

ही इंटरेस्टिंग चीज है कि उनको सजा इसलिए

हुई है। एक क्लासिक एग्जांपल है। यह

क्लासिक एग्जांपल है कि सिस्टम कैसे वर्क

करता है। यह क्लासिक एग्जांपल है कि अगर

सब कुछ इन अकॉर्डेंस विद लॉ चला तो यह

होता है और इसको भी

तो हो गई।

हां तो हो गई। क्लासिक एग्जांपल है कि

कैसे चीजें अकॉर्डिंग हो रही है। बट मैं

आपको कह रहा हूं कि अगर आप मान के चलिए इस

बात को बहुत ही विश्वास के साथ कह रहा

हूं। अगर आप एक ऐसे आदमी हैं जिसको पता है

कि एडमिनिस्ट्रेटिवली सिस्टम कैसे वर्क

करता है। नंबर एक जिसको यह पता है कि

एडमिनिस्ट्रेशन के साथ-साथ पॉलिटिकल पावर

मैं कैसे एडमिनिस्ट्रेशन पे ला सकता हूं

और दोनों का कॉम्बिनेशन

जो एक आपको आउटकम होगा जो देगा आपको वो

नॉट गिल्टी होगा सर। राज भाई इसको समझते

हैं। कविता है। एक कविता के माध्यम से

आपको मैं समझाता हूं।

बहुत इंटरेस्टिंग कविता है। सबके अपने

सत्य हैं और सबके अपने झूठ। सबके अपने

सत्य है और सबके अपने झूठ। कोई कहता लाभ

इन्हें किसी को लगती लूट। जिसमें मैं का

फायदा और मैं का है नुकसान। मैं का बढ़ता

मान देखकर मैं की जलती जान। तो आपके जो

सवाल है उसका जवाब इसी के अंदर है। आप

ढूंढ लीजिए।

फिर एक और सवाल है जो

मान लो कोई इंसान है

जिसके पास

सिर्फ उसने ढंग से पैसे कमाए लाइफ में

मतलब अच्छे से वो अपना या तो बिज़नेस चलाते

हैं या कोई जॉब करते हैं जो इतने लाखों

लोग देख रहे हैं। ना जॉब करते हैं

थोड़े-थोड़े पैसे इकट्ठे कर लिए और पैसे कमा

लिए। अब उनके साथ कुछ हो जाता है। गलत सही

दैट्स अप फॉर डिबेट

क्या वह अगर सिर्फ एक सही लॉयर ले ले तो

क्या लॉयर भी उनकी तरफ से पावर

एडमिनिस्ट्रेटिव पैसा सब एक लॉयर ही मैनेज

कर देता फिर उनको कुछ करने की जरूरत ना

पड़े बिल्कुल सर अ पावर ऑफ अ लॉयर इफ

यूटिलाइज्ड वाइजली एंड करेक्टली कैन शेकन

एनी बिग बिल्डिंग एक वकील का पावर इतना है

कि उसको अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया

जाए तो कितने भी हेड स्ट्रांग आदमी हो वो

उसको हिला के रख देता है। उसकी नींद हराम

कर देता है।

फॉर एग्जांपल आपके पास कुछ भी छोटा या

बड़ा कोई क्राइम होता है। आप एक लॉयर के

पास जाते हैं। अच्छे लॉयर के पास जाते

हैं। वो लॉयर आपको प्रॉपर गाइड करते हैं

कि आप एफआईआर करवाइए। अगर आपकी पुलिस

कंप्लेंट नहीं कर रही तो आप मैजिस्ट्रेट

में कंप्लेंट करिए। एक्स व जेड अक्यूज़्ड

अरेस्ट होते हैं। उसके बाद वह लॉयर की

ड्यूटी है कि आपको समझाए कि एफआईआर करने

के बाद केस खत्म नहीं होता। यह बेल रखेंगे

तो आपको बेल को अपोज भी करना पड़ेगा। नीचे

ट्रायल चलेगी तो आपको ट्रायल कोर्ट के

अंदर विद प्रोसक्यूशन लॉयर भी रोकना

पड़ेगा। चीजें करनी पड़ेंगी। तब जो आपका

गरज है जो आपकी एक एक अंदर जो आग है कि यह

होना चाहिए, यह नहीं होना चाहिए, यह होगा।

और यह पूरा पावर केवल एक लॉयर के पास है।

बट एक पावरफुल लॉयर सामने वाले ने भी

पावरफुल लॉयर कर दिया। देन इट्स जस्ट

जस्टिस डिलेड।

देन यू जस्ट सी टू बुल्स फाइटिंग फॉर योर

सेटिस्फेक्शन।

एंड देन इट जस्ट जस्टिस डिलेड। राइट?

नो इट इज़ नॉट जस्टिस डिलेड। दिस इज़ हाउ द

जस्टिस इज़ सर्व राइटली। फॉर एग्जांपल

बट वो अंडर जो आपने बोला ना अंडर ट्रायल

प्रिजनर बन जाएंगे वो।

यस एक्सक्ट्ली। पर नहीं उसी उसी के लिए एक

और चीज है राज भाई जो हमें समझनी चाहिए कि

इनोसेंट टिल प्रूवन गिल्टी एक आपने सुना

ही होगा इनोसेंट टिल प्रूवन गिल्टी शुड

नॉट लुक लाइक जेल टिल प्रूवन इनोसेंट

दिस इज

एक्सक्ट्ली व्हाट लुक्स लाइक व्हाट इट इज

दैट इज दैट इज व्हाई दैट इज व्हाई दैट इज

व्हाई टू लॉयर्स वन इज़ योर लॉयर

प्रोबेब्ली द पर्सन हु हैज़ कमिटेड क्राइम

विथ यू ही एंगेज अ लॉयर एज़ यू हैव योर ओन

लिबर्टी ही आल्सो हैज़ हिज़ ओन लिबर्टी यू

वांट

यू टू बी रिप्रेजेंटेड ब समवन। ही आल्सो

वांट समवन टू बी रिप्रेजेंटेड ब समवन।

इसीलिए मैं अक्सर मेरे दोस्तों को कहता

हूं कि कोर्ट रूम में इट इज़ नेवर अ

ट्रायल। इट इज़ बेसिकली जज इज़ ऑन द ट्रायल।

बिकॉज़ बोथ द पार्टीज नो द ट्रुथ। सो इट इज़

द जज इज़ ऑन द ट्रायल। ये अक्सर मैं कहता

हूं मेरे ग्रुप में मेरे लोगों को।

क्योंकि आपको तो पता ही है कि सच है।

किसने नहीं किया है।

हां। पर जज ट्रायल पे हैं। जज साहब ट्रायल

पे हैं। जज साहब को पता लगाना है कि होना

क्या है। तो ये है।

तो इट्स एंड देयर इज़ अ कोर्ट फॉर इट। अ

गुड लॉयर नोस लॉ

लॉ अ ग्रेट ग्रेट लॉयर नोस द जज एक्सक्टली

ये शुरुआती दिनों में जब लॉ कॉलेज में

पढ़ता था तब लोग काफी

कोट करते थे

कोट करते थे हम बताते भी थे अब इसकी

वास्तविकता समझ में आती है कि क्यों कहते

हैं सच में समझ में आती है और बहुत अच्छे

से समझ में आती है।

सो दैट्स व्हाट आई आस्किंग कि मान लो एक्स

पार्टी ओके फॉर आप

आप एक नॉर्मल सिटीजन हो। आपके साथ क्राइम

होता है। कुछ एक्स व जी खराब मतलब सामने

वाले ने किया लेकिन सामने वाले ने आपको अब

केस लड़ा। आप चाहते हो आपको मिले।

आपको मिले जस्टिस। आपने हायर किया बेस्ट

लॉयर। सामने वाले ने भी किया बेस्ट लॉयर।

इसमें कौन जीतेगा? जो अच्छा लॉयर है वो कि

जो ज्यादा पैसे वाला पावरफुल कनेक्टेड

लॉयर है वो। दो चीजें

अगर आप सच्चे हैं आपको सुनने वाले जो जज

साहब हैं

वो इतनी अच्छी तरीके से तरीके से आप जज

साहब को अगर चीजें समझा पाए तो 99% आपके

फेवर में ऑर्डर आने वाला है। और अगर बाकी

की कुछ एक्सटर्नल फैक्टर्स होते हैं जो

केस को अफेक्ट करते हैं वो इस केस में अगर

कोई लॉयर लाके खड़ी कर दे तो शायद आपका

पगड़ा ढीला पड़ सकता है। आप मैं बोल रहा

हूं आप सच्चे हो। आप सच्चे हो। आपके साथ

एक्चुअली गलत हो रहा है। ठीक है? एक

क्लासिक एग्जांपल पकड़ लेते हैं जो बहुत

ज्यादा लॉयर्स बात करते हैं और आजकल

इंडिया में बहुत ज्यादा बात होती है कि

फॉल्स

फॉल्स एफआईआर होती है। वुमेन जो केस लगा

देती है फॉल्स केसेस ऑन मैन। और बहुत सारे

लड़कों जैसे एक वो रोड वाला हुआ था जहां

पे एक बाइक पे एक लड़का था। डू रिमेंबर

दैट केस?

तो उस बेचारे की पूरी लाइफ ही खत्म हो गई।

वो लड़की तो बस चली गई। कनाडा चली गई। वो

अपना काम कर रही है। उसको अब ना कोई जॉब

दे रहा है। वो इतने साल जेल में होके आया।

ऑल ऑफ़ दैट? राइट? एक इनोसेंट लड़का था।

लड़की ने फॉल्स केस लगा दिया। अब इसमें

दिख रहा है फॉल्स केस है। बट उसने लड़की

ने हायर किया बहुत तगड़ा लॉयर और इस लड़के

ने भी हायर किया लॉयर। हु विल विन नाउ।

इसीलिए एक सिस्टम है के आपके पास जो भी

फैक्ट्स हैं उसको आप किसी के साथ

रिप्रेजेंट करवाइए और एंड में जो वर्डिक्ट

आना है वह आना है। लेकिन जो मैं एक्सटर्नल

फैक्टर्स की बात करता हूं उसमें पॉलिटिकल

प्रेशर जज क्या है राज भाई? आपके और मेरे

जैसे एक आदमी

हम

एक्सटर्नल फैक्टर्स क्या है? पॉलिटिकल

पावर, पॉलिटिकल प्रेशर, फोन कॉल्स ये सब

ज्यादातर आपको हाई कोर्ट्स में और सुप्रीम

कोर्ट्स में देखने नहीं मिलता। ये सब

देखने मिलता है लोअर जुडिशरी में। और लोअर

जुडिशरी में ही तो केस चलता है। आपकी

ट्रायल कौन सी हाई कोर्ट में चलने वाली

है, सुप्रीम कोर्ट में चलने वाली है।

कितने जजेस को कितने जजेस के ऊपर हाई

कोर्ट्स में इंक्वायरी चल रही है फॉर

करप्शन? कितने जजेस के ऊपर आप देखेंगे कि

एलिगेशंस हैं करप्शन। कितने अक्यूज़ जो हैं

चालू ट्रायल कोर्ट्स के अंदर एप्लीकेशन

मूव करते हैं टू द प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट

जज दैट वी डोंट फाइंड दिस जज इन आवर फेवर

बिकॉज़ ही आई वी प्रोबेब्ली डोंट नो व्हाई

ही इज़ और शी व्हाटएवर द जज इज़ इज़ रिमूविंग

अ पर्सन पर्सनल गरज ऑन अस इज़ व्हाट वी फील

लाइक एंड वी वांट टू ट्रांसफर आवर केस

फ्रॉम दिस कोर्ट टू दैट कोर्ट दैट कोर्ट।

समझिए एक बात एक अ एक्यूज़ है उसको तो आपकी

ट्रायल चलानी है। आप भी जज हो कोई और भी

जज है। आपकी कोर्ट में चला है कहीं और

चलाए। ऐसा तो नहीं है कि कुछ अलग होने

वाला है। जो होने वाला है जजमेंट आने वाला

है। लेकिन आज ये ट्रेंड बन चुका है।

मैं मेरे खुद के ही आपको 10 केस ऐसे बता

सकता हूं जिसने जिसमें एक्यूज़ ने मुझे ऐसा

बोला है कि सर आप एप्लीकेशन मूव करो। हमको

ये जज में कोर्ट केस नहीं चलाना है।

इसीलिए नहीं राज भाई कि वो वो उनका कुछ हो

नहीं रहा। आप समझ सकते हैं मैं क्या बोलना

चाह रहा हूं। इसीलिए नहीं। इसीलिए कि वो

समझते हैं कि जज के पास नॉलेज ही नहीं है

सर जो हम इसको समझाना चाहते हैं। या

इसीलिए वो हमको ऐसा बोलते हैं कि सर हमको

लगता है कि ये जज का अपना ही कानून है। आप

कोर्ट बदलवा दो। तो ये एक और प्रोसेस है।

ये एक और हर्डल है जिससे आपकी ट्रायल डिले

होती है। क्योंकि फिर आप उसकी एप्लीकेशन

लगाओगे प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के

अंदर। क्योंकि वो इज द मेन जज।

तो पर्सन इज़ जेल्ड अंटिल प्रूवन इनोसेंट।

नहीं। बट हम उस केस के बारे में ज्यादा

बात कर रहे हैं जिसमें एक्यूज़ ऑलरेडी बेल

पे होते हैं और ट्रायल चल रही होती है। ये

उन केसेस को लेके बात है। तो ये है

बट बेल में बीबी इंडिया इज़ सच अ कंट्री

जहां पर आप बेल पे हो नहीं बेल पे हो फर्क

नहीं पड़ता।

अगर मीडिया में आपके बारे में बात हो गई

तो एनीवे समाज तो आपको वैसे ही देखेगा।

अंटिल अनलेस आपका बिजनेस है। आपका बिजनेस

उससे अफेक्टेड नहीं है तो बात अलग है। आप

कर सकते हो।

बट सोशल स्टिग्मा जॉब नहीं मिलती आपको।

सही बात है।

जहां जो आप कर रहे होते हैं वहां निकाल

दिया जाता है। आप स्टार परफॉर्मर हो आपके

ऊपर फॉल्स केस लगा है तो भी आपको निकाल

दिया जाएगा।

बिल्कुल ऐसा है राज भाई दो चीजें इसको

ध्यान से समझिए। जैसा कि आपने कहा फॉल्स

केस फॉल्स एफआईआर फिर आपने लड़की का

एग्जांपल दिया। सुप्रीम कोर्ट की ये

रूलिंग है कि आज के आधुनिक जमाने में जब

लिव इन का एक कांसेप्ट डेवलप हुआ जब लड़के

और लड़की के बीच में जो यह वेस्टर्न कल्चर

है लिविन रिलेशनशिप का इसको हमने आजमाया।

तो हमने यह देखा हमारे समाज में कि कोई

लड़का किसी लड़की से प्यार करता है। अब

प्यार करता है तो नेचुरली एक फिजिकल

रिलेशन होना दोनों के बीच में मोटा-मोटा

जायज है। उसके बाद कोई हर्डल आ जाता है और

लड़का शादी नहीं कर पाता। तो हमने कहीं ना

कहीं ऐसा देखा कि कुछ केसों में क्या हो

रहा था कि लड़कियां जो थी वो लड़कों पर

रेप के केसेस कर देती थी। फिर इसको एक टूल

बना लिया गया मोटा-मोटा कि भाई आप शादी

नहीं करोगे रेप आपने शादी नहीं की रेप रेप

वेरी इंटरेस्टिंगली व्हिच एवरीवन शुड नो

एंड आई एम थ्रू यू आई वांट द पीपल टू नो

दैट इज़ व्हाई आई एम सेइंग सुप्रीम कोर्ट

हैज़ सेड इट वेरी क्लियरली दैट सेक्स ऑन द

प्रिटेक्स्ट ऑफ गेटिंग मैरिड इज़ नॉट अ रेप

इफ आई एम इन अ लिविंग रिलेशनशिप विद यू

दैट इज़ बिकॉज़ यू आर आल्सो कंसेंटिंग टू इट

इफ वी आर हैविंग एनी फिज फिजिकल रिलेशनशिप

इट इज़ बिकॉज़ यू आर कंसेंटिंग टू इट। इट इज़

बिकॉज़ माई इमोशंस आर कॉमन टू योर इमोशंस।

एंड डेट इज़ व्हाई व्हाटएवर हैपेंड बिटवीन

अस हैज़ हैपेंड। नाउ इफ आइ हाव लेयर्ड यू

बाई सेइंग डैट आई ऍम गोना गेट मैरिड टू यू

एंड आई डोंट गेट मैरिड टू यू एंड वी गो ऑन

आवर वेज़ आफ्टर 2 मंथ्स यू गेट एन आफ्टर

थॉट ऑफ़ फाइलिंग अ रेप केस अगेंस्ट मी।

दैट्स नॉट रेप। सुप्रीम कोर्ट हेज़ सेड इट

वैरी क्लियरली।

कब बोला है ये?

रीसेंट जजमेंट है सर। ये तो 2000 आई थिंक

2022 या 23 में बोला था। रीसेंट जजमेंट

है। इट इज़ वेरी क्लियर। एंड द जजमेंट

कोर्ट्स दिस लाइन आई एम कोटिंग द जजमेंट

कोर्ट अनकोट आई एम सेइंग सेक्स ऑन द

प्रिटेक्स्ट ऑफ़ गेटिंग मैरिड इज़ नॉट अ

रेप। नॉट अ रेप एट ऑल। बिकॉज़ द कोर्ट

बिलीव्स एंड द लॉ इज़ स्टिल सेइंग दैट इन अ

रिलेशनशिप, बीट लिविंग रिलेशनशिप और बी इट

अ कॉमन रिलेशनशिप। व्हेन अ पर्सन इज इनटू

अ इन अ रिलेशनशिप एनी सॉर्ट ऑफ रिलेशनशिप

इट इज द अमेल्गमेशंस ऑफ इमोशंस टुगेदर

एवरीथिंग दैट हैपेंस हैपेंस विथ द कंसेंट

ऑफ बोथ बोथ पार्टीज

एंड दैट इज़ व्हाई दिस थिंग्स आर फॉल्स एंड

शुड बी स्टॉप्ड एंड इट इज क्लियर एंड नाउ

इट्स नॉट हैपनिंग नाउ दोज़ फॉल्स केसेस आर

नॉट हैपन

होता है बट ये जजमेंट बहुत हेल्प करता है

लड़कों को बेल लेने के लिए बट अरेस्ट तो हो

ही जाते हैं अरेस्ट होते हैं सर पर जहां

हम बात कर रहे हैं किसी की 15 साल, छ साल,

7 साल, 8 साल, 20 साल जेल में रहने की। वो

बंदा अंदर जाता है। चार्जशीट फाइल होने के

बाद बाहर आ जाता है। इसको आप दो टाइम में

चार महीना, छ महीना इसको

छ महीने भी

पर सर आप आप बिना किसी केस के कोई अंदर हो

गया?

नहीं ऐसा नहीं होता।

ये बात बहुत ही क्लियर हमें समझनी पड़ेगी

के सारे रेप केस फेक नहीं होते।

फेयर।

आई एम नॉट डाउटिंग दैट। मैं सिर्फ फेक

केसेस की बात कर रहा हूं।

नंबर दो। अब आप यही इसी के ऊपर आ रहा हूं

मैं कि आप नंबर दो आप कैसे कहोगे कोई केस

रेप का जो है वह फेक है?

नो हमें कुछ भी नहीं पता।

यह आपको आपका क्लाइंट बताएगा कि सर इसने

मेरे पे रेप का केस किया है। यह देखो

हमारे फोटोस। यह देखो हमारी WhatsApp की

चैट। यह देखो हमारी Facebook की

कन्वर्सेशन। यह देखो हमारी वो क्या

एप्लीकेशन? Instagram की कॉन्वर्सेशन। ये

देखो हमारी कोई भी मीडियम ऑफ कम्युनिकेशन

थ्रू इंटरनेट। यह हमारी कॉन्वर्सेशन यह

हमारे फोटो हम दोनों लव रिलेशनशिप में थे।

ऐसे होते हैं दो व्यक्ति एक दूसरे को

प्यार करते हैं। तो ऐसे साथ में खड़े रह

के फोटो खरा खिंाते हैं जिसके पोइस्चर से

आपको पता चलता है कि ये फोर्सफुली लड़की

आई मीन यू कैन सी अ गर्ल एंड यू कैन मेक

आउट दैट शी इज नॉट आई मीन शी इन लव। यस

एक्सक्ट्ली। तो ऐसे फोटो होते हैं जो आपको

आपका क्लाइंट देगा कि सर देखो हम दोनों लव

में थे। ये हम कैफे में खाना खाने गए थे।

ये हम यहां पे गए थे। ये हम ट्रिप में गए

थे लोनावला। यह हम ट्रिप में गए थे मनाली।

तो सर अगर मैं इसके साथ 6 साल से

रिलेशनशिप में हूं और यह 2000 से मैं इसके

साथ रिलेशनशिप में हूं और यह 2006 में

मेरा ब्रेकअप हुआ। 2008 में ये बोलती है

मैंने रेप किया। तो दिस इज़ योर प्राइम

आर्गुमेंट इन द कोर्ट दैट माय लॉर्ड्स

काइंडली सी दैट इट इज़ एन इशू ऑफ़ अ लव

अफेयर टर्न रोंग। आई हैव आई डोंट इंटेंड

टू गेट हर मैरिड एंड इन एन आउटबस्ट। शी

हैज़ फाइल्ड अ कंप्लेंट अगेंस्ट मी। एंड

दिस आर ऑल द प्रूफ्स दैट आई एम प्लेसिंग

अगेंस्ट यू। वी गेट इट।

बट आई एम सेइंग पीपल स्टिल डू गेट जेल्ड

या डू फोर मंथ्स मंथ्स दिस इज द रियलिटी

दैट यू कांट इग्नोर

दिस इज द रियलिटी दैट यू हैव टू फेस दूसरा

इसमें क्या है अगर आप थोड़े से स्मार्ट

हैं तो आपको यह समझने की जरूरत है कि आपके

ऊपर रेप केस भी हो गया है और आपके पास जो

ये सारे प्रूफ हैं जो 99% मैंने देखे हैं

कि फेक रेप के केसेस में होते हैं। होते

हैं। फेक रेप केस करने की वजह दो होती है।

सबसे बड़ा ईगो प्रॉब्लम लड़की का

रिवेंज

और दूसरा जो होता है सर यह मैक्सिमम जो

मैं आज देख रहा हूं यह उभर रहा है ट्रेंड

एक्सटॉर्शन ऑफ़ मनी

हम

दोनों के अंदर आपके पास ये दोनों केस अगर

दोनों तरीके के आपके ऊपर केस हैं तो आपके

पास ये सारी जो प्रूफ्स हैं जो आपकी चैट्स

होंगी जो आपके फोटो होंगी या आप अपने लॉयर

को दीजिए अच्छा कोई लॉयर रखिए अप्लाई फॉर

एन एंटीिसिपेटरी बिल। अच्छा बड़ा

इंटरेस्टिंग पार्ट है यह राज भाई जो

मैक्सिमम लोग को नहीं पता या पता नहीं

मैंने यह ट्रेंड थोड़ा घटता हुआ देखा है।

हमारे देश में कुछ टाइप है बेल्स की अगर

आप जेल के अंदर हैं और आप बाहर आना चाहते

हैं तो उसको आप रेगुलर बेल बोलोगे। आपकी

अरेस्ट नहीं हुई और आप प्री अरेस्ट बेल

रखना चाहते हो तो उसको आप एंटीिसिपेटरी

बेल बोलते हैं। एक पुलिस के पास टाइम होता

है चार्जशीट फाइल करने का 90 या 60 दिन

का। उसके अंदर अगर चार्जशीट फाइल नहीं

होती तो उसको आप डिफॉल्ट बिल्ड बोलते हैं।

इंटरेस्टिंग पार्ट अब आता है। एक कांसेप्ट

है हमारे पास। हम उसको बोलते हैं ट्रांजिट

बिल। क्या होता है? राज आज इंदौर से है।

राज के ऊपर कोई केस हो रहा है। आपके ऊपर

कोई केस हो रहा है तो आप क्या करेंगे?

इंदौर से आपके आप इंदौर में रह रहे हैं।

आपके ऊपर केस हो रहा है बॉम्बे में। तो आप

बॉम्बे में आओगे तो आपको तो पुलिस पकड़

लेगी। तो राज बीइंग अ डोमिसाइल ऑफ मध्य

प्रदेश फाइल्स एट ट्रांजिट बेल एप्लीकेशन

डायरेक्टली इन द हाई कोर्ट ऑफ मध्य प्रदेश

सेइंग दैट सर काइंडली एक्सरसाइज योर

कॉन्स्टिट्यूशनल डिस्क्रीशन आई एम बिफोर

यू एस अ कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट एंड एफआईआर

इज़ फाइल्ड अगेंस्ट मी इन महाराष्ट्र

बॉम्बे आई वांट टू गो देर एंड गेट एन

एंटीिसिपेटरी बेल बट सिक्योर माय अरेस्ट

वोंट बी पॉसिबल सो आपकी मध्य प्रदेश जो

हाई कोर्ट है क्योंकि आप वहां के डोमिसाइल

है आपको ट्रांजिट बेल देगी 15 दिन की तो

आप 15 दिन में तो फ्रीली महाराष्ट्र आ गए।

आपको यहां कोई पकड़ नहीं सकता। फिर यहां

पे आएंगे। आप लॉयर एंगेज करेंगे और उस

ट्रांजिट बेल को आप एंटीसिपेटरी बेल में

कन्वर्ट करेंगे। रेगुलराइज करवाएंगे। तो

ये एक बहुत ही इंपॉर्टेंट चीज है हमारे

पास। डर नहीं लगता? क्या डर सर? कभी ऐसा

हुआ है कि इतने अब जैसे ये केस लिया उठाया

आपने। अब यहां पे आपने बोला इतने बड़े लोग

इनवॉल्वड हैं कि जिनके नाम ही नहीं आए। आप

इतने ओपनली बोल रहे हो कि वर्ल्ड की इतनी

बड़ी मैन्युफैक्चरर हैं या इतने अथॉरिटीज

वैसे लोग हैं। इतने ओपनली लोग बात करें।

कभी आप पर थ्रेट आया है?

मेरे पास स्टेट गवर्नमेंट के तरफ से थ्रेट

इतना बड़ा था शायद कि मैंने एक टाइम पर एक

एप्लीकेशन करी थी कि मेरे साथ कुछ हादसा

हुआ था।

उस एप्लीकेशन को मैंने लिखा था डायरेक्टर

जनरल ऑफ गुजरात पुलिस को। किसी भी कोर्ट

के आर्डर के बिना पुलिस ने उसका

इन्वेस्टिगेशन किया। मेरी एप्लीकेशन लिखने

के कुछ ही दिनों में विदाउट एनी कोर्ट्स

ऑर्डर द स्टेट ग्रांटेड मी राउंड द क्लॉक

प्रोटेक्शन।

बिकॉज़ देयर इन्वेस्टिगेशन रिवील्ड दैट द

थ्रेट परसेप्शन ऑन मी वाज़ वेरी हाई एंड

समवन वांटेड टू एलिमिनेट मी।

देन

बहुत ही

अ जैसा आपने कहा डर नहीं लगता तो पहले तो

मैं जब घर से निकलता हूं ना राज भाई हम

तो मेरे दिमाग में हमेशा ये बात रहती है

क्योंकि मेरे पास सोशल कॉजेस की मैटर

ज्यादा है।

हम

तो

ये हमेशा सोच के निकलता हूं कि आज कुछ

समाज के लिए करना है। नंबर एक नंबर दो

इस केस के अंदर मोर भी केस के नहीं और भी

केसेस जिसमें मैं हूं उनकी बात करूं तो

स्टेट गवर्नमेंट को जो गुजरात स्टेट की

गवर्नमेंट है उन्होंने मेरी फैमिली को भी

प्रोटेक्शन दिया हुआ है और सुप्रीम कोर्ट

ने ऑर्डर भी किया हुआ है कि अंटिल द

ट्रायल ऑफ द केसेस आर कंक्लूडेड आई शुड बी

गिवन ऑल दिस प्रोटेक्शन एट द कॉस्ट ऑफ

स्टेट

और इसको फिलॉसफ फिलॉसोफिकली हम समझे तो

मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। अब पले

बड़े मतलब यार बच्चे पैदा करने के लिए तो

जन्म नहीं लिया आदमी बनके आए हो तो कुछ

करोगे तो सही समाज के लिए जिस समाज के बीच

में तुम रह रहे हो। यह मेरा मानना है।

तो अगर इन लोगों के लिए कुछ करते-करते या

अगर भगवान ने मुझे चुना है इन लोगों का

कुछ अच्छा करने के लिए अगर कुछ हो जाता है

तो हो जाता है। पर वो सब चीजें मेरे को

अफेक्ट नहीं करती ज्यादा। मुझे फोन आया

हुआ है के नंबर्स से पुलिस ने

इन्वेस्टिगेट किया। नंबर मिले हैं। मेरे

सीडीआर के अंदर कॉल डाटा रिकॉर्ड जो पुलिस

निकालता है पूरा उसके अंदर नंबर्स आए।

मुझे फोन आया बकायदा के आप उत्कर्ष दवे

बात कर रहे हैं। मैंने कहा जी बिल्कुल बात

कर रहा हूं। फिर वही थोड़ी

अनकॉन्स्टिट्यूशनल और अनपार्लियामेंट्री

लैंग्वेज जो यूज होती हैं फोन कॉल्स पे वो

की गई और मुझे स्पेसिफिकली कहा गया कि यह

केस में आप सेशंस कोर्ट में आए ना यह केस

में आप ना आए तो

उसकी गंभीरता लेते हुए मैंने किसी अगर आए

तो तो वो जाने मैं तो आज भी जाता हूं।

सोचा नहीं कभी उसके बारे में मैंने तो डर

नहीं लगता कोई भी डेथ से। मैं सर भगवान से

डरता हूं। गलत करने से डरता हूं। बाकी मैं

किसी से नहीं डरता।

तो ऐसे कोई बोले उड़ा देंगे, एलिमिनेट कर

देंगे आपको कि इधर मत जाओ, उधर मत जाओ।

कुछ तो डर लगता होगा यार।

अरे क्या डर सर आप करने वाला बोलता नहीं

है। वो बोलने वाला करता नहीं है। यह

फिलॉसफी है लाइफ की। आप समझो कर्मन्य वादी

कारस्ते महा फलेशु सदाच जननम। यह मेरा

कर्म है। शायद मैं यह मानता हूं कि भगवान

ने मुझे चुना है। मेरे जैसे सर हाई कोर्ट

के अंदर 10,000 वकील हैं। मेरे पास ऐसा तो

कुछ खास ज्ञान है नहीं। मेरे पास ऐसा कुछ

खास लैंग्वेज भी नहीं है कि मुझे ही चुना

गया है। इन लोगों ने मेरे पास आए।

विक्टिम्स मेरे पास आए। मैं समझता हूं कि

यह मेरा कर्म है और भगवान की मेरे ऊपर

बहुत ही ज्यादा दया है कि इन सारे केसों

में मैं इन लोगों के लिए आर्थिक रूप से या

इनको जो न्याय चाहिए उस न्याय तक पहुंचने

की प्रक्रिया में मैं इनका सहभागी बना। यह

मेरी फिलॉसोफी है। मैं केवल दो व्यक्ति से

डरता हूं। एक मेरे महादेव और दूसरे अगर

मैंने कुछ खराब कर्म किया है तो वह खराब

कर्म करने का डर है क्योंकि मुझे पता है

वह खराब कर्म जो है मेरी जीवन में मुझे

बहुत गंदा मारेगा तो मैं बहुत सावचे रहता

हूं कि मैं कोई खराब कर्म ना करूं और मैं

मेरे भगवान से डरता हूं बस

खुद से डर लगता है कभी

लगता है कि सही में लगता है

किस बात

इतना इनवॉल्व हो जाता हूं

लोगों के साथ जब लोगों को मिलने जाता हूं

ना राज भाई मोर भी चला गया, बड़ौदा चला

गया। अभी हमारे गुजरात में एक फैक्ट्री

में ब्लास्ट हुआ था फायर क्रैकर्स में।

उसमें सारे जो लेबर्स थे बहुत ही गरीब थे।

मध्य प्रदेश जैसे सब यहां पर काम करने आए

थे। मध्य प्रदेश में एक जिला है देवास।

यहां पर काम करने आए थे। तो उन लोग को

मिलने गया। तो उनको मिलने के बाद एक एक

ऐसी ज्वाला जगती है ना यार अपने अंदर कि

क्या हो रहा है? व्हाट इज हैपनिंग ऑल

अराउंड? और फिर अब

वो स्टच्यूट है कि उनको मिलने मैं गया

हूं। तो वहां पर जो लोकल पत्रकार हैं,

जर्नलिस्ट हैं उनको पता चलने ही वाला है

कि मैं उनको मिलने गया हूं।

तो सब आ जाते हैं माइक लेके। सर बोलो आपका

क्या बोलना है? और फिर जो मुंह में से

निकलता है तो डर लगता है यार। क्योंकि

कहीं मैं अपने आप को ना हार्म कर दूं। ऐसा

ना बोल जाऊं। क्योंकि यार बहुत ही राज

पीड़ा होती है ये देख के। कि आप उस

व्यवस्था में रह रहे हो। तो आप उस

व्यवस्था में जी रहे हो जहां आपका सबसे

बड़ा गुनाह है अगर आप गरीब हो। जहां आपका

सबसे बड़ा गुनाह है। अगर आपके पास कोई

पावरफुल आदमी नहीं है। जहां आपका सबसे

बड़ा गुनाह है। अगर आपके जेब में पैसे

नहीं है। जहां आपका सबसे बड़ा गुनाह है।

अगर आप किसी अच्छे आदमी को जानते नहीं हो।

और आप मानो ना मानो। द बिगेस्ट क्राइम यू

कमिट इज दैट यू आर पुअर।

कोई सुनने वाला नहीं है। तो जैसा कि आपने

मुझे पूछा आपको डर लगता है तो मुझे डर

मेजरली तो इसीलिए नहीं लगता कि मैं जिनके

लिए काम कर रहा हूं आपको मैं आपको बताऊं

ये मोरबी जो एक्यूज़्ड है मोरबी में जो लोग

मरे

बड़ौदा में बोट कैप्साइज हुई जो लोग मरे

राजकोट में जो फायर ट्रेजडी हुई जो लोग

मरे

डीसा में जो ये फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ

जो लोग मरे ये सारे केसेस में अक्यूज का

फैमिली बैकग्राउंड पता है आपको सर मोरबी

में 112 लोगों के लिए मैं लॉयर हूं 112

लोगों में से दो लोगों को छोड़ दीजिए। 110

108 से 110 लोगों की मंथली इनकम ₹8,000 से

ज्यादा नहीं है। कोई ठेला लगाता है, कोई

चाय की टपरी लगाता है, कोई रिक्शा चलाता

है कोई

कपड़े सीता है। इस तरह का लोग काम करते

हैं। बड़ौदा के अंदर जो बोट कैप्साइज हुई

जिसमें अभी सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर किया

है कि ₹1 करोड़ कंपनसेशन डिसबर्स करो।

विक्टिम्स को उसके अंदर जो विक्टिम्स हैं

वो क्या करते हैं कि कोई फोटोग्राफर है

किसी का एक लारी है किसी का मतलब वेयर हु

आर दिस पीपल दे आर दिस पीपल हु आर सो मच

सोशियली डिप्र्राइव्ड दैट देयर इज नो वन

टू हियर देम दे आर दिस पीपल टू हुम यू

प्रॉमिस एज अ गवर्नमेंट एज अ

रिप्रेजेंटेटिव ऑफ़ अ गवर्नमेंट टू हुम यू

प्रॉमिस दैट प्लीज वोट वोट फॉर अस वी आर

गोइंग टू डू समथिंग गुड फॉर यू बट यू फेल

होगा जिसकी जिम्मेदारी होगी इसको

इंस्पेक्ट करने की इनविजिलेट करने की फिर

भी वहां पे स्टीम बोर्ड चल रही थी जिस

बोर्ड की कैपेसिटी है 10 से 12 लोगों को

बिठाने की उसमें 30 से 35 लोगों को तो

तुमने भर दिया बच्चे राज भाई आप समझ रहे

हैं मैं क्या कह रहा हूं चार फोर्थ

स्टैंडर्ड की बच्चा फिफ्थ स्टैंडर्ड की

लड़की छोटे-छोटे बच्चे जो पिकनिक पे गए

पैसे भर भर के वो स्कूल को शर्म आनी

चाहिए। जो स्कूल को यह जिम्मेदारी होती है

कि बच्चे जो प्राइमरी स्कूल्स में पढ़ते

हैं उनको पिकनिक ले जा रहे हैं तो

सुरक्षित रूप से वापस लाए। उस स्कूल के

द्वारा कोई भी यह व्यवस्था नहीं की गई थी

वहां पर कि लाइफ जैकेट राज भाई आज अगर आप

इंदौर के अंदर जो लेखक है हमारे यहां जो

अहमदाबाद में लेक है अगर हम वोटिंग भी

करना जाते हैं ₹100 देके तो सबसे पहली चीज

हम तो लाइफ जैकेट पहनाते हैं कॉमन सेंस है

बच्चों को चौथी कक्षा के बच्चों को पांचवी

कक्षा के बच्चों को लाइफ जैकेट पहनाए बिना

बिठा दिया बोट में और अगर उस बोट की फोटो

आप देखो ना राज भाई तो आपको ऐसा लगेगा कि

इस बोट पे भूल के भी मैं किसी को ना

बिठाऊं। द बोट वाज इन सच अ बैड एंड

प्रिकरियस कंडीशन। उस बच्चों को बिठा

दिया। बोट कैप्साइज हुई। 12 इनोसेंट बच्चे

जिनको नहीं मरना चाहिए था वो मर गए। दो

टीचर्स अंदर मर गए। और सबसे बड़ा जो

खुलासा हुआ इसके अंदर कोई भी स्कूल को

पिकनिक ले जाने के लिए डिस्ट्रिक्ट

एजुकेशन ऑफिसर की परमिशन लगती है। इस

स्कूल ने डीईओ से परमिशन ही नहीं ली थी।

आप किस स्तर पर किस स्तर पर जा रहे हो

भैया?

यह पहला एक ऐसा केस बना। यह एक पहला

क्लासिक केस बना गुजरात स्टेट का जिसमें

आईएएस ऑफिसर्स के रैंक के ऑफिसर्स पे

डिसिप्लिनरी इंक्वायरी इनिशिएट करी कोर्ट

ने।

और उस ऑर्डर को इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट

में ड्रैग किया। सुप्रीम कोर्ट में लेके

गए और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नो फेस द

डिसिप्लिनरी इंक्वायरी एंड इट इज स्टिल

गोइंग ऑन। तो दिस इज आल्सो एन एग्जांपल

हाउ सिस्टम वर्क्स। यू आर एन आईएएस ऑफिसर।

यू आर हाई रैंक्ड ऑफिसर। इट वाज़ योर

रिस्पांसिबिलिटी टू सी अपॉन फ्यू थिंग्स

एंड यू हैव फेल टू डू सो एंड नाउ फेस द

कॉन्सिक्वेंसेस।

इसमें भी क्या हुआ? बोट गिरी। ₹ लाख और ₹

लाख स्टेट गवर्नमेंट ने और सेंट्रल

गवर्नमेंट ने दे दिए। ₹ लाख। शर्म आती है

यार राज। ₹ लाख कीमत है क्या हमारी हमारे

बच्चों की? कौन है यह लोग? कहां से आते

हैं? यह इसी समाज के लोग हैं। जिस समाज

में से आंबेडकर आए थे। यह इसी समाज के लोग

हैं। जिस समाज में से नरेंद्र मोदी जी आए

हैं। हमारे प्रधानमंत्री आए हैं। ये इसी

समाज के लोग हैं। जहां से सरदार वल्लभ भाई

पटेल आए थे। ये इसी समाज के लोग हैं जहां

से जवाहरलाल नेहरू जी आए थे। ये इसी समाज

के लोग हैं जहां से शशि थरूर जी आए यह इसी

समाज के लोग हैं जहां से भारत देश का बड़े

से बड़ा इंटेलेक्ट या भले बड़े से बड़ा

साइंटिस्ट या बड़े से बड़ा व्यक्ति निकला

है। वह समाज है कॉमन पीपल।

आपकी नेग्लिजेंस की वजह से कोई आदमी मर

जाता है। और आप क्या करते हो? ₹ लाख और ₹4

लाख की भीख दे देते हो ₹ लाख करके और आप

बोलते हो कि हम भूल गए। बस अब आप पुलिस

अपना इन्वेस्टिगेशन करेगी और कोर्ट में

केस चलेगा। नहीं

दिस हैज़ टू स्टॉप। दैट इज व्हाई आपने पूछा

क्या आपको डर नहीं लगता? मुझे डर इसलिए

नहीं लगता क्योंकि अब बहुत हुआ यार।

इंडिया नीड्स अ पॉलिसी वेयर बाय वी आर इन

पोजीशन टू डिफाइन लाइक वेस्टर्न कंट्रीज

दैट इफ आई डाई टुमारो और माय सन डाइस

टुमारो और माय डॉटर डाइस टुमारो वि द

नेग्लिजेंस ऑफ द स्टेट देन स्टेट हैज़ टू

कंपनसेेट मी इन इन वे ऑफ़ एग्ेंपलरी

कंपनसेशन इन करोड़ एंड करोड़ मैं तो मर गया

तुम मेरे को तो वापस लाने वाले नहीं पर

मेरे परिवार वालों को तो कुछ दे दो

तुम्हें पता है मैं आगे जाके क्या बनने

वाला था। एक छ साल की लड़की मर गई। चार

साल फोर्थ स्टैंडर्ड का लड़का मर गया।

सिक्स्थ स्टैंडर्ड का लड़का लड़की मर गई।

तुम्हें पता है बड़े हो के क्या बनने वाले

थे? कोई कलेक्टर बनता, कोई नरेंद्र मोदी

बनता, कोई क्या बनता, कोई साइंटिस्ट बनता,

कोई प्राइम मिनिस्टर बनता, कोई प्रेसिडेंट

बनता। कोई क्या बनता? बताओ मुझे। तुम्हारे

पास कोई पॉलिसी नहीं है। तुम कुछ डिफाइन

कर पाओ ऐसी। इसीलिए

इसीलिए हमने कहा कि इनको हाई ऑफ द हाई

कंपनसेशन मिलना चाहिए। बिकॉज़ दे हैव डाइड

बिकॉज़ ऑफ द फेलियर ऑफ द स्टेट मैकेनिज्म।

और दूसरी बड़ी यह रुचि वाली चीज है। बहुत

इजी है कहना कि गवर्नमेंट करप्टेड है।

बहुत इजी है कहना सरकार चोर है। पिक्चरों

में भी सुना होगा। पॉलिटिशियंस को भी

अपोजिशन पार्टी के लोगों को बात करते आपने

देखा होगा। पर इन रियलिटी क्या है? सरकार

क्या है? व्हाट इज द गवर्नमेंट? आपने कभी

देखा है सरकार का बोर्ड किसी को पहन के

घूमते हुए? नहीं। सरकार क्या है? सरकार

गवर्नमेंट इज अ कॉम्बिनेशन ऑफ ऑफिसर्स एंड

पब्लिक सर्वेंट वर्किंग फॉर फ्यू इेड

पॉलिटिशियंस हु आर सिंग इन पावर इेड बायस।

तो जो सबसे बड़ा लूप होल है यह सिस्टम में

वो है यह सरकारी बाबू।

आप मान के चलिए एक सर्वे है। मुझे वेबसाइट

का नाम याद नहीं है। बट वह सर्वे ऐसा कहता

है कि आउट ऑफ दी टोटल पीपल दैट दे

इंटरव्यूड 54% ऑफ पीपल सेड दैट दे हैव

गिवन मनी टू पुलिस टू वर्क फॉर देयर ओन

थिंग्स।

आपके एक और केस के बारे में बात करते हैं।

हम

वो था चंदन का केस।

चंदन या

लाल चंदन

स्मगलिंग।

स्मगलिंग केस

ऑफ रेड सैंडरवुड्स। यस।

यस।

लाल चंदन का ब्लैक मार्केट कितना बड़ा है

इंडिया? ये

ग्लोबली है इंडिया में

ये बहुत ही मेरा इसको तकरीबन चार साल हो

गए जितना मुझे पता है मोटा-मोटा ये ऐसा था

कि एक

गुजरात की और इंडिया लेवल की बहुत ही बड़ी

टॉयलेटरीज कंपनी थी उस कंपनी का काम था कि

जो भी उनके टॉयलेटरी प्रोडक्ट्स थे ये

यहां से यूएई एक्सपोर्ट करते थे और कुछ

उनका इंपोर्ट ड्यूटी का बेनिफिट था तो फिर

यूएई पोर्ट से वो लोग कनाडा अमेरिका का

न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया विभिन्न देशों

में भेजते थे। तो उसके अंदर ऐसा था कि आप

एक चीज आप ऐसे देख लो कि भाई आप एक

सेंट्रल एजेंसी है। डीआरआई डायरेक्टेट ऑफ

रेवेन्यू इंटेलिजेंस। डायरेक्टेट ऑफ

रेवेन्यू इंटेलिजेंस जो है राज भाई यह एक

इनपुट के आधार पे एक कंटेनर रोकता है। अब

सबसे इसमें इंटरेस्टिंग चीज जो मैंने आपको

कहा कि करप्शन इज द ऑपरेटिंग सिस्टम ऑफ

इंडिया। यह मैंने आपको क्यों कहा कि

करप्शन किस हद तक है? आप देखिए। किसी भी

गुड को आप इंपोर्ट या एक्सपोर्ट करते हो

तो अकॉर्डिंग टू द कस्टम्स एक्ट आपको एक

उसका परफॉर्मा दिया जाता है हम

कि भाई आप ये गुड एक्सपोर्ट कर रहे हो चलो

टेक आपके गुड्स के अंदर ये ये चीजें हैं

चेक आपके गुड्स के इतना पैसा आपने इसको

भरा है चेक आपका गुड्स यहां जाने वाला है

चेक हो गया फिर वह जाता है ड्राई पोर्ट पे

ड्राई पोर्ट मतलब एक ऐसी व्यवस्था है जो

पोर्ट से थोड़ा दूर बनाई जाती है जो रोड

पे होती है जमीन पे होती है जहां पे जितनी

भी कस्टम फॉर्मेलिटीज है उसको मोटा-मोटा

पूरा कर दिया जाता है। एंड देन द कंटेनर

इज सेट टू गो ऑन द शिप।

इस केस के अंदर ऐसा था राज भाई कि कस्टम

पूरा क्लीयरेंस मिल चुका है

गुड्स को। मतलब द सीनियर कस्टम ऑफिसर्स

हैव साइन।

इसमें टॉयलेट है।

के इसमें टॉयलेट ट्रीज है। एक एजेंसी है

डीआरआई। वो रोकती है कंटेनर को।

डायरेक्टेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस। इट्स

अ सेंट्रल गवर्नमेंट लॉ एंड एनफोर्समेंट

एजेंसी।

डीआरआई उस कंटेनर को रोकती है और डीआरआई

उस कंटेनर को रोकने के बाद अंदर क्या

देखती है कि अंदर टॉयलेटरीज तो है ही नहीं

अंदर है रेड सेंडर वुड रक्त चंदन के लकड़े

जो अपेंडिक्स एक गुड है आप इसको एक्सपोर्ट

नहीं कर सकते इट इज बैंड पर इसके जितने

अच्छे उपयोग हैं उतने ही खराब उपयोग हैं

और यह एक ऐसा रिसोर्स है भारत देश का जो

अधिकतम मात्रा में है जिसको हम यह समझ लें

कि भारत सरकार नहीं चाहती कि हम इसको बेच

एक्सपेंसिव

अब्सोलुटली वेरी एक्सपेंसिव सर वेरी वेरी

एक्सपेंसिव नॉट एक्सपेंसिव वेरी वेरीरी

एक्सपेंसिव

कंटेनर की अप्रोक्स प्राइस क्या होती होगी

अगर एक कंटेनर आपका लोड है तो मान लो

अकॉर्डिंग टू इंटरनेशनल मार्केट वैल्यू 10

करोड़

आप कंटेनर

यस और आप कितने इसको तो एक्सपोर्ट कर चुके

हो

तो ये

और ये मिलता कहां है कहां पर है

ये मोस्टली सर साउथ में होता है साउथ से

फिर यहां आएगा तो आप

जो मूवीज में दिखाते हैं

बिल्कुल बिल्कुल उसी तरह से लेके आते हैं

और आप इसको यह समझ लीजिए कि स्मगल करके

मुझे लाना है पोर्ट तक नहीं। मैं कितने

लेवल स्मगलिंग के क्रॉस करके आया हूं।

मेजर लेवल भी मैं क्रॉस कर चुका हूं।

कस्टम क्लीयरेंस सर्टिफिकेट है मेरे पास

जिसको अकॉर्डिंग टू द कस्टम्स एक्ट बोलते

हैं। लेट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट। राज भाई

क्या बोलते हैं? लेट एक्सपोर्ट

सर्टिफिकेट। यह सर्टिफिकेट मैं ऑब्टेन कर

चुका हूं।

मैं साउथ से निकला। यह चेक पोस्ट क्रॉस

किया। वो चेक पोस्ट यह नहीं सेंट्रल

गवर्नमेंट का एक एजेंसी है कस्टम व्हिच इज

पर्टिकुलरली केप्ट टू सी दैट गुड्स दैट

दैट दैट दैट दैट दैट दैट आर एक्सपोर्टेड

आउटसाइड द कंट्री आर अकॉर्डिंग टू द लॉ टू

द लॉ आर इन अकॉर्डेंस व्हाट इज़ रिटन टू द

प्रिसक्रिप्शन दैट दे आर एक्सपोर्टिंग। बट

डिस्पाइट ऑफ़ दैट आई एम क्रॉसिंग दैट

बाउंड्री आल्सो। सो व्हाट इज द लेवल ऑफ़

पीपल इनवॉल्वड इंटू दिस।

आप सोचिए। और फिर वो यहां से जाता कहां

था? यूएई। यहां से यूएई यूएई से कहीं पे

भी मेरा जो क्लाइंट रुक के मे बी मुझे

नहीं पता मुझे नहीं पता लेकिन जो मेरा

क्लाइंट था उसका मोटा-मोटा केस ये था कि

उसे नहीं पता था उसके कंटेनर में ये गुड्स

कैसे आया

क्या बात है एक्सजेक्टली और ये चीज पहले

मैं भी नहीं मानता था

ये मैं भी नहीं मानता था पर

कोर्ट के अंदर जब ये बेल मैंने आर्ग्यू

करी एंटीिसिपेटरी बेल सेशंस कोर्ट में

कच्छ या भज में शायद शायद मैं इसको गया था

आर्ग्यू करने मुझे एग्जैक्टली याद नहीं।

तब मुझे यह पता चला के

जो डीआरआई जो एजेंसी थी उन्होंने फोटो

प्रोड्यूस किए के कंटेनर वास टपरर्ड इन

ट्रांजिट।

कंटेनर्स के बोल्ड लूज थे। कंटेनर को टपर

किया गया था। उनके थ्रू हमें पता चला। तो

एक आदमी जिसका कोई लेना देना नहीं है।

उसके कंटेनर में कुछ घुसा के तुम ले जा

रहे हो। जिसके लिए वो प्रोसक्यूट हो रहा

है। फिर सेशंस कोर्ट ने रिजेक्ट किया। हम

हाई कोर्ट आए। हाई कोर्ट में एक मैटर ऑफ

लॉ हमने जो रखा हम

वो यह समझाने की हमारी कोशिश रही कोर्ट को

कि जब एक कंटेनर एक पर्टिकुलर एजेंसी है

जो आपका एक्सपोर्टर होगा उसकी कस्टडी में

अगर रहता है तो वो जिम्मेदारी उस कंटेनर

की उसकी है ना कि मेरी तो द कोर्ट

अंडरस्टुड इट एंड देन वी वर ग्रांटेड

इंट्रिम रिलीफ ऑन स्टे ऑन अरेस्ट वास

ग्रांटेड बट उनको अरेस्ट हो गया था उससे

पहले नहीं यहां नहीं ही वास ऑन अ रन जेल

कभी नहीं नहीं वाज़ ऑन अ रन ही वास

ग्रांटेड प्रोटेक्शन बाय द ऑनरेबल हाई

कोर्ट ऑफ गुजरात। बड़ा इंटरेस्टिंग बात है।

आपको मैं बताऊं जो लेवल ऑफ मैच्योरिटी इन

जजेस मैंने गुजरात हाई कोर्ट में देखी है

या गुजरात हाईकोर्ट के जजेस की देखी है वो

मैंने कहीं नहीं देखी। नंबर वन क्यों कह

रहा हूं? मैं ना लॉ बैकग्राउंड से था हम

ना मेरी कोई बार में मुझे कोई जानता था।

बस गाउन पे ना खड़ा हो गया। केस आया तो

आई वास फंबलिंग इन माय फर्स्ट अपीयरेंस

एंड इट वास द सिंग जज हु टोल्ड मी इट इज

योर फर्स्ट अपीयरेंस आई सेड यस मलज नो वज़

कैरी ऑन

ही हैड द करेज टू सपोर्ट अ बॉय हु वाज़

अपीयरिंग फॉर द फर्स्ट टाइम ही हैड द करेज

टू सपोर्ट अ बॉय हु हैड नो लॉ बैकग्राउंड

ही हैड अ करेज टू स्टेप इनटू माई फीट्स

एंड नो मी एंड फील व्हाट आई वाज फीलिंग

एंड दैट इज़ व्हाई ही सैड दैट एंड

प्रॉबब्ली

प्रोबेबबली बिकॉज़ ही सेड दैट आई हैड द करज

टू स्टैंड देर फॉर द सेकंड टाइम।

टेल मी नेटवर्क्स कैसे बनते हैं? ये लाल

चंदन के केस में व्हाट हैपेंस? क्योंकि

अगर इतना ही रेस्ट्रिक्टेड गुड है तो एक

तो पहले यह निकालना बहुत डिफिकल्ट होता

होगा। फिर उसके बाद जंगलों से बाहर

निकालना बहुत डिफिकल्ट होता होगा। एक

स्टेट से दूसरी स्टेट में लाना बहुत

डिफिकल्ट होता होगा। फिर यहां से कस्टम

पहुंचा के टपर करना

बहुत बड़ा नेटवर्क होगा। इसको बोलते हैं

सरल भाषा में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम।

अ क्राइम अ सिंडिकेट दैट डज नॉट ओनली हैव

द क्रिमिनल्स बट आल्सो वाइट कॉलर ऑफिसर्स

एट एव्री लेवल हु हेल्प देम रन दिस

सिंडिकेट एंड रन दिस क्राइम टू बी टर्म्ड

एस ऑर्गेनाइज्ड क्राइम। एक पर्टिकुलर

कमोडिटी जिसको आप कभी उस क्षेत्र से बाहर

ही नहीं ले जा सकते। वो 2000 कि.मी. पोर्ट

पे आ गया। किसी को पता नहीं चला। आप मान

लोगे इस बात को मैं तो नहीं मानता। कितने

लैप्सेस, कितने हर्डल उसने क्रॉस किए। आप

मान लोगे किसी की मदद के भी बिना किए।

नहीं। आप मान लो। मैं आपको रियलिटी बता

रहा हूं सर। लेट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट

देखा है मैंने मेरे केस के अंदर कि ही वाज़

अबाउट टू एक्सपोर्ट दिस प्रोडक्ट एंड देन

द कंटेनर वाज़ रेडेड बाय डीआरआई

और उसमें उस सर्टिफिकेट में था कि

टॉयलटरीज ही है।

लेट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट आपको इशू ही तब

होगा कि जब एज एन एक्सपोर्टर आपने जो

प्रिस्रिप्शन बनाया है वो एग्जामिनेशन

करने के बाद अगर मैच होता है तभी आपको लेट

सर्टिफिक लेट एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट

मिलेगा। वो लेड एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट आपने

ऑब्टेन कर रखा है। आपका गुड्स देश के बाहर

जाने वाला है। और एक एजेंसी है डायरेक्टेट

ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस सेंट्रल गवर्नमेंट

की। वो आकर रेड करती है और उनको ये मिलता

है।

मिलती है। आप सुनिए आप समझिए। ये बहुत ही

ना समझने वाली बात है। आप सुनते हैं

गुजरात में ड्रग्स मिला। करोड़ों का

ड्रग्स मिला। ये मिला वो मिला। पकड़ा गया

पकड़ा गया। मैं इसको किस तरह से देखता हूं

कि पकड़ा गया।

एक्सपोर्ट नहीं हुआ था। पकड़ा गया। इट वास

कॉट एंड ये कितने हजारों करोड़ों का

ड्रग्स है जो पकड़ा गया है। सो आई

फ्रेंकली स्पीकिंग आई एम वेरी इट इज अ

वेरी कमेंडेबल जॉब बाय स्पेसिफिक एजेंसीज

ऑफ गुजरात पुलिस इंक्लूडिंग एटीएस गुजरात

इंक्लूडिंग नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो

गुजरात दैट दे आर कैचिंग ड्रग्स वर

थाउजेंड्स ऑफ करोड़ एट अ पोर्ट एंड नॉट

लेटिंग इट गो ऑफ यह पकड़ा गया यह कोई

निंदा वाली बात नहीं है कि पकड़ा गया

पकड़ा गया गुजरात में ही मिला गुजरात

गुजरात नहीं मिला। गुजरात में मिला। अरे

भाई मिला गुजरात में पकड़ा पुलिस ने तब

मिला। वरना आपको तो पता ही कहां था कि

मिला। यह तो जाने वाला था। आप समझ रहे

हैं?

या तो देश के अंदर आता है।

एक्सक्टली एक्सजेक्टली एक्सजेक्टली। मैं

कई बार पढ़ता हूं ये कि अखबारों में आता

है क्रिटिसिज्म। देखिए निंदा करनी बहुत

सही है। मैं खुद मानता हूं कि गवर्नमेंट

की निंदा करनी चाहिए। लेकिन ये ड्रग्स को

लेके अ जो मुहिम हमारी गुजरात पुलिस चला

रही है या ड्रग्स के अगेंस्ट में जो ये

गुजरात पुलिस का एक पर्टिकुलर एक्ट है ये

कमेंडेबल है। हम्

इनका इंटेलिजेंस है तब यह ड्रग्स पकड़ा

गया और यह ड्रग्स कोई 5 6 करोड़ का नहीं

पकड़ते सर आप डाटा देखिए हजारों करोड़ों

का ड्रग्स यूज़ करते हैं तो इट इज अ वेरी

कमेंडेबल थिंग

ट्रू यानी सारी जो स्मगल होने वाली चीजें

वो पकड़ते हैं सब आपका

नहीं स्मगल कैसे स्मगलिंग क्या है आप

शॉर्ट में स्मगलिंग को समझिए स्मगलिंग

क्या है अगर हम इतने लेवल पे पहुंच गए तो

स्मगलिंग आज होती क्यों है इन सब चीजों की

मैं वही समझा रहा हूं आपको स्मगलिंग क्या

है आपके पास एक कमोडिटी है

जिसको आप एक्सपोर्ट नहीं कर सकते। आपके

पास परमिशन नहीं है उसको एक्सपोर्ट करने

की। आपके पास कोई क्लाइंट है दुबई में या

वर्ल्ड के किसी भी कोने कोने में वो उसको

लेने के लिए तैयार है। आपको ग्रे मार्केट

से आप सब पता चल जाता है। डार्क वेबसाइट्स

पे सब कुछ है डार्क वेब पे कि आपको क्या

है, कहां है, कैसे लेना है, क्या नहीं।

आपके पास बायर है, आपके पास सेलर है। बस

आपको एक रूट फिगर आउट करना है। रूट फिगर

आउट कैसे करोगे? आप ही के ऑफिसर, आप ही के

सरकार के हैं। हर कोई बिकता है। राज भाई

बस कीमत अलग-अलग होती है। अगर आप सोचो मैं

आपको फिलॉसोफी तो बोल नहीं रहा।

मैं आपको प्रैक्टिकल चीज बोल रहा हूं जो

ऑलरेडी मैटर गैंग्स हैं। डू यू नो नोन

पीपल हु आर डूइंग दिस?

बिल्कुल। क्लाइंट्स हैं मेरे। कुछ जिनको

मिलने मैं जाता हूं दुबई। आपने सुना होगा

काफी

अ एप्लीकेशनेशंस के बारे में जो

बैटिंग चलवाते हैं। आपने सुना होगा काफी

ऐसे लोगों के बारे में जो दुबई बैठे-बैठे

आज अपना बिजनेस इंडिया में कर रहे हैं।

जैसे कि कुछ क्लाइंट्स हैं मेरे जो मुझे

कहते हैं कि आपको मिलना ही पड़ेगा। आप

दुबई आओ। मैं उनको जाता हूं मिलने। मुझे

बुलाया जाता है कि मुझे वह चीजें समझाना

चाहते हैं कि सर हमने हम इसमें फंस चुके

हैं। कुछ-कुछ रियली मैं जिनको मिलता हूं

वहां पे वो इनोसेंट होते हैं और बिजनेस

राइवलरी के थ्रू उनको फंसा दिया जाता है

और कुछ-कुछ जिनको मैं मिलता हूं वो खुद ही

ऑर्गेनाइज क्राइम के मेंबर्स होते हैं। बट

लॉ में अगेन आपके पास बेनिफिट है। अटर्नी

क्लाइंट प्रिविलेज है कि आपके क्लाइंट के

बारे में आपसे इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज

पूछ नहीं सकती। सारे मेरे क्लाइंट्स हैं।

आप मान के चलिए राज भाई दुबई के अंदर ऐसे

ऐसे लोग हैं। दुबई के अंदर ऐसे ऐसे लोग

जिनसे मैं मिला हूं। वो वहां बैठ के यहां

के सिस्टम पे इतना इन्फ्लुएंस कर सकते हैं

जिसके बारे में हम सोच नहीं सकते।

एक फोन कॉल पे उनका इतना इन्फ्लुएंस है जो

लोग आपसे यहां से हजारों किलोमीटर दूर

बैठे हैं कि आप और मैं सोच नहीं सकते। इस

लेवल का इन्फ्लुएंस है उन लोगों का। क्या

हो सकता है?

इन्फ्लुएंस सिस्टम पे, इन्फ्लुएंस

पॉलिटिक्स पे, इन्फ्लुएंस

कोर्ट्स पे, इन्फ्लुएंस लॉयर्स पे। अभी

रिसेंटली हमारे मेरे ही स्टेट की बात है।

देश में तो होता ही है। अह एक पब्लिक

प्रोसकटर को ब्राइब लेते पकड़ा गया था। एक

रिसेंट केस के अंदर हमारे अ सेशंस कोर्ट

के जजेस पे इंक्वायरी चल रही है। बहुत कुछ

होता है। राज भाई। आपको यह बात बहुत ही

समझनी पड़ेगी कि इंडियन जुडिशरी के अंदर

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट यह एपिलेट

कोर्ट है। आपकी फर्स्ट के कोर्ट जो है वह

सेशंस कोर्ट है और वहीं पे जो है सारा

भाजीपाव

तागड़ना वो सेशंस कोर्ट में ही चलता है।

इट इज वेरी इंपॉसिबल और नेक्स्ट टू

इंपॉसिबल इफ यू टेल मी दैट सम करप्ट

एक्टिविटीज आर गोइंग ऑन इन हाई कोर्ट एंड

सुप्रीम कोर्ट। नो आई मे से अप टू द

एक्सटेंट दैट आई हैव सीन नो। बट आई मे से

यस इवन इफ यू टेल नो दैट सच एक्टिविटीज आर

नॉट गोइंग ऑन इन लोअर कोर्ट्स यह होता है

और हमने हमारी आंखों से देखा है कितनी

बड़ी-बड़ी मैटर्स में कितनी मैटर्स में

बट अगर लोग कहीं दूसरी कंट्री में बैठे

हुए हैं और यहां पे ऑपरेट कर रहे हैं तो

जाहिर सी बात है हवाला के थ्रू पैसा आना

जाना होता होगा

बिल्कुल होता है आज तो आपका आधुनिक ये

चलता है बिटकॉइन आपके बिटकॉइन के बाद यह

चलने लग गया है अब ई वॉलेट जिसमें पैसा

रखते हुए आपको मोबाइल में भी रखने की

जरूरत जरूरत नहीं है आप मैं आप दुबई से

यहां आ रहे हो आपके साथ में एक चिप यहां

पे भिजवा दूं आ गए 100 करोड़ किसको पता

चलने वाला है यू हैव अ सिस्टम इन गुजरात

एंड इन अक्रॉस इंडिया व्हिच इज नोन एस

आंगड़िया

थोड़े टाइम तक ये आंगड़िया ऐसा था के आपको

5 करोड़ 6 करोड़ 7 करोड़ 8 करोड़ 20 करोड़

100 करोड़ 200 करोड़ जैसी जैसी आपको

अमाउंट चाहिए वैसे आप आंगड़िया में डलवा

दो एक्स आदमी व के नाम से डलाता है व जेड

के नाम से डलाता है और आप खुद जाकर ले लो

बिकॉज़ ऑफ सिक्योरिटी रीजंस। कुछ साल से यह

ट्रेंड चला है राज भाई कि अब आपको लेने भी

नहीं जाना है। अब आपको वो आंगड़िया का आदमी

आपको घर पे वो पैसे डिलीवर करने आएगा। घर

के अंदर नहीं तो आप जहां पे उसको बुलाओगे

वहां पे चार्ज लेगा उसका बात अलग है। पर

वो आएगा।

बट जब ऐसे आपको पता है।

हम सरकार को भी पता है।

सबको पता है।

तो फिर क्यों नहीं रोकते हैं?

लीगल है सब लीगल कर रखा है सब। लॉ एंड

एनफोर्समेंट एजेंसी को यह बात नहीं पता

होगी। आपको ऐसा लगता है सबको सब पता है।

अहमदाबाद के अंदर जहां से मैं हूं वहां के

अंदर एक एरिया है रायपुर। रायपुर के अंदर

एक पो है। पोल कल्चर आपको पता होगा

अहमदाबाद के अंदर रतनपुर। रतनपुर के अंदर

पूरा मार्केट ही ये है आंगड़िया का।

यही है पूरा मार्केट। अरे सर जगह-जगह

गांव-गांव आप नाम बोलो। सूरत डायमंड 99%

ऑफ द फाइनेस्ट डायमंड्स इन द वर्ल्ड आर

पॉलिश्ड इन सूरत एंड देन एक्सपोर्टेड।

क्या बात कर रहे हो आप सर पैसा? दैट इज

व्हाई इंडिया इज फेसिंग इनफ्लेशन। व्हाट

इज इनफ्लेशन? पर्सिस्टेंट एंड कंसिस्टेंट

राइज़ इन द प्राइसेस ऑफ कमोडिटी। व्हाई?

बिकॉज़ यू डोंट हैव अकाउंटेड मनी बिकॉज़ ऑफ़

दिस आंगड़िया एंड बिकॉज़ ऑफ़ ग्रोइंग

अनअकाउंटेड फ्लो ऑफ कैश इन द इकोनमी। यू

डू नॉट हैव कंट्रोल ओवर द राइजिंग

प्राइसेस ऑफ बेसिक गुड्स।

बट यह पैसा अनकाउंटेड है। एवरीबडी नोस

दिस।

तो क्यों रोकते नहीं रोका नहीं जाता इस

पर?

क्यों रोके? आपका फायदा हो रहा है, मेरा

फायदा हो रहा है। सबका फायदा हो रहा है।

तो क्यों रोके? जो पिस रहा है वो तो नीचे

है। तो तभी तो मैं कह रहा हूं कि 228

मिलियन पीपल इन इंडिया आर बिलो पॉवर्टी

लाइन एंड यू आर टॉकिंग अबाउट गोइंग टू द

मार्स। वेरी गुड। बट प्लीज रिमेंबर इंडिया

इज़ नॉट रिसाइडिंग इन बॉम्बे। इंडिया इज़

नॉट रिसाइडिंग इन अहमदाबाद। इंडिया इज़ नॉट

रिसाइडिंग इन दिल्ली। इन द वर्ड्स ऑफ़

मोहनदास करमचंद गांधी। इंडिया इज़ इन

विलेजेस। यू हैव टू थिंक अबाउट दी पीपल हु

लिव इन विलेज फर्स्ट। आपके गांव में अरे

सर आप छोड़ो मेरे गांव के अंदर आज पक्का

रोड नहीं है। मैं गुजरात के अंदर सबसे

समृद्ध गांव है। वहां से हूं। मेरे गांव

के आजू-बाजू के क्षेत्र के अंदर मैक्सिमम

लोग एनआरआई हैं। मेरे गांव में मेरे घर के

बाहर स्ट्रीट लाइट नहीं है और पक्का रोड

नहीं है। यह आपको मैं 2025 की वास्तविकता

बता रहा हूं।

तो हाउ आर पीपल

ओपनली?

टेकिंग बेनिफिट ऑफ दिस लूप होल। क्या लूप

होल है? लूप होल नहीं है। जहां पर पैसा है

बहुत

यही तो यही तो यही तो है जिसमें मैं का

फायदा मैं का है नुकसान। मैं का बढ़ता मान

देखकर मैं की जलती जान। मेरा भी फायदा

आपका भी फायदा है। तो दोनों चुप रहो।

पिसरा है तीसरा जिसका कोई लेना देना नहीं।

मजदूर मजदूर ही रहेगा।

बहुत कम होता है राज भाई के रिक्शा चलाने

वाले का बेटा कलेक्टर बना।

मजदूर का बेटा ये बना।

अपॉर्चुनिटी नहीं दी जाती लोगों को। अगर

दी जाए ना सर तो मैं आपको छाती ठोक के

बोलता हूं। ऐसा टैलेंट है इस देश के अंदर।

ऐसा टैलेंट है इस देश के गांव में

स्पेसिफिकली कि आप तुलना नहीं कर सकते। आप

सोच नहीं सकते। मैंने आपको पहले भी कहा

भारत देश शहरों में बसता ही नहीं है।

शहरों में तो वह बसते हैं जो ऑलरेडी एक

समीकरण से ऊपर उठ गए। भारत आज भी गांव में

है। आपको मैं ऐसे गांव दिखाऊं जहां आज भी

वाईफाई तो छोड़ो इंटरनेट तो छोड़ो पक्के

रोड नहीं है। मैं आपको ऐसे गांव दिखा सकता

हूं आज भी जहां पे अच्छे पोल्स नहीं लगे

जहां आज भी लाइट नहीं पहुंचती। मैं आपको

ऐसे गांव दिखा सकता हूं जहां सर्व शिक्षा

अभियान के अंतर्गत स्कूलें तो हैं पर अंदर

पढ़ाने वाले टीचर नहीं है। मैं आपको ऐसी

लॉ कॉलेजेस दिखा सकता हूं सरकारी जहां के

अंदर लॉ स्कूल तो है। बिल्डिंग के नाम पर

चार क्लासरूम है लेकिन अंदर प्रोफेसर ही

नहीं है। यह हमारे देश की वास्तविकता है

कि हमने कभी भी गांव में लोगों को या

मध्यम वर्ग से नीचे से रहने वाले लोगों को

एजुकेशन के ऊपर प्रायोरिटाइज करने की

क्षमता और ताकत नहीं दी। क्योंकि हम जानते

हैं कि अगर वह पढ़ लिख गया तो वह वहां

निकलेगा और वह ऐसा निकलेगा कि हम फिर उसको

देख नहीं पाएंगे या वो हमारे कंट्रोल में

नहीं रहेगा।

बट कोई भी क्यों चाहेगा? हर कोई यह चाहेगा

ना कि हमारे देश का हर इंसान पढ़े ताकि और

ज्यादा देश आगे निकले।

तो अगर

पढ़ने का क्या फायदा है किसी को नीचे रख?

अगर आप पढ़ लिख गए तो आप सिस्टम समझ

जाओगे। सिस्टम समझ गए तो आप वोट नहीं

करोगे क्योंकि आपको पता है वो झूठ बोल रहा

है।

2025

की हम बात कर रहे हैं। आज भी आप और मैं

यहां बैठा हूं। आप वहां बैठे हो। आपने भी

दो दिन पहले अपना सोशल मीडिया देखा होगा।

मैंने भी दो दिन पहले मेरा सोशल मीडिया

देखा होगा। जितने भी राज्यों में इलेक्शन

चल रहे हैं उन सभी इलेक्शनों को प्राइमरी

किस चीज पर लड़ा जा रहा है? रोटी, कपड़ा,

मकान।

और कुछ हो तो बताइए। नहीं है। पता है

क्यों? वी गॉट इंडिपेंडेंस इन 1947।

तब से लेके आज तक हम केवल इसी मुद्दे पे

चुनाव लड़ रहे हैं। रोटी, कपड़ा, मकान।

रोटी, कपड़ा, मकान। रोटी, कपड़ा, मकान।

जातात का समीकरण तो बाद में आता है। उसको

तो अभी अब छूना ही नहीं। वो तो बहुत ही

उसको छूने वाला मुद्दा ही नहीं है वो। वो

बात अलग है कि किसकी क्या सोच है। लेकिन

यही तीन मुद्दों पे हम चुनाव लड़ना चाहते

हैं। हम तुमको मकान देंगे। हम तुमको रोटी

देंगे। हम तुमको नौकरी देंगे। हम तुमको ये

करेंगे। उसके ऊपर अब आ ही नहीं पाए हैं आज

तक। और जहां तक आपने जात के समीकरण की बात

करी कास्ट बेस चीजों के क्यों लड़ते हैं

इलेक्शन? सर उसके ऊपर ही भारत की राजनीति

टिकी हुई है। एक पर्टिकुलर पार्टी समझती

है कि एक पर्टिकुलर कास्ट और कम्युनिटी

उसका वोट बैंक है। एक पर्टिकुलर पार्टी

समझती है कि एक पर्टिकुलर कम्युनिटी और एक

पर्टिकुलर कास्ट उसका वोट बैंक है। जबकि

कोई यह नहीं सोचता कि अ पर्सन शुड बी जज्ड

ऑन द बेसिस ऑफ द कंटेंट ऑफ हिज कैरेक्टर

एंड नॉट हिज कास्ट एंड रिलीजन। दिस इज

व्हाट यू नीड टू प्रीच टू दिस न्यू जजी

जनरेशन दैट इज देयर दैट प्लीज डोंट जज

समवन ऑन द बेसिस ऑफ हाउ इज लुकिंग प्लीज

डोंट जज समवन ऑन व्हाट ही इज और हर पजेशंस

आर बट प्लीज सी टॉक टू देम टॉक टू हर

काइंडली सी हर थॉट्स लुक एट व्हाट द विज़न

द पर्सन हैस एंड वेयर डस ही वांट्स टू गो

टेल मी इफ यू वर गिवेन 100% पावर पावर

कौन पावर इन व्हाट वे इन एवरी वे करेक्ट

कौन सा एक लॉ है इंडिया का जो आप चेंज

करोगे या अपग्रेड करोगे एक बहुत ही ऐसी

चीज से जो हमने हमारी रोज की जीवन में

देखी है आपने देखा सुना है कभी स्कूल में

या टीवी पे ऐड आती है मिड डे मील स्कीम

आपको पता है ऐसा कोई कानून ही नहीं था

हमारे देश में एक व्यक्ति था जिसको लगा कि

भाई भारत तो गांव में बसता है भारत तो

यहां बसता ही नहीं है तो एक ऐसा व्यक्ति

एक ऐसा गांव का बच्चा जिसे शिक्षा तो मिल

रही है पर शिक्षा के साथ-साथ अगर पौष्टिक

खाना नहीं मिला तो वह कभी अच्छे से पढ़

नहीं पाएगा। उसका ध्यान केंद्रित पढ़ाई

में नहीं रहेगा। तो उसने पिटीशन फाइल करी

सुप्रीम कोर्ट में कि स्टेट हैज़ टू एक्ट

एस पेरेंट्स पार्शिया और यह स्टेट की

जवाबदारी रहेगी और केंद्र सरकार की

जवाबदारी रहेगी। तो आज आप देख रहे हैं मिड

डे मील प्रोग्राम है स्कूल में। हां वो

बात सही है कि करोड़ों का घफला होता है

उसमें भी क्योंकि हमने कुछ छोड़ा तो है

नहीं करप्शन करने में किसी भी चीज में।

लेकिन यह व्यवस्था तो है कि आज मोटा-मोटा

एक ऐसा गांव का बच्चा जो किसी भी कक्षा से

किसी भी क्षेत्र से आता है उसको एक

पौष्टिक खाना बिल्कुल मिलता है स्कूल में

कि जिसकी वजह से वो पढ़ाई कर सके। कमिंग

बैक टू योर क्वेश्चन।

मैं चाहूंगा पर्टिकुलरली कि इस देश के

अंदर हमारे देश के अंदर एक तो है आपका रेप

केस। दूसरा है आपका इकोनॉमिकल ऑफेंस जिसके

बारे में आजकल कोई बात नहीं करना चाहता।

रेप केस को आप फास्ट ट्रैक पे कर दो।

कंपलसरी कोई भी भारत या हिंदुस्तान में

किसी भी जगह पे एक रेप की एफआईआर फटती है।

वो सही है या गलत। हमें उससे लेना देना

नहीं है। इन्वेस्टिगेशन होगा। ट्रायल खत्म

होगा तभी हमें पता चलेगा कि गलत केस था कि

सही केस था। देयर हैज़ टू बी अ स्पेशल

कोर्ट। मैं चाहूंगा कि इस देश के अंदर

सबसे पहला बदलावी मैं यह लाऊंगा कि एक

स्पेशल कोर्ट की मैं रचना करूं हर एक जिले

में। उस कोर्ट का खाली यही काम होगा कि दे

हैव टू ओनली डील विद द बिनेस ऑफ रेप केस।

और किसी भी तरह से उसको 2 साल या डेढ़ साल

के अंदर उस केस को खत्म करना है। दैट हैज़

टू बी द टाइम फ्रेम दैट नीड्स टू बी गिवन।

एक आपका यह हो गया। दूसरा यह हो गया

इकोनॉमिकल ऑफेंस। समझना इस बात को। आप

क्या समझते हो कि व्हाट इज द ट्रेंडिंग

क्राइम इन इंडिया? इट इज नॉट

किसी को मारना। इट इज नॉट एनीथिंग एल्स बट

इकोनॉमिकल ऑफेंसेस।

हमारी व्यवस्था में कुछ ऐसे सरकारी लोग

हैं। हमारी व्यवस्था में कुछ ऐसे लोग हैं

जिनके पास ताकत है, पैसा है। लोगों को

मैनेज करने की पॉसिबिलिटीज हैं। लोग मैनेज

वह कर सकते हैं। और तंत्र और सरकार में

बैठे कुछ ऐसे ऑफिसर और मंत्री जिनकी

साठगांठ से लाखों करोड़ों रुपया इंडिया के

बाहर राउट हो जाता है एक स्कैम करने के

बाद और वह पैसा कभी भी ट्रेस नहीं होता।

तो उसके पीछे एक पर्टिकुलरली एजेंसी को

लगा के विद इमीडिएट इफेक्ट उस पर

इन्वेस्टिगेशन करके 40 से 50 दिन में

चार्जशीट फाइल होनी चाहिए और उसको फास्ट

ट्रैक कोर्ट पे लाके आपको जो भी है उसका

जजमेंट प्रोनाउंस कर देना चाहिए। दी टू

चेंजेस की समथिंग दैट आई वुड ब्रिंग अपॉन

एंड दूसरा मुझे पता नहीं कितना मैटर करेगा

या पर ये रियलिटी है जो मुझे नहीं अच्छी

लगती जब मैं करना चाहूंगा।

स्कूल में बचपन में बच्चा एडमिशन लेता है।

छोटा बच्चा यह मुझे तब पता चला जब मैंने

ग्रेजुएशन में मैंने सेंट जेवियर्स कॉलेज

में जब मैंने एडमिशन का फॉर्म भरा था

हम

और ये कॉलम मैंने देखा तब मुझे बड़ा अच्छा

नहीं लगा था यार। मेरे को लगा कि ये इसकी

क्या जरूरत है? आप बच्चे का फॉर्म भरते हो

स्कूल में तो स्कूल में आपको यह पूछा जाता

है कास्ट यह नहीं होना चाहिए। जब आप स्कूल

में किसी को एडमिशन दिलाने जाते हो ना या

आप अपने बच्चे को रखने जाते हो तो आपको

पूरा फॉर्म आएगा नेम, फादर्स नेम, मदर्स

नेम, एड्रेस यह वो फिर नीचे एक साइड में

कॉलम होगा कास्ट। उसके नीचे भी एक कॉलम

होगा सबकास्ट। मतलब लिखो कि तुम हिंदू हो,

मुस्लिम हो, क्रिश्चियन हो और उसके अंदर

भी सबकास्ट। क्रिश्चियन हो तो कैसे, हिंदू

हो तो कैसे? तो ये कॉलम को मैं चाहूंगा कि

एलिमिनेट कर दिया जाए। क्योंकि हम तो

स्कूल और कॉलेजों में ये व्यवस्था बनाना

चाहते हैं कि हम तो बच्चों को यही सिखाना

चाहते हैं। आपको पता है राज भाई आपको मैं

एक सिंपल एग्जांपल दिखाऊं। स्कूल में

यूनिफार्म क्यों होता है? ऐसा मैंने एक

बहुत ही मेरे गुरु जी थे। अब इस देश अब इस

दुनिया में नहीं है। उनका नाम था डॉ.

इंदिरा दीवान। हिंदी साहित्य के काफी

अच्छे लेखिका थी वो। मैं उनको गुरु मानता

हूं। उन्होंने मुझे बहुत पढ़ाया। उन्होंने

मुझे इस सवाल का जवाब दिया था कि स्कूल

में यूनिफार्म क्यों होते हैं? जब मैं

स्टीफेंस में पढ़ता था तो मेरे पिताजी

मुझे साइकिल पे रखने आते थे। लेकिन मेरे

साथ-साथ बड़े-बड़े डॉक्टरों के बच्चे भी

पढ़ते थे क्योंकि इतना बड़ा कॉन्वेंट

स्कूल था। डॉक्टरों के बच्चे, बिजनेसमैन

के बच्चे तो कोई एंबेसडर में आता था, कोई

कार में आता था। लेकिन हम सब ग्रे पट वाइट

शर्ट में आते थे। और मैं कोई कम नहीं लगता

था उनसे। भले मैं एक रेलवे मैकेनिक का

लड़का था तो इसीलिए यूनिफार्म होता है

स्कूल में क्योंकि आप सब समान हो। यह आपकी

पहली प्रीचिंग वहां से है। आपका यूनिफार्म

रखने का कारण यह है कि यू ऑल आर इक्वल

इरिस्पेक्टिव ऑफ योर कास्ट इरिस्पेक्टिव

ऑफ़ हाउ मच मनी यू हैव इरिस्पेक्टिव ऑफ़

व्हिच कम्युनिटी एंड व्हिच पोजीशन योर

पेरेंट्स बिलोंग टू दैट इज़ व्हाई देयर इज़

अ यूनिफ़ॉर्म इन द स्कूल। वन साइड यू वांट

टू टीच योर स्टूडेंट दैट प्लीज जज एवरीवन

ऑन द बेसिस ऑफ देयर कैरेक्टर एंड नॉट ऑन द

कंटेंट ऑफ द थिंग्स और मटेरियल्स दैट दे

हैव और दूसरी साइड आप यह डिस्पैरिटी करके

बैठे हो समझ नहीं आता तो यह बिल्कुल बदल

जाना चाहिए वेल परफेक्ट ऑन दैट नोट थैंक

यू सो मच यू वाइस प्लेजर हैविंग यू बड़ा

अच्छा लगा आपसे बात करके मजा आया पडकास्ट

बना के एंड

बहुत सारी कंट्री की रियलिटी िटी आपने

बताई व्हिच वाज़ सम वाज़ समथिंग दैट वी नो

बट वो वैलिडेट ज्यादा कर दिया आपने एंड

समथिंग वाज़ व्हिच वी डिट नो एंड थैंक्स टू

यू कि इतनी करज के साथ आप बहुत बिना डरे

चीजें बोलते जा रहे हो व्हिच रेयरली पीपल

डू आर यू जेनुइनली नॉट स्केर्ड मैंने आपको

पहले भी कहा मैं सिर्फ महादेव से डरता हूं

और मेरे मां-बाप से डरता हूं और उत्कर्ष

दवे ना कभी किसी से डरा है और ना किसी के

सामने झुका है और ना झुकेगा

थैंक यू सो मच एंड ऑल द बेस्ट विथ

एवरीथिंग दैट यू आर डूइंग सर। थैंक यू।

थैंक यू राज भाई। हमारे गुजराती में एक

कहवत है राज भाई। जम गॉड बिना मोड़ो कंसार

तेम मां बिना सुनो संसार। जैसे गुड़ के

बिना आपका हलवा एकदम फीका है। वैसे मां के

बिना ये पूरा संसार इसकी कोई अहमियत नहीं

है। मेरी मम्मी को मेरे फादर कभी कुछ ना

भी दें। आपको घर में किसी भी चीज की कमी

महसूस कभी होगी ही नहीं। और आज भी मेरी

मम्मी की यह व्यवस्था है। तो मैं पूरा जो

प्लानिंग ऑर्गेनाइजिंग स्टाफिंग

कंट्रोलिंग यह जो पोस्ट को और मैनेजमेंट

की पूरी व्याख्या है यह मैं मेरी मम्मी से

सीखा हूं। जो सोडा की हमारी जो लारी थी वो

बंद होती थी रात को दो-दो 3-3 बजे। तो

मेरे पापा को मैं मदद करता था थोड़ी। तब

मेरे पापा अक्सर मुझे रास्ते में ऐसा कहा

करते थे कि बेटा कुछ ऐसा करना कि दुनिया

साहब कहे तुझे। मैंने तो बहुत लोगों को

साहब बोल दिया। तो बस वो दिमाग में बात

ऐसी छपी कि लाइफ में पहला मोटिवेशन वो था

कि कुछ भी खो अपने पापा को ठेला नहीं

लगाने देना है। थैंक यू सो मच ये एपिसोड

एंड तक देखने के लिए। अब आपको तीन चीजें

करनी है। सबसे पहले इस चैनल को सब्सक्राइब

कर लो क्योंकि जितना आप सब्सक्राइब करोगे

उतने ही बेहतर और वैल्यूुएबल गेस्ट हम ला

पाएंगे आपके लिए। नंबर टू मुझे कमेंट्स

में बताओ इस एपिसोड में आपको क्या अच्छा

लगा और क्या गंदा लगा ताकि हम वो

मिस्टेक्स रिपीट ना कर पाए। एंड कौन से

ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो वापस

हमारे पडकास्ट पे ताकि हम उन्हें लेके आ

और आपको ज्यादा से ज्यादा वैल्यू दे पाएं।

एंड नंबर थ्री यह एपिसोड किसी एक इंसान के

साथ जरूर शेयर करना क्योंकि वन

कॉन्वर्सेशन कैन चेंज समवनस लाइफ। आई विल

सी यू नेक्स्ट टाइम। अनंटिल देन कीप

फिगरिंग आउट।

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