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महिषासुर वध की अद्भुत कथा | The Story of Mahisasur Vadh | मां दुर्गा Vs महिषासुर | Maa Durga Story |

By KATHA SAGAR

Summary

Topics Covered

  • वरदान ही बना विनाश का कारण
  • गुरु की चेतावनी और अहंकार का अंत
  • स्त्री शक्ति से प्रकट हुई माँ दुर्गा
  • एक नारी ने रोकी अजेय असुर सेना

Full Transcript

[संगीत] [संगीत] सुंदरी महाराज महिषासुर की आज्ञा है तुम्हें बंदी बनाकर उनके पास ले जाऊं क्योंकि तुमने उनके राक्षस दूत का वध किया है।

सुंदरी महिषासुर की रानी बनो और उसके साथ राज सुख भोगो। जय जय महस

जिसके जन्म से पहले ही तीनों लोक कांप उठे वो अभी मां के गर्भ में था और उसी गर्भ से

जन्म लेने वाला था। काल महाविनाश सदियों पहले असुर राजरंभ देवताओं से भीषण युद्ध के बाद अपनी शक्ति बढ़ाने पाताल लोक

चला गया। अपनी शापित पत्नी श्यामला के साथ जो आधी भैंस थी और उसी के गर्भ में पल रहा था वो असुर जिसके जन्म के साथ ही सृष्टि

पर विनाश के बादल छा जाने थे जो देवताओं को दास बना देता और समस्त मानवता को मिटाकर तीनों लोकों पर अकेला राज करता।

देवता इस खतरे से अनजान नहीं थे। इसे जड़ से मिटाने के लिए उन्होंने भैंसों की विशाल सेना भेज दी। रंभ [संगीत] ने जान की

बाजी लगाकर श्यामला और उसके गर्भ को बचाने की पूरी कोशिश की। पर बचाते-बचाते वो मारा गया। पति को चिता में जलते देख श्यामला

सती हो गई। [संगीत] राक्षस सैनिकों को लगा राक्षस कुल का अंत हो गया। [संगीत] लेकिन गर्भ में पल रहा वो असुर कोई साधारण

असुर नहीं था। वो था महषासुर। महषासुर महषासुर

समय बीता और महिषासुर जब बड़ा हुआ तो एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और शक्तिशाली असुर बन चुका था। उसका एक ही सपना था अमर होना।

इसी के लिए उसने एक पैर पर खड़े होकर हजारों वर्षों तक भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। दिन बीते, महीने बीते, हजारों

साल बीत गए। आखिरकार उसकी कठोर भक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा।

प्रभु मुझे अमरता का वरदान दीजिए। जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है। दूसरा वर मांगो तो कोई देवता, दानव या

पुरुष, मनुष्य मुझे कभी ना मार सके। यदि मेरी मृत्यु हो तो केवल स्त्री के हाथों हो। भला वो मुझे कैसे मार पाएगी?

तथास्तु। वरदान मिलते ही महिषासुर का असली रूप सामने आने लगा। अत्यंत क्रूर, अहंकारी और अत्याचारी। अब उसे ना किसी का डर था, ना

किसी की परवाह। धीरे-धीरे उसने अपनी असुर सेना खड़ी करनी शुरू की। वो इतना बलशाली था कि देखते ही देखते बहुत कम समय में उसने पाताल लोक के सभी असुरों, दैत्यों

[संगीत] और राक्षसों को अपने झंडे तले इकट्ठा कर लिया। एक ऐसी विशाल सेना जिसका अंदाजा स्वर्ग में बैठे देवताओं को भी नहीं था। आज से हर असुर सेना मेरे धजन के नीचे

लड़ेगी। [संगीत] जो साथ आएगा मेरे साम्राहन का हिस्सा बनेगा। और जो मार्ग रोकेगा उसका यही अंत होगा। पाताल उसके कदमों में झुक चुका था। अब

उसकी नजर धरती पर थी। उसने धरती लोक पर ऐसा हाहाकार मचाया कि चारों ओर त्राहि त्राहि [संगीत] मच गई। बड़े-बड़े ऋषि मुनियों का तप, उनकी सिद्धियां और

शक्तियां भी महिषासुर के सामने बेअसर पड़ने लगी। जो धरती कभी यज्ञों और मंत्रों से गूंजती थी, वहां अब सिर्फ असुरों का आतंक राज कर रहा था। उसका अत्याचार

[संगीत] इतना भयानक था कि उसने तीनों लोकों, स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया। सृष्टि का हर

नियम उसके घमंड के आगे कांप रहा था और यही वो मोड़ था जहां से महिषासुर खुद को इस ब्रह्मांड का एक छत्र स्वामी समझने लगा। [चीखने की आवाज़] [संगीत]

हमने हमने आपकी शक्ति देख ली है महिषासुर आज से हमारी सनाइए हमारे राज और हमारे प्रण सब आपके आधीन है

महषासुर की जय महषा की जय महषा की जय महाराज की जय

महषासुर की जय आज तुमने मुझे अपना राजा स्वीकार स्वीकार किया है। अब यह शक्ति केवल एक राज्य की सीमा में नहीं रुकेगी। अपनी सेनाएं तैयार

करो। जो राज्य हमारे सामने झुकेगा उसे मेरे साम्राज्य में स्थान मिलेगा। जो युद्ध

चुनेगा उसे रणभूमि में उत्तर मिलेगा। स्वर्ग की बारी आएगी। ना जाने क्यों आज स्वर्ग की हवाएं भी

अशांत लग रही हैं। मुझे आभास हो रहा है कुछ अनस्त होने वाला है। देवराज महिषासुर ने पृथ्वी लोक और पाताल

लोक पर अधिकार कर लिया है। उसकी सेना अब स्वर्ग की ओर बढ़ने की तैयारी कर रही है। ब्रह्मा जी का वरदान मिलने के बाद उसका अहंकार और बढ़ गया है। वह किसी की चेतावनी

सुनने को तैयार नहीं है। चिक्शुर इंद्र के पास दूत भेजो। कहो स्वर्ग छोड़कर चला जाए या महिषासुर की

आधीता स्वीकार कर और अगर युद्ध चाहता है तो अपना वज्र लेकर सामने आए। जैसी आज्ञा महाराज आपका संदेश देवराज

इंद्र तक शब्दश पहुंचेगा। विाल महाराज के सामने उपस्थित हो। महिषासुर की जय।

आज्ञा दीजिए महाराज। मेरी शक्ति का एक अंश तुम्हारे साथ रहेगा। इंद्र के सामने बिना भय के खड़े होना। उससे कहना स्वर्ग छोड़ दे। मेरी अधीनता

स्वीकार करें या युद्ध के लिए तैयार रहें। [नाक से की जाने वाली आवाज़] आपका प्रत्येक शब्द इंद्र तक पहुंचेगा महाराज। तो हमें भी अपनी सेनाएं तैयार रखनी होंगी।

जब तक मैं इस सिंहासन पर हूं महिषासुर बिना युद्ध किए स्वर्ग पर अधिकार नहीं कर सकता। देवराज इंद्र मैं महाराज महिषासुर का दूत

हूं। उनका संदेश है स्वर्ग छोड़कर चले जाओ या उनकी अधीनता स्वीकार करो। यदि दोनों स्वीकार नहीं तो अपना वज्र लेकर युद्ध में आओ।

तुम दूत हो इसलिए यहां से सुरक्षित लौटोगे। महिषासुर से कहना इंद्र अपना सिंहासन किसी धमकी से नहीं छोड़ता। यदि

उसे युद्ध चाहिए तो स्वयं आए। मैं वज्र लेकर उसकी प्रतीक्षा करूंगा। महाराज महिषासुर की जय महाराज पूरी सेना आपके एक आदेश पर स्वर्ग

की ओर चल पड़ेगी। वैसे भी इंद्र ने आपको युद्ध के लिए ललकारा है। इंद्र के पास दो ही मार्ग था। मेरा अधिपत्य स्वीकार करें या मेरे सामने युद्ध भूमि में आए। महेश

स्वर्ग पर चढ़ाई संकटों से भरा कार्य है। विजय का विश्वास रखो पर अपने वरदान को अमृत्व मत समझ बैठो। ब्रह्मा से तुमने देव, दानव और पुरुष,

मनुष्य के हाथों स्त्री से अवध्य होने का वरदान तुमने स्वयं स्त्री को अपनी मृत्यु का कारण स्वीकार किया था। इसे भूलना मत। गुरुदेव, इस सेना के सामने इंद्र नहीं

टिकेगा तो कोई स्त्री मेरा क्या बिगाड़ लेगी? यह सोच कर भी हंसी आती है।

लेगी? यह सोच कर भी हंसी आती है। चिकुर सेना को आहें बढ़ाओ। आज इंद्रलोक के द्वार

महिषासुर के लिए खुलेंगे। गुरु शुक्राचार्य ने उसे बार-बार समझाया। लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के अहंकार में अंधा हो चुका महिषासुर अपना फैसला नहीं

बदला। उसने स्वर्ग पर चढ़ाई का निश्चय कर लिया। इंद्र तुम्हारा बुलावा मिला इसलिए स्वयं चला आया। मेरे [संगीत] दूत से कहा था वज्र लेकर

प्रतीक्षा करोगे। अब मैं सामने हूं इंद्र। उठाओ अपना वज्र। अकेले मेरी सभा में आने का साहस कैसे किया है तुमने?

[चीखने की आवाज़] और फिर वो दिन आया महिषासुर की विशाल असुर सेना ने स्वर्ग पर आक्रमण बोल दिया। वरदान के घमंड [संगीत] में अंधे महिषासुर ने

पहले पृथ्वी लोक को रौदा और फिर अपनी मायावी सेना के साथ सीधे स्वर्ग लोक पर टूट पड़ा। एक भयंकर [संगीत] गर्जना के साथ स्वर्ग के विशाल द्वार चटक

कर टूट गए और मायावी असुर प्रलय की आंधी बनकर भीतर टूट पड़े। घुसते ही शुरू हुआ ऐसा नरसंहार जो स्वर्ग ने अपने युगों के

इतिहास [संगीत] में कभी नहीं देखा था। [संगीत] चारों ओर सिर्फ चीखें, धदधकती आग और बहता रक्त, अमरावती की सुनहरी धरती लाल पड़ने

लगी। देवताओं का बेरहमी से संहार होने लगा। पर देवता भी कहां कमजोर थे। कोई देवता अकेला 100-100 असुरों पर काल बनकर

टूट रहा था। लेकिन सामने खड़ा हर असुर भी कोई मामूली असुर नहीं था। कोई एक अकेला हजार देवताओं को चीरता चला जाता क्योंकि

उसकी रगरग में महिषासुर की दी हुई शक्ति दहक रही थी। हर टकराव के साथ पूरा स्वर्ग धर्रा उठता। स्वर्ग जल रहा था। हिल चुका

था। पर देवता पीछे हटने वालों में से नहीं थे। [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [चीखने की आवाज़] की जय [चीखने की आवाज़]

श्याम की देवराज इंद्र के नेतृत्व में छिड़ा यह महायुद्ध रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। एक ओर अग्निदेव अपनी प्रचंड ज्वालाओं से

असुरों को भस्म कर रहे थे। जहांजहां उनकी दहकती नजर पड़ती वहां पल भर में राख के ढेर लग जाते। दूसरी ओर चंद्रदेव अकेले

100-100 असुरों पर भारी पड़ रहे थे। अपनी शीतल शक्ति को संहार का अस्त्र बनाकर हर देवता अपनी आखिरी सांस तक अपने आखिरी

अस्त्र तक लड़ रहा था। लेकिन धीरे-धीरे एक कड़वी सच्चाई उभरने लगी। देवता हार रहे थे। उनकी कतारें

बिखरने लगी थी। एक-एक कर मोर्चे टूट रहे थे और विशाल रणभूमि धीरे-धीरे असुरों के कब्जे में जाती दिख रही थी।

वरुण देव सेना की महिषासुर की महिषासुर बहुत हुआ तेरा उत्पात अब अग्निदेव स्वयं तेरे अत्याचार का अंत

करेंगे। यह स्वर्ग अब मेरा है। अग्निदेव बचा सकते हो तो बचा लो। हताश और घायल देवता बचते-बचाते महादेव की

शरण में पहुंचे। हाथ जोड़े सहायता की गुहार लेकर। प्रभु शिव महिषासुर ने हमारी सेना को कुचल दिया और स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया है। प्रभु हमारे अस्त्र भी उसके सामने

नहीं टिके। बचे हुए देवता प्राण बचाकर इधर-उधर भटक रहे हैं। महिषासुर के महादेव ने इस संकट की गंभीरता को भांप

लिया और समाधान खोजने में लीन हो गए। में [संगीत] उधर कुछ देवता अपनी जान बचाकर भगवान नारायण के चरणों में जा गिरे। इस आशा में

कि अब सृष्टि को सिर्फ और सिर्फ कोई दिव्य शक्ति ही बचा सकती है। महिषासुर ने हमारी पूरी सेना परास्त कर दी। देवराज इंद्र भी उसके सामने नहीं टिक

पा रहे हैं। प्रभु हमारी रक्षा कीजिए। धैर्य रखो। महिषासुर का अंत उसी स्त्री शक्ति के हाथों होगा। और फिर आया युद्ध का

वो पल जब आमने-सामने खड़े थे दो महाबली। एक ओर तीनों लोकों का स्वामी देवराज इंद्र। दूसरी ओर वरदान के घमंड में चूर महिषासुर।

दोनों की मायावी शक्तियां टकराई तो पूरा आकाश दहल उठा। बिजली [संगीत] सी कौद, गर्जना और हर वार के साथ धरती आसमान कांप

[संगीत] उठे। पर यह टक्कर बराबरी की नहीं थी। महिषासुर के प्रचंड पराक्रम के सामने इंद्र एक पल भी नहीं टिक पा रहे थे।

उसका हर प्रहार पहाड़ की तरह भारी था और इंद्र की हर चाल उसके सामने बौनी पड़ रही थी। अपनी हार को आंखों के सामने देखकर

देवराज इंद्र का साहस डगमगा गया। अब वह लड़ नहीं बचकर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे। पर महिषासुर कहां छोड़ने वाला था? एक

शिकारी की तरह वो इंद्र पर हावी था। हर भागने के रास्ते [संगीत] को काटता हुआ हर कोशिश को नाकाम करता हुआ देवराज इंद्र

आज बेबस थे और महिषासुर का अहास पूरे स्वर्ग में गूंज रहा था। [संगीत] देवराज हमारी सेना बिठा चुकी है।

महिषासुर ने स्वर्ग पर आधार कर ली। उसकी सेना हमारा पीछा कर सकती है। हमें यहां से तुरंत निकलना होगा। [हांफने की आवाज़] हे प्रभु महिषासुर ने हमारी पूरी सेना को

परास्त कर दिया। स्वर्ग अब उसके अधिकार में है। हमारे अस्त्र उसके सामने नहीं टिक पा रहे। प्रभु वो स्वयं को अजय समझकर देवताओं का अपमान कर रहा है। यदि उसे अभी नहीं रोका गया तो वह तीनों लोकों पर

अधिकार कर लेगा। महिषासुर को मेरे ही वरदान का संरक्षण प्राप्त है। किसी देवता या पुरुष के हाथों उसका अंत संभव नहीं है।

हमें अपनी शक्तियां एकत्र करनी होंगी। चलो [संगीत] कैलाश चलते हैं। महादेव से सहायता मांगेंगे। [संगीत]

महाराज देवराज का सिंहासन अब आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। महषासुर की जय [चीखने की आवाज़] [कराहने की आवाज़] महादेव

मेरे वरदान से शक्तिशाली हुआ महिषासुर देवसेना को परासत कर स्वर्ग पर अधिकार कर चुका है।

प्रभु उसने हमारे योद्धाओं को कुचल दिया। महिषासुर को प्राप्त वरदान के कारण कोई पुरण उसका वध नहीं कर सकता। अब उसका अंत

केवल एक दिव्य नारी शक्ति ही कर सकती है। दिव्य नारी शक्ति। अब देवताओं के पास एक ही रास्ता बचा था क्योंकि महिषासुर के वरदान में ही छिपा था

उसका अंत। उसे सिर्फ और सिर्फ एक स्त्री मार सकती थी। इसलिए सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों और तेज को एक कर दिया।

और उस दिव्य तेज से प्रकट हुई परम नारी शक्ति [संगीत] आदि शक्ति मां दुर्गा। [संगीत] गिरी नंदिनी नंदित मेदिनी विश्व [संगीत]

विनोदिनी नंदिनुते गिरिवर विंध्य शिरोदिनी वासिनी [संगीत] विष्णु विलासिनी जिन

भगवती हेशिति कंठ कुटुंबिनी गूड़ी [संगीत] कुटुंबिनी भूर कृते जय [गाना गाने की आवाज़] जय हे महिषासुर

मर्दिनी रम्य वर्दिनी शैलस [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] महिषासुर तूने स्त्री को अपनी मृत्यु के

योग्य नहीं समझा था। अब उसी स्त्री के हाथों तेरा अंत होगा। देवी मेरे वरदान के कारण महिषासुर किसी पुरुष के हाथों नहीं मरेगा। अब उसका अंत

आपके हाथों ही संभव है। [संगीत] उसके अत्याचार से तीनों लोग पीड़ित हैं। देवी उनकी रक्षा कीजिए। अब महिषासुर का अंत कीजिए।

सोमती मुखर्शनी हर्षते त्रिभुवन पोषण शंकर दोषिनी कलमोनी

घोरते निरो नंदिनी नंदिनी विश्व विनोदिनी नंदिनु [संगीत]

[संगीत] जय जय हे महिषासुर मर्दिनी रम्य तपदिनी शैल सुनी [संगीत] [संगीत] हर्ष

त्रिभुवन शंकर दोषिनी कलमो ये कैसी गर्जन थी जिसकी दह से स्वर्ग हिला है उसे ढूंढ कर

मेरे सामने लाओ तुम दोनों कौन हो इस सिंह की गर्जना से पूरा स्वर्ग हिल गया। जिसे देखकर तुम दोनों कांप रहे हो।

महिषासुर को उसी से सावधान हो जाना चाहिए। महाराज महिषासुर किसी से नहीं डरते। मैं तुम्हें उनके सामने ले जाऊंगा। सोमनंद

चंड मुंड का संहार करो। शंखनाद का [संगीत] स्वर

धन की धमनिया हाथों में खड़क सदा दसों दिशाएं [संगीत] का उठी

चंडिका की शक्ति चंडिका की [संगीत] शक्ति महाराज जिस गणना से पूरा स्वर्ग कान उठा

था वो किसी योद्धा की नहीं एक विशाल सिंह की थी और उस सिंह के साथ एक देवी थी। असीसी अनुपम सुंदर स्त्री जैसी मैंने पहले कभी नहीं देखी। लेकिन महाराज [संगीत]

सेनापति विडाल ने उस देवी को ललकारा तो उसका सिंह विडाल पर टूट पड़ा और उसे मार डाला। चिकुर

आखिर विदाल को किसने मारा?

और वो सुंदरी जो भी है उसे कहो मैं उसे। जब महिषासुर ने सुना कि दुर्गा एक अद्वितीय सुंदर स्त्री है तो वो मोहित हो उठा। उसने उस स्त्री को बंदी [संगीत]

बनाकर लाने के लिए अपने सेनापति चिक्सुर को भेजा। सुंदरी महाराज महिषासुर की आज्ञा है। तुम्हें बंदी बनाकर उनके पास ले जाऊं क्योंकि तुमने उनके राक्षस दूत का वध किया

है। [हंसी] [हंसी] सुंदरी महिषासुर की रानी बनो और उसके साथ राज सुख भोगो।

[संगीत] सोमनाथ जी। [संगीत] लेकिन कुछ ही देर में जब महिषासुर के सामने उसके प्रिय सेनापति चिकशुर का कटा

हुआ मस्तक आया तो वह समझ गया यह कोई साधारण स्त्री नहीं है। इसे हल्के में लेना असुरों के लिए महंगा पड़ेगा। इसलिए

उसने अपनी पूरी [संगीत] सेना माता के पास भेज दी उन्हें बंदी बनाने के लिए। [संगीत] जा

रहा है प्रभु [चीखने की आवाज़] प्याराया [संगीत] [संगीत] [संगीत] पर जैसे ही माता ने धनुष उठाया युद्ध भूमि

का रंग ही बदल गया। उनका एक-एक बाण बिजली बनकर गिरा और जहांजहां लगा वहां असुरों की पूरी पंक्तियां धराशाई होती चली गई। जो

काम 33 कोटि देवता मिलकर ना कर सके वो माता अकेले कर रही थी। उनके सामने हर राक्षस हर बलशाली असुर बौना पड़ रहा था।

जो भी उनके निकट आने का साहस करता माता उसे पलक झपकते ही काल के गाल में भेज देती। उनकी हर गर्जना के साथ असुरों के कलेजे कांप उठते।

[संगीत] लाशों के ढेर लग रहे थे। रक्त की नदियां बह रही थी। फिर भी असुरों की सेना हार मानने वालों में से नहीं थी। महिषासुर की

दी हुई मायावी शक्तियों के अहंकार में अंधी वो सेना ना रुकी ना डरी। मौत को सामने खड़ा देखकर भी वो बढ़ती ही गई। एक

ही जुनून में एक ही पागलपन में माता को बंदी बनाने के। [चीखने की आवाज़]

माता ने जैसे ही अपनी एक दिव्य सांस छोड़ी उसी सांस से जन्म ले उठे उनके अपने योद्धा मायावी सैनिक जो शुरुआत में सिर्फ पांच छह

थे पर वो कोई साधारण सैनिक नहीं थे वो मायावी भी थे और जैसे ही रणभूमि में उतरे

छ से 60, 60 से 600 और देखते ही देखते 6 से 6000 हो गए। हर सास के साथ उनकी संख्या बढ़ती चली गई जैसे मौत खुद कई रूप धरकर

मैदान में उतर आई हो और इनमें से एक-एक सैनिक की तीव्रता ऐसी थी कि वो अकेला ही हजार असुर सैनिकों पर भारी पड़ रहा था। माता की शक्ति से जन्मे यह योद्धा जहां से

गुजरते वहां असुरों की पंक्तियां तिनके की तरह बिखर जाती। अब रणभूमि का पलड़ा घूम चुका था। और जब महिषासुर ने अपनी उस सेना को जिसे

वो अजय समझता था अपनी ही आंखों के सामने मिट्टी में मिलते देखा तो उसके होश उड़ गए। जिस शक्ति के घमंड में वो तीनों लोकों

को रौंदता आया था वो घमंड आज पहली बार थर्रा उठा। उसका अट्टाहास थम गया और उसके चेहरे पर पहली बार एक साया उतरा। डर का

साया। [संगीत] मेरी आ ही से अदि सेना एक स्त्री ने हरा दी। कौन हो तुम?

जिस शक्ति को तुमने कभी गिना ही नहीं। महिषासुर। [संगीत] इंद्र की साना भी मेरे सामने नहीं दिखती। [संगीत] तुम अकेली मेरा रास्ता रोकोगी।

महिषासुर तूने अत्याचार [संगीत] की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। अब तेरा अंत निश्चित है।

मेरा अंत तुझे पता भी हुए मैं असल में कौन हूं। मैं महषों का राजा हूं। महषासुर [संगीत] [संगीत]

स्त्री तुम मुझे मारोगे जय शिखर शिरोमण [संगीत] कुंड हिमालय श्री मधु मधुरे मन [संगीत]

जय जय हे महसुर मदिनी रमनी कदम प्रियवासिनी शिखर शिरोमण सुंदर हिमालय

निजालय मध्य मधु मधुरे मधु भगिनी रासते

जय जय हे महिषासुर मर्दिनी रम्य शैल सुनील [चीखने की आवाज़] मास

नंदनी [चीखने की आवाज़] मास मंजिनी जय जय जय महिमा जय [चीखने की आवाज़]

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