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Is It Over Now For New Creators? (Yes if…)

By HimanshuG

Summary

Topics Covered

  • YouTube नया Netflix बनना चाहता है
  • अब क्रिएटर से क्रिएटरप्रेन्योर बनो
  • AI स्लॉप फिल्टर का छुपा कारण
  • वॉच टा�म ने व्यूज़ की जगह ली
  • मिनी सीरीज़: 8000 घंटे का शॉर्टकट

Full Transcript

ओ साला। अबे कितने लालची हो गए हैं बे ये लोग। क्या हुआ?

8000 घंटा कर दिया बे। मेरे 10 घंटे नहीं हो रहे। तेरी साले हां तो अगस्त 10 2026 अगर मैं किसी नए क्रिएटर से पूछता कि

क्या आप क्या डरे हुए हैं ये बताइए? आप

डरे हुए हैं परिवार के साथ?

पूरा परिवार डरा हुआ है यार। मौत से इसको डर नहीं लगता। मेरे को जिंदगी में सिर्फ एक चीज से डर लगता था मौत से। लेकिन डरने की बात है पर इतनी नहीं जितनी बताई जा रही है। अब जरा समझो। YouTube के

वीपी अमजद हनीफ का कहना था कि पुराने बार की वजह से लोग महीने के बस कुछ कौड़ियां ही कमा पाते थे। जबकि नए बार से वो एनश्योर करेंगे कि रियल मनी क्रिएटर्स कमा पाए।

एंड वी हैड अ केस वेयर इफ यू हैड ओनली फ्यू थाउजेंड व्यूज। यू माइट हैव अ फ्यू सेंस मंथ। इंस्टेड वी लाइक टू डिजाइन द प्रोग्राम इन अ वेटर्स आर ड्राइविंग व्यूज एंड एंगेजमेंट

लेकिन कोई भी प्लेटफार्म 8 साल बाद अपना पूरा क्रिएटर एग्रीमेंट चेंज नहीं करता ऐसे इसके पीछे तीन स्ट्रक्चरल रीज़ंस थे।

एक साल पहले यूएस के प्री इलेक्शंस के दौरान डोनल्ड ट्रंप जो रोगन के साथ पडकास्ट करते हैं। जिसकी लेंथ करीबन 3 घंटे थी और 62 मिलियन व्यूज इस पे करेंटली

हैं। चलो समझने वाली बात है कि डॉनल्ड ट्रंप थे तो हो सकता है ऐसे व्यूज आ भी जाए। कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन यही वो मोमेंट भी था जब YouTube को लगा कि हमें

पिवेट करना चाहिए। क्योंकि यार हम सब जानते हैं कि 3 घंटे का पडकास्ट कोई मतलब ऐसे ही नहीं देखता यार चलते फिरते। चाहे वो कितना भी बड़ा इन्फ्लुएंशियल इंसान हो

वो भी अनएडिटेड रॉ फुटेज सिर्फ टॉकिंग हेड बहुत मुश्किल होता है। हर कोई यह नहीं करता। लेकिन उसी सेम विंडो के दौरान YouTube के सीईओ नीलम मोहन कहते हैं YouTube नंबर वन रैंक प्लेटफार्म बना

जिसको लोग टीवी पे देखना पसंद करते हैं। खास करके यूएस में और यही चीज इस क्राइटेरिया को लाने का सबसे बड़ा रीजन भी बना आगे जाके। मैं बताता हूं कैसे।

YouTube को यहां पर एक नई अपॉर्चुनिटी नजर आई कि यार हम Netflix, Hulू और बाकी ओटीटी प्लेटफार्म से आगे हैं। कल को हम मोनोपोली भी क्रिएट कर सकते हैं। आसान भाषा में YouTube नया Netflix बनना चाहता था और

स्टैट्स से अगर देखा भी जाए तो टीवी की ऑडियंस हाल ही में YouTube पे बहुत बड़ी है। और जो लो क्वालिटी कंटेंट है या जो बल्क में है बहुत ज्यादा जैसे कि बिना सिर पैर के शॉट्स जिसमें कोई वैल्यू नहीं बस

क्रिएट कर दिए गए हैं। कोई इंटेंशन नहीं है या वो वीडियोस या क्रिएटर्स जो सिर्फ पैसा फेम देख के बस कुछ भी बना रहे हैं वो कंटेंट को आराम से वो लिविंग रूम में बैठ

के नहीं देख सकते। मैंने ट्राई किया था। इसलिए आप यह भी देख रहे होंगे कॉनेंट की लेंथ कितनी बढ़ती जा रही है यार। साला एक-ए घंटा तीन-तीन घंटे चार-चार घंटे के वीडियोस हमें देखने को मिल रहे हैं। तो

इनडायरेक्टली टीवी फ्रेंडली कंटेंट की तरफ अब थोड़ा पुश जाने लगा है क्रिएटर्स का। और एक मजेदार फैक्ट की बात बताऊं। टीवी ऑडियंस का आरपीएम YouTube पे ज्यादा है।

यानी कि अर्निंग अपॉर्चुनिटी बढ़ जाती है अगर कोई आपका वीडियो टीवी पे देखता है तो। मैं भी चेक करूं कितने लोग देख रहे हैं। आ ठीक है। बढ़ गए। तो इनडायरेक्टली YouTube

यह कहना चाह रहा है कि तुम टीवी फ्रेंडली कंटेंट बनाओ। क्योंकि हमें टीवी का मार्केट और गैब करना है जिससे तुम्हें भी फायदा होगा और एडवरटाइजर्स भी हमें ज्यादा पैसा पे कर पाएंगे। पर टीवी फ्रेंडली

कंटेंट मतलब क्या? मतलब हर कोई थोड़ी ना एजुकेशन और डॉक्यूमेंट्रीज वीडियोस बनाता है। टीवी फ्रेंडली कंटेंट का यहां मतलब है कि यार एक ग्रुप ऑफ पीपल जो है साथ में

चिल आउट कर सकें या कुछ एंजॉय कर सकें या इवन उससे कुछ सीख सके लेकिन वो टीवी पे थोड़ा ऑप्टिमाइज लगना चाहिए। जैसे कि अगर हम एवी टीवी की बात करें तो उनके वीडियोस

टीवी पे अगर आप देखोगे तो बहुत अलग दिखते हैं। वही सिलिकॉन्स के वीडियोस भी अगर आप टीवी पे देखोगे तो बहुत अलग लगेंगे। प्रीमियम लगते हैं। वो फॉर्मेट ही ऐसा है जो टीवी पे और अच्छा लगे। लेकिन इसका मतलब

यह नहीं कि सिर्फ टीवी के लिए कंटेंट बनाया जाए और इससे आपकी कैमरा क्वालिटी से भी कोई मतलब नहीं। आपका कंटेंट हर फॉर्मेट हर स्क्रीन पे देखा जाना चाहिए जिसमें

टीवी भी है। अब इससे क्या हुआ? शॉट

क्रिएटर्स के लग गए। लग गए लग गए। लग गए लग गए। शॉट्स की पॉलिसी तो ड्रास्टिकली चेंज हुई है। 10 मिलियन से अब 20 मिलियन तो आपको करने ही पड़ेंगे 90 दिनों में। बल्कि अगर

किसी का मोनेटाइज्ड शॉर्ट्स चैनल भी है तो उसको मोनेटाइज रखने के लिए उससे पैसा कमाने के लिए 10 मिलियन व्यूज हर 90 डेज में चाहिए ही चाहिए। तो यानी अगर

टेक्निकली देखा जाए तो 2,22,000 व्यूज हर दिन आने चाहिए 90 दिन तक लगातार। तो आप वहां से अर्निंग कर पाओगे।

यह हॉबीस्ट के नंबर नहीं है। यह एक प्रॉपर कॉर्पोरेट क्रिएटर के नंबर्स हैं। लेकिन यह भेदभाव क्यों? लॉन्ग फॉर्म क्रिएटर्स जो ऑलरेडी मोनेटाइज्ड हैं उनको ये चीजें

विरासत में मिली है अपने दादाजी से। उनको कुछ नहीं करना है। लेकिन शॉर्ट वालों को 90 दिन में 10 मिलियन लाने ही लाने हैं। ऐसा क्यों?

ओके। तो YouTube कभी भी शॉर्ट प्लेटफार्म था ही नहीं। और हम भूल जाते हैं कि यह एक सर्च इंजन की तरह भी काम करता है। वो तो इंडिया से TikTok तो एक वैक्यूम बन गया कि

यार उसकी जगह ले लें तो मार्केट में होड़ मच गई और मैटा भी उसमें रेस में था। तो YouTube को लगा कहीं हम मार्केट शेयर ना गवा दे तो उन्होंने फटाफट शॉट्स का फीचर ल्च कर दिया। अब उन्होंने जल्दी-जल्दी में

फीचर तो डाल दिया लेकिन वो यह भूल गए कि इस फॉर्मेट को मोनेटाइज करने के लिए सोर्सेस ही बहुत लिमिटेड है और एंड ऑफ द डे YouTube एक बिजनेस है चैरिटी ने। अब

क्योंकि उनका जो फोकस है अब टीवी की तरफ जाने लगा है तो शॉर्ट वीडियोस का टीवी पे ज्यादा काम है नहीं और लिटरली शॉर्ट्स के क्रिएटर को भी कुछ ज्यादा फायदा होता नहीं

है सिवाय डिस्ट्रीब्यूशन के क्योंकि हम जानते हैं कि शॉर्ट्स का ऐड रेवेन्यू भी कम ही होता है। एकदम ना के बराबर ही होता है। पिछले 60 दिनों में मैंने ₹250 कमाए हैं और फिर लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि यार

अपनी शॉर्ट चैनल को ग्रो कैसे करूं मैं?

कैसे मतलब इसको बढ़ाऊं? वह सिर्फ

एक्सपेरिमेंटल चीजों के लिए या अपने डिस्ट्रीब्यूशन को स्टार्ट करने के लिए एक तरीका हो सकता है। उस पे आप पूरा YouTube का गेम खेल नहीं सकते इन द लॉन्ग टर्म। यह बात तय है। और यह मैंने अपनी इस वाली

वीडियो में थोड़ा एंड में बताया था कि क्यों ऐसा है। आपको वहां क्वांटिटी से खेलना पड़ेगा जो कि बहुत मुश्किल होता है। और YouTube को भी ऐसा कोई बहुत बड़ा फायदा नहीं हो रहा है। एडवरटाइजर्स ज्यादा खुश

नहीं दिखते। और इसीलिए हाल ही में शॉर्ट फॉर्म कंटेंट और लॉन्ग फॉर्म कंटेंट की ऑडियंस में जमीन आसमान का फर्क है। जिसको क्विक अटेंशन और डोपामिन चाहिए तो वो शॉर्ट वीडियोस देख लेता है। जिसको डेप्थ

चाहिए कंटेंट में वैल्यू चाहिए तो वो लॉन्ग फॉर्म की तरफ भागता है। और एंड ऑफ द डे हम सब जानते हैं कि ब्रांड्स को डेप्थ और वैल्यू पसंद है तो वो रिटेंशन की तरफ ज्यादा इंक्लाइंड रहते हैं। और रिटेंशन

आपको एक ही जगह पे मिलेगा वो है लॉन्ग फॉर्म कंटेंट। नो रॉकेट साइंस। अब YouTube के लिए यह तो यार एक बड़ा नाइट मेयर हो गया कि साला शॉर्ट क्रिएटर्स को भी नहीं निकाल सकते और लॉन्ग वालों को यार फिर

दिक्कत भी नहीं होनी चाहिए। क्या किया जाए? तो उन्होंने तीसरा मोनेटाइजेशन का

जाए? तो उन्होंने तीसरा मोनेटाइजेशन का तरीका निकाल दिया जिसके बारे में लोग ज्यादा बात कर क्यों नहीं रहे मुझे समझ नहीं आ रही। कवि कहना चाहते हैं कि मैं सिर्फ बड़ी वीडियो बनाने वालों को ही पैसा

दूंगा। YouTube ने अब मोनेटाइजेशन को दो हिस्सों में बांट दिया है। पहला हिस्सा वो जिसके लिए वो खुद पैसा देगा अपने ऐड रेवेन्यू से। जैसा कि होता आ रहा है अब तक 55% हमें

मिलता है 45% YouTube रखता है। ये हो गया ऐड मनी जो YouTube अपने शेयर से तुम्हें दे रहा है। अब दूसरा हिस्सा है जिसके लिए तुम्हें खुद को पैसा देना पड़ेगा। यानी विनविन सिचुएशन हो गई। जैसे कि मेंबरशिप,

YouTube शॉपिंग, फैन फंडिंग, सुपर थैंक्स वगैरह-वगैरह। याद रखना इसका पैसा YouTube आपको नहीं देता है। आपके जो फैंस बने हैं, लोग हैं, लोगों का पैसा आपको देता है। YouTube आपको सिर्फ एक मैच मेकिंग

प्लेटफार्म की तरह वहां काम करता है। तो ये दो हिस्सों में बंट चुका है। अब ये जो क्राइटेरिया है जिसके लिए दुनिया परेशान हुई पड़ी है वो इस कैटेगरी के लिए है। और

इस कैटेगरी के लिए यह है मोनेटाइजेशन क्राइटेरिया। यानी कि 500 सब्सक्राइबर्स या तीन वीडियो अपलोड्स करना पिछले 90 दिनों में। और उसके साथ या तो 3000 घंटे

पूरे करना या 3 मिलियन शॉट्स होना। तब आपका यह वाली कैटेगरी से अर्निंग के अपॉर्चुनिटी खुल जाए। यानी कि लॉन्ग फॉर्म क्रिएटर्स खुश कि भाई उनको एक बड़ा केक का

टुकड़ा अब मिल सकता है क्योंकि कम लोग खाने वाले हैं। छोटे क्रिएटर्स खुश कि यार हमें भी कुछ तो टुकड़ा खाने को मिल ही रहा है। चलो बड़ा नहीं तो वह बाद में ही सही कुछ तो मिलेगा ही खाने को। और लिटरली 500

सब्सक्राइबर्स में अगर देखा भी जाए तो या 1000 सब्सक्राइबर्स में हो गए। मोनेटाइजेशन हो भी जाए तब भी जो छोटे क्रिएटर्स हैं वो ऐड से उतना कमा ही नहीं पाते क्योंकि वो थ्रेशहोल्ड भी कंप्लीट

करना पड़ता है $ वाला। तो इससे बेटर है कि वो कैटेगरी टू में उन्हें डाल दिया जाए जिससे वो एटलीस्ट अगर अच्छा कंटेंट बना रहे हैं तो वो अपने फैंस से पैसा ले पाए। तो इनडायरेक्टली यहां से भी क्लियर हो

जाता है कि जो क्वालिटी कंटेंट बनाएगा जिसको हर फॉर्मेट में हर स्क्रीन पर लोग देख सकते हैं उसको केक का टुकड़ा दिया जाएगा। जिससे क्रिएटर्स का जो अनवैल्यू

पूल है वह खत्म होगा। एडवरटाइजर टारगेटिंग ठीक से कर पाएंगे और उन्हें हाई वैल्यू ऑडियंस मिलेगी। और जाहिर सी बात है जो वैल्यू क्रिएटर्स होंगे उनको ज्यादा अर्निंग के अपॉर्चुनिटीज मिल जाएंगे। अगर

तुम यह सोच रहे हो कि YouTube का इसमें नुकसान है या ऐसा कर क्यों रहा है यार? कम

हो जाएंगे लोग तो इन्हीं का नुकसान है। YouTube ने 2 साल पहले ही अपनी पॉलिसी अपडेट कर ली थी कि चाहे तुम्हारे शून्य सब्सक्राइबर भी हो लेकिन ऐड तो हम

तुम्हारे वीडियो पे दिखाएंगे ही दिखाएंगे और जिसका पैसा 100% हम ही रखेंगे धंधे वाले लोग। इवन आप जो कैटेगरी टू से पैसा कमाओगे यानी मेंबरशिप से या सुपर थैंक या

YouTube शॉपिंग से उसमें भी YouTube बैठे-बैठे 30% लेगा। यानी कुछ करना उनका कुछ जा नहीं रहा है। आ रहा है ऊपर से उन्होंने एल्गोरिथम भी हाल ही में चेंज

किया है। सिमेंटिक की तरफ वह गए हैं। पर उससे क्राइटेरिया का क्या लेना देना। मैंने अपनी इस वाली वीडियो पे पूरा डिटेल में समझाया है कि अब YouTube कैसे काम करेगा आगे। सिमेंटिक आईडी क्या होती है और

कैसे यह पूरा काम करेगी आपकी वीडियो के अपलोड करने के जस्ट एक सेकंड बाद से। वो आप जाके जरूर चेक आउट करना। लेकिन यह बात तो तय है कि इस सिमेंटिक आईडी की वजह से

एआई स्लॉप कंटेंट जो थे उस पे दो फिल्टर लग चुके हैं। एक तो यह आईडी वाला मैंने आपको इस वीडियो में समझाया कि कैसे यह एआई स्लॉप को खत्म ही करने वाला है और दूसरा यह मोनेटाइजेशन क्राइटेरिया क्योंकि हम

जानते हैं कि सिमेंटिक आईडी जो नया एल्गोरिथम है वो जेमिनाई पे ज्यादा फोकस करता है जेमिनाई एi पे यानी कि प्रोसेस करेगा वो आपकी 4K वीडियोस को और उसके साथ-साथ अगर लो एफर्ट कंटेंट को भी अगर वो

प्रोसेस करने लगा जहां पर मिलियंस और मिलियंस ऑफ अपलोड्स ऑलरेडी है YouTube पे तो YouTube की कॉस्ट बिलियंस में जाएगी एआई की कंप्यूटिंग की तो इससे इससे बेटर

है कि अगर उस पूल में से थोड़े लोग कम कर लिए जाए आगे के लिए तो हमारी कंप्यूटिंग कॉस्ट जो है आगे जाके कम हो सकती है और इसमें कोई रॉकेट सेंस नहीं है। ये सब समझते हैं। आप अगर इससे एग्री करते हैं तो

कमेंट करके जरूर बताइएगा। यह मुझे तीसरा रीजन सबसे बड़ा लगता है। लेकिन तुम्हें अभी-अभी पता चला होगा कि यार YouTube का व्यू काउंट एल्गोरिथम भी

जो था वो भी चेंज हो चुका है कि अब पहले फ्रेम से ही व्यू काउंट हो जाएगा। लेकिन इसकी कहानी जो है वह उनके जो प्रीमियम लाइट उन्होंने सब्सक्रिप्शन अब नया निकाला है उससे बहुत मिलती जुलती है। अब यह

प्रीमियम कंटेंट का खेल बड़ा निराला है। अब मान लो जो भी YouTube प्रीमियम का सब्सक्रिप्शन लेता है मंथली तो उसका एक घेवर तैयार होता है। इस घेवर को तुम मान सकते हो कि जितने भी YouTube प्रीमियम

मेंबर्स हैं वो यह पूरा घेवर है। तो YouTube क्या करता है? उस घेवर में से कुछ हिस्सा क्रिएटर्स के लिए भी रखता है। अब अगर किसी ने YouTube प्रीमियम स्टैंडर्ड एडिशन वाला लिया है तो तुम्हें घेवर का

30% हिस्सा मिलेगा। और अगर यह जो नया वाला आया है YouTube प्रीमियम लाइट तो हर क्रिएटर को 60% हिस्सा मिलेगा उस घेवर में से। लेकिन इसका मतलब यह नहीं 60% घेवर

पूरा तुम्हारा हो जाएगा। अब उस घेवर के टुकड़े को दो बकेट्स में डाला जाता है। एक शॉर्ट वीडियोस के लिए एक लॉन्ग वीडियोस के लिए। YouTube देखता है कि हमारे प्रीमियम मेंबर्स या जिन्होंने लाइट सब्सक्रिप्शन

लिया है उन्होंने किसकी वीडियो देखी है। फिर वह वॉच टाइम के बेसिस पे कैलकुलेट करता है कि इस क्रिएटर को कितना प्रीमियम का हिस्सा और मिलना चाहिए। अगर प्रीमियम

यूजर आपकी वीडियो लंबे समय तक देख रहा है तो आपको ज्यादा पैसा मिलेगा उस बकेट में से और फिर उस बकेट में से बंटवारा होगा आखिरी में जो होता है 55% और 45% लॉन्ग

वीडियोस के लिए और 45 और 55 शॉर्ट वीडियोस के लिए। लेकिन लेकिन अभी-अभी एक नया अपडेट आया था कि वीडियो का जो व्यूज है वो पहले ही फ्रेम से काउंट होना शुरू हो जाएगा और

लोगों में खुशी का माहौल आ गया था। बेटा इसका मतलब यह भी है कि व्यूज अब आगे मैटर नहीं करेंगे क्योंकि YouTube तो खुद ही वॉच टाइम के ऊपर फोकस कर रहा है और यह जो

प्रीमियम लाइट वाला सब्सक्रिप्शन है इससे YouTube ने इनडायरेक्टली बोल दिया है कि तुम्हें वॉच टाइम और रिटेंशन पे फोकस करना बहुत जरूरी है क्योंकि उसी से तुम्हारी अर्निंग भी बढ़ सकती है जो हमारे वीपी

साहब ने बोला। तो अगर तुम्हारे लिए पैसे जनरेट करने का YouTube से मतलब सिर्फ इतना था कि व्यूज ले आए बाय बाय। और इसीलिए भी इनडायरेक्टली ही

सही YouTube यह हमें कहना चाह रहा है कि अब तुम अपनी वीडियोस को एज एन बिजनेस की तरह देखो और अब रियल बिजनेस की तरह देखो क्योंकि अगर तुम्हारा वीडियो वैल्यू नहीं दे रहा है तो तुम कैटेगरी टू से भी कुछ

नहीं कर पाओगे। कैटेगरी टू से पैसे कमाने के लिए तो तुम्हें पूरी अपनी ताकत लगानी पड़ेगी यार क्योंकि YouTube वहां तुम्हें कुछ दे नहीं रहा है। तो यानी अब क्रिएटर

से हम क्रिएटरपन्योर बनते जा रहे हैं। अब बात आती है कि वर्स्ट तरीके कौन से हैं?

8000 घंटे पूरे करने के और जो 80% लोग मान के भी चल रहे हैं कि ऐसे ही हो पाएगा अब। अगर तुम सोच रहे हो कि पूरा एआई से बना के कुछ कर लूंगा तो खत्म है वो चीज। अगर तुम

सोच रहे हो कि वॉच टाइम बाय कर लूंगा पैनल्स और बॉट से यह भी खत्म है भाई। अगर मैं डेली 3 से 5 मिनट की हाई फ्रीक्वेंसी वीडियोस को अपलोड करूं। अब यह जो हिस्सा

है वो थोड़ा 50-50 है। चल भी सकता है और नहीं भी। इसलिए इसे सी टियर में डाला है मैंने। अगर आपका एवरेज व्यू ड्यूरेशन 2 मिनट के आसपास का है तो तुम्हें 8000 घंटे

पूरा करने में 2400 व्यूज लगेंगे। और यह मैं तब कह रहा हूं जब तुम तीन से पांच वीडियोस शॉर्ट बस्ट में लॉन्ग फॉर्म में अपलोड कर रहे हो। एफर्ट बहुत ज्यादा लगेगा

लेकिन क्वालिटी शायद वह मैच ना हो पाए और इससे बर्नआउट के चांसेस बढ़ जाते हैं। इसमें दूसरा तरीका लोग सोच के बैठे हैं कि मैं लाइव स्ट्रीम करूं अगर 4-चार घंटे की

5-प 6-छ घंटे की तब भी तो हो सकता है। हो सकता है। बस इसमें एक फ्लॉ है। रिटेंशन डेंसिटी बहुत कम रहती है। अगर आपके लाइव स्ट्रीम में किसी को पसंद नहीं आया तो वो तीन 30 सेकंड में भी जा सकता है। और हम सब

जानते हैं कि लाइव सेशंस जो होते हैं वो जब खत्म होते हैं तो उनका जो रीच रेश्यो होता है वो थोड़ा और कम हो जाता है। इसके मैं इसके बारे में मैं फुल्ली कंफर्म नहीं हूं। आप मुझे बता सकते हैं क्योंकि मैंने

एक बार लाइव स्ट्रीम करी थी तो हां बाद में कम ही हो जाता था वह। इससे ऑडियंस को वो सेटिस्फेक्शन कंटेंट नहीं मिल पाता है अगर आपकी लाइव स्ट्रीम में कमेंट्री सही नहीं है तो। और ऑर्गेनिक रिकमेंडेशन में

भी बहुत दिक्कतें आती है। लेकिन अगर काम करता है और आप उस क्वालिटी को मेंटेन कर पाते हो लाइव सेशंस में जैसे कि स्पीड कर पाते हैं तो वो सबसे अच्छा तरीका भी हो

सकता है। लेकिन फिर भी मैं इसे सी टियर पे ही रखूंगा। फिर एक और तरीका लोग कहते हैं कि 8 से 12 मिनट के आसपास की वीडियो बनाता हूं मैं। सर्च वाली ट्यूटोरियल्स वीडियोस। अब जरा थोड़ा मैथमेटिक्स कर लेते हैं। अगर

12 मिनट का वीडियो है आपका अगर 5 मिनट का एवरेज व्यू ड्यूरेशन है तो आपको 8000 घंटे खत्म करने के लिए 96,000 व्यूज की जरूरत है टोटल उस एक वीडियो से ही पूरा

मोनेटाइजेशन करने के लिए। लेकिन यह वन टाइम वॉच बनके रह जाता है। जिसकी प्रॉब्लम सॉल्व हुई वो गया वो अब वापस नहीं आएगा। अगर उसकी प्रॉब्लम वापस आती है और अगर आपके चैनल पर कोई वीडियो ऐसी है तब वह

वापस आए। इसका एक इलाज यह है जो आगे आपको मैं बताऊंगा। यह काम कर सकता है। फिर अगला तरीका आता है कि थीमेंटिक सीरीज बनाई जाए। इसे मैं डालूंगा एयर टियर पे। क्योंकि

सिमेंटिक आईडी जो हम एल्गोरिथम हमने इस वीडियो में समझा था उसके हिसाब से ये परफेक्टली सही फॉर्मेट है। आप चार से छह एपिसोड्स को लॉन्च करते हो सिमिलर टॉपिक के अराउंड यानी कि एक मिनी सीरीज की तरह।

तो सीरीज से क्या होता है? यूजर जो है वो अगले पार्ट पे जंप कर लेता है एंड स्क्रीन के बाद जिससे वॉच टाइम बढ़ने के चांसेस चरम सीमा पे होते हैं। अगर और अगर तुमने छह एपिसोड्स बनाए हैं और अगर व्यूअर ने

तीन एपिसोड्स को 10 मिनट देखा है एक पूरे सेशन में तो चांसेस हैं कि 30 से 4000 व्यूज में वो 8000 घंटे हो सकते हैं। ये बहुत ही मैसिव ग्रोथ हो जाएगी। एक और

तरीका आता है। यह थोड़ा एक सजेशन है मेरा आपकी तरफ से। मेरा मेरी तरफ से आपको कि यार अपना नेटवर्क खुद बनाओ। जैसे कि मेंबरशिप्स हो

गई या ईमेल लिस्ट हो गई। ईमेल लिस्ट आज के जमाने में मस्ट है यार। क्योंकि यहां एल्गोरिथम का कोई कंट्रोल नहीं रहता। अब मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप तुरंत उठो और ईमेल लिस्ट बना। नहीं पूरा स्टडी करो

कि ये ईमेल वाली चीज कैसे काम करती है। ये आगे जाके बहुत मदद करेगी। हमारा खुद का यार वेबसाइट है। हम ईमेल ल्च करते रहते हैं। जिसमें मैं अपनी बातें भी शेयर कर लेता हूं। मुझे वीडियो बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। लोग जिस पे देखनी होती है वो

देख लेते हैं। तो ईमेल काफी अच्छा तरीका है जिसमें पूरी ओनरशिप आपकी रहती है। कल को आप अगर कोई ब्रांड ल्च करते हो या कोई चीज ल्च करते हो तो आप वहीं से ही डायवर्ट कर सकते हो पूरा एल्गोरिथम की उसमें कोई

जरूरत ही नहीं पड़ेगी। तो मेरा यह बस एक सजेशन है जिसको मैं एट ईयर पे डालूंगा। अब फिर आते हैं डीप 20 टू 40 मिनट्स वाले वीडियो जिनमें एक डेप्थ है, वैल्यू है। जैसे वीडियो एसएस को क्रिएट करना,

डॉक्यूमेंट्रीज बनाना, पॉडकास्ट है, स्ट्रक्चर डीप ड्राइव्स हैं। ये जो कंटेंट के फॉर्मेट होते हैं ना ये स्मार्ट टीवी के लिए ही बने होते हैं। यही वाला क्योंकि वो क्योंकि वो ऑप्टिमाइज ही टीवी के लिए

हुआ है। अब क्योंकि बड़े वीडियोस जो होते हैं 20 मिनट 40 मिनट के वीडियोस और अगर कोई लिविंग रूम में टीवी पे बैठ के देख सकता है वो वीडियोस को और 40 मिनट की वीडियो पे अगर मैं 20 मिनट का चलो मान के

चलूं एवरेज व्यू ड्यूरेशन फिर भी बहुत बोल रहा हूं मैं लेकिन 20 अगर हम मान के चलें तो मात्र 24000 व्यूज आपको चाहिए उस

वीडियो पे सिर्फ 24 हजार व्यूज यानी कि 66 व्यूज पर डे फॉर 365 डेज। 2018 में YouTube ने ट्रेडिशनल टीवी से कमपीट करने के लिए उन्हें क्रिएटर्स का नेटवर्क चाहिए

था कि यार ज्यादा से ज्यादा क्रिएटर्स आ जाए। अब 2027 में कंटेंट की जो क्वांटिटी है उसकी कोई कमी ही नहीं है। लाखों वीडियोस अपलोड होते हैं आज। बस कमी है तो सिर्फ एक चीज की और YouTube को वही पूरी

करनी है कि यार अपने एडवरटाइर्स को प्रायोरिटी देनी है उनके ट्रस्ट को सेफ रखना। बड़े ब्रांड्स टॉप डॉलर पे करते हैं आपकी वीडियो पे एड्स चलवाने के लिए। अगर उन्हें गारंटी मिलती है कि उनके एड्स किसी

कंट्रोवर्शियल, ऑफेंसिव, मिसलीडिंग और लो एफर्ट कंटेंट पर वेस्ट ना हो जाए, वो YouTube की जिम्मेदारी होती है। क्योंकि एक छोटा सा ब्रांड सेफ्टी स्कैंडल भी YouTube को बड़ा नुकसान दे सकता है। तो

इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें बड़े और बोरिंग वीडियोस बनाने बहुत जरूरी हैं। तुम्हें यूज़ करना पड़ेगा स्टोरी स्ट्रक्चरर्ड मेथड ताकि हम ऑडियंस को लंबे समय तक इंगेज रख पाए और रिटेंशन बढ़ सके

और रिटेंशन देख के ब्रांड्स आ सके। और वो कैसे हो सकता है? तो यह वीडियो देखो। मैं मिलता हूं आपको अगली वीडियो में तब तक के लिए बी बिजी

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