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Temple on OSR Land? Supreme Court Stops Demolition as Law and Faith Collide | Legal Analysis

By KanoonPlus | Adv Ravi Kumar

Summary

Topics Covered

  • भले इरादे हों, बिना अनुमति निर्माण कानूनन अवैध
  • बिना सुनवाई के आदेश से न्याय का मूल सिद्धांत टूटता है
  • जब कोई नुकसान नहीं, तो राज्य का हस्तक्षेप जबरदस्ती है

Full Transcript

नमस्कार दोस्तों आज हम लोग चर्चा कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट में चेन्नई मद्रास हाई कोर्ट से आए हुए एक केस की और इस केस पर चर्चा करने से पहले मैं

आपको बता दूं कि हम चर्चा कर रहे हैं लैंड जो अलॉटेड होता है किसी हाउसिंग सोसाइटी को उस पर अब बहुत बार होता है मित्रों कि एक लैंड एलोकेट हुआ आपके पास

और लैंड एलोकेट होने के बाद सोसाइटी बन गई और सोसाइटी में रहने वाले लोग रूल्स रेगुलेशन के हिसाब से अपने सारे कार्यक्रम करते हैं और अस्यूम करते हैं कि जो सोसाइटी है वो उनकी हो गई और उनके जो मन में आएगा वो करेंगे मित्रों आज हम बात कर

रहे हैं एक मदुरई से आए हुए केस की जिसमें हाउसिंग सोसाइटी इनवॉल्व है और उस हाउसिंग सोसाइटी में एक टेंपल बना दिया गया है और

जो ऑथॉरिटीज हैं तमिलनाडु टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट के तहत उन्होंने कहा कि यह जो टेंपल आपने अपने घर में जो कंपाउंड में बनाया है वो इललीगल है एंड इसका डिमोलिशन जरूरी है इस बात पर वो पहुंच गए कोर्ट में

सुनवाई हाई कोर्ट को करना चाहिए था लेकिन वहां पर सुनवाई नहीं किया उन्होंने और सीधे आर्डर पास कर दिया कि विदिन फोर वीक्स यह जो विस्तारा वेलफेयर एसोसिएशन का केस है उसको

मंदिर को तोड़ने का आर्डर दे दिया अब इसको ले आर्डर देने से पहले इंटरेस्टिंग बात यह है कि विस्तारा वेलफेयर एसोसिएशन को कोई भी सुनवाई करने का मौका नहीं मिला

अपनी बातों को रखने का मौका नहीं मिला तो इस बात को लेके दे गॉट एग्रीव्ड अब सुप्रीम कोर्ट में मामला आ गया है अब सुप्रीम कोर्ट में मामला आने के बाद क्या हो रहा है कि जो ओपन स्पेस रिजर्व स्पेस

जिसको आप बोलते हैं किसी भी घर में होता है वो नॉर्मल रिजर्व ही होता है फॉर कन्वीनियंस वहां के लोगों के कन्वीनियंस के लिए अब अगर हम स्ट्रिक्टली बाय रूल्स एंड रेगुलेशंस जाएं तो

आपको समझ में आएगा कि कुछ नूड रूल्स है जो कि डीटीसीपी इसको बोलते हैं उसके तहत भी ओपन एरिया स्पेस कंपलसरी है बिल्डिंग लेकिन अगर आप उस स्पेस में कुछ अनअथराइज कंस्ट्रक्शन करते हो या कुछ करना चाहते हो तो परमिशन लेना

अनिवार्य है एंड दैट दैट कम्स अंडर तमिलनाडु टाउन कंट्री प्लानिंग एक्ट बट बट अगर ये आपने परमिशन नहीं लिया आपने बना दिया तो सुप्रीम कोर्ट ने उस आर्डर पर स्टे तो लगा दिया है लेकिन ये स्टे लगने के बाद हम ये अस्यूम नहीं कर

सकते कि वो मंदिर जो है वो नहीं टूटेगा क्योंकि ओवर थ्रू आउट द कंट्री इनफ ये रूल है कि जो हाउसिंग सोसाइटी है या जहां जिस पपस के लिए लैंड एलोकेट किया गया है आप उसी पर्पस के लिए उस लैंड को यूज करेंगे लेकिन अगर आप उसके अलावा कोई और पपस के

लिए यूज़ करना चाहते हैं तो ड्यू परमिशन लेंगे ऑथॉरिटीज से हो सकता है उसके लिए कुछ एक्स्ट्रा टैक्स पे करना पड़े कुछ एक्स्ट्रा फीस देनी पड़े या हो सकता है कि वो फिजिबल ना हो तो आपको परमिशन ना भी मिले लेकिन बिना परमिशन लिए हुए आपने एक छोटा सा टेंपल बना दिया कंपाउंड में

इरिस्पेक्टिव ऑफ कम्युनिटी वेलफेयर एक्टिविटी इन माइंड इट विल स्टिल बी कंसीडर्ड एस इललीगल इफ यू गो बाय लॉ नाउ सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर स्टे लगाया है कि हाई कोर्ट ने अपोजिट

पार्टी को या जो एग्रीव्ड पार्टी थी उसको सुनवाई का मौका ही नहीं दिया मतलब हाई कोर्ट ने पहले ही माइंड मेकअप कर रखा था कि इस केस में कोई दम नहीं है और एस इट हैस वलेटेड रूल्स रेगुलेशंस

और तमिलनाडु टाइम टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट के तहत वो काम नहीं किया गया है हाई कोर्ट ने बिना सुने हुए उसको डिमोलेशन का आर्डर दे दिया सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को एडमिट किया है

कि बिना एग्रीव्ड पार्टी को सुने हुए जजमेंट देना नेचुरल प्रोसेस ऑफ जस्टिस जो है या हम उसको बोल सकते हैं ये प्रोसेस ऑफ जस्टिस में लकना है कि आपने उसको अलऊ नहीं किया

उस उसकी बात नहीं सुनी विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए था हाई कोर्ट अब सिर्फ इसी पॉइंट पर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को एडमिट किया है और सुनवाई का मौका दिया है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सुप्रीम

कोर्ट ने कह दिया कि आप कंपाउंड में टेंपल बनाइए मित्रों प्रकली देखा गया है भारतवर्ष में कि जब हाउसिंग सोसाइटी बनती है प्लानिंग के तहत बनती है रूल्स रेगुलेशन को फॉलो करके बनती है बहुत बार तो हाउसिंग सोसाइटी बिना रूल्स रेगुलेशन सिर्फ परमिशन लेके जो मन में आया सो बना दिया जाता है एंड

फाइनली जो रेजिडेंट्स है दे कम टू कोर्ट कि भाई जो बिल्डर है उसने गड़बड़ी कर रखी है और उसने जो एफआर एरिया है या जो एरिया प्रॉमिस किया था या जो पार्किंग लॉट है वो इललीगली बेच रहा है तो अब फंडामेंटल यह है कि इन प्रैक्टिस भारत में

इललीगल काम धरल्य से होता है हाउसिंग सोसाइटी के अंदर और यहां पर पॉइंट इस बात का है कि सोसाइटी के लोगों ने कलेक्टिवली डिसाइड किया कि भाई यहां पे एक छोटा सा टेंपल होना चाहिए एंड वो वेलफेयर के लिए है वो रिलीजियस एक्टिविटी के लिए है कल्चरल एक्टिविटी के लिए है पायस एक्टिविटी के

लिए है और वो उन्हीं के कंपाउंड के अंदर में है यू नो ऑल दी फैक्टर्स आर इमोशनल फैक्टर्स बट सुप्रीम कोर्ट नेकि इसको एक्सेप्ट किया है सुनवाई करने के लिए तो हो सकता है ऑलदो अभी डिमोलिशन का रोक दिया गया है उसको फोर

वीक्स के लिए अभी मतलब टिल नेक्स्ट ईयर ही लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या राय विचार करता है ये आने वाले समय में पूरे भारत के लिए एक प्रेसिडेंट तैयार होगा कि भाई आप सोसाइटी के अंदर में कोई मंदिर या छोटा सा

कोई रूम या क्लब बना सकते हैं क्या प्रकली देखा जाए तो भारत में ऑलमोस्ट हर सोसाइटी में कोई ना कोई पोस्ट कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी होता है दैट टू विदाउट सीकिंग एनी अप्रूवल फ्रॉम द अथॉरिटीज क्योंकि ऐसा होता है कि अथॉरिटीज के पास

अगर जाएंगे अप्रूवल लेने के लिए तो ऑथॉरिटीज के पास इतने पेपर वर्क होते हैं इतने ही फैन बट्स होती हैं कि लोग जाना नहीं चाहते तो अब सुप्रीम कोर्ट हो सकता है इस बात को संज्ञान में ले कि क्या इन लोगों ने ऑथॉरिटीज को अप्रोच किया था या ऑथॉरिटीज ने इस पर क्या कुछ पहले कोई कारवाई की थी

या ऑथॉरिटीज ने इग्नोर किया था कंस्ट्रक्शन करने से पहले तो ये सब मामला भी हो सकता है सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में आए और सुप्रीम कोर्ट इन बातों का भी बहुत अच्छी तरीके से जजमेंट देने से पहले संज्ञान लेगा

और ऑथॉरिटीज के तरफ से अगर कोई चूक हुई है तो मुझे लगता है कि मंदिर बरकरार रहेगा बट अथॉरिटी के तरफ से अगर यह चूक नहीं हुई है तो सुप्रीम कोर्ट डायरेक्शन दे सकता है स्टेट को कि भाई आप इस तरह के यूनिलटरल या आर्बिटरी जो क्लाउस बना रखे हैं उस पर

संशोधन लाइए ताकि जरूरत पड़ने पे सोसाइटी के लोग अगर चाहे तो ईली उस पे अपना एक कॉमन गुड के लिए कुछ काम कर सके वि सर्टेनली वि गिविंग सम ड्यू फीस एट्रा क्योंकि यह एक कलेक्टिव ह्यूमन राइट की बात आ जाती है कि भाई आपने

घर बना दिया सब कुछ बना दिया और सोसाइटी में नीड है कि भाई एक छोटा सा कॉर्नर हो टेंपल का तो आप उसको बनाने नहीं दे रहे और अगर वो बनाने की कोशिश कर रहा है आपको सब कुछ दे रहा है पैसा भी देने के लिए तैयार है सोसाइटी का और देयर इज नो हार्म टू इट मतलब ये से कि कोई चीज ऑब्स्ट्रक्ट नहीं हो रहा कोई सिक्योरिटी प्रॉब्लम नहीं हो

रही कोई मूवमेंट्स की प्रॉब्लम नहीं हो रही है उसके बाद भी अगर आप बनाने का नहीं दे रहे हैं तो फिर सुप्रीम कोर्ट बोलेगा क्यों इसका मतलब आप जबरदस्ती कर रहे हो अदर वाइज अगर कोई ऑब्ट्रश आ रही हो या कोई ऑब्जेक्शन आ रही हो तब बात दूसरी हो जाती

है बट व्हेन देयर इज नथिंग ऑफ़ दैट सॉ देन हु द हेल स्टेट इज टू स्टॉप समबडी फ्रॉम डूइंग देर एक्टिविटीज मित्रों आपका इसके बारे में क्या राय विचार है कमेंट बॉक्स में जरूर दें और अभी तक हमारे चैनल कानूनप्लस को अगर सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर ले ताकि हमारे और आपके बीच में संपर्क बना

रहे मित्रों आपसे अलविदा लेते हुए मैं आपसे फिर से गुजारिश करूंगा कि कानून प्लस एक बहुत ही सेल्फ इनिशिएटेड चैनल है और बहुत मेहनत से हम लोगों ने इसको धीरे-धीरे तैयार किया है आपके सहयोग की कामना करता हूं आपने समय दिया उसके लिए मित्रों बहुत-बहुत धन्यवाद नमस्कार

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