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Types of Camera Movement Every Cinephiles Need to Learn

By Stupid One

Summary

Topics Covered

  • Camera movement is a hidden language filmmakers use deliberately
  • Ozu's static frames force silent emotional observation
  • Handheld camera shifts from static to shaky when life destabilizes
  • Hitchcock's dolly zoom creates character realization moments
  • Camera roll signals psychological transformation and life upheaval

Full Transcript

एज अ फिल्म स्टूडेंट अगर मैं इस सीन को ब्रेक डाउन करूं तो मुझे अलग-अलग सिनेैटिक एलिमेंट्स दिखाई देते हैं। जैसे वाइट शॉट, कैमरा रोल, पुश इन, काऊब शॉट, ओवरहेड शॉट, एक्सट्रीम क्लोज अप ब्लड, पेडेस्ट्रियल

शॉट एंड लोइंग। अगर मैं इन्हीं आठ चीजों को अलग-अलग कैटेगरी में डिवाइड करूं। वाइट शॉट, कार्बो शॉट और एक्सट्रीम क्लोज अप जाएंगे शॉट साइज कैटेगरी में। ओवरहेड एंड लो एंगल जाएंगे कैमरा एंगल की कैटेगरी

में। और बाकी के जो बचते हैं कैमरा रोल, पुश इन पेडेस्टियल शॉट जाएंगे कैमरा मूवमेंट की कैटेगरी में। इन तीनों ही कैटेगरीज में से आज हम बात करेंगे टाइप्स ऑफ कैमरा मूवमेंट के बारे में। क्योंकि एक

फिल्म मेकर अपने कैमरे को सिर्फ रैंडमली मूव नहीं करता बल्कि उसमें भी एक लैंग्वेज छुपी हुई है। रियली द सेम ग्रामर एंड द ग्रामरिंग लेफ्ट

एंड राइटकिंग अप एंड डाउन कटिंग सर्टन वेल एलिमेंट्स इमोशनल साइकोलॉजिकल पॉइंट ऑडियंस।

कैमरा मूवमेंट में सबसे पहले आता है स्टैटिक शॉट। जब कोई मूवमेंट होती ही नहीं है बल्कि एक फिक्स्ड पोजीशन पर कैमरा रखा हुआ रहता है और इस सिचुएशन में ऑडियंस को

ऑब्जर्व करने का मौका दिया जाता है। जैसे प्रियदर्शन सर की फिल्म के इस कॉमेडी सीन में कैमरा अक्सर आपको स्टैटिक देखने को मिलता करने के लिए सेठ जी बात तो सुनिए शादी है

तो घर का काम तो करना है मतलब ताकि फोरग्राउंड बैकग्राउंड दोनों में हो रहे एक्शन को ऑडियंस एक्सप्लोर कर सके। एंड बात सिर्फ कॉमेडी की नहीं है बल्कि ऑडियंस को मौका दिया जाता है उन

कैरेक्टर्स के इमोशंस को फील करने का। दे दे गुड पिक्चर नो आई डोंट लाइक देम। ओय जिसका बेस्ट एग्जांपल है जैपनीज डायरेक्टर

यासुजू ओजू जिनकी फिल्म टोक्यो स्टोरी। इस फिल्म में पूरा नरेटिव हमें स्टैटिक शॉट में ही देखने को मिलता है। 1950 तक सभी मेजर कैमरा मूवमेंट इन्वेंट हो चुके थे।

फिर भी ओजू ने स्टैटिक फ्रेम चूज़ की ताकि ऑडियंस कैरेक्टर के इमोशन को साइलेंटली ऑब्जर्व कर सके। क्योंकि जब कोई मूवमेंट नहीं होती है तो आपको फ्रेम में उस मिज़ोन

सेन को देखने का मौका मिलता है। अब स्टैटिक शॉट ट्राईपॉड पर लॉक्ड हो जाता है। एंड साथ ही साथ हैंडल्ड में भी आप स्टैटिक शॉट बना सकते हैं। बट वहां पे आपको थोड़ा सा कैमरा शेक देखने को मिलता

है। अब स्टैटिक शॉट एंड हैंडल्ड दोनों का एग्जांपल आप विक्रम मोटवानी की फिल्म लुटेरा से समझो। जब पाखी की जिंदगी नॉर्मल एंड प्रोटेक्टिव होती है तो आपको कैमरा मूवमेंट स्टैटिक नजर आता है। बट जैसे ही

लुटेरा उसे लूट के चला जाता है उसके फादर की डेथ हो जाती है। उसके बाद में उसकी जिंदगी डिसबैलेंस हो जाती है। तो मूवमेंट भी हैंड हेल्ड पर शिफ्ट हो जाता है।

सेम यही ट्रिक उन्होंने ट्रैप्ड मूवी के अंदर भी यूज की। और तो और गोवा गॉन फिल्म में भी आपको स्टैटिक शॉट्स देखने को मिलते हैं तब तक

जब तक ज़ॉम्बी अटैक नहीं होते। ज़ॉम्बी अटैक होने के बाद में कैमरा मूवमेंट हैंड हेल्ड हो जाता है। इस टाइप से हर फिल्म मेकर अपनी कैमरा मूवमेंट को एक लैंग्वेज देता है जिसे वो बार-बार एज अ मोटिव यूज़ करता

है। सेकंड आता है पेन। जब कैमरा हेड हॉरिजॉन्टली लेफ्ट और राइट मूव करता है। पैनिंग शॉट का इस्तेमाल अक्सर चलते हुए

सब्जेक्ट को फ्रेम की बाउंड्री के अंदर रखने के लिए किया जाता है। समटाइम्स पेन का यूज़ कैरेक्टर्स पर्सपेक्टिव के लिए किया जाता है कि वो

क्या देख रहा है। पेन का एक सब डिवीजन भी है। विपन। जब आपको हाई एनर्जी सीन के अंदर क्रिएट करनी हो तो इसका यूज किया जाता है।

पैन में अगर मूवमेंट हॉरिजॉन्टली होता है तो टिल्ट में वो वर्टिकली देखने को मिलता है। अप डाउन ये एक्शन ऑडियंस की अटेंशन को एक जगह से

दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए यूज किया जाता है। समटाइम इन्हें स्टेयर्स के लिए, समटाइम बिल्डिंग को रिवील करने के लिए, एंड समटाइम टिल्ट एंड पेन दोनों ही

मूवमेंट एक ही शॉट में यूज किया जा सकता है। आ जाओ, सर। नेक्स्ट है डॉली शॉट। टेक्निकली डॉली तब कहा जाता है जब कैमरा विल या ट्रैक पर

माउंटेड हो। अगर कैमरा फिजिकली सब्जेक्ट के पास मूव करे। चाहे फिर वो स्लाइडर, गिंबल या हैंडल्ड से हो, तो उसे ब्रॉडली पुश इन कहा जाता है। पुश इन में कैमरा धीरे-धीरे सब्जेक्ट के पास जाता है। उससे

कि सीन में उस कैरेक्टर कीेंस बढ़ती है। बिकॉज़ फ्रेम में सिर्फ वही नजर आता है। एंड इसका यूज़ तब किया जाता है जब आपका

कैरेक्टर कुछ सोच रहा हो। अब पुश इन का अपोजिट होता है पुल अप। जब आपका कैमरा सब्जेक्ट से दूर जा रहा हो। इसका यूज़ सिचुएशन को रिवील करने के लिए

या फिर कैरेक्टर की पावर को दिखाने के लिए। लाइक आवेश में जिस बाथरूम में इतनी भीड़ थी अब उस बाथरूम में कोई भी नहीं खड़ा है उसके पीछे

एंड पुल आउट का यूज़ बार-बार किया गया है आवेश में टू शो हिज स्ट्रेंथ अभी तक हमने कैमरे को फिजिकली पास ले गए हैं और फिजिकली दूर भी लेकर गए हैं। बट अब

अगर आपका कैमरा एक ही जगह पर हो और लेंस की मदद से आप ज़ूम इन या ज़ूम आउट कर रहे हैं। ज़ूम इन का यूज़ मोस्टली किसी चीज को

एम्फेसाइज करने के लिए या फिर ऑडियंस का स्पेशली उस पर अटेंशन बनाने के लिए किया जाता है। वहीं एक सडन रूम भी देखने को मिलता है जिसे क्रैश ज़ूम भी कहा जाता है। और ये

आपको नॉर्मली फिल्म्स में देखने को नहीं मिलता है क्योंकि जब भी ये स्क्रीन पर होता है तो ऑडियंस को महसूस होता है कि यहां कुछ तो हुआ है।

द अटैक ऑन मिस्टर बलबीर सिंह। वहीं सत्यजीत रे सर ने इसे रिवर्स में कई साल पहले चारुलता फिल्म में यूज़ किया। यहां आप नोटिस करो कि कैरेक्टर के हाथ के

साथ में ज़ूम आउट हो रहा है। और जब आप अपने कैमरा मूवमेंट को कैरेक्टर मूवमेंट के साथ में कनेक्ट कर देते हो तो उस शॉट की खूबसूरती ऑटोमेटिकली बढ़ ही जाती है। बट

अगर आप पुश इन यानी कि डॉली और ज़ूम दोनों को एक साथ यूज़ करते हो तो वो आपको कुछ ऐसा देखने को मिलता है। इसे उस सिचुएशन पर यूज़ किया जाता है जब आपके कैरेक्टर को कुछ

रियलाइज होता है। एंड इसे क्रिएट करने के लिए आपको डॉली एंड लेंस दोनों एक साथ यूज करना होगा। और अगर आप डॉली आउट हो रही है तो ज़ूम इन होना चाहिए। एंड इसीलिए इसे

डॉली ज़ूम भी कहा जाता है। जिसका पाइनियर अल्फर्ट हिचकॉक को माना जाता है क्योंकि वर्टिगो फिल्म में वो वर्टिगो इफेक्ट क्रिएट करना चाहते हैं। इसीलिए कोई-कोई इसे वर्टिको इफेक्ट भी कहते हैं।

कैमरा रोल जब कैमरा सब्जेक्ट को फोकस में रखकर एंटीक्लॉकवाइज या क्लॉकवाइज रोटेट करता है। जिससे कि डिसओरिएंटिंग और अनसेटलिंग सिचुएशन फील होती है। और उस सीन

में ऑटोमेटिकली साइकोलॉजिकल टेंशन इनक्रीस हो जाती है। बट आप कैमरा रोटेशन को कैरेक्टर चेंज के साथ भी यूज कर सकते हो। जैसा वांगा ने कबीर सिंह में किया।

इंटरवल पॉइंट में ना कैरेक्टर के अंदर चेंज आने वाला है। अब वो अल्कोहलिक और ड्रग एडिक्टेड बनने वाला है। तो वहां आपको कैमरा रोटेट होते हुए दिखाई देता है। जो

बताता है कि अब उसकी जिंदगी अपसाइड डाउन होने वाली है। एंड सेम यही मोमेंट आपको कबीर सिंह के रिडमशन आर्क में भी देखने को मिलती है। जब

वो कोर्ट में अपनी गलती को एक्सेप्ट कर लेता है। सॉरी मम्मा। सॉरी करन। वो अपने घर चला जाता है और साथ ही साथ वो अपने आप को सुधारना शुरू कर देता है। एंड

ट्राई करता है अपनी पुरानी जिंदगी में वापस लौटने की। इन सबको दिखाने से पहले आपको दोबारा कैमरा रोटेट होते हुए दिखाई देता है। बट इस बार वो अपसाइड डाउन टू

स्ट्रेट होता है। ट्रैकिंग शॉट जब कैमरा सब्जेक्ट को फॉलो करता है। इससे हम कैरेक्टर की जर्नी देखने को मिलती है। स्पेस को एक्सप्लोर करते हैं।

या फिर हमें कैरेक्टर से एक पर्सनल कनेक्शन क्रिएट होता है। उसकी डेली रूटीन को देखकर। आद एंड सम टाइम आर ट्रैकिंग शॉट हाई मोमेंट

को बिल्ड करने का काम भी करते हैं कि कुछ स्क्रीन पर होने वाला है। अब अगर आप ट्रैकिंग शॉट शूट कर रहे हो तो ऑटोमेटिकली आपकी जो टाइम लेंथ है वो

इनक्रीस हो जाती है और उस टाइम लेंथ को काटने के लिए आता है जंप कट जो आप यूज़ कर सकते हो एडिटिंग वे बट अगर आप कैरेक्टर को लेफ्ट और राइट से

ट्रैक कर रहे हो तो वो ट्रैकिंग शॉट नहीं बल्कि ट्रक शॉट कहलाएगा। चाहे और हम आर्ट शॉट जिसे हम ही शॉट भी कह सकते हैं

क्योंकि यहां कैमरा कैरेक्टर के अराउंड घूमता है। हाथ जोड़ के हाथ जोड़ के या फिर लोक कनकराज की तरह वो आर्क शॉट का

यूज़ तब करते हैं जब सीन में एक ग्रुप या लोग कन्वर्सेशन कर रहे हो एंड इससे होता ये है कि रियल टाइम टेंशन आपको दिखाई देती मर्डर करना ये एक ही दिन हुआ और आपके द्वारा करन के घर से उठाए रॉ कुकन

सब्सटेंस इस टाइप के कैमरा मूवमेंट आपको सीन ओपनिंग में बहुत बार देखने को मिले जब कैमरा ऊपर से नीचे की तरफ आ रहा रहा हो। इसमें

लोकेशन और कैरेक्टर दोनों रिवील और मोस्ट ऑफ द टाइम इसे सीन ओपनिंग में यूज़ किया जाता है। और अगर आपको सीन को क्लोज करना है तो वही

कन आप ऊपर लेकर जाए। पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी। मैं डरपोक नहीं हूं प्रक।

हे बॉय। कुछ ऐसे सीन भी आते हैं जब आपका कैमरा वर्टिकली ऊपर और नीचे जाता है। जस्ट लाइक टिल्ट शॉट। पर टिल्ट में कैमरे

का हेड मूव कर रहा है। यहां पूरा कैमरा फिजिकली मूव करता है। ऊपर और नीचे जिसे पेडेस्टल शॉट कहा जाता है।

अब चारू लतावेश की खूबसूरती समझो कि चारू का अब इमोशनली ब्रेकडाउन होने वाला है उस लेटर को देखकर। तो रे साहब ने आपको पहले

स्लोली कैमरा ऊपर लेकर गए। एक नहीं रखो। खुलते सुविधा हो थोली।

सुनो तुम चा खाबे ना शरबत करे देबे

खाबे ना किु वर देखा शेरे ही एक ही जाो और एक ही भो पांच आईडिया मा की ना मोती

माज के बोलो ना इंग्लिश में दिए जा एंड उसके बाद मैं ज़ूम इन किया उस लेटर कीेंस को बढ़ाने के लिए

जल्दी जाओ ना स्नान करो। अब आता है लास्ट सेगमेंट जहां हम ऑलमोस्ट सभी कैमरा मूवमेंट को एक सीन के जरिए समझते हैं।

शुरुआत स्टैटिक शॉट से होती है। देन हमें रैप फोकस देखने को मिलता है। यानी एक सब्जेक्ट से दूसरे सब्जेक्ट पर फोकस शिफ्ट होता है।

नाउ कैरेक्टर के लिए डू और डाई सिचुएशन तब आता है डॉली पापा पापा कैमरा रुक बिकॉज़ इस मोमेंट के बाद हमारे

कैरेक्टर की सिचुएशन पहले की तरह नॉर्मल नहीं होगी बल्कि अप सेट डाउन। तो ये थे कुछ कैमरा मोमेंट जो हर फिल्म मेकर अपनी फिल्म के अंदर यूज करते हैं और

एस्पायरिंग फिल्म मेकर को इन्हें लिख लेना चाहिए क्योंकि मैंने भी लिख कर ही याद किए हैं। साथ ही साथ कैमरा शॉट एंड कैमरा एंगल्स भी आते हैं जिनके ऊपर हम फ्यूचर में बात करेंगे इस वीडियो की परफॉर्मेंस

के ऊपर। तो मैं चाहूंगा कि आप चैनल पर नए हो तो सब्सक्राइब करो, लाइक करो, कमेंट करो एंड इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करो। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में।

आई थिंक वीर पीपल हाउ टू दिस पावरफुल टूल वी स्टंग

ओनली फॉर गुड फॉर गुड बट्स फॉर ब

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