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पुराने तालाब की रहस्यमयी आत्मा || PURANE TALAB KI RAHSHYMAY AATMA #hindistories#horrorstort

By StoryVerse Hindi

Summary

Topics Covered

  • अनसुनी चेतावनी का काला अंजाम
  • नजरअंदाज खतरा विनाशकारी बनता है
  • शिक्षिका की त्रासदी और गांव का अपराध
  • पश्चाताप की शक्ति से मिलती है मुक्ति

Full Transcript

अरे भाई रघुनाथ आज तो कुछ ज्यादा ही बारिश हो रही है। हां भाई आज तो लगता है रात यहीं रुकनी पड़ेगी। छाता भी नहीं लाए हम

तो। हां थोड़ी देर और बैठते हैं। अब और कर भी क्या सकते हैं? मध्य प्रदेश के छोटे से

गांव देवगढ़ में सावन की मूसलाधार बारिश लगातार बरस रही थी। चारों ओर फैले हरेभरे खेत पानी से लबालब

भरे हुए थे। खेतों के बीच बनी एक ऊंची मचान पर जहां से पूरा खेत साफ दिखाई देता था। दो युवक बैठे बारिश का आनंद लेते हुए

आपस में बातें कर रहे थे। उनके सामने दूर तक फैले धान के खेत, पानी से भरी मेढ़े और हवा में झूमती फसलें एक अलग ही दृश्य बना

रही थी। बारिश लगातार तेज होती जा रही थी। चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था और बीच-बीच

में चमकती बिजली पूरे माहौल को एक पल के लिए रोशन कर देती थी। तभी दूर से दो युवक बारिश में भीगते हुए धीरे-धीरे उनकी ओर

आते दिखाई दिए। उनके कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे और वे तेज बारिश से बचने के लिए जल्दी-जल्दी कदम बढ़ा रहे थे। कुछ ही देर

में दोनों उनके पास आकर रुक गए। अरे ओ तुम दोनों कहां जा रहे हो इतनी तेज बारिश में?

अरे चाचा जी हम तो आपके पास ही आ रहे थे। हां चाचा आपके साथ बैठकर बातें करने में जो मजा आता है वो कहीं और नहीं मिलता।

अरे वाह! आज तो बड़ी मीठी-मीठी बातें हो

अरे वाह! आज तो बड़ी मीठी-मीठी बातें हो रही हैं। सच-सच बताओ। कोई काम है या सच

में हमारी याद आ गई? नहीं चाचा आज कोई काम नहीं है। मौसम इतना सुहाना हो गया कि सोचा आपके साथ बैठकर चाय पीते हैं और पुरानी बातें सुनते हैं।

चारों मचान पर आराम से बैठे हुए थे। सामने दूर-दूर तक फैले खेतों पर लगातार बारिश बरस रही थी। ठंडी हवा के झोंके कभी उनके

चेहरों को छू जाते तो कभी बारिश की बूंदे हवा के साथ उड़कर मचान तक आ जाती। चारों बारिश [संगीत] का आनंद लेते हुए

गांव की पुरानी बातें, खेतीबाड़ी और मौसम की चर्चा में मग्न थे। बीच-बीच में बिजली आसमान को चीरती और उसकी चमक कुछ पल के लिए

पूरे खेत को उजाले में बदल देती। फिर सब कुछ दोबारा अंधेरे में डूब जाता। तभी कमल की नजर दूर कच्चे रास्ते पर पड़ी। बारिश

के बीच एक धुंधली सी परछाई धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ती हुई दिखाई दे रही थी। तेज बारिश की वजह से उसका चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा था।

अरे चाचा अब तो बहुत रात हो गई है। इस वक्त ये कौन आ रहा है?

गांव की तरफ से आ रहा है। लगता तो गांव का ही कोई आदमी है। अरे यह [संगीत] तो वही है जिसका घर गांव के आखिर

में है। अरे भोला इतनी रात को कहां जा रहे हो? वो

भी ऐसी मूसलाधार बारिश में। चाचा यहीं नदी के उस पार जो पुराना तालाब है ना वहीं मछली पकड़ने जा रहा हूं।

इतनी रात को जाने की क्या जरूरत है बेटा?

कल सुबह चले जाना। रात का समय भी ठीक नहीं है। और ऊपर से इतनी तेज बारिश। अरे चाचा। सुबह जाता हूं तो वहां एक भी

ढंग की मछली नहीं मिलती। मैंने सुना है कि रात के समय मछलियां तालाब के किनारे और एक ही जगह ज्यादा देर तक रुकती हैं। अगर आज

चला गया तो अच्छी पकड़ हो जाएगी। भोला जैसे ही आगे बढ़ने लगा। मंथलाल ने उसे फिर से आवाज दी। इस बार उनकी आवाज में चिंता

साफ झलक रही थी। अरे चाचा आप भी बेकार की चिंता करते हैं। मैं रोज ऐसे ही निकलता हूं। कुछ नहीं [संगीत] होगा। आप लोग आराम से बैठिए। मैं

मछली पकड़ कर लौटते वक्त आप सबसे मिलकर ही घर जाऊंगा। भगवान इसकी रक्षा करना। इतनी रात को उस पुराने तालाब की तरफ जाना ठीक

नहीं है। अगली सुबह पुराने तालाब के बाहर भोला की लाश पड़ी मिली थी। उसके आसपास गांव के

दो-तीन लोग खड़े थे। सभी के चेहरों पर डर और हैरानी साफ दिखाई दे रही थी। कोई कुछ बोल नहीं रहा था। बस सब चुपचाप भोला की

लाश को देख रहे थे। इतने में मंकलाल और रघुनाथ भी वहां पहुंच गए। दोनों भीड़ के पास आकर रुक गए। लाश पूरी तरह कपड़े से

ढकी हुई थी। अरे यह कैसे मर गया? कुछ पता चला? कोई

जहरवहर मिला या किसी जानवर ने हमला किया। पास खड़े एक गांव वाले ने धीरे से सिर हिलाया। नहीं चाचा अभी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा।

लाश की हालत देखने लायक नहीं है इसलिए उसे पूरी तरह ढक दिया है। पूरे शरीर पर गहरे घाव है और चेहरा भी इतना बिगड़ गया है कि बड़ी मुश्किल से

पहचान में आया कि यह भोला है। भोला की मौत की बात सुनते ही मंगतलाल का चेहरा गंभीर हो गया। उन्होंने बिना कुछ देर किए रघुनाथ की तरफ देखा।

रघुनाथ चलो मेरे साथ अब हमें उसके पास। जाना ही होगा। दोनों बिना किसी से कुछ कहे वहां से निकल

पड़े। बारिश की वजह से कच्ची सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल चुकी थी। दोनों तेज कदमों से गांव से थोड़ा दूर जंगल की ओर

बढ़ने लगे। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। पेड़ों से बारिश की बूंदे अब भी टपक रही थी और ठंडी हवा लगातार चल रही थी। कुछ

दूर जाने के बाद उन्हें एक छोटी सी कुटिया दिखाई दी। कुटिया के बाहर एक वृद्ध तांत्रिक आंखें बंद किए गहरे ध्यान में

बैठा था। उसके सामने धनी जल रही थी जिससे धुएं की हल्की लहरें हवा में फैल रही थी। मंगतलाल और रघुनाथ उसके सामने पहुंचकर हाथ

जोड़कर खड़े हो गए। बाबा हमारी सहायता कीजिए। मुझे लगता है वो वापस आ चुकी है। तांत्रिक

ने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोली और बिना कुछ बोले मंकलाल की ओर देखने लगा। उसने फिर से अपना शिकार ढूंढना शुरू कर दिया है। अगर

उसे जल्दी नहीं रोका गया तो न जाने कितनी और जाने चली जाएंगी। उसे अभी तक मुक्ति नहीं मिली। इसलिए वो फिर से लौट आई है। लेकिन तुम लोग उसके इलाके में गए ही

क्यों?

[संगीत] वहां वो कुछ भी कर सकती है। मंगतलाल और रघुनाथ ने एक दूसरे की तरफ देखा। फिर रघुनाथ धीमी आवाज में बोला,

बाबा हमें लगा इतने साल बीत गए हैं। शायद अब तक उसे मुक्ति मिल [संगीत] गई होगी। इसलिए हमने उस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। [संगीत]

नहीं, अब वह पहले से भी ज्यादा शक्तिशाली हो चुकी है। अभी तक वह अपने इलाके तक ही सीमित थी, लेकिन अब धीरे-धीरे गांव [संगीत] की ओर भी आने लगेगी।

बाबा [संगीत] अब क्या करें?

मैं कोई उपाय सोच कर दो दिन के भीतर तुम्हारे गांव आऊंगा। तब तक तुम दोनों पूरे गांव को सावधान कर दो। उनसे कहना रात

को देर तक कोई भी घर से बाहर ना निकले। खासकर [संगीत] पुराने तालाब, जंगल और सुनसान रास्तों की तरफ तो बिल्कुल भी ना

जाए। जिसने भी मेरी बात नहीं मानी। वो उसका अगला शिकार बन सकता है। तांत्रिक की बात सुनकर मंकलाल और रघुनाथ ने चुपचाप [संगीत]

सिर हिला दिया। दोनों जानते थे कि अब गांव पर एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। मंगतलाल और रघुनाथ गांव लौट आए। उन्होंने

तांत्रिक की कही हुई हर बात पूरे गांव में फैला दी। इसी तरह कुछ दिन बीत गए। एक रात शहर से गांव का एक आदमी अपने घर लौट रहा

था। बस देर से पहुंची थी। इसलिए गांव तक आते-आते काफी रात हो चुकी थी। चारों ओर गहरा सन्नाटा था। केवल झींगरों की आवाज और

ठंडी हवा की सरसराहट [संगीत] सुनाई दे रही थी। अरे यार आज इतने दिनों बाद गांव आया हूं और इतनी रात हो गई। अब पैदल ही जाना पड़ेगा।

वो अपना [संगीत] छोटा सा बैग कंधे पर टांगे धीरे-धीरे कच्चे रास्ते पर गांव की तरफ बढ़ने लगा। कुछ दूर चलने के बाद वह

पुराने तालाब के पास पहुंचा। बारिश के बाद तालाब पानी से लबालब भरा हुआ था। चांद की हल्की रोशनी पानी पर पड़ रही थी।

अरे वाह। इस बार तो तालाब पूरा भर गया है। इतने में उसकी नजर तालाब के किनारे खड़ी एक औरत पर पड़ी। उसने चमकीली लाल साड़ी

पहन रखी थी। उसके लंबे बाल हवा में धीरे-धीरे उड़ रहे थे। वो बिल्कुल चुपचाप तालाब की ओर देख रही थी।

इतनी रात को यह कौन है? [संगीत]

बहन जी आप कौन है? और इतनी रात को यहां क्या कर रही हैं?

औरत ने धीरे-धीरे उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में आंसू थे और आवाज कांप रही थी। भैया मेरा बच्चा तालाब में गिर गया है। वो

अंदर किसी लकड़ी में फंस गया है। मैं बहुत कोशिश कर चुकी [संगीत] लेकिन उसे निकाल नहीं पा रही। कृपया मेरी मदद कर दीजिए। आप चिंता मत कीजिए। मैं अभी आपके बच्चे को

निकाल कर लाता हूं। [संगीत] इतना कहकर वो सीधे तालाब में कूद गया। वो बार-बार पानी में गोता लगाकर बच्चे को ढूंढने लगा। [संगीत]

कुछ देर बाद वो पानी से बाहर सिर निकाल कर जोर से बोला बहन जी यहां तो कोई बच्चा नहीं चाहिए लेकिन उसकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि उसने किनारे की तरफ देखा [संगीत]

अब वहां पहले वाली औरत नहीं खड़ी थी उसकी जगह एक दूसरी औरत खड़ी थी उसके लंबे बिखरे हुए बाल चेहरे पर लटक रहे थे आंखें पूरी

तरह काली थी और होठों पर एक डरावनी मुस्कान फैल चुकी [संगीत] थी उसे देखते ही उस आदमी का पूरा शरीर डर से कांपने लगा।

ऐसे कैसे मिलेगा? उसे ढूंढना है [संगीत] तो तुम्हें और नीचे जाना होगा। इतना कहते ही तालाब के पानी के अंदर से किसी अदृश्य ताकत ने उस आदमी के दोनों

पैरों को कसकर पकड़ लिया। अरे कौन है? छोड़ो मुझे बचाओ। वो पूरी ताकत से बाहर निकलने की कोशिश

करने लगा। लेकिन वह अदृश्य शक्ति उसे लगातार पानी के अंदर खींचती चली गई। कुछ ही पलों में उसकी चीखें तालाब के सन्नाटे

में गूंज कर हमेशा के लिए खामोश हो गई। तालाब का पानी फिर से बिल्कुल शांत हो गया। मानो वहां कभी कोई आया ही ना हो।

अगली सुबह एक बार फिर पुराने तालाब के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। जमीन पर एक और लाश पड़ी थी। गांव वालों के चेहरों

पर डर साफ दिखाई दे रहा था। अब पूरे गांव में दहशत फैल चुकी थी। कुछ ही देर में मंगतलाल, रघुनाथ, कमल और राजू भी वहां

पहुंच गए। चारों कुछ पल तक चुपचाप लाश को देखते रहे। माहौल इतना शांत था कि किसी की सांसों की आवाज तक सुनाई दे रही थी।

मंगतलाल ने गहरी सांस ली और उदास नजरों से तालाब की ओर देखते हुए कहा, पता नहीं इस गांव के और कितने लोग मरेंगे।

जल्दी ही इसका कुछ करना पड़ेगा। कमल ने मंगतलाल की तरफ देखा। उसके मन में कई सवाल उमड़ रहे थे। चाचा क्या आप जानते हैं वह कौन थी और उसे आज तक मुक्ति क्यों

नहीं मिली? मंगटलाल कुछ पल तक चुप रहे।

नहीं मिली? मंगटलाल कुछ पल तक चुप रहे। उन्होंने तालाब की ओर देखा। फिर धीरे-धीरे कमल और राजू की तरफ मुड़े। उनके चेहरे से

साफ लग रहा था कि अब वह एक ऐसा राज बताने वाले हैं जिसे उन्होंने कई सालों से अपने सीने में छिपा कर रखा था। कमल बेटा यह बात

आज की नहीं बहुत साल पुरानी है। उस समय मैं और रघुनाथ भी तुम्हारी ही तरह जवान थे। हमारा गांव बहुत शांत था। लोग आपस में प्रेम से रहते थे और किसी तरह का कोई डर

नहीं था। लेकिन एक दिन हमारे गांव में एक नई शिक्षिका आई। अभी कुछ ही दिन पहले उनकी स्कूल में नियुक्ति हुई थी। वह स्वभाव से बहुत ही सरल, दयालु और हसमुख थी। गांव के

हर व्यक्ति से आदर से बात करती थी और बच्चों को भी अपने बच्चों की तरह प्यार करती थी। देखते ही देखते पूरे गांव के लोग उनका सम्मान करने लगे। एक दिन छुट्टी के

बाद वह अपने कुछ छात्रों के साथ पुराने तालाब पर गई। बच्चे तालाब का सुंदर नजारा देख रहे थे। कोई पेड़ों के पास खेल रहा था तो कोई पानी में तैरती मछलियों को देख रहा

था। उधर आसपास खेतों में गांव वाले अपने-अपने काम में लगे हुए थे। लेकिन तभी अचानक एक बच्चे का पैर फिसल गया और वह सीधे तालाब के गहरे पानी में जा गिरा।

बच्चा घबराकर हाथ पैर मारने लगा। बचाइए बचाइए। यह देखकर शिक्षिका बिना एक पल की देर किए उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गई।

उन्होंने बच्चे तक पहुंचने की बहुत कोशिश की। लेकिन उन्हें तैरना नहीं आता था। कुछ ही पलों में वह खुद भी गहरे पानी में डूबने लगी। उन्होंने कई बार मदद के लिए

आवाज लगाई। कोई है बचाइए। लेकिन उस समय खेतों में काम कर रहे किसी भी व्यक्ति तक उनकी आवाज नहीं पहुंच पाई। और देखते ही देखते वह तालाब की गहराई में

समा गई। उस दिन के उस दिन के बाद से सब कुछ बदल गया। मंथलाल की आंखें नम हो गई। उन्होंने तालाब की ओर देखते हुए धीमी आवाज

में कहा। तभी से उसकी आत्मा इस तालाब में भटक रही है। उसके मन में बस एक ही बात बैठ

गई कि जिस दिन उसे और उस मासूम बच्चे को बचाने की सबसे ज्यादा जरूरत थी उस दिन गांव से कोई भी उनकी मदद के लिए नहीं आया।

शायद इसी वजह से वह आज भी हर आने जाने वाले से बदला ले रही है। उसे लगता है कि पूरे गांव ने उसे मरने के लिए छोड़ दिया

था। तभी दूर कच्चे रास्ते पर किसी के आने की आहट सुनाई दी। रघुनाथ ने नजर उठाकर देखा

मंगत लाल देखो लगता है बाबा आ गए। हाथ में कमंडल और दूसरी तरफ त्रिशूल लिए। वही तांत्रिक धीरे-धीरे उनकी ओर चला आ रहा था।

उसके चेहरे पर जरा भी घबराहट नहीं थी। लेकिन उसकी आंखों से साफ लग रहा था कि वह आने वाले खतरे को अच्छी तरह समझ चुका है। मंगत लाल और रघुनाथ तुरंत उनके पास

पहुंचे। बाबा आपने आने में देर कर दी। [संगीत] एक और आदमी की जान चली गई।

मुझे पता था अगर मैं समय पर नहीं पहुंचा। तो वो फिर किसी का शिकार जरूर करेगी। आज

रात अमावस्या है। यही वो समय है जब उसकी शक्ति सबसे [संगीत] अधिक होगी। और यही एक मौका भी है उसे हमेशा के लिए मुक्त करने

का। [संगीत] लेकिन याद रखना आज रात जो भी होगा उसमें तुम चारों को मेरा साथ देना होगा। अगर तुम में से कोई भी डर कर पीछे हटा

[संगीत] तो हम सबकी जान खतरे में पड़ जाएगी। बाबा हमें क्या करना होगा? [संगीत]

शाम होते ही पांचों लोग पूजा का सारा सामान लेकर पुराने तालाब की ओर चल पड़े। सूरज [संगीत] पूरी तरह डूब चुका था। चारों तरफ घना अंधेरा फैल गया था। हवा धीरे-धीरे

[संगीत] तेज होने लगी थी। तालाब के किनारे पहुंचकर तांत्रिक ने जमीन [संगीत] साफ की और चारों ओर गंगाजल छिड़का। फिर उसने मिट्टी पर एक बड़ा सा

रक्षा मंडल बनाया और उसके बीच हवन कुंड तैयार किया। [संगीत] अब सब लोग इस मंडल के अंदर बैठ जाओ। जब तक

मैं ना कहूं कोई भी बाहर नहीं जाएगा। चारों बिना कुछ बोले मंडल के अंदर बैठ गए। [संगीत] तांत्रिक ने हवन में अग्नि प्रज्वलित की

और ऊंचे स्वर में मंत्रों का जाप शुरू कर दिया। कुछ ही मिनट बीते थे कि अचानक तालाब का शांत पानी अपने आप लहराने लगा। तेज हवा

चलने लगी। पेड़ों की टहनियां जोर-जोर से हिलने लगी। अचानक तालाब के बीचों-बीच पानी में गोलगोल भंवर बनने लगा। [संगीत]

चाचा ये ये क्या हो रहा है? कोई कुछ नहीं बोलेगा। उसकी आहट शुरू हो चुकी है। इतने में तालाब

के बीच से एक तेज चीख सुनाई दी। उस चीख की आवाज सुनते ही कमल और राजू के रोंगटे खड़े हो गए। धीरे-धीरे पानी के [संगीत] बीच से

लाल साड़ी पहने वही औरत बाहर निकलने लगी। उसके लंबे भीगे हुए बाल चेहरे पर लटक रहे थे। [संगीत] आंखें पूरी तरह काली पड़ चुकी थी और वो

बिना पलक झपकाए मुझे कोई नहीं रोक सकता। आज तुम्हें मुक्ति मिलेगी। अब तुम्हारा आतंक यहीं समाप्त [संगीत] होगा। इतना कहकर

तांत्रिक ने हवन की अग्नि में अंतिम आहुति दी और तालाब की ओर गंगाजल छिड़क दिया। अचानक तेज हवा चलने लगी। चारों ओर धुआं

फैल गया। आत्मा जोर-जोर से चीखने लगी। नहीं तांत्रिक लगातार मंत्र पढ़ता रहा। कुछ ही क्षणों बाद आत्मा [संगीत] की चीखें

धीरे-धीरे कम होने लगी। तभी आत्मा का रूप बदलने लगा। वो फिर से उसी शिक्षिका के रूप में दिखाई दी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

मेरा इरादा किसी को मारने का नहीं था। मुझे लगा उस दिन पूरे गांव ने मुझे और उस मासूम बच्चे को मरने के लिए छोड़ दिया था।

इसी दर्द ने मुझे भटका दिया। अब तुम्हारा दुख समाप्त हो चुका है। क्रोध छोड़ दो और शांति से चली जाओ। शिक्षिका ने

नम आंखों से पूरे गांव की ओर देखा। मुझे क्षमा कर देना। इतना कहते ही उसका शरीर धीरे-धीरे प्रकाश में बदलने लगा। और देखते ही देखते वह

हमेशा के लिए वहां से विलीन हो गई। तालाब का पानी फिर से शांत हो गया। तेज हवा भी रुक गई।

बाबा आपने पूरे गांव को बचा लिया। नहीं। उसे मुक्ति उसके अपने पश्चाताप ने दिलाई है। अब इस गांव पर कभी कोई संकट

नहीं आएगा। तो दोस्तों, आपको हमारी यह काल्पनिक कहानी कैसी लगी? हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

कैसी लगी? हमें कमेंट करके जरूर बताएं। छोटी-मोटी गलतियां एडिटिंग में हो जाती हैं। उसके लिए क्षमा करें। अगले रविवार

आपके लिए अमावस्या की रात का मछली वाला। पार्ट दो आ रहा है जो होगा पूरा सस्पेंस और रहस्यों से भरा।

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