Secret of energy osho in Hindi | ऊर्जा का रहस्य ओशो #osho
By Mahoraga can you see it
Summary
Topics Covered
- ऊर्जा अतिरेक ही ब्रह्म ज्ञान है
- ऊर्जा ही आनंद है
- विराट ऊर्जा से परमात्मा संयुक्त
- इंद्रियां ऊर्जा गवाने का साधन
- आंख से 80% ऊर्जा व्यय
Full Transcript
ऊर्जा इकट्ठी ना हो तो तू कैसे ब्रह्म को जानेगा ब्रह्म को जानने के लिए ऊर्जा चाहिए ऐसी
ऊर्जा कि ऊपर से बह उठे अतिरेक चाहिए ऊर्जा के अतिरेक को बल कहा है छंद को उपनिषद
ऊर्जा चाहिए कि तुम संभाल ना सको तुम्हारे ऊपर से बहने लगे इतनी ही ऊर्जा हो तो ही सत्य को जाना जा सकता
है निर्भर सत्य को नहीं जान सकते तुमने कभी सुना ना होगा कि कोई नपुंसक और ब्रह्म ज्ञान को उपलब्ध हुआ हो
वीर्य वान ऊर्जा से भरे हुए लोग वृक्ष पर फूल कब खिलते जब वृक्ष के
पास इतनी ऊर्जा होती कि अब उमंग में लुटा सकता है तब फूल खिलते
हैं अगर वृक्ष को ठीक खाद ना मिले ठीक जल ना मिले रोशनी ना मिले फूल ना आएंगे
फूल तो विलास है वैभव है ऐश्वर्य है और इसलिए मुझे ईश्वर शब्द प्यारा है ईश्वर शब्द ऐश्वर्य से ही बना
है ईश्वर को ही वही लोग जान पाते हैं जिनके भीतर इतनी ऊर्जा होती कि
जैसे वृक्षों की ऊर्जा फूल बन जाती ऊर्जा जब न्यूनतम होगी तो फूल तो दूर पत्ते भी मुश्किल से पैदा
होंगे फूल तो बहुत दूर पत्ते भी कुमला कुमला होंगे ऊर्जा अतिरेक होनी चाहिए पश्चिम के बहुत बड़े रहस्यवादी कभी
विलियम ब्लैक का वचन महत्त्वपूर्ण उपनिषद के सूत्रों जैसा है विलियम ब्लैक आदमी था भी कि उसे कवि नहीं ऋषि ही कहना
चाहिए उसका सूत्र है एनर्जी इज डिलाइट ऊर्जा ही आनंद
है पते की बात कही ऊर्जा ही आनंद है ऊर्जा की कमी ही दुख
है ऊर्जा की दीनता और क्षीणता ही पीड़ा है नरक है क्योंकि फूल खिलते
नहीं सुगंध ती नहीं जैसे दिए में तेल चुक जाए तो बाती बुझ
जाए दिए में तेल चाहिए बाती चाहिए तो ज्योति जले और जितना तेल हो उतनी ही प्रगाढ़ता से ज्योति
चले और तुमने खूबी की बात देखी हवा आती अंधड़ आता छोटे मोटे दिए बुझ जाते जंगल में लगी आग और भी धू धू करके जल
उठती छोटे दिए बुझ जाते हैं हवा का झोंका आया कि गए लेकिन बड़ी आग और बड़ी हो
जाती तुम्हारे भीतर ऊर्जा हो तो परमात्मा की ऊर्जा भी तुम्हारी ऊर्जा में संयुक्त हो
जाती तुम्हारे जीवन में यूं आग लग जाती जैसे जंगल में आग लगी हो छोटा मोटा दिया हो तो जरा सा हवा का झोका और उसे बुझा
जाता है इसे स्मरण रखना क्षुद्र ऊर्जा से नहीं चलेगा विराट ऊर्जा
चाहिए आकाश की यात्रा पर निकले हो धन तो चाहिए यही चाहिए पंखों में बल
चाहिए इसलिए छांदोग्य ठीक कहता है बलमवा विज्ञाना भुवा विज्ञान से बल श्रेष्ठ क्या करोगे जान के
गणित भूगोल इतिहास क्या करोगे जानकर भौतिकी रसायन
इससे ज्यादा श्रेष्ठ है अपनी जीवन ऊर्जा को संग्रहित करना जीवन ऊर्जा को ऐसे संग्रहित करना कि
तुम एक सरोवर हो जाओ लबालब भरे हुए तुम में कोई छिद्र ना हो जिससे ऊर्जा बहे
ना तुम्हारा घड़ा जब पूरा भरा हो ऐश्वर्य से भरा हो तो ईश्वर को जानने की क्षमता है मेरी बात लोगों को अखती है क्योंकि लोग
समझते नहीं लेकिन मैं तुमसे फिर दोहरा के कहना चाहता हूं कि ईश्वर को जानना इस जगत में सबसे बड़ा विलास है यह धन का विलास कुछ भी नहीं यह पद का
विलास कुछ भी नहीं ईश्वर को जानना सबसे बड़ा विलास है क्योंकि वह परम श्वर की
अनुभूति और उस परम ऐश्वर्य की अनुभूति के लिए पहले तुम्हें ऊर्जा को बचाना होगा संग्रहित करना होगा
और तुम व्यर्थ गमा रहे हो तुम्हारी 99 प्रतित ऊर्जा कचरे घर में जा
रही फूल उगे तो कैसे उगे ज्योति जगे तो कैसे जगे
नृत हो तो कहां से हो थके मान दे तुम क्या नाचोगे टूटे फूटे तुम क्या नाचोगे और जब नाच नहीं पाते तो बहाने खोजते हो कहते हो
आंगन टेढ़ नाच ना आवे आंगन टेढ़ा अब आंगन के टेढ़े होने से कुछ नाचने
में बाधा पड़ सकती अरे जिसको नाचना है आंगन टेढ़ हो कि सीधा हो
नाचेगा अगर नाच है तो आंगन को ही सीधा होना पड़ेगा नाचने वाले की ऊर्जा आंगन को सीधा कर देगी आंगन का तिरछा होना कहीं
नाचने वाले को रोक सकता है लेकिन क्या क्या बहाने हम खोजते ऊर्जा की कमी
है पूछते फिरते हैं कि जीवन में दुख क्यों है दुख का कारण सिर्फ इतना
है कि सुख होता है ऊर्जा के अतिरेक से महा अतिरेक से आनंद होता है और तुम्हारे जीवन
में बूंद बूंद कर सब चुका जा रहा है और ख्याल रखना बूंद बूंद गिरता है लेकिन गागर
नहीं सागर भी खाली हो जाता है बूंद-बूंद गिरता रहे तुमसे अलग होता रहे बूंद बूंद टपकती रहे तो गागर तो खाली होगी ही सागर भी खाली हो जाता
है और तुम किसकिस तरह से अपनी ऊर्जा को व्यर्थ कर रहे हो तुम्हारे पास जितनी इंद्रियां हैं उन सबसे तुम दो तरह के काम ले सकते हो एक तो
ऊर्जा को भीतर ले जाने का और दूसरा ऊर्जा को बाहर फेंकने का यही अंतर्मुखी और बहिर्मुखी का भेद है
बहिर्मुखी मूल है दरवाजा तो एक ही होता है उसी दरवाजे पर एक तरफ लिखा होता है
प्रवेश एंट्रेंस उसी दरवाजे पर दूसरी तरफ लिखा होता है एग्जिट उसी से तुम भीतर आते उसी से बाहर
जाते कोई दो दरवाजों की जरूरत नहीं होती एक ही दरवाजा काफी होता है तुम्हारी आंख
से तुम्हारे देखने की ऊर्जा बाहर भी जाती और भीतर भी आती जो समझदार है वह आंख से ऊर्जा को इकट्ठा करता है और जो नासमझ है वह गवाता
है जो ना समझ है आंख उसके लिए छेद हो जाती और जो समझदार है आंख उसके लिए संग्राहक हो जाती
है बुद्ध ने कहा है राह पर चलो तो चार कदम से ज्यादा मत
देखना क्यों क्योंकि ज्यादा की क्या जरूरत है चलना है तो चार कदम देखना पर्याप्त है जब चार कदम चल लोगे तो चार कदम आगे दिखाई
पड़ने लगेगा चार कदम देखते देखते तो हजारों मील की यात्रा पूरी हो जाएगी लेकिन
तुम चार कदम छोड़ के सब देखते हो वो चार कदम भर नहीं देखते जो चलने दीवाल पर लिखा है डोंगले का बाल
अमृत पढ़ो इधर फिल्म क्या पोस्टर लगा है पढ़ो इधर कोई खोचे वाला खड़ा है उधर कोई स्त्री गुजर
गई इधर किसी छैल छब लेने कोई फिल्म धुन छेड़ दी क्या क्या हो रहा है चारों तरफ तुम करो भी क्या
आंखें भागी फिर रही सब तरफ भटक रही वैज्ञानिक कहते हैं कि आंख से मनुष्य
की 80 प्र ऊर्जा बाहर जाती है फिर कान भी वही कर रहे हैं तुम क्या सुनते हो गलत हो तो जल्दी सुनते हो ठीक हो तो
सुनते ही नहीं अरे ठीक में क्या रखा है ठीक में कोई समाचार होता है गलत में समाचार होता है किसकी स्त्री किसके साथ भाग
गई इसमें कुछ समाचार होता है मजा आ जाता है पास सड़क आते हैं लोग जब ऐसी बातें
होने लगती गुफ्तगू होने लगती फुस फुसा के बातें करने लगते और जब दो आदमी फुसा के बातें करें तो जितने आदमी
सब सुनने लगते क्योंकि जब बात फुस फुसा के हो रही तो जरफ गहरी हो रही है कोई बात गहरी हो
रही है जिस बात को सबको सुनाना हो फुस फुसा के कहना किसी के कान में कह देना और उससे यह
भी कह देना कि भैया किसी को बताना मत कि कसम है तुम्हे मेरी अगर किसी को बताओ बस वह बात पूरे गांव में पहुंच जाएगी
वह हर एक के कान में पहुंच जाएगी कचरा सुन रहे हो कचरा देख रहे हो कचरा पढ़ रहे
हो और फिर कहते हो दुख क्यों है कचरा खा रहे हो कचरा पी रहे हो तुमसे शुद्ध जल ना पिया जाए कोका कोला
चाहिए अभ कभी सोचोगे नहीं यह कोका कोला है क्या इसमें है
क्या मगर सारी दुनिया पी रही और अखबारों में बड़े-बड़े पोस्टर छपे हुए अखबार पढ़ रहे हो लोग कोका कोला पी रहे हैं लोग अखबार पढ़ रहे हैं फिल्में
देख रहे हैं रेडियो पर सुन रहे हैं और सब जगह एक ही चर्चा है कि अगर जिंदगी का मजा लेना
है तो कोका कोला के बिना नहीं लिवा लिटिल हार्ट सिप्पा गोल्ड
[हंसी] स्पाट नहीं तो जिंदगी बेकार गई किसी काम ना आई लोग क्या खाते हैं क्या पीते हैं क्या
सुनते हैं क्या देखते हैं अगर तुम जरा हिसाब रखो तो तुम्हें साफ दिखाई पड़ेगा तुम क्यों दुखी हो जो सुनने योग्य हो अगर वही सुना
जाए और जो देखने योग्य अगर वही देखा जाए तो तुम्हारे जीवन की 90 प्र ऊर्जा तो अपने आप सुरक्षित हो जाएगी अपने
आप तुम्हारे घर में कोई कचरा डाले तो तुम इंकार करोगे लेकिन तुम्हारी खोपड़ी में कोई कचरा डाले तुम कहते हो आइए विराज पधारिए बड़ी
कृपा की ऐसे ही आया करते रहिए कैसी कैसी प्यारी खबरें ले आए हैं धन्य भाग क्या आप पधारे कृत कृत हो गए कृतार्थ
हुए फिल्में देखने जा रहे हो जिनम सिवाय हंगामे के और कुछ भी नहीं भी खर्च करोगे टिकट खरीदने धक्के मुक्के भी खाओगे
पटोटे हुए भी मगर लोगों ने तही कर रखा है 100 स जूते खाए तमाशा घुस के देख और मजा यह
है कि जब तुम 100 स जूते खा रहे तो तमाशा दूसरे देख रहे हैं और तमाशा ही क्या है जब तुम पर जूते पड़ रहे हैं वो तमाशा देख रहे जब उन पर
जूते पड़ रहे तुम देख और तमाशा ही क्या है छंद जिस बल की बात कर रहा है वह वही
ऊर्जा है जिसको बलक ने कहा अतिरेक ऊर्जा का आनंद है जिसको बुद्ध ने कहा ऊर्जावान
बनो शक्ति को भीतर सरोवर बनने दो य खाली घड़ा शोभा नहीं
देता इस खाड़ी गले को लेकर तुम परमात्मा के द्वार पर भी जाओगे तो क्या मुंह दिखाओगे कम से कम घड़ा तो भरा
हो इसलिए हमारे देश में पूर्ण कलश स्वागत का प्रतीक बना भरा हुआ
कलश स्वागत का प्रतीक हो गया लेकिन यह भीतर के भरे कलश की ही सूचना है
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