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Upanishad Ganga | Ep 28 | अनात्म & Vat Savitri Vrat Katha | Satyavan–Savitri #Spiritual #Mahabharat

By ChinmayaChannel

Summary

Topics Covered

  • Senses Enslave Animals Destroying Them
  • Abhimanyu Won True Victory Dying for Dharma
  • Humans Control Senses with Unique Discernment
  • Savitri Proves Body's Mortality Irrelevant
  • Choose Balanced Mind Over Fleeting Life

Full Transcript

झाल अजय को [संगीत] कर दो हाउ

[संगीत] टू डू इन [संगीत]

थे नाइंथ पैदल 5 तेरा नशा पिता को सही है कर दो

प्ले लिस्ट हिखोज डिशनरी एप [संगीत] कि अ

[संगीत] हुआ है कि

देओल दिव्या प्राणों हम आगे यह सर्वे विकार आप श्याम

शुभ गया जो मां निभाता था नैतिक एवं जब विश्वम तरफ व्यक्तित्व पर यंग तमिल ईलम कहां हुआ था

अजय को कि शरीर इंद्रियां ब्रांच मन और अहंकार आदि और उनके सभी तरह के परिवर्तन

इंद्रिय-विषय और उनके सब सुख दुख आदि सब अव्यक्त पर्यंत उस संसार को अनात्मा कहते

हैं केवल कृष्ण ढूंढ [संगीत] झाल कि लोहा गए

नाटक ग्राम से आचार्य भरत मुनि के शिष्य युद्ध की सूचना प्राप्त करने के लिए आओ तुम भी आ जाओ आज ही परिणाम क्या हुआ

परिणाम सरोकार नहीं है तो फिर क्यों पारिश्रमिक मिलता है तुम किस से बात कर रहे हो यहां पर वरना आने वाली पीढ़ी रोएंगे इतिहास के

अध्याय है है और जो परिणाम शुभ इन लड़ते हैं क्या उनका प्राण गवां सार्थक होगा आप करना भाई हम से भूल हुई जो तुम्हें पुकारा अब जहां

से हमारे रंग में भंग ना डालो और फिर जिसने जुआ खेला नहीं वह क्या जाने जीवन का सुख चाहो तो तुम भी उठा सकते हैं सूखे

कि क्या इंद्रियों का सूखी सबसे बड़ा शुरू होता है तो एक उनको बेकार है तुमसे ना [संगीत] जिन्होंने कभी सुख का आनंद का साक्षात्कार

में किया है वैसा ही कहते हैं तो सही कहा कि वे चूड़ामणि में शंकराचार्य समय पंक्चर प्रपंच पंक्चर तुम आबू स्वर्ग

गुणवत्ता पूर्ण मातंग मातंग मीनिंग आह न पंच फ्रेंच दक्षिण फ्रंट हाथी पतंगा मछली और धमर इंद्रियों का दास होने की वजह से

नष्ट हो जाते हैं तो सोचो मनुष्यों का क्या हाल होगा यदि वह अपनी पांचों इंद्रियों का दास होता कि नहीं समझे तो आधुनिकता ने अपने सभी रचनाओं में मात्र

मनुष्यों को ही तक बुद्धि और विद्या प्रदान किया है है कि नहीं कि मनुष्य भी पशुओं की तरह अपनी एक इंद्रियों का दास अथवा गुलाम हो जाए

कि अ पशुओं और मनुष्यों में भेजी क्या रह जायेगा मुख्य भोजन करता है को बढ़ाने कुरुक्षेत्र में आज के युद्ध

क्या परिणाम हुआ तो अपने अभिमन्यु रणभूमि की ओर गया था कि अभिमन्यु अर्जुन और कृष्ण को आज के युद्ध के परिणाम

की सूचना मिली शांत भाव से पांडव-शिविर की ओर से [संगीत] की ताकत

कि क्या बत कि आप यूं सर झुका के बैठ हैं बिल्कुल भैया भी कहते हैं

कर दो फोन कहां है सुबह चारों तरफ बनी है मैं अर्जुन अभिमन्यु

में वीरगति को प्राप्त हुआ था [संगीत] कर दो

[संगीत] फोन को कॉल टू किसी भी अपना ग्रास बना लिया

कुछ बहुत ही रखी निरंतर तु देखते पर भी तृप्ति नहीं होती थी थी और फिर भी अ कांत

कि पूर्व तुम्हें कुछ ईट अपने साथ ले ही गया है कि ऐश्वर्या पुत्र मैं

ऑफिस को भिगोकर सुबह नींद से जाग उठा था तब तक के लिए योग्य है और अर्जुन कि यह खूनी में वीरगति को प्राप्त होने

वाला यह था वीर स्वर्ग को प्राप्त करता है अभिमन्यु ने वही किया जो क्षत्रिय का धर्म था कि युद्ध में भाग लेने वालों की यही नियति

होती है इसलिए वीरों के स्वर्गारोहण पर शो ख्याल है कि पुण्य आत्माओं के देहावसान पर शोक व्यर्थ

झाल अरे यह क्या था श्रीकृष्ण है कि पुण्यात्मा देहावसान

आत्मा और पेट यानी कि दूसरे को कैसे सुधीर व ए स्पेसिफिक उतरा को

चिपके करने भी व्यक्ति पुत्र आकार ले रहा है है हाउ टो सेंड करूंगा मित्रों पी की कटऑफ में

हेलो व्युअर्स चौक होते हुए हैं कि अभिमन्नु कैसे तरह से यह हो गया समझाऊंगा अपनी बहन सुभद्रा को और विराट की

पुत्री उत्तरा को मैं समझूंगा द्रुपद सुता तो आप इतनी को है [संगीत] मैं सुरक्षित बत्रा

कृष्ण के समान दूसरा कोई व्रत पर हैं कि यदि वह मिट्टी में तरह रक्त परफॉर्म के दलदल में मृत पड़ा रहा और

तीर्व है यह अभिमन्यु है ऑफिस जाने मृत्यु तो शरीर की पुण्यतिथि और भाई कैसे हो सकते हो कृष्ण वगैरह जिसका

जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है संसार में जन्म लेने वाली हर फूल वस्तुओं को हर स्कूल शरीर को एक दिन मरना ही पड़ता है

सुधर यह निश्चित है और जो अमर है वहीं मूत है जिस धर्म के लिए अभिमन्यु मरा वह धर्म हमर है उसकी वीरता अमर है जिस चेहरे से

अभिमन्यु ने चक्रव्यूह खेड़कर शत्रुओं का विनाश किया वह शौर्य अमर है उसने विपक्षियों को पीठ नहीं दिखाई वह क्षत्रिय धर्म अमर

सुभद्रा जिसने अपने जीवन का उद्देश्य पूरा किया उसकी मृत्यु का शोक कैसा है अ कृष्ण

जी का जन्म लेकर मरना ही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है धर्म के लिए जीना और धर्म के लिए मरना यही मनुष्य जीवन का उद्देश्य है घ्र आप क्या कह कृष्ण

है प्रॉपरली कि अभिमन्यु को शरीर का मोह नहीं था इसलिए उसने धर्म का मार्ग चुना और मृत्यु का वरण

किया हम सभी को एक शरीर मिलता है उसमें पांचों इंद्रियां समान होती जिसके द्वारा हम सभी कुल संसार का अनुभव करते हैं

पशु-पक्षियों के पास में यही शर्त यही इंद्रियां होती है किंतु मनुष्य के पास एक विशेष तरह का विवेक होता है जिसके द्वारा

वह उचित-अनुचित सत्य सत्य धर्म धर्म का भेद करता है विवेक द्वारा ही मनुष्य अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करता है ताकि उसके उद्देश्य में

कोई व्यवधान उत्पन्न हो और जो मनुष्य विवेकहीन हो इंद्रियों के दास होते हैं वह पशु पक्षियों के समान होते हैं वह संसार

के साथ-साथ अपना नाश भी करते हैं वे ही धर्म का नाश भी करते हैं इस प्रश्न को आपने हिरण का शिकार तो देखा होगा ना ना

कि कैसे शिकारी अपनी सुरीली और मनमोहक आवाज से हिरण को अपनी ओर आकर्षित करता है को विवेकहीन और इंद्रियों का दास होने के कारण बहुत शिकारी के जाल में फंस जाता है

यह पतंग को ढील वह आग की लपट देख उन्मत्त होकर उसकी ओर आकर्षित होता है और अपने प्राण गंवा बैठता है सुथरा

मैं अभी बनी वो दास का दास नहीं था इलेक्ट्रोनिक हर आखिर उसका देहांत हुआ है किंतु उसने विजय प्राप्त की है इस नश्वर

संसार में जहां एक दिन हर किसी को मरना है वह विजई वहीं कहलाएगा जो धर्म के पथ पर चलते हुए मराठी अभंग उम्र की विजय है और

जीवित हैं किंतु उन्होंने अधर्म का मार्ग चुना है इसलिए पराजित फिर भी कि यह मैं नहीं सभ्यता का इतिहास कह रहा हूं

बताइए मात्र में एक गर्भवती बुधवार को कि आप कहीं दर्शन ध्यान दें इस digipay का यह दो

शो मोर संयुक्त राष्ट्र तुम्हारे घर में जो पड़ रहा है उसे वहीं संस्कार देना जिसके लिए तुम्हारे पति ने प्राण दिए

जब तक तुम पाओगे कि तुम्हारा पति यहीं कहीं आसपास है वह कहीं नहीं गया है तुम्हें छोड़ दिए हैं कि

कितनी प्रासंगिक है कृष्ण की बात वैदिक साहित्य में मनुष्य के अस्तित्व को आत्म और अनात्म में बांटकर समझा गया है

हैं अभिषेक ने स्कूल शरीर के संबंध में जो बात कही वह अनात्मा के अंतर्गत ही आती है पूर्व काल में सावित्री ने यमराज से इसी विषय पर बहस की थी

कि प्लुटो कि क्या कहा सावित्री कौन थी लो अब यह भी बताना पड़ेगा

तो चलो मैं बता देता हूं एक तथा मद्र देश और मद्र देश के राजा थे राष्ट्रपति और उनकी बेटी सावित्री और अश्वपति ने सावित्री

कि एक दिन राष्ट्रपति मार्जिन आरा के साथ बैठे भगवत चर्चा कर रहे थे कि सावित्री आकर उसने बताया कि उसने अपने लिए एक योग्य

वर चुन लिया है समझ सकता हूं कि वह है को मैं सत्य विल सॉल्व देश के भूतपूर्व राजा द्युमत्सेन का बेटा

था जीवन से नेत्रहीन हैं कि देव वर्षीय राजा चमर सेन अंधे हो गए थे उस समय सत्यवान गर्ग एक अबोध बालक था

पड़ोस के एक राजा ने उनके अंधापन और सत्यवान के बचपन का लाभ उठा उनकी सत्ता हथिया ली उसके बाद जोनाथन के पूरे परिवार को वन में रहने के लिए विवश होना पड़ा कि

सावित्री का यह निर्णय है अच्छा ठीक है दिवसीय सत्यवान * है राजन किंतु उसकी आयु हेल्प उसके जीवन में मात्र

एक वर्ष ही शेष है सत्य है राशि कि यदि यह सकते हैं तो यह भी सत्य है

कि मैं अपना निर्णय नहीं करूंगी अब हट मत खाओ तुम और गुणवान और सुंदर पर मिल जाएंगे तो मैं तुम्हारा स्वयंवर रचा हाथों

को कि मैंने ऐड कर लिया है पिताजी सावित्री अपने निर्णय पर अडिग थी फिर क्या था राजा अश्वपति को सत्यवान के साथ उसका

विवाह करना पड़ा सावित्री सत्यवान और अपने सास-ससुर के साथ वन में रहने लगी और 1 वर्ष के बाद वह दिन आ ही गया नियति में इसका दिन निश्चित कर

रखा था कि हम राधे आए और सत्यवान के प्राण लेकर चल पड़े कि मेरा पीछा छोड़ दे सारी फ्री तू बेकार में ही मुझे रोकने की कोशिश कर

रही है तेरे रोकने से यही नहीं बदल जाएगी रघु में का पीछा नहीं कर रही हूं मैं तो सिर्फ अपना धर्म में बाहर हूं तो जहां जाकर अपने पति की बीएसपी का अर्थ आप जिस की

अंत्येष्टि करने को कह रहे हैं वह स्कूल शरीर मात्रा है मैं उसको शरीर का क्या करूं जो पूर्णावस्था से लेकर मृत्यु तक निरंतर बदलता रहता है पांच तत्वों से भरे

हुए शरीर को पार्षदों ने बिखर जाना है जरा मेरे पति को तो आप लेकर जा रहे हैं और पत्नी पति के पीछे चलने वाले होते इसलिए

मैं आपके पीछे चल रहे हैं जहां मेरे पति जो कि मैं भी पीछे पीछे जाऊंगी और ऐसा करने से मुझे कोई रोक नहीं पाएगा तो एक बड़ी घटी है तू चल अपने पति के जीवन के

अलावा एक वरदान मांग और मेरा पीछा छोड़ मेरे ससुर अंधे हैं उन्हें फिर से दृष्टि मिल रहा है तथास्तु पैरों को

मैं अभी-अभी तूने स्थूल शरीर की नश्वरता की बात कही तो क्या नेतृत्व फूल नहीं है आपने बिल्कुल ठीक कहा दृष्टि तो हर मनुष्य

में होती है और नेत्रहीन होने के बाद हम दृष्टि ही नहीं होते यानि हमारी ज्ञानेंद्री साथ सूक्ष्म शरीर के रूप में हमेशा सक्रिय रहते हैं किंतु नेतृत्व

दृष्टि का एक माध्यम है जिसके द्वारा हम भाग्य ज्ञान संसार को देख पाते हैं इसीलिए सुलभ माध्यम नेत्र के महत्व से हम इनकार

नहीं कर सकते सर घर पर बातें करती हो तुम ठीक है तुम्हारे ससुर को नेत्र प्राप्त हो जाएंगे अब हाथ अपने पति को छोड़कर जा ही

नहीं सकती जहां मेरे पति होंगे मैं भी वहीं होंगी इसके अलावा मेरे और बात सुन लीजिए आगे वालों को ही आपके दर्शन होते हैं और सुना है देवता के दर्शन साधु संत

समागम कभी निष्फल नहीं जाते आपके प्रश्न ही नहीं है बल्कि उससे आपने मेरे ज्ञान को प्रोत्साहित किया है मैं

आपके पीछे कैसे Now ठीक है ठीक है और वर मांग लो सत्यवान का जीवन मत मानना है कि मेरे ससुर का राज्यों से छिन गया है सबसे मैं वन में रह रहे हैं

उन्हें उनका राज्य वापस मिल जाए तो कि पाते तो तू बहुत लंबी लंबी करती है और जब मांगने की बारी आती है तो सांसारिक

वस्तु यही मानती है तो यार क्या करती है देश को धर्म के अनुरूप चलाने के लिए राज्य की शक्ति अनिवार्य है और यह लोग कल्याण ही साधारण है ठीक वैसे जैसे हमारे शरीर की

ज्ञानेंद्रियां पांच कर्मेंद्रियां प्राण वनस पर बुद्धि हमारे अनुभवों तथा ज्ञान का माध्यम है छुटकारा डुबो उम्र वापस मिल रहा है

अब तो वापस लौट सके प्रभु प्रभु प्रभु सनातन धर्म के जो मनुष्य का धर्म क्यों सफर तय करे टोह

तत्पुरुष अपने पास आए हुए शत्रुओं पर भी दया करते बहुत चालाक है तू अपनी बातों में मुझे फंसाने की कोशिश कर रही है

अंकिता तेरा लक्ष्य क्या है मेरे पिता राजा अश्वपति को कोई पुत्र नहीं है तो [संगीत] है तो क्या है के पुत्र और पुत्री में कोई

वैध है क्या मैं अपने बूढ़े सास-ससुर को छोड़कर कैसे जाओ आपने तो सत्यवान के प्राण लेकर उनसे उनके बुढ़ापे की लाठी दालचीनी यदि मैं अपने पिता की सेवा करने के लिए

उनके पास जाती हूं तो मेरे बूढ़े सास-ससुर को कौन संभालेगा है अच्छा ठीक है तेरे पिता को अवश्य पुत्र की

प्राप्ति होगी अच्छा एक बात बताओ जब तो अपने पिता की इकलौती संतान थी तब तो तुझे 11 राजकुमार

मिल जाते हैं फिर तूने सत्यवान को ही क्यों चुना जबकि वह मात्र एक और वर्ष जीवित रहने वाला था यह सब मेरी पहली बार सत्यवान को देखा तब

वह एक वृक्ष के साए में ध्यान में नहीं था उसके चेहरे के तेज ने मेरी दृष्टि रूप ले जब मैंने पता किया तो पता चला कि यह युवक

अपने माता-पिता के संग वन में शांतिपूर्वक रहता है नवाद न प्रतिवात और आज जब हर एक मनुष्य अनिश्चित तरह के भय

में जी रहा है और भौतिक वस्तुओं की वासना उसकी प्रवृत्ति बन गए हैं ऐसे में यदि कोई अपने माता-पिता की सेवा करके आनंद में जिंदगी व्यतीत करता है तो निश्चय ही उसके

शरीर में एक महान आत्मा का वास होगा पुत्र राजकुमार तो बहुत मिल जाते हैं किंतु आनंद और आत्मिक सुख का संसर्ग नहीं

मिल पाता बने सत्यवान अल्पायु था किंतु वह अत्यंत असंतुलित अंतकरण का स्वामी था और उपकरण और थॉमस तुष्य अंतकरण अर्थात मस्तिष्क नहीं

वस्तुऐं शरीर का एक अंग है और अंतकरण सूक्ष्मशरीर का एक सूक्ष्मा इसलिए मना बुद्धि चित्त और अहंकार के समुचित रूप को

ही अंतकरण कहते हैं अभी समझा में अंतकरण ज्ञानेंद्रियों द्वारा संसार को अनुभव करके कर्मेंद्रियों को करने का निर्देश देता है

कि यदि अनुमति हो तो एक बात और पूछना चाहता हूं पूछो क्या स्थूल और सूक्ष्म शरीर के कारण किसी तीसरे शरीर की उत्पत्ति होती है

किसी तीर्थ से शरीर की उत्पत्ति नहीं होती बल्कि सूक्ष्म और स्थूल शरीर के कारण हमारे इसी शरीर पर जो प्रभाव दिखता है उसे

कारण शरीर कहते हैं यही है हमारा तीसरा शरीर जा थोड़ा विस्तार से बताऊंगी हम जो खुद ही देखते हैं सोचते हैं विचार और करते

हैं फलस्वरूप उसकी स्वच्छता अभिव्यक्ति कारण शरीर के रहता है यानी थल और सूक्ष्मशरीर उसी का कारण है स्वभाव या आत्मा के वास्तविक स्वभाव से अनभिज्ञ और

भिन्नता के विवेक से सलवार मुक्त होता है कारण इसे गहरी नींद की अवस्था में भी अनुभव किया जाता है जागृत और स्वप्नावस्था

से अज्ञानता के कारण इसे आनंद में कुछ भी कहा जाता है कहां खो गए देव है वाह उत्तम अति उत्तम तेरे माता-पिता ने तुझे बड़ी अच्छी शिक्षा

दी है मैं तेरे ज्ञान से अत्यंत प्रभावित हुआ हूं चल मांग एक और अंतिम वरदान मांग ले सत्यवान के जीवन के अतिरिक्त इसके बाद किंतु वचन दे कि तू यहां से वापस लौट

जाएगी टेंशन लेती है यदि आप मुझसे इतनी प्रभावित हुए तो मेरे ससुर जी बस स्टैंड की कुल को आगे बढ़ाने के लिए मुझे और पुत्रों का

वरदान दीजिए हां-हां [संगीत] तथास्तु दो हुआ है कर दो

हुआ था कि अब तू मेरे पीछे चली आ रही है भगवन आपने मुझे पुत्रवती होने का वरदान दिया है सुबह मेरे पति को लेकर कहां जा रहे हैं आप मेरे पति के स्कूल जरूर के

बिना तो समझ गया अब समझ गया मैं तेरी चला कि तेरी वाक्पटुता क्षेत्रों में पहले से ही सतर्क था

तो फिर तूने मुझे चक्कर में डाली दिया है आ जा मैंने तेरे पति को जीवनदान दिया

मैं किस प्रकार आप का धन्यवाद करूंगा जब तेरा पति वन में से की प्रतीक्षा कर लूंगी अच्छी तरह हम हरी रे

सुहाना बसते खुश व्यवस्थितम् महानतम विभाग अथवा न

अथवा ढेरों अशोक स्थिति कि शरीरों के बीच अ शरीर रूप में अस्थाई के बीच स्थाई रूप में महान है और

सर्वव्यापी आत्मा का ध्यान करते हुए यानि लोग दुखी नहीं होते हैं हुआ है कि क्या है वह जिसे वैदिक दर्शन आत्मा

कहता है कि यह दिखाई देने वाला संसार और शरीर ही आत्मा है देखिए अगले प्रकरण में तमिल संत कवि अरुण गिरी ना करके जीवन के रोमांचक क्षण चित्रों से आत्मा का परिचय

यह सिर्फ मनुष्य मुद्दे को हमेशा से समय आ था

एक पैन उस तस्वीर वह अ [संगीत] और सुनाओ [संगीत]

अजय को कि [संगीत] मीडिया मे है

[संगीत] [प्रशंसा] तेरे को हुआ था शो मोर

[प्रशंसा] कर दो 13 ठीक है

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