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युद्ध भूमि में हनुमान जी ने लिया नरसिंह रूप || Sankat Mochan Mahabali Hanuman

By Jai Veer Hanuman

Summary

Topics Covered

  • हनुमान स्वयं बने ब्रह्मांडास्त्र
  • भक्ति का कवच: राम बसे हृदय अभेद्य
  • भगवान भक्त की इच्छा के समक्ष विवश
  • धर्म युद्ध: अपनों से भी लड़ना पड़ता है

Full Transcript

हनुमान जी पुष् के पास ब्रह्मांड अस्त्र को रोकने या प्रभावीहीन करने के लिए कोई अस्त्र नहीं है। कुछ कीजिए। [संगीत]

कोई अनिष्ट ना हो जाए। [संगीत] युद्ध नियम के अनुसार मैं युद्ध में स्वयं वार नहीं कर सकता किंतु पुष् का अस्त्र तो

बन सकता हूं। [संगीत] तीर निकालो पुष्। [संगीत] [संगीत] हनुमान जी ब्रह्मांड अस्त्र का सामना कैसे कर पाएंगे। [संगीत]

ना जाने क्या होने वाला है। [संगीत] हनुमान जी स्वयं मेरा अस्त्र बन गए। पुष् [संगीत]

अस्त्र बने कपराई ब्रह्मांडास्त्र [संगीत] से जा टकराई रुकमा

सब हुआ बाक कपी [संगीत] को देख गाथा महाबली हनुमत की रुच [संगीत]

कर लीला राम भगत की जय जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान [संगीत] रुक

जय महादेव कैसी व्यवस्था है ये पुष्कल एवं हनुमान की विजय पर मैं प्रसन्न भी

नहीं हो सकता इनकी प्रत्येक विजय उस भीषण संग्राम को निकट ला रही है। जो यदि होगा

तो महाविनाश भी मचा सकता है। [संगीत] देख ली अपने महाबली पुत्र की दुर्दशा राजन

अभी भी समय है हमारा अश्व हमें लौटा दीजिए बच जाएंगे आप सब नहीं

पराजय स्वीकार नहीं है वीरमणि को तुमने जो किया उसका भयंकर परिणाम भोगोगे तुम सब

क्योंकि वीर मणि की शक्तियों के बारे में तुम्हें ज्ञात ही नहीं है मेरे घोर और तब मेरी भक्ति ने मुझे ऐसी महान शक्तियां

प्रदान की है जो संसार में किसी के पास नहीं है। मेरी शक्ति मेरी शान महादेव किंतु अभी उसका समय नहीं आया है। मेरे

भीतर की यह धदधकती ज्वाला तभी शांत होगी जब मैं स्वयं [संगीत] प्रतिशोध लूंगा अपने पुत्र की मृत्यु का।

अपने पुत्र की ऐसी दशा देखकर भी अहंकार नहीं गया आपका। अवश्य ही काल के वश में हैं आप।

नहीं ये अहंकार नहीं ललकार है। सौगंध है मुझे भोलेनाथ की। अपने इन्हीं हाथों से मृत्यु के मुख में पहुंचाऊंगा

मैं इस बालक को। सैनिकों समाप्त कर दो सबको आक्रमण हर हर महादेव

जय श्री राम राजन मैं शुभांगत को संभाल लूंगा। आप पुष् की ओर बढ़ रहे हैं। सैनिकों को रोकिए। [संगीत]

पुष् से पूर्व आपको मेरा सामना करना होगा। महाराज वीरमणि हनुमान जी इनके शक्ति के अहंकार [संगीत]

को एक बालक के हाथों से ही टूटने दीजिए। महाराज वीर मणि से नहीं वानर। पहले उनके भ्राता वीर सिंह से तो युद्ध कर लो।

[संगीत] उचित है पुष् मैं इन्हें देखता हूं। [संगीत] बहुत छाती फुला रहे हो वानर। मेरे ये

अस्त्र तुम्हारी चौड़ी छाती को काट के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे। कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। [संगीत] [संगीत]

मेरे चक्रास्त्र मेरे दिव्य कटार तुम्हारी छाती को भेदने में विफल रहे। ऐसा कैसे हुआ?

यह प्रभु श्री राम की भक्ति का रक्षा कवच है। [संगीत] जिसके हृदय में प्रभु श्री राम बसे हो।

उस छाती को किसी भी अस्त्र से [संगीत] नहीं भेदा जा सकता दुष्ट। अब अंतिम स्वासे गिनना आरंभ कर दो बालक।

तुम्हारे कारण मेरा पुत्र मारा गया। सौगंध भोलेनाथ की। बालक समझकर तुम पर कोई दया नहीं करूंगा मैं।

ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय [संगीत] [संगीत] [संगीत]

[संगीत] बहुत उछल लिए बालक आओ रघुवंशी राम के अनुज

तुम्हें परास्त करने का सुख मेरे ही भाग्य में लिखा था। सुख तो मुझे प्राप्त होता यदि तुम युद्ध के स्थान पर प्रभु श्री राम की अधीनता स्वीकार करते

[हंसी] मेरे बाण इसकी ढाल को फेंक नहीं पा रहे। ऐसा कोई अस्त्र बना ही नहीं जो मेरी ढाल

से बचकर आगे जा सके। [संगीत] [संगीत] या आ [संगीत] [संगीत]

बहुत उछल कूद कर ली तुमने बालक। अब तुम मेरे प्रहार से बचाओ। [संगीत] आ [संगीत] [संगीत]

[संगीत] [संगीत] [संगीत] [हंसी] इसके ढाल की आकर्षण शक्ति तो मेरे अस्त्रों को इस पर प्रहार ही नहीं करने दे रही। क्या करूं?

अब क्या करोगे रघुवंशी? तुम्हारा तो कोई अस्त्र काम ही नहीं कर रहा। कोई तो युक्ति अपनानी होगी जिससे इसकी ढाल निष्प्रभावी हो जाए और यह स्वयं ही इसे फेंक दे।

[संगीत] कोई लाभ नहीं होगा रघुवंशी। [संगीत] ये बाण भी मेरी ढाल को नहीं भेज पाएगा।

क्या हुआ? इतने में ही क्लांत हो गए।

क्या हुआ? इतने में ही क्लांत हो गए। अभी तो हमारा युद्ध आरंभ ही हुआ है। तुम्हारी इतनी बड़ी देर है। फिर भी तुम

शांत नहीं हुए। देखता हूं। [संगीत] दिखाओ अपनी स्फूर्ति और बचाओ अपनी सेना को। [हंसी]

ये साधारण अस्त्र नहीं है। दिव्यास्त्र है ये। यदि तुम इससे टकरा जाओ तो कदाचित ये रुक जाए।

अन्यथा ये तुम्हारी सेना में विनाश मचाएगा। आप देखें तुम कितनी तीव्र गति से अपनी सेना को

बचाते हो। [हंसी] अच्छा ये पहाड़ी [संगीत] जय श्री राम। [संगीत] ये क्या कर रहा है?

[संगीत] ये कैसे हो सकता है?

अब क्या करेंगे आप? आपका दिव्यास्त्र तो नष्ट हो गया। नष्ट नहीं हो सकता। दिव्यास्त्र है वो। वापस जुड़ जाओ दिव्यास।

सैनिकों पकड़ लो इस वानर को। अच्छा मुझे पकड़ना है। आओ आओ पकड़ लो मुझे। [संगीत]

थैंक यू [संगीत] ये तो तब हो रहा है। ये क्यों जल रहा है?

अब ज्ञात हुआ रघुवंशी क्या कर सकते हैं?

या [संगीत] जय श्री राम जय श्री राम [संगीत] वीर सिंह [संगीत]

सुभांगत अब तो ताश्री महाराज राम की अधीनता स्वीकार कर लीजिए

और सम्मान के साथ अश्व लौटा दीजिए नहीं मुझ जैसे महान शिव भक्त के साथ

ऐसा नहीं हो सकता। [संगीत] समय आ गया है प्रभु। अब आपको

आपके भक्त की रक्षा करने के लिए आना होगा। अपने दिए हुए वचन को निभाने के लिए मेरे महादेव आपको आना होगा।

प्रभु मुझे वचन दीजिए कि मेरे आवाहन पर आप स्वयं और आपकी सेना युद्ध भूमि में आकर मेरे पक्ष में युद्ध करेंगे।

तथास्तु आपका ये भक्त आपको पुकार रहा है। आवाहन कर रहा है आपका। हे शंभूनाथ

शिव भक्त है ये शिवजी का आवाहन कर रहा है तो क्या शिवजी स्वयं आएंगे इसकी रक्षा करने के लिए

हे संहार के देवता संहार कीजिए अपने भक्त के शत्रुओं का हे महादेव

आइए प्रभु अपनी सेना एकत्र कीजिए। हे महादेव

हे शिव शंकर हे अभ्यंकर हे नाथों के नाथ भोलेनाथ

प्रकट कीजिए प्रकट कीजिए अपनी विकराल जटाओं में बसे हुए उस भयंकर

विकराल विवत्स कर वीरभद्र को [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ओम तत्पुरुषाय

विद्महे [संगीत] महाराज वीरमणि के निरंतर आवाहन से कहीं भोले बाबा यहां आने के लिए पाप ही ना हो जाए।

आकाश में ऐसे [संगीत] परिवर्तन हमारे लिए शुभ संकेत नहीं है। हनुमान जी। महाराजकुमार शत्रुघ्न

यदि प्रभु महाराज वीरमणि के सहायक बनकर स्वयं भोले बाबा यहां पर प्रस्तुत हो गए

तो ऐसे भीषण परिणाम होंगे जिनका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता महाशंकर जा रहा है हनुमान और हमारी सेना पर [संगीत]

महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्र प्रचोदयात ओम ये कैसी संारक शक्ति है जो अग्नि का रूप लेकर तीव्र गति से हमारी ओर बढ़ रही है

भोले बाबा के गण और है ये। [संगीत] स्वयं महादेव हो जिसके सहायक उसको कैसा भय

आपके आगमन से मैं अभय हुआ हे महेश्वर आपको प्रणाम है स्वयं प्रभु भोलेनाथ

महा शक्तिशाली भयंकर भी है उनके पास [संगीत] प्रभु के कार्य में भोले बाबा बाधक कैसे बन सकते हैं?

भोले बाबा प्रभु [संगीत] के अश्व को रोकने के लिए युद्ध करेंगे। यदि ऐसा हुआ तो पूरे संसार में विनाश मच जाएगा।

भोले बाबा ऐसा कैसे कर सकते हैं?

स्वयं प्रभु भोलेनाथ महाशक्तिशाली भयंकर वीरभद्र भी है उनके साथ। [संगीत] वीरभद्र

ये कौन है महाराज सुमर?

मैं बताता हूं पुष्कल। एक बार उनसे कुपित होने के कारण महाराज दक्ष ने अपने पुत्री देवी [संगीत] सती और उनके पति भगवान शिव को अपने महायज्ञ में

आमंत्रित नहीं किया। फिर भी देवी सती जब यज्ञ में भाग लेने गई तो अपने [संगीत] पिता के मुख से अपने स्वामी प्रभु शिव जी के लिए अपमानजनक शब्द सुनकर स्वयं को उस

अपमान का दोषी मान अपने तपोबल से वहीं आत्मदाह कर लिया और तब भगवान शिव का ऐसा तीव्र कोष जागृत हुआ जिसने प्रचंड महा तांडव का रूप लिया

जब उनका क्रोध अपने चरम पर पहुंचा तब उनकी जटाओं से उत्पत्ति हुई वीरभद्र की अपनी उत्पत्ति के साथ ही वीरभद्र अपराजय माने जाने वाले महाराज दक्ष को दंडित करने के

लिए निकल पड़े और आज दक्ष आपका दंभ कारण बना

देवी सती के आत्मदाह का आपके इस द शीश ने अपमान किया है महादेव का आपके दंभ के

स्रोत इस दोषी शीश को आपके धड़ से विलख कर आपके दम को मिटा दूंगा मैं मिटा दूंगा अत्यंत भयंकर है ये वीरभद्र और उतनी ही

भयंकर प्रतीत हो रही है उनकी ये सेना सत्य है जिनका आगमन ही इतना भयंकर है वो स्वयं कितने भयंकर होंगे हनुमान ने महादेव के त्रिशूल का सामना तो

कर लिया था। किंतु स्वयं महादेव के समक्ष किसी का भी टिकना कहां संभव है?

अन्यथा ये युद्ध अत्यंत अनिष्कारी हो सकता है। [संगीत] [संगीत] प्रभु प्रणाम भोले बाबा [संगीत]

कल्याण [संगीत] मुझे ज्ञात था प्रभु कि भक्त को दिए हुए वचन को निभाने आप

अवश्य आएंगे अपनी सेना सहित मेरी और मेरी सेना की रक्षा के लिए अवश्य आएंगे। प्रभु

अपने भक्त का प्रणाम स्वीकार करें। प्रणाम महादेव। प्रणाम महादेव। कल्याण हो। [संगीत]

प्रभु के आशीष से तो इस युद्ध भूमि में आहत सभी के घाव भर गए। मेरा आशीष दोनों सेनाओं के साथ है।

किंतु अपने महाभक्त वीरमणि की [संगीत] रक्षा के लिए मैं वचनबद्ध हूं। इसलिए हनुमान अब इस युद्ध

में युद्ध में शत्रु के रूप में रूप में एक दूसरे का सामना करेंगे। भोले बाबा ये मैं क्या सुन रहा हूं प्रभु?

जिन प्रभु शिव के हृदय में मैंने अपने प्रभु श्री राम को देखा जो सदैव अपने इष्ट प्रभु श्री राम के नाम का जाप करते हैं।

वही प्रभु महादेव प्रभु श्री राम के कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनकर कैसे खड़े हो [संगीत] सकते हैं?

हनुमान भक्त जिस प्रकार भगवान का सेवक होता है उसी प्रकार भगवान भी तो भक्त की

इच्छाओं के समक्ष विवश हो जाते हैं। यह भक्त और भगवान की अटूटर संबंध की मर्यादा है जिसके कारण मैं इस युद्ध से पीछे नहीं

हट सकता। किंतु भोले बाबा मुझे ज्ञात है हनुमान कि स्वयं प्रभु श्री राम भी अपनी मर्यादा से वंदे अश्वमेघ यज्ञ

को संपन्न करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। तुम उनके अनन्य भक्त हो। उनकी मर्यादा को खंडित [संगीत] नहीं होने दोगे। किंतु

तुम्हें मुझसे युद्ध कर मुझे [संगीत] पराजित करना ही होगा। अन्यथा पराजय स्वीकार कर पीछे हटना होगा।

भोले बाबा आप तो जगत पिता हैं। मेरे भी पिता समान हैं। प्रभु आप रुद्र हैं तो मैं आपका अंश रुद्रांश हूं।

आपसे युद्ध करने की तो मैं कल्पना भी नहीं कर सकता। अनुमान व्यक्ति विशेष से नहीं अपितु अपने धर्म और लक्ष्य के मार्ग में आई बाधा को

हटाने के लिए जो युद्ध किया जाता है वही युद्ध धर्म युद्ध कहलाता है। फिर बाधा का कारण कोई शत्रु हो या अपना ही

कोई आदत धर्म युद्ध से पीछे नहीं हटा जाता हनुमान ये युद्ध मुझे अपने भक्त के लिए लड़ना है

तो तुम्हें अपने भगवान के लिए मैं अपने भक्त को निराश नहीं कर सकता और तुम अपने भगवान को

इसलिए इसलिए चल नहीं सकता ये आज मेरे प्रति श्रद्धा के कारण मेरा भक्त धर्म संकट में है। इसलिए वो जो भी निर्णय

लेंगे मैं स्वीकार करूंगा। आपका कथन सर्वथा उचित है। भोले बाबा। मेरे गुरु सूर्यदेव जी से प्राप्त शिक्षा

भी यही कहती है कि धर्म के लिए अपनों से भी युद्ध करना पड़ता है। वैसे भी बिना प्रयास किए मैं अपने [संगीत]

प्रभु को निराश नहीं कर सकता। फिर भले ही मुझे इस युद्ध में अपने प्राणों की आहुति ही क्यों ना देनी पड़े।

यदि राम काज को [संगीत] पूर्ण करने का एकमात्र समाधान आपसे युद्ध ही है प्रभु तो आपसे भी युद्ध के लिए युद्ध के लिए

प्रस्तुत है हनुमान हनुमान सम्मुख शिव शिवांश परस्पर [संगीत] रणभूमि

महा धर्म के बल पर [संगीत] उत श्री शंकर भोले बाबा इत बजरंग अतुल [संगीत] बलधामा

वीरभद्र नंदी शिव [संगीत] कारक पुष् शत्रुघन रघुनायक

युद्ध विचित्र साहस असीमता [संगीत] जाके फल पे देव गीता [संगीत]

हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन [संगीत] राम जय जय जय बाब हनुमान [संगीत] जय श्री राम

[संगीत] हा भोले बाबा के ये गण और प्रेत तो राम सेना की ओर बढ़ रहे हैं। वीरभद्र से युद्ध के पूर्व मुझे इन्हें

रोकना होगा। हनुमान जी सेना की रक्षा के लिए जा रहे हैं। इस बीच मैं वीरभद्र को रोकता हूं। महादेव की जटाओं से उत्पन्न हुआ हूं मैं।

मुझे रोक पाना असंभव है। असंभव है। [संगीत] ये या [संगीत]

[संगीत] वीरभद्र की असाधारण शक्ति का सामना मुझे ही करना होगा। [संगीत] किंतु अभी इस दूसरी चुनौती का सामना करना

होगा मुझे। राजकुमार शत्रुघ्न वीरभद्र का सामना करने पहुंच गए। कहीं उनका कोई अनिष्ट ना हो जाए। मुझे शीघ्रता करनी होगी।

नंदी जी मैंने तो अपना कर्तव्य निभाया है और आपकी सेवा करके तो मुझे भोले बाबा [संगीत] की सेवा का अवसर भी प्राप्त हो

गया। अपने ही किसी से युद्ध करने के लिए मेरे पांव ही नहीं उठे। हम दोनों के मध्य तो भक्त से भक्त का अटूट [संगीत] अदृश्य

बंधन है। किंतु उसे भूलकर मुझे नंदी [संगीत] जी के साथ युद्ध करना ही होगा। मैं तुम दोनों की आंतरिक भावनाओं से

परिचित हूं। किंतु यह तो युद्ध है जो भावनाओं से नहीं परियोजनों से किया जाता है। इसलिए भावनाओं से भी अधिक शक्तिशाली होना चाहिए।

तुम दोनों का प्रयोजन है। क्या आपने उस प्रयोजन में तुम दोनों की पूर्ण आस्था है?

मेरा प्रयोजन है अपने प्रभु श्री राम का कार्य पूर्ण करना। मेरा प्रयोजन है अपने प्रभु के धय की रक्षा करना। ओम

सावधान रहना हनुमान इस बार यह कोई परीक्षा नहीं अभी तू वास्तविक युद्ध है नंदी जी स्मरण तो आपको

भी होगा कि मैंने अपने बाल्यकाल में ही किस प्रकार आपको रोका था। इसलिए वैसी स्थिति पुनः उत्पन्न हो उसके

पूर्व भी आप अभी भी पीछे हट सकते हैं। आज मैं भीषण प्रहार करूंगा।

क्योंकि मैं अपने प्रभु के कार्य से कदापि पीछे नहीं हटूंगा। पीछे मुझे नहीं आज तुम्हें हटना होगा हनुमान।

आज सारा जग देखेगा कौन किस पर भीषण प्रहार करेगा। हम्म तुम्हारा कोई वार मुझे आहत नहीं कर सकता।

मुझसे बढ़ने का दुस््साहस मत करो। महादेव के क्रोध का प्रतिरूप हूं मैं। मैं भी श्री राम का अनुज हूं। और भैया श्री

राम के कार्य में बाधा बनने वाले को अपने मार्ग से हटाना धर्म है मेरा। जिसका निर्वहन अवश्य करूंगा मैं। [संगीत]

हे बालक तुमने वो चुनौती स्वीकार की है जिस पर तुम विजय पाने के लिए सक्षम नहीं हो। इस युद्ध भूमि को [संगीत] छोड़कर चले जाओ अन्यथा।

इस युद्ध भूमि को तुम्हारी मृत्यु भूमि बना दूंगा। युद्ध भूमि छोड़ने का नहीं युद्ध समाप्त करने का अभ्यस्त हूं मैं। [संगीत]

[संगीत] दुष्ट बालक आज देखता हूं कैसे रक्षा करते हो तुम अपनी। ये [हंसी] [संगीत]

धर्म का पथ भी सुगम नहीं भाई [संगीत] रणम नंदी कप सम आई

राम [संगीत] काज हे तो हनुमंता बल शक्ति करे पूर्ण प्रयुक्ता हे [संगीत]

गाथा महाबली हनुमत कीज कर लीला राम [संगीत] [हंसी] सभी वार निष्फल कर दूंगा मैं। सारे

अस्त्रों शस्त्रों को खंडित कर दूंगा। कितने भी वीर योद्धा होगे विचित्र तुम किंतु मुझ पर विजय प्राप्त नहीं कर पाओगे। तो

और युद्ध करो। दिखाओ अपनी वीरता का प्रमाण। हर हर महादेव। जय श्री राम। [संगीत]

[संगीत] राजकुमार शत्रुघ्न मेरे बल और युद्ध कौशल का तुम तो क्या कोई भी सामना नहीं कर सकता। [संगीत] [संगीत]

अति प्रचंड महायोद्धा प्रतीत हो रहे हैं वीरभद्र। मुझे शीघ्र ही इन दोनों से निपटकर काका श्री की सहायता के लिए जाना चाहिए। [संगीत] [संगीत]

राजकुमार शत्रुघ्न संकट में है। तुझे शीघ्र कुछ करना होगा। अब मेरा आपको अविलंब रोकना अति आवश्यक हो गया [संगीत] है नंदी जी।

नंदी जी परास्त हो गए हनुमान से। कहां गए वो? क्या यह संभव है? अब उठ भी सकेंगे

वो? क्या यह संभव है? अब उठ भी सकेंगे नंदी जी। मुझे क्षमा करें नंदी जी। किंतु मेरे लिए यह करना अति आवश्यक था।

वीरभद्र सावधान आ रहा है हनुमान। [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत]

इस बालक की मृत्यु कदाचित मेरे ही हाथों है। बालक मेरे विकाल रूप से मैं बरी हो गए ना [संगीत]

काल हूं मैं तुम्हारा काल [संगीत] [संगीत] [संगीत] इस युद्ध से कोई सुख प्राप्त नहीं हो रहा है मुझे किंतु मेरा आप पर प्रहार करना

अनिवार्य है नंदी जी यदि महाराज आज वीरमणि अहंकार में आकर प्रभु श्री राम के अश्वमेध यज्ञ के अश्व को रोकने एवं महादेव का आह्वान करने की भूल ना करते तो कदाचित इस

युद्ध को टाला जा सकता था। किंतु अब राम काज को पूर्ण करने के लिए हनुमान इस संकट का सामना करने के लिए तत्पर है। अब और नहीं करूंगा मैं तुम दोनों का

या [संगीत] अद्भुत है इस बालक का सास। किंतु मेरी असाधारण शक्ति अब इसका भी संहार करेगी।

[संगीत] तुम्हारे ये बाण मुझे स्पर्श भी नहीं कर सकते बालक। किंतु मेरे प्रहार से तुम्हारा बचाव असंभव है। या

पुष्कर पुष्कर मेरे पुत्र [संगीत] [संगीत] ये कैसा अनर्थ हो गया प्रभु पुष् भी आहत हो गया। [संगीत]

जिस प्रकार बाल्यकाल में वायुदेव ने मुझे रक्षित किया था उसी प्रकार से मुझे पुष् को भी रक्षित करना चाहिए। [संगीत] [संगीत] [संगीत]

[संगीत] हनुमान जी दम के कारण अनेकों बार मैंने आपकी अवमानना की। मुझे क्षमा कर दीजिए। आपसे मैंने बहुत कुछ

सीखा है। क्रोध पर नियंत्रण रखना, अहंकार को तजना, अपने दायित्व के प्रति अधिक जागरूक होना।

इन सभी सीखों के लिए मैं आपका आभारी हूं। आ आ हो पुष् तुम्हें कुछ नहीं हो सकता। मुश्किल

उठो मुश्किल ये असंभव है। मुश्किल तुम्हारी मृत्यु नहीं हो सकती। उठो पुष्कर उठो रे पुष् शत्रुघ्न और संपूर्ण सेना की रक्षा

का दायित्व तुम्हारा है। ये कैसे हो गया प्रभु? मैं अपना वचन नहीं निभा सका।

विफल हो गया आपका हनुमान। राजकुमार शत्रुघ्न और पुष् की रक्षा नहीं कर सका मैं। पुष् उठो उठो पुष्

[संगीत] [संगीत] [संगीत] श्री राम [संगीत] [संगीत] हनुमान रुद्राश हो तुम

आओ सामना करो महादेव से उत्पन्न महावीर वीरभद्र प्रभु श्री राम के अनुज और उनके भतीजे को

क्षति पहुंचाकर तुमने उन दोनों को नहीं मुझे क्षति पहुंचाई है। मुझे उस हनुमान को जिसे उनकी सुरक्षा का

दायित्व दिया था [संगीत] मेरे प्रभु ने उनको आहत होते देख मेरे प्रभु श्री राम को अत्यंत कष्ट हुआ होगा।

[संगीत] जिसे मैं कदापि सहन नहीं कर सकता। कबीर की सोच भी जानने पड़े हो। आओ युद्ध

करो मुझसे उस महारथी से जिसका जन्म भी रुद्र अवतार महादेव की जटाओं से हुआ है।

यदि तुमने भोले बाबा की जटाओं से जन्म लिया है तो मैं भी रुद्रांश हूं। [संगीत]

मेरे प्रभु श्री राम को कष्ट दिया है तुमने वीरभद्र जिसका तुम्हें उचित दंड देगा ये राम भक्त हनुमान

इतना अविश्वास है अपनी शक्ति पर हनुमान दुआओं सामना करो मेरा सामना करो एक भयंकर महा युद्ध का आरंभ है ये।

मेरे प्राण तुम्हारे प्राण हर लेंगे हनुमान तुम्हारे हृदय को अपना आहार बनाऊंगा मैं

सुना है मानव का हृदय बहुत स्वादिष्ट होता होता है। जिस हृदय में प्रभु श्री राम का वास हो उसको पाना तो

दूर तुम उसके निकट भी नहीं पहुंच सकोगे वीरभद्र। [संगीत] श्री [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत]

महाबली महा योद्धा हो तुम हनुमान किंतु मुझसे टकरा कर बहुत बड़ी भूल की है तुमने भक्त की भक्ति और धर्म की शक्ति भूल नहीं

हो सकती वीरभद्र [संगीत] तुम्हारे प्रत्येक अस्त्र का सामना करूंगा मैं वीरभद्र किंतु प्रभु श्री राम के कार्य को मैं

अवश्य पूर्ण करूंगा। इस भ्रम में मत रहो हनुमान। लो सहो मेरा प्रहार। [संगीत] [संगीत]

दो महायोद्धाओं के मध्य ऐसा भीषण युद्ध कभी किसी ने ना देखा होगा। महादेवराज साहस बल और क्षमता में एक समान ही [संगीत]

प्रतीत हो रहे हैं दोनों। सत्य दोनों ही रुद्र के अंश किंतु इस युद्ध का महाविनाशक परिणाम की चिंता सता रही है मुझे। [संगीत]

तुम में मुझे प्रभु के भतीजे का वध दिखाई दे रहा है। जिसे मैं मसल के रख दूंगा। तुम

में मुझे मात्र एक शत्रु दिखाई दे रहा है। वो शत्रु जिसने महादेव की शक्ति को ललकारा है। तुम्हें तो अवश्य पराजित करूंगा मैं

कवर से। एक भीषण युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। युद्ध भक्त और भगवान के मध्य एक प्रचंड रण। हम्

यदि नंदी और वीरभद्र दोनों ही हनुमान को पराजित करने में असमर्थ रहे तो दुर्भाग्यवश मैं उससे युद्ध करने के लिए

विवश हो जाऊंगा। मेरी क्रोधा अग्नि भस्म करेगी तुम्हें वीरभद्र जिसका जन्म ही महादेव की क्रोधा अग्नि से हुआ है उसे

तुम्हारा क्रोध क्या भस्म करेगा हनुमान हनुमान की अपार शक्ति को खंडित करना ही होगा। प्रभु की शक्ति किसी से पराजित नहीं हो सकती।

तीव्र गति से वार करूंगा हनुमान पर। इतनी गति का संचार कर प्रहार करूंगा हनुमान पर कि वो अपना बचाव ना कर सके। [संगीत] या

हम [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] नंदी जी बड़े आगे हैं। तीव्र गति से [संगीत]

भक्त नंदी शिव गामी सबहु शंकर गण बलशाली [संगीत]

जन्म सम्मुख श्री त्रिलोचन

संकट पाए संकट मोचन [संगीत] गाथा बाबली की लीला राम जय जय जय [संगीत] रघुनंदन राम जय

जय जय और प्रभु महादेव के इन दोनों महायोद्धाओं के प्रकोप से कोई भी कोई भी हनुमान की रक्षा नहीं कर

सकता। अब तुम्हारी पराजय निश्चित ही है तो व्यर्थ में युद्ध क्यों कर रहे हो हनुमान?

अश्वमेघ यज्ञ का अश्व तो तुम खो चुके हो। और तुम्हारी सेना के वो दो महायोद्धा फूल धूसित हो चुके हैं।

तुम्हारा वो राजकुमार पुष्हत हो गया है। और तुम्हारा राजकुमार शत्रुघ्न

रणभूमि में आहत होकर मूर्छित पड़ा है। हर हर महादेव। [संगीत] हनुमान

ठीक तुम भी अपने दोनों दोनों महान योद्धाओं के समान दयनीय अवस्था में होगी। अपना शीश इसके हाथों में नहीं आने दूंगा

मैं। अपनी पराजय स्वीकार कर लो हनुमान। टेक दो घुटने।

मेरे महादेव के महा रुद्र रूप में वीरभद्र तुम्हारे समक्ष काल बनकर खड़े हैं हनुमान।

अपने उद्देश्य में तो असफल ही हो चुके हो तुम हनुमान। इसलिए वैसे भी तुम्हारे जीवित रहने का कोई भी कारण शेष नहीं है।

[संगीत] यही सही अवसर है हनुमान पर घातक वार करने का। [संगीत] [संगीत]

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